WWW.ACNTIMES.COM & : उज्जैन https://acntimes.com/rss/category/Ujjain WWW.ACNTIMES.COM & : उज्जैन en Copyright @ ACNTIMES.COM | All Rights Reserved | Webmaster : HARSH SHUKLA युवा उत्सव कला और संस्कृति से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम, कला&संस्कृति कर्म व शिक्षा में प्रगति के लिए आगे आएं युवा& प्रो. पांडेय https://acntimes.com/Youth-festival-is-an-important-medium-to-introduce-art-and-culture https://acntimes.com/Youth-festival-is-an-important-medium-to-introduce-art-and-culture विक्रम विश्वविद्यालय में दो दिवसीय युवा उत्सव के शुभारंभ अवसर पर कुलपति ने कहा

एसीएन टाइम्स @ उज्जैन । शिक्षा और संस्कृति से युवाओं को परिचित कराने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। युवा उत्सव हमारी समृद्ध संस्कृति से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। इस प्रकार के उत्सव संस्कृति और शिक्षा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित करने के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं। भारत की अधिसंख्य आबादी युवाओं की है। ऐसे में युवाओं को सही दिशा में तत्पर करना आवश्यक है। कला और संस्कृति जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। युवजन कला, संस्कृति कर्म और शिक्षा में प्रगति करने के लिए आगे आएं।

ये उद्गार विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय ने व्यक्त किए। वे विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित विश्वविद्यालयीन युवा उत्सव के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह एवं विशिष्ट अतिथि कार्यपरिषद सदस्य विनोद यादव, एडवोकेट ममता बैंडवाल, संजय नाहर, कुलसचिव डॉ. प्रशांत पुराणिक एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा थे।

मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य कुशवाह ने कहा कि युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए युवा उत्सव  की विशेष भूमिका होती है। युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षिक परिसर में निरंतर प्रयास होने चाहिए। युवा ही देश के लिए परिवर्तनकारी होते हैं। कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को समुचित अवसर मिलता है। 

युवा अपने जीवन में ऊंचे लक्ष्य बनाएं, सफलता मिलेगी- डॉ. पुराणिक

कुलसचिव डॉ. प्रशांत पुराणिक ने कहा कि युवा अपने जीवन में ऊँचे लक्ष्य बनाएं, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। कोरोना संकट से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण युवा गतिविधियों के समक्ष अनेक चुनौतियां रही हैं। युवा अपनी कला साधना के माध्यम से नई ऊंचाई प्राप्त करने के लिए आगे आएं।

कुलपति पांडेय का जन्मदिन पर किया सारस्वत सम्मान

कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय का जन्म दिवस पर शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ अर्पित कर सारस्वत सम्मान अतिथियों द्वारा किया गया।

इस अवसर पर प्राणिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी अध्ययनशाला के विद्यार्थियों द्वारा 'अर्न बाय लर्न' योजना के अंतर्गत तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद सैनिटाइजर, मास्क, क्रीम आदि कुलपति प्रो. पांडेय द्वारा लोकार्पित किए गए। 

प्रारंभ में आयोजन की रूपरेखा एवं स्वागत भाषण आयोजन समिति के मुख्य समन्वयक प्रो. एच. पी. सिंह ने दिया। मध्यप्रदेश शासन द्वारा दुर्लभ संगीत वाद्य के क्षेत्र में योगदान के लिए शिखर सम्मान से अलंकृत प्राध्यापिका डॉ. वर्षा अग्रवाल का सम्मान अतिथियों ने किया।

350 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं युवा उत्सव में

अतिथि स्वागत युवा उत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. एच. पी. सिंह, डीएसडब्ल्यू डॉ. एस. के. मिश्रा, विभिन्न समितियों के संयोजक, परिक्षेत्र जिलों से आए विद्यार्थियों और दल प्रबन्धकों ने किया। आयोजन में विक्रम परिक्षेत्र के लगभग 350 प्रतिभागी भाग लेने के लिए आए हैं। संचालन डॉ. निवेदिता वर्मा ने किया। आभार विद्यार्थी कल्याण संकाय अध्यक्ष डॉ. एस के मिश्रा ने माना।

उद्घाटन समारोह के बाद मंचीय विधाओं, साहित्यिक और रूपांकन विधाओं की स्पर्धाओं में युवाओं ने अपने कौशल और प्रतिभा का परिचय दिया।

विक्रम विश्वविद्यालय के अंतरजिला युवा उत्सव का समापन एवं पुरस्कार वितरण 13 जनवरी को

युवा उत्सव का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह दिनांक 13 जनवरी को दोपहर 3:30 बजे स्वर्ण जयंती सभागार में होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफ़ेसर अखिलेश कुमार पांडेय करेंगे। युवा उत्सव के दौरान कोविड-19 से बचाव के सम्बंध में जारी दिशा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

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Wed, 12 Jan 2022 19:49:03 +0530 Niraj Kumar Shukla
राष्ट्रीय संगोष्ठी : भारतीय साहित्य और दर्शन की परंपरा के अद्वितीय संवाहक थे आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी& प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय https://acntimes.com/Acharya-Ramamurthy-Tripathi-Jayanti-Celebrations-and-National-Seminar-Concluded https://acntimes.com/Acharya-Ramamurthy-Tripathi-Jayanti-Celebrations-and-National-Seminar-Concluded आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी जयन्ती समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न 

एसीएन टाइम्स @ उज्जैन । आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी भारतीय साहित्य एवं दर्शन की परंपरा के संवाहक थे। भारतीय परंपरा में गुरु, माता और पिता की भक्ति को महत्व मिला है। अनेक साहित्यकारों और शोधार्थियों के व्यक्तित्व के निर्माण में आचार्य त्रिपाठी जैसे गुरुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आचार्य त्रिपाठी का स्मरण करना गुरु शिष्य परंपरा को महत्व देना है। 

यह बात विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय ने कही। वे प्रख्यात मनीषी और समालोचक आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी की 93वीं जयंती समारोह के तहत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के वाग्देवी भवन स्थित हिंदी अध्ययनशाला सभागार में किया गया। अध्यक्षता पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो हरिमोहन बुधौलिया ने की। अन्य वक्ताओं में समालोचक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा, प्रो. गीता नायक, डॉ. जगदीशचंद्र शर्मा, डॉ. विभा दुबे (मिर्जापुर, उप्र) एवं डॉ. विवेक चौरसिया थे। वक्ताओं ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से आचार्य त्रिपाठी जी के जीवन, लेखन और आलोचना के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला।

विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के वाग्देवी भवन स्थित हिंदी अध्ययनशाला सभागार में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी प्रख्यात मनीषी और समालोचक आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी की 93वीं जयंती समारोह के तहत आयोजित हुई। इसमें त्रिपाठी के आलोचना कर्म के विविध आयामों पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय रहे। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया को आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी सम्मान से अलंकृत किया गया।

2028 से आचार्य त्रिपाठी के जन्म शताब्दी वर्ष का आयोजन होगा- प्रो. शैलेंद्र शर्मा

कला संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आचार्य त्रिपाठी ने भारतीय रस और ध्वनि सिद्धान्तों की अभिनव व्याख्या की। उनकी आलोचना पद्धति भारतीय चिंतन धारा की सुदृढ़ आधार भूमि पर खड़ी हुई है। वे मानते थे कि आलोचक संवेदनागत सौन्दर्य के जितना नजदीक होगा, आलोचना के मूल मर्म के साथ न्याय कर पाएगा। उनकी दृष्टि में आलोचना, कृति के माध्यम से साक्षात्कृत मूल संवेदना का सर्जनात्मक पुनराख्यान है। आचार्य त्रिपाठी की दृष्टि में तंत्र एक ऐसी युक्ति का नाम है जिसके माध्यम से हम अपनी अपरिमेय संभावनाओं से युक्त शक्ति को स्वायत्त कर सकते हैं, जो अज्ञान के कारण प्रसुप्त पड़ी हुई है। सन 2028 से आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी के जन्म शताब्दी वर्ष को बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।

आचार्य राचंद्र शुक्ल की सूत्रात्मक थी आचार्य त्रिपाठी की कार्यशैली- प्रो. नायक

प्रो. गीता नायक ने कहा कि आचार्य त्रिपाठी का व्यक्तित्व अत्यंत सहज और सरल था। वे भारतीय काव्यशास्त्र के धुरीण  विद्वान थे। उनकी शैली आचार्य रामचंद्र शुक्ल की तरह सूत्रात्मक थी। उनकी मान्यता थी कि काव्य के प्रतिमान परिवर्तनशील है। इसलिए काव्य का लक्षण मानवीय अनुभूतियों के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने काव्य के हेतुओं पर व्यापक प्रकाश डाला, जो आज भी प्रासंगिक है।

दृष्टिवादी किंतु अधिकार भक्ति साहित्य पर असाधारण अधिकार था- डॉ. शर्मा

डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा ने कहा कि आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी ने भारतीय काव्यशास्त्र के प्रतिमानों को लेकर महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने सभी काव्य धाराओं की समीक्षा उन प्रतिमानों के आधार पर की। भक्ति साहित्य पर उनका असाधारण अधिकार था। उन्होंने अल्प चर्चित काव्यधारा और कवियों की चर्चा करते हुए उनके महत्व का प्रतिपादन किया। उनकी दृष्टि आस्थावादी थी। नई आलोचना और रचनाओं की सम्यक् पड़ताल भी उन्होंने की।

अविस्मरणीय रहेगा भारतीय काव्यशास्त्र में योगदान- डॉ. चौरसिया

सारस्वत अतिथि डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी ने हिंदी साहित्य के इतिहास का पुनर्लेखन किया था। भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति उनमें गहरी निष्ठा थी। भारतीय काव्यशास्त्र एवं चिंतन के महत्वपूर्ण विद्वान के रूप में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। डॉ. विवेक चौरसिया ने आचार्य त्रिपाठी पुस्तक गुरु महिमा पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस पर गुरु की कृपा हो जाती है उसे देवत्व मिल सकता है। 

विद्यार्थियों में ऊर्ध्वगामी संभावनाओं कोचरितार्थ करने पर दिया बल

अध्यक्षीय उद्बोधन डॉक्टर हरिमोहन बुधौलिया ने दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य त्रिपाठी ने विद्यार्थियों में ऊर्ध्वगामी संभावनाओं को चरितार्थ करने पर बल दिया। उनमें गहरी साहित्यिक एवं आध्यात्मिक मेघा थी। डॉ. विभा दुबे ने आचार्य त्रिपाठी से जुड़े संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आचार्य त्रिपाठी पुरातनता के साथ प्रगतिशीलता के पोषक थे। वे परिवारजनों के बीच गुरु के रूप में थे। उनकी शिक्षा आज भी हम लोगों के लिए पाथेय बनी हुई है। 

डॉ. चौरसिया का किया स्वागत, सम्मान निधि भी भेंट की

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया को अतिथियों द्वारा शॉल, श्रीफल एवं सम्मान राशि अर्पित कर उन्हें आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी सम्मान से अलंकृत किया गया। इस दौरान अमिताभ त्रिपाठी, पद्मनाभ त्रिपाठी आदि सहित अनेक साहित्यकार, विभिन्न प्रान्तों के शोधकर्ता एवं आचार्य त्रिपाठी के परिवारजन उपस्थित थे। संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा ने किया। 

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Wed, 05 Jan 2022 01:34:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
शिक्षकों ने अमरकंटक से उज्जैन तक मनोकामना यात्रा निकाल कर पुरानी पेंशन लागू करने के लिए बुलंद की आवाज, भाजपा सांसद ने भी किया समर्थन https://acntimes.com/Manokamna-Yatra-taken-out-from-Amarkant-to-Ujjain-to-implement-old-pension https://acntimes.com/Manokamna-Yatra-taken-out-from-Amarkant-to-Ujjain-to-implement-old-pension शिक्षक संगोष्ठी में शामिल हुए उज्जैन संभाग के 7 जिलों के 4000 से अधिक शिक्षक

एसीएन टाइम्स @ उज्जैन । मप्र आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भरत भरत पटेल ने मनोकामना यात्रा (Manokamna Yatra) निकाली। पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए यात्रा अमरकंटक से शुरू हुई और महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंच कर शिक्षक संगोष्ठी में परिवर्तित हो गई। यात्रा और संगोष्ठी में हजारों शिक्षकों ने शामिल होकर अपनी मांग के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनकी मांग का समर्थन उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया और पूर्व राज्य मंत्री तथा भारत स्काटउट गाइड के कमिश्नर रमेशचंद्र शर्मा ने भी किया। दोनों ने यह मांग सीएम और पीएम के समक्ष रखने के लिए आश्वस्त किया।

मुख्य अतिथि उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया और विशेष अतिथि के रूप में रमेशचंद शर्मा भारत स्काउट गाइड कमिश्नर एवं पूर्व राज्य मंत्री रहे। आयोजन में उज्जैन संभाग के 7 जिले देवास, मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, उज्जैन, शाजापुर के 4000 शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए। शुरुआत में अतिथियों ने मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया। स्वागत उद्बोधन संभागीय अध्यक्ष प्रकाश शुक्ला ने दिया।संचालन खातेगांव के शिक्षक योगेश कुमार शर्मा ने किया। आभार संभागीय महासचिव परसराम कापड़िया ने माना।

सीएम और पीएम के समक्ष रखेंगे आपकी मांग- अनिल फिरोजिया

मुख्य अतिथि सांसद फिरोजिया ने शिक्षकों की पुरानी पेंशन की मांग का समर्थन किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के सामने आपकी मांगें रखूंगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आपकी मांगें यथाशीघ्र मंजूर होंगी। विशेष अतिथि शर्मा ने भी मुख्यमंत्री से शिक्षकों की मांग के समर्थन में चर्चा करने की बात कही।

शिक्षकों 500 से 1000 तक पेंशन मिलना दुर्भाग्यपूर्ण- भरत पटेल

प्रांत अध्यक्ष भरत पटेल ने न्यू पेंशन स्कीम समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की। पटेल ने कहा अनेक सेवानिवृत्त शिक्षकों को 500 से 1000 रुपए तक पेंशन मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने रुपए में परिवार चलाना नामुमकिन है। सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक उम्रदराज होने से दूसरा कार्य करने में सक्षम नहीं रहते। पटेल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सातवां वेतनमान का लाभ अध्यापकों को देने पर धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

दिसंबर में भोपाल में होगा धरना-प्रदर्शन, तैयार रहें- प्रकाश शुक्ला

संभाग अध्यक्ष प्रकाश शुक्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन अवकाश के दौरान 25 दिसम्बर से भोपाल में धरना-प्रदर्शन होगा। इसमें अधिक से अधिक की संख्या में शामिल होने के लिए तैयार रहें। शुक्ला ने बताया यह धरना प्रदर्शन अध्यापक संवर्ग की प्रमुख लम्बित समस्याओं के लिए होगा। इसमें विगत 2 वर्षों से क्रमोन्नति के आदेश जारी नहीं होना, जनजातीय विभाग ने अनुकम्पा के मामले लम्बित होना सहित अन्य मांगें शामिल हैं। प्रांतीय महासचिव गोविंद बिसेन ने भी संबोधित किया।

ये रहे संगोष्ठी में मौजूद

प्रांतीय प्रवक्ता शांति ताम्रकार, उपाध्यक्ष चैनल पाटीदार, सह- संगठन मंत्री सुनील परिहार, संगठन मंत्री शांतिलाल यादव, चम्बल संभाग अध्यक्ष राजेशसिंह राजावत, जबलपुर संभाग अध्यक्ष डीके विश्वकर्मा, इंदौर संभाग अध्यक्ष दिनेश ठाकुर, देवास के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सेंधव, आगर के राजेन्द्र सोनी, मंदसौर के श्याम मीणा, रतलाम के सुनील गौड़, उज्जैन के देवेंद्र माहेश्वरी, शाजापुर के दिनेश मंडलोई, सीहोर के शिवनारायण गौर, बैतूल के विनय राठौड़ के अलावा हेमन्त माथुर, पवन ओझा, विनोद यादव, ओपी बैरागी, सेवाराम मकवाना, ललिता कदम, दिव्या राजोरा, अरविंद परिहार, विक्रम कछावा, प्रदीप द्विवेदी, विकास त्रिवेदी, कमलेश पांचाल, प्रह्लाद गेहलोत, अम्बाराम बोस, रूपकुमार मण्डलोई, विशाल बोहरे, जाकिर मंसूरी, इकबाल खान, संतोष धाकड़, अखिलेश पंचोली, अशोक लालावत आदि।

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Tue, 23 Nov 2021 11:07:46 +0530 Niraj Kumar Shukla