WWW.ACNTIMES.COM & : कला&साहित्य https://acntimes.com/rss/category/art-and-literature WWW.ACNTIMES.COM & : कला&साहित्य en Copyright @ ACNTIMES.COM | All Rights Reserved | Webmaster : HARSH SHUKLA महिला शक्ति सम्मान ! रतलाम में अखिल भारतीय सिंधी कवयित्री सम्मेलन महिला दिवस (8 मार्च) पर, देशभर की 11 कवयित्रियां करेंगी रचना पाठ https://acntimes.com/sindhi-poetess-conference-in-ratlam-on-march-8 https://acntimes.com/sindhi-poetess-conference-in-ratlam-on-march-8 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को रतलाम में अखिल भारतीय सिंधी कवयित्री सम्मेलन का आयोजन होगा। महिला शक्ति सम्मान के तहत हो रहे इस अनूठे आयोजन में देशभर की 11 प्रतिष्ठित कवयित्रियां काव्यपाठ करेंगे।

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सिंधी कवयित्री सम्मेलन का आयोजन सिंधी साहित्य अकादमी (मप्र संस्कृति परिषद, भोपाल) द्वारा भारतीय सिंधु सभा रतलाम के सहयोग से किया जाएगा। कार्यक्रम शाम 7:00 बजे से श्री गुरु नानक भवन, संत कंवरराम सिंधु नगर, विरियाखेड़ी रोड, रतलाम में होगा। राजेश कुमार वाधवानी (निदेशक- सिंधी साहित्य अकादमी, म.प्र.) के मार्गदर्शन और निर्देशन में हो रहे आयोजन की मुख्य अतिथि रतलाम रेल मंडल की वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक हिना केवलरमानी होंगी।

ये कवयित्रियां देंगी प्रस्तुति

रश्मि रामाणी (इंदौर), डॉ. नादिया मसंद (इंदौर), नीलू मेघ (रायपुर), सुनीता मोहिनाणी (अहमदाबाद), हिना अगणानी (इंदौर), डॉ. दीक्षिता अजवाणी (जयपुर), प्रिया बछाणी (मुंबई), डॉ. रेखा सचदेव (पुणे), द्रोपदी चंदनाणी (संत हिरदाराम नगर), योग्यता इसरानी (निवाई), ममता पारवानी (नागपुर)।

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महिलाओं का सम्मान भी होगा

सिंधी कवि सम्मेलन का आयोजन महिला शक्ति का सम्मान, सिंधी भाषा एवं साहित्य का संवर्धन तथा समाज में सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस दौरान सेवाभावी महिलाओं का सम्मान भी किया जाएगा। भारतीय सिंधु सभा परिवार ने सभी सिंधी समाजजन एवं साहित्य प्रेमियों से सपरिवार उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया है।

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Sat, 07 Mar 2026 04:26:42 +0530 Niraj Kumar Shukla
एक चिंतन ! उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे& स्वरांगी साने https://acntimes.com/In-the-era-of-boomerism-core-issues-are-being-left-behind-swaraangi-sane https://acntimes.com/In-the-era-of-boomerism-core-issues-are-being-left-behind-swaraangi-sane स्वरांगी साने

पूरे 39 चालीस पहले बनी फ़िल्म ‘इजाज़त’ फिर एक बार देखी। फ़िल्म के बनने से लेकर अब तक में लगभग 40 साल का फ़ासला है। इन 40 सालों में इस फ़िल्म को लेकर जब भी बात हुई होगी, उसकी कथा, पटकथा, लेखन-निर्देशन, अभिनय की चर्चा हुई होगी। कभी उन बातों को रेखांकित नहीं किया गया होगा जो उस कहानी में कहन का हिस्सा भर थे। यदि आज यह फ़िल्म बनती तो यक़ीनन चर्चा उन मुद्दों पर होती और इसकी कथा-पटकथा आदि सब दीगर हो जाता। इन दिनों चर्चा में उन मुद्दों को उछाला जाता है, जिन्हें उछालना कतई ज़रूरी नहीं होता। इस उछालवाद में मूल मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। ‘अरे भई कहना क्या चाहते हो’, अब कोई नहीं पूछता। कोई नहीं देख रहा कि किसी कलाकृति, किसी आयोजन या किन्हीं नए नियमों को बनाने का उद्देश्य क्या है।

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गुलज़ार द्वारा निर्देशित 1987 में बनी यह फ़िल्म सुबोध घोष की बंगाली कहानी ‘जातुगृह’ पर आधारित है। इसे तब दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले थे। घोष का नाम बंगाली साहित्य और पत्रकारिता जगत् में जाना-पहचाना है। मतलब मान लेते हैं कि उन्होंने जो लिखा वह काफ़ी सोच-समझकर ही लिखा होगा। फ़िल्म शुरू होने के 15 मिनट बाद ही महामृत्युजंय मंत्र बुदबुदाते दादू हैं, जो यह भी कहते हैं ‘स्नान कर लो’। नायक कहता है ‘मैं घर जाकर नहा लूँगा’, तो दादू कहते हैं ‘नहाती तो गाय-भैसें हैं’। आम बोलचाल में ‘नहाना’ ही कहा जाता है, ‘स्नान करना’ तो यह वाक् प्रचार तो ब्राह्मण परिवारों में होता है। यदि यह फ़िल्म आज बनी होती तो क्या इस पर ब्राह्मणवाद का ठीकरा नहीं फोड़ा गया होता? फिर फ़िल्म में दादू यह भी कहते हैं ‘क्यों जनेऊ नहीं पहना न…पहन ले बेटा, पहन ले’, लीजिए इसे भी आज ब्राह्मणवाद, मनुवाद, दक्षिणपंथी विचारधारा और न जाने किन-किन टैगों से देखा जाता, जबकि जो हमारे आस-पास के परिवेश की बहुत आम बातें रही हैं। फ़िल्म में इसका चित्रण करना किसी एक वर्ग के श्रेष्ठत्व को दिखाना, तब इस तरह के सवाल क्यों नहीं उठे? 

फ़िल्म के 44वें मिनट में नायक अख़बार पढ़ रहा है और नायिका को बताता है, ‘सुनो इंदिराजी ने क्या छुट्टी कर दी है जनता की, रायबरेली की सीट तो जीती ही और साथ में….’ तब इंदिरा गांधी की फ़िल्म में हुई वाहवाही आपत्तिजनक नहीं लगी, किसी को ऐसा नहीं लगा कि सीधे-सीधे सत्ता की प्रशंसा हो रही है। जबकि अब हर बात, हर कोण को केवल इसी दृष्टि से देखा जा रहा है कि नरेटिव राहुल के साथ हैं या मोदी के? फ़िल्म में 45वें मिनट में नायिका मंदिर में पूजा करती है और नायक को जनेऊ पहनाती है। वह बताती है कि ‘दादू बद्रीनाथ जा रहे हैं’। तब सवाल क्यों नहीं उठा कि दादू बद्रीनाथ ही क्यों जा रहे हैं, वे कहीं और भी जा सकते थे? नायिका, नायक से गायत्री मंत्र का उच्चारण करवा रही है। इस फ़िल्म का नायक है नसीरुद्दीन शाह। हो सकता है तब उन्हें भी नहीं लगा हो कि यह तो हम हिंदुत्व को, जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। हो सकता है यह समझ उनकी उम्र के साथ अब बढ़ी हो। तब इस पर भी सवाल नहीं उठा कि महिलाओं को गायत्री मंत्र पढ़ना चाहिए या नहीं। मतलब दोनों ओर से कठमुल्लापन इन दिनों बढ़ा है।

याद है यूजीसी ऐक्ट पर कितना बवाल मच गया था। क्यों? ऐसा क्यों हुआ क्योंकि राजनेताओं ने लगातार एक पक्ष को कुछ अधिक सुविधाएँ देना शुरू कर दिया है और दूसरे पक्ष को सीधे-सीधे नकारना। वी. पी. सिंह की कुर्सी को मंडल आयोग ही ले डूबा था। यूजीसी ऐक्ट भी चर्चा में इसलिए आया क्योंकि उसे चर्चा में लाया गया। अजीब जुनून सबके सिर पर हावी हो गया है। चालीस साल में समाज प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए खेमों में बँटता चला जा रहा है।

फिर लौटते हैं फ़िल्म पर। आज के दौर में बनने पर फ़िल्म क्या कहना चाह रही है उसे दरकिनार कर दिया जाता। पहले केवल सियासतदार लोग मतलबपरस्त होते थे, अब हर कोई अपने हित और अपने ख़ेमे के आईने से देखने में लगा रहता है। बताइए न पाँच दिनों तक चलने वाले एआई शिखर सम्मेलन या एआई समिट के बारे में कितने लोगों को 16 फ़रवरी से पहले तक पता था या कितनों को 20 फ़रवरी के बाद ही पता चलता। गलगोटिया प्रकरण हो गया और सबका ध्यान एआई समिट की ओर चला गया। जैसे इस समिट से क्या हासिल हुआ कि जगह वह किन वजहों से याद रखा जाए यह महत्वपूर्ण हो गया। गलगोटिया नाम ही जैसे एआई समिट हो गया। एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण, उसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उपायों के लिए 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने साझा ग्लोबल विजन का समर्थन किया वह सब एक तरफ रह गया। पाँच दिन, 20 देशों के प्रमुख और दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के बीच की बातचीत पर गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़ा मामला हावी हो गया। यह सस्ती लोकप्रियता और नकारात्मक कथन शैली का इन दिनों का ताज़ा उदाहरण है।

आज ‘इजाज़त’ मूवी देखते हुए अपने-अपने चश्मे से देखिए, फिर न आप फ़िल्म के साथ रो पाएँगे, न बह पाएँगे आपका दिमाग तर्क-कुतर्क करता चला जाएगा कि फ़िल्म का नाम ‘इजाज़त’ क्यों रखा ‘अनुमति’ क्यों नहीं, अंतिम दृश्य में नायिका रेखा, नसीरुद्दीन के पैर क्यों छूती है? यह भी तो पितृसत्तात्मकता को, पुरुषवाद को, पति के चरित्र को बढ़ावा देना है। पति शादी के बाद अपनी प्रेमिका से रिश्ता रखे, फिर प्रेमिका को घर भी ले आए, प्रेमिका की असमय मृत्यु हो जाने पर उसे फ़िल्म की त्रासदी समझें और नायक को भोला, बेचारा, कहकर क्लीन चिट भी दे दें… तब तो सबने इस फ़िल्म को क्लीन चिट ही दी थी। आज यह फ़िल्म बनती तो इसे क्लीन चिट मिलना इतना आसान नहीं होता, सेंसर बोर्ड से अलहदा एक सेंसर बोर्ड दर्शकों का, दर्शकों को एक ख़ास तरह से सोचने के लिए बाध्य करने वालों का भी होता।

(आलेख स्वरांगी साने की फेसबुक वाल से लिया गया है। आप वरिष्ठ पत्रकार, ख्यात लेखिका, कवयित्री, भाषाविद् और कला साधिका हैं।) 

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Wed, 25 Feb 2026 00:33:08 +0530 Niraj Kumar Shukla
शब्द, संस्कार और संवेदना ! नीतेश जोशी के कविता संग्रह ‘तुम्हारे लिए…’ को मिला अंतरराष्ट्रीय ‘एमिली डिस्कन’ पुरस्कार, 21 कविताओं का संग्रह है संकलन में https://acntimes.com/nitesh-joshi-poetry-collection-wins-emily-discon-award https://acntimes.com/nitesh-joshi-poetry-collection-wins-emily-discon-award एसीएन टाइम्स @ बड़नगर । नगर के प्रसिद्ध साहित्यकार नीतेश जोशी के नए कविता संग्रह तुम्हारे लिए…’ को अंतरराष्ट्रीय एमिली डिस्कन पुरस्कार (Emily Discon Award) प्राप्त हुआ है। बुकलिफ पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह कविता संग्रह जोशी की 21 प्रेम कविताओं का साझा संकलन है जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। पूर्व में भी साहित्यकार जोशी का सम्मान कई संस्थाओं के द्वारा किया गया है।

ज्ञात रहे साहित्यकार नीतेश जोशी साहित्य क्षेत्र में मध्य भारत का ऐसा सशक्त और प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें किसी औपचारिक परिचय की आवश्यकता नहीं है। वे एक ठेठ संस्कारित एवं साहित्यिक परिवार की पृष्ठभूमि से आते हैं, जहाँ शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संस्कार और संवेदना का माध्यम रहे हैं। पारिवारिक वातावरण में प्राप्त साहित्यिक संस्कारों ने उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को गहराई, संतुलन और भावनात्मक प्रामाणिकता प्रदान की है।

संवेदना भी और संवाद भी

तुम्हारे लिए… यह कविता-संग्रह प्रेम की उन अनुभूतियों का संकलन है, जो जीवन के कठिन संघर्षों और अनकहे क्षणों के बीच सहसा प्राप्त होती हैं। यह वह कोमलता है, जो हृदय की आंतरिक गहराइयों में चुपचाप बस जाती है और समय आने पर विचार बनकर शब्दों का रूप ले लेती है। इन कविताओं में प्रेम किसी एक रूप, किसी एक संबंध या किसी एक नाम तक सीमित नहीं है। यहाँ प्रेम संवेदना है, प्रतीक्षा है, समर्पण है और कभी-कभी स्वयं से संवाद भी। यह संग्रह उन भावों की अभिव्यक्ति है, जो हर उस मन में जन्म लेते हैं, जिसने कभी किसी के लिए धड़कना सीखा हो।

इस संग्रह की कविताएँ उनकी हैं जिसने कभी प्यार किया है

संग्रह तुम्हारे लिए…उनके लिए है, जो जीवन से भी अधिक प्रिय हैं। इस संग्रह को भारत के अलावा विदेशों में भी पढ़ा जा रहा है और यह संग्रह ऑनलाइन ओर ऑफ लाइन दोनों जगह उपलब्ध है। नीतेश जोशी की इस उपलब्धि पर नगर के साहित्यकार रमेश चागेसिया, प्रमोद पंचोली, सुभाष तिवारी, नवीन त्रिवेदी मुखिया, भवानी शंकर जोशी, विजय यादव आदि ने बधाई दी है।

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Tue, 24 Feb 2026 23:44:43 +0530 Niraj Kumar Shukla
कला&साहित्य : साहित्यकार एवं भाषाविद् डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति आयोजन ‘हमारे&अपने जलजजी’ 8 फरवरी को, कविता लेखन स्पर्धा के पुरस्कार दिए जाएंगे https://acntimes.com/hamare-apane-jaljaji-on-february-8th-in-ratlam https://acntimes.com/hamare-apane-jaljaji-on-february-8th-in-ratlam एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्यिक जगत में रतलाम का नाम राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वाले विख्यात साहित्यकार एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार 'जलज' की स्मृति में “हमारे–अपने जलजजी” का आयोजन 8 फरवरी (रविवार), 2026 को होगा। प्रतिवर्ष होने वाला यह साहित्यिक आयोजन आई.एम.ए. हॉल, राजेन्द्र नगर, रतलाम में अपराह्न 3.00 बजे शुरू होगा।

यह जानकारी देते हुए आयोजन की सहयोगी संस्था राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पंवार ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. जलज स्मृति कविता लेखन प्रतियोगिता–2025 के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही डॉ. जलज के साहित्यिक अवदान पर आधारित संस्मरणों की प्रस्तुति एवं उनकी चयनित कविताओं का स-स्वर पाठ भी किया जाएगा।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. लीला जोशी होंगी। अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला करेंगे। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धा पदम घाटे, स्मिता निर्मल हुम्बड़, आशीष दशोत्तर (अध्यक्ष- वनमाली सृजन केन्द्र, रतलाम), डॉ. मुनीन्द्र दुबे (अध्यक्ष- स्व. अरुण भार्गव हिन्दी साहित्य सेवा समिति), सुभाष जैन (अध्यक्ष- हमलोग संस्था), संजय परसाई ‘सरल’, प्रकाश हेमावत, विनोद झालानी एवं महावीर वर्मा ने समस्त साहित्य प्रेमियों से अपील की है कि वे इस आयोजन में उपस्थित होकर डॉ. जलजजी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें।

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Thu, 05 Feb 2026 21:18:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
गूंजे ‘अल्फ़ाज़’ ! साहित्यकार अज़हर हाशमी को विचारों और कविताओं से दी श्रद्धांजलि, उनके रचनात्मक अवदान, मानवीय मूल्यों व कार्यों का स्मरण भी किया https://acntimes.com/professor-azhar-hashmi-birthday-celebrated https://acntimes.com/professor-azhar-hashmi-birthday-celebrated एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षक एवं सूफी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले प्रो. अज़हर हाशमी का जन्मदिवस उनके निवास स्थान पर गरिमामय साहित्यिक सभा ‘अल्फाज़’ आयोजित कर मनाया। इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ साहित्यकारों, रंगकर्मियों, लेखकों एवं उनके शिष्यों ने एकत्र होकर प्रो. हाशमी के रचनात्मक अवदान, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक समन्वय के कार्यों का स्मरण किया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान ने कहा कि प्रो. अज.हर हाशमी ने संस्कृतियों के मध्य सेतु निर्मित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। वे केवल भाषा के विद्वान नहीं थे, बल्कि भाषा को गढ़ने वाले सृजनशील व्यक्तित्व थे। सूफी परंपरा के संत-स्वभाव के कारण उनकी रचनाओं में प्रेम, करुणा, समरसता और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। अपने आचरण और व्यवहार से उन्होंने सदैव समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान की।

जो भी मिला, प्रो. हाशमी का होकर रह गया

साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि रतलाम आने वाला प्रत्येक प्रतिष्ठित साहित्यिक अथवा सांस्कृतिक व्यक्तित्व प्रो. हाशमी से मिले बिना नहीं जाता था। उनसे संवाद के पश्चात जो आत्मिक शांति और सुकून की अनुभूति होती थी, वह विरल थी। उन्होंने अपने शिष्यों को केवल साहित्य ही नहीं सिखाया, बल्कि जीवन जीने की कला, मानवीय मूल्यों की समझ और सत्य के मार्ग पर चलते हुए लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा भी दी।

सूफी चेतना और मानवीय दृष्टि रेखांकित की

युवा साहित्यकार आशीष दाशोत्तर ने हाशमी की सूफी चेतना और मानवीय दृष्टि को रेखांकित करता हुआ भावपूर्ण काव्य-पाठ प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने सराहना के साथ सुना। प्रसिद्ध रंगकर्मी कैलाश व्यास ने उनके साथ बिताए स्मरणीय क्षणों को साझा किया। उन्होंने बताया कि हाशमी सर का सान्निध्य सदैव प्रेरक और ऊर्जादायी रहता था।

हाशमी के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक

समाजसेवी अदिति दवेसर ने अज़हर हाशमी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन में प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख किया। श्वेता नगर ने प्रो. हाशमी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनकी सरलता, विनम्रता और गहन विद्वत्ता को रेखांकित किया। डॉ. अनिला कंवर ने कहा कि गुरु प्रोफेसर अजहर हाशमी ने सदैव सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे मूलभूत जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हैं।

साहित्य लेखन होगा ऑनलाइन

कथाकार इंदु सिन्हा ने अपने संस्मरणों के माध्यम से हाशमी सर के स्नेहिल स्वभाव, दूरदृष्टि और साहित्यिक प्रेरणा का स्मरण किया। पत्रकार तुषार कोठारी ने हाशमी की समस्त साहित्य लेखन को वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन करने की बात कही। रणजीत सिंह राठौर एवं हरीश पुरोहित ने भी विचार व्यक्त करते हुए प्रो. हाशमी के व्यक्तित्व को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

कविताओं को दिए सुर

गायिका संगीता जैन ने गुरु वंदना प्रस्तुत करते हुए अज़हर हाशमी की कविता की संगीतमय में प्रस्तुति दी। संचालन विद्यार्थी परिवार के सतीश त्रिपाठी (एडवोकेट) ने किया। अंत में डॉ. प्रवीणा दवेसर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर भारत गुप्ता, अंजना सक्सेना सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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Thu, 15 Jan 2026 20:00:40 +0530 Niraj Kumar Shukla
प्रो. अज़हर हाशमी के जन्मदिवस (13 जनवरी) पर विशेष : "मैं चिता की गोद में भी गीत गाना जानता हूं…" &श्वेता नागर https://acntimes.com/professor-azhar-hashmi-birthday-special https://acntimes.com/professor-azhar-hashmi-birthday-special श्वेता नागर

"नाश में निर्माण की वीणा बजाना जानता हूं।

संकटों के मध्य भी मैं मुस्कुराना जानता हूं।

मौत को आना है आए, मुझको उसका भय नहीं।

मैं चिता की गोद में भी गीत गाना जानता हूं।"

ये पंक्तियां साहित्यकार, चिंतक और कवि अज़हर हाशमी जी की हैं। ये केवल काव्य पंक्तियां नहीं हैं बल्कि कह सकते हैं जीवन के अंतिम क्षणों में जिया उनका जीवन दर्शन है। प्रो. हाशमी ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता रहे। दूसरों के भविष्य को पढ़ने वाले हाशमी जी ने अंतिम समय में जब उन्हें घर से अस्पताल के लिए लाया जा रहा था तब उन्होंने स्वयं के लिए भविष्यवाणी करते हुए कह दिया था कि यह उनके जीवन की अंतिम यात्रा रहेगी। 5 जून को जब मैं, स्वयं उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछने अस्पताल गई तब उन्होंने मुझ से कहा कि आज से अधिकतम 4 या 5 दिनों की और मेरी सांसे हैं, और ऐसा ही हुआ।

श्रद्धेय हाशमी सर सूफ़ी परम्परा के संवाहक रहे, और श्रीमद् भगवद गीता के चिंतन को उन्होंने अपने जीवन में उतारा। इसलिए ही वे गीता मनीषी कहे जाते हैं। श्रीमद् भगवद गीता के दूसरे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण स्थितप्रज्ञ व्यक्ति के लक्षणों को बताते हुए कहते हैं कि- ऐसा व्यक्ति जो जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी शांत और स्थिर रहता है, वही स्थितप्रज्ञ है।

ऐसे ही स्थितप्रज्ञ अवस्था को प्राप्त श्रद्धेय हाशमी सर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की असहनीय पीड़ा से गुजरते हुए भी अपने मन, बुद्धि, मस्तिष्क और भावनाओं को नियंत्रित और स्थिर रख अंतिम समय में भी शिष्यों से ज्ञान, धर्म, दर्शन और साहित्य पर चर्चा करते रहे। स्वयं उनका इलाज करने वाले डॉक्टर्स भी उनके इस आत्मबल को प्रणाम करते हुए कह रहे थे कि कैंसर की इस अंतिम अवस्था में हाशमी जी के शरीर की आंतरिक प्रणाली ने अधिकांशतः काम करना बंद कर दिया है लेकिन यह हमारे लिए भी आश्चर्य का विषय है कि वे कैसे इतनी मानसिक स्थिरता को बनाए रखे हुए हैं। आत्मीयता और अपनत्व का भाव प्रो. अज़हर हाशमी जी के व्यक्तित्व का चुंबकीय गुण था, इसलिए जो भी उनके सम्पर्क में आया फिर वह हमेशा के लिए उनसे जुड़ गया।

इसका प्रमाण हैं हम सब शिष्य, विद्यार्थी तो लंबे समय से उनके सान्निध्य में रहे, इसलिए हम सभी का हाशमी सर के प्रति श्रद्धा भाव और भावनात्मक जुड़ाव स्वाभाविक था, लेकिन हाशमी सर का इलाज करने वाले डॉक्टर्स भी उनका इलाज करते हुए उनके उदारतापूर्ण व्यवहार से ऐसे प्रभावित हुए कि वे भी उनके प्रति श्रद्धा भाव से भर उठे। ऐसे ही हमारे रतलाम शहर के प्रसिद्द डॉक्टर अरुण पुरोहित जो कि हाशमी सर का इलाज कर रहे थे, जब उन्हें जांच रिपोर्ट्स से मालूम हुआ कि हाशमी सर को कैंसर है तब उन्होंने हाशमी सर की इतने समर्पित भाव से सेवा की कि ऐसा लग रहा था वे हाशमी सर के डॉक्टर नहीं बल्कि पुत्र या शिष्य हों। वे हंसते हुए हम सभी से कहते थे कि आप सब तो हाशमी सर के शिष्य हैं, मैं तो उनसे अभी जुड़ा हूं।

10 जून, सुबह लगभग 11.30 बजे का वह मार्मिक दृश्य जब श्रद्धेय हाशमी सर अपनी अंतिम सांसे ले रहे थे, तब डॉ. पुरोहित उन्हें देखने आए। जैसे ही हाशमी सर ने उन्हें देखा अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा लिया। वे कुछ बोल पाने में तो उस समय समर्थ नहीं थे लेकिन उनका भाव साफ झलक रहा था कि वे उन्हें अंतिम बार आशीर्वाद दे रहे हैं, और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं। हाशमी सर के इन भावों को कहे बिना डॉ. पुरोहित भी समझ गए और उन्होंने भावुक होकर उन्हें गले लगा लिया। यह मौन संवाद मानो देव और देवदूत के बीच हो रहा था।

हाशमी सर ने अपने जीवन में जो कुछ भी कमाया उसे समाज के लिए ही खर्च किया। कुछ भी संचय नहीं किया। फकीर सा जीवन जिया। इसलिए इलाज के खर्च को लेकर उन्हें चिंता सता रही थी। क्योंकि एक से डेढ़ महीने वे आईसीयू में रहे थे।

तब अपने शिष्यों के लिए जीवन समर्पित करने वाले हाशमी सर के लिए उनके शिष्य, और जिस अस्पताल में वे उपचाररत थे उस अस्पताल के संचालक श्री राजेश मूणत जी ने भी पूरे समर्पण भाव से अपने शिष्य धर्म का निर्वाह करते हुए हाशमी सर को निश्चिंत करते हुए कहा कि मैं जानता हूं आपने अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए जिया। आपका मेरे अस्पताल में इलाज करवाना मेरा सौभाग्य है, क्योंकि आप जैसे सूफ़ी संत का मेरे यहां आना हुआ है। आप किसी प्रकार की चिंता न करें, बस यहां से स्वस्थ होकर जाइए।"

शिष्यों के साथ-साथ अपने परिवार के प्रति भी हाशमी सर ने अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वाह किया। उनके भाई श्री मुख़्तार हाशमी और श्री मजहर हाशमी जी ने भी अंतिम समय में अपने बड़े भाई की निष्ठा भाव से सेवा सुश्रुषा की।

यह भी देखें...

हाशमी सर की शिष्या आदरणीय डॉ. प्रवीणा दवेसर ने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता भाव को व्यक्त करते हुए ‘बलिहारी गुरु’ आपकी पुस्तक प्रकाशित करवाई जिसमें हाशमी सर के शिष्यों ने अपने गुरु के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचारों को व्यक्त किया। इसके साथ ही ‘रूहानियत’ कार्यक्रम के माध्यम से उनके गीतों की संगीतमय प्रस्तुति भी दी गई। उनकी एक और शिष्य नंदिनी सक्सेना द्वारा अपने गुरु की स्मृति में 7 दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया गया। इससे समाज में सांप्रदायिक सद्भाव और सौहार्द का संदेश प्रसारित हुआ।

अनिला कंवर, सतीश त्रिपाठी, तुषार कोठारी, हेमंत भट्ट, नीरज कुमार शुक्ला, विजय सिंह रघुवंशी, आरिफ कुरैशी सहित अनेक शिष्यों ने अंतिम समय तक अपने गुरु श्रद्धेय हाशमी सर के लिए समर्पित भाव से अपने दायित्व का निर्वाह किया। हाशमी सर और उनके शिष्यों का आत्मीय संबंध भारतीय संस्कृति की गुरु शिष्य परम्परा का आदर्श उदाहरण है।

आज के इस दौर में जहां संबंध स्वार्थ के धागों में गुंथे होते हैं, वहीं श्रद्धेय हाशमी सर और उनसे जुड़े उनके शुभचिंतकों, शिष्यों के बीच संबंध विश्वास, श्रद्धा और स्नेह की पवित्र डोरी से बंधे हैं। 

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Tue, 13 Jan 2026 01:10:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
साहित्य सृजन : आशीष दशोत्तर के दोहा संग्रह 'तुतलाती आवाज़' का हुआ विमोचन, प्रेरक है बच्चों पर केन्द्रित 700 दोहे लिखना https://acntimes.com/ashish-dashottars-book-tutlati-zubaan-was-launched https://acntimes.com/ashish-dashottars-book-tutlati-zubaan-was-launched एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रचनाकार का बचपन की स्मृतियों को शब्दों में ढालना उसकी रचनात्मक ईमानदारी और जीवन के प्रति अनुराग को व्यक्त करता है। आशीष दशोत्तर ने बच्चों पर केन्द्रित पुस्तक का लेखन कर अपने रचनात्मक दायित्व को निभाया है। यह सराहनीय भी है और प्रेरक भी।

उक्त विचार युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर की नई पुस्तक 'तुतलाती आवाज़' के विमोचन अवसर पर वरिष्ठ कवि, अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बच्चों पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन नन्हे बच्चों कपिल और रोशनी डामर ने किया। प्रो. चौहान ने कहा कि बच्चों पर केन्द्रित 700 दोहे लिखना उनकी बच्चों के प्रति जागरूकता और जीवन से गुम होते जा रहे बचपन को बचाने की पहल है। आज का बचपन तकनीक के क़रीब आ गया है लेकिन अपनों से दूर हो गया है। ऐसे में आशीष का यह कार्य शहर की रचनाधर्मिता में सकारात्मक प्रयोग की तरह अंकित हो गया है।

विश्व पुस्तक मेले में भी है पुस्तक

जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि निरन्तर सृजन व्यक्ति को परिमार्जित करता है। आशीष भाई की यह सृजन प्रक्रिया उनकी निरन्तरता को दर्शाती है। रचनाकार आशीष दशोत्तर ने कहा कि मेरी रचना प्रक्रिया शहर के वरिष्ठजन के स्नेह से ही निरंतर आगे बढ़ रही है। यह दोहा संग्रह इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित है। इसे नई दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में भी इस वर्ष प्रकाशित पुस्तक की श्रेणी में प्रदर्शित किया गया है। इसमें बचपन के विभिन्न दृश्यों को दोहों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। एक ही विषय पर तकरीबन सात सौ दोहे लिखने का प्रयास साहित्यजन को पसंद आएगा, ऐसा विश्वास है।

26वीं पुस्तक है दशोत्तर की

उल्लेखनीय है कि यह आशीष दशोत्तर की 26वीं पुस्तक है। आयोजन में वरिष्ठ हास्य कवि जुझार सिंह भाटी, आई. एल. पुरोहित, डॉ. एन. के. शाह, रवि गेहलोत, मांगीलाल नगावत, कीर्ति शर्मा, विनोद झालानी, सुभाष यादव, चरणसिंह जाधव, गीता राठौर, आशा श्रीवास्तव, रचना चंद्रावत, सपना ठाकुर, मुन्नीबेन, अनीस ख़ान, पंकज व्यास सहित सुधिजन मौजूद थे।

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Tue, 13 Jan 2026 00:05:00 +0530 Niraj Kumar Shukla
मालवा मीडिया फेस्ट & 3 : कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप आज तीसरे दिन के सत्रों का करेंगे शुभारंभ, शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के नाम होंगे सभी सत्र https://acntimes.com/malwa-media-fest-3-will-conclude-on-january-11 https://acntimes.com/malwa-media-fest-3-will-conclude-on-january-11 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मालवा मीडिया फेस्ट के तीसरे संस्करण के तीसरे दिन (11 जनवरी 2026, रविवार) होने वाले सत्रों उद्घाटन मप्र शासन के कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप करेंगे। इस दिन शिक्षा, साहित्य और संस्कृति से संबंधित सत्रों का आयोजन होगा। फेस्ट का समापन शाम को पुरस्कार वितरण के साथ होगा।

सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा रतलाम में तीन दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट – 3 का आयोजन स्थानीय होटल उजाला पैलेस की सीता वाटिका में किया जा रहा है। फाउंडेशन की अर्चना शर्मा एवं प्रवीणा दवेसर ने बताया कि प्रथम सत्र में विद्यार्थियों के लिए भारत की भव्यता व सौंदर्य पर रील मेकिंग, निबंध लेखन, ड्राइंग एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। द्वितीय सत्र में एनबीटी की सीनियर परियोजना अधिकारी नीति यादव ‘पीएम ई विद्या’ के तहत पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन के बारे में चर्चा करेंगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविद् एवं सांदीपनी विद्यालय रतलाम के उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर ‘साइकिल ऑफ़ ग्रोथ’ मॉडल पर विचार व्यक्त करेंगे।

पारंपरिक वेशभूषा के फैशन शो का आयोजन

तृतीय सत्र में भारत की भारत की प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी अबक्का पर नाट्य मंचन तथा मालवा से संबंधित संस्कृति एवं परिधान पर फैशन शो भी होगा। इसके अलावा फेस्ट में स्थानीय कलाकारों द्वारा हस्त निर्मित वस्तुओं, संविधान से जुड़ी जानकारियों की प्रदर्शनी भी देख सकेंगे और पुस्तकें भी खरीद सकेंगे। 

11 जनवरी 2026 के मुख्य आकर्षण

क्रिएटिव आर्ट्स एंड कल्चर

सुबह 11.00 से 11.00 बजे

मीडिया टॉक : स्वस्थ लोकतंत्र में छात्र की भूमिका

सुबह 11.30 से दोपहर 01.00 बजे

लाइव रील मेकिंग कॉम्पिटीशन

दोपहर 02.00 से 02.50 बजे

Author Talk : हाऊ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स आर रिशेपिंग बुक कंजम्पशन बाय नीति वर्मा (सीनियर परियोजना अधिकारी)

दोपहर 02.50 से 3.30 बजे

Cycle of Growth : गजेंद्र सिंह राठौर (अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् एवं वक्ता, वर्ल्ड स्कूल्स समिट)

दोपहर 3:30 से 4 बजे तक

इन्फ्लुएंसर टाइम

शाम 06.00 से 07.00 बजे

थिएटर हिस्टॉरिकल प्ले : "रानी अब्बक्का" - ट्रिब्यूट टू द फियरलेस क्वीन

शाम 07.00 बजे से

परंपरागत फैशन शो एवं पुरस्कार वितरण

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Sun, 11 Jan 2026 10:59:06 +0530 Niraj Kumar Shukla
कवि एवं अनुवादक रतन चौहान पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन 12 अक्टूबर को, ये होंगे अतिथि https://acntimes.com/book-on-translator-ratan-chauhan-to-be-released-on-october-12 https://acntimes.com/book-on-translator-ratan-chauhan-to-be-released-on-october-12 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । समकालीन कविता के महत्वपूर्ण कवि, अनुवादक प्रो. रतन चौहान के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित पुस्तक 'उजली सुबह की आस में' का विमोचन समारोह 12 अक्टूबर को होगा। समारोह सुबह 11 बजे अजंता पैलेस रतलाम के प्रथम तल पर होगा।

मुख्य अतिथि कवि, कथाकार एवं रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे होंगे। विशिष्ट अतिथि चर्चित कथाकार एवं आईएएस तरुण भटनागर होंगे। समारोह की अध्यक्षता कवि, चिंतक एवं वरिष्ठ आईएएस डॉ. अशोक कुमार भार्गव करेंगे।

युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर द्वारा संपादित इस पुस्तक में प्रो. चौहान के जीवन और रचनात्मकता के विभिन्न आयामों का समावेश किया गया है। जनवादी लेखक संघ रतलाम, जन नाट्य मंच, वनमाली सृजन केन्द्र एवं युगबोध ने शहर के सुधिजन से समारोह में उपस्थिति का आग्रह किया है।

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Sat, 11 Oct 2025 23:04:15 +0530 Niraj Kumar Shukla
रतलाम के आशीष दशोत्तर शांति&गया स्मृति कविता सम्मान&2025 से सम्मानित https://acntimes.com/ratlam-ashish-dashottar-shanti-gaya-kavita-samman-2025 https://acntimes.com/ratlam-ashish-dashottar-shanti-gaya-kavita-samman-2025 कविता संग्रह ‘तुम भी’ के लिए मिला सम्मान, भोपाल में प्रख्यात साहित्यकारों और कलाकारों की मौजूदगी में हुआ समारोह

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कविता के प्रतिष्ठित शांति-गया स्मृति कविता सम्मान-2025 से युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर को सम्मानित किया गया। प्रख्यात अभिनेता राजीव वर्मा, सुपरिचित कथाकार उर्मिला शिरीष, सम्मान समिति के सचिव व्यंग्यकार अरुण अर्णव खरे और समिति अध्यक्ष कांति शुक्ला उर्मि ने भोपाल में यह सम्मान प्रदान किया। दशोत्तर को उनके कविता संग्रह 'तुम भी' के लिए सम्मान-पत्र एवं सम्मान निधि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रख्यात अभिनेता राजीव वर्मा ने कहा कि रचनाकार अपनी रचना प्रक्रिया जब यह तय करके करता है कि वह किसके लिए लिख रहा है तो उसकी रचना असर डालती है। कला की सभी विधाएं समाज सापेक्ष होती हैं। समाज से हटकर कलाएं ज़िंदा नहीं रहतीं। कथाकार उर्मिला शिरीष ने कहा कि पुरस्कृत कृति रचनाकार की संभावनाओं का एक आकाश उपलब्ध कराती है। इस अवसर पर समिति द्वारा कला, साहित्य एवं खेल संवर्धन के लिए भी सम्मान प्रदान किए गए। समारोह में देश के प्रमुख साहित्यकार, रंगकर्मी, संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

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Thu, 02 Oct 2025 16:07:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रदीपसिंह राव का हुआ नागरिक अभिनंदन, हिन्दी भाषा व गुरु डॉ. वेदप्रताप वैदिक की प्रेरणा को बताया सफलता का सूत्र https://acntimes.com/hindi-diwas-samman-dr-pradeepsingh-rao-ratlam https://acntimes.com/hindi-diwas-samman-dr-pradeepsingh-rao-ratlam एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रदीपसिंह राव ( Dr Pradeepsingh Rao ) का उनकी साहित्यिक और सामाजिक उपलब्धियों के लिए हिन्दी दिवस ( Hindi Diwas ) पर नागरिक अभिनंदन किया गया। गणमान्य नागरिकों ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र, शॉल, श्रीफल और पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। राव ने हिंदी भाषा व गुरु डॉ. वेदप्रताप वैदिक  की प्रेरणा को अपनी सफलता का सूत्र बताया।

अलकापुरी के रहवासियों ने पार्षद के सौजन्य से आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में समाजसेवी उद्योगपति जयंत वोरा और मुखर्जी मंडल अध्यक्ष की उपस्थिति में डॉ. राव को प्रशस्ति-पत्र और शॉल, श्रीफल तथा पगड़ी पहना कर ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। परमार्थ के लिए सतत् लेखन तथा आदिवासी अंचलों में दीर्घ समय तक उच्च शिक्षा की जागृति एवं असाधारण सेवा के लिए उनका बहुमान भी किया गया।

इस अवसर पर अपने भाव व्यक्त करते हुए डॉ. प्रदीपसिंह राव ने कहा

"आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें हिंदी भाषा के प्रकांड पंडित मेरे गुरु स्व. डॉ. वेदप्रताप वैदिक की प्रेरणा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर हिन्दी में सतत लेखन और परमार्थ के लिए पुस्तकों की रचना ने मुझे यह विश्वास दिया है कि सहज, सरल और विनम्र आचरण से ही सबके दिल जीते जा सकते हैं। अलकापुरी रहवासियों ने जो सम्मान दिया, उसके लिए मैं कृतार्थ हूं।"

‘राव सर हमारे आदर्श’

पार्षद पति ने कहा कि- “शिक्षकों की गरिमा रखने में डॉ. राव ने अथक साधना की है, ऐसे उदाहरण कम ही मिलते हैं।” अतिथि जयंत वोरा ने उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का धनी और देश के ख्यातनाम साहित्यकार बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में पार्षद ने कहा— “राव सर हमारे आदर्श हैं और हमें गर्व है कि वो हमारी अलकापुरी के रहवासी हैं। उनका सम्मान हिंदी दिवस की सार्थकता है।”

इन्होंने किया नागरिक अभिनंदन

आरम्भ में स्वागत भाषण राजेश पंचाल ने दिया। वरिष्ठ शिक्षक लक्ष्मीनारायण धारवा ने सम्मान-पत्र का वाचन किया। स्वागत आर. नवले, महेंद्र शर्मा, संजय पांडेय, अरुण तिवारी, मोहन सिंह हारोड़, शीतल पंचाल, रामबाबू कुलमी, सारिका दीक्षित, गुलशन बंडी, श्याम सुंदर भाटी, ए. आर. मालवीय आदि ने किया। नागरिक अभिनंदन नवदुर्गा समिति मां अम्बे चौक के युवाओं और उपस्थिति अतिथियों ने शॉल श्रीफल से किया। संचालन हरीश यादव ने किया। आभार संजय पांडेय ने मना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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Mon, 15 Sep 2025 08:46:18 +0530 Niraj Kumar Shukla
अनुनाद की संगीतमय प्रस्तुति ‘जहां जाइएगा हमें पाइएगा...’ आज, बॉलीवुड सिंगर आशीष मराठा भी बिखेरेंगे सुर https://acntimes.com/ratlam-anunad-musical-presentation-today https://acntimes.com/ratlam-anunad-musical-presentation-today एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में संगीत की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाली संस्था 'अनुनाद' द्वारा 13 सितंबर को शाम 7 बजे गुलाब चक्कर पर 'जहां जाइएगा, हमें पाइएगा' संगीत सभा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बॉलीवुड सिंगर आशीष मराठा सहित स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति होगी। 

संस्था अध्यक्ष अजीत जैन ने बताया कि मुख्य अतिथि महापौर प्रहलाद पटेल होंगे। अध्यक्षता कलेक्टर राजेश बाथम करेंगे। विशेष अतिथि निगमायुक्त अनिल भाना एवं तहसीलदार ऋषभ ठाकुर होंगे। आयोजन में संगीतमय प्रस्तुति अशोक शर्मा, रिदम मिश्रा, अवनि उपाध्याय, प्रमोद सिसौदिया, आद्या तिवारी, रुबीना खान, शफीक मस्तान, जितेन्द्र चौहान, अल्फिया ख़ान, हेमलता चौहान, नरेश यादव, नरेन्द्र सिंह शेखावत, विपिन जैन, परम सिसौदिया, मनोज जोशी सहित अन्य कलाकार प्रस्तुति देंगे।

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Sat, 13 Sep 2025 15:18:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति में आयोजित होगी कविता प्रतियोगिता, 30 अक्टूबर तक स्वीकार होंगी स्व&रचित कविताएं https://acntimes.com/poetry-competition-will-be-held-in-memory-of-dr-jai-kumar-jalaj https://acntimes.com/poetry-competition-will-be-held-in-memory-of-dr-jai-kumar-jalaj एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रसिद्ध साहित्यकार एवं भाषाविद् डॉ. जयकुमार 'जलज' की स्मृति को बनाए रखने के उद्देश्य से उनकी पुत्रियों श्रद्धा घाटे एवं स्मिता हुम्बड़ द्वारा "डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति कविता प्रतियोगिता" का आयोजन किया जा रहा है। यह इस प्रतियोगिता का दूसरा वर्ष है। गत वर्ष आयोजित स्पर्धा महाविद्यालय विद्यार्थियों के लिए ही थी मगर इस वर्ष यह प्रतियोगिता दो चरणों में होगी। एक वर्ग रतलाम शहर के महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए रहेगा जबकि दूसरा वर्ग रतलाम शहर में निवासरत रचनाकारों के लिए रहेगा। आयोजन पूरी तरह डॉ. जलज की भावनाओं से जुड़ा है।

पहला वर्ग

यह वर्ग रतलाम शहर के कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए रहेगा। इसमें विजेताओं को पहला पुरस्कार 2500 रुपए, दूसरा पुरस्कार 1500 रुपए तथा तीसरा पुरस्कार 1100 रुपए का होगा।

दूसरा वर्ग

रतलाम शहर में निवासरत 50 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए रहेगा। पहला पुरस्कार 2500 रुपए, दूसरा पुरस्कार 1500 रुपए तथा तीसरा पुरस्कार 1100 रुपए का होगा।

स्व रचित कविताएं ही होंगी स्वीकार

कविताएं जमा कराने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर, 2025 रहेगी। स्पर्धा में भाग लेने के लिए (प्रथम वर्ग में) महाविद्यालय का नियमित विद्यार्थी और रतलाम शहर निवासी (द्वितीय वर्ग में) होना अनिवार्य है। प्रतियोगी द्वारा स्वरचित (अपनी लिखी हुई) कविता ही दी जाए। इसमें किसी तकनीक का सहारा न लिया जाए। कविता का विषय कुछ भी हो सकता है, परंतु व्यक्तिगत आक्षेप, असंसदीय शब्दावली, धर्म-संप्रदाय पर आरोपित रचनाएं स्पर्धा में सम्मिलित नहीं की जाएंगी। कविता हिन्दी भाषा में लिखी ही स्वीकार्य होंगी।

कवर पृष्ठ पर लिखे जानकारी

कविता के साथ प्रतियोगी अपना नाम नहीं लिखें। कवरिंग पृष्ठ पर कवि का नाम, रचना का शीर्षक, अध्यनरत कक्षा एवं संस्था का उल्लेख (प्रथम वर्ग में) करें। अपना पूरा पता, मोबाइल नंबर (वाट्सएप), ईमेल पता और फोटोग्राफ भी दें। कविताएं तीन प्रतियों में 30 अक्टूबर 2025 तक स्वयं उपस्थित होकर अथवा डाक द्वारा श्रद्धा घाटे द्वारा डॉ. पदम घाटे अरिहंत पैथोलॉजी लैब 15 वेदव्यास कॉलोनी, रतलाम (म.प्र.) 457001 (मो. 9425103802) पर उपलब्ध कराना होंगी।

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Fri, 05 Sep 2025 00:32:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
बच्चा कमाल का ! रतलाम के 10 वर्षीय जिष्णु दवे ने 365 दिन में बनाई 365 पेंटिंग, विश्व रिकॉर्ड बनाकर रोशन किया देश का नाम https://acntimes.com/Ratlam-10-year-old-Jishnu-Dave-made-world-record-with-this-painting https://acntimes.com/Ratlam-10-year-old-Jishnu-Dave-made-world-record-with-this-painting
  • कक्षा 5वीं का विद्यार्थी है जिष्णु दवे
  • पहले भी बना चुका है विश्व रिकॉर्ड
  • महर्षि संजय शिवशंकर दवे हैं पिता
  • एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के 10 वर्षीय जिष्णु दवे ने फिर कमाल कर दिया है। 365 दिन में 365 पेंटिंग्स बना कर जिष्णु ने एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इसे लेकर बच्चे के साथ ही उसके माता-पिता की भी सिर्फ रतलाम में ही नहीं बल्कि देश और विदेश में हो रही है।

    शहर के एक निजी विद्यालय में कक्षा 5वीं में पढ़ने वाले जिष्णु ने पेंटिंग बनाने का यह अनूठा अभियान 1 अगस्त, 2024 को शुरू किया था जो 1 अगस्त, 2025 तक जारी रहा। इस दौरान उसने रोज एक पेंटिंग बनाई। इस तरह जिष्णु ने 365 दिन में 365 आकर्षक पेंटिंग बना कर ‘वेब बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए जिष्णु के विद्यालय में समारोह आयोजित किया गया। इसमें ‘वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड के जूरी सदस्य शैलेन्द्र सिंह सिसौदिया, धरम यादव और कमलेश जोशी ने संयुक्त रूप से जिष्णु को प्रमाण-पत्र, मेडल एवं शील्ड प्रदान की।

    यह भी देखें... रुद्राक्ष से ऐसा प्रेम कि, सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में जिष्णु दवे ने बना दिए 3 विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ रुद्राक्षों के संकलन के लिए मिले विश्वस्तरीय सम्मान

    ‘ऐसे छात्रों से मिलती है पहचान’

    स्कूल संचालन समिति के सचिव कश्मीरसिंह सोढ़ी ने बधाई देते हुए कहा, ‘जिष्णु जैसे छात्र विद्यालय की पहचान होते हैं। उनकी उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करेगी।’ दलीपसिंह सोढ़ी एवं जोगिंदरसिंह सोढ़ी ने भी सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्राचार्य सुनीता राठौर ने कहा कि जिष्णु की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा और समर्थन मिले, तो बच्चे असंभव को भी संभव बना सकते हैं। प्रधानध्यापिक पूनम गांधी ने भी संबोधित किया। संचालन मीना बैरागी ने किया। आभार इंदिरा शुक्ला ने ज्ञापित किया।

    पिता का सीना हो गया चौड़ा

    पुत्र जिष्णु की इस ऐताहिस उपलब्धि से पिता ज्योतिषाचार्य महर्षि संजय शिवशंकर दवे का गर्व से सीना चौड़ा हो गया है। उन्होंने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए पुत्र की निरंतरता और समर्पण की प्रशंसा की है। दवे ने बताया कि बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के जिष्णु ने केवल आत्मप्रेरणा, लगन और अनुशासन के बलबूते यह असाधारण कार्य कर दिखाया। उनकी पेंटिंग्स में देशभक्ति, प्राकृतिक दृश्य, देवी-देवता, महापुरुषों तथा कार्टून पात्रों की रचनात्मक झलक देखने को मिलती है।

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    Sun, 31 Aug 2025 20:05:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कला और साहित्य : साहित्यकार प्रो. अज़हर हाशमी के रूहानियत भरे गीतों और कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति आज, 'बलिहारी गुरु आपकी' पुस्तक का विमोचन भी होगा https://acntimes.com/Prof-Azhar-Hashmis-spiritual-songs-and-poems-will-be-presented-in-a-musical-format-on-12th-July https://acntimes.com/Prof-Azhar-Hashmis-spiritual-songs-and-poems-will-be-presented-in-a-musical-format-on-12th-July एसीएन टाइम्स @ रतलाम । गीता मनीषी, वेदों के ज्ञाता, सर्वधर्म समभाव के प्रवक्ता, सौहार्द के संदेश वाहक और साहित्यकार स्व. अज़हर हाशमी के व्यक्तित्व और कृतित्व को अनूठे ढंग से प्रस्तुत करने के लिए 12 जुलाई को एक समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसमें सूफी संत और साहित्यकार, कवि और गीतकार प्रो. हाशमी के रूहानियत भरे गीतों और कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी। इस मौके पर ‘बलिहारी गुरु आपकी’ पुस्तक का विमोचन भी होगा।

    समारोह का आयोजन विद्यार्थी परिवार द्वारा 12 जुलाई को शाम 5.00 बजे होटल अजंता पैलेस के कॉन्फ्रेंस हाल में होगा। मुख्य अतिथि युवा संगीतकार सिद्धार्थ काश्यप होंगे। संगीतकार सिद्धार्थ काश्यप ने ही प्रो. हाशमी द्वारा आधी सदी पूर्व लिखी गई प्रसिद्ध रचना ‘राम वाला हिंदुस्तान चाहिए...’ को संगीतबद्ध करते हुए एल्बम जारी किया था। इस रचना को पार्श्व गायक रूपकुमार राठौड़ ने स्वरबद्ध किया था। यह रचना और एलबम आज भी काफी लोकप्रिय है। समारोह की अध्यक्षता रतलाम के मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार करेंगे। वे साहित्य मनीषी होने के साथ ही सामाजिक गतिविधियों में भी खासा दखल रखते हैं।

    ये देंगे संगीतमय प्रस्तुति

    आयोजन के दौरान प्रो. हाशमी के गीतों और कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी। प्रस्तुति जाने-माने गायक और फनकार सहित अन्य देंगे। इनमें शासकीय कन्या महाविद्यालय की संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष और प्रशिक्षक डॉ. स्नेहा पंडित, गायिका किरण छाबड़ा, संगीता जैन, जितेंद्र चौहान, अक्षद और पीयूष सहित अन्य शामिल हैं। इन कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रो. हाशमी की आध्यात्मक यात्रा प्रदर्शित की जाएगी जिसे ‘रूहानियत’ नाम दिया गया है। इसका विमोचन 9 जून को स्वयं अज़हर हाशमी ने किया था।

    शिष्य ‘बलिहारी गुरु आपकी’ द्वारा प्रस्तुत करेंगे कृतज्ञता भाव

    किसी भी व्यक्ति के जीवन को संवारने का काम गुरु करता है। प्रो. हाशमी ऐसे ही गुरुओं में शुमार हैं जिनकी सीख ने उनके शिष्यों को विभिन्न क्षेत्रों में पहचान दी है। इन शिष्यों ने अपने गुरु के प्रति अपने विचारों और संस्मरणों के माध्यम से कृतज्ञता ज्ञापित की है जिसे पुस्तक ‘बलिहारी गुरु आपकी’ का रूप दिया गया है। इस पुस्तक का विमोचन भी इस समारोह में अतिथियों द्वारा किया जाएगा।

    इन्होंने की आयोजन को सफल बनाने की अपील

    गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विद्यार्थी परिवार द्वारा आयोजित इस अनूठे आयोजन में ज्यादा से ज्यादा की संख्या में उपस्थित होने का अनुरोध प्रो. हाशमी के शिष्यों ने किया है। इनमें विद्यार्थी परिवार की डॉ. अनिला कंवर, डॉ. प्रवीणा दवेसर, श्वेता नागर, सतीश त्रिपाठी, हेमंत भट्ट, तुषार कोठारी, नीरज कुमार शुक्ला सहित अन्य शामिल हैं।

    संस्कृति विभाग ने दिया विशेष स्थान

    प्रो. अज़हर हाशमी की साहित्य सेवा और तपस्या को मप्र शासन के संस्कृति विभाग ने अपने विशेष कार्यक्रम ‘मध्य प्रदेश के गौरव’ में स्थान दिया है। संस्कृति विभाग ने अपनी इस शृंखला को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया है। इसमें विभाग द्वारा बताया गया है कि  ‘मध्यप्रदेश के गौरव’ प्रसिद्ध लेखक और चिंतक प्रो. अज़हर हाशमी प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर के अनेक सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं। इस प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की लेखनी मानवीय मूल्यों के मंडप तले भारतीय संस्कृति का अनुष्ठान करती है। संस्कृति विभाग के अनुसार प्रो. हाशमी के शब्दों की सकारात्मक ऊर्जा युवाओं में आत्मविश्वास, आशा और अनवरत कर्म करने का संचार करती है। 

    संस्कृति विभाग की प्रस्तुति

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    Sat, 12 Jul 2025 00:49:24 +0530 Niraj Kumar Shukla
    यह पुरस्कार तो बनता है ! प्रो. अजहर हाशमी को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने पर हो विचार, पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी की भारत सरकार से की मांग https://acntimes.com/Prof-Azhar-Hashmi-should-be-considered-for-Padma-award-Former-Home-Minister-Himmat-Kothari https://acntimes.com/Prof-Azhar-Hashmi-should-be-considered-for-Padma-award-Former-Home-Minister-Himmat-Kothari एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतनपुरी के रत्न प्रो. अज़हर हाशमी गहन अध्येता, लेखक, चिंतक अद्भुत रचनाकार के साथ साहित्य जगत के दीप्तिमान  दीपक थे। उनके निधन से साहित्य जगत के एक युग का अंत हो गया है, जिसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है। ऐसे बिरले व्यक्ति को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके लिए मप्र सरकार को भी अनुशंसा करनी चाहिए।

    यह मांग पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने श्रद्धांजलि देते हुए भारत सरकार से की है। कोठारी के अनुसार प्रो. हाशमी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश-विदेश में ख्याति प्राप्त की। उन्होंने दिल्ली के लाल किले से रचनाएं प्रस्तुत कर  हमारे शहर का मान बढ़ाया। सभी धर्मों  के सिद्धांत एवं उसके मर्म को गहनता से समझना। यह उनके जैसे बिरले व्यक्तिव्त के लिए ही संभव था। प्रो. हाशमी ऐसे रचनाकार रहे जिन्होंने धर्म, जाति, सामाजिक सीमाओं से खुद को परे रखा। उनका निधन देश व साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

    रतलाम में स्थापित हो प्रतिमा

    पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने भारत सरकार से यह मांग की है कि प्रो. अजहर हाशमी को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए। कोठारी ने मध्य प्रदेश के  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर यह मांग की कि साहित्य जगत के ऐसे अनमोल रत्न और सामाजिक एकता के प्रतीक, लेखक, चिंतक और रचनाकार की एक प्रतिमा रतलाम शहर में स्थापित की जाए। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी भारत सरकार को प्रो. हाशमी को पद्म पुरस्कार देने की सिफारिश की जाए। 

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    Mon, 16 Jun 2025 22:35:08 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रंगमंच और हम ! रंगमंच के लिए बढ़ रहीं चुनौतियां, सरकार का रुख भी उदासीन, चेतनाशील लोगों को इकट्ठा होकर इस दिशा में काम करने की जरूरत& अविजित सोलंकी https://acntimes.com/Theatre-and-us-Challenges-of-theatre-are-increasing-Governments-attitude-is-also-indifferent-Avijit-Solanki https://acntimes.com/Theatre-and-us-Challenges-of-theatre-are-increasing-Governments-attitude-is-also-indifferent-Avijit-Solanki एसीएन टाइम्स @ रतलाम । थिएटर (रंगमंच) किसी एक तबके के लिए नहीं है, यह सबके लिए है। इसका हर समुदाय और तबके लिए अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। मौजूदा दौर में रंगमंच के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकार का रुख इसके प्रति बहुत उदासीन है। ऐसे में इसका पुनःमूल्यांकन किए जाने की आवश्यकता है। चेतनाशील लोगों को इकट्ठे होकर ऐसे अवसर पैदा करने की जरूरत है जहां हम ऐसा काम करें जो रंगमंच के स्वर्णिम दौर को रिफलेक्ट करे, विमर्श और बहस पैदा करे, कोई सवाल खड़ा कर पाए।

    यह बात रवींद्र नाथ टैगौर स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर अविजित सोलंकी ने रतलाम में कही। वे युगबोध, जन नाट्य मंच एवं जनवादी लेखक संघ द्वारा जीडी अंकलेसरिया रोटरी हाल में आयोजित बैठकी (विमर्श) में रंगमंच और हम विषय पर बोल रहे थे। विमर्श में वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी, प्रोफेसर रतन चौहान तथा एडवोकेट यूसुफ जावेदी ने भी हिस्सा लिया। उनके द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देते हुए अविजित ने कहा कि आज कलाकार को पोलिटिकली कमिटेड होने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मेरी व्यक्तिगत रुचि रंगमंच रही है और मेरा शोध ‘रंगमंच व हिंसा’ के ऊपर रहा है। सोलंकी ने रंगमंच से जुड़ विभिन्न पहलुओं पर सिलसिलेवार जानकारी दी।

    चेतना का विकास कर इनसान बनाता है रंगमंच

    सोलंकी ने कहा कि रंगमंच हमारे जींस में है। शायद इंसान ने अपने आपको भविष्य में देखा, अपने आपको इतिहास में परखा होगा शायद तभी रंगमंच का इजाद हुआ होगा। यह चेतना का विकास कर इनसान को इनसान बनाता है। इससे व्यक्ति अपनी पहचान कर सकता है, अपने काम की समीक्षा भी कर सकता है। वह दूसरे के जीवन को भी देख सकता है। वर्तमान हालात में रंगमंच हमसे दूर होता जा रहा है, बाजार हमसे दूर कर देना चाहता है। इसी को देखते हुए रविंद्र नाथ टैगोर स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा तीन-तीन दिन की कार्यशाला की जा रही है इसमें यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि रंगमंच से हम खुद को कैसे जोड़ें, नए लोगों से कैसे मिलें और रंगमंच का मजा कैसे लें। हम कोशिश कर रहे हैं कि यह स्कूल एक वैकल्पिक नाट्य विद्यालय बने, यह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा या एमपी स्कूल ऑफ ड्रामा बनकर नहीं रह जाए।

    किसी एक तबके लिए नहीं है थिएटर

    सोलंकी के अनुसार कलाकार एकतरफा हो तो उसमें और जो हम विज्ञापन देखते हैं, उसमें कोई फर्क नहीं रह जाएगा। यह कला का उद्देश्य भी सार्थक नहीं करता। थिएटर किसी एक तबके के लिए नहीं है, यह सबके लिए है। इसका हर समुदाय और तबके लिए अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। अविजित ने अपने बचपन और थिएटर से जुड़ाव की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह रंगमंच को स्थानीय भाषा-बोली के माध्यम से लोकप्रिय बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने अपने गौंड समुदाय के बच्चों के साथ किए गए काम के बारे में भी बताया। सोलंकी ने करियर की दृष्टि से रंगमंच की उपयोगिता और संभावना पर भी प्रकाश डाला।

    रतलाम में स्थायी व्यवस्था करने का दिया सुझाव

    विमर्श के दौरान प्रो. रतन चौहान, महावीर वर्मा एवं समाजसेवी गुस्ताद अंकलेसरिया ने अविजित सोलंकी से चर्चा की। अंकलेसरिया ने तो सोलंकी से रवींद्र नाथ टैगोर स्कूल के माध्यम से रतलाम शहर में रंगकर्म के विकास के लिए कोई स्थायी उपक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। इस पर सोलंकी ने कहा कि वे इस बारे में वाइस चांसलर संतोष चौबे से चर्चा करने के लिए आश्वस्त किया।

    दिवगंत अज़हर हाशमी को दी श्रद्धांजलि, युगबोध के बारे में बताया

    इससे पूर्व सर्वप्रथम रतलाम के ख्यात साहित्यकार एवं दिवंगत अज़हर हाशमी को मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान युगबोध संस्था के संस्थापक सचिव एडवोकेट कैलाश व्यास ने दिवंगत हाशमी और युगबोध संस्था से जुड़ा एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि युगबोध की स्थापना 23 जनवरी 1977 को हुई थी। संस्थापक अध्यक्ष कमलेश भण्डारी थे। तब एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसके मुख्य अतिथि साहित्यकार श्रीकृष्ण सरल थे। अध्यक्षता डॉ. जयकुमार जलज ने की थी। संचालन अज़हर हाशमी ने किया था।

    ये रहे उपस्थित

    व्याख्यान से पहले रवींद्र नाथ टैगौर स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर अविजित सोलंकी का युगबोध, जन नाट्य मंच एवं जनवादी लेखक संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने किया। इस मौके पर सैलाना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं साहित्यकार डॉ. प्रदीप सिंह राव, डॉ. धर्मराज वाघेला, कीर्ति शर्मा, महावीर वर्मा, लगन शर्मा, ललित चौरड़िया, श्याम सुंदर भाटी, विक्रांत भट्ट, रीतेश पंवार, पत्रकार नीरज कुमार शुक्ला, बंटी लुईस, अनंत शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन एडवोकेट एवं रंगकर्मी यूसुफ जावेदी ने किया। आभार प्रदर्शन एडवोकेट कैलाश व्यास ने किया।

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    Fri, 13 Jun 2025 22:16:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    चर्चा रंगकर्म की : नाटक की रचना प्रक्रिया और उसके विभिन्न पक्षों पर विमर्श 12 जून को रतलाम में, टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर अविजित सोलंकी देंगे जानकारी https://acntimes.com/Discussion-on-the-process-of-creating-a-drama-and-its-various-aspects-will-be-held-in-Ratlam-on-June-12 https://acntimes.com/Discussion-on-the-process-of-creating-a-drama-and-its-various-aspects-will-be-held-in-Ratlam-on-June-12 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रंगकर्म को समझने और इसके विभिन्न पहलुओं को जानने के लिए एक बैठकी का आयोजन 12 जून 2025 को रतलाम में किया जा रहा है। इसे टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर अविजित सोलंकी संबोधित करेंगे।

    रंगकर्मी एडवोकेट कैलाश व्यास ने बताया बैठकी का आयोजन 12 जून 2025 (गुरुवार) को सुबह 10.30 बजे जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल में होगा। संस्था युगबोध, जन नाट्य मंच तथा जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में टैगोर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर अविजित सोलंकी नाटक की रचना प्रक्रिया और उसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे।

    रतलाम में हो रही तीन दिनी कार्यशाला

    बता दें कि, अविजित सोलंकी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से प्रशिक्षत हैं और इन दिनों रतलाम में चल रही तीन दिनी थिएटर मेकिंग वर्कशॉप में प्रशिक्षण दे रहे हैं। टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भोपाल के सह निर्देशक विक्रांत भट्ट के संयोजकत्व में वर्कशॉप का आयोजन रोटरी हाल में शाम 4 से रात 8 बजे तक हो रहा है। यह एक परिचयात्मक कार्यशाला है, जिसे 16 से 30 साल तक के युवाओं के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य अभिनय, समूह में कार्य करना और परफॉर्मेंस डिवाइज़िंग की मूलभूत बातों को सिखाना है। यह कार्यशाला प्रतिभागियों को परफॉर्मेंस क्रिएशन और सामूहिक कहानी करने की व्यवहारिक समझ प्रदान करने में सहायक होगी।

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    Wed, 11 Jun 2025 10:29:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    बड़ी क्षति ! साहित्य जगत में रतलाम को पहचान दिलाने वाले कवि साहित्यकार प्रोफेसर अज़हर हाशमी नहीं रहे, राजस्थान में पैत्रक गांव पिड़ावा में 11 जून को होगा अंतिम संस्कार https://acntimes.com/Big-loss-Renowned-poet-and-litterateur-Professor-Azhar-Hashmi-is-no-more-last-rites-will-be-held-on-June-11 https://acntimes.com/Big-loss-Renowned-poet-and-litterateur-Professor-Azhar-Hashmi-is-no-more-last-rites-will-be-held-on-June-11 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अपनी कविताओं, गज़लों, गीतों, आलेखों, व्याख्यानों के माध्यम से साहित्य जगत और देश-दुनिया में रतलाम को पहचान दिलाने वाले प्रो. अज़हर हाशमी का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने रतलाम के आरोग्यम हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। दिवंगत हाशमी का अंतिम संस्कार 11 जून (बुधवार) 2025 को सुबह 10 बजे उनके पैत्रक गांव राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिड़ावा गांव में होगा। प्रो. हाशमी को कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप, महापौर प्रहलाद पटेल सहित गणमान्यजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।

    प्रोफेसर अज़हर हाशमी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनका रतलाम के आरोग्यम हॉस्पिटल में उपचार चल रहा था। मंगलवार शाम करीब 6:08 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रोफेसर हाशमी की पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए इंदिरा नगर स्थित उनके निवास पर रखा गया।

    यहां से रात करीब पौने दस बजे उनकी पार्थिव देह को सड़क मार्ग से पैत्रक गांव पिड़ावा के लिए रवाना किया गया। दिवांगत हाशमी के साथ उनके छोटे भाई मुख्तार हाशमी, मज़हर हाशमी, सेवादार बापूसिंह भी पिड़ावा के लिए रवाना हुए।

    अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

    दिवंगत हाशमी के निधन का समाचार मिलते ही शोक लहर दौड़ गई। उनके शिष्य, साहित्य जगत, राजनीति से जुड़ी हस्तियां और आमजन उनके निवास पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप की ओर से मनोहर पोरवाल, बजरंग पुरोहित, जयवंत कोठारी, सोना शर्मा व मणिलाल जैन, जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम अनिल भाना, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, महापौर प्रहलाद पटेल, साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, प्रो. रतन चौहान, रंगकर्मी कैलाश व्यास, यूसुफ जावेदी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र कटारिया, रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश पुरी गोस्वामी, सचिव यश शर्मा बंटी, रोटरी क्लब के अश्विनी शर्मा, महाविद्यालय परिवार के संयोजक सतीष त्रिपाठी, डॉ. रत्नदीप निगम, मुबारिक शेरानी, पत्रकार आरिफ कुरैशी, तुषार कोठारी, हेमंत भट्ट, नीरज कुमार शुक्ला, मुबारिक शेरानी, अदिति मिश्रा, एडवोकेट मनमोहन दवेसर, अदिति दवेसर, शिक्षाविद् डॉ. प्रवीणा दवेसर, लेखिका श्वेता नागर, भरत गुप्ता, श्याम सुंदर भाटी, इनामुर शेख, पत्रकार  सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, राजनेता, अधिकारी, साहित्य जगत से जुड़ी हस्तियां और गणमान्यजन निवास पर पहुंच कर दिवंगत हाशमी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    प्रो. हाशमी का निधन प्रदेश और रतलाम की अपूरणीय क्षति- काश्यप

    प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने रतलाम के प्रसिद्ध चिंतक, लेखक, कवि, ज्योतिषि और साहित्यकार प्रोफेसर अज़हर हाशमी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। काश्यप ने कहा कि साहित्य मनीषी, हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार, मालवा के गौरव, गीतों के राजकुमार प्रो. अज़हर हाशमी के अवसान के साथ साहित्य जगत के एक युग का अंत हो गया। हाशमी जी से रतलाम की पहचान थी।

    काश्यप के अनुसार प्रो. हाशमी गहन अध्येता, लेखक, चिंतक और रचनाकार तो थे ही, एक सहज, सरल, मिलनसार व्यक्तित्व के धनी भी थे। उनकी रचनाओं को पूरे देश ने सम्मान प्रदान किया। कवि सम्मेलनों के सफल संचालन से लेकर कई पीढ़ियों के रचनाकारों के साथ कविता पाठ का गौरव उन्हें हासिल था। हर धर्म के नीति सिद्धांत उनकी ज़ुबान पर थे। प्रोफेसर हाशमी का निधन रतलाम ही नहीं मध्यप्रदेश की अपूरणीय क्षति है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

    इन्होंने भी दी श्रद्धांजलि

    दिवंगत साहित्यकार प्रो. हाशमी को पद्मश्री डॉ. लीला जोशी, उनके कवि मित्र फिरोजाबाद के पूर्व सांसद ओमपाल सिंह निडर, रतलाम के पूर्व डीआईजी सतीश सक्सेना, रतलाम के पूर्व कलेक्टर रहे प्रभात पाराशर, राजेंद्र शर्मा, राजीवचंद्र दुबे, जिला पंचायत सीईओ शृंगार श्रीवास्तव, साहित्यकार डॉ. संजय द्विवेदी, वरिष्ठ संपादक एवं मैनेजमेंट फंडा स्तंभ के लेखक एन. रघुरमन, वरिष्ठ संपादक शिवकुमार विवेक, रमेश राजपूत, अजय बोकिल, विक्रम विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डॉ. शैलेंद्र शर्मा, पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराधा गोखले, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के उज्जैन संभागाध्यक्ष प्रकाश शुक्ला, मप्र पत्रकार गैर पत्रकार संघ के प्रांतीय महामंत्री तरुण भागवत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशूराम निनामा आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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    Wed, 11 Jun 2025 00:29:50 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनाकार का संसार ! धरती से जुड़े कवि शशि भोगलेकर, धरती का कवि सदैव याद किया जाता है & प्रो. चौहान https://acntimes.com/Shashi-Bhoglekar-a-poet-connected-to-the-earth-the-poet-of-the-earth-is-always-remembered-ratan-Chauhan https://acntimes.com/Shashi-Bhoglekar-a-poet-connected-to-the-earth-the-poet-of-the-earth-is-always-remembered-ratan-Chauhan जनवादी लेखक संघ ने किया एक रचनाकार का रचना संसार का आयोजन

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । धरती से जुड़ा कवि सदैव जनमानस की स्मृति में रहता है। शशि भोगलेकर जी भी धरती से जुड़े कवि थे। उनकी कविता में हमारे गांव, श्रम करता मनुष्य, हल चलाता किसान, ढलती सांझ और उम्मीद भरी सुबह दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी कविताएं आज भी हमें प्रेरित करती हैं और बार-बार पढ़ने के लिए विवश करती हैं।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित 'एक रचनाकार का रचना संसार' शृंखला के अंतर्गत  शहर के रचनाकार रहे शशि भोगलेकर पर केंद्रित आयोजन में वरिष्ठ रचनाकार प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कोई भी रचनाकार रचनाकर्म से जुड़ने के पहले यह अवश्य तय करता है कि वह क्यों लिख रहा है, किसके लिए लिख रहा है और क्या लिख रहा है। कोई भी लेखन स्वांत: सुखाय नहीं होता क्योंकि रचनाकार समाज का एक अंश होता है और वह समाज की अभिव्यक्ति करता है। इसलिए उसका लेखन समाज के प्रति समर्पित होना चाहिए।

    विशेष अतिथि डॉ. एन. के. शाह ने कहा कि रचना प्रक्रिया बहुत कठिन है। जो रचनाकार अपना सर्वस्व इस रचनाकर्म के प्रति समर्पित कर गए आज उन्हें हम याद कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर भोगलेकर के परिवार के सदस्य राजेंद्र भोगलेकर, संतोष राव भोगलेकर और भतीजी मीनाक्षी मलिक ने भी विचार व्यक्त किए।

    इन्होंने रचनाएं पढ़ी

    आयोजन में शशि भोगलेकर की रचनाओं का पाठ जनवादी लेखक संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर, विनोद झालानी, संजय परसाई 'सरल', नरेंद्र सिंह पंवार, सुभाष यादव, नीता गुप्ता, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, मीनाक्षी मलिक, राजेंद्र भोगलेकर, प्रकाश हेमावत, दुर्गेश सुरोलिया, कीर्ति शर्मा, गौरीशंकर खींची, आई. एल. पुरोहित, संतोष भोगलेकर, कला डामोर, आशा श्रीवास्तव, हीरालाल खराड़ी, कैलाश वशिष्ठ, अनीस ख़ान, सीमा भूरिया, शिवराज जोशी सहित सुधिजन ने रचनाएं पढ़ीं।

    अगला आयोजन भंवरलाल भाटी पर

    'एक रचनाकार का रचना संसार' शृंखला की चौथी कड़ी शहर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षाविद् रहे भंवरलाल भाटी पर केन्द्रित रहेगी। यह आयोजन जुलाई माह के दूसरे रविवार को सुबह 11 बजे भगतसिंह पुस्तकालय शहर सराय रतलाम पर होगा। इसमें शहर के सभी सुधिजन स्व. भाटी की रचनाओं का पाठ करेंगे।

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    Mon, 09 Jun 2025 11:40:08 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कला&साहित्य :  'युगबोध' के ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का समापन 8 जून को, 'तोता' और 'जामुन का पेड़' नाटक का मंचन करेंगे बच्चे https://acntimes.com/Yugbodhs-summer-childrens-drama-camp-concludes-on-June-8 https://acntimes.com/Yugbodhs-summer-childrens-drama-camp-concludes-on-June-8 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । नन्हें कलाकारों को मंच से जोड़ने एवं उन्हें रंग कर्म की बारीकियों से अवगत कराने के उद्देश्य से 'युगबोध' नाट्य संस्था द्वारा प्रतिवर्ष ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष आयोजित हुए शिविर का समापन 8 जून (रविवार) को रात 8 बजे महाराष्ट्र समाज भवन, स्टेशन रोड रतलाम पर होगा। इसमें बाल कलाकार दो नाटकों का मंचन करेंगे।

    यह जानकारी युगबोध के अध्यक्ष एवं शिविर के प्रशिक्षक, वरिष्ठ रंगकर्मी ओम प्रकाश मिश्रा ने दी। उन्होंने बताया कि युगबोध द्वारा 2009 से प्रतिवर्ष ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना काल को छोड़कर यह शिविर प्रतिवर्ष आयोजित होता रहा। इसके माध्यम से शहर के बच्चों को रंगकर्म से जोड़ने की कोशिश की जाती है। शिविर पूर्णतः निःशुल्क होता है। इसमें बच्चों को रंगकर्म के प्रशिक्षण के साथ संवाद अदायगी, भाषा एवं उच्चारण तथा कला के विभिन्न पक्षों की जानकारी प्रदान की जाती है। इस वर्ष शिविर की शुरुआत 5 मई को की गई थी। शिविर में 15 बच्चों ने हिस्सेदारी की।

    'तोता' और 'जामुन का पेड़' का होगा मंचन

    मिश्रा ने बताया कि शिविर के दौरान बच्चों ने दो नाटक तैयार किए हैं। रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी 'तोता' और कृष्ण चंदर की कहानी 'जामुन का पेड़' का नाट्य रूपांतर साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने किया है।‌ नाटक 'तोता' हमारी शिक्षा पद्धति पर कटाक्ष करता है वहीं दूसरा नाटक 'जामुन का पेड़' व्यवस्था की अव्यवस्था को उजागर करता है। उन्होंने शहर के रंगकर्मियों एवं सुधिजनों से आयोजन में उपस्थित होने का आग्रह किया है।

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    Sat, 07 Jun 2025 23:09:16 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : कहानीकार वैदेही कोठारी के कहानी संग्रह गुनगनी ‘धूप सी कहानियां’ का विमोचन 1 जून को, पूर्व मंत्री उषा ठाकुर करेंगी विमोचन https://acntimes.com/Story-writer-Vaidehi-Kotharis-story-collection-Gungni-Dhoop-Si-Kahaniyaan-will-be-released-on-1-June https://acntimes.com/Story-writer-Vaidehi-Kotharis-story-collection-Gungni-Dhoop-Si-Kahaniyaan-will-be-released-on-1-June एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कहानीकार वैदेही कोठारी के प्रथम कहानी संग्रह "गुनगुनी धूप सी कहानियां" का विमोचन 1 जून (रविवार) को होगा। मध्यप्रदेश की पूर्व संस्कृति मंत्री एवं वर्तमान में महू विधायक उषा ठाकुर कहानी संग्रह का विमोचन करेंगी।

    विमोचन समारोह रविवार 1 जून को शाम चार बजे रतलाम प्रेस क्लब भवन पावर हाउस रोड पर आयोजित होगा। मुख्य अतिथि विधायक उषा ठाकुर होंगी। अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार बाबा सत्यनारायण मौर्य और भाजपा जिला प्रभारी प्रदीप पाण्डेय विशेष अतिथि होंगे। अध्यक्षता शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. प्रवीणा दवेसर करेंगी। विमोचन समारोह में नगर के साहित्य जगत से जुड़े लोग और बुद्धिजीवी भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

    साहित्य अकादमी की प्रथम कृति अनुदान योजना के तहत हुआ चयन

    उल्लेखनीय है कि कहानीकार वैदेही कोठारी के कहानी संग्रह को म. प्र. साहित्य अकादमी की प्रथम कृति अनुदान योजना में प्रकाशन हेतु चयन किया गया है। कहानी संग्रह में देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित लघुकथाओं को शामिल किया गया है। कोठारी के इस कहानी संग्रह का प्रकाशन इन्द्रा प्रकाशन भोपाल द्वारा किया गया है। यह कहानी संग्रह ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन और फ्लिपकार्ट आदि पर भी उपलब्ध है।

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    Sat, 31 May 2025 00:52:52 +0530 Niraj Kumar Shukla
    स्वागत&सत्कार : मशहूर संगीतकार साजिद अली खान का रतलाम आगमन पर मीर समाज ने किया स्वागत, अपने फिल्मी करियर पर की चर्चा, युवाओं को मार्गदर्शन भी दिया https://acntimes.com/Meer-Samaj-welcomed-famous-musician-Sajid-Ali-Khan-on-his-arrival-in-Ratlam https://acntimes.com/Meer-Samaj-welcomed-famous-musician-Sajid-Ali-Khan-on-his-arrival-in-Ratlam एसीएन टाइम्स @ रतलाम । फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद के सदस्य साजिद अली खान निजी यात्रा पर रतलाम पहुंचे। इस दौरान मीर समाज के लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने यहां अपने फिल्मी करियर पर चर्चा की और फिल्मी दुनिया में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए मार्गदर्शन भी दिया।

    रतलाम आगमन पर साजिद अली खान का स्वागत मीर समाज के प्रमुख सदस्यों मकसूद हुसैन, आबिद हुसैन, अन्नू मीर, आसिफ हुसैन, मेहंदी हसन, शाहिद मीर, पत्रकार समीर खान एवं अयान हुसैन आदि ने किया। इस दौरान साजिद अली ने पत्रकारों से चर्चा भी की। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में प्राप्त की और स्नातक की पढ़ाई प्रसिद्ध मीठीबाई कॉलेज से पूरी की। फिल्मी करियर सलमान खान की फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ से शुरू हुआ था। इसमें उन्होंने भाई वाजिद के साथ मिलकर संगीत दिया था। इसके बाद फिल्म ‘हैलो ब्रदर’ से उनकी जोड़ी को खास पहचान मिली। बता दें कि, साजिद-वाजिद ने एक था टाइगर, दबंग, वांटेड, हैलो ब्रदर सहित कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में हिट गीतों को संगीत दिया है। कई बार अपनी आवाज़ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध भी किया।

    संगीत की विरासत को बढ़ा रहे हैं आगे

    साजिद अली खान एक जाने-माने भारतीय संगीतकार, संगीत निर्देशक और पार्श्व गायक हैं। वे अपने दिवंगत भाई वाजिद अली खान के साथ मिलकर ‘साजिद-वाजिद’ की जोड़ी के रूप में बॉलीवुड में कई सुपरहिट फिल्में दे चुके हैं। उनका जन्म मुंबई में हुआ और वे मशहूर तबला वादक उस्ताद शराफत खान के पुत्र हैं। संगीत उन्हें विरासत में मिला है, जिसे उन्होंने मेहनत और समर्पण से एक नई ऊँचाई दी है। साजिद अली खान न सिर्फ एक सफल संगीतकार हैं बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। रतलाम दौरे पर उन्होंने मीर समाज के सदस्यों से स्थानीय गतिविधियों और युवाओं के मार्गदर्शन के बारे में भी चर्चा की।

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    Fri, 30 May 2025 16:08:55 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रसंगवश : नवाचार और उपलब्धि के संदेशवाहक डॉ. विकास दवे के प्रयोगों व प्रयासों से नए आयाम स्थापित करती मप्र साहित्य अकादमी &श्वेता नागर https://acntimes.com/Birthday-Special-Dr-Vikas-Dave-messenger-of-innovation-and-achievement-Shweta-Nagar https://acntimes.com/Birthday-Special-Dr-Vikas-Dave-messenger-of-innovation-and-achievement-Shweta-Nagar म. प्र. साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे के जन्मदिन (30 मई) पर विशेष

    श्वेता नागर

    'नवाचार और उपलब्धि' इस ध्येय वाक्य को आदर्श मानकर अपनी कर्मठ और सकारात्मक कार्यशैली से चरितार्थ करने वाले म. प्र. साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, साहित्य के क्षेत्र में कई नवीन प्रयोग और क्रांतिकारी प्रयासों से निरंतर साहित्य अकादमी, म. प्र.में  सफलता के नवीन आयाम स्थापित करते जा रहे हैं।

    साहित्य के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए नवाचार के माध्यम से साहित्य जगत में सकारात्मकता का माहौल तैयार हुआ जिसका प्रमाण यह है कि उन्होंने नई प्रतिभाओं को पहचान कर उनकी रचनाशीलता का पथ-प्रशस्त किया। इन नवीन प्रतिभाओं की सृजन शक्ति का स्थापित साहित्यकारो के साथ समन्वय किया। 'साक्षात्कार पत्रिका' इसका ज्वलंत उदाहरण है। युवाओं की ऊर्जा को वे न केवल पहचानते हैं अपितु उनको साहित्य से लेकर समाज और संस्कृति के उत्थान में भूमिका निभाने वाला महत्वपूर्ण घटक भी मानते हैं। वे स्वयं ऊर्जा से संपन्न हैं और चूँकि कर्मयोगी हैं इसलिए 'बिना रुके - बिना थके' भारतीय संस्कृति की उन्नति के ध्वज वाहक के रूप में आगे बढ़ते हुए कार्य करते रहते हैं

    स्वामी विवेकानंद का यह कथन 'उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर लो। 'इस संदेश का जीवंत प्रमाण है डॉ. विकास दवे का व्यक्तित्व। यूँ तो डॉ. विकास दवे के व्यक्तित्व में अनेक गुण हैं परंतु प्रमुख रूप से तीन गुण हैं- दृढ़ इच्छाशक्ति, जोखिम लेने की क्षमता और समय प्रबंधन। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का ही प्रमाण है कि साहित्य अकादमी, म.प्र. के सीमित संसाधनों के बावजूद अकादमी की साहित्यिक गतिविधियाँ मध्यप्रदेश के कोने-कोने में जीवंत हो उठी।

    पहला गुण : दृढ़ इच्छाशक्ति

    'कोरोनाकाल' जिसने जीवन की सभी गतिविधियों को लगभग अवरुद्ध कर दिया था उस समय डॉ. विकास दवे का निदेशक पद संभालना और अकादमी के कार्यों को संचालित करना रेगिस्तान को हरा-भरा करने की चुनौती के समान था और उन्होंने यह चुनौती स्वीकार करके साहित्य के सूखे को समाप्त किया। सामान्यतः होता यह है कि प्रबंधन के मामले में सरकारी मशीनरी का अपना किंतु -परंतु होता है जिसके कारण प्रगति की धारा बाधित होती है। डॉ. विकास दवे ने सरकारी मशीनरी के इस किंतु-परंतु को अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से  संकल्पों की सिद्धि में बदल दिया।

    दूसरा गुण : जोखfम लेने की क्षमता

    डॉ. विकास दवे के व्यक्तित्व का दूसरा गुण है उनके जोखिम लेने की क्षमता । इसका प्रमाण है उन्होंने शासकीय सेवा जो कि कहीं न कहीं मध्यमवर्गीय परिवार के लिए  आर्थिक सुरक्षा की गारंटी होती है और डॉ. विकास दवे  रतलाम जिले की आलोट तहसील के एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं, उस शासकीय सेवा को छोड़कर चुनौती के रुप में देवपुत्र पत्रिका के संपादकीय विभाग में  कार्य करना प्रारंभ किया ताकि वे अपने 'नवाचार और उपलब्धि' के आदर्श को प्राप्त कर सके और हुआ भी ऐसा ही। संघर्ष करते हुए वे देवपुत्र पत्रिका के प्रबंध संपादक बने। और यहां भी उन्होंने अपनी सफल कार्यशैली से देवपुत्र पत्रिका को पाठकों के बीच लोकप्रिय बनाया और प्रसार संख्या के मामले में शीर्ष पर स्थापित किया। जोखिम लेने की डॉ. विकास दवे की यह क्षमता युवाओं के लिए संदेश देती है कि कुछ अच्छा और लीक से हटकर करने के लिए जीवन में जोखिम लेना पड़ता है। 

    तीसरा गुण : समय प्रबंधन के धनी

    डॉ. विकास दवे के व्यक्तित्व का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण गुण है समय प्रबंधन। इस दृष्टि से देखा जाए तो डॉ. विकास दवे चलते-फिरते प्रबंधन संस्थान है। उनके इस गुण का उदाहरण है कि वे प्रबंधन की संपूर्ण क्षमता के साथ समय तत्व का पालन करते हुए साहित्य अकादमी, म. प्र. के निदेशक, देवपुत्र पत्रिका के प्रबंध संपादक और बाल साहित्य शोध संस्थान का एक साथ कार्यभार संभालते हुए समय प्रबंधन की त्रिवेणी बने हुए हैं।

    डॉ. विकास दवे की सृजनात्मकता को इन पंक्तियों के द्वारा रेखांकित किया जा सकता है-

    "ठोकरों का काम लगना, हैं  लगेंगी

    हार मत धीरज, की चलना जिंदगी है।

    उस मुसाफ़िर को ही मंज़िल मिल सकेगी ,

    जिनमें हिम्मत, हौंसले की ताज़गी है।"

    श्वेता नागर (लेखिका)

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    Fri, 30 May 2025 14:08:28 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक समीक्षा : ‘क्या भूलूं क्या याद करूं, मैं तो जियूं उन स्मृतियों को’ समाज को आदर्श जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देता संस्मरण& डॉ. खुशबू जांगलवा https://acntimes.com/Review-of-the-book-What-should-I-forget-what-should-I-remember-I-have-to-live-those-memories https://acntimes.com/Review-of-the-book-What-should-I-forget-what-should-I-remember-I-have-to-live-those-memories डॉ. खुशबू जांगलवा

    मेरी लेखनी जैसे अपनी बात कहने को आतुर हो, जो इस पवित्र यज्ञ की समिधा है या कुछ इस प्रकार कहें तो...

    स्वरूप से सुषमा

    स्वभाव से सौम्या

    अस्तित्व से समर्पिता

    ममत्व की प्रतिमा

    ...और एक ही पंक्ति में संपूर्ण अस्तित्व सिमट भी जाता है और विशिष्ट व्यक्तित्व प्रकट भी हो जाता है। वह हैं आदरणीय श्री डॉक्टर विकास जी दवे (निर्देशक- मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल) की अर्धांगिनी, धर्मपत्नी, प्रिया श्रीमती सुनीता दवे जी हम सभी की भाभी जी। उनके प्रेममय, त्यागमय, समर्पित जीवन को उनके द्वारा लिखित संस्मरण के माध्यम से जानने का अवसर प्राप्त हुआ और वह इस प्रकार हृदय को छुआ कि समीक्षा करना स्वाभाविक ही बन गया।

    जैसे आदरणीय भाई साहब सरल व्यक्तित्व के धनी समझ जाते हैं, भाभी जी को भी संग का रंग लगा कह सकते हैं या यूं समझें कि भाभी जी की सरलता भी भाई साहब में समा गई और जैसे दो देह एक आत्मा से हो गए। दोनों ही अपने विशिष्ट व्यक्तित्व की खुशबू से भरे हुए हैं। भाभी जी के द्वारा लिखित संस्मरण का शीर्षक ‘क्या भूलूं, क्या याद करूं, मैं तो जियूं उन स्मृतियों को’ (विकास यात्रा अभिनंदन ग्रंथ) में प्रकाशित हुआ। यह जैसे मात्र आलेख या संस्मरण भर नहीं है  अपितु प्रेम भरी पाती-सी अनुभूति करवाता है। प्रचलित पंक्ति है कि एक सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का साथ होता है। इस में कोई संदेह नहीं वह माता, पत्नी, बहन आदि हो सकते हैं। एक मां के गर्भ से जन्म लिया, एक पत्नी के रूप में भी स्त्री का संबंध और प्रतिभाशाली पुत्री का जन्म हो जाए तो फिर मां सरस्वती, लक्ष्मी और मां दुर्गा विभिन्न स्वरूपों में एक स्त्री ही होगी।

    किसी भी साहित्यिक रचना का शीर्षक ही संपूर्ण रचना का शीर्ष होता है। ‘क्या भूलूं, क्या याद करूं? मैं तो जियूं उन स्मृतियों को’ की बात करें तो कहते हैं ना कि याद उसकी आती है जिसे भूला जाता,  किंतु जो सदा, हर पल स्मृतियों में साथ रहता है फिर याद करने का तो प्रश्न ही नहीं आता, क्योंकि आदरणीय भाई साहब डॉक्टर विकास दवे जी का अधिकांश समय अपने कार्यस्थल मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल व पूरे मध्यप्रदेश में साहित्यिक गतिविधियों कार्यक्रमों में व्यतीत होता है। सामान्यतः सोशल मीडिया के माध्यम से वे कार्यक्रमों की जानकारी सीधे सांझा करते है।

    आलेख के अनुसार भाभी जी भी कैसे वियोग में भी संयोग को जीते हुए एक सशक्त नारी की तरह परिवार की जिम्मेदारियां का निर्वाह पातिव्रत्यधर्म को पालन करती हुई प्रतीत होती हैं। प्रथम पंक्ति में आप लिखती हैं कि ईश्वर ने मुझे अनुपम उपहार दिया है विकास जी के रूप में कितना आनंदित करने वाला भाव है कि ईश्वर के द्वारा प्राप्त उपहार जो कि पति के रूप में अनमोल है। एक ऐसा हृदय, जैसे पुष्प की कली के समान कोमल मना हो और वहीं भारतीय परंपराओं से घिरा मन हो।

    संस्मरण का स्मरण : भाभीजी ने संस्मरण में अपने निजी प्रसंग को कितना सरलता से सब के समक्ष रखा जो कि आज की पीढ़ी के लिए सीधे एक सीख और संदेश देता है। एक पंक्ति जो हृदय तक जाती है कि ऐसा परिवार हो जहां घर के मुखिया दादा-दादी, काका-काकी और बुआ आदि रिश्तों से भरपूर हो। जैसे संस्कारों की पाठशाला के सभी भिन्न-भिन्न कालखंड हों और वहां एक बच्ची का जन्म हुआ। वह है आदरणीय श्रीमती सुनीता दवे जी।

    पैकेज को वेटेज न दें, व्यक्ति को महत्व दें : व्यक्ति के गुण, व्यक्ति और कृतित्व को सर्वोपरि माना। उनकी दृष्टि में उनके पति जैसे व्यक्ति, गुण और कृतित्व की त्रिवेणी हैं। ये उनकी सादगी भरी निगाहों की सृष्टि है। आरंभ में वे लिखती हैं कि उनकी पहली मुलाकात अपने होने वाले पति विकास जी से 20 नवंबर 1994 को होती है। सुनीता जी ने भावुक हृदय से अपनी लेखनी को चलाया है। वह सुंदर दृश्य जो आजकल की पीढ़ी में जैसे कहीं खो गया हो, सुनीता जी के घर लड़के वालों का आना देखना, लज्जा के वसन ओढ़े चाय की ट्रे लेकर उनका सबके बीच जाना। संस्कारित परिवार का सुंदर चित्र हमारे समक्ष चित्रित हो जाता है। सामूहिक परिवार में दस-ग्यारह भाई-बहनों का होना।

    एक घर में वैवाहिक प्रसंग से प्रारंभ होकर विवाह से पूर्व मिलना। दो परिवारों का रिश्ता पक्का करना, जिसे खरी-पक्की करना कहते थे। वही परंपरागत पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित विचारों वाला दादाजी का स्वभाव। विवाह से पूर्व लड़का, लड़की नहीं मिल सकते, ना एक-दूसरे से बोल सकते।  ऐसी अवस्था में उनका सम्मान भी रखना और मर्यादाओं का पालन भी करना आदि।

    परिवारजन द्वारा जैसे-तैसे उनको मनाना, बीच आंगन में खड़े होकर मुश्किल से साठ मिनट में जीवन भर के साथ का तय हो जाना। वर्तमान पीढ़ी को एक संदेश है। आज जरा-जरा बात में विवाह से पूर्व एक-दूसरे से मोबाइल से बात कर करके इतना अधिक एक-दूसरे को समझ जाना कि सगाई तोड़ने का भी कार्यक्रम जल्दी हो जाना। वही सुनीता जी अपनी परंपराओं की ओढ़नी ओढ़ जैसे आंगन में खड़ी विकास जी से हूं, हां करते हुए अपना हृदय एक ही बार में दे बैठीं। शायद यह आजकल के विवाहों से अलग विवाह रहा। ऐसा वैवाहिक जीवन है जिसे दोनों ने आज तक बडी ही समझ और अटूट प्रेम से समेट कर रखा है। इधर, भाई साहब द्वारा संपूर्ण जीवन के प्रण से सुनीता जी को पहले से ही अवगत कराना कि विवाह पश्चात भी वे अपने जीवन को राष्ट्र को समर्पित कर जीते रहेंगे और सुनीता जी उनकी शक्ति बनकर उनके इस महायज्ञ में उनका साथ देंगी आदि। हुआ भी यही, सुनीता जी ने कभी भी सामान्य स्त्रियों की तरह अपनी कोई मांग न रखी।

    संस्मरण की एक-एक पंक्ति एक-एक शब्द समर्पण और त्याग की सुवास से सुवासित है। यह संस्मरण हर युवक-युवती को वाचन करना चाहिए जो सिर्फ मैं और मेरा का, पैकेज को वेटेज या लव मैरेज या लिव इन रिलेशनशिप के चक्रव्यूह में अपने आप को फंसाकर आधुनिकता की आंधी में भटक रहें हैं। संयुक्त परिवार एक परंपरा है, रूढ़ियां नहीं हैं। विवाह परमात्मा के द्वारा बनाया गया कोई दुर्घटना न है, संयोग है। शिक्षा कोई जॉब का पैकेज नहीं है, सशक्त और संस्कारित इंसान बनाने की विद्या है।

    जहां एक ओर सुनीता जी की सरलता और दूसरी ओर डॉक्टर विकास जी की समझ और परिवार की सहमति ने इस मुलाकात को विवाह के अंजाम तक पहुंचाया और विवाह उपरांत सुनीता जी को आगे की पढ़ाई का अवसर प्रदान किया। डॉ. विकास जी ने सुनीता जी को मात्र घर सजाने या जिम्मेदारियों को उठाने के लिए नहीं वरन उनके व्यक्तित्व के विकास को भी ध्यान में रखते हुए उन्हें उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान किया और ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एम. फिल. आदि करने को प्रेरित किया। फिर प्यारे से बच्चों (हार्दिक और हर्षिता) का जन्म होना आदि-आदि।

    कुछ एक प्रसंग को लिखते हुए सुनीता जी की आंखों से अश्रु की धारा बहती हुई महसूस कर सकेंगे। जीवन के सुख-दुख के आरोह-अवरोह के क्रम में संयोग के बाद वियोग भी आता है। जो आज तक चल रहा है। विकासजी राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तित्व है जिसके चलते तब भी उनका राष्ट्र प्रेम बना रहता और आज भी भ्रमण होता रहता है। ऐसे समय सुनीता जी वियोग में स्वयं में सशक्त नारी का प्राकट्य कर स्वयं को व परिवार को संभाले रहती है। आपने इस संस्मरण में कई  भावनात्मक प्रसंगों को व्यक्त किया। जैसे एक भारतीय नारी द्वारा अपने पति को सर्वोपरि मानना, पति में मित्र, सहयोगी, और गुरु आदि के भी दर्शन करती है सामान्यत देखा जाता है कि पति अगर उच्च पद पर प्रतिष्ठित हो तो पत्नी को स्वाभाविक पद का मद आ जाता लेकिन आदरणीय भाभी जी बड़ी ही सादगी से भरपूर हैं, वे यदा-कदा जहां कार्यक्रमों में उपस्थित होती भी हैं तो स्वाभाविक ही उनकी सरलता, सादगी और सौम्यता आकर्षित कर लेती हैं।

    इस प्रकार निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि सम्पूर्ण संस्मरण समाज को एक आदर्श जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। 

    पुस्तक का नाम : विकास यात्रा ( अभिनंदन ग्रंथ: डॉक्टर विकास दवे)

    शीर्षक : क्या भूलूं क्या याद करूं, मैं तो जियूं उन स्मृतियों को

    लेखिका : सुनीता दवे इन्दौर (म. प्र.)

    संपादक : डॉ. कविता भट्ट, 'शैलपुत्री'

    प्रकाशक : संदर्भ प्रकाशन, भोपाल (म. प्र.)

    (समीक्षक चित्रकार और लेखिका हैं जो यज्ञ माँ कला एवं साहित्य निलय, रतलाम (म. प्र.) की निवासी हैं)

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    Sun, 18 May 2025 15:35:04 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ऑब्जर्वेशन ! प्रो. अज़हर हाशमी की नज़र में ऐसा है आंखे तरेरता सूरज, आप भी पढ़ें और दूसरों को पढ़ाएं https://acntimes.com/Observation-In-the-eyes-of-Prof-Azhar-Hashmi-the-glaring-Sun-is-like-this https://acntimes.com/Observation-In-the-eyes-of-Prof-Azhar-Hashmi-the-glaring-Sun-is-like-this सूरज 'ऑफिसर-इन-चार्ज'

    'लू करती है 'लाठी-चार्ज'

    सूखे कुएँ, नदी, झरने

    जल हेतु जन के धरने

    कैसे बुझ पाएगी प्यास ?

    सोचें, मिलकर करें प्रयास।

    ***

    सूरज आग-बबूला है

    गुस्से से मुँह फूला है

    दहके खेत और खलिहान

    झुलसे झुग्गी और मकान

    कैसे मिट पाएगा त्रास ?

    सोचें, मिलकर करें प्रयास।

     ***

    सूरज खुश हो सकता है

    जग के दुःख धो सकता है

    काटें कभी नहीं जंगल

    नदियों में फिर होगा जल

    सहेजें धरती की हर साँस।

    सोचें, मिलकर करें प्रयास।

    ***

    रचना प्रो. अज़हर हाशमी की पुस्तक ‘अपना ही गणतंत्र है बंधु !’ से साभार।

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    Fri, 18 Apr 2025 17:06:14 +0530 Niraj Kumar Shukla
    बातें कवियन की : साहित्य के दिग्गज जब हुए 'अंडर ऐज'& आशीष दशोत्तर https://acntimes.com/Kaviyan-ki-Baatein-When-the-giants-of-literature-became-under-age-Ashish-Dashottar https://acntimes.com/Kaviyan-ki-Baatein-When-the-giants-of-literature-became-under-age-Ashish-Dashottar आशीष दशोत्तर

    साहित्य साधना में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले दिग्गजों के क़रीब जब बैठो तो उनकी ज़िन्दगी के कई ख़ूबसूरत पहलू उभर कर सामने आते हैं। इन पहलुओं में जीवन का संघर्ष भी होता है, वे यादगार लम्हे भी होते हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता, वे रोचक बातें भी होती हैं जिनसे ज़िन्दगी गुलज़ार होती है।

    ये खूबसूरत लम्हें जब कभी मिलते हैं तो मुझ जैसा तालिबे इल्म इन्हें अपनी स्मृतियों में क़ैद करने की कोशिश करता है क्योंकि ये हमारी धरोहर हैं, हमारी थाती हैं। इन की बातें सुनने से नई रोशनी भी मिलती है और उन पलों को महसूस करने का मौका भी मिलता है जो आज के वक़्त में असंभव से हो चले हैं।

    यहां हम बात कर रहे हैं साहित्य के दो दिग्गजों की। एक हैं राष्ट्रीय स्तर पर अपने गीतों के माध्यम से पहचान बना चुके वरिष्ठ गीतकार, चिंतक, प्रवचनकार, अंक ज्योतिष विशेषज्ञ प्रो. अज़हर हाशमी जिनकी वाणी में मधुरता है, शब्दों में वैविध्य और लेखन में निरंतरता। दूसरे साहित्य साधक हैं वरिष्ठ कवि और अनुवादक प्रो. रतन चौहान। सादगी के पर्याय प्रो. चौहान ने जयशंकर प्रसाद की कामायनी का लयात्मकता के साथ अंग्रेज़ी अनुवाद किया। निराला की राम की शक्ति पूजा, सरोज स्मृति जैसी रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया। ग़ालिब और मुक्तिबोध भी उनके अनुवाद में शामिल हुए।

    बहरहाल, इन दोनों वरिष्ठ साहित्य साधकों की विद्वता और उपलब्धियां अपनी जगह परंतु इनकी ज़िन्दगी से जुड़े कुछ रोचक पहलुओं को हम अपनी स्मृतियों में क़ैद करते हैं। ये दोनों शख्सियतों ने विक्रम विश्वविद्यालय से ही शिक्षा प्राप्त की। हाशमी जी उज्जैन में तो चौहान साहब रतलाम कॉलेज में रहे। उस समय इस विश्वविद्यालय के साथ दो अन्य विश्वविद्यालय भी जुड़े थे और तीनों विश्वविद्यालय की मेरिट सूची बना करती थी। 1965 की प्रावीण्य सूची में प्रो. रतन चौहान ने स्थान पाया और 1966 की प्रावीण्य सूची में प्रो. अज़हर हाशमी अव्वल रहे। इनके साथ पढ़ने वाली शख्सियतों भी कम नहीं थीं। सुदीप बनर्जी, विनोद पांडेय, रूप पमनानी, सुदीप बनर्जी की बहन, गुलशन ओबेरॉय, अमरजीत कौर और भी बहुत। ये सब ऐसी शख्सियतें थीं जो उस दौर में तीनों यूनिवर्सिटी में अपनी विद्वत्ता के लिए पहचानी जाती थीं। जब भी वाद विवाद, भाषण स्पर्धाएं हुआ करती तो ये सभी बढ़ चलकर हिस्सा लिया करते और अपने वक्तत्व कला का परिचय दिया करते।

    वह दौर साहित्य की दृष्टि से बहुत दुर्लभ था। उज्जैन में डॉ. हरिवंश राय बच्चन जैसे विद्वानों का सान्निध्य हाशमी जी को मिला। डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन के वे प्रिय शिष्य रहे ही। इधर, रतलाम कॉलेज में वीरेंद्र मिश्र, भवानी प्रसाद मिश्र, गोपाल दास ‘नीरज’, रामकुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’, आलम फतेहपुरी, हक़ कानपुरी जैसे विद्वान साहित्यकारों से मिलने का सौभाग्य प्रो. रतन चौहान को मिला। जब वह ग्वालियर में थे तब फिराक गोरखपुरी साहब का भी आगमन हुआ था।

    अपने दौर के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों के बीच रहकर इन्होंने जो कुछ पाया उससे बहुत अधिक साहित्य जगत को प्रदान किया। आज ये दोनों शख्सियतें जिस मुकाम पर हैं वह हम जैसे साहित्य के विद्यार्थियों के लिए बहुत प्रेरणादायक हैं।

    बहरहाल, इन दोनों के जीवन से जुड़ा यह रोचक संस्मरण है। ये दोनों अपने विद्यार्थीकाल में इतने प्रखर हुआ करते थे कि अपनी पढ़ाई कम उम्र में ही पूरी कर लिया करते थे। प्रो. अज़हर हाशमी ने जब हायर सेकंडरी उत्तीर्ण की तब राजस्थान में हायर सेकंडरी के लिए निर्धारित उम्र को भी छू नहीं पाए थे, यानी अंडर ऐज ही थे। इधर, प्रो. रतन चौहान प्रारंभ से ही प्रखर रहे और उन्हें चौथी कक्षा पढ़ना ही नहीं पड़ी। तीसरी से सीधे पांचवी में पहुंच गए। लिहाजा वे भी आगे जाकर अंडर ऐज ही रहे।

    इन दोनों शख्सियतों से जुड़ी ये महत्वपूर्ण बातें बताती हैं कि हम उनके बीच हैं और इनके जीवन से जुड़े कई संदर्भों से आज भी दूर हैं। आइए, ऐसी शख़्सियतों के करीब जाएं इसे मिले उनके पास बैठें इसे बतियाएं। यक़ीनन हमें वह सबकुछ कुछ हासिल होगा, जो हमारी ज़िन्दगी में कभी न कभी प्रेरक बनेगा।

    ---

     आशीष दशोत्तर

    12/2 - कोमल नगर

    रतलाम – 457001

    मध्यप्रदेश

    मो. 9827084966

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    Mon, 31 Mar 2025 11:30:05 +0530 Niraj Kumar Shukla
    यादों के झरोखे से ! 'नीरज की यादें, नीरज की बातें और नीरज के गीत' आयोजन 23 मार्च को, नीरज जन्मशती वर्ष पर वनमाली सृजन केन्द्र करेगा आयोजन https://acntimes.com/Neerajs-memories-Neerajs-words-and-Neerajs-songs-event-on-23rd-March https://acntimes.com/Neerajs-memories-Neerajs-words-and-Neerajs-songs-event-on-23rd-March एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सुप्रसिद्ध गीतकार रहे गोपाल दास 'नीरज' के जन्मशती प्रसंग पर "नीरज की यादें, नीरज की बातें और नीरज के गीत" कार्यक्रम का अनूठा आयोजन किया जा रहा है। आयोजन 23 मार्च (रविवार) 2025 को सुबह 11 बजे अजंता पैलेस रतलाम पर होगा। वनमाली सृजन केंद्र रतलाम द्वारा संस्था हम लोग, अनुनाद, राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति और युगबोध की सहभागिता से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कार्यक्रम संयोजक विनोद झालानी ने बताया कि सत्तर वर्षों तक मंच से अपने गीतों के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाने और साहित्य के दामन को कभी न छोड़ने वाले गीतकार नीरज जी का यह जन्मशती वर्ष है। इस वर्ष के तहत "मुझको याद किया जाएगा" शीर्षक से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें कवि नीरज से जुड़े संस्मरण भी साझा होंगे। उनके साहित्यिक जीवन पर कुछ बातें भी होंगी और उनके लिखे गीतों को गुनगुनाया भी जाएगा।

    ये ताजा करेंगे स्मृतियां और गाएंगे गीत

    झालानी ने बताया कि नीरज की स्मृतियों को ताज़ा करेंगे नीरज के साथ कई बार मंच साझा कर चुके वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अज़हर हाशमी, इंदौर के वरिष्ठ अभिभाषक बी. एल. पावेचा, वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास, कवि धमचक मुलथानी, चिंतक विष्णु बैरागी और छायाकार लगन शर्मा। नीरज जी के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालेंगे वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला एवं डॉ. शोभना तिवारी। नीरज के सुप्रसिद्ध गीतों की अभिव्यक्ति प्रदान करेंगे नीरज की अनेक रचनाओं को कंठस्थ करने वाले विनोद झालानी, वरिष्ठ रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र, रंगकर्मी श्याम सुंदर भाटी, युवा गायिका अवनि उपाध्याय एवं रिदम मिश्रा।

    आयोजन में शामिल होने के लिए इनका है आग्रह

    वनमाली सृजन केन्द्र रतलाम के अध्यक्ष आशीष दशोत्तर, हम लोग के अध्यक्ष सुभाष जैन, अनुनाद के अध्यक्ष अजीत जैन, राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पंवार एवं नरेन्द्र सिंह डोडिया, युगबोध के अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्र ने नगर के सुधिजनों से  आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Thu, 20 Mar 2025 22:07:27 +0530 Niraj Kumar Shukla
    गीत संग्रह का विमोचन : आशीष के गीतों में लय, लालित्य और अक्षरों का अनुशासन है& प्रो. अज़हर हाशमी https://acntimes.com/Ashishs-songs-have-rhythm-grace-and-discipline-of-letters-Prof-Azhar-Hashmi https://acntimes.com/Ashishs-songs-have-rhythm-grace-and-discipline-of-letters-Prof-Azhar-Hashmi आशीष दशोत्तर के गीत संग्रह के विमोचन अवसर पर कहा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । किसी रचनाकार ने कविता की कशीदाकारी भी की हो और गीतों की गागर भी छलकाई हो, सरगम के सात स्वरों और इंद्रधनुष के सात रंगों की तरह विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट साहित्य सृजन करते हुए विनयशीलता के दामन को थामे रखा हो, तो यह एक रचनाकार की सफलता का द्योतक होता है। आशीष दशोत्तर के गीतों में लय, लालित्य और आशाओं का आदित्य उदित होता है। उनके गीतों में अक्षरों का अनुशासन है तो छंदबद्धता का सिंहासन भी। ये गीत साहित्य में अपना महत्वपूर्ण स्थान सुनिश्चित करेंगे।

    उक्त विचार सुप्रसिद्ध गीतकार एवं वरिष्ठ साहित्यविद प्रो. अज़हर हाशमी ने आशीष दशोत्तर के सद्य: प्रकाशित गीत संग्रह "एक टुकड़ा धूप का" का विमोचन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीत तुकबंदियों का तूफान नहीं, मानवीय मूल्यों का मकान होता है। गीतों में आशीष ने अक्षरों की अभ्यर्थना में रत रहते हुए छंदानुशासन की छतरी के नीचे गीत की गागर छलकाई है। गीत जिस अनुशासन और गंभीरता की मांग करते हैं, वह यहां नज़र आता है। आशीष का सृजन सुखद भविष्य की आशा जगाता है।

    संभावनाओं के द्वार खुलते हैं- प्रो. रतन चौहान

    अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि और अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि आशीष गीत विधा में संभावनाओं के नए द्वार खोलते हैं। उनकी निरंतर अध्ययनशीलता और सृजनशीलता यह विश्वास जगाती है कि उनका सृजन साहित्य जगत में रेखांकित होगा। निरंतर सृजन करना तभी संभव होता है जब निरंतर अध्ययन हो। आशीष के यहां भाषा का वैविध्य भी है और सृजन का सामर्थ्य भी। इस अवसर पर मौजूद कवि संजय परसाई 'सरल' एवं पत्रकार हेमंत भट्ट ने भी नए गीत संग्रह पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।

    90 गीतों में ज़िन्दगी के स्वर, प्रो. हाशमी को समपर्पित है संग्रह

    आशीष दशोत्तर के गीत संग्रह "एक टुकड़ा धूप का" में 90 गीत संग्रहित हैं जो ज़िन्दगी के स्वरों को आवाज़ देते हैं। इंक पब्लिकेशन प्रयागराज से प्रकाशित इस पुस्तक में आशीष ने जीवन की विविधताओं और विसंगतियों को गीतों के जरिए आवाज़ दी है। यह संग्रह वरिष्ठ गीतकार प्रो. अज़हर हाशमी को समर्पित है। इस संग्रह के गीतों का अंदाज़ वैविध्य का परिचय देता है। एक गीत में वे कहते हैं-

    वक़्त ने जो दर्द हैं दिल पर लिखे,

    ज़ख्म वो गहरे भला किसको दिखे।

    दूरियां इतनी हुई हैं क्या कहें,

    आदमी हैं आदमी से बेरुखे।

    एक तरफा हो रहे हैं इन दिनों,

    फ़ैसले ऐसे किसे मंज़ूर हों?

    उल्लेखनीय है कि युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर की यह 21वीं किताब है और दूसरा गीत संग्रह। विभिन्न विधाओं में आशीष की रची गई पुस्तकों को सुधी पाठकों का स्नेह प्राप्त हो रहा है।

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    Tue, 11 Mar 2025 23:53:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    एक और अनूठा आयोजन ! 'सुनें सुनाएं' का 30वां सोपान आधी आबादी के नाम, महिलाओं पर, महिलाओं द्वारा लिखी रचनाओं का महिलाएं करेंगी पाठ https://acntimes.com/The-30th-phase-of-Sunaye-Sunaye-will-be-dedicated-to-half-the-population https://acntimes.com/The-30th-phase-of-Sunaye-Sunaye-will-be-dedicated-to-half-the-population एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक गतिविधियों का प्रेरक और पर्याय बनते जा रहे 'सुनें सुनाएं' आयोजन का तीसवां सोपान महिलाओं को समर्पित रहेगा। 2 मार्च (रविवार) को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल रतलाम पर आयोजित कार्यक्रम में महिला विषयक रचनाओं का पाठ किया जाएगा। इन रचनाओं की लेखिकाएं महिलाएं हैं और रचनाओं का पाठ भी महिलाएं ही करेंगी।

    आधी आबादी को समर्पित इस सोपान में 10 महत्वपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी। डॉ. इन्दु सिन्हा द्वारा गगन गिल की रचना 'लड़की अभी उदास नहीं है', रश्मि शर्मा द्वारा सुषमा अरोड़ा की कविता 'स्त्री हूँ मैं', रजनी व्यास द्वारा अमृता प्रीतम की रचना 'मैं तुम्हें फिर मिलूंगी', प्रिया लोदवाल द्वारा कोकिला पारेख की कविता 'गर्व है मुझे मैं नारी हूं', डॉ. अदिति व्यास द्वारा मनीषा शुक्ला की रचना 'दाल मखनी', नूतन मजावदिया द्वारा श्रद्धा शौर्य की रचना 'हे, विरहनी व्यर्थ के आलाप गाना छोड़ दे', डॉ. स्वर्णलता ठन्ना द्वारा अनामिका की रचना 'स्त्रियां', भाग्यश्री प्रजापत द्वारा अनामिका अंबर की रचना 'ओंस की बून्दें हैं हम', डॉ. गीता दुबे द्वारा मालिनी गौतम की रचना 'पहले जैसा होना संभव नहीं' तथा योगिता राजपुरोहित द्वारा निर्मला पुतुल की रचना 'उतनी दूर मत ब्याहना' का पाठ किया जाएगा। इस सोपान के समस्त सूत्र महिलाओं के हाथों में ही रहेंगे। 

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना का पाठ नहीं करता है बल्कि अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ होता है। समय पर प्रारंभ और समय पर समाप्त होने वाले इस आयोजन में उपस्थित होने का 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजनों से आग्रह किया है। आप स्वयं भी आएं और अन्य रचनाधर्मियों को भी साथ लाएं।

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    Fri, 28 Feb 2025 20:07:44 +0530 Niraj Kumar Shukla
    उपलब्धि : पर्यावरण डाइजेस्ट के संपादक डॉ. खुशालसिंह पुरोहित 'संपादक रत्न' की उपाधि से सम्मानित, नाथद्वारा में हुए पाटोत्सव एवं ब्रजभाषा समारोह 2025 में मिला सम्मान https://acntimes.com/Editor-of-Paryavaran-Digest-Dr-Khushal-Singh-Purohit-honoured-with-the-title-of-Editor-Ratna https://acntimes.com/Editor-of-Paryavaran-Digest-Dr-Khushal-Singh-Purohit-honoured-with-the-title-of-Editor-Ratna एसीएन टाइम्स @ रतलाम । पर्यावरण की राष्ट्रीय पत्रिका "पर्यावरण डाइजेस्ट" के संपादक डॉ. खुशालसिंह पुरोहित को ‘संपादक रत्न’ की मानद उपाधि प्रदान की गई। पुरोहित को यह उपाधि उनके हिंदी पत्रिका संपादन के क्षेत्र में अनुपम योगदान के लिए राजस्थान के नाथद्वारा में पाटोत्सव एवं ब्रजभाषा समारोह 2025 के दौरान प्रदान की गई।

    साहित्य मण्डल नाथद्वारा के तत्वावधान में प्रसिद्ध भगवताचार्य पण्डित मदन मोहन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित 2 दिवसीय समारोह का आयोजन हुआ। इसमें राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, गुजरात, आंध्रप्रदेश और हरियाणा से आए साहित्यकारों, संपादकों, लोककलाकारों एवं पत्रकारों ने विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रज भाषा कवि सम्मेलन रहा जिसमें कवियों ने देर रात तक श्रोताओं को ब्रज रस से आनंदित किया।

    कृतियों का लोकार्पण भी हुआ

    सामारोह में हिंदी एवं ब्रज भाषा साहित्यकारों, संपादकों, लोककलाकारों, सर्वोच्च अंक प्राप्त विद्यार्थियों एवं पुरजन सम्मान के साथ ही सद्य प्रकाशित कृतियों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। अंत में साहित्य मण्डल नाथद्वारा के प्रधानमंत्री श्यामप्रकाश देवपुरा ने सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। 

    40 वर्ष से हो रहा आयोजन

    बता दें कि, भगवान श्री कृष्ण की आराधना, ब्रज मंडल की वंदना और मेवाड़ की पावन धरा पर ब्रज संस्कृति के पालन पोषण का यह अनुष्ठान पिछले चालीस वर्षों से नियमित हो रहा है।

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    Mon, 24 Feb 2025 23:29:57 +0530 Niraj Kumar Shukla
    काव्य गोष्ठी : दरकते सौहार्द्र को थामकर प्रेम का पुल बनाती है कविता, गायब हो रही प्राकृतिक संपदा को बचाने का संदेश भी दे ती है https://acntimes.com/ratlam-Poetry-symposium-of-Janwadi-Lekhak-Sangh-organized https://acntimes.com/ratlam-Poetry-symposium-of-Janwadi-Lekhak-Sangh-organized एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कविता मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती है। टूटते रिश्तों को जोड़ती है। दरकते सौहार्द के बीच पुल बनती है। हमारे जीवन से गायब हो रही प्राकृतिक संपदा को बचाने का संदेश देती है और हमें जीवन के शृंगार से परिचित करवाती है।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में उभर कर सामने आए। रचनाकारों ने अपनी विविध रंगी रचनाओं से गोष्ठी को ऊंचाइयां प्रदान की। वर्तमान संदर्भों में मनुष्यता को बचाने, अंधे विश्वासों के नाम पर इंसान को मौत के दलदल में धकेलने और मूलभूत प्रश्नों से मुंह फेरने का काम हो रहा है, जिसका बखान कविताओं में हुआ। प्रस्तुत कविताओं ने आम आदमी के दर्द की अभिव्यक्ति और मानवीय सरोकारों को सामने लाने में अपनी भूमिका निभाती नज़र आई। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्याम माहेश्वरी ने की। जनवादी लेखक संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र का अभिनंदन करते हुए संस्था की रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी।

    इन्होंने किया रचना पाठ

    गोष्ठी में वरिष्ठ कवि श्याम माहेश्वरी, रतन चौहान, प्रणयेश जैन, नरेन्द्र गौड़, रणजीत सिंह राठौर, ओमप्रकाश मिश्र, रामचंद्र फुहार, हरिशंकर भटनागर, नरेंद्र सिंह डोडिया, श्याम सुंदर भाटी, जितेंद्र सिंह पथिक, हीरालाल खराड़ी, एस. के. मिश्र, मांगीलाल नगावत, आशा श्रीवास्तव, कीर्ति शर्मा, गीता राठौर, जवेरीलाल गोयल, दिलीप जोशी, शिवराज जोशी, एम. के. व्यास, चरणसिंह जाधव ने रचनाओं से गोष्ठी को सार्थक बनाया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया।  आभार जलेसं अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने माना। आयोजन में सुधिजन मौजूद रहे।

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    Sun, 23 Feb 2025 19:51:31 +0530 Niraj Kumar Shukla
    भावांजलि : डॉ. जयकुमार ‘जलज’ ने साहित्य के संस्कार सभी को दिए, जलज स्मृति समारोह में सुधिजनों ने कहा https://acntimes.com/Tribute-Dr-Jaikumar-Jalaj-gave-the-values-​​of-literature-to-everyone-said-the-wise-people-in-Jalaaj-Smriti-Samaroh https://acntimes.com/Tribute-Dr-Jaikumar-Jalaj-gave-the-values-​​of-literature-to-everyone-said-the-wise-people-in-Jalaaj-Smriti-Samaroh एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जलज जी ने रतलाम ही नहीं देश में साहित्य को अपने कृतित्व से धन्य किया। उन्होंने नई पीढ़ी को साहित्य के संस्कार दिए और अपने स्वभाव से सभी का दिल भी जीता। उक्त आशय के विचार डॉ. जयकुमार 'जलज' की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में शहर के सुधिजनों ने व्यक्त किए।

    जलज जी से सम्बंधित संस्मरणों और उनके गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति का अभिनव आयोजन राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के संयोजन मेँ अनुनाद, हम लोग, वनमाली सृजन केंद्र, श्री त्रिवेदी मूर्ति कला केंद्र, स्व. अरुण भार्गव राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, महाराजा श्री रतनसिंहजी बलिदान दिवस समिति द्वारा किया गया।

    स्थानीय आई. एम. ए. हाल में आयोजित समारोह में प्रो. रतन चौहान ने जलज जी की अंग्रेजी में अनुवादित कविता का पाठ किया। जलज जी से जुड़े संस्मरण डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, यूसुफ़ जावेदी, डॉ मुनींद्र दुबे, डॉ मोहन परमार, नरेंद्र सिंह पंवार, संस्था के जिला संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया ने सुनाते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।

    इन गीतों व कविताओं की दी प्रस्तुति

    इस अवसर पर संगीतमयी प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। आयोजन साहित्यिक कार्यक्रम में सर्वप्रथम सरस्वती वंदना अवनि उपाध्याय ने और गुरु को वन्दन हेमन्त जोशी ने किया। कलाकारों ने डॉ. जलज द्वारा लिखे गए गीतों और कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति दी। ‘एक जतन और…’ संजय परसाई, ‘निराला के प्रति…’ राजेंद्र शर्मा, ‘ऐसा नियम ना बांधो…’ संजय चौधरी, ‘गाओ मन बात केवल एक…’ शोभा शेर, ‘एक पक्षी की तरह...’ आशीष दशोत्तर, ‘कहानी सहज है…’  रिदम मिश्रा, ‘हर द्वार तुम्हारा द्वार…’ नरेन्द्र त्रिवेदी, ‘बहुलता…’ रतन कोल्हे व मनोज जोशी ने अनुनाद संस्था के अध्यक्ष अजीत जैन के मार्गदर्शन मेँ प्रस्तुति दी। सहयोग जयंत उपाध्याय, कुलदीप शर्मा, नरेंद्र सिंह शेखावत, सुनीता नागदे का रहा।

    ये उपस्थित रहे

    कार्यक्रम में जलज जी की पुत्रियां श्रद्धा घाटे, स्मिता हुम्बड़, राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पॅंवार, सुभाष जैन, डॉ. मुनीन्द्र दुबे, धीरेन्द्रसिंह राठौर, डॉ. पद्म घाटे, ओमप्रकाश त्रिवेदी, महावीर वर्मा, दीपेन्द्रसिंह भैंसाडाबर, विनोद झालानी, आशीष जैन, गजेन्द्रसिंह राठौर, ओमप्रकाश मिश्र, रणजीत सिंह राठौर, जी. जी. सिंह, डॉ. प्रवीणा दवेसर, डॉ. खुशबू जांगलवा, सुभाष यादव, प्रकाश हेमावत, डॉ. सुलोचना शर्मा, नीरज कुमार शुक्ला, गोपाल जोशी, प्रतिभा चांदनीवाला, सुरेंद्र छाजेड़, डॉ. दिनेश राजपुरोहित, इन्दु सिन्हा, डॉ. मोहन परमार, रश्मि पंडित, वर्षा पंवार, डॉ. मनोहर जैन, ललित चौरड़िया, शैलेंद्र तिवारी सहित गणमान्य जन मौजूद थे। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार नरेंद्र सिंह डोडिया ने व्यक्त किया।

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    Sun, 16 Feb 2025 20:39:45 +0530 Niraj Kumar Shukla
    स्मृतियां : डॉक्टर जयकुमार जलज : मेरे पिता मेरे आदर्श& श्रद्धा जलज घाटे https://acntimes.com/Memories:-Dr.-Jaikumar-Jalaj:-My-father-is-my-ideal--Shraddha-Jalaj-Ghate https://acntimes.com/Memories:-Dr.-Jaikumar-Jalaj:-My-father-is-my-ideal--Shraddha-Jalaj-Ghate श्रद्धा जलज घाटे

    उम्र के 15वें वर्ष में आपने All India Radio Lucknow द्वारा आयोजित कविता प्रतियोगिता (जिसके सुमित्रानंदन पंत जी और हरिवंशराय बच्चन जी जज थे) में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

    आपको इलाहाबाद विश्वविद्यालय में M.A  हिंदी में  एक gold medal मिला तथा इलाहाबाद में रहते हुए उन्हें निरालाजी और महादेवी वर्मा जी को अपनी कविताएँ सुनाने का सुख मिला था। रतलाम की अनेक शैक्षणिक संस्थाओं ने उन्हें अध्यक्ष मनोनीत किया था। पश्चिम रेलवे उपभोक्ता समिति में वे महाप्रबंधक द्वारा नामित प्रतिनिधि थे। रोटरी क्लब रतलाम के मानद सदस्य रहे थे।

    पिताजी स्वभाव से अपरिग्रही, उदार, संवेदनशील और धार्मिक थे, पर उनकी धार्मिकता कर्मकांडी की तरह निर्जीव धार्मिकता नहीं थी। वह जीवंत, सक्रिय और सकारात्मक जीवन-मूल्यों की धार्मिकता थी। वे बहुत ही सह्रदय और क्षमाशील थे। मैंने उन्हें कभी नाराज होते नहीं देखा।हां ,गलत बात पर समझाइश जरूर देते थे।

    यह उन दिनों की बात है जब हमारे स्नेही पिता की पोस्टिंग रीवा में थी। हम लोग रीवा से दादी जी के घर ललितपुर जा रहे थे। पर रास्ते में ही मां को दिक्कत हुई, तो पिताजी को सतना में एक अस्पताल के सामने बस रुकवानी पड़ी और वहाँ मेरी छोटी बहन स्मिता का जन्म हुआ। 2-3 दिन बाद हम लोग वापिस रीवा लौट आए। हमारे बड़े होने पर पिताजी ने बताया कि मुश्किल की घड़ी में उन्होंने अकेले ही हमको सबको सँभाला। जब मैं मात्र 1 वर्ष 2 माह की थी तब लगातार कई दिनों तक मुझे गोद में उठाकर रखा

    उनके हाथ में दर्द रहने लगा था  जो बाद में लंबे समय तक बना रहा। पिताजी घर पर हमें हिंदी, इंग्लिश और भूगोल पढ़ाते थे। चार्ट बनाकर टेंस समझाया करते थे। भूगोल एटलस से पढ़ाते थे। मुझे साइकिल सिखाते समय शुरू में मेरी साइकिल के साथ दौड़ते थे।कॉलेज की परीक्षाओं के वक्त मुझे बहुत घबराहट होती थी तब पिताजी मुझे होम्योपैथिक दवाई लाकर देते थे।

    बैंक की लिखित परीक्षा पास करने के बाद जब मेरा मौखिक साक्षात्कार हुआ, तो मुझसे पहला प्रश्न यह पूछा गया था कि आपका जलज सरनेम क्यों है ? मैंने कहा मेरे प्रोफेसर पिता साहित्यकार है, कविताएँ लिखते हैं और यह उनका पेन नाम है। साक्षात्कार की पैनल वालों ने जब मुझे पिताजी की कविताएँ सुनाने को कहा तो मैंने उनको दो कविताएँ सुनाई। आज भी मुझे भलीभाँति याद है। तब कैसे मेरा आत्मविश्वास एकदम बढ़ गया था।

    इसी तरह सन् 2004 की बात है। मेरी बड़ी बेटी श्रुति पीएमटी देने वाली थी। उन दिनों व्यापम में सेंधमारी की बातें सुनने में आ रही थीं। पिताजी ने तत्काल इस गड़बड़ झाले के बारे में नई दुनिया समाचार पत्र में संपादक के नाम, पत्र लिखा जो उसमें प्रकाशित भी हुआ था। उसकी दो-तीन पंक्तियाँ मुझे आज भी याद हैं। ‘कोई माँ अचानक हड़बड़ा कर उठती है ।देखा 4 बज गए पर बच्ची के कमरे में  बत्ती जल रही है। बच्ची से पूछा तो वह बोली- माँ सोचा इसे पूरा कर लूँ। बस! 10 मिनट में सोती हूँ। इन्हें क्या पता कि किताबों पर झुकी आंखों के सपनों को चांदी की दीवार के नीचे दफन किया जा सकता है"। खैर, व्यापम सतर्क हुआ। परीक्षा सही तरीके से संपन्न हुई और मेरी दोनों ही बेटियों ने प्रथम प्रयास में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (government medical College) से MBBS और MD किया।

    जब भी मैं और मेरे पति डॉक्टर पद्म घाटे, पिताजी के घर के आस-पास के किसी विवाह समारोह में जाते थे, तो डॉक्टर घाटे कहते थे कि रास्ते में माँ-पिताजी का घर पड़ता है, उनसे भी मिल लेते हैं। मैं जल्दी से अपने गले और कान के सेट उतार लेती थी और मुंह पर रुमाल घुमा लेती थी क्योंकि पिताजी के सामने मैं एकदम सादा रहने में ही सहज रह पाती थी।

    हमें पिताजी से बात करना बहुत अच्छा लगता था। उनके अनुभव, समझ, बहुग्यता, साहित्य, समय और समाज को समझने का उनका नजरिया, उनकी स्पष्ट और दुलारती आवाज से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता था। गायक  हरिहरन जी की गाई गजल जिसकी लिंक उन्होंने मुझे देहांत के कुछ माह पहले ही भेजी थी। पिताजी को बहुत पसंद थी-

    जब कभी बोलना, वक्त पर बोलना,
    मुद्दतों सोचना, मुख्तसर बोलना।

    पिताजी ने बहुत अपरिग्रही, सात्विक, संयमित, अनुशासित, नियमित, व्यवस्थित जीवन जिया। जमीन और सोने की बढ़ती कीमत और महंगी कारों की बातों में उनकी कभी रुचि नहीं रही। जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा उन्होंने कोई चाहना नहीं की। उनके घर की अलमारियों में, पेटियों में, सूटकेसों में किताबें ही किताबें रहती थीं।

    जब भी हम उनसे पूछते थे, पापा खाने में क्या बना लें? तो वह कहते थे जो सरलता से बन जाए। कभी कोई आग्रह नहीं, कोई फरमाइश नहीं। कॉलेज में अपने प्राचार्य काल में प्रतिदिन दूध-रोटी घर से ले जाते थे। अगर कभी किसी के हाथ से कांच का कीमती बर्तन गिरकर टूट जाए, तो सिर्फ यही कहते थे कहीं लगी, तो नहीं। आपका अध्ययन बहुत गहन और विस्तृत था। सुबह के समय दो-तीन अखबार पढ़ते थे, लिखते थे। फिर दिन में पत्र-पत्रिकाएँ पुस्तक पढ़ना-लिखना और बीच-बीच में कभी-कभार मोबाइल देख लिया करते थे। शाम के समय टीवी पर समाचार देखना उनका नित्य-कर्म था। उनके साथी और विद्यार्थी अक्सर उनसे मिलने आते रहते थे। बातचीत के दौरान निश्चल ठहाके लगाना वे ढूंढ ही लेते थे।

    वे हमेशा योजना बनाकर कार्य करते थे। अपनी घड़ी, चाबी, पर्स, रुमाल, अंगूठी हमेशा नियत जगह पर रखते थे। मैंने उन्हें कभी किसी चीज को ढूंढते हुए नहीं देखा। उनका हर कार्य व्यवस्थित होता था। टेबल-कुर्सी पर बैठकर लिखते थे। नीचे ऑल आउट जलती रहती थी। पर विगत कुछ वर्षों से बिस्तर पर तकिए के सहारे लिखते थे। सिरहाने पानी का जग रहता था। उनकी दिनचर्या सुबह 4:00 के आसपास शुरू हो जाती थी। मां को रात में जल्दी नींद नहीं आती थी, तो वह बहुत बार शिकायती लहजे में कहती थी तुम्हारे पापा 4:00 बजे से उठकर खटर-पटर शुरू कर देते हैं। मां उनके लिए बहुत चिंतित रहती थीं। माँ की हर शिकायत पर उनका एक ही जवाब होता था, मंद-मंद मुस्कुराना ।

    पुराने विद्यार्थियों को देखकर उनकी आंखों में स्नेह उमड़ आता था। अपने से जुड़े हर व्यक्ति से बडे़ ही सहज और आत्मीय भाव से मिला करते थे। उनकी अभिभावक की तरह चिंता करते थे। कमजोर और अभावग्रस्तों की समस्या दूर करने में जुट जाते थे। वे चाहते थे कि हर महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर बने। रतलाम के हर वर्ग के लोगों में उनके प्रति अपार सम्मान था। उन्होंने जीवन-मूल्यों को व्यावहारिक धरातल पर जिया। जैन धर्म में वर्णित विद्यादान, आहार दान, औषधि दान का अनुपालन करते हुए यथासंभव दान दिए।

    पिता जी बगीचे में बहुत समय बिताया करते थे। किस पौधे में नया फूल आया है। उन्हें उसका ध्यान रहता था। मेरी बेटियों श्रुति व तन्वी को मोगरे के फूल देकर कहते थे, इन्हें अपनी पढ़ाई की मेज पर रखना। उनकी खुद की मेज पर भी मोगरे के कुछ फूल हमेशा रहते थे। बगीचे से हमें पान के पत्ते और तुलसी के पत्ते खाने के लिए देते थे। एक गाय भी हमारे घर नियत समय पर आकर गेट को बजाती थी। पिताजी उसे रोटी, फलों और सब्जी के छिलके एक तगारी में रखकर खिलाते थे।

    मुझे इस बात का संतोष है कि उनके अंतिम 2 माह के समय में मेरी छोटी बहिन उनके साथ एक माह से अधिक रही। अस्पताल जाने के पहले शाम को पिता जी, मैं और स्मिता माँ के घर गए थे। उन्होंने पड़ोस की जिया बिटिया को आशीर्वाद स्वरूप हाथ में कुछ राशि और उसके दादा जी को रामचरितमानस दी थी। एक जरूरतमंद परिचित को अपना कम्प्यूटर दिया था और हम कुछ पुस्तकें अपने साथ लेकर आए थे।

    पिताजी ने जीवन में हमें सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाया। चुनौती पूर्ण समय में साहस और धैर्य रखना सिखाया। जीवन  की प्राथमिकताओं को समझाया। जीवन-मूल्य और संस्कार सिखाए। पिताजी आपकी स्मृति हमें दिन में अनेक बार आती है। मेरे जल्दी-जल्दी चलने पर अब कोई  कहने वाला नहीं है कि "आराम से, बेटा आराम से…!’’ आपकी टेलीफोन डायरेक्टरी के प्रथम पृष्ठ पर मंदिर दर्शन के बाद सीढ़ियों पर बोले जाने वाला श्लोक लिखा था-

    ‘अनायासेन मरणम, बिना दैनयम जीवनम।
    अंते चरण सानिध्यम देहि त्रिशला नंदनम॥’

    पापा आपने इहलोक से अपनी अंतिम विदाई भी कुछ इसी विचारधारा के अनुसार 15फरवरी 2024 को ली। बिना किसी को कोई कष्ट दिए अचानक चले गए। आपने देहदान के फॉर्म भरे थे, पर डॉक्टर घाटे इसके लिए सहमत नहीं हो पा रहे थे। आपने सन् 2019 में ही एक कागज पर लिख अपने आधार कार्ड के साथ लगाकर रख दिया था- ‘मैंने शांति से जीवन जिया है। शांति से ही मुझे ले जाया जाए। शव को वाहन से ले जाया जाए।  कोई मृत्यु भोज या देहरी न छुड़ाई जाए। मेरी मृत्यु पर कोई आँसू न बहाए।’ (पर भला पापा! क्या कभी ऐसा हो पाता है।) कॉलोनी वालों ने शव-वाहन लेने को स्पष्ट मना कर दिया। पापा! आप और माँ एक जस- एक प्राण की तरह 64 वर्ष रहे, पर माँ के बगैर 64 दिन भी नहीं रह सके।

    आपके गुरु डॉ. रामकुमार वर्मा ने आपको आशीर्वाद दिया था । "चाहता हूँ, तुम्हारा जीवन फूल की तरह खिले और सुगंध की तरह संसार में समा जाए।" सचमुच आपने ऐसा ही जीवन जिया। पिताजी आप और आपकी रचनाएँ हमारे मन-मस्तिष्क में हमेशा जीवित रहेंगी। आप जैसे पुण्यात्मा की बेटी होना हमारे लिए सचमुच सौभाग्य और गर्व की बात है। आपके शानदार जीवन की स्मृतियाँ ही अब हमारे जीवन का पाथेय हैं। आपकी स्मृति को हम सभी की ओर से सादर शत-शत नमन…!

    (लेखिका श्रद्धा जलज घाटे साहित्यकार स्व. डॉ. जयकुमार 'जलज' की सुपुत्री एवं रतलाम के वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट डॉ. पद्म घाटे की धर्मपत्नी हैं। उनके ये विचार पत्रिका वीणा (इंदौर) पहला अंतरा (भोपाल), साहित्य संस्कार (जबलपुर), नूतन कहानियां (लखनऊ), दैनिक जनप्रिय (ललितपुर), अग्निधर्मा (इंदौर) में प्रकाशित हो चुके हैं।)

    पता

    अरिहंत पैथोलॉजी लैब 
    15, वेद व्यास कॉलोनी 
    रतलाम (म प्र ) 457001

    चलित दूरभाष - 9425103802

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    Sun, 16 Feb 2025 09:09:35 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुण्यतिथि पर स्मृति लेख : साहित्य के कोरे पन्नों पर जीवन के छन्द लिखे जलज जी ने& आशीष दशोत्तर https://acntimes.com/Memorial-article-on-death-anniversary-​​Jalaj-ji-wrote-verses-of-life-on-blank-pages-of-literature https://acntimes.com/Memorial-article-on-death-anniversary-​​Jalaj-ji-wrote-verses-of-life-on-blank-pages-of-literature आशीष दशोत्तर

    हिंदी साहित्य के दैदीप्यमान नक्षत्र, छायावादी दौर के साक्षी और वरिष्ठ गीतकार डॉ. जयकुमार 'जलज' ने कई पीढ़ियों को साहित्य की समझ दी। कई नए रचनाकारों को चलना सिखाया। जिन्होंने साहित्य की ज़मीन को उर्वर बनाया और उसे समृद्ध किया।

    जलज जी का होना रतलाम के लिए ही नहीं पूरे साहित्य जगत के लिए एक विश्वास की तरह था। वे गीतों के अधरों की मुस्कान थे। ‌वे साहित्य के पृष्ठ पर जीवन के छंद लिखने वाले रचनाकार थे। जलज जी बहुत कम बोलते थे मगर जब बोलते थे तो पूरे मन से बोलते थे और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ। उन्होंने कभी अपना गुणगान नहीं किया अपितु साहित्य जगत में उनका गुणगान किया। वे अपने जीवन के अंतिम समय तक साहित्य साधना में रत रहे।

    ललितपुर में जन्मे और इलाहाबाद में शिक्षित होने के बाद विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य से जुड़े जलज जी उच्च शिक्षा विभाग की सेवा में आए। इस दौरान जलज जी रतलाम में आए और यहीं के होकर रह गए। वे अक्सर कहा करते थे कि यहां मैं अकेला नहीं हूं। एक पूरा भूमि खंड है मेरे साथ। और इस भूमि खंड को उन्होंने अपनी रचनाधर्मिता से धनवान बनाया।

    वे दुःख दर्द और अभाव में खड़े व्यक्ति के मन को समझने वाले रचनाकार थे। वे प्रकृति के जितने नज़दीक थे उतने ही मनुष्य की प्रवृत्तियों के भी समीप थे।

    जलज जी कहा करते थे, 'कवि की चिंता केवल उसकी अपनी नहीं होती बल्कि वह समूची मानवता के लिए चिंतित होता है। वह पेड़-पौधों के प्रति चिंतित होता है। वह जल स्त्रोतों के प्रति चिंतित होता है। वह हर उस पीड़ा के प्रति चिंतित होता है जिसे वह महसूस करता है। वरना बरसात में भीगते व्यक्ति को मरुस्थल की चिंता भला कहां होती है?'

    जलज जी ने अपने गीतों में इस चिंता को भी ज़ाहिर कर यह संदेश दिया कि मनुष्यता के तार इतने छोटे नहीं है जो सीमाओं के दायरे में क़ैद रहें। मनुष्य की आत्मा उसी तरह जुड़ी हुई है जैसे आसमान से बरसते जल और तपती पृथ्वी की आत्मा। वे प्रकृति के बिम्बों के माध्यम से मनुष्य के अभावों पर भी रोशनी डालते हैं। 

     मैं प्यासा रह गया ,बादलों के पनघट पर भी

     वे जो मरुथल में बैठे हैं, उनका क्या होगा?

     तप हो या सादा जीवन हो

     किससे भूख सहन होती है,

     सिर छप्पर के लिए तरसता

     काया बिना वसन रोती है।

     मैं तन के घावों को सीने में निश्शेष हुआ

     वे जो मन से भी घायल हैं उनका क्या होगा। 

    श्रम और कर्म की साधना में विश्वास रखने वाले जलज जी ने अपनी साहित्य साधना से देश में जो स्थान पाया वह अद्भुत था। एक समय देश के शीर्षस्थ गीतकारों में जलज जी अग्रणी पंक्ति में शुमार रहे। जिस समय किसी पत्र पत्रिका में रचना छपना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी, उस दौर में जलज जी की रचनाएं साप्ताहिक हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स में निरंतर छपा करती थीं। महादेवी वर्मा की पत्रिका में जलज जी की रचनाएं प्रमुखता से स्थान पाती रहीं। जलज जी ने छायावादी युग के रचनाकारों के साथ अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल गुज़ारे। महाकवि निराला को उनके सामने ही उन पर लिखी कविता सुनाना जलज जी के बस की ही बात थी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में रहने के दौरान हरिवंश राय बच्चन, फ़िराक़ गोरखपुरी, डॉ. रामकुमार वर्मा और ऐसे अनेक विद्वान साहित्यकारों के बीच बैठने और रचना प्रक्रिया करने का अवसर जलज जी को मिला।

    इन सब के बावजूद जलज जी में घमंड नहीं था। वे सभी से बहुत सहजता से मिलते थे। छोटे से छोटे रचनाकार को भी पूरे सम्मान के साथ संबोधित करते थे। आलोचनाओं से उन्होंने स्वयं को बहुत दूर रखा और सभी के विकास के लिए वे सदैव तत्पर रहे। जलज जी कहा करते थे कि एक नया रचनाकार जो साहित्य की ज़मीन पर चलने की कोशिश कर रहा है, उसे सहारा देना हमारा कर्तव्य है। यदि उसकी आलोचना कर हम उसे निराश कर देंगे तो हो सकता है वह यहीं ख़त्म हो जाए, लेकिन हमारे थोड़े सहारे से यदि वह इस ज़मीन पर ठीक चलता रहा तो हो सकता है कि एक दिन वह साहित्य की समझ को भी विकसित कर लेगा।

    उनका यही स्वभाव उनकी रचनाओं में भी अभिव्यक्त होता रहा। उन्होंने अपनी एक कविता में कहा- 

    "दुःख की तारीफ़

    विरह के सौंदर्य का वर्णन

    आदमी की विवशता की कहानी है।

    मानवीय इतिहास के असफल क्षणों में

    प्राप्ति से बढ़कर प्रयत्नों को कहा होगा किसी ने।

    हे विधाता,

    तुम अगर कुछ हो कहीं तो मिलन दो मुझको।

    कर्म पर ही दो नहीं अधिकार केवल

    कर्मफल पर भी मुझे अधिकार दो।" 

    जलज जी संवेदनशील रचनाकार थे। उनकी रचनाओं में जो संवेदनशीलता नज़र आती है वह उनकी निजी ज़िंदगी में भी दिखाई देती है। अपने अवसान से कुछ समय पूर्व उन्होंने अपने घर के बगीचे के लिए कुछ गमले खरीदे और उन गमलों में फूलों के पौधे लगाए। कहने लगे "इन पौधों में जब फूल खिलते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। प्रकृति के हम क़रीब रहे तो ही प्रकृति हमारे क़रीब आती है।" उन्होंने अपने घर के बाहर हरसिंगार का पेड़ लगा रखा था जिसके फूल ख़ूबसूरत चादर की तरह उनके आंगन में बिछ जाया करते थे। उनका यह स्वभाव ही उनकी रचनाओं में भी अभिव्यक्त होता है। जलज जी प्रकृति के प्रति इतने संवेदनशील होकर अपनी बात कहते रहे। अपनी हर कविता में प्रकृति के बिम्बों का इस्तेमाल करते, तो वह उस खुलेपन का पक्ष लेते हैं जो मनुष्य को उड़ने के लिए प्रेरित करता, उसे अपने हाथ-पैर फैलाने की प्रेरणा देता। 

    सघन हुए बादल

    लो, फैल चले।

    यहां-वहां सभी कहीं

    नीले, सांवले, भरे भरे गहरे, कजरारे, काले।

    आह ! उस रेखा को कैसे बचाऊंगा

    जाने किस क्षण वह भी बरसे

    मेरे ही द्वार से गुज़रे।

    आह ! उस रेखा को कैसे पहचानूंगा। 

    और न जाने कितने ही ऐसे दृश्य हैं जिन्हें जलज जी ने अपनी रचनाओं में बांधा। ऐसे सुंदर और मनोरम दृश्य सिर्फ़ प्रकृति का वर्णन भर नहीं हैं, बल्कि यह प्रकृति के साथ जीवन का तादात्म्य स्थापित करने के समान है। जब कवि मनुष्य और प्रकृति को एक होने की सीख देता है तो वह समूची सृष्टि को एक करने की बात करता है। वैमनस्य का विसर्जन और सौमनस्य का सृजन ही उसका मूल उद्देश्य होता है। जलज जी के इस प्रकृति प्रेम से भी उसी सृजनशीलता की प्रेरणा प्राप्त होती रही।

    जलज जी अपने जीवन में साहित्य के प्रति पूरी तरह समर्पित तो रहे ही, विद्यार्थियों को संस्कार देने में भी अग्रणी रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को जो सीख दी यह उसका ही परिणाम था कि रतलाम शासकीय महाविद्यालय में प्राध्यापक के उपरांत 14 वर्षों तक प्राचार्य भी रहे। इस दौरान उनका कभी किसी से कोई विवाद नहीं हुआ और कोई उनसे कभी नाराज़ भी नहीं हुआ। यह उनकी सामंजस्य की प्रवृत्ति का परिणाम था। अपनी कविता "प्यार लो विद्यार्थियों मेरे" में वे विद्यार्थियों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं और विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं के कंधे उनके पैरों के तले रखने के लिए आतुर रहते हैं। यह स्वभाव ही जलज जी को विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय बनाता रहा। न सिर्फ़ विद्यार्थियों के बीच बल्कि अपने सहयोगियों के प्रति भी वे बहुत उदार रहे। वे सभी का विश्वास थे। कई शोधार्थियों ने उनके काव्य पर शोध कार्य किया। वे हिंदी, संस्कृत के साथ ही अपभ्रंश और पाली का भी अनुवाद कर साहित्य जगत को महत्वपूर्ण कृतियां प्रदान करते रहे। उनका सरल स्वभाव और सभी को सुनने और समझने की प्रवृत्ति सभी को सदैव प्रेरित करती रही। उन्होंने अपनी एक कविता में कहा- 

    अकेले यूं ही

    बड़े नहीं हो जाते पेड़।

    वर्षों तक पकती है ज़मीन, तपती है धूप

    हवा को लगाने पड़ते हैं चक्कर

    बरसना पड़ता है बादलों को साल दर साल।

    धीरे-धीरे ही खुलती है आंखें अच्छाइयों की। 

    जलज जी उजियारे के रचनाकार थे। उनका गीत "रोशनी उगने का एक जतन और, अभी एक जतन और" पूरे देश में प्रेरक गीत के रूप में गाया जाता रहा। वे अपने गीतों के माध्यम से पूरे देश में पहचाने जाते रहे। साहित्य के प्रति उनका लगाव इतना अधिक था कि वे अंतिम समय में भी पुस्तकों को पढ़ने और कुछ नया लिखने के लिए बेचैन रहते थे। अपने अंतिम दिनों में उन्होंने मुझे एक बार फोन कर बुलाया और बहुत आत्मीयता से कहा, "मैंने तुम्हारे लिए कुछ किताबें निकाली हैं। इन्हें ले जाओ और पढ़ना।"

    मैंने कहा, 'सर ! ये तो बहुत दुर्लभ किताबें हैं।'

    वे हंसते हुए कहने लगे, 'अभी इनसे दुर्लभ किताबें और बची हैं। वे किताबें फिर कभी दूंगा।'

    उन किताबों में से कुछ किताबें पढ़ने के बाद मैंने फिर से उन्हें फोन किया कि, 'सर ! मैंने इतनी किताबें पढ़ ली हैं। वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने बहुत आशीर्वाद दिया।

    इसके कुछ ही दिनों बाद उनकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रीति जलज के अवसान ने उन्हें बहुत व्यथित कर दिया। अपनी सहधर्मिणी के गुज़रने के एक सप्ताह बाद उन्होंने एक स्मृति गीत लिखा, जो उनका अंतिम गीत था। 

    एक पक्षी की तरह तुम उड़ गई

    ताकता मैं रह गया आकाश को।

     

    विधाता ने दिया तो जीवन हमें,

    पर लगामें हाथ में अपने रखी,

    कभी करता प्यार देता छूट वह,

    कभी दिखलाता अचानक बेरुख़ी।

    बुलावा आया अचानक छूट कर चल दी

    दोष क्या दूं स्वयं के भुजपाश को।

     

    नयन थे मेरे, निरंतर देखती तुम थीं,

    पांव थे मेरे मगर बस तुम्हीं चलती थीं,

    जब मुझे कुछ सूझ पड़ता था नहीं,

    तुम दिए की तरह से निष्कंप जलती थीं।

    हे विधाता ! क्या किया तुमने कहो

    ले गए तुम तोड़ हर विश्वास को।

     

    जहां भी तुम हो बताओ क्या करूं मैं,

    भरा दुःख का घट इसे कितना भरूं मैं,

    चाहती जो तुम उसे अब भी करूंगा मैं

    ठीक है अब ख़ुद जलूंगा, ख़ुद चलूंगा मैं।

    मानने तुमने नहीं दी हार जीवन में,

    रखूंगा जीवित इसी अभ्यास को। 

    आज जलज स्वयं एक पंछी की तरह हमारे बीच से उड़ चुके हैं लेकिन उनकी रचनाएं, उनका व्यक्तित्व और कृतित्व हमारे साथ है जो सदैव हमें उन्हें अपने बीच बनाए रखेगा।

    आशीष दशोत्तर

    12/2, कोमल नगर

    रतलाम (म.प्र.)

    मो. न. 9827084966

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    Sat, 15 Feb 2025 14:55:14 +0530 Niraj Kumar Shukla
    भावांजलि : डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति में संगीतमयी स्मृति सभा एवं उनके गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति 16 फरवरी को https://acntimes.com/Musical-memorial-meeting-in-memory-of-Dr-Jaikumar-Jalaj-on-February-16 https://acntimes.com/Musical-memorial-meeting-in-memory-of-Dr-Jaikumar-Jalaj-on-February-16 एसीएम टाइम @ रतलाम । साहित्य जगत में रतलाम को ख्याति दिलवाने वाले देश के वरिष्ठ भाषाविद, साहित्यकार स्व. डॉ. जयकुमार 'जलज' की प्रथम पुण्यतिथि पर राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के संयोजन में 16 फरवरी (रविवार) मनाई जाएगी। इस मौके पर स्मृति सभा और डॉ. जलज के गीतों की संगीतमयी प्रस्तुति दी जाएगी

    यह जानकारी देते हुए संस्था के जिला संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया ने बताया कि आयोजन राजेन्द्र नगर स्थित आईएमए हाल में दोपहर 3 बजे होगा। यह वनमाली सृजन केन्द्र जिला इकाई रतलाम, अनुनाद संस्था एवं डॉ. जलज के विद्यार्थियों, स्नेहीजनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

    आयोजन में डॉ. जलज के जीवन से जुड़े संस्मरणों को साझा किया जाएगा। जलज की कविताओं और गीतों की अनुनाद संस्था के कलाकारों द्वारा स्वरबद्ध प्रस्तुति दी जाएगी।

    इन्होंने की अपील

    राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पॅंवार, वनमाली सृजन केन्द्र के अध्यक्ष आशीष दशोत्तर एवं अनुनाद संस्था के अध्यक्ष अजीत जैन ने शहर के साहित्यकारों, कलाविद एवं प्रबुद्धजन से आग्रह किया है अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर डॉ. जलज के प्रति भावांजलि अर्पित करें।

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    Tue, 04 Feb 2025 21:10:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य विमर्श : 'सुनें सुनाएं' का 29वां सोपान 2 फरवरी को, रचनाप्रेमियों द्वारा दस रचनाएं पढ़ी जाएंगी https://acntimes.com/29th-episode-of-Suneye-Sunaye-on-2nd-February https://acntimes.com/29th-episode-of-Suneye-Sunaye-on-2nd-February एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय 'सुनें सुनाएं' का 29वां सोपान 2 फरवरी (रविवार) को होगा। इसमें रचनाप्रेमियों द्वारा अन्य रचनाकारों की 10 रचनाएं पढ़ी जाएंगी।

    सुनें सुनाएं के 29वें सोपान का आयोजन 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर होगा। इस सोपान में आई. एल. पुरोहित द्वारा इक़बाल अशर की रचना 'बे-फै़ज़ एक चराग बताया गया मुझे' का पाठ, ऋषिकेश शर्मा द्वारा डॉ. सुनील जोगी की कविता ‘हम हिन्दू सत्य सनातन हैं' का पाठ, दुष्यंत कुमार व्यास द्वारा वीरेन्द्र मिश्र की रचना 'गीतमेघ : आत्मकथ्य' का पाठ, डॉ. रवीन्द्र उपाध्याय द्वारा जगदीश सोलंकी की रचना "यूं तो साथ देने को हजारों हाथ और हैं" का पाठ करेंगी।

    इसी प्रकार कीर्ति कुमार शर्मा द्वारा यूसुफ़ जावेदी की रचना 'नौजवां ओ नौजवां' का पाठ, आयुष्मान देसाई द्वारा डॉ. ओम राज की रचना 'सोन नदी बहती रही' का पाठ, डॉ. गायत्री तिवारी द्वारा रामनरेश त्रिपाठी की रचना 'अन्वेषण' का पाठ, संजय परसाई 'सरल' द्वारा कबीर की रचना 'देखो रे जग बौराना' का पाठ, नरेंद्र त्रिवेदी द्वारा गुलज़ार की रचना 'क्या है ज़िन्दगी' का पाठ, वयोवृद्ध श्रीराम दिवे द्वारा वी. के. घाटे की रचना 'वीर सावरकर' का पाठ किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है। अपनी पसंद की रचना का पाठ किया जाता है वह भी बिना किसी भूमिका के। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजन से उपस्थिति होने का आग्रह किया है।

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    Thu, 30 Jan 2025 23:38:42 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सक्षम संचार फाउंडेशन ने साहित्यकार एवं कवि अज़हर हाशमी को घर जाकर दिया ‘मालवा अलंकरण’, हाशमी बोले& ‘मैं इसे भूल नहीं पाऊंगा’ https://acntimes.com/Saksham-Sanchar-Foundation-visited-the-home-of-writer-and-poet-Azhar-Hashmi-and-gave-him-Malwa-Alankaran https://acntimes.com/Saksham-Sanchar-Foundation-visited-the-home-of-writer-and-poet-Azhar-Hashmi-and-gave-him-Malwa-Alankaran सक्षम संचार फाउंडेशन की निदेशक अर्चना शर्मा व टीम ने किया अभिनंदन

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 का आयोजन करने के साथ ही इस वर्ष से ‘मालवा अलंकरण’ की शुरुआत भी की गई है। इस वर्ष का ‘मालवा अलंकरण’ साहित्यकार, कवि, लेखक और चिंतक प्रो. अज़हर हाशमी को प्रदान किया गया है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों द्वारा हाशमी के निवास पर पहुंच कर उन्हें प्रशस्ति-पत्र और शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके प्रत्युत्तर में प्रो. हाशमी ने कहा कि- ‘नेह का दान दिया है मुझके, स्नेह का प्रतिदान दिया है मुझको, मैं इसे भूल नहीं पाऊंगा, यह जो सम्मान दिया है मुझको।’

    प्रो. हाशमी को मालवा अलंकरण सक्षम संचार फाउंडेशन की निदेशक अर्चना शर्मा, डॉ. प्रवीणा दवेसर, अदिति दवेसर, डॉ. अनिला कंवर एवं श्वेता नागर आदि ने प्रदान किया। प्रशस्ति-पत्र का वाचन अर्चना शर्मा ने किया। इस मौके प्रो. हाशमी ने फाउंडेशन व उसकी निदेशक शर्मा को उनके कार्यों तथा शब्दों की साधना के लिए साधुवाद ज्ञापित किया। बता दें कि, स्वास्थ्यगत कारणों से प्रो. हाशमी ने दो दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 का ऋग्वेद की ऋचाओं का वाचन कर वर्चुअली शुभारंभ किया था। वे मालवा अलंकरण लेने के लिए भी समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे।

    इस मौके पर प्रो. हाशमी ने कर्म और शब्द साधना का महत्व भी बताया।उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत कवि सुमित्रानंदन पंत की कविता ‘संध्या का झुटपुट, बांसों को झुरमुट, चहक रही चिड़िया टी वी टी टुक टुक...’ से की। हाशमी ने कहा कि सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा किया गया काम आसान नहीं है, यह बहुत ही श्रम साध्य है। उन्होंने कहा कि ‘ठोकरों का काम लगना है, लगेंगी, हार मत धीरज चलना जिंदगी है, उस मुसाफिर को ही मंजिल मिल सकेगी, जिसमें हिम्मत-हौसले की ताजगी है।’ 

    आप शब्दों की रक्षा कीजिए, शब्द आपकी रक्षा करेंगे

    हाशमी ने कहा शब्दों से जुड़ा को भी संस्थान, अक्षर से जुड़ा कोई भी संस्थान हो, उस सब में सरस्वती समाहित होती है। कहा जाता है कि शब्द ब्रह्म होता है, अक्षर ब्रह्म होता है। जब अक्षर के आंगन में शब्द चहल कदमी करते हैं तो उपलब्धियों के इतिहास लिखते हैं। शब्द हमेशा सकारात्मक होने चाहिए। महाभारत में वेदव्यास ने कहा कि ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ यानी आप धर्म की रक्षा कीजिए, धर्म आपकी रक्षा करेगा। उसी प्रकार कहा गया है कि ‘शब्दो रक्षति रक्षित:, यानी आप शब्दों की रक्षा कीजिए शब्द आपकी रक्षा करेगा। शब्द को मान दीजिए, शब्द आपको सम्मान देगा। शब्द को आदर दीजिए, शब्द आपको समाधान देगा। शब्द को अपनत्व दीजिए, शब्द आपसे आत्मीयता स्थापित करेगा।

    वाणी अच्छी हो तो आप अच्छे लगते हैं

    विचारकर हाशमी ने कहा कि शब्द से जुड़ना सात्विकता से जुड़ना होता है, शब्द को पकड़ना एक प्रकार से ब्रह्म को पकड़ना होता है, शब्द को जकड़ना वैचारिकता और ऊंचाई को जड़कना होता है। जब आपकी दृष्टि/नज़रिया सुंदर होता है तो आपको दुनिया अच्छी लगती है लेकिन जब आपकी वाणी अच्छी होती है तो आप दुनिया को अच्छे लगते हैं।

    पत्रकार सुविधाओं का सोफा नहीं, चुनौतियों की चटाई है

    प्रो. हाशमी ने कि पत्रकार भी शब्दों के साधक हैं। उनका धर्म कलम के कर्म से जुड़ा है। पत्रकार अक्षर के सेतु बनाता है और अपने विचारों और संवाद के वाहन दौड़ाता है जो पाठकों तक पहुंचते हैं। पत्रकारिता सुविधाओं का सोफा नहीं, सुनौतियों की चटाई है। जो भी शब्द से जुड़ा है वह साधनारत है। साधना की तीन प्रक्रियाएं होते हैं, 1 वैचारिक होना, 2 अनुभूति होना और 3 सात्विक से साक्षात्कार होना।

    इन्होंने भी संबोधित किया

    प्रो. हाशमी के सम्मान से पूर्व एडवोकेट एवं रंगकर्मी कैलाश व्यास ने संबोधित करते हुए 52 वर्ष पूर्व आगर मालवा में हुए एक कवि सम्मेलन में हुआ घटनाक्रम सुनाया। उन्होंने बताया कि हाशमी कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे थे। मंच पर विश्व के ख्यात कवि डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन भी मौजूद थे। सुमन ने संचालन सुनने के बाद कहा कि इस तरह के साहित्यिक संचालन मंच की गरिमा को बनाए रखते हैं। व्यास ने कहा कि ऊंचाई पर पहुंचना मुश्किल नहीं, किंतु वहां पहुंचकर भी जमीन से जुड़े रहना कठिन है और यह दुष्कर कार्य प्रो. हाशमी ने किया है। फाउंडेशन द्वारा दिया जा रहा मालवा अलकंरण ‘सम्मान’ का सम्मान है। इस दौरान डॉ. प्रवीणा दवेसर ने मालवा मीडिया फेस्ट और मालवा अलंकरण पर प्रकाश डाला।

    इन्हें प्रमाण-पत्र भेंट किए

    फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 के दौरान सेवाएं देने वाले वालंटियर्स अंजलि, सिमरन, वैभव और यश को प्रो. हाशमी द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। हाशमी ने सभी के कार्य की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    ये मौजूद रहे

    इस मौके पर एडवोकेट कैलाश व्यास, सतीष त्रिपाठी, पवन बैरागी, सैलाना बीएसी स्मिता शुक्ला, पत्रकार तुषार कोठारी, हेमंत भट्ट, नीरज कुमार शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।

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    Tue, 28 Jan 2025 10:12:03 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मालवा मीडिया फेस्ट शुरू : नारद सृष्टि के प्रथम पत्रकार और वेदव्यास प्रथम संपादक थे, वैदिक ऋचाएं समानता व समरसता का संदेश देती हैं& अज़हर हाशमी https://acntimes.com/Litterateur-Azhar-Hashmi-started-Malwa-Media-Fest-2-by-reciting-a-verse-from-Rigveda https://acntimes.com/Litterateur-Azhar-Hashmi-started-Malwa-Media-Fest-2-by-reciting-a-verse-from-Rigveda एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम में मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 के द्वितीय संस्करण का शुभारंभ राष्ट्रीय बालिका दिवस के पर तीन बालिकाओं ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रथम सत्र का शुभारंभ प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार अज़हर हाशमी ने ऋग्वेद की ऋचाओं का वाचन कर किया। उन्होंने कहा कि ऋचाएं समरसता और समानता का संदेश देती हैं। हाशमी के अनुसार नारद सृष्टि के प्रथम पत्रकार थे जो स्पॉट रिपोर्टिंग करते थे जबकि वेदव्यास प्रथम संपादक थे।

    दो दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट का आयोजन सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा स्थानीय बालाजी सेंट्रल होटल में किया जा रहा है। प्रथम सत्र का शुभारंभ करते हुए प्रो. हाशमी ने कहा कि मालवा मीडिया फेस्ट के माध्यम से युवा व ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए मंच है। यह रतलाम के लिए नवाचार है। उन्होंने राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उन्होंने अपनी रचना "बेटियों शुभकामनाएं" व "जग का गौरव मेरा देश" सुनाई। इस मौके पर फाउंडेशन की निदेशक अर्चना शर्मा ने मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 की प्रस्तावना रखते हुए बताया कि सक्षम संचार मीडिया की समग्र समझ व डिजिटल पॉवर का महत्व समझाने के लिए रतलाम में फेस्ट करवा रहा है। सक्षम संचार शहर से लेकर ग्रामीण व जनजाति क्षेत्र में प्रिंट से लेकर सोशल मीडिया और मल्टीमीडिया तक युवा विद्यार्थी की मीडिया स्किल सीख सकें, इसके लिए सक्षम संचार वर्ष भर कई प्रकार के आयोजन करवाता है। उन्हीं आयोजनों का सामूहिक इवेंट मालवा मीडिया फेस्ट है।

    विद्यार्थियों के लिए रील्स मेकिंग व निबंध प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

    एक सत्र में छात्रों के लिए रतलाम की धरोहर व विशेष व्यंजन पर रील्स मेकिंग एवं अहिल्याबाई पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रस्तुत की गई रील्स को लेकर फाउंडेशन की निदेशक अर्चना शर्मा ने कहा कि कोई भी रील बनाएं, उसमें कैप्शन अवश्य दें। यानी यदि किसी स्थल की रील है तो उस स्थल के बारे में कुछ फैक्ट देने से उस रील की उपयोगिता और बढ़ जाती है। इस दौरान पत्रकार नीरज कुमार शुक्ला ने रतलाम और इससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डाला।

    वर्कशॉप का हुआ आयोजन

    फेस्ट के दौरान आयोजित वर्कशॉप को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर दिलीप गिरी ने संबोधित किया। महज चार साल में लाखों फॉलोवर्स का परिवार बनाने वाले गिरी ने कहा कि अगर कंटेंट बनाना है तो बस फिर बनाते जाओ, शुरुआत ने व्यूज की चिंता ना करें। उन्होंने कहा कि कम से कम तीन महीने तक लगातार काम करने के बाद ही परिणाम आना शुरू होंगे। गिरी के अनुसार जो रील्स या कन्टेंट पहले से डल चुका है और जिसके लाखों करोड़ों व्यूस हो चुके हैं ठीक वैसा ही कंटेंट या रील डालने से बेहतर है कि कुछ यूनिक और क्रिएटिव करें क्योंकि देखने वाला बार-बार एक जैसा कंटेंट देखना पसंद नहीं करेगा।

    यह भी बताया

    युवाओं के रचनात्मक अभिरुचि बढ़ाने कंटेंट क्रिएशन एवं इंस्टाग्राम प्रमोशन वर्कशॉप में विशिष्ट कंटेंट क्रिएटर्स एवं इनफ्लुएंसर्स ने युवाओं को टिप्स दिए। इम्पैक्ट और कंसिस्टेंट बने रहने के बारे में भी बताया। सोशल मीडिया इन्फेलुन्सर्स ने बताया कि सरस्वती मां को प्रसन्न करो, लक्ष्मी अपने आप आ जाएंगी। इस सत्र में युवाओं ने अपने प्रश्न पूछ कर सहभागिता की।

    मलखंभ के प्रदर्शन ने भरा रोमांच

    जवाहर व्यायामशाला के छोटे-छोटे बालक-बालिकाओं ने हनुमान चालीसा के साथ मलखंभ का रोमांचकारी प्रदर्शन किया गया। उनके हैरतअंगेज करतब देख कर देखने वाले वाह-वाह कर उठे।

    वन नेशन – वन इलेक्शन कई समस्याओं का समाधान- निवेदिता शर्मा

    फेस्ट में वन नेशन - वन इलेक्शन पर चर्चा भी हुई। मताधिकार दिवस पर मालवा मीडिया फेस्ट का मतदाता जागरूकता के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। इस चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा से लेखिका एवं शिक्षक श्वेता नागर ने मॉडरेटर के रूप में सवाल पूछे। सवालों के जवाब देते हुए डॉ. शर्मा ने बताया कि गणतंत्र के महत्व और लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए वन नेशन – वन इलेक्शन जरूरी जान पड़ता है। दे अलग अलग चुनाव होने से श का, सरकारी मशीनरी का और जनता का काफी कीमती समय जाया हो जाता है। उन्होंने बताया कि भारत के लिए वन नेशन - वन इलेक्शन नया विचार नहीं है, प्रारंभ में 1952 से चुनाव इसी प्रकार होते थे। बार-बार चुनाव प्रक्रिया से मतदान में रुचि समाप्त हो जाती है। इससे मतदान में भी कमी आती है। शासकीय मशीनरी जिसे कई महत्वपूर्ण काम करने होते हैं वह सिर्फ चुनाव ही कराती रहती है। डॉ. शर्मा ने इस व्यवस्था को लागू करवाने के लिए जनजाग्रति और जनआंदोलन होने की आवश्यकता जताई।

    ये रहे मौजूद

    शुभारंभ सत्र सहित सभी गतिविधियों के दौरान रंगकर्मी एवं पूर्व प्राचार्य ओमप्रकाश मिश्र, रचनाधर्मी नरेंद्र सिंह डोडिया, राजा भोज जनकल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पंवार, पत्रकार तुषार कोठारी, हेमंत भट्ट, नीरज कुमार शुक्ला, विवेक चौधरी, डॉ. प्रवीणा दवेसर, डॉ. हितेश पाठक, डॉ. अनिला कंवर, अदिति दवेसर, फोटो जर्नलिस्ट राकेश पोरवाल, वैदेही कोठारी, मीनाक्षी मलिक, नरेंद्र शर्मा, आनंदीलाल गांधी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। संचालन डॉ. रविंद्र उपाध्याय ने किया।

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    Sat, 25 Jan 2025 11:12:11 +0530 Niraj Kumar Shukla
    बड़ी खबर : इतिहास व पुरातत्व के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति और डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान के मध्य हुआ एमओयू https://acntimes.com/MoU-signed-between-Raja-Bhoj-Jan-Kalyan-Seva-Samiti-and-Dr-Vishnu-Shridhar-Wakankar-Archaeological-Research-Institute https://acntimes.com/MoU-signed-between-Raja-Bhoj-Jan-Kalyan-Seva-Samiti-and-Dr-Vishnu-Shridhar-Wakankar-Archaeological-Research-Institute राष्ट्रीय स्तर पर सिक्कों के माध्यम से रतलाम के गौरवपूर्ण इतिहास को किया रेखांकित

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम जिले में इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही है। संस्था का डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान भोपाल के साथ महत्वपूर्ण एमओयू (Memorandum of understanding-समझौता ज्ञापन) हुआ है। शोध संस्थान पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय मध्यप्रदेश के तहत कार्यरत है।

    यह जानकारी संस्था के जिला संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया ने दी। डोडिया ने बताया कि विगत दिनों भोपाल में आयोजित सिक्कों की प्रदर्शनी और शोध-पत्र वाचन समारोह में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पंवार और संचनालय पुरातत्व, मध्यप्रदेश की आयुक्त उर्मिला शुक्ला ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्य अतिथि प्रोफेसर बैधनाथ लाभ (कुलगुरु सांची बौद्ध अध्ययन विश्व विद्यालय), डॉ. मनोज कुमार कुर्मी (अधीक्षक एएसआई- दिल्ली), डॉ. आर. सी. ठाकुर (निदेशक अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर) और डॉ. विश्वजीतसिंह परमार (विभागाध्यक्ष प्राचीन इतिहास विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन) थे। अतिथियों का परिचय देने के साथ ही वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान की उपलब्धियों को निदेशक डॉ. पूजा शुक्ला ने अवगत कराया।

    एमओयू होना बड़ी बात

    डोडिया ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान और राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के मध्य एमओयू होना अपने-आप में बड़ी बात है। एमओयू होने से रतलाम जिले में इतिहास और पुरातत्व की सुस्त पड़ी गतिविधियों में गति आएगी और जिले का नाम इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं देश में भी विख्यात होगा। नि:संदेह इसके लिए राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पंवार के प्रयास और समर्पण स्तुत्य है। एमओयू हस्ताक्षर के समय संस्था की ओर से राजपूत महापंचायत के अध्यक्ष राघवेन्द्रसिंह तोमर, महामंत्री अभयसिंह परमार, नटवरसिंह परमार एवं शासन की तरफ से डॉ. पूजा शुक्ला (पुरातत्व विभाग की संयुक्त संचालक एवं डॉ. वी. वाकणकर शोध संस्थान के निदेशक), डॉ. ध्रुवेन्द्रसिंह जोधा (शोध अधिकारी डॉ. वी. वाकणकर शोध संस्थान) उपस्थित थे। इस अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन और अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के साथ भी एमओयू संपन्न हुए।

    शिक्कों की प्रदर्शनी लगी, शोध पत्रों का वाचन हुआ

    डोडिया ने बताया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में सिक्कों पर आधारित प्रदर्शनी "युगीन-युगीन सिक्कें" और चयनित शोध पत्रों का वाचन भी हुआ। समारोह के प्रारंभ में सरस्वती पूजन के पश्चात शोध अधिकारी डॉ. ध्रुवेन्द्रसिंह जोधा ने संस्थाओं के मध्य होने वाले एमओयू के महत्व को रेखांकित किया। चयनित शोध-पत्र वाचन में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पॅंवार ने रतलाम राज्य के रियासतकालीन सिक्कों पर आधारित शोध पत्र का वाचन भी किया। पॅंवार ने रतलाम के इतिहास पर दीपक रायकवार के निजी संग्रह से रतलाम राज्य के चयनित सिक्कों का अध्ययन कर विस्तृत शोध-पत्र तैयार किया। इसमें बताया कि किस प्रकार रतलाम राज्य ने मालवा में प्रथम बार अपने सिक्के ढालने और प्रचलित करने का रुतबा हासिल किया।

    रतलाम के गौरवपूर्ण इतिहास को रेखांकित किया

    पॅंवार ने मुगलकाल से लेकर अंग्रेजी शासन में कटारयुक्त हनुमान छाप रतलाम राज्य के प्रचलित सिक्कों की विशेषताओं को रेखांकित किया। पॅंवार ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान भोपाल में राष्ट्रीय स्तर पर रतलाम के गौरवपूर्ण इतिहास को सिक्कों के माध्यम से विद्वानों के सम्मुख प्रस्तुत कर रतलाम के गौरवपूर्ण इतिहास को रेखांकित किया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। शोध पत्रों पर सारगर्भित समरी डॉ. रमेश यादव (पुरातत्व अधिकारी) ने प्रस्तुत की। संचालन उपरित ने किया।

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    Fri, 24 Jan 2025 22:31:28 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कला एवं साहित्य : रतलाम के विक्रांत भट्ट का सीनियर फैलोशिप अवॉर्ड के लिए चयन, लोककथा वीर तेजाजी में नाट्य तत्वों एवं प्रस्तुतिकरण का करेंगे अध्ययन https://acntimes.com/Vikrant-Bhatt-of-Ratlam-selected-for-Senior-Fellowship-Award https://acntimes.com/Vikrant-Bhatt-of-Ratlam-selected-for-Senior-Fellowship-Award एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर के रंगकर्मी विक्रांत भट्ट को सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र, नई दिल्ली संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सीनियर फैलोशिप अवॉर्ड 2022-2023 के लिए चयनित किया गया है। इनको यह फैलोशिप रंगमंच के क्षेत्र में शोध कार्य करने के लिए दी जा रही है। इस शोध कार्य में वे लोककथा वीर तेजाजी में नाट्य तत्वों एवं प्रस्तुतिकरण का अध्ययन करेंगे। इस कार्य के लिए विक्रांत भट्ट को दो वर्ष तक 20 हजार रुपए प्रतिमाह फैलोशिप मिलेगी। 

    संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को फैलोशिप प्रदान की जाती है। इसमें संस्कृति से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में शोध कार्य करने के लिए फैलोशिप रहती है। इसके लिए देशभर से आए आवेदनों पर विचार किया जाता है। इस वर्ष रंगमंच के क्षत्र में पूरे देश से 17 लोगों को यह फैलोशिप दी जा रही है। इनमें मध्यप्रदेश से दो चयनित व्यक्तियों में विक्रांत भट्ट शामिल हैं।

    इससे पूर्व विक्रांत के काव्य संग्रह का चयन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा पहली कृति अनुदान योजना में हो चुका है। विक्रांत भट्ट वर्तमान में टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में सहायक निदेशक है।

     

     

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    Thu, 23 Jan 2025 22:41:52 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 : वैदिक ऋचाओं के साथ 24 जनवरी को होगी दो दिवसीय उत्सव की शुरुआत, लाइव थिएटर होगा, पूर्व एनएसजी कमांडो बिस्ट व फिल्म अभिनेता अनुभव साझा करेंगे https://acntimes.com/Ratlam-The-two-day-Malwa-Media-Fest-will-begin-with-Vedic-hymns-on-January-24 https://acntimes.com/Ratlam-The-two-day-Malwa-Media-Fest-will-begin-with-Vedic-hymns-on-January-24 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा मालवा मीडिया फेस्ट 2.0 का आयोजन 24 एवं 25 मार्च को रतलाम शहर के होटल बालाजी सेंट्रल में किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हस्तियां शामिल होंगी। इस दो दिवसीय समारोह में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर लाइव नाट्य मंचन के साथ विभिन्न प्रकार की कॉन्टेंट राइटिंग, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर तथा रील मेकिंग कार्यशाला और कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए निबंधन प्रतियोगिता भी होगी।

    यह जानकारी सक्षम संचार फाउंडेशन की अर्चना शर्मा ने गुरुवार को रतलाम प्रेस क्लब भवन पर आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। इस दौरान डॉ. प्रवीणा दवेसर, अदिति दवेसर एवं डॉ. हितेश पाठक सहित अन्य ने भी संबोधित किया। शर्मा ने बताया कि मालवा मीडिया फेस्ट का पहला चरण पिछले वर्ष हुआ था, इस वर्ष दूसरा चरण होगा। इसके आयोजन का उद्देश्य उन प्रतिभाओं को मंच देना है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जुनून और मेहनत के दम पर असाधारण सफलता प्राप्त की है। यह परंपरा, संस्कृति और नवाचार का भव्य संगम साबित होगा।

    युवाओं और विद्यार्थियों के लिए होगा उपयोगी

    शर्मा के अनुसार फेस्ट न केवल मनोरंजन का मंच होगा, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव भी होगा। मालवा मीडिया फेस्ट के माध्यम से स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को मीडिया के क्षेत्र में उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी साझा करवाएंगे। इसके साथ ही उन्हें कार्यशालाओं में कॉन्टेंट राइटिंग, सोशल मीडिया इंफ्लुंएंशर और रील मेकिंग वर्कशॉप में इन विधाओं को सीखने और समझने का मौका भी मिलेगा। पत्रकार वार्ता में उपस्थित सभी वक्ताओं ने रतलामवासियों और स्कूली विद्यार्थियों से इसका लाभ लेने की अपील की है। 

    वैदिक ऋचाओं के साथ 24 जनवरी को होगी शुरुआत 

    अर्चना शर्मा ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत 24 जनवरी को सुबह 11 बजे प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी द्वारा वैदिक ऋचा के साथ की जाएगी। 11:30 बजे रील मेकिंग प्रतियोगिता, दोपहर 12:30 बजे कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘माँ अहिल्या : महिला सशक्तिकरण और हस्तनिर्मित उद्योग की प्रेरणा और समर्थक’ विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता होगी। 2:00 बजे कंटेंट राइटिंग पर और 2:30 बजे मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर कार्यशाला होगी। 3:00 बजे "एक राष्ट्र-एक चुनाव" विषय पर मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा संबोधित करेंगी। शाम 4:00 बजे जवाहर व्यायामशाला के शरीर साधकों द्वारा मलखंब का प्रदर्शन किया जाएगा।

    दूसरा दिन इन हस्तियों के नाम होगा

    दूसरे दिन 25 जनवरी को सुबह 10:30 वैश्विक नस्लवाद और समानता विषय पर ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मि सामंत का व्याख्यान होगा। दोपहर 12:00 बजे से लक्की बिष्ट पूर्व NSG कमांडो, फिल्म निर्माता एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश की प्रमुख हस्तियों के निजी सुरक्षा अधिकारी रह चुके लक्की बिस्ट अपने जासूसी और सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। 2:30 बजे पंचायत वेब सीरीज़ फेम अभिनेता दुर्गेश कुमार ‘अभिनय की चुनौतियां और सफलता’ विषय पर संबोधित करेंगे। शाम 4:00 बॉलीवुड में महिला सशक्तिकरण विषय पर चर्चा का रहेगा। इसमें अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता सौम्या पांडेय महिलाओं की बदलती भूमिका और उनके योगदान पर चर्चा करेंगी। 5:30 थिएटर वर्कशॉप होगी। 7:00 नंदकिशोर पंत और उनकी टीम (मुंबई) "लोकमाता अहिल्याबाई होलकर" पर लाइव नाट्य प्रस्तुति देगी। रात 8:15 बजे पुरस्कार वितरण के साथ समापन। 

    मालवा अलंकरण की होगी शुरुआत 

    अर्चना शर्मा ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा 'मालवा अलंकरण' की शुरुआत भी रतलाम से की जा रही है। आयोजन के पहले दिन 24 जनवरी को साहित्य की सेवा के लिए प्रो. हाशमी तथा नवाचार के माध्यम से विश्वस्तरीय पहचान कायम करने वाले सीएम राइज विनोबा स्कूल को ‘मालवा अलंकरण’ से सम्मानित किया जाएगा।

    रतलाम लिट्रेचल फेस्टिवल आयोजित करने का प्रयास

    डॉ. हितेश पाठक ने कहा कि मालवा सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक सहित सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण  दखल रखता है। हालांकि रतलाम में साहित्यिक गतिविधियां उतनी नहीं होती जिनती की यहां आवश्कता है। जयपुर के लिट्रेचर फेस्टिवल ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसा ही लिट्रेचल फेस्टिवल रतलाम में भी आयोजित करने को लेकर प्रयास किए जाएंगे।

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    Thu, 23 Jan 2025 18:40:11 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ऐतिहासिक दस्तावेज है 'घर के जोगी' &संजय परसाई 'सरल' https://acntimes.com/Ghar-ke-Jogi-is-a-historical-document-Sanjay-Parsai-Saral https://acntimes.com/Ghar-ke-Jogi-is-a-historical-document-Sanjay-Parsai-Saral संजय परसाई 'सरल'

    रतलाम इन दिनों ऐतिहासिक दस्तावेजों का शहर बनता जा रहा है। पूर्व में इतिहासकार नरेंद्रसिंह पँवार का 'परमार कालीन राजवंश का इतिहास' प्रकाशित हुआ था तो विगत दिनों इतिहासकार ललित भाटी की पुस्तक 'रतलाम का इतिहास' का प्रकाशन हुआ। हाल ही में आलोचना पर केंद्रित वरिष्ठ रचनाकार आशीष दशोत्तर की बोधि प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक 'घर के जोगी' आई है। 'घर का जोगी' दिवंगत और वर्तमान में सक्रिय रचनाकारों पर केंद्रित एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शित करेगी।

    आशीष दशोत्तर साहित्य की विभिन्न विधाओं में अपना दखल रखते हैं, वो चाहे गीत, ग़ज़ल, कविता, दोहा, आलेख या समीक्षा हो। सभी में बराबर अपनी पेठ बनाते हुए किसी भी विधा में कमतर नहीं कहा जा सकता।

    सद्य: प्रकाशित 'घर के जोगी' आशीष के अथक परिश्रम का परिणाम है। अपनी उम्र से तीन से चार दशक पूर्व के रचनाकारों की सामग्री को तलाशना और उस पर अपनी सधी हुई कलम से पुस्तकाकार करना उनकी साहित्यिक साधना का ही प्रतिफल कहा जा सकता है।

    'घर के जोगी' में वे कविता, गीत, ग़ज़ल सभी विधाओं में अपनी कलम के साथ न्याय करते हुए सम्मिलित रचनाकारों के साथ भी उतना ही न्याय करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि इस पुस्तक की सर्वत्र प्रशंसा वाज़िब ही कही जा सकती है।

    कविता पर अपनी बात रखते हुए वे कहते हैं कि 'बहरहाल कविता की ताकत आज भी कायम है। भले ही इस क्षेत्र में कई अकवि प्रवेश कर गए हों, भले ही विचारों को कुंद करने का प्रयत्न जारी हो, भले ही शब्दों की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही हो, फिर भी कविता आज भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। क्षणिक उत्तेजना या तात्कालिक विचारों की अभिव्यक्ति कविता नहीं है। विचार भीतर जन्म लेता है और एक लंबे समय तक पकता रहता है। एक समय बाद कविता आकार लेती है जब वह साकार रूप लेती है तो एक वैचारिक पृष्ठभूमि के लिए धरातल प्रस्तुत करती है। ऐसी कविता हर वक्त प्रासंगिक हुआ करती है।'

    आगे वे कहते हैं कि 'यह किताब जमीन से जुड़े ऐसे ही घर के जोगियों की है जिन्हें स्थानीय बोली में तो 'जोगड़ा' कहा जाएगा। वो कहावत तो आपने सुनी होगी 'घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध'। आशीष ने इस पुस्तक में घर के जोगियों को 'जोगड़ा' ना कहते हुए अपने ही गांव का सिद्ध कहने की कोशिश की है। वे 'दिया तले अंधेरे' वाली कहावत पर भी चोट करते हुए यह सिद्ध करने में सफल हुए हैं कि हमारे गांव या शहर के रचनाकार 'जोगड़ा' नहीं बल्कि हमारे गांव के सिद्ध ही हैं। वह रतलाम के रचनाकारों की पूरे काव्य जगत में पहचान बनाने में सफल हुए हैं। वह ऐसे रचनाकारों को भी साहित्यिक फलक पर प्रकाशित करने में सफल हुए हैं जिनके नाम तक दो-तीन दशक की पीढ़ियों ने नहीं सुने थे।

    वे इस बात को भी प्रमुखता से उठाते हैं कि आजकल अकादमियां और साहित्यिक संस्थान कविता, कला के नाम पर सिर्फ फूहड़पन परोस रही हैं? जुमलेबाजी, चुटकुलेबाजी, सोशल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध बातों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना ही क्या सिर्फ कविता का अर्थ रह गया है? यदि जिम्मेदार अकादमिक संस्थाओं की सोच ऐसी है तो यह न सिर्फ आज के लिए बल्कि आने वाले वक्त के लिए बहुत खतरनाक है।

    नई पीढ़ी को लेकर भी वे चिंतित दिखाई देते हैं। वे कहते हैं कि 'वास्तव में कविता है क्या और कविता का असर क्या होता है यह नई पीढ़ी को जानना जरूरी है। अतः कहा जा सकता है कि इसी चिंता को मद्देनज़र रखते हुए आशीष ने इस आलोचना पुस्तक में उन रचनाकारों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है जिनकी रचनाओं को पढ़कर नई पीढ़ी यह जान सके की कविता क्या है और क्या होना चाहिए। अतः यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि घर के जोगी को आन सिद्ध करने का यह प्रयास नई पीढ़ी सहित अन्य पाठक वर्ग को मार्गदर्शित करते हुए एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में उल्लेखित होगी। 

    पुस्तक : घर के जोगी

    लेखक : आशीष दशोत्तर

    मूल्य : 499₹

    प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर (राज.)

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    संजय परसाई 'सरल'

    118, शक्तिनगर, गली नं. 2

    रतलाम (मप्र)

    मोबाइल फोन नंबर 9827047920

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    Sat, 18 Jan 2025 22:15:09 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम में पहली बार लाइव थियेटर ! मालवा मीडिया फेस्ट का दूसरा संस्करण 24 व 25 जनवरी को, लाइव थियेटर के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाएगा https://acntimes.com/The-second-edition-of-Malwa-Media-Fest-will-be-held-in-Ratlam-on-24th-and-25th-January-live-theatre-will-also-be-held https://acntimes.com/The-second-edition-of-Malwa-Media-Fest-will-be-held-in-Ratlam-on-24th-and-25th-January-live-theatre-will-also-be-held एसीएन टाइम्स @ रतलाम । माँ अहिल्या की 350वीं जयंती के अवसर पर 25 जनवरी को रतलाम में पहली बार लाइव थियेटर और इससे संबंधित प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। आयोजन मालवा मीडिया फेस्ट के तत्वावधान में होगा। इस दौरान थियेटर की प्रस्तुति प्रसिद्ध अभिनेता एवं निदेशक एन. के. पंत (मुंबई) के थियेटर ग्रुप द्वारा दी जाएगी।

    जानकारी के अनुसार सक्षम संचार फाउण्डेशन के द्वारा मालवा मीडिया फेस्ट के द्वितीय संस्करण के अंतर्गत 24 एवं 25 जनवरी को दो दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के प्रख्यात लेखक, अभिनेता एवं वक्ता सम्मिलित होंगे। प्रसिद्ध पुस्तक 'रा हिट मैन' के लेखक लकी बिष्ट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की छात्रसंघ की प्रथम भारतीय अध्यक्ष एवं लेखिका रश्मि सामंत, पंचायत वेब सीरीज के प्रसिद्ध अभिनेता दुर्गेशकुमार, बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री व जबलपुर की सौम्या पांडेय प्रमुख हैं। 

    प्रो. अज़हर हाशमी ने किया पोस्टर का विमोचन

    आयोजन से संबंधित पोस्टर का विमोचन प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार अज़हर हाशमी, शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेश कटारिया एवं प्रधानमंत्री एक्सिलेंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वाय. के. मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर अर्चना शर्मा, डॉ. तबस्सुम, डॉ. हितेश पाठक, अदिति दवेसर, डॉ. स्वाति पाठक, दिनेश बौरासी, डॉ. प्रवीणा दवेसर व छात्र - छात्राएं उपस्थित रहे। 

    रंगमंच से जुड़े व्यक्तियों की बैठक आयोजित

    आयोजन को लेकर रतलाम के रंगमंच से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों की एक विशेष बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास, यूसुफ जावेदी, श्यामसुंदर भाटी, ललित चौरड़िया, वैदेही कोठारी, तुषार कोठारी ने भाग लिया। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। बता दें कि कार्यक्रम का उद्देश्य रतलाम के रंगमंच प्रेमियों को एक अद्वितीय नाट्य अनुभव प्रदान करना है।

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    Sat, 11 Jan 2025 21:11:09 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सुनें सुनाएं में आया बड़ा विचार : यह शहर की नई रचनात्मक पीढ़ी है, हम इन्हें संवारें तो ये हमारे भविष्य को संवारेंगे https://acntimes.com/28th-phase-of-Sunaye-Sunayein-completed https://acntimes.com/28th-phase-of-Sunaye-Sunayein-completed 'सुनें सुनाएं' के 28वें सोपान में बच्चों ने किया रचनापाठ

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । यह शहर की नई रचनात्मक पीढ़ी है। इनको यदि हम सवांरेंगे, प्रोत्साहित करेंगे तो कल ये ही हमारे शहर के साहित्य, संस्कृति को सहारा देंगे और आगे बढ़ाएंगे। इन्हें आगे बढ़ाने और इनकी रुचि साहित्य और कला में बरकरार रखने की ज़िम्मेदारी हम सभी की है।

    उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के 28वें सोपान में उभर कर सामने आए। नए वर्ष के पहले माह में जी.डी.अंकलेसरिया रोटरी हाल रतलाम पर आयोजित कार्यक्रम में शहर की 20 बाल प्रतिभाओं ने अपनी पसंद के रचनाकारों की रचनाएं पढ़ीं। इस दौरान काव्या व्यास ने डॉ. हरिवंश राय बच्चन की रचना 'काला कौआ', चहक शर्मा ने प्रकाश मनु की रचना 'ऐसा तोता पाला जी', प्रविज्ञ चौरड़िया ने 'बसन्त की बहार', दिव्यांशी दीक्षित ने सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना 'यह कदम्ब का पेड़', मेघा राजपुरोहित ने डॉ. जयकुमार 'जलज' की रचना 'एक जतन और', अर्थ दशोत्तर ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचना 'थोड़ी धरती पाऊं' और हमज़ा ख़ान ने चंद अशआर पेश किए।

    गोपिका बैरागी ने आनंद परम की रचना 'कोशिश कर', ख़ुशी तिवारी ने डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचना 'हम पंछी इक डाल के', इफरा अंसारी ने सिद्दीक़ रतलामी की रचना 'क्या हंसीं दिन' पार्थ पाठक ने अटल बिहारी वाजपेयी की रचना 'क़दम मिलाकर चलना होगा', हर्षी तिवारी ने 'ऊं भूर्भुव स्व: (गायत्री मंत्र)', नवप्रताप सिंह सिसौदिया ने 'नन्हा पौधा', ध्वनि डोडिया ने 'बात करोगे सच्ची-सच्ची', मिहित गांधी ने सोहनलाल द्विवेदी की रचना 'लहरों से डरकर नौका', अबीर पाठक 'हमारी धरती', आद्रिका जोशी ने 'देवी स्तुति', गुलफिशा अंसारी ने सिद्दीक़ रतलामी की रचना 'अगर तुम हो पत्थर', मोक्षित गांधी ने डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचना 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' और भूमिका निनामा ने हुल्लड़ मुरादाबादी की रचना 'अच्छा है पर कभी-कभी' का पाठ किया। बच्चों के प्रभावी पाठ की सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की और अपनी ओर से उपहार भी दिए। 

    'जलज' स्मृति कविता प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित

    रचना पाठ के उपरांत डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति कविता प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। डॉ. जलज की पुत्रियों श्रद्धा पद्म घाटे एवं स्मिता निर्मल हुम्बड़ द्वारा आयोजित "डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति कविता प्रतियोगिता" में विजेताओं को साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि यह जलज जी की मंशा को आगे बढ़ाने वाला कार्य है जो शहर की रचनात्मकता में वृद्धि करेगा।

    ये रहे पुरस्कार विजेता

    स्पर्धा में प्रथम पुरस्कार शासकीय महाविद्यालय बाजना की पायल राठौर, द्वितीय पुरस्कार शासकीय महाविद्यालय बाजना की संजना राठौर, तृतीय पुरस्कार शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम की भाग्यश्री प्रजापत को दिया गया। प्रोत्साहन पुरस्कार शासकीय महाविद्यालय बाजना की मनीषा डामर तथा कन्या महाविद्यालय रतलाम की हारिल राही ने प्राप्त किया। प्रथम पुरस्कार के रूप में 3100 रुपए, द्वितीय पुरस्ककार 2100 रुपए, तृतीय पुरस्कार 1500 रुपए, चतुर्थ पुरस्कार 1100 रुपए एवं पांचवां पुरस्कार 1100 रुपए का दिया गया। स्पर्धा में सहभागिता करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डॉ. सुनीता श्रीमाल, डॉ. स्वर्णलता ठन्ना ने डॉ. जलज को लेकर विचार व्यक्त किए। कविताओं का मूल्यांकन देश के प्रसिद्ध कवि प्रदीप मिश्र (इंदौर), नीलोत्पल (उज्जैन) एवं डॉ. किसलय पंचोली (इंदौर) द्वारा किया गया था।

    डॉ. चांदनीवाला की पुस्तक का हुआ विमोचन

    इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की पुस्तक 'शांति के टापू पर समुद्र का मंगलगान' का विमोचन प्रख्यात चित्रकार महावीर वर्मा ने किया। साथ आशीष दशोत्तर के कविता कैलेंडर का भी विमोचन एवं वितरण किया गया।

    इनकी उपस्थिति रही

    आयोजन में डॉ. लीला जोशी, प्रो. रतन चौहान, डॉ. अभय पाठक, डॉ. सुरेश कटारिया, ओमप्रकाश मिश्र, डॉ. दीप व्यास, सुभाष जैन, डॉ. पद्म घाटे, नरेंद्र सिंह पंवार, संजय परसाई 'सरल', रीता दीक्षित, स्मिता दीक्षित, आयुष्मान देसाई, इंदु सिन्हा, निवेदिता देसाई, रजनी व्यास, आदिति पाठक,  अनुषा डोडिया, डिंपल सिसौदिया, गंगा निनामा, अभिषेक व्यास, विनोद संघवी, श्रेणिक बाफना, राजेश मूणत, आई. एल. पुरोहित, अनीस मोहम्मद खान, राधेश्याम शर्मा, अक्षय सिंह, जी. एस. खींची, कीर्ति कुमार शर्मा, जितेंद्र सिंह पथिक, कमलेश बैरागी, सिद्धार्थ जोशी, ग़ज़ल जोशी, गजेंद्र सिंह चौहान, विजय सिंह रघुवंशी, मणिलाल पोरवाल, ललित चौरड़िया, प्रदीप श्रीमाल, अशोक कुमार शर्मा, पंडित मुस्तफा आरिफ, राजेंद्र चौधरी, डॉ. गोविंद प्रसाद डबकरा, प्रेमलता डबकरा, डॉ. गायत्री तिवारी, अर्चना जोशी, मीनाक्षी मलिक, कल्पना सुरोलिया, आशा श्रीवास्तव, विभा राठौर, प्रिया लोदवाल, सुभाष जोशी, डॉ. मिलिन गांधी, प्रोफेसर दिनेश राजपुरोहित, दुष्यंत कुमार व्यास, रवि बोथरा, विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन मौजूद रहे।

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    Mon, 06 Jan 2025 00:33:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    काव्य गोष्ठी : रचनाकार का समाज, घर, व्यक्ति व देश के प्रति ईमानदारी से अपनी जवाबदार का निर्वाह करना जरूरी& त्रिपुरारी शर्मा https://acntimes.com/Poetry-symposium-organized-by-Ratlam-unit-of-All-India-Sahitya-Parishad https://acntimes.com/Poetry-symposium-organized-by-Ratlam-unit-of-All-India-Sahitya-Parishad एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हमारी जिम्मेदारी और जवाबदारी रचनाकार के रूप में यह तय करती है कि हमें क्या करना है और क्या नहीं करना है। समाज के प्रति, घर के प्रति, व्यक्ति के प्रति, देश के प्रति हमारी कितनी जवाबदारी है। उस जवाबदारी को हम कितनी ईमानदारी के साथ निर्वाह करते हैं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद रतलाम इकाई वह संस्था है जहां सभी रचनाकारों का स्वागत किया जाता है चाहे वह किसी भी विचारधारा का ही क्यों ना हो। ऐसे में परिषद के जिम्मेदार पदाधिकारी की यह जिम्मेदारी है कि वह भी संस्था की गतिविधियों में अपना ध्यान केंद्रित करके इस परिषद को अधिक से अधिक मजबूती प्रदान करें।

    यह बात इंदौर से पधारे मुख्य अतिथि त्रिपुरारी शर्मा ने कही। वे अखिल भारतीय साहित्य परिषद रतलाम इकाई द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर सुभाष यादव, अखिल स्नेही, सतीश जोशी ने कहा कि नगर में कई प्रकार की साहित्यिक संस्थाएं हैं जो विभिन्न विषयों को लेकर समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। इस शृंखला में भी अखिल भारतीय साहित्य परिषद रतलाम इकाई भी निरंतर साहित्यिक गतिविधियों में अपनी अहम भूमिका निभा रही है जिसे किसी भी कीमत पर नकारा नहीं जा सकता है।

    नई कार्यकारिणी का हुआ गठन

    काव्य गोष्ठी में परिषद के नए अध्यक्ष का चयन किया गया। कैलाश वशिष्ठ सर्वसम्मति से अध्यक्ष मनोनीत किए गए। महामंत्री प्रकाश हेमावत, संरक्षक सुभाष यादव, हरिशंकर भटनागर, जुझार सिंह भाटी, अखिलेश स्नेही, प्रचार मंत्री प्रकाश  हेमावत, सचिव मुकेश सोनी, सहसचिव सुरेश माथुर कोषाध्क्ष गौरीशंकर खींची बनाए गए। कार्यकारणी सदस्य अकरम शिरानी, राजेश जोशी, मुकेश आचार्य, दिनेश बारोट (सरवन), महिला इकाई प्रभारी इन्दू सिन्हा बनाया गया। संचालन प्रकाश हेमावत ने किया। आभार सुरेश माथुर ने माना।

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    Sun, 05 Jan 2025 12:56:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    एक और अनूठा आयोजन : 'सुनें सुनाएं का 28वां सोपान 5 जनवरी को, पहली बार सिर्फ नन्हे फूलों से महकेगी ये बगिया, पुरस्कार वितरण और पुस्तक विमोचन भी होगा https://acntimes.com/Suneye-Sunayein-28th-episode-will-be-on-5th-January-for-the-first-time-only-children-will-give-presentation https://acntimes.com/Suneye-Sunayein-28th-episode-will-be-on-5th-January-for-the-first-time-only-children-will-give-presentation एसीएन टाइम्स @ रतलाम । नए वर्ष की शुरुआत में 'सुनें सुनाएं' का 28वां सोपान हर बार से थोड़ा अलग होगा। इस बार बीस बच्चे अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ कर शहर के रचनात्मक भविष्य का आश्वासन देंगे। डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति कविता स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत कर युवाओं की सक्रियता का परिचय दिया जाएगा। साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की पुस्तक का विमोचन कर शहर की प्रतिष्ठा में वृद्धि की जाएगी। 

    5 जनवरी (रविवार) को जीडी अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित कार्यक्रम में कोई अतिथि नहीं होगा न ही अध्यक्ष। सबकुछ आत्मीयता से होगा। प्रातः 11 बजे से नियमित सोपान के तहत चौदह वर्ष तक के बीस बच्चे अपनी रचनाएं पढ़ेंगे। बच्चों की प्रस्तुति के उपरांत डॉ. जयकुमार 'जलज' स्मृति कविता स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कार और सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे।। इस स्पर्धा में पुरस्कृत होने वाले पांच विद्यार्थियों द्वारा अपनी रचना का पाठ भी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जलज जी की पुत्रियों श्रद्धा पद्म घाटे और स्मिता निर्मल हुम्बड़ द्वारा आयोजित इस स्पर्धा का क्रियान्वयन 'सुनें सुनाएं' द्वारा किया गया था।

    आयोजन के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला के निबंध संग्रह "शांति के टापू पर समुद्र का मंगलगान" का विमोचन किया जाएगा। 'सुनें सुनाएं'  ने शहर के सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

    28वें सोपान में ये बच्चे देंगे प्रस्तुति

    1. काव्या व्यास ( 9) - काला कौआ (डॉ. हरिवंश राय 'बच्चन') 

    2. चहक शर्मा (6) - ऐसा तोता पाला जी (प्रकाश मनु)

    3. प्रविज्ञ चौरड़िया (12) - बसन्त की बहार (अज्ञात)

    4. दिव्यांशी दीक्षित (8) - यह कदम्ब का पेड़ (सुभद्रा कुमारी चौहान)

    5. मेघा राजपुरोहित (14)- एक जतन और (डॉ. जयकुमार 'जलज')

    6. अर्थ दशोत्तर (10)-  थोड़ी धरती पाऊं - (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)

    7. हमज़ा ख़ान (14) - चंद अशआर

    8. गोपिका बैरागी (8) - कोशिश कर (आनंद परम) 

    9. ख़ुशी तिवारी (11) - हम पंछी इक डाल के (डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन')

    10. इफरा अंसारी (8) - क्या हंसीं दिन (सिद्दीक़ रतलामी) 

    11. पार्थ पाठक (13) - क़दम मिलाकर चलना होगा - अज्ञात 

    12. हर्षी तिवारी (4) - ऊं भूर्भुव स्व: (गायत्री मंत्र)

    13. नवप्रताप सिंह सिसौदिया (6) - नन्हा पौधा (अज्ञात) 

     14. ध्वनि डोडिया (5) - बात करोगे सच्ची - सच्ची (अज्ञात) 

     15. मिहित गांधी (7) - लहरों से डरकर नौका - श्री सोहनलाल द्विवेदी 

     16. अबीर पाठक (8) - हमारी धरती (अज्ञात) 

     17. आद्रिका जोशी (8) - देवी गान (स्तुति)

     18. गुलफिशा अंसारी (10) - अगर तुम हो पत्थर (सिद्दीक़ रतलामी) 

     19. मोक्षित गांधी (13) - हम पंछी उन्मुक्त गगन के (डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन')

     20. भूमिका निनामा (13) - अच्छा है पर कभी-कभी (हुल्लड़ मुरादाबादी)

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    Fri, 03 Jan 2025 18:59:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक विमोचन : आशीष दशोत्तर की पुस्तक 'घर के जोगी' रतलाम का साहित्य संदर्भ कोश साबित होगी, यह श्रमसाध्य और समयसाध्य है https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-book-Ghar-Ke-Jogi-released https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-book-Ghar-Ke-Jogi-released एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य, संस्कृति और सद्भाव के लिए पहचाने जाने वाले शहर रतलाम के साहित्य जगत को एकत्र कर आलोचकीय दृष्टि से प्रस्तुत करती पुस्तक 'घर के जोगी' का विमोचन पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, कैलाश मंडलेकर, डॉ. जवाहर कर्नावट के हाथों हुआ। पुस्तक विमोचन करते हुए अतिथियों ने कहा कि आशीष दशोत्तर की यह पुस्तक रतलाम का साहित्य संदर्भ कोश साबित होगी।

    पुस्तक पर विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अज़हर हाशमी का कहना है कि यह श्रमसाध्य और समयसाध्य कार्य है। आशीष ने इसमें वैचारिकता की दूरदृष्टि का दूरबीन लगाकर छानबीन की है, तब यह संग्रह सामने आया है। इतने रचनाकारों के साहित्य को एकत्र करना बहुत कठिन कार्य है। मेरे मत में यह अपने आप में एक रिसर्च है। इससे काफी लोग लाभान्वित होंगे और भविष्य में कई पीढ़ियां शोध कार्य में इसकी सहायता लेगीं। यह पुस्तक संदर्भ कोश साबित होगी। यह रतलाम के साहित्य की डिक्शनरी भी है, कविता का कोश भी है और परिचय माला भी है। आशीष ने इस पुस्तक के माध्यम से समुद्र से सुई निकालने का कार्य किया है।

    आलोचकीय दृष्टि और रचनात्मक श्रम का गुलदस्ता- प्रो. चौहान

    प्रो. रतन चौहान ने कहा कि यह पुस्तक रतलाम के साहित्य जगत की पहचान है। इसमें आलोचकीय दृष्टि और रचनात्मक श्रम दिखाई देता है। इस पुस्तक के माध्यम से इतने रचनाकारों की रचनाओं को समेटकर आशीष ने अपने कवि दायित्व को पूरा किया है। सुरेश उपाध्याय ने कहा कि‌ आलोचना की इस पुस्तक में आशीष ने एक अभिनव पहल की है। आज के संदर्भ में अपने शहर ‘रतलाम’ के ज्ञात, अल्पज्ञात व अज्ञात रचनाकारों के कविकर्म से वाबस्ता करने की महती कोशिश की है। किसी शहर की रचनाधर्मिता को लेकर मेरी जानकारी में यह प्रथम पहल है।

    यह आशीष के बस का ही काम है- डॉ. दशोत्तर

    स्व. सुभाष दशोत्तर के अनुज डॉ. अरविन्द दशोत्तर ने कहा कि किताब को पढ़कर लगा कि सभी कुछ जीवन्त हो उठा। निश्चय ही बड़ा चुनौती भरा काम था। आशीष ने बहुत कुशलता से इसे पूरा किया है। बहुत से नए चेहरे लगा चित परिचित हैं। हर कवि को पाठकों से इतनी सहजता से मिलवाना, आशीष के ही बस का काम है।

    तिहरी खुशी देने वाली पुस्तक- डॉ. पंचोली

    डॉ. किसलय पंचोली ने कहा कि आशीष दशोत्तर द्वारा लिखित आलोचना की साझा पुस्तक ‘घर के जोगी’ में स्वयं की कविताओं को पढ़ पाना मुझे तिहरी खुशी से सराबोर कर गया। एक तो रतलाम से जुड़े आत्मीयता के तार झंकृत होने की खुशी, दूजे इस पुस्तक में शहर के पुराने और नए नामचीन कवियों के साथ मेरा अदना सा नाम जुड़ने की खुशी, तीसरे किसी ने मुझे कविता विधा से पहचान के घेरे में ला खड़ा किया है, इस बात की खुशी। यह बहुत महत्वपूर्ण कार्य आशीष ने किया है।

    रतलाम की पहलान बनेगा यह काम- रमानी

    रश्मि रमानी ने कहा कि रतलाम का एक विस्तृत फलक़ है। हर दशक में यहां से विभूतियां निकलीं हैं। रतलाम साहित्यकारों का गढ़ रहा है। बेहद खुशी होती है जब अपने घर के लोगों में हम भी शामिल हों। आशीष का यह कार्य रतलाम की पहचान बनेगा। पुस्तक की विषय वस्तु और इसमें समाहित किए गए रचनाकारों की रचनाओं के प्रति निष्पक्ष रूप से आलोचकीय दृष्टि डालने के लिए अन्य सुधिजन ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की।

    पुस्तक विमोचन के दौरान ये सभी रहे उपस्थित

    इस अवसर पर विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, संजय परसाई 'सरल', नरेंद्र सिंह पंवार, नीरज कुमार शुक्ला, नरेंद्र सिंह डोडिया, विनोद झालानी, कीर्ति शर्मा सहित सुधिजन मौजूद थे।

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    Tue, 31 Dec 2024 01:13:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम के बहुत बड़े शून्य को भरने का काम कर रही ‘अनुनाद’ संस्था& डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला https://acntimes.com/Anunad-organization-is-working-to-fill-the-huge-void-in-Ratlam-Dr-Muralidhar-Chandnivala https://acntimes.com/Anunad-organization-is-working-to-fill-the-huge-void-in-Ratlam-Dr-Muralidhar-Chandnivala
  • पार्श्व गायक मो. रफी के 101वें जन्मदिवस पर ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ का हुआ आयोजन, 3 घंटे से ज्यादा चला गीत-संगीत की प्रस्तुति का दौर
  • अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति ने विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ कार्यों के लिए 7 शख्सियतों का किया सम्मान
  • एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति द्वारा पार्श्व गायक मोहम्मद रफी का 101वां जन्मदिवस बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर गीत-संगीत से ओत-प्रोत ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ का आयोजन किया। इस दौरान संस्था द्वारा साहित्य, कला, समाजसेवा, खेल, शिक्षा, चिकित्सा एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वाली शख्सियतों का अभिनंदन भी किया गया।

    स्थानीय कैलाशनाथ काटजू विधि महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र, राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्रसिंह पंवार, समाजसेवी एवं अनुनाद संस्था के संरक्षक विनीता ओझा एवं सेवानिवृत्त बैंककर्मी नरेंद्रसिंह डोडिया ने मां सरस्वती को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों का स्वागत अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति के संयोजक नरेश यादव, अध्यक्ष अजीत जैन, विक्की अग्रवाल (केसर बुटीक), सुरेन्द्र शर्मा, जयंत उपाध्याय आदि ने किया।

    इन शख्सियतों का किया सम्मान

    समारोह में अनुनाद संस्था द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, रंगकर्मी एवं पूर्व प्राचार्य ओमप्रकाश मिश्र, शिक्षक विनीता ओझा, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र सिंह चाहर, जनसेवी  सुरेशसिंह तंवर, प्रभाकर राव तथा पत्रकार एवं एसीएन टाइम्स के संपादक नीरज कुमार शुक्ला को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। सभी को अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति के संयोजक नरेश यादव, अध्यक्ष अजीत जैन, विक्की अग्रवाल (केसर बुटीक), सुरेन्द्र शर्मा, रतन कोल्हे आदि ने शॉल-श्रीफल प्रदान किए।

    साहित्य और संस्कृति से ही सम्मान मिलता हा- डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला

    अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि बाहर होने वाले सम्मान की अपेक्षा अपने घर में जो सम्मान होता है उसका मूल्य बहुत ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि ‘मैंने कर्मभूमि के रूप में रतलाम को खुद चुना। रतलाम ने मुझे बहुत दिया है, मैं इसका ऋणी हूं। मैं साहित्य के क्षेत्र में जो कुछ भी कर पाया हूं, वह कहीं और नहीं कर सकता था।

    रतलाम में साहित्य की सेवा इसलिए कर पाया क्योंकि यहां जयकुमार जलज, स्वयंप्रकाश उपाध्याय, भंवरलाल भाटी और अज़हर हाशमी जैसी शख्सियतें यहां रही हैं। अच्छे विद्यार्थी भी मिले जिन्होंने हमें और हमारी जरूरतों को पोषित किया। अनुनाद संस्था ने रतलाम में बहुत भारी शून्य को भरने का काम किया है। साहित्य और संस्कृति शहर हो या व्यक्ति, उसे सम्मान अवश्य दिलाती है।

    मैंने कुछ नहीं किया, सिर्फ प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया- ओमप्रकाश मिश्र

    रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र ने कहा कि ‘एक बार किसी ने चीफ जस्टिस लाहौटी से पूछा था कि मनुष्य सबसे ज्यादा कब गौरवान्वित महसूस करता है। तब उन्होंने कहा था कि- जब घुटनों को छूने वाले हाथ कंधे तक पहुंच जाएं तब मनुष्य ज्यादा गौरवान्वित महसूस करता है।

    मिश्र ने कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया, सिर्फ पहचान कर प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें धक्का भर दिया। जो कुछ किया, प्रतिभाओं ने किया है, मेहनत उनकी और प्रतिभा भी उनकी। अनुनाद संस्था प्रतिभाओं को आगे बढ़ा रही है, यह काम आसान नहीं है। मिश्र ने श्रोताओं की मांग पर ‘ए भाई, जरा देख के चलो...’ गीत भी प्रस्तुत किया।

    इन्होंने भी संबोधित किया

    सम्मान के प्रत्युत्तर में शिक्षिका विनीता ओझा, जनसेवी सुरेशसिंह तंवर, पत्रकार नीरज कुमार शुक्ला, प्रभाकर राव, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र सिंह चाहर एवं सुरेंद्र शर्मा ने भी संबोधित किया। सभी ने अनुनाद संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और सभी कलाकारों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

    इन्होंने दी प्रस्तुति, झूमें संगीत प्रेमी

    पार्श्व गायक को स्वरांजलि देने के लिए शुरू हुई गीत-संगीत निशा तीन घंटे से भी ज्यादा समय तक चलती रही। इस दौरान संस्था के कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों पर उपस्थित स्रोता झूम उठे। अशोक शर्मा, नरेश यादव, संजय चौधरी, कुलदीप शर्मा, संजय सरल, मनोज जोशी, नरेंद्र सिंह शेखावत, गिरीश शर्मा, विनोद सोलंकी, परम सिसौदिया, रिदम मिश्रा, अवनि उपाध्याय, सुनीता नागदे एवं शैली चंदेले ने मो. रफी द्वारा गाए गीतों की सुमधुर प्रस्तुत दी। इनके साथ विभिन्न साज़ों पर संगत महेश बैरागी, दिलीप व्यास, रमन सिंह हारोड़, राजेश बैरागी, कृष्णकांत एवं चयन बैरागी ने की। संचालन नरेंद्र त्रिवेदी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या संगीत प्रेमी और गणमान्यजन मौजूद रहे।

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    Fri, 27 Dec 2024 00:52:01 +0530 Niraj Kumar Shukla
    स्वरांजलि : पार्श्व गायक मो. रफी के 101वें जन्मदिवस पर अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति की प्रस्तुति 25 दिसंबर को, गीत&संगीत से सजी शाम को इनका सम्मान भी होगा https://acntimes.com/singer-Moh-Rafis-101st-birth-anniversary-will-be-celebrated-by-Anunaad-Cultural-Service-and-Jankalyan-Samiti-on-25th-December https://acntimes.com/singer-Moh-Rafis-101st-birth-anniversary-will-be-celebrated-by-Anunaad-Cultural-Service-and-Jankalyan-Samiti-on-25th-December एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति द्वारा पार्श्व गायक मोहम्मद रफी के 101वां जन्मदिवस 25 दिसंबर (बुधवार) 2024 को गीत-संगीत के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले सात लोगों का सम्मान भी किया जाएगा।

    अनुनाद सांस्कृतिक सेवा एवं जनकल्याण समिति के अध्यक्ष अजीत जैन एवं संयोजक नरेश यादव ने बताया कि आयोजन 25 दिसंबर को शाम 6.30 से रात 9.30 बजे तक कैलाशनाथ काटजू विधि महाविद्यालय रतलाम में होगा। अनुनाद की विशेष प्रस्तुति ‘तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे’ के माध्यम से पार्श्व गायक के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की जाएगी।

    इनका होगा सम्मान

    पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला को साहित्य, रंगकर्मी एवं पूर्व प्राचार्य ओमप्रकाश मिश्र को कला, शिक्षक विनीता ओझा को शिक्षा के क्षेत्र में सम्मानित किया जाएगा। इनके अलावा चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय कार्य के लिए अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र सिंह चाहर, जनसेवा के लिए सुरेश सिंह तंवर, खेल के लिए प्रभाकर राव तथा पत्रकारिता के लिए नीरज कुमार शुक्ला को सम्मानित किया जाएगा।

    इन्होंने की आयोजन को सफल बनाने की अपील

    आयोजन को सफल बनाने की अपील  संरक्षक सुरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष अजीत जैन, संयोजक नरेश यादव, आशीष दशोत्तर, प्रदीप पंवार, दिलीप व्यास, अंकिता अकोदिया, अशोक शर्मा, रमनसिंह हारोड़, गणेश मिश्रा, जयंत उपाध्याय, रतन कोल्हे, मनोज जोशी, विक्की अग्रवाल, संजय चौधरी, कुलदीप शर्मा, नरेंद्रसिंह शेखावत, नरेंद्र सिंह पंवार, शोभा शेर, रिदम मिश्रा, अवनि उपाध्याय आदि ने की है।

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    Tue, 24 Dec 2024 23:20:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
    हवाओं से उड़ते कचरे को एक दिन ज़मीन पर ही आना है& डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी https://acntimes.com/The-garbage-flying-in-the-wind-will-one-day-fall-to-the-ground-Dr-Gyan-Chaturvedi https://acntimes.com/The-garbage-flying-in-the-wind-will-one-day-fall-to-the-ground-Dr-Gyan-Chaturvedi व्यंग्य लेखक समिति (वलेस) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह में तीन घंटे तक सुनी गईं व्यंग्य रचनाएं

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । इक्कीसवीं सदी में चालाकी बढ़ गई है। बुद्ध ने कहा था कि एक ही नदी में दूसरी बार कदम नहीं रख सकते। समय की नदी में उतरना आसान नहीं। रोज़ बदल जाती है। मूर्तियों की राजनीति बदल रही है। मार्केट का सीधा असर राजनीति और विचारधाराओं पर पड़ता है। हमें अराजकता के स्त्रोत पर प्रहार करना चाहिए। परोक्ष ताकतों की पहचान के लिए अध्ययन ज़रूरी है। हम धर्म के फेरे में सही गलत का अंतर नहीं कर पाते। छद्म राष्ट्रीयता वाले मल्टी नेशनल कंपनीज़ से प्रभावित हैं।

    उक्त बातें पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने व्यंग्य लेखक समिति वलेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह के तहत आयोजित व्यंग्य पाठ समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने अपने व्यंग्य पढ़ते हुए कहा कि हवा के दम पर उड़ते कचरे को एक दिन ज़मीन पर ही आना है। व्यंग्य रचना पाठ सत्र में देश के महत्वपूर्ण व्यंग्यकारों ने रचना पाठ किया। वरिष्ठ व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने हवाओं के दम पर उड़ता कचरा और अन्य व्यंग्य रचनाएं सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।

    कैलाश मंडलेकर ने 'आई ग्रीष्म चोर घर आए',  प्रमोद ताम्बट ने 'फ़र्ज़ी डिग्री के दम पर' व्यंग्य का पाठ किया। शशांक दुबे ने अपनी रचना 'घूमने वाले बाबूजियों की किस्में', बृजेश कानूनगो ने 'साहित्य समारोह के कुछ नए कायदे', ऋषभ जैन ने 'कवि और शेयर', मुकेश राठौर ने 'जब अब लड़की देखने जाए श्रीमान से', अनीता श्रीवास्तव ने 'छुट्टी की एप्लिकेशन' का पाठ किया। सुनील जैन 'राही', अलका अग्रवाल सिगातिया, सारिका गुप्ता, सुनील सक्सेना, डॉ. मलय जैन, विजी श्रीवास्तव, शांतिलाल जैन, आशीष दशोत्तर, राजेंद्र बज (हाटपिपल्या) ने अपनी व्यंग्य रचनाओं से आनंदित कर दिया। संचालन सुनील जैन 'राही'ने किया तथा आभार विष्णु बैरागी ने व्यक्त किया।

    ज्ञान चतुर्वेदी का किया सम्मान

    इस अवसर पर डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी का शहर के साहित्यकारों प्रो. रतन चौहान, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, विष्णु बैरागी, यूसुफ़ जावेदी, नरेन्द्र सिंह पंवार, नरेंद्र सिंह डोडिया, संजय परसाई 'सरल', महावीर वर्मा, विनोद झालानी, रणजीत सिंह राठौर ने सम्मान किया। शहर की सक्रिय संस्था 'हम लोग' की ओर से संस्था अध्यक्ष सुभाष जैन और साथियों ने सम्मान किया। नरेन्द्र सिंह पंवार ने अपनी पुस्तक भेंट की।

    व्यंग्य की इन पंच लाइनों ने दिया आनंद

    "घूमना मेमसाब का ‘पैशन’ नहीं होता, वे फैशन के कारण घूमती हैं। कुछ बहनजियाँ तो ‘कैट वॉक’ करते हुए इस बात का विशेष ध्यान रखती हैं कि उनकी टी शर्ट या कुर्ती का रंग, जूतों और छाते के रंग से मैच हो। इन्हें ‘रंग मिलावनी वॉकराइन’ कहने में क्या हर्ज है!"

    -शशांक दुबे, उज्जैन

    "वैवाहिक रिश्ता पक्का करने की प्रक्रिया वैज्ञानिक पद्धति की तरह चरणबद्ध चलती है|"

    -मुकेश राठौर, भीकनगांव

    “कविता के शेयर लाना संभव नहीं है यार। वर्तमान में भी कुछ फेस वैल्यू हो चीज की तब तो शेयर बने उसका। कवि ने सोचा गुड़ के शेयर के दीवाने कबीर की कविता भी काहे सुनने लगे।

    -ऋषभ जैन, दुर्ग

    "अगर आप कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि या अध्यक्षता का दायित्व संभालने हेतु आमंत्रित किए गए हों तो यह और भी ज़रूरी हो जाता है कि आप पूरी तैयारी के साथ जाएं। याने वह कुर्ता कदापि न पहनें जिसे पिछली गोष्ठी में पहनकर गए थे।"

    -ब्रजेश कानूनगो, इंदौर

    "मुड़-मुड़ के देखने का हमारे यहां इतना अच्छा रिवाज़ है, जो पूरे हिंदुस्तान में नहीं मिलेगा। जिसको भी चलते-चलते कहीं वाहन को मोड़ना होता है, वह साइड नहीं लेता, हाथ भी नहीं दिखाता। बस !  मुड़-मुड़ के पीछे की तरफ देखता है। उसके मुड़ - मुड़ के देखने से आप समझ जाइए कि यह मुड़ने वाला है। किधर मुड़ने वाला है, यह उसकी इच्छा। आप तो पीछे चलते अपने वाहन को धीमा कर लीजिए और भलाई चाहते हों तो रोक ही लीजिए, क्योंकि वह एकदम यू-टर्न भी ले सकता है।"

    -आशीष दशोत्तर, रतलाम

    "अर्दली और बाबू को टोकन मनी नहीं मिली तो भैंस को नई तारीख दे दी। भैंस ने अहिंसा धर्म अपनाया और धरने पर बैठ गई। भैंस मुंह ऊपर करके डकरा रही थी और अदालत की कार्रवाई उसके सामने बीन बजा रही थी।"

    -सुनील जैन 'राही', नई दिल्ली

    "इन दिनों डाटा चोरी का मामला जोर पकड़ रहा है। चोरी की दुनिया मे यह नया और विश्वव्यापी कीर्तिमान है। ऐसी घटनाएं देशी और पारंपरिक चोरों को विचलित कर देती हैं। वे हीनता बोध से ग्रसित होने लगते हैं। हीनता इस बात की, कि चोरी का धंधा कहाँ से कहाँ पहुंच गया और एक हम हैं कि अभी भी नुक्कड़ की दुकान से मूमफली के दाने और गरममसाला ही चुरा रहे हैं। लानत है हम पर और ऐसी चोरी पर।"

    -कैलाश मंडलेकर, खंडवा

    "कुछ पूजनीय किस्म के बहाने हैं जिन्हें बनाने वाले के पैर छूने का मन करता है। जैसे रास्ते में एक बुढ़िया मिल गई थी, बोली बेटा घर छोड़ दो। बुढ़िया के पहले गरीब, लाचार और बोल दिया जाय तो बढ़िया असर करता है। न जाने कब मेरे भीतर कामचोरी का वायरस प्रवेश कर गया। छुट्टी लेने के सौ तरीके जैसी किताब लिखें ताकि भावी पीढियाँ अवकाश पर जाना सीख सकें।"

    -अनीता श्रीवास्तव, टीकमगढ़

    “दुनिया की किसी भी यूनिवर्सिटी के किसी भी कोर्स की फर्ज़ी डिग्रियों के दम पर हम अपने इस देश को दुनिया का सिरमोर बना कर ही दम लेंगे।”

    -प्रमोद ताम्बट, भोपाल

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    Mon, 23 Dec 2024 22:01:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनाकार का असंतोष ही उसकी रचना को प्रभावी बनाता है& डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी https://acntimes.com/It-is-the-dissatisfaction-of-the-creator-that-makes-his-creation-effective-Dr-Gyan-Chaturvedi https://acntimes.com/It-is-the-dissatisfaction-of-the-creator-that-makes-his-creation-effective-Dr-Gyan-Chaturvedi वलेस के राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह में पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । एक रचनाकार को आम आदमी के दर्द को समझने वाला और संवेदनशील होना चाहिए। घाव की टीस को पालना, उसकी संवेदना को पोषित करना रचनाकार के लिए ज़रूरी है। मानव के लिए, घटनाओं के लिए बल्कि परमसुखी के लिए भी संवेदनशील होना चाहिए। कोई सम्मान, लेखक को संतोष दे रहा हो तो वो सही नहीं। लेखक को असंतुष्ट रहना ज़रूरी है।

    उक्त विचार वरिष्ठ व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने व्यंग्य लेखक समिति (वलेस) द्वारा आयोजित ज्ञान चतुर्वेदी राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह में सम्मानित व्यंग्यकारों को सम्मान प्रदान करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो विषय आपके पीछे लग जाए, उसे जीने की कोशिश करें। विचार आने के बाद बार-बार पढ़ना, संशोधित करना ही लेखकीय साधना है। जब तक मन माफिक परिणाम तक न पहुंचे। संतुष्ट होने तक बार बार लिखें। कला के तीसरे क्षण में आप अपनी क्षणिक सोच को प्रतिबिंबित कर पाएंगे। डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने नए रचनाकारों को निरंतर पढ़ने की सलाह दी और अपने लिखे हुए पर बार-बार विचार करना चाहिए।

    आक्रोश व्यंग्य पैदा करता है- कैलाश मंडलेकर

    वरिष्ठ व्यंग्यकार कैलाश मंडलेकर ने कहा कि व्यंग्य एक दृष्टिकोण है। परसाई जी ने इसे स्प्रिट कहा। शरद जी ने भी अपनी रचनाओं को व्यंग्य कहने का दावा नहीं कहा। किंतु उन्होंने व्यंग्य को स्थापित किया। इंग्लिश और उर्दू में व्यंग्य का बड़ा खजाना है। पौराणिक साहित्य भी हमें पढ़ना चाहिए। भवभूति ने लिखा- ‘राम, सीता का हाथ छोड़ते हुए कांप रहे थे।’ ऐसे प्रसंग कई प्रश्न उठाते हैं। उन्होंने कहा कि आक्रोश व्यंग्य पैदा करता है। मुक्तिबोध और परसाई के आक्रोश में फर्क है।  परसाई का आक्रोश सुखांत के साथ पूरा होता है जबकि मुक्तिबोध एरोगेंट रहे। ग़ालिब ने अपने शेरों में आक्रोश प्रकट किया।

    विदेशों में भी पढ़ाई जा रही हिंदी- डॉ. जवाहर कर्नावट

    विशेष अतिथि व्यंग्यकार डॉ. जवाहर कर्नावट ने कहा कि विश्व के कई देशों में व्यंग्य के उदाहरण मिलते हैं। अन्य भारतीय भाषा के व्यंग्यों का संकलन भी किया जाना चाहिए। गुजरात में व्यंग्य का निर्झर बहता है। ओसाका में ब्रज भाषा पढ़ाई जा रही थी। उज़्बेकिस्तान में भी हिंदी पढ़ाई जाती देखी। यह कार्य एक जापानी महिला कर रही थीं। समारोह के स्थानीय संयोजक व्यंग्यकार आशीष दशोत्तर ने स्वागत उद्बोधन दिया। शांतिलाल जैन ने वलेस वार्षिक उत्सव का विवरण प्रस्तुत किया।

    ये व्यंग्यकार हुए सम्मानित

    ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान संयुक्त रूप से शशांक दुबे (उज्जैन) एवं प्रमोद ताम्बट (भोपाल) को प्रदान किया गया। इसी प्रकार वलेस दीर्घकालिक व्यंग्य सेवा सम्मान - ब्रजेश कानूनगो (इंदौर) को, वलेस श्रेष्ठ नव पल्लव व्यंग्य सम्मान - संयुक्त रूप से ऋषभ जैन (रायपुर) एवं मुकेश राठौर (भीकनगांव), वलेस व्यंग्य साधक सम्मान - डॉ. हरीश कुमार सिंह (उज्जैन) को एवं वलेस श्रेष्ठ व्यंग्य विदुषी सम्मान - सारिका गुप्ता (इंदौर) एवं अनीता श्रीवास्तव (टीकमगढ़) को दिया गया। सम्मानित व्यंग्यकारों ने अपनी रचना प्रक्रिया पर वक्तव्य दिया।

    व्यंग्यकारों की पुस्तकों का हुआ विमोचन

    प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर व्यंग्यकार अनीता श्रीवास्तव, ऋषभ जैन, आशीष दशोत्तर की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इस सत्र का संचालन शांतिलाल जैन ने किया।

    ये उपस्थित रहे

    रतलाम में पहली बार हुए इस आयोजन में देशभर से आए व्यंग्यकारों के साथ रतलाम के साहित्य जगत से प्रो. रतन चौहान, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, ओमप्रकाश मिश्र, हमलोग संस्था के सुभाष जैन, विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, नरेंद्र सिंह डोडिया, नरेंद्र सिंह पंवार, विनोद झालानी, प्रकाश हेमावत सहित बड़ी संख्या में शहर के साहित्यकार मौजूद थे।

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    Mon, 23 Dec 2024 09:46:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम में पहली बार… ज्ञान चतुर्वेदी राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह 22 दिसंबर को, देश के शीर्षस्थ 22 व्यंग्यकार करेंगे व्यंग्य पाठ https://acntimes.com/Ratlam-Padma-Shri-Gyan-Chaturvedi-National-Satire-Award-Ceremony-on-22-December-22-satirists-will-read-satire https://acntimes.com/Ratlam-Padma-Shri-Gyan-Chaturvedi-National-Satire-Award-Ceremony-on-22-December-22-satirists-will-read-satire एसीएन टाइम्स @ रतलाम । ज्ञान चतुर्वेदी राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान समारोह 22 दिसंबर रविवार को रतलाम में आयोजित होगा। व्यंग्य लेखक समिति (वलेस) द्वारा आयोजित समारोह में वरिष्ठ व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी मौजूद रहेंगे। समारोह में देश के शीर्षस्थ 22 व्यंग्यकारों का व्यंग्य पाठ भी होगा।

    समारोह के स्थानीय संयोजक व्यंग्यकार आशीष दशोत्तर ने बताया कि अजंता पैलेस में दो सत्रों में आयोजन होगा। पहला सत्र सम्मान समारोह का रहेगा। व्यंग्य पाठ का सत्र दोपहर 12.30 बजे से आयोजित होगा। वलेस ने शहर के सुधिजनों से व्यंग्य पाठ सत्र में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। बता दें कि, रतलाम में इस तरह का यह पहला आयोजन है।

    8 व्यंग्यकार होंगे सम्मानित

    ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान संयुक्त रूप से शशांक दुबे (उज्जैन) एवं प्रमोद ताम्बट (भोपाल) को प्रदान किया जाएगा। वलेस दीर्घकालिक व्यंग्य सेवा सम्मान ब्रजेश कानूनगो (इंदौर) को दिया जाएगा। वलेस श्रेष्ठ नव पल्लव व्यंग्य सम्मान संयुक्त रूप से ऋषभ जैन (रायपुर) एवं मुकेश राठौर (भीकनगांव), वलेस व्यंग्य साधक सम्मान डॉ. हरीश कुमार सिंह (उज्जैन) को एवं वलेस श्रेष्ठ व्यंग्य विदुषी सम्मान सारिका गुप्ता (इंदौर) एवं अनीता श्रीवास्तव (टीकमगढ़) को दिया जाएगा। 

    व्यंग्य रचनाओं का पाठ भी होगा

    व्यंग्य रचना पाठ सत्र में देश के महत्वपूर्ण व्यंग्यकार रचना पाठ करेंगे। वरिष्ठ व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (भोपाल), कैलाश मंडलेकर (खंडवा), प्रमोद ताम्बट (भोपाल), सुनील जैन राही (नई दिल्ली), अलका अग्रवाल सिगातिया (मुम्बई), सुनील सक्सेना (भोपाल), शशांक दुबे (उज्जैन), बृजेश कानूनगो (इंदौर), हरीश कुमार सिंह (उज्जैन), सारिका गुप्ता (इंदौर), ऋषभ जैन (रायपुर), मुकेश राठौर (भीकनगांव), मलय जैन (भोपाल), विजी श्रीवास्तव (भोपाल), शांतिलाल जैन (उज्जैन), आशीष दशोत्तर (रतलाम), राजेंद्र बज (हाटपिपल्या), अनीता श्रीवास्तव (टीकमगढ़), तीरथ सिंह खरबंदा (इंदौर) सहित अन्य व्यंग्यकार आयोजन में रचना पाठ करेंगे।

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    Sat, 21 Dec 2024 14:03:04 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : 2022 और 2023 के लिए MP के 80 लेखकों की श्रेष्ठ पाण्डुलिपियों की घोषणा, रतलाम जिले के तुषार कोठारी, वैदेही कोठारी, विक्रांत भट्ट, कमलेश बैस को मिलेगा अनुदान https://acntimes.com/MP-Sahitya-Academy-announces-best-manuscripts-of-80-writers-of-MP-for-2022-and-2023 https://acntimes.com/MP-Sahitya-Academy-announces-best-manuscripts-of-80-writers-of-MP-for-2022-and-2023 एसीएन टाइम्स @ भोपाल / रतलाम । साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा वर्ष 2022 एवं 2023 के लिए प्रदेश के लेखक की प्रथम कृति के प्रकाशनार्थ श्रेष्ठ पाण्डुलिपियों की घोषणा की गई है। चयनित प्रत्येक पाण्डुलिपि 20-20 हजार रुपए सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसमें रतलाम जिले से तुषार कोठारी, वैदाही कोठारी, विक्रांत भट्ट एवं कमलेश बैस (आलोट) शामिल हैं। 

    साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष 40 लेखकों की प्रथम कृति की पाण्डुलिपियों को 20-20 हजार रुपए सहायता अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2022 एवं 2023 के लिए पाण्डुलिपियों का चयन कर लेखकों के नामों की घोषणा कर दी गई है। यानी कुल 80 लेखकों की पाण्डुलिपियों का चयन किया गया है। डॉ. दवे ने सभी निर्णायकों के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुए चयनित लेखकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। बता दें कि, रतलाम जिले के तुषार कोठारी के यात्रा वृत्तांत, वैदेही कोठारी के कहानी संग्रह, विक्रांत भट्ट के काव्य संग्रह एवं आलोट के कमलेश बैस के मुक्तक संग्रह का चयन किया गया है। 

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    Fri, 20 Dec 2024 23:41:39 +0530 Niraj Kumar Shukla
    यहां न अतिथि, न भाषण, न गुणगान, सिर्फ़ रचनात्मक संवाद होता है, तो आप भी 1 दिसंबर को चले आइये सुनें सुनाएं के 27वें सोपान पर https://acntimes.com/Ratlam-27th-episode-of-Sunaye-Sunaye-on-1st-December https://acntimes.com/Ratlam-27th-episode-of-Sunaye-Sunaye-on-1st-December एसीएन टाइम्स @ रतलाम । ऐसा आयोजन जिसमें कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ता है। समय पर प्रारंभ हो कर समय पर आयोजन समाप्त हो जाता है। जो यहां आता है वह एक घंटे में रचनात्मक ऊर्जा, आत्मीय सरोकार और मिलन स्नेह से अभिभूत हो जाता है। जहां अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ किया जाता है। जहां भूमिका, भाषण, गुणगान  नहीं होता है। जहां कोई अतिथि नहीं होता सभी साथी होते हैं।

    ऐसा आयोजन है - 'सुनें सुनाएं'। पिछले दो वर्ष से शहर में रचनात्मक गतिविधियों के लिए वातावरण बना रहे 'सुनें सुनाएं' का 27वां सोपान 1 दिसंब (रविवार) को सुबह 11 बजे जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल रतलाम पर होगा। इस आयोजन में अपने प्रिय रचनाकार की रचना पाठ करने के साथ विमर्श भी होगा। इस बार रचना पाठ करने वालों में नरेन्द्र सिंह डोडिया द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की रचना 'हिन्दू तन-मन' का पाठ, सविता राठौर द्वारा आशा मिश्रा की रचना 'गुम हुए सामान' का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा शायरों के अशआर 'ज़ाहिद शराब पीने दे' का पाठ, मधु परिहार द्वारा मैथिलीशरण गुप्त की रचना 'दीपदान' का पाठ किया जाएगा।

    ओमप्रकाश मिश्र द्वारा साहिर लुधियानवी की रचना 'ताजमहल' का पाठ, सरिता दशोत्तर द्वारा दयालसिंह पंवार की रचना 'अपना हिन्दुस्तान कहां है' का पाठ, विष्णु बैरागी द्वारा बालकवि बैरागी की हास्य कविता 'लाली चाली सासरे' का पाठ, जी.जी. सिंह राठौर 'आम्बा' द्वारा गोपालदास 'नीरज' की रचना 'जीवन नहीं मरा करता है' का पाठ, विनोद झालानी द्वारा कवियों के चंद मुक्तक का पाठ, देवेन्द्र वाघेला द्वारा अज़हर हाशमी की रचना 'ओस की बून्द सी होती हैं बेटियां' का पाठ, रणजीत सिंह राठौर द्वारा श्याम माहेश्वरी की रचना 'बहस करो' का पाठ किया जाएगा। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजन से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Sat, 30 Nov 2024 20:45:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    विचार वार्ता : राष्ट्र के उत्थान और परहित के लिए ऐसे ही रचनात्मक प्रयासों और सृजन की महती आवश्यकता है : अजहर हाशमी https://acntimes.com/Dr-Pradeep-Singh-Rao-presented-his-book-Sadhana-ke-Sant-to-Prof-Azhar-Hashmi https://acntimes.com/Dr-Pradeep-Singh-Rao-presented-his-book-Sadhana-ke-Sant-to-Prof-Azhar-Hashmi एसीएन टाइम्स @ रतलाम । विख्यात चिंतक प्रो. अज़हर हाशमी से राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और लेखक डॉ. प्रदीप सिंह राव ने उनके निवास पर पहुंच कर विचार वार्ता की। डॉ. राव ने प्रो. हाशमी को अपनी पुस्तक ‘साधना के संत’ भेंट की।

    डॉ. राव की पुस्तक पर प्रो. हाशमी ने प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा कि, हमारा राष्ट्र आज पूरे विश्व में जिस उत्थान के परवान पर है, उसमे संविधान की विशेष भूमिका है। आज परहित में सृजन और ऐसे सकारात्मक व रचनात्मक प्रयासों की महती आवश्यकता है। इस दिशा में आपका लेखन अनुमोदनीय है। प्रो. हाशमी से विचार वार्ता और पुस्तक भेंट करने के दौरान डॉ. राव के साथ समाजसेवी अशोक अग्रवाल, हरीश यादव, महेंद्र देवड़ा आदि भी उपस्थित थे।

    बता दें कि, सेवानिवृत्त प्रो. राव समाज के जरूरतमंदों की मदद के लिए साहित्य सृजन में जुटे हुए हैं। उनकी ‘साधना के संत’ पुस्तक इसी प्रकल्प का एक हिस्सा है। इसकी बिक्री से प्राप्त राशि में समाजसेवी अशोक अग्रवाल द्वारा उतनी ही राशि मिला कर दिव्यांग बच्चों की सहायतार्थ उपलब्ध कराई जाना जाना है। लोकहित के लिए किए गए सृजनात्मक प्रयास को काफी सराहना मिल रही है। 

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    Thu, 28 Nov 2024 15:20:22 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम में पहली बार : व्यंग्य लेखक समारोह 22 दिसंबर को, पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी सहित वरिष्ठ व्यंग्यकार मौजूद रहेंगे, व्यंग्यकारों का सम्मान भी होगा https://acntimes.com/Satire-Writers-Festival-On-December-22-in-Ratlam-Madhya-Pradesh https://acntimes.com/Satire-Writers-Festival-On-December-22-in-Ratlam-Madhya-Pradesh एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य और संस्कृति के नगर रतलाम में पहली बार व्यंग्य लेखक समारोह आयोजित हो रहा है। इस समारोह में देश के ख्यातनाम व्यंग्यकार मौजूद रहेंगे। आयोजन में वरिष्ठ और युवा व्यंग्यकारों का व्यंग्य पाठ होगा और प्रतिष्ठित ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे।

    समारोह के स्थानीय संयोजक व्यंग्यकार आशीष दशोत्तर ने बताया कि व्यंग्य लेखक समिति (वलेस) का यह आयोजन 22 दिसंबर (रविवार) को होटल अजंता पैलेस में होगा। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला प्रतिष्ठित ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान समारोह अब तक महानगरों में आयोजित होता रहा है, मगर यह पहला अवसर होगा जब रतलाम में यह आयोजन होगा। दशोत्तर ने बताया कि रतलाम में कविता, कहानी को लेकर पूर्व में बड़े आयोजन हुए हैं मगर व्यंग्य को लेकर यह पहला आयोजन रतलाम की साहित्यिक नगरी में हो रहा है। 

    ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान से सम्मानित होंगे व्यंग्यकार

    यह सुखद संयोग है कि इस बार मालवा क्षेत्र के व्यंग्यकारों ने पुरस्कार सूची में सर्वाधिक स्थान प्राप्त किया है, जो स्व. शरद जोशी की अद्वितीय व्यंग्य परंपरा की देन है। मालवा की उर्वर भूमि लगातार इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। मालवा के गढ़ रतलाम में आयोजन इस परंपरा को समृद्ध कर रहा है। इस वर्ष ज्ञान चतुर्वेदी व्यंग्य सम्मान संयुक्त रूप से शशांक दुबे (उज्जैन) एवं प्रमोद ताम्बट (भोपाल) को प्रदान किया जाएगा। वलेस दीर्घकालिक व्यंग्य सेवा सम्मान ब्रजेश कानूनगो (इंदौर) को दिया जाएगा। वलेस श्रेष्ठ नव पल्लव व्यंग्य सम्मान संयुक्त रूप से ऋषभ जैन (रायपुर) एवं मुकेश राठौर (खरगोन) को दिया जाएगा। वलेस व्यंग्य साधक सम्मान डॉ. हरीश कुमार सिंह (उज्जैन) को दिया जाएगा। वलेस श्रेष्ठ व्यंग्य विदुषी सम्मान सारिका गुप्ता (इंदौर) एवं अनीता श्रीवास्तव (टीकमगढ़) को दिया जाएगा। 

    ये व्यंग्यकार मौजूद रहेंगे 

    समारोह में देश के ख्यातनाम व्यंग्यकार मौजूद रहेंगे। अब तक प्राप्त सहमति के अनुसार वरिष्ठ व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (भोपाल), कैलाश मंडलेकर (खंडवा), प्रमोद ताम्बट (भोपाल),  सुनील जैन राही (नई दिल्ली), अलका अग्रवाल सिगातिया (मुम्बई), सुनील सक्सेना (भोपाल), शशांक दुबे (उज्जैन), बृजेश कानूनगो (इंदौर), हरीश कुमार सिंह (उज्जैन), सारिका गुप्ता (इंदौर), ऋषभ जैन (रायपुर), मुकेश राठौर (भीकनगांव), मलय जैन (भोपाल), विजी श्रीवास्तव (भोपाल), शांतिलाल जैन (उज्जैन), राजेंद्र बज (इंदौर), अनीता श्रीवास्तव (टीकमगढ़), तीरथ सिंह खरबंदा (इंदौर) सहित अन्य व्यंग्यकार उपस्थित रहेंगे।

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    Sun, 17 Nov 2024 00:44:34 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कला एवं साहित्य : रतलाम में 17 नवंबर को बहेगी ‘काव्य रस धारा’, महक कला साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच कर रहा आयोजन https://acntimes.com/Kavya-Ras-Dhara-will-be-organized-in-Ratlam-on-November-17 https://acntimes.com/Kavya-Ras-Dhara-will-be-organized-in-Ratlam-on-November-17 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम की अग्रणी संस्था "महक कला साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच" के तत्वाधान में 17 नवंबर (रविवार) काव्य रस धारा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य अतिथि पी. एम. द्वारा प्रशंसनीय कवयित्री कविता चौहान (इंदौर) रहेंगी। अध्यक्षता राष्ट्रीय स्तर के आशु कवि के. पी. एस. चौहान (इंदौर) करेंगे।

    संस्था के संस्थापक एवं कार्यक्रम के सूत्रधार मोड़ीराम सोलंकी ‘एकांत’ ने बताया कि आयोजन सुबह 11 बजे रतलाम शहर के डी.आर.एम. ऑफिस के सामने स्थित होटल स्वाद (स्वीट एवेन्यू) पर होगा। इसमें रतलाम के कनिष्ठ और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा काव्यपाठ किया जाएगा। संस्था के मोहन सिंह सोलंकी, भूपेंद्र सिंह राठौड़ (पूर्व डीएसपी), प्रवीण सोनी, अशोक अग्रवाल, पूरण चोइथानी, इंदु सिन्हा, स्नेहलता धाकड़, जगदीश हरारिया, नरेंद्र धाकड़ एवं लक्ष्मण पाठक ने अधिक से रचनाधर्मियों से अधिक से अधिक संख्या उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।

     

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    Wed, 13 Nov 2024 20:42:26 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अनूठा संगम : साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के मिलन समारोह में बिखरी मालवा की महक, मालवा लिटरेचर कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा बनी https://acntimes.com/Ratlam-The-fragrance-of-Malwa-spread-in-the-gathering-of-literary-and-cultural-organizations https://acntimes.com/Ratlam-The-fragrance-of-Malwa-spread-in-the-gathering-of-literary-and-cultural-organizations एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मालवांचल की संस्थाओं का दीपावली मिलन समारोह कला, साहित्य, संस्कृति के त्रिवेणी समागम के रूप में संपन्न हुआ। इस दौरान तीनों ही क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में शामिल हुईं सभी संस्थाओं के प्रमुखों का अभिनंदन भी किया गया। भविष्य में मालवा लिटरेचर कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा भी बनी।

    यह ऐतिहासिक आयोजन राजाभोज जन कल्याण सेवा समिति ने श्री सज्जन क्षत्रिय समाज परिषद राजपूत बोर्डिंग एवं श्री त्रिवेदी आर्ट्स मूर्तीकला केन्द्र के सहयोग से किया। मुख्य अतिथि शहर एसडीएम अनिल भाना रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ द्वीप प्रज्ज्वलन जी. जी. सिंह आम्बा, विष्णु बैरागी, कैलाश व्यास, डॉ. प्रदीपसिंह राव, डॉ. सुलोचना शर्मा, सुशील छाजेड़ ने किया। सरस्वती वंदना अवनि व्यास ने प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि भाना का स्वागत राजाभोज जन कल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पंवार ने अंगवस्त्र भेंट कर किया। अन्य अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के राजेन्द्रसिंह बासिन्द्रा, अभिभाषक राजेश शर्मा, नरेन्द्रसिंह राठौर (पिपलौदा), भवानीप्रतापसिंह सरवन, सत्यदीपसिंह ‘शक्ति बना’ (पार्षद), गजेन्द्रसिंह चौहान, सुनील शर्मा, भूपेन्द्रसिंह नरेड़ी, गजेन्द्रसिंह मसवाड़िया, राजेन्द्रसिंह जोधा (लुनेरा), अजयपाल सिंह मसवाड़िया, करणीसिंह जोधा (लुनेरा), मनीष दसपुत्रे, संग्रामसिंह राठौर, राजेन्द्र शर्मा, संजय शर्मा एवं आशीष जैन ने किया।

    आयोजन के उद्देश्य की सार्थकता हुई साबित- नरेंद्रसिंह पंवार

    स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया ने कहा कि सक्रिय संस्था किसी भी अन्य संस्था की प्रतिद्वंद्वी न होकर यदि एक-दूसरे की पूरक होकर कार्य करें तो निश्चित ही अच्छे परिणाम आएंगे। यह कार्यक्रम इसी का सूचक है। राजा भोज जन कल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंवार ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मालवांचल की कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्थाओं की सक्रिय उपस्थित ने समारोह आयोजित करने के उद्देश्य की सार्थकता साबित की है। समारोह में अंचल के कलाकारों ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

    गीत-गजल की दी प्रस्तुति

    अवनि उपाध्याय, अशोक शर्मा, सुनीता, जयवंत गुप्ते, हेमन्त जोशी, मुकेश गेहलोत (धानासुता), डॉ. आनंद त्रिवेदी, नित्येन्द्र आचार्य, दिनेश बारोठ (बड़ी सरवन), संजय परसाई ‘सरल’, नीतेश जोशी (बड़नगर), दुर्गेश सुरोलिया, उल्लास उपाध्याय आदि ने गीत-ग़ज़ल की प्रस्तुति दी। ब्रजेश गौड़ ने बांसुरी वादन किया।

    कविता पाठ एवं लघुकथा वाचन किया

    डॉ. प्रवीणा दवेसर, प्रकाश हेमावत, श्यामसुंदर भाटी, इन्दु सिन्हा, सुरेश माथुर, रणजीतसिंह राठौर, विनोद झालानी, माही व्यास, रमेश मनोहरा, आई. एल. पुरोहित, प्रद्युम्न भट्ट, कैलाश वशिष्ठ, योगिता राजपुरोहित, नूतन मजावदिया, सुनील जमड़ा, ललिता कुशवाह, महिपालसिंह भैंसाडाबर, लक्ष्मण पाठक आदि ने किया।

    इन संस्थाओं के प्रमुखों का हुआ सम्मान

    सहभागिता करने वाली प्रमुख संस्थाओं में श्री सज्जन क्षत्रिय समाज परिषद राजपूत बोर्डिंग रतलाम के धर्मेन्द्रसिंह बागेड़ी एवं अजीतसिंह चुंडावत, हमलोग संस्था के सुभाष जैन, महाराजा श्री रतनसिंहजी बलिदान दिवस समारोह से धीरेन्द्रसिंह राठौर, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन शोध संस्थान की डॉ. शोभना तिवारी, युगबोध नाट्य कला मंच के ओमप्रकाश मिश्र, शिक्षक सांस्कृतिक मंच के दिनेश शर्मा व के. सी. ठाकुर, सुनें-सुनाएं के विष्णु बैरागी, जनवादी लेखक संघ के रणजीत सिंह राठौर, तुलसी साहित्य अकादमी एवं यज्ञ मां कला निकाय की खुशबू सोनी, महक संस्था के मोड़ीराम सोलंकी ‘एकांत’, अनूभूति संस्था के डॉ. मोहन परमार, पाठक मंच की रश्मि पाठक, स्वर्गीय अरुण भार्गव स्मृति हिन्दी प्रचार प्रसार समिति के डॉ. मुनीन्द्र कुमार दुबे, सुषमा साहित्य संस्था के यादव, स्वर्गीय जयकिरण स्मृति संस्था बड़नगर के नीतेश जोशी, अनुनाद संगीत संस्था के अजीत जैन, वनमाली सृजनपीठ जिला शाखा रतलाम के आशीष दशोत्तर, स्वर शृंगार के संजय परसाई ‘सरल’, व्योम फिल्म निर्माण संस्था के मुकेश व्यास, राठौर फिल्म निर्माण संस्था सैलाना के राजेन्द्रसिंह राठौर, कवच फिल्म निर्माण के नरेन्द्र शर्मा, झाबुआ फिल्म निर्माण के रीतेश बैरागी, अंतरंग भजन मंडल, टैलेंट ऑफ रतलाम व नीला दरिया के अलेक्क्षेन्द्र व्यास, फोटोग्राफी के लिए राकेश पोरवाल, लगन शर्मा और दिलीप सिंह राजावत का सम्मान संस्था अध्यक्ष पंवार ने प्रशस्ति-पत्र एवं लिटरेचर फोल्डर भेंट कर किया। मुख्य अतिथि को संकल्प-पत्र की प्रति प्रदान कर शहर में साहित्यिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भवन उपलब्ध करवाने की मांग रखी। 

    इनकी पुस्तकें रहीं अवलोकनार्थ

    डॉ. जयकुमार जलज, प्रो. अज़हर हाशमी, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, डॉ. प्रदीपसिंह राव, प्रो. रतन चौहान, डॉ. मणिशंकर आचार्य, डॉ. दिनकर सोनवलकर, प्रतीक सोनवलकर, पंकजा सोनवलकर, डॉ. जयकिरण जोशी, सिद्दीक रतलामी, खुशबू जांगलवा, रश्मि पंडित के कविता कहानी संग्रह, ललित भाटी एवं नरेन्द्रसिंह पंवार की ऐतिहासिक कृतियां रखी गईं।

    इनकी रही उपस्थिति

    विशेष उपस्थिति डॉ. वाकणकर शोध संस्थान भोपाल के शोध अधिकारी ध्रुवेन्द्रसिंह जोधा, डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित, ऋषभ झालानी की रही। श्री सज्जन क्षत्रिय समाज परिषद राजपूत बोर्डिंग रतलाम एवं त्रिवेदी आर्ट्स मूर्ति कला का विशेष सहयोग रहा। राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति द्वारा आगामी वर्ष में सभी संस्थाओं के सहयोग से "मालवा लिटरेचर कार्यक्रम" आयोजित करने की रूपरेखा प्रस्तावित की गई। संचालन नरेन्द्र त्रिवेदी, आशीष दशोत्तर एवं धीरेन्द्रसिंह सरवन ने किया। आभार प्रदर्शन प्रो. दिनेश राजपुरोहित ने किया।

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    Mon, 11 Nov 2024 23:40:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जिले की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं पहली बार 10 नवंबर को बैठेंगी एक जाजम पर, दीप मिलन समारोह में होगी गीत&संगीत और साहित्यिक प्रस्तुति https://acntimes.com/Literary-and-cultural-organizations-of-Ratlam-district-will-sit-on-one-platform-on-November-10 https://acntimes.com/Literary-and-cultural-organizations-of-Ratlam-district-will-sit-on-one-platform-on-November-10 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम जिले की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं पहली बार एक जाजम पर बैठकर अपने जिले की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लेंगी। जिले की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का "मिलन समारोह" 10 नवंबर (रविवार) को दोपहर 3.30 बजे राजपूत बोर्डिंग भवन रतलाम में होगा।

    यह जानकारी राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति रतलाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आयोजक नरेन्द्रसिंह पॅंवार ने दी। उन्होंने बताया कि संभवत: यह पहला अवसर होगा जब रतलाम जिले की कला, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं एक ही छत के नीचे बैठकर विचार विमर्श करेंगी। इस अवसर पर संस्था प्रमुखों द्वारा अपनी-अपनी संस्थाओं की गतिविधियों की जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही जिले के कलाकार, कवि, गीतकार, संगीतकार, लेखकों द्वारा गीत, संगीत, कविता, कहानी और लघु कथाओं का प्रस्तुतीकरण भी होगा। कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए आयोजन समिति की बैठक शनिवार को आयोजित की गई।

    समारोह में ये संस्थाएं सहभागिता करेंगी

    आयोजन में अ. भा. साहित्य परिषद जिला शाखा रतलाम, श्री सज्जन क्षत्रिय समाज परिषद राजपूत बोर्डिंग, महाराजा श्री रतनसिंहजी बलिदान दिवस समारोह, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन शोध संस्थान, युगबोध नाट्य मंच, शिक्षक सांस्कृतिक मंच, सुनें-सुनाएं, जनवादी लेखक संघ, कला मोहन साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था सुखेड़ा, त्रिवेदी मूर्ति कला केन्द्र, अनन्तशूल पाणि, तुलसी साहित्य अकादमी, यज्ञ मां कला निकाय, महक, अनूभूति, पाठक मंच, अरुण भार्गव स्मृति हिन्दी प्रचार प्रसार समिति, सुषमा साहित्य संस्था, जयकिरण स्मृति संस्था बड़नगर, अनुनांद संगीत संस्था, वनमाली सृजनपीठ, स्वर शृंगार रतलाम, व्योम फिल्म निर्माण संस्था, राठौर फिल्म निर्माण संस्था सैलाना, कवच फिल्म निर्माण संस्था रतलाम, अंतरंग भजन मंडल, टैलेंट ऑफ रतलाम सहित अन्य संस्थाओं ने सहभागिता की सहमति प्रदान की है।

    साहित्यिक प्रस्तुति देंगे

    प्रकाश हेमावत, श्याम सुंदर भाटी, इन्दु सिन्हा, सुरेश माथुर, रणजीत सिंह राठौर, विनोद झालानी, माही व्यास, रमेश मनोहरा (जावरा), मनोहर 'मधुकर' (जावरा), रामप्रताप सिंह राठौर, डॉ. प्रवीणा दवेसर, आई. एल. पुरोहित, प्रद्युम्न व्यास 'प्रवीण' (शेरपुर), कैलाश वशिष्ठ, योगिता राजपुरोहित, नूतन मजावदिया, सुनील जमड़ा, लक्ष्मी ललिता कुशवाह साहित्यिक प्रस्तुति देंगे।

    ये प्रस्तुत करेंगे गीत-संगीत

    अवनि उपाध्याय, अशोक शर्मा, सुनीता, जयवंत गुप्ते, हेमन्त जोशी, मुकेश गेहलोत (धानासुता), डॉ. आनंद त्रिवेदी, नित्येन्द्र आचार्य, दिनेश बारोठ (बड़ी सरवन), संजय परसाई सरल, नीतेश जोशी, (बड़नगर), दुर्गेश सुरोलिया, बृजेश गौड़ (बांसुरी वादन), नरेन्द्र शर्मा गीत की प्रस्तुति देंगे।

    उपस्थिति का आग्रह

    राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के संयोजन में आयोजित हो रहे कार्यक्रम के संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया, सहसंयोजक दिनेश राजपुरोहित, साहित्यिक प्रस्तुति प्रभारी आशीष दशोत्तर, सांस्कृतिक प्रस्तुति प्रभारी नरेन्द्र त्रिवेदी, आयोजन समिति के राजेन्द्रसिंह बासिन्द्रा, अभिभाषक राजेश शर्मा, नरेन्द्रसिंह राठौर (पिपलौदा), ओमप्रकाश त्रिवेदी, धीरेन्द्रसिंह सरवन, विनोद झालानी, श्रीमती तृप्तिसिंह सकरारी, भवानीप्रतापसिंह (सरवन), रत्नदीपसिंह (पार्षद), गजेन्द्रसिंह चौहान, सुनील शर्मा, शैलेन्द्रसिंह अठाना, कुशपालसिंह (पंचेड़), इन्द्रसिंह नावदा, आलोक माहेश्वरी, भूपेन्द्रसिंह नरेड़ी, मनीष दसपुत्रे, दिलीपसिंह राजावत, संग्रामसिंह राठौर, दिग्विजयसिंह बड़छापरा, दीपेन्द्रसिंह भैंसाडाबर, राजेन्द्र शर्मा, संजय शर्मा ने सुधिजन से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Sat, 09 Nov 2024 22:29:06 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अनूठा प्रयास : मालवा की कला, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं का दीपावली मिलन समारोह 10 नवंबर को, अनेकों प्रस्तुतियां होंगी https://acntimes.com/Deepawali-Milan-Samaroh-of-art-literary-and-cultural-institutions-of-Malwa-on-10th-November https://acntimes.com/Deepawali-Milan-Samaroh-of-art-literary-and-cultural-institutions-of-Malwa-on-10th-November एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के इतिहास में पहली बार मालवा क्षेत्र की कला, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं "दीपावली मिलन समारोह" आयोजित होने जा रहा है। आयोजन 10 नवंबर (रविवार) 2024 को शहर के शास्त्रीनगर स्थित राजपूत बोर्डिंग हाउस के मुख्य सभागृह में दोपहर 3.30 बजे आयोजित होगा।

    राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्रसिंह पंवार के अनुसार रतलाम में पहली बार हो रहे इस समारोह में मालवा की संस्थाओं के प्रमुखों द्वारा अपनी-अपनी संस्थाओं की गतिविधियों की जानकारी प्रदान की जाएगी। इससे विभिन्न संस्थाओं से परिचय, संस्था को जानने, एवं अपनी अभिरुचि अनुसार संस्था से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होगा। इसके साथ ही संस्थाओं के विस्तार को भी नए आयाम मिलेंगे।

    प्रस्तुतियां भी होंगी

    समारोह में जिले के कलाकार, कवि, गीतकार, संगीतकार, लेखकों द्वारा गीत, संगीत, कविता, कहानी और लघु कथाओं की प्रस्तुति भी दी जाएगी। शहर के कलाकारों-निर्देशकों द्वारा बनाई गई फिल्मों के ट्रेलर दिखवाने की व्यवस्था भी की जा रही है। कार्यक्रम को प्रेरक, उपयोगी एवं उदेश्यपूर्ण बनाने के लिए समय सीमा का निर्धारण भी किया गया है। एक प्रस्तुति के लिए अधिकतम 5 मिनट का समय नियत है। एक व्यक्ति सिर्फ एक विधा की ही प्रस्तुत दे सकेगा।

    प्रस्तुति देने के लिए इनसे करें संपर्क

    कार्यक्रम संयोजक के रूप में नरेन्द्रसिंह डोडिया, सह संयोजक दिनेश राजपुरोहित, आशीष दशोत्तर ने साहित्यिक प्रभारी और नरेन्द्र त्रिवेदी ने सांस्कृतिक प्रभारी के रूप में सहयोग देने के लिए स्वीकृति प्रदान की है। साहित्यिक (कविता, गीत, ग़ज़ल, कहानी, लघुकथा आदि) विधा की रचना प्रस्तुत करने के लिए आशीष दशोत्तर (98270-84966) से संपर्क कर अपना नाम और रचना का शीर्षक बताना होगा। गीत, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए नरेन्द्र त्रिवेदी (99778-54496) से संपर्क कर नाम दर्ज करवा सकते हैं।

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    Tue, 05 Nov 2024 00:52:39 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें सुनाएं' का दायरा 'लोकल' से 'ग्लोबल' होना सुखद, UK से आए अभिषेक, नन्हीं दिव्यांशी और अनंत ने पढ़ीं रचनाएं https://acntimes.com/The-scope-of-Sunaye-Sunaye-has-gone-from-local-to-global https://acntimes.com/The-scope-of-Sunaye-Sunaye-has-gone-from-local-to-global एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सृजनशीलता किसी दायरे में क़ैद नहीं रहती। इसकी ख़ुशबू निरंतर फैलती है। इसके प्रति आकर्षण भी निरंतर बढ़ता है। शहर में प्रारंभ हुई एक पहल की महक दूर-दूर तक पहुंच रही है। यही कारण है कि 'सुनें सुनाएं' का दायरा 'लोकल' से 'ग्लोबल' होता जा रहा है। यह शहर के लिए गौरव की बात है।

    ये विचार शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बीते दो वर्षों से निरंतर जारी आयोजन 'सुनें सुनाएं' के 26वें सोपान में उभर कर सामने आए। समयबद्ध और निर्धारित स्वरूप में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भाईदूज का पर्व होने के बावजूद इसी दिन आयोजित किया गया और इसमें शहर के सृजनशील साथियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को सार्थकता प्रदान की। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल रतलाम पर आयोजित इस सोपान में यूके से आए अभिषेक दीक्षित, नन्हीं दिव्यांशी और अनंत शुक्ला सहित दस साथियों ने अपने पसंदीदा रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया गया।

    शुरुआत करते हुए नन्हीं दिव्यांशी दीक्षित द्वारा सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना 'कोयल' का पाठ किया गया। कमलेश पाटीदार ने डॉ. कुँवर बेचैन की रचना 'अंक गणित सी सुबह है मेरी' का पाठ, नरेंद्र त्रिवेदी ने एम. जी. हशमत की रचना 'मेरा जीवन कोरा कागज़' का पाठ, नीलिमा उपाध्याय ने बाबूलाल जैन 'जलज' की रचना 'सत्यं, शिवम्, सुंदरम् भावों की हम शांति, क्रांति चिंगारियां' का पाठ, अभिषेक दीक्षित ने गोपालदास 'नीरज' की रचना 'छिप छिप कर अश्रु बहाने वालों' और अनमोल सुरोलिया ने दुष्यन्त कुमार की रचना 'इस नदी की धार से' का पाठ किया। अनंत शुक्ला ने रमेश मिश्र 'आनंद' की रचना 'फटे चीथड़े तन में डाले' का पाठ किया तो स्मिता शुक्ला ने अज्ञात रचनाकार की रचना 'तुम सी हो गई हूं मां' का पाठ किया।

    शुभकामनाओं का आदान-प्रदान और पुस्तक का विमोचन हुआ 

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ होता है। समय पर प्रारंभ हो कर समय पर समाप्त होने वाले इस आयोजन के अंत में पर्व प्रसंग की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान भी हुआ। इस दौरान पं. मुस्तफा आरिफ की पुस्तक ‘एक है ईश्वर’ का पत्रकार, लेखक एवं संपादक विष्णु बैरागी ने किया। आरिफ ने सुनें-सुनाएं में रचना सुनाने वाले सभी रचनाधर्मियों को अपनी पुस्तक भेंट की।

    इनकी उपस्थिति रही

    आयोजन में प्रो. रतन चौहान, रीता दीक्षित, सरिता दशोत्तर, विनोद झालानी, नरेंद्र सिंह डोडिया, नरेंद्र सिंह पंवार, दिनेश राजपुरोहित, कमलेश पाटीदार, जितेंद्र सिंह पथिक, जयवंत गुप्ते, हरेंद्र कोठारी, दिनेश जोशी (बाजना), सुरेंद्र सिंह कोठारी, कल्पना सुरोलिया, डॉ. गायत्री तिवारी, आशा श्रीवास्तव, ललित चौरड़िया, पंडित मुस्तफा आरिफ, जीएस खींची, मयूर व्यास, पीरूलाल डोडियार, अनीस मोहम्मद खान, प्रकाश हेमावत, आई. एल. पुरोहित, नीरज कुमार शुक्ला, बृजेश कुमार गौड़, लगन शर्मा, सुनील व्यास, श्याम सुंदर भाटी, मणिलाल पोरवाल, कीर्ति कुमार शर्मा, मीनाक्षी मलिक, विभा राठौड़, सुशील माथुर, शिवम माथुर, किरण जैन, सुयश माथुर, शरद माजू, दुष्यंत व्यास, अरविंद मेहता, विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन मौजूद थे।

    सभी रचनाएं सुनने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें और चैनल को लाइक, सब्सक्राइब और शेयर भी करें....

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    Mon, 04 Nov 2024 19:43:37 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें सुनाएं' का 26वां सोपान 3 नवंबर को, इस बार 11 रचनाएं पढ़ी जाएंगी, ...तो आप आ रहे हैं न सुनने के लिए https://acntimes.com/26th-episode-of-Suneye-Sunaye-on-3-November https://acntimes.com/26th-episode-of-Suneye-Sunaye-on-3-November एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बीते दो सालों से निरंतर जारी आयोजन 'सुनें सुनाएं' का 26वां सोपान 3 नवंबर (रविवार) को सुबह 11 बजे जी डी अंकलेसरिया रोटरी हाल रतलाम पर होगा। इस आयोजन में ग्यारह साथियों द्वारा अपने पसंदीदा रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया जाएगा।

    आयोजन में कु. दिव्यांशी दीक्षित द्वारा सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना 'कोयल' का पाठ, कमलेश पाटीदार द्वारा डॉ. कुँवर बेचैन की रचना 'अंक गणित सी सुबह है मेरी' का पाठ, इन्दु सिन्हा द्वारा प्रो. रतन चौहान की रचना "धागे" का पाठ, नरेंद्र त्रिवेदी द्वारा एम. जी. हशमत की रचना 'मेरा जीवन कोरा कागज़' का पाठ, नीलिमा उपाध्याय द्वारा बाबूलाल जैन 'जलज' की रचना 'सत्यं, शिवम्, सुंदर भावों की हम शांति, क्रांति चिंगारियां' का पाठ का पाठ किया जाएगा।

    इसी प्रकार अभिषेक दीक्षित द्वारा गोपालदास 'नीरज' की रचना 'छिप छिप कर अश्रु बहाने वालों' का पाठ, अनमोल सुरोलिया द्वारा दुष्यन्त कुमार की रचना 'इस नदी की धार से' का पाठ, अनंत शुक्ला द्वारा रमेश मिश्र 'आनंद' की रचना 'फटे चीथड़े तन में डाले' का पाठ, डॉ. गीता दुबे द्वारा डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की रचना "बेटी आई हुई है इन दिनों" का पाठ, स्मिता शुक्ला द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'तुम सी हो गई हूं' का पाठ, दिनेश परिहार 'मुंदड़ी वाला' द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी की रचना 'सुलग सुलग री जोत' का पाठ किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ होता है। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजनों से आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। ...तो आप आ रहे हैं न इस अनूठे आयोजन में सुनने के लिए और सुनाने के लिए।

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    Wed, 30 Oct 2024 22:14:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक समीक्षा : ‘कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना’ में जीवन का दर्शन है तो श्रीमद् भगवत गीता के कर्म का संदेश भी& श्वेता नागर https://acntimes.com/Book-review-KABHI-cashew-GHANA-KABHI-MUTTHI-CHANA https://acntimes.com/Book-review-KABHI-cashew-GHANA-KABHI-MUTTHI-CHANA  श्वेता नागर

    "जिंदगी दर्द भी, जिंदगी फ़ाग भी |

    जिंदगी नीर भी, जिंदगी आग भी |

    जिंदगी रोशनी तो अंधेरा कभी |

    सुख घनेरा कभी, दुख घनेरा कभी |

    इसलिए कर्म का गीत ही गुनगुना |

    कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना |"

    गीत की इन पंक्तियों में जीवन का दर्शन छिपा हुआ है और श्रीमद् भगवत गीता के कर्म का संदेश भी निहित है| जिसका सार यह है कि संघर्ष पथ पर विचलित हुए बिना अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति में अपना धैर्य खोए बिना निरंतर चलते रहने का नाम ही जिंदगी है| जीवन यात्रा की इस वास्तविकता से रू-ब-रू कराती हैं प्रसिद्ध साहित्यकार, गीतकार, भारतीय संस्कृति के अध्येता और गीता मनीषी प्रो. अज़हर हाशमी के नवीन गीत संग्रह 'कभी काजू घना कभी मुट्ठी चना' का यह शीर्षक गीत|

    साहित्यकार या कवि जब अपनी रचना में कल्पना, कलात्मकता के पुट के साथ लेखन के अनुशासन को बनाए रखते हुए स्वयं के अनुभव की कहानी भी कह जाता है तब उसकी उस रचना / कृति में सच्चाई और ईमानदारी का आभा मंडल विकसित हो जाता है और यह पाठक के हृदय और  मन-मस्तिष्क की गहराई को स्पर्श कर जाता है। इस जिस कारण कविता / रचना के मर्म को समझने में देर नहीं लगती| कुछ ऐसे ही अनुभव, सच्चाई और ईमानदारी का आभा मंडल लिए है प्रो. हाशमी का यह गीत संग्रह|

    प्रो. हाशमी ने अपने जीवन में संघर्ष के शूल भी देखे हैं और उपलब्धियों के फूल भी| जीवन की इस यात्रा के उतार चढ़ाव में गीत की इन पंक्तियों "कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना" को ही हर क्षण अपना आदर्श माना| इससे जुड़ा मेरा संस्मरण है, अभी हाल ही में वे रतलाम के एक निजी अस्पताल में गंभीर बीमारी से जूझते हुए डेढ़ महीने के लगभग भर्ती रहे| 15 से 20 दिन तक आईसीयू में भी रहे लेकिन इन डेढ महीनों में उनके स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर नहीं दिखाई दी| तब हम सभी उनके विद्यार्थियों / शिष्यों को जो निरंतर उनका स्वास्थ्य पूछने अस्पताल जा रहे थे, हमें निराशा होने लगी कि वे अब कभी भी पहले की तरह चल फिर नहीं पाएंगे और लेखन कार्य तो दूर की बात है। लेकिन वे हमारे मनोभाव पढ़ते हुए हमसे कहते कि मैं बस फिर से पहले की तरह हो जाऊंगा और फिर से लेखन कार्य करने लगूँगा| उनके ये शब्द सुनकर मैंने भावुक होकर कहा कि, सर अब आपके शब्द ब्रह्म की ताकत से ही ये चमत्कार हो सकता है और ऐसा ही हुआ| उनके सकारात्मक भावों ने ही संभव कर दिखाया|

    गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपना आत्मबल बनाए रखा और बीमारी को मात देते हुए पुनः लेखन में दुगने उत्साह से तल्लीन हो गए| उनकी जिजीविषा उन्हें उनके कर्तव्य पथ पर दृढ़ संकल्पित रखती है। इसलिए चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों वे उससे निपटना जानते हैं| इसका प्रमाण है सकारात्मक ऊर्जा से भरा यह गीत संग्रह जिसमें प्रकृति, पर्यावरण, धर्म, दर्शन, ज्ञान, विज्ञान, आत्मविश्वास, संस्कृति, संस्कार, राष्ट्र प्रेम, नारी सम्मान और विविध विषयों को छूते गीत हैं| युवाओं को अवसाद / तनाव के अंधकार से दूर करते प्रो. हाशमी ने कई गीत / गज़ल की रचना की है और ऐसी ही एक रचना है (पृष्ठ क्र. - 85)...

    "रोशनी वही जो अंधकार छांटती,

    अमावस्या को जो हर बार डांटती,

    जलते हुए दीप का प्रकाश बांटती,

    तम के सामने सदैव शेर रोशनी,

    सेर अंधेरा तो सवा सेर रोशनी|"

    जीवन में कई बार प्रयास करने के बाद भी सफलता या अपना वांछित लक्ष्य प्राप्त न कर पाने के कारण युवा वर्ग हताश हो जाता है। इस गीत संग्रह में ऐसा ही एक और गीत है जो हताश युवाओं में आत्म विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है (पृष्ठ क्र. - 98)-

    "आँख तेरी क्यों नम?

    खत्म होगा यह तम|

    कोई जलता हुआ,

    एक दीया तो धर|

    क्यों उड़ानों से डर?

    पाएगा लक्ष्य तू,

    एक कोशिश तो कर!"

    प्रो. हाशमी गीता मनीषी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। श्रीमद् भगवत गीता के ज्ञान को आत्मसात करने वाले हाशमी ने देश ही नहीं विश्व में गीता के दर्शन को अपने व्याख्यानों / लेखों / रचनाओं के माध्यम से पहुंचाया है| गीता का यह संदेश कि जैसा कर्म हम करते हैं उसके परिणाम लौटकर हमारे पास ही आते हैं|" कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ता श्रीमान्!" (पृष्ठ क्र. - 18) इस गीत में यही भाव है-

    "मन दुखाओगे, तुम्हारा भी दुखेगा मन,

    धन जो छीनोगे, तुम्हारा भी छि‌नेगा धन|

    छल जो तुम करोगे, खुद भी छले जाओगे,

    तुमको भी चुभेंगे जो कांटे बिछाओगे|

    जिसके अंदर रहते तुम, वो कांच का मकान,

    कर्म कभी पीछा नही छोड़ता श्रीमान्|"

    प्रो. हाशमी ने सदैव भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपरा के प्रति अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त किया है और इसी भाव को प्रदर्शित करता यह गीत "जग का गौरव मेरा देश" (पृष्ठ क्र. 99) जिसमें राष्ट्र गौरव के साथ ही श्री कृष्ण के गीता ज्ञान का चिंतन भी समाहित है-

    "वृंदावन की कोई कहानी,

    यमुना की लहरें ले आतीं

    कर्म बड़ा फल से होता है,

    गीता का चिंतन दे जाती

    यहाँ आज भी गुंजित होता

    गीता का संदेश,

    जग का गौरव मेरा देश

    मेरी धरती स्वर्ण प्रदेश|"

    'बेटियां शुभकामनाएं हैं, बेटियां पावन दुआएं है' इन पंक्तियों ने प्रो. हाशमी को एक नई पहचान दी, वह है बेटियां शुभकामनाएं वाले हाशमी जी| जी हां, बेटियों के लिए लिखी इस कविता ने उन्हें प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचाया| दूरदर्शन / आकाशवाणी केंद्रों के माध्यम से प्रसारित बेटियों के प्रति उनके संवेदनशील भावों को देश और दुनिया के कोने - कोने में पहुंचाया| वैसे ही इस गीत संग्रह में भी प्रो. हाशमी ने नारी गरिमा को समर्पित गीतों की रचना की है, ऐसा ही एक गीत है- नारी तुम सदय - सरल महान हो (पृष्ठ क्र. 38)...

    "तुम ममत्व का पवित्र धाम हो,

    तुम समत्व स्नेह का सुनाम हो|

    तुम सुयश - सुकर्म की उड़ान हो,

    नारी तुम सदय - सरल महान हो|"

    प्रकृति / पर्यावरण के प्रति भी अपना दायित्व निभाते हुए प्रो. हाशमी ने प्रकृति के उदात्त भावों को व्यक्त करती कई कविताओं और गीतों की रचना की है जिनमें प्रकृति / पर्यावरण को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया है| ऐसे ही वृक्ष की महिमा का गुणगान करता गीत "वृक्ष निभाता रिश्ता नाता" (पृष्ठ क्र. - 56) में बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के लिए वृक्षों में मानवीय रिश्तों के पवित्र / स्नेहपूर्ण भावों को व्यक्त किया गया है जैसे -

    "पीपल पावन पिता सरीखा, तुलसी जैसे माता|

    त्रिफला बहन-बहू-बिटिया सा, बेर सरीखा भ्राता।

    महुआ मामा जैसा लगता, वन उपवन महकाता|

    आम वृक्ष नाना सा वत्सल, मीठे फल बरसाता |"

    एक समीक्षक के रूप में नहीं, पाठक के रूप में यह कह सकती हूँ कि निश्चित ही प्रो. हाशमी का यह गीत संग्रह (कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना) मानवीय भावनाओं और सकारात्मक प्रेरणा का प्रकाश पुंज है|

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    Mon, 14 Oct 2024 22:50:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस : ‘जन्म कन्या का, विधाता का शुभम् वरदान समझो...’, ये ‘बेटियां पावन दुआएं हैं’ और ‘...रक्षा कवच सी’ – अज़हर हाशमी https://acntimes.com/expression-of-Poet-Azhar-Hashmi-on-International-Girl-Child-Day https://acntimes.com/expression-of-Poet-Azhar-Hashmi-on-International-Girl-Child-Day 'अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस' और कवि 'अज़हर हाशमी' की अभिव्यक्ति

    कम नहीं कन्या, गुणों के मामले में

     

    जन्म कन्या का, सहज सम्मान समझो,

    वह विधाता का शुभम् वरदान समझो !

     

    कम नहीं कन्या गुणों के मामले में,

    उसकी गुण-गरिमा को गौरव-गान समझो !

     

    जन्मी बिटिया यानी बरकत का ख़जाना-

    साथ लाई, बात ऐ ! इंसान समझो !

     

    बालिका की परवरिश सौभाग्य मानो,

    उसकी यश-गाथा को अपना मान समझो !

     

    मुश्किलों में हो तो बिटिया की दुआ लो,

    मुश्किलें होंगी सभी आसान समझो । 

    (समाचार-पत्र 'पत्रिका' से साभार)

     --*--*--

    बंद कर दो भ्रूण हत्या बेटियों की...

     

    न तो उनको बोझ, न ही फांस समझो,

    है गुजारिश बेटियों को खास समझो।

     

    बेटियों को हौसला दो, प्रेरणा दो,

    प्राण को गतिशील रखती सांस समझो।

     

    कामयाबी की कहानी, कह रही हैं,

    रच रही हैं बेटियां इतिहास समझो।

     

    बादशाहों तक ने खुद अंतिम समय में,

    बेटियों पर ही किया विश्वास समझो।

     

    बंद कर दो भ्रूण – हत्या बेटियों की,

    वरना कुदरत के कहर को पास समझो। 

    (गीत संग्रह ‘अपना ही गणतंत्र है बंधु’ से साभार)

     --*--*--

    बेटियां रक्षा-कवच सी

     

    बेटियां तो शुभ शकुन की टिकलियां हैं

    बेटियां आंखों की दृष्टि - पुतलियां हैं।

     

    घर अगर तन है तो इस तन के हृदय की-

    बेटियां रक्षाकवच - सी पसलियां हैं।

     

    द्वार पे हल्दी से, मां के साथ मिलकर-

    बेटियां शुभ - लाभ लिखती उंगलियां हैं।

     

    तीज या त्योहार की हैं गीतिकाएं

    बेटियां वर्षा - ऋतु की कजलियां हैं।

     

    परिवार की पूनी का कतता सूत जिन पर

    बेटियां तो दरअसल वे तकलियां हैं।

     

    स्नेह के रिश्तों से घर को बांधती हैं

    बेटियां सद्भाव - गुंथित सुतलियां हैं। 

    (हिंदी ग़ज़ल संग्रह ‘मामला पानी का’से साभार)

     --*--*--

    बेटियां शुभकामनाएं हैं...

     

    बेटियां शुभ कामनाएं हैं,

    बेटियां पावन दुआएं हैं।

    बेटियां जीनत हदीसों की,

    बेटियां जातक कथाएं हैं।

    बेटियां गुरु ग्रंथ की वाणी,

    बेटियां वैदिक ऋचाएं हैं।

    जिनमें खुद भगवान बसता है,

    बेटियां वे नंदनाएं हैं।

    त्याग-त-गुण-धर्म-साहस की,

    बेटियां गौरव कथाएं हैं।

    मुस्कुरा कर पीर पीती हैं,

    बेटियां हर्षित व्यथाएं हैं।

    लू लटप को दूर करती हैं,

    बेटियां जल की घटाएं हैं।

    दुर्दिनों के दौर में देखा,

    बेटियां संवेदनाएं हैं।

    गर्म झोंके बन रहे बेटे,

    बेटियां ठंडी हवाए हैं। 

    (गीत संग्रह ‘अपना ही गणतंत्र है बंधु’ से साभार)

     

     --*--*--

    इसलिए, ‘बालिका को... सम्मान दें हम...’

     

    बालिका को पूर्ण आदर, मान दें हम

    स्नेह का आशीष का अनुदान दें हम।

    बालिका के जन्म को वरदान मानें

    बालिका को इस तरह सम्मान दें हम।

    ( मुक्तक संग्रह ‘मुक्तक शतक’ से साभार)

     ---------------------

    (रचनाकार 'अज़हर हाशमी' ख्यात कवि, लेखक, विचारक, व्यंग्यकार, ग़ज़लकार, समालोचक एवं पूर्व प्राध्यापक हैं। आप पर देश भर के अलग-जअगल विश्वविद्यालयों से व्यंग्य, ग़ज़ल और गीत विधाओं पर पीएचडी हो चुकी हैं।)

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    Fri, 11 Oct 2024 21:48:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनात्मक सक्रियता : सुनें सुनाएं ने तीसरे वर्ष में किया प्रवेश, सिहरन दौड़ी तो किसी की पलकें हुईं नम, 93 वर्षीय दिवे और 85 वर्षीय पोरवाल ने भी पढ़ी रचनाएं, देखें वीडियो... https://acntimes.com/Sunaye-Sunaye-entered-its-third-year https://acntimes.com/Sunaye-Sunaye-entered-its-third-year एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य, संस्कृति और लोककलाओं के प्रति रतलाम शहर का रुझान प्रारंभ से ही रहा है। अलग-अलग विधाओं में प्रयास कर रहे सभी लोगों को रचनात्मकता से जोड़ना और अपने शहर की रचनात्मक सक्रियता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसमें शहर के सुधिजन का सहयोग मिल रहा है, यही 'सुनें सुनाएं' की ताक़त है और सफलता भी। उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के 25वें सोपान में उभर कर सामने आए। इस दौरान रचनाएं पढ़ी गईं तो किसी के जिस्म में सिहरन दौड़ गई तो किसी की पलकें नम हो गईं।

    दो वर्षों तक निरंतर प्रतिमाह के प्रथम रविवार को आयोजित होने वाले इस रचनात्मक आयोजन ने शहर के सुधिजनों के स्नेह के कारण अपने 24 सोपान पूर्ण कर लिए हैं। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित तीसरे वर्ष के पहले आयोजन में दस रचनाप्रेमियों ने अपनी प्रिय रचना का पाठ किया। 85 वर्षीय मणिलाल पोरवाल ने वीरेन्द्र मिश्र की रचना 'लगा आवाज़ लगा' का पाठ कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

    इसके बाद डॉ. विजया कुशवाह द्वारा डॉ. नीरज जैन की रचना 'फिर वही सर्द हवा आई है', दुष्यन्त कुमार व्यास द्वारा रामकुमार चतुर्वेदी "चंचल" की रचना 'मुझे सपने दिखाओ का पाठ किया गया। 93 वर्षीय श्रीराम दिवे ने स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी की रचना 'साथी घर जा कर मत कहना' का पाठ किया तो बृजेश कुमार गौड़ ने रामधारी सिंह दिनकर की रचना 'कृष्ण की चेतावनी' का। मीनाक्षी मलिक द्वारा आशीष दशोत्तर की रचना 'दुनिया से किनारा कर लिया मैंने', फोटो जर्नलिस्ट लगन शर्मा द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'ख़्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की' का पाठ और पंडित मुकेश आचार्य द्वारा कैलाश वशिष्ठ की रचना 'बेटी के सवाल पिता से' का पाठ किया गया।

    इनकी उपस्थिति रही

    आयोजन को अपनी उपस्थिति से प्रो. रतन चौहान, गुस्ताद अंकलेसरिया, डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित, यूसुफ़ जावेदी, ओमप्रकाश मिश्र, इंदु सिन्हा, कैलाश वशिष्ठ, जगदीश सोनी, महेंद्र पोरवाल, अशोक कुमार शर्मा, नरेंद्र त्रिवेदी, आई. एल. पुरोहित, प्रवीण कुमार कुशवाह, रीता दीक्षित, शरद माजू, अमित श्रीवास्तव, ज़मीर फारुकी, गजेंद्र सिंह चौहान, राकेश पोरवाल, नीरज कुमार शुक्ला, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, नरेंद्र सिंह डोडिया, बृजेश कुमार गौड़, विनोद झालानी, कीर्ति कुमार शर्मा, गोविंद काकानी, जीएस खींची, संजय परसाई 'सरल', सुनील व्यास, जसवीर शर्मा, कमलेश पाटीदार, विकास सेवाल, रजनी व्यास, नईम सुल्तान ख़ान, श्यामसुंदर भाटी, विष्णु बैरागी, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन मौजूद थे।

    रचनाएं सुननें के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें। ये सभी प्रस्तुतियां विष्णु बैरागी के यू-ट्यूब चैनल 'बैरागी की बातें' पर उपलब्ध हैं। आप इस चैनल को लाइक करें, सब्सक्राइब करें और रचनात्मक सक्रियता बनाए रखने के लिए इसे औरों को साझा भी करें।

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    Mon, 07 Oct 2024 10:50:45 +0530 Niraj Kumar Shukla
    शुरू हो रहा तीसरा साल : 'सुनें सुनाएं' का 25वां सोपान 6 अक्टूबर को, आप सुनें और दूसरों को भी सुनाएं, रचनात्मकता पर है यकीन तो निःसंकोच चले आएं https://acntimes.com/25th-episode-of-Sunen-Sunayen-on-6-October https://acntimes.com/25th-episode-of-Sunen-Sunayen-on-6-October एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया 'सुनें सुनाएं' आयोजन तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। बिना किसी शोरगुल और सहयोग के सिर्फ़ रचनात्मकता को बढ़ाने का यह आयोजन शहर के सुधिजनों के स्नेह के कारण अपने 24 सोपान पूर्ण कर चुका है। 'सुनें सुनाएं' का 25वां सोपान 6 अक्टूबर रविवार को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल के (प्रथम तल) रतलाम पर होगा। 

    इस सोपान में दस रचनाप्रेमी अपनी प्रिय रचना का पाठ करेंगे। मणिलाल पोरवाल द्वारा वीरेन्द्र मिश्र की रचना 'लगा आवाज़ लगा' का पाठ, डॉ. विजया कुशवाह द्वारा डॉ. नीरज जैन की रचना 'फिर वही सर्द हवा आई है' का पाठ, दुष्यन्त कुमार व्यास द्वारा रामकुमार चतुर्वेदी "चंचल" की रचना 'मुझे सपने दिखाओ मत' का पाठ, रक्षा कुमार द्वारा डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की रचना 'डरी हुई है मां' का पाठ किया जाएगा। श्रीराम दिवे सत्यमित्रानंद जी की रचना 'साथी घर जाकर मत कहना', बृजेश कुमार गौड़ रामधारी सिंह दिनकर की रचना 'कृष्ण की चेतावनी', मीनाक्षी मलिक आशीष दशोत्तर की रचना 'दुनिया से किनारा कर लिया मैंने, लगन शर्मा डॉ. हरिवंश राय 'बच्चन' की रचना 'ख़्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की' सुनाएंगे।

    इसी तरह दिनेश जोशी (बाजना) शरद जोशी की व्यंग्य रचना 'उफ़! अतिथि तुम कब जाओगे? 'का पाठ और पंडित मुकेश आचार्य द्वारा कैलाश वशिष्ठ की रचना 'बेटी के सवाल पिता से' का पाठ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ बिना किसी भूमिका के किया जाता है। आयोजन समय पर प्रारंभ होकर समय पर समाप्त हो जाता है। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजनों से आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। अगर आप भी सकारात्मकता को बढ़ाना चाहते हैं तो निःसंकोच चले आइये, आप भी सुनिए और दूसरों को भी सुनाइए। बता दें कि सुनें सुनाएं का तीसरा साल शुरू हो रहा है।

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    Sat, 05 Oct 2024 00:48:58 +0530 Niraj Kumar Shukla
    World Heart Day पर कवि अज़हर हाशमी ने बताई पते की बात, कि& दिल की धड़कन सही तो सही ज़िन्दगी ! https://acntimes.com/Poem-by-poet-Azhar-Hashmi-on-World-Heart-Day https://acntimes.com/Poem-by-poet-Azhar-Hashmi-on-World-Heart-Day दिल की धड़कन सही तो सही ज़िन्दगी !

     

    दिल की धड़कन की खाता - बही ज़िन्दगी,

    दिल की धड़कन सही तो सही ज़िन्दगी !

    ----- 

    जिनकी दिनचर्या – भोजन - वजन संतुलित,

    उनको सुख – चैन - राहत रही जिन्दगी !

    -----

    दिल 'धुरी' है कि जिस पर सदा घूमती,

    ये हमारी - तुम्हारी 'मही' ज़िन्दगी !

    ----- 

    दिल अगर स्वस्थ तो राज खोलेगी खुद,

    इक पहेली-सी ये अनकही ज़िन्दगी !

    -----

    दिल की सेहत पे, हम सब अगर ध्यान दें,

    ख़ुश - सलामत रहेगी यही ज़िन्दगी !

    -----

    अज़हर हाशमी

    (कवि, लेखक, चिंतक, समालोचक एवं ज्योतिषी)

    (कविता हिंदी समाचार पत्र पत्रिका से साभार)

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    Sun, 29 Sep 2024 20:57:40 +0530 Niraj Kumar Shukla
    क्या आप जानते हैं ? अभिनव गीत या नवगीत किसे कहते हैं, जानना चाहते हैं तो कवि एवं साहित्यकार अज़हर हाशमी की यह व्याख्या और गीत सुनिए https://acntimes.com/Listen-to-innovative-songs-and-their-explanations-from-poets-and-litterateurs https://acntimes.com/Listen-to-innovative-songs-and-their-explanations-from-poets-and-litterateurs कवि एवं साहित्यकार अज़हर हाशमी का हाल ही में गीत संग्रह प्रकाशित हुआ है। संदर्भ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित गीत संग्रह 'कभी काजू घना कभी मुट्ठी चना' में ज्यादातर अभिनव और नवगीत हैं। अभिनव गीत या नवगीत क्या हैं, इसकी व्याख्या खुद अज़हर हाशमी कर रहे हैं। ऐसा ही एक अभिनव गीत उन्हीं के गीत संग्रह से उन्हीं की जुबानी- भोर की बंसी बजी, नींद बगिया ने तजी...।

    इस अभिनव गीत को आप तक पहुंचाने में एसीएन टाइम्स की मदद की है सेवानिवृत्त उप संचालक अभियोजन कैलाश व्यास (अभिभाषक)। आप भी सुनिए, आनंद लीजिए और दूसरों को भी सुनाइये।

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    Fri, 20 Sep 2024 23:17:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्यकार अज़हर हाशमी अस्वस्थ थे, हमारी प्रार्थनाओं से पूरी तरह स्वस्थ होकर रचनाधर्मिता का परचम लिए गा रहें हैं, मुस्कुरा रहें हैं, आप भी सुनिए उनकी यह रचना... https://acntimes.com/Writer-Azhar-Hashmis-composition-Jag-ka-Gaurav-mera-desh https://acntimes.com/Writer-Azhar-Hashmis-composition-Jag-ka-Gaurav-mera-desh है मधुर पदचाप जिसकी,

    ढोलकों पे थाप जिसकी

    शारदा के अक्षरों में

    कोकिला कूजित सुरों में

    बोलता है कौन ?

    बोलता है कौन ? 

    उपरोक्त पंक्तियों के रचयिता अज़हर हाशमी साहब से आज लम्बे अंतराल के बाद मुलाकात हुई। आपको ज्ञात होंगा वे काफी समय से अस्वस्थ थे। किंतु अनगिनत प्रार्थनाओं ने दुर्ग जीत लिया, और पूरी तरह स्वस्थ होकर रचनाधर्मिता का परचम लिये गा रहें हैं, मुस्कुरा रहें हैं।

    मैंने निवेदन किया, सर कुछ गुनगुना दीजिये, ताकि आज का उत्सवीय दिवस हमारे लिये ज्यादा आनंददायी हो जाये। तो सर को सुनिये।

    • एडवोकेट कैलाश व्यास, (सेवानिवृत उप संचालक- अभियोजन)

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    Wed, 18 Sep 2024 15:17:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    डॉ. प्रदीप सिंह राव की पुस्तक ‘साधना के संत’ का विमोचन 22 सिंतबर को, समाजसेवी स्व. टेहम्पटन अंकलेसरिया की स्मृति में और दिव्यांग बच्चों के सहायतार्थ होगी पुस्तक https://acntimes.com/Dr-Pradeep-Singh-Raos-book-Sadhana-Ke-Sant-will-be-released-on-22-September https://acntimes.com/Dr-Pradeep-Singh-Raos-book-Sadhana-Ke-Sant-will-be-released-on-22-September एसीएन टाइम्स @ रतलाम । वरिष्ठ रचनाकार डॉ. प्रदीपसिंह राव का परमार्थ के लिए लेखन जारी है। उनकी अगली पुस्तक ‘साधना के संत’ का 22 सितंबर को विमोचन होगा। समाजसेवी स्व. टेहम्पटन अंकलेसरिया की स्मृति में लिखी गई इस पुस्तक से होने वाली आय दिव्यांगों बच्चों की सहायतार्थ दी जाएगी।

    ‘साधना के संत’ पुस्तक का विमोचन रविवार को रोटरी सभाकक्ष में होगा। मुख्य अतिथि मप्र के कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप होंगे। अध्यक्षता साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला करेंगे। विशेष अतिथि उद्योगपति गुस्ताद अंकलेसरिया होंगे। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर करेंगे। डॉ. राव ने नगर के प्रबुद्धजनों से आग्रह है कि वे पुण्य के इस महायज्ञ में उपस्थित होकर अपनी आहुति अवश्य दें।

    16वीं और परमार्थ के संकल्प वाली दूसरी पुस्तक

    बता दें कि डॉ. प्रदीप सिंह राव की यह 16वीं और परमार्थन के लिए लेखन का संकल्प लेने के बाद लिखी गई दूसरी पुस्तक है। इससे पहले उनकी 15 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें से ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ सेवा के संकल्प पर आधारित। इस पुस्तक की सिर्फ एक साल में ही 500 से अधिक किताबें बिक चुकी हैं। इससे होने वाली आय में डॉ. राव और मित्र मंडल द्वाररा उतनी ही राशि और मिला कर कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए दी जाती है। डॉ. राव के अनुसार ‘सेवा के संत’ पुस्तक की बिक्री से होने वाली आय को दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए दी जाएगी।

    अगला प्रोजेक्ट इनके लिए होगा समर्पित

    लेखक डॉ. राव ने बताया कि उन्हें परमार्थ की प्रेरणा उनके गुरु स्व. वेदप्रताप वैदिक से मिली जिसे चेतन्य कश्यप ने प्रेरित किया। उनके आगामी प्रोजेक्ट भी इसी प्रकार परमार्थ के लिए ही होंगे। अगले वर्ष ‘कर्म के असाप्त योद्धा’ पुस्तक प्रकाशित होगी। यह कचरा बीनने वाले बच्चों के सहायतार्थ होगी। वितरक समाजसेवी अशोक अग्रवाल इस पुण्य कार्य के सहयोगी हैं।

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    Mon, 16 Sep 2024 19:13:14 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य जगत : मप्र लेखक संघ के साहित्यकार सम्मान&2024 की घोषणा, डॉ. श्रीराम परिहार को पं. बटुक चतुर्वेदी अक्षर आदित्य व प्रकाश मिश्र को सारस्वत सम्मान मिलेगा https://acntimes.com/Announcement-of-MP-Writers-Associations-Sahityakaar-Samman-2024 https://acntimes.com/Announcement-of-MP-Writers-Associations-Sahityakaar-Samman-2024 एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा वर्ष 2024 के प्रतिष्ठित साहित्यकार सम्मानों की सूची जारी कर दी गई है। इसके अनुसार खंडवा के डॉ. श्रीराम परिहार को पं. बटुक चतुर्वेदी अक्षर आदित्य सम्मान तथा ग्वालियर के प्रकाश मिश्र को सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया जाएगा।

    यह जानकारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष राजेन्द्र गट्टानी ने दी। उन्होंने बताया कि संघ के 25 प्रतिष्ठित सम्मानों हेतु गठित पाँच सदस्यीय चयन समिति द्वारा अनुशंसित एवं निवर्तमान प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राम वल्लभ आचार्य द्वारा संघ की वार्षिक साधारण सभा में घोषित साहित्यकारों को संघ के वार्षिक साहित्यकार सम्मेलन में ये सम्मान प्रदान किए जएंगे।

    पूरी सूची इस प्रकार है

    • बटुक चतुर्वेदी अक्षर आदित्य सम्मान - डॉ. श्रीराम परिहार, खंडवा
    • सारस्वत सम्मान - प्रकाश मिश्र, ग्वालियर
    • डॉ. सरोजिनी कुलश्रेष्ठ कहानी सम्मान (संयुक्त) - यदुकुल नंदन खरे, बल्देवगढ़ (टीकमगढ़) एवं डॉ. स्वाति तिवारी, भोपाल
    • डॉ. पुष्पा चौरसिया श्रेष्ठ गीतकार सम्मान - यतीन्द्र नाथ राही, भोपाल
    • इंजी. प्रमोद शिरढोणकर विरहमन स्मृति राष्ट्र प्रेरणा सम्मान - चौधरी मदन मोहन समर, भोपाल
    • हरिशंकर तिवारी यात्रा वृतान्त सम्मान - दिलीप कर्पे, खरगोन
    • सुधा सावित्री श्रेष्ठ बुन्देली साहित्यकार सम्मान - डॉ. सरोज गुप्ता, सागर
    • सरदार दिलजीत सिंह रील व्यंग्य सम्मान (संयुक्त) - अशोक व्यास, भोपाल एवं मुकेश जोशी, उज्जैन
    • डॉ. वल्लभ दास शाह अनुवाद सम्मान - पूरन चन्द्र शर्मा, सनोरा (दतिया)
    • स्व. जैतराम धमेनियाँ स्मृति छांदस रचनाकार सम्मान - विश्वनाथ शर्मा 'विमल', भोपाल
    • संतोष तिवारी समीक्षा सम्मान - प्रभुशंकर शुक्ल, हरदा
    • पं. बृजवल्लभ आचार्य संस्कृतज्ञ सम्मान - डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय, भोपाल
    • हरि ॐ शरण चौबे गीतकार सम्मान - कान्ति शुक्ला, भोपाल
    • मेहमूद जकी ग़ज़ल सम्मान - सुभाष पाठक ज़िया, समोहा (शिवपुरी)
    • पुष्कर सम्मान - पूजा कृष्णा, इन्दौर
    • देवकी नंदन माहेश्वरी सम्मान - डॉ. श्वेता नागर, रतलाम
    • कस्तूरी देवी चतुर्वेदी लोकभाषा सम्मान - राजीव नामदेव राना, लिधौरी (टीकमगढ़)
    • हरीश निगम स्मृति मालवी भाषा सम्मान - विभा जैन, धार
    • काशीबाई मेहता लेखिका सम्मान - डॉ. प्रेमलता नीलम, दमोह
    • कमला चौबे स्मृति लेखिका सम्मान - डॉ. मुक्ता सिकरवार, ग्वालियर
    • अमित रमेश शर्मा मंचीय हास्य व्यंग्य कवि सम्मान - डॉ. गिरीश दुबे 'बेधड़क', भोपाल
    • राम पूजन मलिक नवोदित गीतकार सम्मान - धर्मदेव सिंह, भोपाल
    • मालती वसंत बाल साहित्यकार सम्मान - राज गोस्वामी, दतिया
    • अरविन्द चतुर्वेदी स्मृति साहित्य सेवी सम्मान - विनोद नागर, भोपाल
    • उत्कृष्ट इकाई सम्मान - अशोक नगर इकाई
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    Thu, 12 Sep 2024 22:27:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनात्मक आनंदोत्सव : समाज की बेहतरी और मनुष्यता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध आयोजन है सुनें सुनाएं, 24वें सोपान में पढ़ी गईं कभी बूढ़ी नहीं होने वाली रचनाएं https://acntimes.com/The-24th-episode-of-Sunaye-Sunaaye-concluded-with-a-celebration https://acntimes.com/The-24th-episode-of-Sunaye-Sunaaye-concluded-with-a-celebration एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मनुष्यता पर आए ख़तरे से सारी दुनिया चिन्तित है। हर कोई मानवता की और समाज की बेहतरी के लिए यथा जतन कर रहा है। सुनें सुनाएं में चयनित रचनाएं भी इन्हीं कोशिशों का हिस्सा हैं। आयोजन में चयनित रचनाएं समाज की बेहतरी और मनुष्यता की रक्षा के लिए खुद को प्रतिबद्ध करती हैं।

    उक्त विचार सुनें सुनाएं के 24वें सोपान में उभर कर सामने आए। दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस बार मुख्य सोपान के साथ अन्य रचनाओं का पाठ भी किया गया। इस आनंद उत्सव में शहर के बुद्धिजीवियों ने उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया और आयोजन को सार्थक करते हुए यह विश्वास जताया कि रचनाएं कभी बूढ़ी नहीं होतीं। न वे थकती हैं। न उन्हें झुर्रियां पड़ती हैं। उनकी ऊर्जा और क्षमता में कोई कमी नहीं आती। सृजन के पहले क्षण में जैसी आती हैं, आजीवन वैसी की वैसी बनी रहती हैं।

    इन्होंने किया रचना पाठ

    मीनू की ढाणी पर हुए आयोजन में सर्वप्रथम सुनें-सुनाएं के सदस्यों द्वारा पद्मश्री डॉ. लीला जोशी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात रचनाधर्मियों द्वारा अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ किया गया। आगाज़ अशोक कुमार शर्मा ने राहत इन्दौरी की रचना 'लोग हर मोड़ पर' का पाठ कर किया। इसके बाद रीता दीक्षित द्वारा रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना ’कोई अर्थ नहीं’ का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'क्या फ़र्क पड़ता है' का पाठ, महावीर वर्मा द्वारा मोहित कटारिया की रचना 'ओ किस्सागो' का पाठ किया गया। वहीं जयवंत गुप्ते ने भरत व्यास की रचना 'हरी-हरी वसुन्धरा', कीर्ति कुमार शर्मा ने प्राण वल्लभ गुप्त की रचना 'धरती का है ब्याह, बाराती बादल आए', नूतन मजावदिया ने डॉ. आगम भटनागर की रचना 'किसलिए चुप बैठे हो तुम', डॉ. गायत्री तिवारी ने गोपाल दास 'नीरज' की रचना 'मैं पीड़ा का राजकुंवर हूं', राजीव पंडित ने डॉ. जयकुमार 'जलज' की रचना 'प्यार लो विद्यार्थियों मेरे', नरेन्द्र सिंह पंवार ने डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की रचना 'दरवाज़ा खोलो जहांपनाह' का पाठ किया।

    आनंदोत्सव ने दो गुना किया आनंद

    सुनें सुनाएं के 24 सोपान पूरे होने पर सदस्यों की मंशानुरू आनंदोत्सव का आयोजन भी किया गया। आनंदोत्सव पर प्रकाश विनोद झालानी ने डाला जबकि सूत्रधार की भूमिका नरेंद्र सिंह डोडिया ने निभाई। आनंदोत्सव ने रचनात्मक आयोजन सुनें सुनाएं के आनंद को दो गुना कर दिया। इसमें सदस्यों ने अपनी स्वरचित रचनाएं भी प्रस्तुत कीं। इस मौके पर प्रो. प्रदीप सिंह राव दिवंगत उद्योगपति एवं समाजसेवी स्व. टेहम्पटन अंकलेसरिया पर आधारित आगामी पुस्तक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तकों के विक्रय से प्राप्त होने वाली राशि में उनती ही राशि और मिला कर जरूरतमंदों को उपलब्ध करवाने के अपने मिशन की जानकारी दी।

    सुनें सुनाएं द्वारा आयोजित आनन्द उत्सव में सुनें सुनाएँ के सक्रिय सदस्य की तरह ही मीनू की ढाणी के संचालक माथुर साहब एवं उनके सुपुत्र ने सहयोग प्रदान किया। इसके लिए उनके प्रति आभार आनन्द उत्सव के संयोजक द्वय विनोद झालानी एवं नरेन्द्रसिंह डोडिया द्वारा प्रकट किया गया। 

    इनका सहयोग रहा

    आयोजन को सार्थक बनाने में रवि बोथरा, ललित चौरड़िया, आई. एन. पुरोहित, दिनेश जोशी, श्रीराम दिवे, नरेंद्र त्रिवेदी, अशोक दीक्षित, गोविंद काकानी, डॉ.  प्रदीप सिंह राव, रजनी व्यास, सुरेंद्र सिंह कोठारी, हरेंद्र सिंह कोठारी, जितेंद्र सिंह "पथिक", जमीर फारुकी, सुभाष यादव, प्रतीक यादव, प्रो. रतन चौहान, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, कीर्ति कुमार शर्मा, श्याम सुंदर भाटी, प्रकाश गंगराड़े, पं. मुस्तफा आरिफ, डॉ. गीता दुबे, डॉ. गायत्री तिवारी, अशोक शर्मा, अनीता शर्मा, मुकेश पुरी गोस्वामी, कविता व्यास, एच. एस. मंसूरी, अलक्षेंद्र व्यास, प्रो. अभय पाठक, विष्णु बैरागी, जयवंत गुप्ते, महावीर वर्मा, विजय सिंह रघुवंशी, मयूर व्यास, दिनेश राजपुरोहित, ओमप्रकाश मिश्र, सुमति पांडेय, नरेंद्र सिंह पंवार, दुर्गेश सुरोलिया, डॉ. श्वेता विंचुरकर, डॉ. दीप व्यास, डॉ. नरेंद्र कुमार गुप्ता, राकेश पोरवाल, संजय कोटिया, रणजीत सिंह राठौड़, नरेंद्र सिंह डोडिया, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, भावेश ताटके, नीरज कुमार शुक्ला, स्मिता शुक्ला, अनंत शुक्ला, जी. एस. खींची, प्रकाश मेहता, दिनेश कटारिया, इंदु सिंन्हा, अनीता दासानी, विनोद झालानी, प्रकाश हेमावत, लक्ष्मण पाठक सहित सुनें सुनाएं के साथियों का सहयोग रहा।

    सुनें-सुनाएं के 24वें सोपान पर पढ़ी गई रचनाएं सुनने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें।

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    Mon, 02 Sep 2024 22:44:16 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनात्मक आयोजन 'सुनें सुनाएं' का 24वां सोपान कल, दो वर्ष में 934 साथियों ने की सहभागिता, 223 ने पढ़ी अपनी प्रिय रचनाएं https://acntimes.com/24th-phase-of-creative-event-Suneye-Sunaye-tomorrow https://acntimes.com/24th-phase-of-creative-event-Suneye-Sunaye-tomorrow एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया आयोजन 'सुनें सुनाएं' अपने 2 वर्ष पूर्ण कर रहा है। आयोजन का 24वां सोपान 1 सितंबर (रविवार) को सुबह 10 बजे से मीनू की ढाणी बंजली बायपास पर होगा। इन 2 वर्षों में 'सुनें सुनाएं' से डेढ़ हजार से अधिक साथी जुड़े जिनमें से 934 आयोजन में उपस्थित रहे और 223 ने अपने प्रिय रचनाकार की रचना प्रस्तुत की।

    स्वरचित रचना को छोड़कर किसी अन्य की रचना को पढ़ने का यह शहर में पहला प्रयास था। इस प्रयास को शहर के बुद्धिजीवियों ने बहुत प्रोत्साहित किया और प्रत्येक सोपान में रचना पढने वाले साथियों की उपस्थिति बढ़ती रही। शहर ही नहीं शहर के बाहर अन्य शहरों तक इस कार्यक्रम को पसंद किया गया और कई साथियों ने विदेश में रहते हुए इस कार्यक्रम से जुड़ने की इच्छा जताई। परंतु यह कार्यक्रम रचनात्मक गतिविधियों के लिए शहर के लोगों को जागरूक करने और उन्हें एकत्र करने का है इसलिए इस आयोजन को जीवंत ही बनाए रखा गया, डिजिटल प्लेटफार्म से नहीं जोड़ा गया। यह शहर के रचनात्मक लोगों के स्नेह और सहयोग का ही परिणाम है कि यह आयोजन निरंतर 2 वर्ष तक अपने निर्धारित समय पर प्रारंभ हो सका।

    अपनी तरह का एकमात्र आयोजन

    समय पर प्रारंभ होकर समय पर संपन्न होने वाला यह शहर का अपनी तरह का एकमात्र आयोजन है। किसी को किसी का इंतज़ार नहीं करना पड़ता और निर्धारित समय के बाद ठहरना भी नहीं पड़ता है। 24वें सोपान में सभी साथियों के आग्रह पर इस आयोजन को अन्यत्र रखा गया है। अन्यथा यह आयोजन प्रतिमाह जी. डी. अंकलेसरिया हाल पर आयोजित होता रहा है। इस बार प्रारंभ में नियमित रचना पाठ होगा उसके बाद आनंद उत्सव के तहत उपस्थितजन अपना रचनात्मक प्रदर्शन करेंगे।

    नियमित सोपान में ये करेंगे रचनापाठ

    नियमित सोपान में रचना पाठ करने वालों में अशोक कुमार शर्मा द्वारा राहत इन्दौरी की रचना 'लोग हर मोड़ पर' का पाठ किया जाएगा। रीता दीक्षित द्वारा रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना ’कोई अर्थ नहीं’ का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'क्या फ़र्क पड़ता है' का पाठ, महावीर वर्मा द्वारा मोहित कटारिया की रचना 'ओ किस्सागो' का पाठ, जयवंत गुप्ते द्वारा भरत व्यास की रचना 'हरी-हरी वसुन्धरा' का पाठ, कीर्ति कुमार शर्मा द्वारा प्राण वल्लभ गुप्त की रचना 'धरती का है ब्याह, बाराती बादल आए' का पाठ, नूतन मजावदिया द्वारा डॉ. आगम भटनागर की रचना 'किसलिए चुप बैठे हो तुम' का पाठ, डॉ. गायत्री तिवारी द्वारा गोपाल दास 'नीरज' की रचना 'मैं पीड़ा का राजकुंवर हूं' का पाठ, राजीव पंडित द्वारा डॉ. जयकुमार 'जलज' की रचना 'प्यार लो विद्यार्थियों मेरे' का पाठ और नरेन्द्र सिंह पंवार द्वारा डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की रचना 'दरवाज़ा खोलो जहांपनाह' का पाठ किया जाएगा। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के बुद्धिजीवियों से आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sat, 31 Aug 2024 03:20:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान 2024 समारोह आज, जनवादी लेखक संघ कवयित्री डॉ. प्रभा मजूमदार को करेगा सम्मानित https://acntimes.com/Danish-Aligarhi-Memorial-Award-2024-ceremony-of-Janwadi-Lekhak-Sangh-today https://acntimes.com/Danish-Aligarhi-Memorial-Award-2024-ceremony-of-Janwadi-Lekhak-Sangh-today एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा दानिश अलीगढ़ी स्मृति समारोह का आयोजन 25 अगस्त रविवार को किया जाएगा। समारोह सुबह 11 बजे अजंता पैलेस कॉन्फ्रेंस हॉल रतलाम में होगा। 'दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान- 2024' देश की सुपरिचित कवयित्री डॉ. प्रभा मजूमदार को दिया जाएगा।

    उक्त जानकारी देते हुए जनवादी लेखक संघ रतलाम के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने बताया कि जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रतिवर्ष यह सम्मान दिया जाता है। यह सम्मान प्रतिवर्ष जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग प्रदेश कार्यसमिति सह प्रभारी सिद्दीक़ रतलामी द्वारा संयोजित रहता है। दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान का यह तीसरा सोपान है। प्रथम वर्ष 2022 के लिए वरिष्ठ कवि एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार 'जलज' तथा दूसरे वर्ष 2023 का सम्मान वरिष्ठ कवि श्याम महेश्वरी को दिया गया था। तीसरे सम्मान के लिए चयनित कवयित्री प्रभा मजूमदार देश की महत्वपूर्ण रचनाकारों में शामिल हैं। आयोजन में प्रभा मजूमदार का रचना पाठ भी होगा। जनवादी लेखक संघ, जन नाट्य मंच, युगबोध ने साहित्य प्रेमियों से आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

    जानिए, कौन हैं मजूमदार

    प्रभा मजूमदार का जन्म 10 अप्रैल 1957 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ। रतलाम में ही उन्होंने एम.एससी. की शिक्षा प्राप्त की। पीएच.डी. (गणित) करने के बाद वे तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग में भूवैज्ञानिक के तौर पर 35 वर्ष कार्यकाल के बाद उप महाप्रबंधक (तेलाशय) के पद से मई 2017 में सेवानिवृत हुईं। उनके 4 कविता संग्रह ‘अपने अपने आकाश’ (2003), ‘तलाशती हूँ जमीन’ (2010), ‘अपने हस्तिनापुरों में’ (2014) “सिर्फ स्थगित होते हैं युद्ध” (2019) प्रकाशित हुए हैं।

    प्रभा को कविता के लिए गुजरात साहित्य परिषद, सृजनगाथा द्वारा डॉ. श्रीकांत वर्मा पुरस्कार, शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा कविता पुरस्कार, सृजनगाथा (छत्तीसगढ़) द्वारा सिंधु रथ पुरस्कार, शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा व्यंग्य के लिए पुरस्कार, हिन्दी लेखिका संघ म. प्र. द्वारा रजत जयंती समारोह में काव्य संग्रह हेतु पुरस्कार, अविराम साहित्यिकी द्वारा समकालीन लघुकथा प्रतियोगिता पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले हैं। 

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    Sun, 25 Aug 2024 10:45:01 +0530 Niraj Kumar Shukla
    उपलब्धि : मध्य प्रदेश लेखक संघ का देवकीनंदन माहेश्वरी राज्य स्तरीय पुरस्कार रतलाम की श्वेता नागर को https://acntimes.com/Madhya-Pradesh-Writers-Associations-Devkinandan-Maheshwari-State-Level-Award-to-Shweta-Nagar-of-Ratlam https://acntimes.com/Madhya-Pradesh-Writers-Associations-Devkinandan-Maheshwari-State-Level-Award-to-Shweta-Nagar-of-Ratlam एसीएन टाइम्स @ रतलाम । ‘मध्य प्रदेश लेखक संघ द्वारा राज्यस्तरीय पुरस्कारों और सम्मान की घोषणा की गई है। इसमें रतलाम निवासी लेखिका एवं सीएम राइज शासकीय मॉडल स्कूल सैलाना में व्याख्याता श्वेता नागर का देवकीनंदन माहेश्वरी राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। यह पुरस्कार उन महिला लेखिकाओं को प्रदान किया जाता है जिन्होंने साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

    लेखिका श्वेता नागर की पुस्तक ‘रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद : जीवन दर्शन का चयन इस पुरस्कार के लिया गया। खास बात यह है कि यह पुस्तक मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी म. प्र. शासन की प्रथम कृति अनुदान योजना के अंतर्गत चयनित हुई थी। पुस्तक का प्रकाशन 2021 में साहित्य अकादमी, ‘मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल’ के सहयोग से हुआ था। प्रकाशक संदर्भ प्रकाशन, भोपाल है। अपनी इस उपलब्धि पर लेखिका श्वेता नागर ने अपने गुरु प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे और मध्य प्रदेश लेखक संघ के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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    Sat, 20 Jul 2024 21:47:16 +0530 Niraj Kumar Shukla
    फोटोग्राफी : स्व. रामचंद्र मीना पोरवाल स्मृति फोटोग्राफी प्रतियोगिता के लिए फोटो आमंत्रित, ऑल इंडिया फोटोग्राफर फाउंडेशन नई दिल्ली व रोटरी क्लब रतलाम कर रहा आयोजन https://acntimes.com/Photos-invited-for-Late-Ramchandra-Meena-Porwal-Memorial-Photography-Competition https://acntimes.com/Photos-invited-for-Late-Ramchandra-Meena-Porwal-Memorial-Photography-Competition एसीएन टाइम्स @ रतलाम । विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया फोटोग्राफर फाउंडेशन नई दिल्ली व रोटरी क्लब रतलाम द्वारा फोटो प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। स्पर्धा स्व. रामचंद्र मीना पोरवाल की स्मृति आयोजित की जा रही है। इसके लिए प्रविष्टि के रूप में फोटो आमंत्रित किए गए हैं।

    प्रतियोगिता संयोजक राकेश पोरवाल, रोटरी क्लब अध्यक्ष दीप्ति कोठारी व सचिव सोनल लखानी ने बताया कि प्रतियोगिता 6 वर्गों में आयोजित की जा रही है। वर्ग 1 स्कूली छात्रों के लिए, वर्ग 2 महाविद्यालयीन छात्रों के लिए, वर्ग 3 महिलाओं के लिए, वर्ग 4 पुरुषों के लिए, वर्ग 5 प्रोफेशनल फोटोग्राफरों के लिए तथा वर्ग 6 मोबाइल से फोटोग्राफी के लिए रहेगा।

    यहां जमा कराना होंगे फोटोग्राफ

    पदाधिकारियों ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक व्यक्ति अपने द्वारा खींचे गए फोटो की 8×12 साइज की फोटो प्रिंट करवाकर रतलाम के दोबत्ती चौराहा स्थित पोरवाल फोटोज (त्रिमूर्ति स्वीट्स के ऊपर) पर जमा करवाने होंगे। प्रतियोगिता में केवल वही फोटो स्वीकार किए जाएंगे जो प्रतिभागी ने स्वयं खींचें हों। फ़ोटो में फोटोशॉप से किसी प्रकार की एडिटिंग नहीं होनी चाहिए। फोटो 1 वर्ष से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। 23 जून तक खीचें गए फोटो ही मान्य किए जाएंगे।

    प्रविष्टि की आखिरी तारीख 8 अगस्त

    प्रतियोगिता में प्रविष्टि जमा कराने का अखिरी तारीख 8 अगस्त है। प्रतियोगिता के निर्णायक रंगकर्मी कैलाश व्यास, आर्टिस्ट दीपाली मूंदड़ा, फोटोग्राफर रविशंकर गुप्ता तथा सविता तिवारी रहेंगे। विजेता प्रतियोगियों को विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मानित किया जाएगा।

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    Sat, 20 Jul 2024 12:07:25 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने जानी साहित्यकार एवं कवि अज़हर हाशमी की कुशलक्षेम, जल्द स्वस्थ होने की कामना की https://acntimes.com/Director-of-MP-Sahitya-Academy-Dr-Vikas-Dave-enquired-about-the-well-being-of-poet-Azhar-Hashmi https://acntimes.com/Director-of-MP-Sahitya-Academy-Dr-Vikas-Dave-enquired-about-the-well-being-of-poet-Azhar-Hashmi एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए और बेटियां पावन दुआएं हैं जैसी रचनाओं के रचयिता अजहर हाशमी के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए सभी फिक्रमंद हैं। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे और उनकी माता सुशीला दवे भी उनकी कुशलक्षेम पूछने रतलाम पहुंचे।

    यहां आरोग्यम अस्पताल में उपचाररत हाशमी से मिल कर डॉ. विकास और उनकी माता सुशीला ने उनके जल्द से जल्द पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना ईश्वर से की। डॉ. दवे ने कहा कि हाशमी जी द्वारा की गई साहित्य की सेवा अनुकरणनीय और अविस्मरणनीय है। उनके आलेख, संस्मरण, कविताएं, ग़ज़लें, मुक्तक सृजन के लिए प्रेरित करते हैं और नई ऊर्जा का संचार करते हैं। हाशमी जी सिर्फ रतलाम ही नहीं वरन् देश और साहित्य जगत की धरोहर हैं। कोई यदि उनसे एक बार मिल ले तो फिर उन्हीं का होकर रह जाता है।

    यह भी देखें... भगवान से प्रार्थना : ‘मुझको राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए…’ के रचयिता अज़हर हाशमी जल्दी स्वस्थ हों, वे फिर से अपनी सृजन-यात्रा आरम्भ करें- डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला

    राजस्थान के छोटे से गांव से आकर रतलाम को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले हाशमी जी से उनके शिष्य जितना स्नेह करते हैं, उतना हर गुरु और शिष्य के लिए संभव प्रतीत नहीं होता। यही वजह है कि उनके स्वास्थ होने की कामना सभी शिष्य, परिचित, मित्र और जो सिर्फ नाम से जानते हैं, वे भी कर रहे हैं। मैं जब भी उनसे मिलता हूं तो उनकी दुआओं की दौलत साथ लेकर ही लौटता हूं।

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    Mon, 15 Jul 2024 05:32:34 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सुनें सुनाएं 22 आज : पुणे और गुना से आ कर रचनाधर्म करेंगे अपनी प्रिय रचना का पाठ, पाबंदी सिर्फ इतनी सी है... https://acntimes.com/Listen-and-recite-22-today-People-will-come-from-Pune-and-Guna-and-recite-their-favourite-compositions https://acntimes.com/Listen-and-recite-22-today-People-will-come-from-Pune-and-Guna-and-recite-their-favourite-compositions एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'सुनें सुनाएं ' आयोजन अब सिर्फ़ रतलाम शहर का आयोजन ही नहीं रहा है। इसकी लोकप्रियता शहर से बाहर भी पहुंच रही है । यही कारण है कि इस आयोजन में रचना पढने के लिए रचना प्रेमी बाहर से आकर रचना पाठ करने को उत्सुक हैं । इस बार शहर के महत्वपूर्ण लोगों के साथ पुणे और गुना से भी रचना प्रेमी रतलाम आकर अपनी रचना पढ़ेंगे।

    'सुनें सुनाएं' का 22 वां सोपान 7 जुलाई (रविवार) को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (प्रथम तल), रतलाम पर होगा। इस बार रचना पाठ करने वालों में शहर के वरिष्ठ शिक्षाविद्, चिंतक और जनप्रतिनिधि तो शामिल हैं ही, साथ ही रतलाम से बाहर के रचना प्रेमी भी इसमें शिरकत कर रहे हैं। आयोजन में शिक्षाविद् अनीता दासानी 'अदा'  द्वारा सुशांत सुप्रिय की रचना 'धन्यवाद ज्ञापन' का पाठ किया जाएगा। रंगकर्मी श्याम सुंदर भाटी अज्ञात रचनाकार की ग़ज़ल 'भीगा - भीगा मौसम है' का पाठ करेंगे। पूर्व प्राचार्य और रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र द्वारा शरद जोशी की व्यंग्य रचना 'बरसों से हम दौड़ ही रहे हैं' का पाठ किया जाएगा तो पूर्व प्राचार्य डॉ. गीता दुबे सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की रचना ‘खाली समय में’ का पाठ करेंगी।

    चिंतक विष्णु बैरागी द्वारा शमीम जयपुरी की ग़ज़ल 'भला किसी की मुहब्बत में क्या लिया मैंने' का पाठ करेंगे। गुना के सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश शर्मा इस आयोजन में रचना पाठ करने के लिए यहां आएंगे और नवाज़ देवबंदी  की नज़्म 'सोचो, आख़िर कब सोचोगे' का पाठ करेंगे। सेवानिवृत्त कृषि अधिकारी एवं रंगकर्मी अनमोल सुरोलिया द्वारा हरेंद्रसिंह 'एहसास' की रचना 'तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है' का पाठ किया जाएगा। पुणे में बायो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही बुलबुल भाटी अशोक चक्रधर की रचना 'कुंए का मेंढक' का पाठ करने के लिए रतलाम आ रही हैं। शासकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप सिंह राव अदम गोंडवी की रचना 'सौ में सत्तर आदमी' का पाठ करेंगे। पूर्व पार्षद गोविन्द काकानी द्वारा प्रहलाद दास काकानी की रचना 'गप्प है भाई गप्प' का पाठ किया जाएगा।

    पाबंदी सिर्फ इतनी सी है...

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करता है और वह भी बिना किसी भूमिका के। समय के अनुशासन की पाबंदी तो है ही। सुनें सुनाएं ने शहर के सुधिजनों से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sun, 07 Jul 2024 08:21:18 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य जगत : आशीष दशोत्तर की कहानी ‘गिंडोले’ को मिलेगा 'कथा रंग' पुरस्कार, नई दिल्ली में 13 जुलाई को होंगे पुरस्कृत https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-story-Gindole-selected-for-Katha-Rang-award https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-story-Gindole-selected-for-Katha-Rang-award एसीएन टाइम्स @ रतलाम । युवा कथाकार आशीष दशोत्तर को कहानी का 'कथा रंग पुरस्कार-2023' प्रदान किया जाएगा। इसकी घोषणा कथा रंग पुरस्कार निर्णायक समिति द्वारा की गई है। पुरस्कार वितरण समारोह गाजियाबाद, नई दिल्ली में 13 जुलाई को वरिष्ठ कथाकारों की मौजूदगी में होगा।

    कथा रंग द्वारा स्थापित इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को दशोत्तर ने लगातार दूसरे वर्ष प्राप्त किया है। इस वर्ष उनकी कहानी 'गिंडोले' को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह कहानी सामाजिक रिश्तों और सांप्रदायिक संदर्भों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। अपने आसपास के परिवेश की मानसिकता में हो रहे बदलाव और संकीर्ण होती सोच को विश्लेषणात्मक ढंग से इसमें प्रस्तुत किया गया है।

    विशेष सत्र भी होगा

    कथा रंग के संयोजक आलोक यात्री ने बताया कि 13 जुलाई को आयोजित सम्मान समारोह में 'समकालीन कहानी की चुनौतियां' विषय पर एवं दिवंगत कथाकार से. रा. यात्री की कथा यात्रा पर विशेष सत्र होंगे। समारोह में वरिष्ठ कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह, ममता कालिया, हरियश राय, गौरीनाथ, प्रियदर्शन, संजय सहाय, आबिद सुरती, विभूति नारायण राय, महेश दर्पण सहित वरिष्ठ साहित्यकारों का सान्निध्य रहेगा।

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    Fri, 28 Jun 2024 22:35:22 +0530 Niraj Kumar Shukla
    विमोचन : ‘जनजाति गौरव’ पत्रिका का विमोचन 23 जून को, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मार्गदर्शन में कार्यरत जनजाति विकास मंच का प्रयास https://acntimes.com/Janjati-Gaurav-magazine-will-be-released-on-23rd-June https://acntimes.com/Janjati-Gaurav-magazine-will-be-released-on-23rd-June एसीएन टाइम्स @ रतलाम । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मार्गदर्शन में कार्यरत जनजाति विकास मंच द्वारा जनजाति गौरव पत्रिका तैयार की गई है। इसका विमोचन 23 जून को होगा। विमोचन समारोह शाम 7 बजे रंगोली सभागृह में होगा।

    मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य वन संरक्षक चौकसिंह निनामा होंगे। कार्यक्रम में जनजाति विकास मंच के पदाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधि प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। जनजाति विकास मंच के विजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जनजाति परंपरा एक गौरवशाली परंपरा है। इसी से अनेक देशभक्त, क्रांतिक्रारी और समाज सुधारक हुए हैं। जनजाति गौरव के माध्यम से समाज का प्रत्येक व्यक्ति परिचित हो, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए जनजाति गौरव पत्रिका तैयार की गई है।

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    Sat, 22 Jun 2024 21:47:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्याख्यान : चित्र और चित्रण में अंतर है, इस अंतर को समझना ही कला है& अशोक भौमिक https://acntimes.com/Understanding-the-difference-between-a-picture-and-an-illustration-is-the-art-Ashok-Bhowmick https://acntimes.com/Understanding-the-difference-between-a-picture-and-an-illustration-is-the-art-Ashok-Bhowmick जी. डी. अंकलेसरिया स्मृति व्याख्यान में सुप्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक ने कहा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रत्येक चित्र को देखने से पहले उसके पीछे की रचना प्रक्रिया को समझना ज़रूरी है। चित्र और चित्रण में अंतर होता है। इस अंतर को समझना ही कला की सही समझ है। साहित्य की अन्य विधाओं से चित्रकला इसी मायने में अलग है कि उसे समझने के लिए एक दर्शक को अपनी अंतर्दृष्टि का विकास करना ज़रूरी होता है।

    उक्त विचार देश के सुप्रसिद्ध चित्रकार, कथाकार अशोक भौमिक (नई दिल्ली) ने जी. डी. अंकलेसरिया स्मृति व्याख्यान में "साहित्य तथा चित्रकला" विषय पर व्यक्त किए। रोटरी क्लब रतलाम एवं रोटेरियन जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल ट्रस्ट द्वारा आयोजित व्याख्यान सभा में भौमिक ने कहा कि हमारी प्राचीन चित्रकला और वर्तमान चित्रकला में काफी अंतर है। 1940 के पहले की चित्रकला प्रमुख रूप से शासकों या हमारे पौराणिक आख्यानों पर आधारित हुआ करती थी।

    रविंद्र नाथ टैगोर और अमृता शेरगिल ने इस धारा को बदला और वहीं से चित्रकला में आमजन का जुड़ाव होता गया। चित्रकला का यह स्वरूप अब और विस्तृत रूप में हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चित्र अपनी कहानी खुद कहता है इसीलिए किसी चित्र को समझने से पहले किसी कहानी को अपने मन में मत बसाइए। चित्र अपने आप में सब कुछ कहने में सक्षम होता है। भौमिक ने प्राचीन और वर्तमान चित्रकला के अंतर को विजुअल माध्यम से भी प्रदर्शित किया।

    सेंट स्टोन कलाकारों का किया स्वागत

    प्रारंभ में अतिथि भौमिक का स्वागत गुस्ताद अंकलेसरिया और मुकेश जैन ने किया। देवास और इंदौर से आए सेंड स्टोन कलाकारों का स्वागत रोटेरियन मीतेश गादिया व अनंत चोपड़ा ने किया। रोटरी प्रार्थना रोटेरियन राजेंद्र चौधरी ने प्रस्तुत की। अतिथि परिचय रोटेरियन मीतेश गादिया ने दिया।

    लाइफ स्केच प्रदर्शित

    समारोह में जी. डी. अंकलेसरिया के जीवन पर आधारित वीडियो लाइफ स्केच प्रदर्शित किया गया। लगन शर्मा द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में संवाद एवं स्वर आशीष दशोत्तर का था। इस फिल्म में रोटरी क्लब भवन की शुरुआत के लिए जी. डी. अंकलेसरिया द्वारा किए गए प्रयासों को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ बताया गया।

    प्रतिभाओं का सम्मान

    शहर के युवा कलाकार ईष्ट दशोत्तर ने चित्रकार भौमिक का पोर्ट्रेट बनाकर भेंट किया। खेल प्रतिभा नन्ही स्केटर रूही सोनी का सम्मान रोटेरियन अशोक तांतेड़ ने किया। भौमिक को स्मृति चिह्न रोटेरियन गुस्ताद अंकलेसरिया, रोटरी क्लब अध्यक्ष प्रकाश सेठिया ने प्रदान किया। संचालन रोटेरियन दीपक पंत ने किया। आभार रोटेरियन अनुराग लोखंडे ने व्यक्त किया।

    ये उपस्थित रहे

    कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमी प्रो. रतन चौहान, डॉ. प्रदीप सिंह राव, ओमप्रकाश मिश्र, डॉ. अभय पाठक, पद्माकर पागे, सिद्दीक़ रतलामी, रणजीत सिंह राठौर, कीर्ति शर्मा, श्रीराम दिवे, प्रकाश हेमावत, कला साधक, सुनें-सुनाएं के साथी व रोटरी परिवार के सदस्य मौजूद थे।

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    Tue, 18 Jun 2024 12:38:00 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : साहित्य अकादमी ने युवा और बाल साहित्य पुरस्कारों का किया ऐलान, देश के 47 लेखकों को मिलेंगे तम्रफलक और 50 हजार रुपए https://acntimes.com/Sahitya-Akademi-announced-Youth-and-Children-Literature-Awards https://acntimes.com/Sahitya-Akademi-announced-Youth-and-Children-Literature-Awards एसीएन टाइम्स @ नई दिल्ली । भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्थापित साहित्य अकादमी ने वर्ष 2024 के लिए युवा और बाल साहित्य पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। बाल साहित्य के लिए 24 और युवा साह्तिय के लिए 23 लेखकों के नामों का चयन किया गया है। इन सभी को 19 जून 2024 को नई दिल्ली में होने वाले समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा।

    साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. डी. के. श्रीनिवास के अनुसार अध्यक्ष माधव कौशिक की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक शनिवार को संपन्न हुई। इसमें त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडलों के बहुमत व सर्वसम्मति के आधार पर बाल साहित्य पुरस्कार 2024 के लिए 24 लेखकों की पुस्तकों का चयन किया गया। इसी प्रकार युवा साह्तिय पुरस्कार के लिए 23 लेखकों की पुस्तकों का चयन भी किया है।

    यह रहा आधार, पुरस्कार के रूप में यह मिलेगा

    पुरस्कार उन पुस्तकों से संबंधित हैं, जो पुरस्कार वर्ष के तत्काल पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम पांच वर्षों (अर्थात् 1 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2022 के मध्य) प्रथम बार प्रकाशित हुई हैं। चयनित पुस्तकों के लेखकों को पुरस्कार के रूप में उत्कीर्ण ताम्रफलक तथा 50 हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

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    Sat, 15 Jun 2024 14:24:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'युगबोध' के ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का समापन आज, मोबाइल और अन्न की बर्बादी से बचने का संदेश देंगे बाल कलाकार, आप भी अवश्य देखें https://acntimes.com/Yugbodh-summer-childrens-drama-camp-concludes-tomorrow-two-plays-will-be-staged https://acntimes.com/Yugbodh-summer-childrens-drama-camp-concludes-tomorrow-two-plays-will-be-staged एसीएन टाइम्स @ रतलाम । नन्हे कलाकारों को मंच से जोड़ने एवं उन्हें रंग कर्म की बारीकियों से अवगत कराने के उद्देश्य से 'युगबोध' नाट्य संस्था द्वारा ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का आयोजन किया गया। इसका समापन 8 जून (शनिवार) को शाम 7:30 बजे महाराष्ट्र समाज भवन, स्टेशन रोड रतलाम पर होगा। इस दौरान बच्चे दो नाटकों का मंचन करेंगे।

    उक्त जानकारी देते हुए युगबोध के अध्यक्ष एवं शिविर के प्रशिक्षक, वरिष्ठ रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्रा ने बताया कि युगबोध द्वारा 2009 से प्रतिवर्ष ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना काल को छोड़कर यह शिविर प्रतिवर्ष आयोजित होता रहा। इसके माध्यम से शहर के बच्चों को रंगकर्म से जोड़ने की कोशिश की जाती है। शिविर पूर्णतः निःशुल्क होता है। इसमें बच्चों को रंगकर्म के प्रशिक्षण के साथ संवाद अदायगी, भाषा एवं उच्चारण तथा कला के विभिन्न पक्षों की जानकारी प्रदान की जाती है। इस वर्ष शिविर की शुरुआत 6 मई को हुई थी। शिविर में 20 बच्चों ने हिस्सेदारी की।

    दो नाटकों का होगा मंचन

    रंगकर्मी मिश्रा ने बताया कि शिविर के दौरान बच्चों ने दो नाटक तैयार किए हैं। साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने दोनों नाटक लिखे हैं।‌ पहला नाटक 'मुन्ना मोबाइल' है, जो मोबाइल की लत एवं उससे बचाव का संदेश देता है। दूसरा नाटक 'समझो मेरे यार' है, जो समारोहों में भोजन की बर्बादी से बचने का संदेश देता है। उन्होंने शहर के रंगकर्मियों एवं सुधिजन से आयोजन में उपस्थित होने का आग्रह किया है।

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    Fri, 07 Jun 2024 02:44:57 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें सुनाएं&21 : मिलना, बैठना और सुनना & सुनाना आज की आवश्यकता, शहर को यह अवसर मिलना सुखद https://acntimes.com/21st-phase-of-Sunaye-Sunaaye-organised https://acntimes.com/21st-phase-of-Sunaye-Sunaaye-organised एसीएन टाइम्स @  रतलाम। एक साथ मिलना, बैठना और एक दूसरे की भावनाओं को सुनना और अपने मन की बातों को सुनाना यह आज के समय में बहुत आवश्यक है। इस आयोजन के माध्यम से शहर को यह अवसर मिल रहा है जो बहुत सुखद है।

    उक्त विचार शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत 'सुनें सुनाएं' आयोजन के 21वें सोपान में उभर कर सामने आए। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित इस सोपान में रचना प्रेमियों ने अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ किया। पहले सोपान से अब तक नियमित रूप से उपस्थित हो रहे हैं साथी आई. एल. पुरोहित ने डॉ. विष्णु सक्सेना का गीत 'थाल पूजा का ले कर चले आइए' सुनाया। विजय सिंह रघुवंशी द्वारा प्रो. अज़हर हाशमी की रचना 'मुझको राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए' का पाठ किया गया। हरेन्द्र कोठारी ने असर अहमदाबादी की ग़ज़ल 'मेरी मस्ती पे ज़माने के हैं पहरे कितने' का पाठ, इन्दु सिन्हा ने रघुवीर सहाय की रचना "रामदास" तथा इस आयोजन के लिए हर बार बाजना से आने वाले दिनेश जोशी ने उपग्रह के स्तम्भ में प्रकाशित रचना 'सोच बड़ी रखिए' का पाठ किया।

    हिन्दी की विदुषी डॉ. पूर्णिमा शर्मा द्वारा दुष्यंत कुमार की रचना 'कहां तो तय था चराग़ां हरेक घर के लिए' का पाठ किया गया। पीरूलाल डोडियार ने पंडित मुस्तफ़ा आरिफ़ की कविता 'राम मेरी विरासत' का पाठ किया वहीं रश्मि पंडित ने अग्निशेखर की रचना 'छत पर चांद' का पाठ किया। सरवन से आए दिनेश बारोठ ने बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़ल 'लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में' सुनाई तो कीर्ति शर्मा ने शील जी का गीत 'बढ़ रही है आग धुंआधार, देश के जवान इसे रोक दो' का पाठ किया।

    इनकी उपस्थिति रही

    आयोजन को अपनी गरिमामयी उपस्थित से सुधिजन ने सार्थक किया। इनमें प्रो. रतन चौहान, गुस्ताद अंकलेसरिया, डॉ. अभय पाठक, सिद्दीक़ रतलामी, इंदु सिन्हा, संजय परसाई, अशोक कुमार शर्मा, श्रीराम दिवे, विनोद झालानी, श्याम सुंदर भाटी, राधेश्याम शर्मा,  ललित चौरड़िया, जी. एस. खींची, रीता दीक्षित, आशा श्रीवास्तव, अशोक पटेल, ओम प्रकाश मिश्रा, डॉ. गोविंद प्रसाद डबकरा, अनीस ख़ान, फिरोज़ अख़्तर, जितेंद्र सिंह पथिक, नरेंद्र सिंह डोडिया,  विभा राठौर,  बृजेंद्र नंदन मेहता, नरेंद्र त्रिवेदी,  अनीता दासानी, सुरेंद्र छाजेड़, मणिलाल पोरवाल, रमेश बनवार, अमृतलाल प्रजापत, जयेश शर्मा,  शिवराज जोशी, विष्णु बैरागी,  महावीर वर्मा एवं आशीष दशोत्तर उपस्थित रहे।

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    Mon, 03 Jun 2024 09:44:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ग़ज़ल 2 जून के लिए... ग़रीबों को मिले ‘आशीष’ दो जून रोटी का& आशीष दशोत्तर https://acntimes.com/A-ghazal-describing-the-struggle-for-do-Joon-rooti https://acntimes.com/A-ghazal-describing-the-struggle-for-do-Joon-rooti आसरा दो जून रोटी का...

     

    प्रश्न है कब से खड़ा दो जून रोटी का,

    आज भी है मसअला दो जून रोटी का।

     

    मुफ़्तखोरी बढ़ रही है मुल्क में कितनी,

    है मगर क्यों फ़ासला दो जून रोटी का।

     

    आप सुनते आ रहे हैं सात दशकों से,

    ख़त्म होगा मुद्दआ दो जून रोटी का।

     

    ऐ महल वालों कभी फुर्सत मिले तुमको,

    हाल क्या है सोचना दो जून रोटी का।

     

    आपकी हालत सुधरती ही गई लेकिन,

    दायरा कुछ घट गया दो जून रोटी का।

     

    दूरियां बढ़ती गई लब से निवालों की,

    खूब नारा तो लगा दो जून रोटी का।

     

    हम ग़रीबों को मिले 'आशीष' थोड़ा सा,

    अब यहां पर आसरा दो जून रोटी का।

     

    आशीष दशोत्तर

    संपर्क : +91 9827084966

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    Sat, 01 Jun 2024 23:55:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    …ताकि वातावरण सकारात्मक बने : 'सुनें सुनाएं' का 21वां सोपान 2 जून को, अनोखे आयोजन में 10 रचनाप्रेमी करेंगे अपनी प्रिय रचना का पाठ, https://acntimes.com/21st-episode-of-Sundaye-Sunayein-on-2nd-June https://acntimes.com/21st-episode-of-Sundaye-Sunayein-on-2nd-June एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत 'सुनें सुनाएं' आयोजन का 21वां सोपान 2 जून (रविवार) को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल प्रथम तल रतलाम पर होगा। अपनी तरह के अनोखे इस आयोजन में इस बार दस रचनाकार अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ करेंगे।

    आयोजन में आई. एल. पुरोहित द्वारा डॉ. विष्णु सक्सेना के गीत 'थाल पूजा का ले कर चले आइए' का पाठ किया जाएगा। इसी प्रकार विजय सिंह रघुवंशी द्वारा प्रो. अज़हर हाशमी की रचना 'मुझको राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए' का पाठ, हरेन्द्र कोठारी द्वारा असर अहमदाबादी की ग़ज़ल 'मेरी मस्ती पे ज़माने के हैं पहरे कितने' का पाठ, इन्दु सिन्हा द्वारा रघुवीर सहाय की रचना "रामदास" का पाठ, दिनेश जोशी (बाजना) द्वारा उपग्रह के स्तम्भ में प्रकाशित रचना 'सोच बड़ी रखिए' का पाठ, डॉ. पूर्णिमा शर्मा द्वारा दुष्यंत कुमार की रचना 'कहां तो तय था चराग़ां हरेक घर के लिए' का पाठ किया जाएगा।

    इसी प्रकार पीरूलाल डोडियार पंडित मुस्तफ़ा आरिफ़ की कविता 'राम मेरी विरासत' का पाठ, रश्मि पंडित द्वारा अग्निशेखर की रचना 'छत पर चांद' का पाठ, दिनेश बारोठ (सरवन) द्वारा बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़ल 'लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में' का पाठ तथा कीर्ति शर्मा द्वारा शील जी का गीत 'बढ़ रही है आग धुंआधार, देश के जवान इसे रोक दो' का पाठ किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई अपनी रचना का पाठ नहीं करता है बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करता है। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के सुधिजनों से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sat, 01 Jun 2024 03:17:15 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर को नवकिरण सृजन सम्मान से अलंकृत, राजस्थान के बीकानेर में हुआ सम्मान https://acntimes.com/Young-litterateur-Ashish-Dashottara-honored-with-Navkiran-Srijan-Award https://acntimes.com/Young-litterateur-Ashish-Dashottara-honored-with-Navkiran-Srijan-Award एसीएन टाइम्स @ बीकानेर । नवकिरण सृजन मंच के तत्वावधान रतलाम के युवा पत्रकार एवं साहित्यकार आशीष दशोत्तर के सृजन पर चर्चा एवं नवकिरण सृजन सम्मान अर्पण समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, कवि एवं कथाकार राजेन्द्र जोशी थे। अध्यक्षता व्यंग्यकार एवं संपादक डॉ. अजय जोशी ने की।

    मुख्य अतिथि कवि एवं कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि हमारे समय के महत्वपूर्ण लेखक दशोत्तर का लेखन रेखांकित किया जाना चाहिए। दशोत्तर की अठारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें कविताएं, गज़ल, व्यंग्य आदि पाठकों में काफी लोकप्रिय रही हैं। उनका सृजन जन जुड़ाव का है और भाषा-शैली संप्रेषणीय है। अध्यक्षता कर रहे डॉ. अजय जोशी ने कहा कि आशीष दशोत्तर का सृजन बहुआयामी है। उन्होंने गीत, गज़ल और व्यंग्य सभी विधाओं में सृजन किया है। उनके व्यंग्य बहुत चुटीले और मारक होते हैं और पाठकों पर अपना एक अलग प्रभाव छोड़ते हैं।

    जारी है दशोत्तर का सृजन- स्वर्णकार

    कार्यक्रम के प्रारंभ में नवकिरण सृजन मंच के समन्यक साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ने दशोतर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनके ‘मोरे अवगुन चित में धरो’, ‘जी हुज़ूर’, प्रतिनिधि व्यंग्य शीर्षक से व्यंग्य संग्रह, ‘पोटली भर आस’ गीत संग्रह, ‘सम से विषम हुए’ और ‘सोहबतें’ ग़ज़ल संग्रह, ‘तुम भी?’ कविता संग्रह, ‘बातें मेरे हिस्से’ की साक्षात्कार संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। अपने दायित्वों के साथ संजीदा और जागरूक साहित्यकार के रूप में उनका सृजन जारी है। कार्यक्रम में दशोत्तर ने अपनी रचना प्रकिया बताते हुए चुनिंदा रचनाएं भी प्रस्तुत की। अंत में कवयित्री यामिनी जोशी ने आभार ज्ञापित किया।

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    Sun, 26 May 2024 23:40:00 +0530 Niraj Kumar Shukla
    शोध ग्रंथ विमर्श : 'साहित्य में पर्यावरण का वैज्ञानिक अध्ययन' हिंदी साहित्य का अछूता प्रयोग, आधुनिक तकनीक पारिस्थितिकी से माफी मांगे& मनोज श्रीवास्तव https://acntimes.com/Online-research-discussion-organized-on-sahitya-me-paryavaran-ka-vaigyanik-adhyayan https://acntimes.com/Online-research-discussion-organized-on-sahitya-me-paryavaran-ka-vaigyanik-adhyayan एसीएन टाइम्स @ डेस्क । पुस्तक ‘साहित्य में पर्यावरण का वैज्ञानिक अध्ययन' वाकई हिंदी साहित्य का अछूता प्रयोग है। मैंने जब इस पुस्तक को पढ़ा तो सुखद आश्चर्य से भर गया क्योंकि इसमें वैज्ञानिकता का टेरर नहीं है। यह आवश्यक है कि ऐसे शोध और हों। पर्यावरण संरक्षण में संविधान और मीडिया की सतर्कता बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हमारा साहित्य प्रेम और प्रकृति सौन्दर्य से भरा पड़ा है।

    यह बात प्रख्यात वरिष्ठ साहित्यकार एवं मध्यप्रदेश शासन के सेवानिवृत अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव (आईएएस) ने की। वे ‘साझा संसार’ नीदरलैंड्स की पहल पर 'साहित्य में पर्यावरण का वैज्ञानिक अध्ययन' शोध ग्रंथ पर आयोजित विमर्श के दौरान बोल रहे थे। ऑनलाइन हुए इस आयोजन में विशिष्ट वक्ता कवि, आलोचक और इग्नू (दिल्ली) के अन्तर्राष्ट्रीय विभाग के निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, कनाडा से डॉ. शैलजा सक्सेना, यूएई से डॉ. आरती लोकेश और स्पेन से पूजा अनिल रहे। सभी ने पुस्तक विमर्श में विचार व्यक्त किए। संचालन नीदरलैंड्स से शगुन शर्मा व तकनीकी संचालन राजेंद्र शर्मा ने किया। 

    पुस्तक में उल्लिखित पुष्टिमार्ग की चर्चा करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस श्रीवास्तव ने कहा कि मीरा गौतम की आधुनिकता इसमें है कि वे पुष्टि से पोषण का, धरती से पोषण का अर्थ समझाती हैं। वह सही निष्कर्ष निकालती हैं। भारतीय संस्कृति में श्रीकृष्ण पर्यावरण के सबसे बड़े संरक्षक कहे जा सकते हैं। श्रीवास्तव के मतानुसार आधुनिक तकनीकी को पर्यावरण से माफी माँगनी चाहिए।

    पुरातन में नवीनतम का समावेश

    इग्नू दिल्ली से आए जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरण विमर्श, जीवन विमर्श है। पर्यावरण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। किसान चेतना की समझ से पर्यावरण की चिंता जागेगी। यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए सैकडों दरवाजे खोलती है। डॉ. शैलजा सक्सेना ने कहा कि साहित्य ने मनुष्य को अधिक संवेदना दी है। मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य पूर्वक रहे अन्यथा समस्याएँ बनी रहेंगी। पुस्तक प्रस्थान बिंदु है। मीरा गौतम ने मशाल जलाई है। पूजा अनिल ने कहा कि यह पुस्तक पुरातन से नवीनतम का समावेश है। साहित्य ने मानव जीवन को सदा समृद्ध ही किया है।

    अभीष्ट से अनिष्ट की व्याख्या करते श्लोक

    डॉ. आरती लोकेश ने कहा कि मीरा गौतम ने भगवद्गीता के श्लोकों में पर्यावरण को टटोला है। वे अभीष्ट से अनिष्ट को व्याख्यायित करती हैं। पुस्तक इस मिथ को तोड़ रही है कि प्रकृति ही पर्यावरण है। संयोजक रामा तक्षक ने कहा कि पर्यावरण की महत्ता एक छोटी सी वैदिक बात से समझ आती है कि खुरपी से हटाई गई मिट्टी को पुनः वापस वहीं डालना, पर्यावरण के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जागरूकता का सबसे अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अनपढ़ और पढ़े लिखे सब पर्यावरण की अनदेखी करते हैं। धन नया धर्म बन गया है। धन के लिए मानव अपने आत्मीय सम्बंध, अपना जीवन, आर्थिक विकास के पीछे, धन के आगे नतमस्तक रहता है। ऐसे में हम अपना सब, पूरी विरासत बलिदान करने के लिए राजी है।

    भारत सरकार की एक विज्ञप्ति से हुई शुरुआत 

    मीरा गौतम ने बताया कि इस शोध की शुरुआत भारत सरकार की एक विज्ञप्ति ने की। सामान्यतः ऐसे शोध अंग्रेजी में ही होते रहे हैं। मेरा प्रयास था कि इस शोध को हिंदी भाषा में लिखकर, हिंदी की क्षमताओं को सामने लाऊँ। ज्ञात रहे कि शोध योजना के लिए, 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार 'अब (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और 'अखिल भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद' ने मिलकर मीरा गौतम का चयन किया था।

    मिल चुका है कृति कुसुम पुरस्कार-2024

    इस शोध ग्रंथ को हाल ही में मध्य प्रदेश शासन तथा शासकीय इंदौर संभाग पुस्तकालय संघ इंदौर द्वारा प्रतिष्ठित 'कृति कुसुम पुरस्कार-2024' मिला है। ग्रंथ को विश्व प्रसिद्ध प्रकाशन संस्थान आईसेक्ट पब्लिकेशन, भोपाल ने प्रकाशित किया है। आयोजन में गुजरात से प्रबोध पारीख, सूरीनाम से सान्द्रा लुटावन, ऑस्ट्रेलिया से निर्मल जसवाल आदि विद्वानों ने भाग लिया।

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    Tue, 21 May 2024 09:57:51 +0530 Niraj Kumar Shukla
    युगांत : पद्मश्री से अलंकृत प्रख्यात कथाकार मालती जोशी का निधन, मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव, IIMC के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने दी श्रद्धांजलि https://acntimes.com/Renowned-story-writer-Padmashree-Malti-Joshi-passes-away https://acntimes.com/Renowned-story-writer-Padmashree-Malti-Joshi-passes-away एसीएन टाइम्स @ भोपाल । पद्मश्री से अलंकृत लोकप्रिय कथाकार मालती जोशी का 15 मई की रात करीब नौ बजे दिल्ली में निधन हो गया। वे 90 वर्ष की थीं। वे विगत दिसंबर से कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने पूरी जीवट के साथ इसका सामना किया। इसी दौरान उन्होंने पाठकों के लिए अंतिम बार कथा कथन भी किया।

    पद्मश्री जोशी के अंतिम समय में उनके दोनों पुत्र ऋषिकेश और सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र) तथा पुत्र वधुएं अर्चना और मालविका उनके पास थे। मूलतः भोपाल निवासी मालती जोशी को मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

    प्रो. द्विवेदी ने कहा कि पचास से अधिक हिन्दी और मराठी कथा संग्रहों की लेखिका मालती जोशी, शिवानी के बाद हिन्दी की सबसे लोकप्रिय कथाकार मानी जाती हैं। वे अपने कथा कथन की विशिष्ट शैली के लिए जानी जाती थीं। उनके साहित्य पर देश के कई विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हुए हैं। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि उनके कथा संसार से भारतीय परिवारों, रिश्तों और मूल्यबोध की गहरी संवेदना पैदा होती है। जोशी को 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।

    विशिष्ट पहचान बनाई थी

    मप्र साहित्य अकादमी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हिंदी और मराठी की प्रख्यात कथाकार मालती जोशी हमारे बीच नहीं रहीं। पद्मश्री से अलंकृत और साठ से अधिक कथा संग्रहों की लेखिका ने अपनी विशिष्ट लेखन और वाचन शैली से अलग पहचान बनाई थी।

    पद्मश्री मालती जोशी संक्षिप्त परिचय

    मालती जोशी का जन्म 4 जून 1934 को औरंगाबाद में हुआ था। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से वर्ष 1956 में हिन्दी विषय से एम.ए. की शिक्षा ग्रहण की। अब तक अनगिनत कहानियां, बाल कथाएं व उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय व विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी किया जा चुका है। कई कहानियों का रंगमंचन रेडियो व दूरदर्शन पर नाट्य रूपान्तर भी प्रस्तुत किया जा चुका है। कुछ पर जया बच्चन द्वारा दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक ‘सात फेरे’ का निर्माण किया गया था। कुछ कहानियां गुलजार के दूरदर्शन धारावाहिक ‘किरदार’ और ‘भावना’ में शामिल की गईं थी। मालती जोशी को हिन्दी व मराठी की विभिन्न व साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत किया गया। मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा वर्ष 1998 के ‘भवभूति अलंकरण सम्मान’ से भी विभूषित की गईं थीं।

    कहनी संग्रह

    1- मध्यांतर (1977), 2- पटाक्षेप (1978), 3- पराजय (1979), 4- एक घर सपनों का (1985), 5- विश्वास गाथा,  6- शापित शैशव तथा अन्य कहानियाँ (1996), 7- पिया पीर न जानी (1999) 8- औरत एक रात है (2001), 9- रहिमन धागा प्रेम का, 10- परख, 11- वो तेरा घर ये मेरा घर, 12- मिलियन डॉलर नोट तथा अन्य कहानियाँ, 13- ऑनर किलिंग और अन्य कहानियाँ, 14- स्नेह बंध तथा अन्य कहानियाँ।

    (परिचय विकिपीडिया से साभार)

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    Thu, 16 May 2024 14:32:15 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रंगकर्म की पाठशाला : ‘युगबोध’ के ग्रीष्मकालीन बालनाट्य शिविर में रंगकर्म के गुर सीख रहे 6 से 14 वर्ष के बाल कलाकार https://acntimes.com/Children-learning-the-tricks-of-theater-in-the-summer-childrens-drama-camp-of-Yugbodh https://acntimes.com/Children-learning-the-tricks-of-theater-in-the-summer-childrens-drama-camp-of-Yugbodh एसीएन टाइम्स @ रतलाम । बाल कलाकारों में रंगकर्म की चेतना जागृत करने और उनकी रचनात्मकता को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘युगबोध’ नाटक संस्था द्वारा ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन सुबह 9.00 से 11:00 बजे तक माणक चौक स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल पर नन्हें बच्चों को रंगकर्म से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

    युगबोध के अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्रा ने बताया कि युगबोध द्वारा वर्ष 2009 से प्रतिवर्ष 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क ग्रीष्मकालीन बालनाट्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना काल को छोड़कर प्रतिवर्ष यह शिविर आयोजित किया जाता रहा है। इस वर्ष शिविर में 20 से अधिक बच्चों को रंगकर्म की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। अभिनय क्षमता,  कला कौशल, मंच प्रस्तुतिकरण एवं संवाद अदायगी से संबंधित विभिन्न कलाओं को शिविर में बताया जा कर बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

    दशोत्तर द्वारा लिखित नाटक हो रहे तैयार

    नाट्य शिविर के दौरान आशीष दशोत्तर द्वारा लिखित दो नाटक तैयार किए जा रहे हैं। मोबाइल की बढ़ती आदत को केंद्रित रखकर लिखा गया नाटक 'मुन्ना मोबाइल' तथा समारोह एवं उत्सव में अन्न की बर्बादी तथा आवश्यकता से अधिक सामग्री परोसने पर केंद्रित नाटक 'समझो मेरे यार' प्रशिक्षण के दौरान तैयार कराए जा रहे हैं। प्रशिक्षण शिविर के समापन पर इन नाटकों का मंचन किया जाएगा। मिश्रा ने बताया कि बाल कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए शहर के सुधिजन, साहित्यकारों और रंगकर्मियों का स्नेह भी प्राप्त हो रहा है।

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    Thu, 16 May 2024 12:39:04 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रवींद्रनाथ टैगोर जयंती (7 मई) पर विशेष : रवींद्रनाथ टैगोर : जन&गण&मन का भोर& अज़हर हाशमी https://acntimes.com/Special-on-Rabindranath-Tagore-Jayanti-7-May https://acntimes.com/Special-on-Rabindranath-Tagore-Jayanti-7-May रवींद्रनाथ टैगोर : जन-गण-मन का भोर

    हमारे राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के

    रचयिता थे रवींद्रनाथ टैगोर

    अपनी साहित्यिक काव्यकृति 'गीताजंलि' पर

    मिला था उन्हें सन् 1913 में

    विश्व प्रसिद्ध 'नोबल पुरस्कार'

    जिससे दुनिया में हुई थी भारत की जय-जयकार

    मान्य हुआ था देश का रचनात्मक-संस्कार

     ***

    7 मई 1861 को बंगाल के कलकत्ता में

    जन्में थे देवेंद्र-शारदा के यहां रवींद्रनाथ टैगोर

    वे थे ऐसी बहुमुखी प्रतिभा

    जिसका 'न-ओर था- न छोर'

    रवींद्रनाथ का कृतित्व था समुद-सा

    जिसमें मिल जाती हैं सृजन की समस्त सरिताएं

    यानी कला-संगीत-रंगकर्म-कविताएं

    *** 

    रवींद्रनाथ टैगोर थे चित्रकार भी

    उन्होंने तूलिका और रंग से उकेरे थे चित्र

    प्रकृति-पर्वत-बादल-संशय-मोह के

    उनकी प्रमुख कृतियां हैं 'चोखेरवाली', 'गोरा', 'घर-बहिरे'

    वैज्ञानिक आइंस्टीन से हुई थी उनकी ऐतिहासिक वार्ता

    मानवतावाद ही टैगोर की दृष्टि में था दिन-रैन

    'शांति निकेतन' है शिक्षा में उनकी अनुपम देन 

    -अज़हर हाशमी

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    Tue, 07 May 2024 22:36:42 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रेम के पौधे को पल्लवित करता है साहित्य, प्रेम व भाईचारे का संदेश देने वाला साहित्य हमेशा याद रखा जाता है& यूसुफ जावेदी https://acntimes.com/Literature-makes-the-plant-of-love-flourish-yusuf-javedi https://acntimes.com/Literature-makes-the-plant-of-love-flourish-yusuf-javedi जनवादी लेखक संघ द्वारा एकल काव्य पाठ आयोजित

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य सदैव प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। वह कभी मनुष्य के बीच भेद नहीं करता। प्रकृति और मनुष्य के संबंधों में भी भेद नहीं करता। उसका प्रेम सभी के प्रति एक सा होता है। जो साहित्य प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है, वही सदैव याद रखा जाता है। 

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित एकल काव्य पाठ आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार यूसुफ़ जावेदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मोहब्बत के पौधे को पनपने दीजिए। अपनी रचनाओं के ज़रिए इसी आपसी सद्भाव को बढ़ाने का संदेश दीजिए। उन्होंने एकल काव्य पाठ में कवि हीरालाल खराड़ी द्वारा प्रस्तुत कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि ये कविताएं प्रकृति और मनुष्य के संबंधों, किसानों की पीड़ा को अभिव्यक्त करती हैं। कविता में अनावश्यक विस्तार नहीं होना चाहिए। अधिक विस्तार होने से कविता अपनी बात नहीं कह पाती है। कविता अपना परिचय स्वयं देती है। उसे किसी भूमिका की आवश्यकता नहीं होती।

    काव्यपाठ किया

    कवि हीरालाल खराड़ी ने इस अवसर पर 'पीपल और गांव',  'किसानों की व्यथा', 'शहीद की मां' एवं अन्य कविताओं का पाठ किया। जनवादी लेखक संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने रतलाम के साहित्य और संस्कृति पर आलेख वाचन करते हुए कहा कि रतलाम का साहित्य बहुत समृद्ध रहा है। देश में यहां के साहित्य की अलग पहचान रही है। नई पीढ़ी को रतलाम की इस पहचान को कायम भी रखना है और आगे भी बढ़ाना है।

    प्रेरणा सम्मान के लिए आशीष दशोत्तर का किया सम्मान

    इस अवसर पर आशीष दशोत्तर, जितेंद्र सिंह पथिक, यूसुफ़ जावेदी, गीता राठौर ने भी कविता पाठ किया। दशोत्तर का प्रेरणा सम्मान प्राप्त करने पर अभिनंदन किया गया। इसके उपरांत आयोजित विचार गोष्ठी में मांगीलाल नगावत, कीर्ति शर्मा, जयंत गुप्ता एवं उपस्थित साथियों ने सहभागिता की।

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    Mon, 06 May 2024 20:44:26 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अपने समय को समृद्ध करती है 'सुनें सुनाएं' की रचनात्मकता, बीसवें सोपान में 7 वर्ष की दिव्यांशी से लेकर 93 वर्षीय दिवे तक ने पढ़ी रचना, देखें वीडियो... https://acntimes.com/20th-phase-of-Sunen-Sunane-concluded https://acntimes.com/20th-phase-of-Sunen-Sunane-concluded एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रत्येक पीढ़ी के अपने अनुभव, अपने संस्कार और अपने विचार होते हैं। सभी पीढ़ियां एक साथ बैठती हैं तो वह समय समृद्ध होता है, शहर समृद्ध होता है। ऐसा ही सुखद संयोग आज उपस्थित हुआ है जहां हर आयु वर्ग के रचनाप्रेमियों से यह आयोजन समृद्ध हो रहा है।

    उक्त विचार शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए 'सुनें सुनाएं 'आयोजन के बीसवें सोपान में उभर कर सामने आए। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर आयोजित कार्यक्रम में इस बार उम्रदराज रचना प्रेमी से लेकर आने वाली पीढ़ी के रचनाप्रेमियों ने भी अपनी प्रिय रचनाएं प्रस्तुत की। निर्धारित समय पर शुरू होकर नियत समय पर संपन्न होने वाले इस अनूठे आयोजन में इस बार नन्हीं दिव्यांशी दीक्षित ने माखनलाल चतुर्वेदी की रचना 'पुष्प की अभिलाषा' का पाठ किया। 93 वर्षीय श्रीराम दिवे ने अटल बिहारी वाजपेयी की रचना 'है अमिट सामर्थ्य मुझमें' का पाठ कर आयोजन को जीवंत कर दिया।

    मयूर व्यास ने धर्मेन्द्र सोलंकी की रचना 'बहना मैके आना तुम' का पाठ, मणिलाल पोरवाल ने पंडित प्रदीप की रचना 'टूट गई है माला' का पाठ, ललित चौरड़िया ने रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी 'तोता' का पाठ, नरेन्द्रसिंह डोडिया ने 'तुम मुझको कब तक रोकोगे' का पाठ, नरेन्द्र त्रिवेदी ने प्रदीप चौबे की रचना 'शवयात्रा' का पाठ, सांत्वना शुक्ला ने डॉ. हरिवंशराय 'बच्चन' की रचना 'जीवन की आपाधापी में' का पाठ किया। अलक्षेन्द्र व्यास ने डॉ. कुंवर बेचैन की रचना 'चांदनी चार क़दम धूप चली मीलों तक' का पाठ तथा रीता दीक्षित ने शरद जोशी की व्यंग्य रचना 'जीप पर सवार इल्लियां' का पाठ किया गया।

    इनकी उपस्थिति रही

    'सुनें सुनाएं' की रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए आयोजन में इन्दु सिन्हा, गजेंद्रसिंह चौहान, दिनेश जोशी, आई. एल. पुरोहित, सुरेंद्र छाजेड़, पद्माकर पागे, अशोक दीक्षित, जी. एस. खींची, सिद्दीक़ रतलामी, अनीता दासानी ‘अदा’, ट्विंकल पंवार, माणिक व्यास, आशा श्रीवास्तव, रजनी व्यास, हरेन्द्र कोठारी, डॉ एन. के. शाह, सरिता दशोत्तर, नीरज कुमार शुक्ला, श्याम सुंदर भाटी, जगदीश सोनी, सत्यनारायण सोढ़ा, विष्णु बैरागी, आशीष दशोत्तर की मौजूदगी रही।

    प्रत्यक्ष सुनने की ऐसे करें अनुभूति

    #सुनें_सुनाएं के 20वें सोपान पर सुनाई गई रचनाओं को सुनने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें। ऐसी ही रचनात्मकता से अपडेट रहने के लिए आप #विष्णु_बैरागी के यू-ट्यूब चैनल #बैरागी_की_बातें को सब्सक्राइब भी कर लें।

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    Mon, 06 May 2024 11:17:37 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कला&साहित्य : बुजुर्ग से ले कर नौनिहाल रचनाप्रेमी 5 मई को सुनें&सुनाएं के 20वें सोपान में पढ़ेंगे अपनी प्रिय रचना https://acntimes.com/20th-episode-of-Sunen-Sunane-on-5th-May https://acntimes.com/20th-episode-of-Sunen-Sunane-on-5th-May एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया 'सुनें सुनाएं' आयोजन का बीसवां सोपान 5 मई (रविवार) को होगा। आयोजन नियत समय सुबह 11:00 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर शुरू हो जाएगा। इस बार बुजुर्ग रचनाप्रेमी भी होंगे और नौनिहाल रचनाप्रेमी भी। ये अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाएं प्रस्तुत कर अपने शहर के साहित्यिक वातावरण को नई दिशा देंगे।

    आयोजन में नन्ही दिव्यांशी दीक्षित द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी की रचना 'पुष्प की अभिलाषा' का पाठ किया जाएगा। श्रीराम दिवे द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की रचना 'है अमिट सामर्थ्य मुझमें' का पाठ, मयूर व्यास द्वारा धर्मेन्द्र सोलंकी की रचना 'बहना मैके आना तुम' का पाठ, मणिलाल पोरवाल द्वारा पंडित प्रदीप की रचना 'टूट गई है माला' का पाठ किया जाएगा।

    ललित चौरड़िया द्वारा रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी 'तोता' का पाठ, नरेन्द्रसिंह डोडिया द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'तुम मुझको कब तक रोकोगे', नरेन्द्र त्रिवेदी द्वारा प्रदीप चौबे की रचना 'शवयात्रा', सांत्वना शुक्ला द्वारा डॉ. हरिवंशराय 'बच्चन' की रचना 'जीवन की आपाधापी में', अलक्षेन्द्र व्यास द्वारा डॉ. कुंवर बेचैन की रचना 'चांदनी चार क़दम धूप चली मीलों तक' का पाठ किया जाएगा। रीता दीक्षित द्वारा शरद जोशी की व्यंग्य रचना 'जीप पर सवार इल्लियां' का पाठ किया जाएगा। 'सुनें सुनाएं ने शहर के रचनात्मक लोगों से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Fri, 03 May 2024 09:42:08 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सैल्यूट रतलाम : मेहनत और लगन से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है, सफलता सभी को मिलना निश्चित है& सीए चपलोत https://acntimes.com/Anunaad-honored-more-than-150-talents-of-Ratlam-city https://acntimes.com/Anunaad-honored-more-than-150-talents-of-Ratlam-city  'अनुनाद' ने किया शहर की 150 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मेहनत और लगन से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है। विद्यार्थी के मन में अपने लक्ष्य को लेकर निर्धारित मापदंड होना चाहिए और उस लक्ष्य को पाने की ललक। सफलता सभी को मिलना निश्चित है।

    उक्त विचार वरिष्ठ कर सलाहकार एस. एल. चपलोत ने 'अनुनाद' संस्था द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह "सैल्यूट रतलाम" में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। विशेष अतिथि शिक्षाविद् ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बच्चों को आगे बढ़ना है तो उसे बढ़ाने दें। माता-पिता विद्यार्थी पर किसी तरह का दबाव न डालें। उनकी नैसर्गिक प्रतिभा को सामने लाने की कोशिश करें। इससे वे अधिक सशक्त और सफल होंगे।

    प्रतिभाओं का सम्मान हमारी परंपरा- सुरेका

    सुरेंद्र सुरेका ने इस अवसर पर कहा कि प्रतिभाओं का सम्मान हमारी परंपरा है। हम जीवन में अपने संस्कारों से भी जुड़ें और अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। गुमानमल नाहर ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। प्रतिभा सम्मान समारोह को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष अजीत जैन, सचिव दिलीप व्यास, सदस्य डॉ. एस. एन. पड़ियार, रमन हरोड़, रिदम मिश्रा, राजेश पंडित ने अतिथियों का स्वागत किया।

    150 से अधिक प्रतिभाएं सम्मानित

    सम्मान समारोह में खेल, संगीत एवं शिक्षा जगत की 150 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। खेल जगत में अपना नाम रोशन करने वाले पैरा ओलम्पिक गोल्ड मेडल विजेता अब्दुल कादिर, क्रिकेटर आशुतोष शर्मा के माता-पिता,  एथलीट कृतज्ञा शर्मा, बास्केटबॉल खिलाड़ी हनुवीर शर्मा, राज्य स्तरीय वेस्टर्न सिंगिंग कंपिटीशन की विजेता राधिका व्यास, स्वीमर अयांश सोनी सहित शहर का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों, राष्ट्रीय स्तर पर तबला वादन में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले कलाकारों एवं वार्षिक परीक्षा में उच्चांक लाने वाले विद्यार्थियों को संस्था द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं मैडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार प्रदर्शन संस्था सचिव दिलीप व्यास ने किया। विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक एवं शहर के गणमान्य जन उपस्थित थे।

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    Fri, 03 May 2024 00:47:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    विश्व पुस्तक दिवस आज : ‘सहेजें पुस्तकों को नित खंगालें...’ और ‘पुस्तक के बन जाइए अब तो सच्चे मित्र...’ https://acntimes.com/Know-the-importance-of-books-on-World-Book-Day https://acntimes.com/Know-the-importance-of-books-on-World-Book-Day सहेजें पुस्तकों को, नित खंगालें !

    समय पढ़ने का थोड़ा-सा निकालें !

    सहेजें पुस्तकों को नित खंगालें !

    छिपा जीवन का दर्शन पुस्तकों में

    भ्रमर-गीतों का गुंजन पुस्तकों में

    निहित शब्दों का अर्चन पुस्तकों में

    महकता मोक्ष-चिंतन पुस्तकों में

    सभी सद्ग्रंथों को मन में बसालें!

    सहेजें पुस्तकों को नित खंगालें !

     

    है पुस्तक मार्गदर्शक, मीत भी है

    अशुभ पर, इसमें शुभ की जीत भी है

    नवीन अवधारणा है, रीत भी है

    यूं पुस्तक ताल-लय-संगीत भी है

    सुनें पुस्तक की लय, मन में रमालें!

    सहेजें पुस्तकों को नित खंगालें !

    कला-संस्कार का भंडार पुस्तक

    यानी विज्ञान का व्यवहार पुस्तक

    धरम-अध्यात्म का संसार पुस्तक

    सदा सद्ज्ञान का त्योहार पुस्तक

    पढ़ें हम पुस्तकों को शिक्षा पालें!

    सहेजें पुस्तकों को नित खंगालें !

     

    अज़हर हाशमी

    (कवि, साहित्यकार, समालोचक) 

     ---*---*---*---

    पुस्तक के बन जाइए, अब तो सच्चे मित्र

    पुस्तक इक विश्वास है, पुस्तक है इक आस,

    जा कर थोड़ा देखिए, अब पुस्तक के पास।

     

    पुस्तक शीतल छंद है, पुस्तक मंद समीर,

    पुस्तक ही है ज्ञान की, इक ऊंची प्राचीर।

     

    मोबाइल के ज्ञान से मत पुस्तक को आंक,

    पुस्तक कोई खोल के तू उसमें भी झांक।

     

    जिसके हाथों को रहा, पुस्तक का अभ्यास,

    उसके हाथों में रहा, एक नया विश्वास।

     

    ऑनलाइन पढ़ते रहो, चाहे तुम दिन-रात,

    इक पुस्तक के आएंगे, उसमें क्या जज़्बात?

     

    पुस्तक घर में है जहां, वह घर लगे पवित्र,

    पुस्तक के बन जाइए, अब तो सच्चे मित्र।

     

    पुस्तक दे शुभकामना, पुस्तक दे आशीष,

    पुस्तक को ही मानिए, अब तुम अपना ईश।

     

    आशीष दशोत्तर

    (युवा साहित्यकार, कवि, शिक्षक)

     ---*---*---*---

    पुस्तक (किताब) की महिमा इनकी नज़र में

    महात्मा गांधी

    नौ रत्नों से बढ़कर, किताब अनमोल रत्न है, जिसकी कोई कीमत नहीं है।

    लोकमान्य बालगंगाधर तिलक

    किताबों में वह शक्ति होती है, जो किसी नरक को स्वर्ग बना देती है।

    अब्राहम लिंकन

    मैं यही कहूंगा कि, वही मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, जो मुझे ऐसी किताब दे जो आ तक मैंने न पढ़ी हो।

    बर्नाड शॉ

    विचारों के युद्ध में किताबें ही अस्त्र होती हैं।

    टालस्टाय

    एक बुरी किताब पढ़ना, जहर पीने के समान होता है।


    विलियम फेदर

    किताबें आपके दिमाग को खोलती हैं, आपकी सोच को बड़ा करती हैं और आपको मजबूत बनाती हैं। ऐसा और कोई नहीं कर सकता।

    जे. के. रोलिंग

    मुझे इस बात पर पूरा विश्वास है कि जब भी आप कोई अच्ची किताब पढ़ते हैं, तो कोई न कोई मैजिक होता है।

    चार्लिन हैरिस

    किताबें, सबसे सस्ती छुट्टियां हैं, जिसे आप खरीद सकते हैं।

    जेरेमी कोलियर

    किताबें एकांत में हमारा साथ देती हैं और हमें खुद पर बोझ बनने से बचाती हैं।

    हॉर्पर ली

    किताबें वे नहीं होती, जो आप सोचते हैं बल्कि किताबें आपको सोचने पर मजबूर करती हैं।

    अन्ना क्विन्डलेन

    किताबें विमान हैं, ट्रेन हैं और सड़कें हैं। ये मंजिल है, और यात्रा भी। ये घर हैं।

    जेन ऑस्ट्रेन

    वह किताब छोटी लगने लगती है, जो अच्छी लिखी गई है।

    हरुकी मुराकामी

    अगर आप सिर्फ वही किताबें पढ़ते हैं जो बाकी सभी पढ़ रहे हैं, तो आप वही सोच पाएंगे जो बाकी सभी सोच रहे हैं।

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    Tue, 23 Apr 2024 13:11:17 +0530 Niraj Kumar Shukla
    शब्दों की तपिश ही ज़िन्दा रखती है तहरीर को, रचनाकार समय पर अपनी नजर रखें रचना में आदमी का दुःख&दर्द शामिल करें& नवीन ‘पंछी’ https://acntimes.com/Seminar-organized-by-Janwadi-Writers-Association-Ashish-Dashottaras-book-released https://acntimes.com/Seminar-organized-by-Janwadi-Writers-Association-Ashish-Dashottaras-book-released जनवादी लेखक संघ के आयोजन में आशीष दशोत्तर के ग़ज़ल संग्रह का विमोचन हुआ

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शब्दों की तपिश ही किसी भी तहरीर को कायम रखती है। शब्द ही अपने अर्थों द्वारा आने वाले समय में किसी रचना को महत्वपूर्ण बनाए रखते हैं। यह एक रचनाकार की अनिवार्यता है कि वह समय पर अपनी नज़र रखे और उन विषयों को अपनी रचनाओं में शामिल करें जिनसे आम आदमी का दुःख दर्द जुड़ा है। ऐसी रचनाएं ही सदैव याद की जाती हैं।

    उक्त विचार जोधपुर राजस्थान से आए वरिष्ठ कवि नवीन 'पंछी' ने जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि रचनाकारों का एक साथ मिलना और वर्तमान परिपेक्ष्य में सार्थक विचार विमर्श करना बहुत ज़रूरी है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ करते हुए कहा 'इन्सान होने की ललक ही, ख़त्म हो गई भेड़ों की/समझ आ गया कि उन जैसा है वह भी/बदन पर ऊन होना जरूरी नहीं।'

    रचनाकार को ऊर्जा प्रदान करती है रतलाम की तासीर- संजयसिंह राठौर

    विशेष अतिथि भोपाल से आए रचनाकार संजय सिंह राठौर ने कहा कि रतलाम की तासीर ही प्रत्येक रचनाकार को ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने अपने रतलाम में बिताए दिनों का ज़िक्र करते हुए वर्तमान संदर्भ में हो रहे साहित्यिक आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। राठौर ने 'बोनसाई' सहित अपनी कई कविताओं का पाठ किया।

    हर रचनाकार के भीतर जीवित होता है कवि- राजेंद्र व्यास

    इंदौर से रंगकर्मी राजेंद्र व्यास ने कहा कि प्रत्येक रचनाकार के भीतर एक कवि जीवित होता है। वह सदैव बाहर आने की कोशिश करता है। कुछ लोग होते हैं जो उसे पूरी स्वच्छंदता के साथ बाहर आने देते हैं। यही रचनाएं पूरे समाज का मार्गदर्शन करती है।

    प्रो. चौहान ने चंद्रबली सिंह की अनुवादित रचनाओं का किया पाठ

    अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि यह समय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। आज देश सुप्रसिद्ध अनुवादक एवं समीक्षक प्रो. चंद्रबली सिंह की जन्मशती मना रहा है। उन्होंने इस अवसर पर चंद्रबली सिंह की कुछ अनुवादित रचनाओं का पाठ भी किया ।

    इन्होंने किया रचनाओं का पाठ

    कवि जितेंद्र सिंह 'पथिक' ने तिनका, अच्छे दिनों की आस, आदमी के भीतर का आदमी एवं अन्य कविताओं का पाठ किया। यूसुफ जावेदी ने अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए वर्तमान संदर्भों का ज़िक्र किया। पद्माकर पागे, सिद्दीक़ रतलामी, आशीष दशोत्तर ने अपनी कविता तथा रणजीत सिंह राठौर ने पथिक की कविताओं पर अपना आलेख प्रस्तुत किया।

    'सोहबतें' अपनी बनी रहें

    इस अवसर पर युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर के तीसरे ग़ज़ल संग्रह 'सोहबतें' का अतिथियों ने विमोचन किया। इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित इस संग्रह में दशोत्तर की सौ ग़ज़लें शामिल हैं।

    इनकी उपस्थिति रही

    कार्यक्रम में हीरालाल खराड़ी, मांगीलाल नगावत, गीता राठौर, चरणसिंह यादव, कीर्ति शर्मा सहित साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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    Mon, 22 Apr 2024 22:44:11 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य जगत : अंतरराष्ट्रीय लघुकथा अधिवेशन में साहित्यकार डॉ. सुनीता श्रीवास्तव और नारायणी मानवेंद्र माया ‘बधेका’ सम्मानित https://acntimes.com/Writers-Dr-Sunita-Srivastava-and-Narayani-Manvendra-Maya-Badheka-honored https://acntimes.com/Writers-Dr-Sunita-Srivastava-and-Narayani-Manvendra-Maya-Badheka-honored प्रवाह साहित्य मंच द्वारा इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित समारोह में हुआ सम्मान

    एसीएन टाइम्स @ इंदौर । प्रवाह साहित्य मंच द्वारा अंतरराष्ट्रीय लघुकथा अधिवेशन का आयोजन इंदौर प्रेस क्लब में किया गया। इसमें शुभ संकल्प समूह की संपादक डॉ. सुनीता श्रीवास्तव और सह संपादक नारायणी मानवेंद्र माया "बधेका" को उनके साहित्य के क्षेत्र में दिए योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

    अधिवेशन और सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि व्यास सम्मान प्राप्त, साहित्यकार और उपन्यासकार डॉ. शरद पगारे, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक व देवपुत्र बाल पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. विकास दवे, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मीरा जैन रहे। विचार मंच की टीम और सुषमा दुबे द्वारा संयोजित आयोजन में डॉ. सुनीता श्रीवास्तव की स्वरचित कहानियों का मालवा थियेटर द्वारा नाटक के रूप मंचन किया गया। लेखिका नारायणी माया ने अपनी पुस्तक "माया" सभी गणमान्यजनों को भेंट की।

    बता दें कि आयोजन के दौरान सम्मानित होने वाली साहित्यकार डॉ. श्रीवास्तव शुभ संकल्प समूह की प्रधान संपादक ही नहीं अपितु उसकी संस्थापक और निर्देशिका भी हैं। वहीं नारायणी माया वरिष्ठ लोक भाषा साहित्यकार हैं। दोनों ही लंबे समय में साहित्य की सेवा में लगी हुई हैं। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यजगत से जुड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। सभी के प्रति अभार डॉ. अर्पण जैन "अविचल" ने ज्ञापित किया।

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    Wed, 17 Apr 2024 11:23:59 +0530 Niraj Kumar Shukla
    गोष्ठी : युवा कथाकार आशीष दशोत्तर की कहानी ‘नेमप्लेट’ समय के सच को बड़े कैनवास पर लाती है& प्रो. रतन चौहान https://acntimes.com/Seminar-organized-on-the-story-of-young-storyteller-Ashish-Dashottara https://acntimes.com/Seminar-organized-on-the-story-of-young-storyteller-Ashish-Dashottara जनवादी लेखक संघ ने किया गोष्ठी का आयोजन, कथाकार आशीष दशोत्तर ने किया कहानी पाठ

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । युवा कथाकार आशीष दशोत्तर की कहानी समय के सच को बड़े कैनवास पर लाती है। न सिर्फ़ शिक्षा जगत बल्कि समाज के हर क्षेत्र में आज के दौर ने व्यापक परिवर्तन किए हैं। पूंजी का प्रभाव जब से जीवन में शामिल हुआ है, मनुष्य की प्रवृत्तियां बदल गई हैं। इसी प्रवृत्ति को आशीष की कहानी उजागर करती है।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित कथा गोष्ठी में वरिष्ठ अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। कथाकार आशीष दशोत्तर ने गोष्ठी में अपनी लंबी कहानी "नेमप्लेट" का पाठ किया। यह कहानी मनुष्य के पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव के कारण बदलती प्रवृत्तियों को लेकर है। इस कहानी में मुख्य पात्र अपनी नेमप्लेट से इतना प्रभावित होता है कि वह अपने किरदार को भी इसके पीछे रख देता है। अपने घर परिवार को भी अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ता है। इस तरह वह कूपमण्डूक हो जाता है।

    कहानी पर अपनी राय रखते हुए सिद्दीक़ रतलामी ने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में पतन हुआ है। यह कहानी उसी की ओर इशारा करती है। इस कहानी में जो चरित्र उभर कर सामने आए हैं वे सिर्फ़ चरित्र ही नहीं हैं बल्कि उसके ज़रिए कई इशारे भी दिए गए हैं। यह कहानी विसंगतियों के समय में हमारे मूल्यों को स्थापित करने का संदेश देती कहानी है।

    कवि पद्माकर पागे ने कहा कि कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है इसकी रोचकता बढ़ती जाती है। इस कहानी में कहीं भी यह नहीं महसूस होता कि विषय भटक रहा है। कीर्ति शर्मा ने समकालीन कहानीकारों में आशीष दशोत्तर की कहानी को महत्वपूर्ण निरूपित किया। गोष्ठी में जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर, मांगीलाल नगावत, गीता राठौर सहित उपस्थितजनों ने भी अपनी राय व्यक्त की। आभार प्रदर्शन जितेंद्र सिंह ‘पथिक’ ने किया।

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    Tue, 09 Apr 2024 22:57:52 +0530 Niraj Kumar Shukla
    विविधताओं का गुलदस्ता : भरोसा और विनम्रता ही रचते हैं बेहतर संसार,  'सुनें सुनाएं' के उन्नीसवें सोपान में पढ़ी गईं रचनाएं सुनने के लिए यह खबर पढ़ें https://acntimes.com/19th-step-of-Sune-Sunaye-a-bouquet-of-diversity https://acntimes.com/19th-step-of-Sune-Sunaye-a-bouquet-of-diversity एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रचनाओं की विविधता ही बेहतर संसार रचती है। इससे रचनाओं के विविध स्वरूपों के प्रति हमारा रुझान भी अभिव्यक्त होता है। भरोसेमंद मित्र और विनम्रता जीवन में सुखद अहसास करवाते हैं। यह सिलसिला निश्चित रूप से शहर के रचनात्मक वैभव में वृद्धि करेगा।

    उक्त विचार रचनात्मक वातावरण तैयार करने के लिए शहर में प्रति माह होने वाले आयोजन 'सुनें सुनाएं' में व्यक्त किए गए। 'सुनें सुनाएं' के 19 वें सोपान में जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर प्रस्तुत रचनाओं में विविधता का अहसास करवाया। आयोजन में की शुरुआत लगन शर्मा ने चंदन कुमार पांडेय की रचना 'तीन पहर तो बीत गए' के पाठ से की। नंदकिशोर भाटी ने हरिशंकर परसाई के व्यंग्य 'अयोध्या में ख़ाता-बही' का पाठकर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। कविताओं के क्रम में दीपक राजपुरोहित द्वारा 'सिरसा के राम बसे निषाद के मन में' का पाठ तो आशा श्रीवास्तव द्वारा डॉ. प्रकाश निहालानी की रचना 'तेल कम है फिर भी रोशन हैं दिए' का पाठ किया गया।

    योगिता राजपुरोहित ने अब्राहम लिंकन के पत्र 'पुत्र के शिक्षक के नाम'  का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा प्रिय शायरों के 'चंद अशआर' का पाठ किया। नीरज कुमार शुक्ला ने अमृता प्रीतम द्वारा लिखी गई सारा शगुफ्ता की आपबीती ‘पागलख़ाना’ का पाठ कर स्त्री की स्थिति बयान की। ग्यारह वर्षीय जर्मन निवासी नन्हीं आन्या अभिषेक व्यास बहुत प्रभावित करते हुए जर्मनी में कविता पढ़ने के साथ उसका हिन्दी में अनुवाद भी सुनाया। विनीता ओझा ने नरेश मेहता की रचना 'मंत्र-गंध और भाषा' एवं सरिता दशोत्तर ने भगतसिंह की बहन द्वारा लिखी गई 'वसीयत'  के अंश का पाठ किया।

    इन्होंने आयोजन को अपनी उपस्थिति से सार्थक किया

    दिनेश राजपुरोहित, रीता दीक्षित, विनोद झालानी, आई. एल. पुरोहित, ललित चौरड़िया, जितेंद्र सिंह पथिक, मयूर व्यास, नंदकिशोर भाटी, प्रभुराम जरान्ला, राधेश्याम शर्मा, पद्माकर पागे, नरेंद्र त्रिवेदी, अभिषेक व्यास, इन्दु सिन्हा, रक्षम कोठारी, सांत्वना शुक्ला, नीता गुप्ता, रजनी व्यास, ऋतम उपाध्याय, कीर्ति कुमार शर्मा, ओमप्रकाश मिश्रा, मणिलाल पोरवाल, रणजीत सिंह राठौर, किरण जैन, कमलेश बैरागी,  श्रीराम दिवे, सत्यनारायण सोढ़ा, नीलेश कोठारी, जी. एस. खींची, डूंगर सिंह, अभय जैन, गजेंद्र सिंह चौहान, जी. के. शर्मा, विष्णु बैरागी, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

    इस अवसर पर रतलाम से इंदौर निवासी हो रहे वरिष्ठ शिक्षाविद् जी. के. शर्मा को पुष्प गुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दी गईं।

    रचनाएं सुननें के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें

    रचनात्मक अपील

    सुनें सुनाएं के 19वें सोपान में रचनापाठ करने वाले सभी रचनाधर्मियों के वीडियो की लिंक प्रस्तुत हैं। आप खुद भी सुनें और पसंद आएं तो औरों को भी साझा करें। यदि उचित समझें तो कृपया ऐसे ही रचनात्मकता बढ़ाने वाले वीडियो देखने के लिए विष्णु बैरागी के यूट्यूब चैनल 'बैरागी की बातें' @bairagikibaten खुद भी सब्सक्राइब करें और अपने मित्रों से भी सब्सक्राइब करवाएँ।

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    Mon, 08 Apr 2024 14:09:23 +0530 Niraj Kumar Shukla
    आओ कुछ रचनात्मक करें : जहां कोई देरी से नहीं आता, अपनी रचना भी नहीं सुनाता, ऐसा ही है 'सुनें सुनाएं' का मंच जिसका 19वां सोपान 7 अप्रैल को होगा https://acntimes.com/19th-episode-of-Sune-Sunaye-on-7th-April https://acntimes.com/19th-episode-of-Sune-Sunaye-on-7th-April एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जहां कोई देरी से नहीं आता, अपनी रचना भी नहीं पढ़ता, सबको आनंदित हो कर सुनता है और 60 मिनट में अपनी आंतरिक ऊर्जा को 60 गुना अधिक पाता है। ऐसा ही मंच है 'सुनें सुनाएं'। शहर में रचनात्मक वातावरण तैयार करने के लिए डेढ़ बरस से निरंतर जारी इस अनूठे आयोजन में शामिल रचनाप्रेमी अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करते हैं, वह भी बिना किसी भूमिका के।

    'सुनें सुनाएं' का 19वां सोपान 7 अप्रैल (रविवार), 2024 को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल के प्रथम तल पर आयोजित होगा। इस बार रचनाओं में विविधता का अहसास होगा क्योंकि इस आयोजन में अनीस ख़ान द्वारा प्रिय शायरों के 'चंद अशआर' का पाठ किया जाएगा, वहीं लगन शर्मा चंदन कुमार पांडेय की रचना 'तीन पहर तो बीत गए' का पाठ करेंगे। नंदकिशोर भाटी द्वारा हरिशंकर परसाई के व्यंग्य 'अयोध्या में ख़ाता-बही' का पाठ, दीपक राजपुरोहित द्वारा 'सिरसा के राम बसे निषाद के मन में' का पाठ किया जाएगा।

    आशा श्रीवास्तव डॉ. प्रकाश निहलानी की रचना 'तेल कम है फिर भी रोशन हैं दिए', योगिता राजपुरोहित अब्राहम लिंकन का पत्र 'पुत्र के शिक्षक के नाम' पढ़ेंगी तो नीरज कुमार शुक्ला सारा शगुफ़्ता के संस्मरण 'आपबीती' सुनाएंगे। ग्यारह वर्षीय जर्मन निवासी नन्हीं आन्या अभिषेक व्यास द्वारा जर्मनी में कविता पढ़ने के साथ उसका हिन्दी में अनुवाद भी सुनाया जाएगा। विनीता ओझा द्वारा नरेश मेहता की रचना 'मंत्र-गंध और भाषा' एवं सरिता दशोत्तर द्वारा भगतसिंह की बहन द्वारा लिखी गई 'वसीयत' के अंश प्रस्तुत किए जाएंगे। 'सुनें सुनाएं' मंच ने शहर के रचना प्रेमियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Thu, 04 Apr 2024 19:49:27 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक समीक्षा : व्यापक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है 'बातें मेरे हिस्से की'& प्रो. रतन चौहान https://acntimes.com/Baatein-Mere-Khake-Ki-is-a-reflection-of-a-broader-perspective-Prof-Ratan-Chauhan https://acntimes.com/Baatein-Mere-Khake-Ki-is-a-reflection-of-a-broader-perspective-Prof-Ratan-Chauhan प्रो. रतन चौहान

    कवि, कथाकार आशीष दशोत्तर साहित्य की नित नई मंज़िलें तय कर रहे हैं। वे एक बहुआयामी रचनाकार हैं। उनका रचनाकर्म और दृष्टिकोण अत्यंत व्यापक है। साक्षात्कार की अपनी नई पुस्तक 'बातें मेरे हिस्से की' में उनके इसी व्यापक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब मिलता है।

    आशीष कवि, कथाकार तो हैं ही, वे एक सजग पत्रकार भी हैं। अपनी पुस्तक में उन्होंने उनके द्वारा लिए गए समकालीन हिंदी कविता के दिग्गज रचनाकारों, समीक्षकों, फिल्मकारों और समय की नब्ज़ पहचानती शख़्सियतों से संवाद किया है। सुप्रसिद्ध कवि विष्णु खरे, चंद्रकांत देवताले, भगवत रावत, देवव्रत जोशी का इस पुस्तक में न केवल एक अंतरंग चित्र मिलता है अपितु बलराम गुमास्ता और विजय वाते जैसे समृद्ध रचनाकारों के रचनाकर्म में समय की पदचाप किस तरह सुनाई देती है, यह भी झलक मिलती है।

    पुस्तक राष्ट्रीय ख्याति के चित्रकार कलागुरु विष्णु चिंचालकर के संवाद से प्रारंभ होकर चित्रकला में नए आयाम उद्घाटित करने वाले चित्रकार महावीर वर्मा के सटीक चित्रण के साथ नई उम्मीदें जगाते हुए ख़त्म होती है। ऐतिहासिक वृतांतों को साहित्य के फलक़ पर ख़ूबसूरती से उद्घाटित करने वाले उपन्यासकार डॉ. शरद पगारे और समीक्षा, काव्य और भाषा के सभी पक्षों पर साधिकार बात करने और लिखने वाले यशस्वी साहित्यकार एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार 'जलज' के साहित्य अनुराग पर भी यह पुस्तक रोशनी डालती है। अपनी कलम की ताक़त से समाज के दोषों को अनावृत्त करने वाले, भारतीय सभ्यता और संस्कृति के यथार्थ पक्षधर रहे जनसत्ता के तत्कालीन संपादक प्रभाष जोशी का भी यह पुस्तक प्रभावी चित्र खींचती है।

    आशीष दशोत्तर न केवल साहित्य एवं संस्कृतिकर्मियों तथा चित्रकारों का एक परिष्कृत एवं निर्भीक पत्रकार के रूप में साक्षात्कार लेते हैं अपितु राष्ट्रीय ख्याति के फिल्मकार रामानंद सागर से भी अंतरंग बातचीत करते हैं। दिग्गज समीक्षक डॉ. मुरली मनोहर प्रसाद सिंह से भी आत्मीय बातचीत करते हैं। वे दृश्य माध्यम के नवीन एवं प्रतिबद्ध पक्षों को उद्घाटित करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मांगीलाल यादव का साक्षात्कार भी इस पुस्तक में साहित्य के महत्वपूर्ण युग की बानगी प्रस्तुत करता है। साहित्य, कला, संस्कृति अधूरी है, यदि वह मनुष्यता एवं सामाजिक निष्ठा के मूल्यों से रहित है।

    'बातें मेरे हिस्से की' इस दृष्टि से मनुष्यता की पक्षधर तथा बहुत कम स्थान में बहुत कुछ कहती पुस्तक प्रतीत होती है। इस पुस्तक में समाहित साक्षात्कार सिर्फ़ साक्षात्कार नहीं वरन आत्मीय संवाद और संस्मरण भी हैं, जो साहित्य की समृद्ध विरासत को सहेजने की आकांक्षा रखते वर्तमान के लिए महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक की आमद इस समय ज़रूरी भी थी। सचमुच आशीष दशोत्तर बधाई के पात्र हैं।

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    पुस्तक

    'बातें मेरे हिस्से की'

    लेखक

    आशीष दशोत्तर

    मूल्य

    150/-

    प्रकाशक

    बोधि प्रकाशन, जयपुर

    (समीक्षक प्रो. रतन चौहान स्वयं बड़े साहित्यकार और अनुवादक होने के साथ ही अच्छे कवि हैं)

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    Sat, 23 Mar 2024 21:03:22 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें सुनाएं' का 18वां सोपान आज, गीत, ग़ज़ल, कविता और लघुकथा का पाठ होगा, जानिए& कौन किसकी रचना का करेगा पाठ https://acntimes.com/18th-step-of-Sunen-Sunane-today https://acntimes.com/18th-step-of-Sunen-Sunane-today एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से विगत डेढ़ वर्ष से ‘सुनें सुनाएं’ कै आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का 18वां सोपान 3 मार्च (रविवार) को सुबह 11 बजे जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी क्लब एनेक्सी हाल पर होगा। इस बार गीत, ग़ज़ल और कविता के साथ ही लघुकथा का पाठ भी होगा। 

    आयोजन में कोई अपनी रचना का पाठ नहीं करता है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ भी बिना किसी भूमिका के पढ़ी जाती हैं। यह समय पर शुरू होकर समय पर समाप्त होने वाला आयोजन है। इस बार 10 रचनाप्रेमी अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करेंगे। इनमें सिद्दीक़ रतलामी द्वारा ताहिर फ़राज़ की रचना 'दिन वो भी क्या थे' का पाठ, प्रो. दिनेश राजपुरोहित द्वारा अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की रचना 'जागो प्यारे' का पाठ, नरेन्द्र त्रिवेदी द्वारा योगेश की रचना 'कहां तक ये मन को अंधेरे छलेंगे' का पाठ, इन्दु सिन्हा द्वारा डॉ. जयकुमार 'जलज' की लघुकथा 'हासिल' का पाठ, डॉ. मनोहर जैन द्वारा प्रो. जयकिरण जोशी की रचना 'तुम्हें क्या लेना-देना है' का पाठ किया जाएगा।

    इसी तरह अनीता दासानी मनु वैशाली की रचना ‘आंगन तक को श्राप लगेगा’ का पाठ, डॉ. गीता दुबे द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'कहां खो गई वो चिट्ठियां' का पाठ, डॉ. कविता सूर्यवंशी द्वारा डॉ. जयकुमार 'जलज' की रचना 'शिकायत' का पाठ, डॉ. खुशबू जांगलवा द्वारा डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की रचना 'कितना भरोसा है बहन बेटियों पर' का पाठ, करणजीत सिंह द्वारा डॉ. शिवमंगलसिंह 'सुमन' की रचना 'वरदान माँगूँगा नहीं' का पाठ किया जाएगा। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के रचना प्रेमियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Sun, 03 Mar 2024 07:22:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह&2024 : भाषाएँ और माताएँ अपने पुत्रों से सम्मानित होती हैं, आज भारत भारतीयता की ओर लौट रहा है& प्रो. संजय द्विवेदी https://acntimes.com/Hindi-Gaurav-Investiture-Ceremony-2024-concludes https://acntimes.com/Hindi-Gaurav-Investiture-Ceremony-2024-concludes आईएएस मनोज श्रीवास्तव और प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय हिन्दी गौरव अलंकरण 2024 से विभूषित, देश के पाँच कवियों को मिला काव्य गौरव अलंकरण

    एसीएन टाइम्स @ इंदौर । हिन्दी भाषा के विस्तार और प्रसार की कड़ी में ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा रविवार को स्थानीय गोल्डन जुबली हॉल,  इन्दौर में समारोह में हिंदी गौरव अलंकरण 2024 का आयोजन किया गया था। इसमें वरिष्ठ साहित्यिक संपादक आईएएस मनोज श्रीवास्तव व वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय को हिन्दी गौरव अलंकरण से विभूषित किया गया।

    समारोह के मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी रहे। अध्यक्षता मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने की। विशिष्ट अतिथि भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी और फ़िल्म अभिनेता अक्षय राजशाही रहे। समारोह में काव्य साधकों जिनमें ऋषभदेव से नरेन्द्र पाल जैन, लखनऊ से मनुव्रत वाजपेयी, सूरत से कवयित्री सोनल जैन और इंदौर से एकाग्र शर्मा व धीरज चौहान को काव्य गौरव अलंकरण भी प्रदान किया गया।

    भाषाएं और माताएं अपने पुत्रों से सम्मानित होती हैं- प्रो. द्विवेदी

    भारतीय जनसंचार संस्थान के निदेशक प्रो. द्विवेदी ने कहा कि 'क्यों एक देश अपनी ज़ुबान में नहीं बोल सकता। आज भारतीयता की ओर भारत लौट रहा है। यह विचारों की घर वापसी है। हम अपनी संस्कृति, भाषा को सम्मानित होते देख रहे हैं और यह सत्य है कि भाषाएँ और माताएँ अपने पुत्रों से सम्मानित होती हैं।'

    हिन्दी विश्व की तकनीकी मित्र भाषा- डॉ. दवे

    मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि 'भाषा को लेकर लाखों उपसर्ग तैयार हुए, परंतु इन सबसे पार होते हुए हिंदी अब विश्व भाषा बन गई। और यहाँ तक कि हिंदी विश्व की तकनीकी मित्र भाषा है।'

    भारत की पहचान हिंदी से है- श्रीवास्तव

    अपने सम्मान के प्रतिउत्तर में मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि ’यह हिंदी का सम्मान मेरे लिए वन्दनीय है। भूतकाल में जो लोग अंग्रेज़ों के जूतों में पैर डालते हैं वे राजभाषा कहते हैं जबकि भारत की पहचान हिंदी है।' प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि 'इंदिरा घाटी से इंदिरा पॉइंट तक हिंदी मौजूद है। यह हिंदी का विस्तार है।'

     किसने क्या किया, कौन रहा मौजूद

    इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा, प्रदीप जोशी, डॉ. नीना जोशी, योगेश चन्देल, रमेश शर्मा, जयसिंह रघुवंशी, अंकित तिवारी ने किया। स्वागत उद्बोधन मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' ने दिया। अलंकरण पत्र का वाचन अखिलेश राव व संध्या रॉय चौधरी ने किया। संचालन श्रुति अग्रवाल ने किया। आभार कवि गौरव साक्षी ने माना। इस मौके पर सूर्यकान्त नागर, डॉ. पद्मा सिंह, राकेश शर्मा, अश्विनी दुबे, श्वेतकेतु वैदिक, मार्टिन गुड्डू सहित सैंकड़ो हिंदी में प्रेमी मौजूद रहे।

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    Sun, 25 Feb 2024 23:10:27 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कई भाषाओं और बोलियों में साहित्य रचा अमीर खुसरो ने, मुकरियों और पहेलियों के लिए हुए ख्यात& सिद्दीक़ रतलामी https://acntimes.com/Amir-Khusro-created-literature-in-many-languages-and-dialects-Siddiq-Ratlami https://acntimes.com/Amir-Khusro-created-literature-in-many-languages-and-dialects-Siddiq-Ratlami जनवादी लेखक संघ की विचार गोष्ठी में हुई सार्थक साहित्य पर चर्चा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अमीर खुसरो प्रथम मुस्लिम कवि थे जिन्होंने हिंदी शब्दों का खुलकर प्रयोग कियाI वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हिंदी, हिन्दवी और फ़ारसी में एक साथ लिखाI उन्हें खड़ी बोली के आविष्कार का श्रेय दिया जाता हैI वे अपनी पहेलियों और मुकरियों के लिए जाने जाते हैं। सबसे पहले उन्हीं ने अपनी भाषा के लिए हिन्दवी का उल्लेख किया था। उन्होंने नब्बे ग्रंथ की रचना की। साथ ही इनका इतिहास स्रोत रूप में महत्व है। अमीर खुसरो को तोता-ए-हिंद भी कहा गया।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा 'अमीर खुसरो: शायरी और शख्सियत' विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में शायर सिद्दीक़ रतलामी ने व्यक्त किए। रतलाम प्रेस क्लब भवन में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि वे चौदहवीं सदी के लगभग दिल्ली के निकट रहने वाले एक प्रमुख कवि, शायर, गायक और संगीतकार थे। उनका परिवार कई पीढ़ियों से राजदरबार से सम्बंधित थाI अमीर खुसरो ने 8 सुल्तानों का शासन देखा थाI किशोरावस्था में उन्होंने कविता लिखना प्रारम्भ किया और बीस वर्ष के होते होते वे कवि के रूप में प्रसिद्ध हो गए। खुसरो में व्यावहारिक बुद्धि की कोई कमी नहीं थी। सामाजिक जीवन की खुसरो ने कभी अवहेलना नहीं की। खुसरो ने अपना सारा जीवन राज्याश्रय में ही बिताया।

    दिलों को दूर करने का प्रयास करती है सिसायत

    प्रो. रतन चौहान ने कहा कि खुसरो ने भाषाओं को एक साथ मिलाकर समाज के सामने लाने का महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सियासत दिलों को दूर करने का प्रयास करती है जबकि साहित्य दिलों को पास लाकर सरहदों को मिटाने का कार्य करता है। कवि प्रणयेश जैन ने कहा कि किसी भी चरित्र को वैज्ञानिक आधार पर महसूस किया जाना चाहिए। अतिशयोक्ति का वर्णन कई बार संदेहों को जन्म देता है।

    राज दरबार में रहते हुए भी कवि, कलाकार, संगीतज्ञ  सैनिक बने रहे

    गीतकार हरिशंकर भटनागर ने कहा कि राज दरबार में रहते हुए भी खुसरो हमेशा कवि, कलाकार, संगीतज्ञ और सैनिक ही बने रहे। साहित्य के अतिरिक्त संगीत के क्षेत्र में भी खुसरो का महत्वपूर्ण योगदान हैI कवि यूसुफ जावेदी ने कहा कि खुसरो ने भारतीय और ईरानी रागों का सुन्दर मिश्रण किया और एक नवीन राग शैली इमान, जिल्फ़, साजगरी आदि को जन्म दियाI उनका योगदान संगीत को भी समृद्ध करता रहा।

    कव्वाली और सितार खुसरो की देन

    संचालन करते हुए आशीष दशोत्तर ने कहा कि भारतीय गायन में क़व्वाली और सितार खुसरो की देन माना जाता है। उन्होंने गीत के तर्ज़ पर फ़ारसी में और अरबी ग़जल के शब्दों को मिलाकर कई पहेलियाँ और दोहे भी लिखे। विचार गोष्ठी में दिनेश उपाध्याय, प्रकाश हेमावत, आशारानी उपाध्याय, मांगीलाल नगावत, सत्यनारायण सोढ़ा ने भी सहभागिता की।

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    Sun, 25 Feb 2024 03:17:39 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ‘मैं जलज बोल रहा हूं !’ संस्था ‘हम लोग’ के आयोजन में 25 फरवरी को अपने प्रिय साहित्यकार डॉ. जयकुमार ‘जलज’ का स्मरण करेंगे हम लोग https://acntimes.com/Meeting-in-memory-of-litterateur-Dr-Jaikumar-Jalaj-on-25th-February https://acntimes.com/Meeting-in-memory-of-litterateur-Dr-Jaikumar-Jalaj-on-25th-February एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रख्यात रचनाकार, कवि एवं अनुवादक डॉ. जयकुमार 'जलज' का शहर के बुद्धिजीवी गणमान्यजन एवं उनसे जुड़े विद्यार्थी स्मरण करेंगे। 'हम लोग' द्वारा 25 फरवरी (रविवार) को सुबह 11 बजे सजनप्रभा सभागृह में दिवंगत साहित्यकार डॉ. जलज की स्मृति में सभा "मैं जलज बोल रहा हूं" का आयोजन किया जा रहा है।

    यह जानकारी 'हम लोग' संस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन ने दी। 'हम लोग' की बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई। आयोजन में डॉ. जलज की कविताओं एवं उनके छायाचित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। आयोजन में शहरवासी उपस्थित रहकर डॉ. जलज का स्मरण करेंगे और उनसे जुड़े संस्मरणों को साझा करेंगे। बैठक में हम लोग के सचिव ओम प्रकाश ओझा, डॉ. पद्म घाटे, डॉ. अभय पाठक, महावीर वर्मा, कैलाश व्यास, लगन शर्मा, अशोक शर्मा, आशीष दशोत्तर उपस्थित रहे। हम लोग ने शहरवासियों से स्मृति आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sun, 25 Feb 2024 01:01:38 +0530 Niraj Kumar Shukla
    निराला से सीखिए सच कहने का साहस और सलीका, उन्होंने राम के व्यक्तित्व को जन&जन तक पहुंचाया : प्रो. संजय द्विवेदी https://acntimes.com/Learn-courage-and-etiquette-to-tell-the-truth-from-Nirala-Prof.-Sanjay-Dwivedi https://acntimes.com/Learn-courage-and-etiquette-to-tell-the-truth-from-Nirala-Prof.-Sanjay-Dwivedi निराला जयंती सप्ताह के तहत बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में हुआ व्याख्यानमाला का आयोजन

    एसीएन टाइम्स @ झांसी । महाकवि निराला से हमें सच कहने का साहस और सलीका सीखना चाहिए। निराला की कविताएं आशा और विश्वास को जागृत करने का कार्य करती हैं। हर साहित्यकार और पत्रकार को निराला से सीखना चाहिए। निराला ने अपनी कविता के माध्यम से राम के व्यक्तित्व को जन-जन तक पहुंचाया।

    उक्त विचार भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कही। वे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के हिंदी विभाग तथा पंडित दीनदयाल शोधपीठ द्वारा महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की स्मृति में आयोजित निराला व्याख्यान शृंखला में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

    ‘हिंदी में हर भावना को व्यक्त करने का सामर्थ्य’

    प्रो. द्विवेदी ने भाषा पर जोर देते हुए कहा कि भाषा में हर भावना को व्यक्त करने का सामर्थ्य है। हिंदी भाषा ने खुद को समर्थ किया है। हिंदी आज पूरे विश्व में संवाद की भाषा बनने की राह पर है। जहां जहां हिंदी भाषी रहते हैं, यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वह भाषा के राजदूत की तरह काम करें। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सुंदर हिंदी विभाग है।

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    हर परिस्थिति में स्थिर रहना सिखाती हैं निराला की रचनाएं- विनय कुमार

    मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने कहा कि निराला की कविताएं आपको साहित्य से जोड़ती हैं। अधर्म पर धर्म की जीत को साहित्य में स्थापित करने का काम निराला ने किया था। निराला की कविताएं व्यक्ति को अवसाद से निकलने में मदद कर सकती हैं। उनकी रचनाएं आशा और उम्मीद को जागृत करती हैं। निराला अपनी रचना राम की शक्ति पूजा के माध्यम से यह सिखाते हैं कि हर परिस्थिति में स्थिर कैसे रहा जाए।

    बहुआयामी व्यक्तित्व थे निराला- प्रो. सिंह

    अध्यक्षता करते हुए प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि निराला बहु आयामी थे। उन्होंने हर क्षेत्र में अहम् योगदान दिया। संचालन हिंदी भाग के अध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी तथा आभार प्रदर्शन डॉक्टर अर्चना पांडेय ने किया। कार्यक्रम में डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, नवीनचंद्र पटेल, द्युति मालिनी, प्रेमलता श्रीवास्तव, सुधा दीक्षित, सुनीता वर्मा, पुनीत श्रीवास्तव, आकांक्षा सिंह, विजया समेत अनेक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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    Fri, 16 Feb 2024 06:50:03 +0530 Manish Kumar Shukla
    ‘सफलता आसान है’ पुस्तक में संस्कारों से लेकर व्यवहार तक का है समावेश& प्रो. अज़हर हाशमी https://acntimes.com/Incorporation-of-values-and-behavior-in-the-book-safalta-asan-hai-Prof-azah-hashmi https://acntimes.com/Incorporation-of-values-and-behavior-in-the-book-safalta-asan-hai-Prof-azah-hashmi एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मोटिवेशनल स्पीकर व लेखक बी. एल. प्रजापति ने 'सफलता आसान है' शीषर्क से लिखि पुस्तक साहित्यकार व चितंक प्रो. अजहर हाशमी को भेंट की। इस मौके पर प्रो. हाशमी ने कहा कि उक्त पुस्तक में कुल 46 अध्याय हैं और संस्कारों से लेकर व्यवहार तक का समावेश किया गया है।

    प्रो. हाशमी ने कहा कि सफलता कब हासिल होगी, जब हम संस्कार से, विचारों से, अपने सदभाव से, कर्मशीलता से, अपने कर्तव्य पथ पर निरतंर चलने की शक्ति और आदत से हम अपनी तैयारियों में लगे रहें। उक्त पुस्तक में जीवन के सभी पहलुओं को उठाया गया है। पुस्तक में व्यक्ति से प्रारंभ से जीवन साथी के साथ कैसा व्यवहार हो तक के विषय पर लिखा गया है।

    पुस्तक में समाज के सभी वर्गों की उन्नति एवं करियर संबंधित संस्कारों का उल्लेख किया गया है। विशेषकर युवा वर्ग लिए सफलताओं के अनेक सूत्र छोट-छोटे वाक्यों में बताए गए है। इस दौरान लेखक प्रजापति ने प्रो. हाशमी की कुशलक्षेम पूछी तथा स्वागत कर उनका आशीर्वाद लिया।

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    Wed, 07 Feb 2024 23:43:57 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : पुस्तक विमोचन समारोह 11 फरवरी को, साहित्यकार प्रो. रतन चौहान की तीन किताबों का होगा विमोचन https://acntimes.com/Litterateur-Prof-Ratan-Chauhans-three-books-to-be-released-on-January-11 https://acntimes.com/Litterateur-Prof-Ratan-Chauhans-three-books-to-be-released-on-January-11 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा 11 फरवरी (रविवार) को पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित किया जा रहा है। आयोजन सुबह 11 बजे रतलाम प्रेस क्लब भवन पर होगा। इसमें वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान की तीन किताबों का विमोचन होगा।

    यह जानकारी जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के विशेष अतिथि चिंतक डॉ. जी. पी. डबकरा होंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं चिंतक डॉ. एन. के. शाह करेंगे। आयोजन में वरिष्ठ कवि प्रो. चौहान द्वारा छायावादी युग के प्रवर्तक सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की महत्वपूर्ण कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद 'द सिंफनी अनडाईंग' और वरिष्ठ शाइर वक़ार सिद्दीक़ी की ग़ज़लों का अंग्रेज़ी अनुवाद 'द सोल एंड द स्प्रिंग्स ऑफ टाइम' तथा अंग्रेज़ी आलेखों के संग्रह पर केंद्रित किताब 'ए ग्लिम्प्स ऑफ लिटरेचर' का विमोचन होगा। पुस्तकों पर वरिष्ठ प्राध्यापक एवं चिंतक डॉ. सी. एल. शर्मा, प्रो. डी. के. शर्मा, प्रो. पद्मा भांभरा, वरिष्ठ शाइर मिर्ज़ा मक़सूद बेग विचार व्यक्त करेंगे। जनवादी लेखक संघ ने नगर के सुधिजनों से उक्त आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Tue, 06 Feb 2024 21:14:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जन्मदिन (7 फरवरी) पर विशेष : असाधारण, कुशल और प्रभावी व्यक्तित्व 'संजय द्विवेदी' मां सरस्वती के उपासक, पत्रकार और भी बहुत कुछ https://acntimes.com/Birthday-Special-Exceptional-efficient-and-effective-personality-Sanjay-Dwivedi https://acntimes.com/Birthday-Special-Exceptional-efficient-and-effective-personality-Sanjay-Dwivedi पवन कुमार पाण्डेय

    आज प्रो. संजय द्विवेदी का जन्मदिन है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, माँ सरस्वती के उपासक, मीडिया-शिक्षण को अपनी पुस्तकों और शोध पत्रों के माध्यम से नई दिशा के बोध-कारक तथा संपूर्ण भारत में पत्रकारिता के उच्च मानक स्थापित करने वाले भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी एक पत्रकार ही नहीं, कुशल संपादक, लेखक, संस्कृतिकर्मी, मीडिया-गुरु, अकादमिक प्रबंधक एवं संचार विशेषज्ञ के नाम से संपूर्ण देश में जाने जाते हैं। जो भी उनसे एक बार मिल लेता है, वह सदैव उनका होकर रह जाता है। निरंतन लेखन, संपादन, शिक्षण, पर्यटन, दोस्ती, बातचीत, फिल्में देखना, पढ़ना उन्हें पसंद है। लेखन की कला पिता परमात्मानाथ द्विवेदी से विरासत में मिली है। वह श्रेष्ठ शिक्षक होने के साथ उच्च कोटि के लेखक भी हैं।

    वह कहते हैं, ‘मेरे पास यात्राएं हैं, कर्म हैं और उससे उपजी सफलताएं हैं। मैं स्वयं को आज भी मीडिया का विद्यार्थी ही मानता हूं।' उन्होंने 'दैनिक भास्कर', 'स्वदेश', 'नवभारत', 'हरिभूमि' जैसे अखबारों से शुरू कर के 'जी 24 छत्तीसगढ़' चैनल, फिर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि, रायपुर में पत्रकारिता विभाग के संस्थापक अध्यक्ष, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में दस साल प्रोफेसर, कुलपति व कुलसचिव जैसे दायित्वों का निर्वहन किया है।

    एक कहावत है, 'होनहार बिरवान के होत चिकने पात' को सही मायनों में उन्होंने बचपन में ही साबित कर दिया, जब 'बालसुमन' जैसी कई पत्रिकाओं का संपादन उन्होंने खुद के बूते कर दिखाया। बारहवीं तक की की शिक्षा अपने गृह जनपद में पूर्ण करने के उपरांत स्नातक की पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से एवं  भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की। सच कहा जाए तो उनके पत्रकारिता के सपने को नई उड़ान भोपाल से मिली और यहीं रहते हुए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, बाबूराव विष्णु पराड़कर, माधव राव सप्रे और माखनलाल चतुर्वेदी को पढ़ते-पढ़ते वह उनके लेखन के प्रशंसक बन गए। भोपाल से पत्रकारिता का प्रशिक्षण प्राप्त कर दिल्ली, मुंबई, बिलासपुर, रायपुर जा पहुँचे और अपनी कलम द्वारा समाज से जुड़े मुद्दों को वाणी दी।

    कर्मों में कुशाग्रता, सकारात्मक व्यवहार, मन में निश्चलता और हृदय में एकाग्रता, विनम्रता, स्वभाव से स्पष्टवादी तथा हँसमुख सहित तमाम नीति निपुणता उनकी विशेषता है। जो उनसे मिलता है वह उनका ही बन जाता है। उनके लेखन में सत्यनिष्ठता, ईमानदारी और भारतीय विचारधारा का विलक्षण समन्वय है। विनम्रता का भाव उनमें पूरी प्रतिष्ठा रखता है। एक राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर प्रो. द्विवेदी दशकों से हर विषय पर खुलकर लिखकर अपनी बात रखने के साथ ही साथ ही अपनी संवेदनाओं से समाज को देखने का नया दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर देते हैं। समाज का प्रबुद्ध वर्ग उन्हें एक प्रतिबद्ध शिक्षक, एक कुशल प्रशासक, विद्वान शिक्षाविद्, भारतीय चिंतक, गहन मनीषी के रूप में जानता है, तो इसका कारण उनका लेखन है, जिसने सामाजिक जीवन के व्यावहारिक पक्षों को अपने माध्यम से नया स्वर दिया है। प्रो. द्विवेदी की संवाद शैली उन्हें एक कुशल संचारक बनाती है। जब वह बोलते हैं तो अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देते हैं और जब लिखते हैं तो बहुत संतुलित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

    यह भी पढ़ें... प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से मिला आईआईएमसी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा, जनसंचार शिक्षा को मिलेगा महत्त्व और जुड़ेंगें नए आयाम- प्रो. संजय द्विवेदी

    जहां उन्होंने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, प्रभाष जोशी, अच्युतानंद मिश्र, एसपी सिंह पर पुस्तक लिखी हैं, तो वहीं 'मीडिया नया दौर नई चुनौतियाँ', 'मीडिया शिक्षाः मुद्दे और अपेक्षाएं', 'उर्दू पत्रकारिता का भविष्य', 'सोशल नेटवर्किंगः नए समय का संवाद', 'मीडिया भूमंडलीकरण और समाज', 'हिंदी मीडिया के हीरो', 'कुछ भी उल्लेखनीय नहीं', 'मीडिया की ओर देखती स्त्री', 'ध्येय पथ', 'राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता', 'मोदी युग', 'अमृतकाल में भारत', 'मोदी लाइव', 'भारतबोध का नया समय', 'कुछ तो लोग कहेगें' और 'लोगों का काम है कहना', उनकी कुछ चर्चित पुस्तकें रही हैं।

    वक्त बदल रहा है, मीडिया बदल रहा है, मीडिया तकनीक बदल रही है, मीडिया के पाठक और दर्शक की रुचि, स्थिति और परिस्थिति भी बदल रही है। ऐसे में मीडिया अध्ययन, अध्यापन और कार्य करने वालों को खुद में बदलाव लाना आवश्यक है। इसके लिए मीडिया के मिजाज को समझना और समझाना आवश्यक है, जिसे प्रो. द्विवेदी ने समझा और समझाया भी है। वर्तमान में फेक न्यूज से बचने के लिए उन्होंने मूल मंत्र दिया है 'बुरा ना टाइप करें, बुरा न लाइक करें, बुरा न शेयर करें'।

    आज प्रो. संजय द्विवेदी के जन्मदिन पर उन्हें अनंत कोटि शुभकामनाएं।

    (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जोधपुर प्रांत के प्रांत मीडिया प्रमुख हैं)

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    Tue, 06 Feb 2024 20:21:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें सुनाएं' का 17वां सोपान 4 फरवरी को, 8 रचनाधर्मी प्रस्तुत करेंगे अपने प्रसिद्ध रचनाकार की रचना, आप भी आएं & औरों को भी लाएं https://acntimes.com/17th-episode-of-Sunen-Sunane-on-4th-February https://acntimes.com/17th-episode-of-Sunen-Sunane-on-4th-February एसीएन टाइम्स @ रतलाम । निर्धारित समय से देरी से शुरू होने वाले आयोजनों के दौर में शहर में एक ऐसा आयोजन भी डेढ़ वर्ष से हो रहा है जो निर्धारित समय पर शुरू होता है और निर्धारित समय पर ही संपन्न होता है। न किसी का इंतज़ार किया जाता है और न ही किसी से उपस्थित का आग्रह। इसमें अतिथि और कार्यक्रम का अध्यक्ष भी नहीं होता। ऐसे अनूठे आयोजन सुनें सुनाएं का 17वां सोपान 4 फरवरी को होने वाला है।

    आयोजन बिना किसी औपचारिकता के सुबह ठीक 11 बजे शुरू हो जाएगा और दोपहर 12 बजे समाप्त हो जाएगा। आयोजन स्थल रहेगा जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल, प्रथम तल, रतलाम। इस में आठ रचनाप्रेमी अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करेंगे। इनमें अशोक कुमार शर्मा द्वारा अज्ञात रचनाकार की ग़ज़ल 'कौन समझाए उन्हें, इतनी जलन ठीक नही' का, नरेन्द्र त्रिवेदी द्वारा प्रदीप चौबे की रचना 'रेलयात्रा' का, अनीता दासानी द्वारा राहत इंदौरी की रचना 'उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो', विनोद झालानी द्वारा गोपाल दास ‘नीरज’ की रचना ‘चांदनी में घोला जाए’, संजय शर्मा द्वारा डॉ. हरिवंश बच्चन की रचना 'अग्निपथ', डॉ. पूर्णिमा शर्मा द्वारा 'हे ! सच्चिदानंद प्रभो तुम नित्य सर्व सशक्त हो', श्याम सुंदर भाटी द्वारा भावसार बा की 'मालवी रचना' का पाठ, कीर्ति शर्मा द्वारा शंकर शैलेन्द्र की रचना 'तू ज़िंदा है, तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर' का पाठ किया जाएगा।

    औपचारिकताओं से परे अनूठा आयोजन

    बता दें कि, समय से प्रारंभ होकर समय पर समाप्त होने वाले इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करता है। बिना किसी औपचारिकता वाले इस आयोजन में उपस्थित होने वाले सभी अपनी इच्छा से उपस्थित होते हैं और जब आयोजन से लौटते हैं तो स्वयं को रचनात्मक ऊर्जा से भरपूर पाते हैं। ‘सुनें सुनाएं’ में आप भी शामिल हो सकते हैं और साहित्य में रुचि रखने वाले अन्य लोगों को भी ला सकते हैं।

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    Fri, 02 Feb 2024 21:11:06 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मंत्री चेतन्य काश्यप ने किया रतलाम के मोटिवेशनल स्पीकर बद्रीलाल प्रजापत की पुस्तक ‘सफलता आसान है’ का विमोचन https://acntimes.com/Motivational-speaker-Badrilal-Prajapats-book-Success-is-easy-released https://acntimes.com/Motivational-speaker-Badrilal-Prajapats-book-Success-is-easy-released एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के मोटिवेशनल स्पीकर बद्रीलाल प्रजापति की पुस्तक ‘सफलता आसान है’ का विमोचन किया गया। विमोचन मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट केदार अग्रवाल एवं भाजपा जिला अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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    Fri, 02 Feb 2024 20:51:07 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह को अनुनाद संस्था 8 फरवरी को देगी संगीतमय भावांजलि, हेमंत जोशी और टीम देगी प्रस्तुति https://acntimes.com/Musical-tribute-to-ghazal-singer-Jagjit-Singh-on-8-February https://acntimes.com/Musical-tribute-to-ghazal-singer-Jagjit-Singh-on-8-February एसीएन टाइम्स @ रतलाम । संस्था अनुनाद द्वारा महान ग़ज़ल गायक स्व. जगजीत सिंह का जन्मदिन 8 फरवरी को मनाया जाएगा। इस मौके पर संस्था उन्हें संगीतमय भावांजलि अर्पित की जाएगी। इसमें रतलाम के कलाकार प्रस्तुति देंगी।

    जानकारी के अनुसार ग़ज़ल निशा का आयोजन 8 फरवरी को शाम 7.30 बजे से सैलाना रोड पर परशुराम विहार कॉलोनी के सामने स्थित पुष्पांजलि पैलेस पर होगा। इसमें रतलाम के ग़ज़ल गायक हेमंत जोशी और उनकी टीम स्वरांजलि देंगे। उनके साथ प्रस्तुति देने वालों में मनोज जोशी, नीलेश जोशी, हरिओम भंवरिया, विकास जैन, सतीश जमरा, बी. एल. मरमट, नितिन सिंह रावत, रिद्दम मिश्रा, नरेंद्र पुनवर, रुद्रांणी तांदेल, अवनि उपाध्याय आदि कलाकार भी शामिल होंगे। आयोजन के सूत्रधार शायर अब्दुल सलाम खोकर होंगे। अनुनाद संस्था के अध्यक्ष अजीत जैन सहित सभी पदाधिकारियों ने ग़ज़ल और संगीत प्रेमियों से आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

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    Fri, 02 Feb 2024 00:15:43 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रो. अज़हर हाशमी की ‘मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए...’ कविता ने किया रोमांचित,  ‘राम मंदिर पर अहम, वहम और नियम’ एवं ‘आलोकनामा’ पर हुआ सार्थक संवाद https://acntimes.com/Two-day-Malwa-Media-Fest-begins-in-Ratlam-ends-on-January-28 https://acntimes.com/Two-day-Malwa-Media-Fest-begins-in-Ratlam-ends-on-January-28 सक्षम संचार फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट शुरू, रविवार को ये आयोजन होंगे 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम में सक्षम संचार फाउंडेशन की ओर से आयोजित 2 दिवसीय मालवा मीडिया फेस्ट का शुभारंभ शनिवार को हुआ। शहर के कैलासनाथ काटजू विधि महाविद्यालय में शुरू हुए आयोजन के विभिन्न सत्रों में अलग-अलग विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। इस दौरान देश-प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकारों और पत्रकारों ने सहभागिता की। जिस वक्त प्रो. अज़हर हाशमी की ख्यात कविता ‘मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए...’ गूंजी तो सभी रोमांचित हो उठे। ‘राम मंदिर पर अहम, वहम और नियम’ तथा ‘आलोकनामा’ पर भी सार्थक संवाद संवाद हुआ।

    मालवा मीडिया फेस्ट की शुरुआत कंटेंट वर्कशॉप से हुई। इसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं आईएएनएस की राजस्थान ब्यूरो चीफ अर्चना वक्ता रहीं। इसके बाद ख्यात चिंतक, लेखक और कवि प्रो. अज़हर हाशमी ने अपने इंदरानगर स्थित निवास से वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने मालवा मीडिया फेस्ट को युवा पीढ़ी के लिए क्रांतिकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन अच्छे को तलाशने और युवाओं व बच्चों को तराशने का प्रसंशनीय कार्य कर रहा है। हाशमी ने कहा कि ‘एक पत्थर की भी तकदीर संवर सकती है, शर्त ये है कि सलीके से तराशा जाए।’

    उन्होंने कहा कि प्रायः अच्छा कार्य करने के दौरान समस्याएं और दुविधाएं भी सामने आती हैं, लेकिन इससे प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसलिए- ‘इरादे नेक रखकर कोशिशें करना, निराशा की डगर लंबी नहीं होती। सुबह का सूर्य यह संदेश देता है, अंधेरे की उमर लंबी नहीं होती।’ प्रो. हाशमी ने 48 साल पहले 1976 (आपातकाल) के दौरान लिखी गई कविता ‘मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए...’ सस्वर सुनाई। उन्होंने तब की गई कल्पना अब साकार होती नजर आने से खुशी जाहिर की। उनका कहना था कि पहले भी भारत में रामराज्य था जो अब पुनः लौट रहा है।

    न्यू इंडिया में न्यू मीडिया की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर डाला प्रकाश

    दूसरे सत्र में 'न्यू इंडिया - न्यू मीडिया' विषय पर चर्चा हुई। इसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी रहे। अन्य वक्ताओं में शामिल वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षक जितेंद्र जाखेटिया, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हीरेन जोशी रहे। सत्र को मॉडरेट यूट्यूबर और रिसर्चर रुचि श्रीमाली ने किया। इस दौरान बढ़ते भारत में मीडिया के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई।

    मुख्य वक्ता प्रो. द्विवेदी ने परंपरागत मीडिया और आज के मीडिया का तुलनात्मक अंतर भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले खबरों संपादकों, मालिकों, अखबारों और वहां काम करने वालों की इच्छा पर निर्भर करती थी लेकिन अब रीडर तय करता है कि उसे क्या पढ़ना है। यह क्रांति इंटरनेट और स्मार्ट फोन से आई है। उन्होंने हमारे जीवन के पल-पल के राज़दार मोबाइल का उपयोग सावधानी के साथ स्मार्ट तरीके से करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मीडिया रोजगार का बड़ा माध्यम है। प्रो. द्विवेदी ने चिंतक त्रिभुवनेश भारद्वाज, पत्रकार मुकेश तिवारी सहित अन्य की जिज्ञासाओं को भी शांत किया।

    राम मंदिर से जुड़े अहम, वहम और नियम पर हुआ विमर्श

    तीसरे सत्र में राम मंदिर : अहम, वहम और नियम पर रोचक चर्चा हुई। इसमें राम मंदिर को लेकर चर रहे विवादों और भ्रांतियों पर प्रो. संजय द्विदेदी ने श्रोताओं के सवालों के जवाब दिए।

    चौथे सत्र में 'आलोकनामा' में प्रसिद्ध कवि, गीतकार और टीवी जर्नलिस्ट आलोक श्रीवास्तव ने कविता पाठ किया। उन्होंने युवाओं को साहित्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। सभी आमंत्रित अतिथियों और पैनलिस्ट को स्मृति चिह्न सृजन कॉलेज के निदेशक अनिल झालानी, पूर्व प्राचार्य एवं साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय, सृजन कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. निषर्ग दुबे एवं डॉ. प्रवीणा दवेसर ने प्रदान किए।

    ख्यात कलाकार मंजूर खान की प्रस्तुत पर झूमे लोग

    मालवा मीडिया फेस्ट के दौरान म्यूजिकल नाइट का आयोजन भी हुआ। इसमें देश-दुनिया में अपनी गायिकी का जलवा बिखेर चुके प्रसिद्ध कलाकार मंजूर खान एंड टीम ने सुर-ताल की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी पर रतलामवासी झूम उठे।

    दूसरे दिन यह होगा

    मालवा मीडिया फेस्ट के दूसरे दिन रविवार को सुबह 10.00 से 11.30 बजे तक मालवा और मीडिया पर चर्चा होगी। इसमें पत्रकार और इन्फ्लुएंसर भाग लेंगे। 11.30 बजे से 12.30 बजे तक चर्चित पुस्तक ‘हे राम’ पर चर्चा होगी। वक्ता वरिष्ठ टीवी पत्रकार और डीडी न्यूज के सीनियर कंसल्टेंट एडिटर प्रखर श्रीवास्तव होंगे। मॉडरेटर की भूमिका वरिष्ठ पत्रकार व लेखक हीरेन जोशी निभाएंगे।

    यह है आयोजन का उद्देश्य

    कार्यक्रम के सहयोगी सृजन कॉलेज के निदेशक अनिल झालानी और आयोजक अर्चना शर्मा ने बताया कि मालवा मीडिया फेस्ट का उद्देश्य मालवा की कला, संस्कृति औऱ इतिहास को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना और भविष्य की संभावाओं को तलाशना है। एसको लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

    आयोजन स्थल पर प्रमुख पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। आयोजन में विभिन्न विद्यालयों और कॉलेज के विद्यार्थी, साहित्य जगत से जुड़ी हस्तियां, पत्रकार, लेखक, राजनीतज्ञ, अभिभाषक सहित अन्य मौजूद रहे। सभी सत्रों का संचालन युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने किया।

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    Sun, 28 Jan 2024 00:15:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मनुष्यता की पक्षधर हैं 'बातें मेरे हिस्से की', यह साक्षात्कार नहीं वरन आत्मीय संवाद और संस्मरण है& प्रो. रतन चौहान https://acntimes.com/Book-Release-Baatein-Mere-Hake-Ki-is-in-favor-of-humanity-Prof-Ratan-Chauhan https://acntimes.com/Book-Release-Baatein-Mere-Hake-Ki-is-in-favor-of-humanity-Prof-Ratan-Chauhan आशीष दशोत्तर की साक्षात्कार की पुस्तक का विमोचन

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य, कला, संस्कृति अधूरी है, यदि वह मनुष्यता एवं सामाजिक निष्ठा के मूल्यों से रहित है। 'बातें मेरे हिस्से की' इस दृष्टि से मनुष्यता की पक्षधर तथा बहुत कम स्थान में बहुत कुछ कहती पुस्तक प्रतीत होती है। इस पुस्तक में समाहित साक्षात्कार सिर्फ़ साक्षात्कार नहीं वरन आत्मीय संवाद और संस्मरण भी हैं, जो साहित्य की समृद्ध विरासत को सहेजने की आकांक्षा रखते वर्तमान के लिए महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक की आमद इस समय ज़रूरी भी थी। सचमुच आशीष दशोत्तर बधाई के पात्र हैं।

    उक्त विचार युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर की नई पुस्तक 'बातें मेरे हिस्से की' का विमोचन करते हुए वरिष्ठ कवि प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित विमोचन समारोह में वरिष्ठ कवि युसूफ़ जावेदी ने कहा कि अपने समय के महत्वपूर्ण रचनाकारों के साक्षात्कार को समाहित करती यह पुस्तक प्रेरित करने वाली और आवश्यक है। शाइर सिद्दीक़ रतलामी ने कवि, समीक्षकों और फिल्मकार से आत्मीय संवाद के इस संग्रह को साहित्य के लिए धरोहर निरूपित किया। जलेसं अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने संग्रह को रतलाम के साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय बताया। पुस्तक पर कीर्ति शर्मा, मांगीलाल नगावत ने भी टिप्पणी की।

    चौदह शख्सियतों के साक्षात्कार हैं पुस्तक में

    बोधि प्रकाशन से प्रकाशित आशीष दशोत्तर की पुस्तक 'बातें मेरे हिस्से की' में देश की प्रमुख 14 शख्सियतों के साक्षात्कार समाहित हैं। कलागुरु विष्णु चिंचालकर, कवि चंद्रकांत देवताले, विष्णु खरे, समीक्षक डॉ. मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, फिल्मकार रामानंद सागर, उपन्यासकार डॉ. शरद पगारे, कवि डॉ. देवव्रत जोशी, भगवत रावत, पत्रकार प्रभाष जोशी, भाषाविद डॉ. जयकुमार 'जलज', शाइर डॉ. विजय वाते, कवि बलराम गुमास्ता, अध्येता मांगीलाल यादव एवं चित्रकार महावीर वर्मा के साथ आशीष दशोत्तर की आत्मीय बातें शामिल हैं।

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    Wed, 24 Jan 2024 09:46:04 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक विमोचन : साधन, साधना और साहित्य का विज्ञान से गहरा संबंध है, आशीष दशोत्तर की कविताओं का साहित्य के साथ विज्ञान में भी महत्वपूर्ण स्थान है& डॉ. राजेंद्र पांडेय https://acntimes.com/Ashish-Dashottaras-book-released https://acntimes.com/Ashish-Dashottaras-book-released युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर की किताब ‘तुम भी?’ का विमोचन करते हुए जावरा विधायक ने कहा 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । ज्ञान, विज्ञान और विकास में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैज्ञानिक अवधारणाओं को हमारे प्राचीन विद्वानों ने काफी पहले समझा दिया था। साहित्य में भी विज्ञान का समावेश होता रहा है। कई वर्षों पहले तुलसीदास जी ने 'जुग सहस्त्र योजन पर भानु' और 'राम रसायन' जैसी वैज्ञानिक शब्दावली का प्रयोग अपनी काव्य अभिव्यक्ति में किया था। इस दृष्टि से रचनाकार आशीष दशोतर की विज्ञान कविताएं साहित्य में ही नहीं, विज्ञान में भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

    उक्त विचार जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने रचनाकार आशीष दशोत्तर की विज्ञान कविताओं के समाविष्ट काव्य संग्रह 'तुम भी?'  का विमोचन करते हुए व्यक्त किए। आयोजन में शासकीय कला विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाय. के. मिश्रा, शासकीय कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. कटारे, इंदौर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. पी. के. दुबे, जिला शिक्षा अधिकारी के. सी. शर्मा, जिला विज्ञान अधिकारी जितेंद्र जोशी भी मौजूद थे। 

    साधन और अनुभव के आधार पर दिए जाते थे सिद्धांत

    डॉ. पांडेय ने इस अवसर पर कहा कि प्राचीन काल में विज्ञान के सिद्धांत साधना और अनुभव के आधार पर दिए जाते थे। भारतीय विद्वानों ने विश्व को जो नियम दिए वे आज तक कायम हैं। आज साधना का स्थान साधन ने ले लिया है। आज के प्रयोग और विज्ञान के सिद्धांत साधन के आधार पर सिद्ध हो रहे हैं। इन सब के साथ साहित्य के माध्यम से भी विज्ञान की अवधारणाओं को समाज के सामने लाया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण है। इसी से सामाजिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जनता के बीच में पहुंचाया जा सकता है। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किया तथा रचनाकार दशोत्तर को शुभकामनाएं प्रदान की। बड़ी संख्या में सुधिजन मौजूद थे।

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    Tue, 16 Jan 2024 07:16:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम डीआईजी मनोजकुमार सिंह पहुंचे प्रो. अज़हर हाशमी के घर, कुशलक्षेम् पूछी और जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं https://acntimes.com/Ratlam-DIG-Manojkumar-Singh-met-renowned-litterateur-Prof-Azhar-Hashmis-well-being https://acntimes.com/Ratlam-DIG-Manojkumar-Singh-met-renowned-litterateur-Prof-Azhar-Hashmis-well-being एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम रेंज के डीआईजी मनोजकुमार सिंह ने सोमवार को ख्यात चिंतक और साहित्यकार प्रो. अजहर हाशमी के निवास पहुंच कर उनकी कुशलक्षेम जानी। उन्होंने प्रो. हाशमी को गुलदस्ता भेंट करते जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और लंबी उम्र की प्रार्थना की। वे किन्हीं कारणवश जन्म दिवस 13 जनवरी को प्रो. हाशमी को शुभकामनाएं देने उनके निवास नहीं पहुंच पाए थे। 

    प्रो. हाशमी ने अपने निवास पहुंचे डीआईजी सिंह का आत्मीय स्वागत किया। उनसे साहित्य पर चर्चा भी की। प्रो. हाशमी ने उनका शॉल-श्रीफल, गुलदस्ता और कलम भेंटकर डीआईडी सिंह का सम्मान किया। उन्हें अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘मुक्तक शतक’ और विश्व प्रसिद्ध कविता ‘बेटियां पावन दुवाएं हैं...’ भी भेंट की।

    प्रो. हाशमी से मिले सम्मान पर डीआईजी सिंह ने कहा कि महान व्यक्तित्व से मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। इतनी बड़ी हस्ती रतलाम में है, यह रतलाम का सौभाग्य है। प्रो. हाशमी डीआईजी सिंह की विनम्रता, अध्ययशीलता और उनके मंदसौर, नीमच व अन्य स्थानों पर एसपी रहने के दौरान किए कार्यों से प्रभावित हुए और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

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    Tue, 16 Jan 2024 07:02:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रसंगवश (जन्मदिन 13 जनवरी पर विशेष) : "साहित्यकार अजहर हाशमी ने जो लिखा, उसे जीया" https://acntimes.com/Birthday-special-Litterateur-Azhar-Hashmi-lived-what-he-wrote https://acntimes.com/Birthday-special-Litterateur-Azhar-Hashmi-lived-what-he-wrote श्वेता नागर 

    ''नेक नीयत से तेरा जब, वास्ता हो जाएगा,

    रब की रहमत से तुझे, सब कुछ अता हो जाएगा।

    पूछता रहता है तू, कहते हैं किसको देवता?

    इंसानियत के पथ पे चल, तू देवता हो जाएगा।'' 

    ये प्रेरणादायी काव्य पंक्तियाँ हैं प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार अज़हर हाशमी जी की। इन पंक्तियों की व्याख्या करने की आवश्यकता इसलिए नहीं है क्योंकि ये बोलती हुई कविता की तरह है। अर्थात एक तरह का लाइव टेलीकास्ट जिसमें सकारात्मक संदेश निहित है। अजहर हाशमी जी अपनी हर रचना में चाहे वह कविता हो, मुक्तक हो, गीत हो, ग़ज़ल हो, निबंध हो या लेख हो सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का परचम लहराते हैं। उनकी सबसे बड़ी बात तो यह है कि जैसा उन्होंने लिखा है और लिख रहे हैं, वैसा ही जीवन जीया और जी रहे हैं। खरापन, स्पष्टवादिता और सत्य को साहस के साथ रेखांकित करना, ये उनके व्यक्तित्व की पहचान है। उन्हीं की पंक्तियाँ हैं- 

    "जब कभी अन्याय की हो सख्तियाँ,

    बोलकर, लिखकर करो अभिव्यक्तियाँ।

    आप सचमुच सत्य हैं तो झूठ की,

    ध्वस्त हो जाएंगी सारी शक्तियां।" 

    उनके संपूर्ण जीवन दर्शन में सूफी परंपरा की झलक मिलती है। एक सूफी संत जिस तरह का जीवन जीता है और व्यवहार करता है, अर्थात् सब के प्रति समदर्शिता का भाव लेकिन सब्र, सच्चाई और साहस कभी नही छोड़ना। सूफी की यह भी विशेषता है कि वह सभी धर्मों और उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं। इसलिए अज़हर हाशमी जी ने भारतीय संस्कृति के सभी आदर्शों के प्रति अपना समर्पण भाव रखते हुए भगवान राम, कृष्ण, शिव और सनातन धर्म के सभी वेद, उपनिषद, भगवत गीता और रामचरित मानस की सरल व्याख्या कर उनमें निहित संदेशों को भारत ही नही विदेशों में भी पहुंचाया है।

    इसके साथ ही जैन धर्म, बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म, सिक्ख धर्म और इस्लाम धर्म में निहित पवित्र और गूढ़ बातों को जन मानस तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। क्योंकि धर्म के बारे में उनका बड़ा मशहूर वक्तव्य है "वैदिक धर्म विश्वास का व्याकरण है, जैन धर्म अहिंसा का अमृत कुंड है, बौद्ध धर्म करुणा का कलश है, इस्लाम धर्म बंधुत्व की बारहखड़ी है, ईसाई धर्म क्षमा का क्षितिज है, यहूदी धर्म सदाशयता का संदेश है, सिक्ख धर्म साहस का सेतु है। सभी धर्म सत्कर्म सिखाते हैं। कुल मिलाकर यानी धर्म मानवता की मुंडेर पर चेतना का चिराग़ है।" यानी अज़हर हाशमी जी हर धर्म में मौजूद अच्छी बातों को आचरण में उतारने पर जोर देते हैं। इसी से धर्म की सार्थकता सिद्ध होती है। 

    प्रो. अज़हर हाशमी जी एक ऐसे गुरु हैं जो अपने शिष्यों को सदैव संस्कार, ज्ञान और विज्ञान की ऊँचाई पर देखना चाहते हैं। इसके लिए वे हमेशा अपने शिष्यों को सदैव आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भरपूर रखते हैं। उन्हीं की काव्य पंक्तियाँ हैं जो शिष्यों के प्रति उनके भावों को व्यक्त करती है- 

    "अपने शिष्यों के लिए ज्ञान का संसार गुरु,

    कभी विद्या का नहीं करता है व्यापार गुरु!

    कभी शिष्यों को भटकने नहीं देता है वो,

    प्रेरणा-पुंज है, आलोक का संचार गुरु!" 

    अज़हर हाशमी जी युवा पीढी को अच्छे लक्ष्य के प्रति सतत् कर्म करने की सीख देते हुए कहते हैं कि- 

    "लक्ष्य शुभ है तो चलो-चलते रहो,

    सोचो मत 'ऐसा न हो, वैसा न हो'

    भाग्य की भी भूमिका होती है, पर

    कोशिशें करने में मत पीछे रहो!"

    सामान्यतः देखने में आता है कि कृतज्ञता का भाव लुप्त होता जा रहा है जबकि कृतज्ञता का भाव मानवीय मूल्यों और संस्कारशीलता का परिचायक है। इसलिए हाशमी जी कहते हैं कि- 

    "जो शख्स तेरे दुख में तेरे साथ खड़ा था,

    कद उसका फरिश्ते से कहीं ज्यादा बड़ा था।" 

    दरअसल, साहित्यकार अज़हर हाशमी जी का समस्त साहित्य संदेश देता है इंसानियत और सत्कर्म का और इसे ही वे धर्म मानते हैं और कहते हैं- 

    "इंसानियत का काम है लोगों के दुख हरना

    जो भर सको तो घाव लोगों के सदा भरना

    चलते रहना तुम सदा सत्कर्म के पथ पर

    आलोचना होगी मगर परवाह न करना।" 

    अज़हर हाशमी जी को जन्मदिन (13 जनवरी) की बधाई! 

    (श्वेता नागर)

    संपर्क : 7869542660

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    Fri, 12 Jan 2024 23:45:56 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य विमर्श : 'सुनें & सुनाएं' का पंद्रहवां सोपान 3 दिसंबर को, दस रचनाधर्मी पढ़ेंगे अपनी प्रिय रचना https://acntimes.com/Fifteenth-step-of-Sunen-Sunaayen-on-3rd-December https://acntimes.com/Fifteenth-step-of-Sunen-Sunaayen-on-3rd-December एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए 'सुनें - सुनाएं' आयोजन का पंद्रहवां सोपान 3 दिसंबर (रविवार) को होगा। सुबह 11 बजे  जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल प्रथम तल, रतलाम पर होने वाले आयोजन में दस साथी अपनी प्रिय रचना का पाठ करेंगे।

    इस आयोजन में नरेंद्र त्रिवेदी द्वारा डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचना 'जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला' का पाठ, जी. एस. खींची द्वारा कृष्ण बिहारी 'नूर  की रचना 'तमाम जिस्म ही घायल था' एवं पं. मुस्तफा आरिफ द्वारा पीरूलाल 'बादल' की रचना 'थारी छाणी-छाणी वात' का पाठ किया जाएगा। इसी तरह कैलाश वशिष्ठ जुझार सिंह भाटी की रचना 'मुझको रिझाती है तेरी बिदियां', अनीस खान शकील आज़मी की रचना 'दर्द की रात है', संजय शर्मा डॉ. हरिवंश राय 'बच्चन' की रचना 'अग्निपथ' का पाठ करेंगे।

    विक्रांत भट्ट द्वारा विष्णु खरे की रचना 'तरमीम' का पाठ, सान्त्वना शुक्ला द्वारा डॉ. संजय 'मधुप' की रचना "दीप" का पाठ, ललित चौरड़िया द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'अपनी कमियों को' का पाठ, श्याम सुंदर भाटी द्वारा सुरेन्द्र शर्मा की रचना 'रै काडू आग्या रै' का पाठ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में कोई भी व्यक्ति अपनी रचना का पाठ नहीं करता है। प्रस्तुतकर्ता अपने प्रिय रचनाकार की रचना का बिना किसी भूमिका के पाठ करते हैं। 'सुनें - सुनाएं' ने शहर के सृजनशील साथियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Wed, 29 Nov 2023 17:40:05 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य&सृजन : हेमलता शर्मा ‘भोली बेन’ फणीश्वर नाथ रेणु आंचलिक साहित्य शिखर सम्मान से होंगी सम्मानित https://acntimes.com/Hemlata-Sharma-Bholi-Ben-will-receive-Phanishwar-Nath-Renu-Regional-Sahitya-Shikhar-Samman https://acntimes.com/Hemlata-Sharma-Bholi-Ben-will-receive-Phanishwar-Nath-Renu-Regional-Sahitya-Shikhar-Samman एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य प्रेरणा मंच और अशोक स्मृति संस्थान द्वारा हेमलता शर्मा ‘भोली बेन’ को फणीश्वर नाथ रेणु आंचलिक साहित्य शिखर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान बिहार के राजगीर (नालंदा) में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा।

    यह जानकारी संस्था संयोजक ओंकार शर्मा 'कश्यप' और अध्यक्ष जितेंद्र राज 'आर्यन' ने दी। पदाधिकारीद्वय ने बताया भोली बेन द्वारा आंचलिक भाषा (मालवी) साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। उनकी अनन्य साधना को देखते हुए उन्हें उनकी कृति 'आज को ग्यान - मालवी सुविचार' के लिए मगध साहित्य प्रेरणा उत्सव में सम्मान दिया जाएगा। सम्मान समारोह 9 दिसंबर को होगा। ज्ञातव्य है कि भोली बेन की कृति इंडिया बुक और एशिया बुक रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

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    Wed, 29 Nov 2023 16:26:51 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पुस्तक&समीक्षा : महर्षि अरविंद के दिव्य और भव्य व्यक्तित्व के प्रति श्रद्धा का का सूचक "क्रांति और आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता महायोगी श्री अरविंद'' https://acntimes.com/Review-of-Dr-Khushboo-Jangalwas-book https://acntimes.com/Review-of-Dr-Khushboo-Jangalwas-book -श्वेता नागर

    अरविंद, रवींद्र का लो नमस्कार

    हे बंधु, हे देशबंधु, स्वदेश आत्मा के

    वाणीमूर्ति तुम ! तुम्हारे लिए नहीं मान

    न धन, न सुख अथवा क्षुद्रदान

    कभी नही चाहा क्षुद्र कृपा-भिक्षा हेतु

    पसारे नहीं आतुर हाथ ! तुम सदा सजग

    परिपूर्णता हेतु सर्व बाधा हीन

    जिस के लिए नर-देव चिर रात्रि-दिन

    तपोमान, जिस के लिए कवि वज्र रण में…

         ये पंक्तियाँ गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता 'नमस्कार' से है जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता महर्षि अरविंद के दिव्य और तपोमय व्यक्तित्व को प्रणाम करते हुए अपना सम्मान भाव प्रकट किया। अद्भुत.. अकल्पनीय... अवर्णनीय… अलौकिक व्यक्तित्व के स्वामी थे महर्षि अरविंद ! अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से भारत माँ को स्वतंत्र कराने क्रांति का सूत्रपात किया। महर्षि अरविंद के व्यक्तित्व का अध्ययन करना यानी दिव्य लोक की यात्रा करना। और ऐसे ही महर्षि अरविंद के दिव्य और भव्य व्यक्तित्व के प्रति श्रद्धा भाव को अपनी लेखनी के माध्यम से व्यक्त करने का सराहनीय प्रयास किया है लेखिका डॉ. खुशबू जांगलवा ने, जिसका प्रमाण है उनकी प्रथम प्रकाशित पुस्तक (मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी से प्रकाशित) "क्रांति और आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता महायोगी श्री अरविंद''।

         डॉ. खुशबू जांगलवा वैसे तो कवयित्री हैं, उनके लिए कविताओं का संकलन प्रकाशित करना कहीं न कहीं सरल कार्य होता लेकिन उन्होंने महर्षि अरविंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर लेखन कार्य करने का साहस दिखाया जो निश्चित ही प्रशंसनीय है। इस पुस्तक की लेखिका डॉ. खुशबू जांगलवा एक प्रसिद्ध चित्रकार भी हैं और पुस्तक के प्रारंभ में महर्षि अरविंद का सुंदर और भावपूर्ण चित्र भी उनके द्वारा बनाया गया है। पुस्तक में पुरोवाक् में उन्होंने अपने इस प्रयास पर लिखा है कि 'श्री अरविंद कठिन है, श्री अरविंद का योग समझना और कठिन है। प्रत्येक मन की अपनी जिव्हा, अपना- अपना विचार है लेकिन, किंतु, परंतु, मुश्किल सभी शब्दों को विराम दे और कैलाश पर्वत के शिखर को छूने का संकल्प ले ले तो कैलाश पर्वत का स्पर्श करने हेतु, चरणों का स्पर्श करना अत्यंत आवश्यक है। तात्पर्य यह है कि शुरुआत तो चरण वंदना से ही करनी होगी।' निश्चित ही महर्षि अरविंद को समझना यानी समुद्र की गहराई को नापना। क्योंकि अरविंद का व्यक्तित्व कहीं सरल, कहीं कठिन, कहीं रहस्यमयी, कहीं पारदर्शी , कहीं स्पष्ट तो कहीं. अस्पष्ट। लेकिन फिर भी महर्षि अरविंद उस उच्च आसन पर विराजमान है जहाँ उन्हें संपूर्ण मानवता प्रणाम कर रही है।

         इस पुस्तक की भूमिका प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चाँदनीवाला द्वारा लिखी गयी है। भूमिका में महर्षि अरविंद के विचारों के सार तत्व को सुंदर और पूर्णता के साथ प्रस्तुत किया गया है। महर्षि अरविंद के जीवन दर्शन का गहन अध्ययन चाँदनीवाला जी द्वारा किया गया है। वे लिखते हैं कि ''श्री अरविंद का जीवन जटिल रहस्यों से भरा हुआ है। वह दिव्य अग्नि की तरह है। श्री अरविंद के जीवन पर लिखना सरल काम नही है। डॉ. खुशबू जांगलवा की पहली प्रशंसा केवल इस बात के लिए ही हो सकती है कि उन्होंने यह साहस दिखाया। इसके आगे श्री अरविंद के दर्शन को समझाते हुए चाँदनीवाला जी लिखते है कि 'श्री अरविंद का जीवन वैश्व कविता की तरह है। वे उस विश्व के प्रजापति हैं, जो कभी तीव्र, कभी मंद गति से निरंतर रूपांतरित हो रहा है। उनकी साधना को देशभक्ति के साथ-साथ मानवीय चेतना के विकास और उसके महा-अभियान के रूप में देखना होगा।‘ निश्चित ही महर्षि अरविंद के दर्शन का सार मानवीय चेतना का विकास करना ही है। जिसमें संपूर्ण मानव जाति का कल्याण निहित है।

         इस पुस्तक में लेखिका का महर्षि श्री अरविंद के प्रति श्रद्धा भाव प्रमुख रहा है इसलिए पुस्तक के अध्ययन में केवल शब्दों में नहीं अपितु श्रद्धा भाव में भी डूबना होगा। तभी महर्षि अरविंद के दिव्य स्वरूप को समझा जा सकेगा। पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 80 पर कारावास में श्री कृष्ण चेतना के दिव्य दर्शन पर बखूबी प्रकाश डाला गया है। इस अध्याय में जब महर्षि अरविंद को कारावास की सजा दी गयी थी तब उनके लिए ये सजा भी पुरस्कार की तरह सिद्ध हो गयी क्योंकि इस कारावास की अवधि में उन्हें ईश्वर के दिव्य अनुभूतियों से साक्षात्कार हुआ। योग, साधना और ध्यान की त्रिवेणी बन गया था महर्षि अरविंद का व्यक्तित्व।

         ईश्वर जिन्हें इस संसार में किसी विशेष उद्देश्य के लिए भेजते हैं उनके लिए जीवन की कठिन और जटिल परिस्थितियां विशेष उद्देश्य की पूर्ति में बाधक नहीं सहायक बन जाती है या कह सकते हैं वरदान सिद्ध हो जाती है। पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 89 पर जेल में श्री अरविंद को हुई दिव्य अनुभूतियों के बारे में बताया गया है कि ''उनकी साधना इतनी ऊँचाई पर चली गयी कि अब दुख का कोई स्थान न रहा। दीवारों में, वृक्ष में, प्रत्येक दिखाई देने वाली भौतिक वस्तुओं में भी उन्हें श्री कृष्ण के दर्शनों की अनुभूति होने लगी।'' इसके साथ ही पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 126 पर महर्षि श्री अरविंद के 'अतिमानस' यानी मनुष्य के मन मस्तिष्क का प्रज्ञा के उच्चतम शिखर को छू लेना। इसे समझाते हुए लिखा है ''श्री अरविंद ने एक मनुष्य के मन की चार अवस्थाओं को उजागर किया है। ये चारों ऊर्ध्वगामी है। मन और अतिमानस के बीच की चार सीढ़ियां हैं, जिनमें मन के तल से प्रारंभ करे तो पहला ऊर्ध्व मन, दूसरा प्रकाशित मन, तीसरा प्रेरणात्मक मन।''

         महर्षि अरविंद से जुड़े कईं प्रेरक प्रसंगों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है जिसमें से एक महत्वपूर्ण प्रसंग पृष्ठ क्रमांक 58 पर है जिसमें श्री अरविंद द्वारा अपनी जीवन संगिनी श्री मृणालिनी देवी को पत्र लिखा गया था जो बाद में महर्षि अरविंद के विचारों और चिंतन का प्रतिबिंब साबित हुआ इस पत्र में श्री अरविंद ने तीन पागलपन के बारे में बताया पहला पागलपन जो कुछ भी हम कमाते है उस पर केवल हमारा हक नही है वह देश के लिए है। दूसरा पागलपन है भगवान् तक पहुंचने का कोई मार्ग तो होगा उसे में खोज कर रहूँगा। तीसरा पागलपन है राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा नही है यह माँ के समान है इसलिए अगर कोई माँ के सीने पर रक्तपात करता है तो हमारा कर्तव्य है उस राक्षस का वध करना।

         पुस्तक के अंत में पृष्ठ क्रमांक 128 पर जिसमें अरविंद के योग और दर्शन का सार है जो इस प्रकार है "श्री अरविंद कहते हैं कि हमें इस योग में जगत की किसी वस्तु का त्याग नही करना है। राजनीति, उद्योग, समाज, कविता, साहित्य आदि सभी कार्य करते रहेंगे परंतु हमें उन्हें एक नई आत्मा, नया रूप देना होगा। इस प्रकार इस संयोग में किसी भी तरह का त्याग नहीं करना है परंतु चेतना की सच्ची अवस्था में रहकर सभी कार्य करने है। "निःसंदेह डॉ खुशबू जांगलवा की पुस्तक महर्षि श्री अरविंद के जटिल दर्शन की सरल व्याख्या है।

    (श्वेता नागर)

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    (लेखिका डॉ. खुशबू जांगलवा की पुस्तक ‘क्रांति और आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता महायोगी श्री अरविंद’ म. प्र. साहित्य अकादमी द्वारा प्रथम कृति अनुदान योजना के अंतर्गत चयनित और संदर्भ प्रकाशन, भोपाल द्वारा प्रकाशित की गई है)

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    Mon, 06 Nov 2023 10:23:51 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य गोष्ठी : रचनात्मकता के साथ भावपूर्ण अभिव्यक्ति की हो रही पहचान, 'सुनें सुनाएं' के चौदहवें सोपान में पढ़ी गईं 10 रचनाकारों की रचनाएं https://acntimes.com/Compositions-of-10-composers-presented-in-the-14th-episode-of-Sune-Sunaye https://acntimes.com/Compositions-of-10-composers-presented-in-the-14th-episode-of-Sune-Sunaye एसीएन टाइम्स @ रतलाम । किसी भी मनुष्य की पहचान उसकी रचनात्मकता से होती है। यह प्रसन्नता की बात है कि रतलाम में रचनात्मक रुझान के व्यक्ति अपने भीतर के रचनाकार को बाहर ला रहे हैं और अपनी प्रिय रचनाओं को प्रस्तुत कर शहर में सृजनशील वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे रचनात्मक रुझान वाले साथियों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति की पहचान भी हो रही है। उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के 14 वें सोपान में उभर कर सामने आए।

    शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए निरंतर चलाए जा रहे रचनात्मक आयोजन का 14वां सोपान जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल पर आयोजित किया गया। इस में विभिन्न आयु वर्ग के दस साथियों ने अपनी प्रिय रचना का पाठ कर सुखद अहसास कराया। बेबी दिशिता वशिष्ठ द्वारा कैलाश वशिष्ठ की रचना 'गली-गली में शोर’ सुनाया का पाठ किया। इरफ़ान शेख़ द्वारा शबीना अदीब की रचना 'दीवानगी' का पाठ, यूसुफ़ जावेदी द्वारा शमशेर बहादुर सिंह की रचना 'जो धर्म के अखाड़े हैं' का पाठ, दिनेश चंद्र उपाध्याय द्वारा बालक राम शाद की रचना 'बताओ, माजरा क्या है' का पाठ, रजनी व्यास द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी की रचना 'मुझको कहते हैं माता' का पाठ किया गया।

    इसी तरह आई.एल. पुरोहित ने डॉ. विष्णु सक्सेना की रचना 'रेत पर नाम तुमने मेरा लिख दिया', इन्दु सिन्हा ने अताउल्ला खां की रचना 'मिला न देना तमन्ना ये ख़ाक में मेरी', दुष्यन्त कुमार व्यास ने बालकवि बैरागी की मालवी रचना 'पनिहारी', मयूर व्यास ने अज्ञात रचनाकार की रचना 'ज़रा सा फर्क होता है रहने और नहीं रहने में', भावेश ताटके द्वारा श्याम सुंदर रावत की रचना 'हे भारत के राम जगो' सुनाई। इस दौरान शहर के सुधिजन मौजूद रहे।

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    Mon, 06 Nov 2023 09:28:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जिस तरह डॉ. खुशबू जांगलवा ने अपनी पुस्तक में महायोगी श्री अरविंद के बारे में बताया उसी प्रकार अन्य रचनाकार देश की विभूतियों के बारे में बच्चों को बताएं& डॉ. विकास दवे https://acntimes.com/Release-of-Dr-Khushboo-Jangalwas-book-based-on-Mahayogi-Sri-Aurobindo https://acntimes.com/Release-of-Dr-Khushboo-Jangalwas-book-based-on-Mahayogi-Sri-Aurobindo महायोगी श्री अरविंद पर केन्द्रित पुस्तक के विमोचन के दौरान मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक ने कहा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आज का समय हमारी संतति को यह बताना आवश्यक है कि हमारे महापुरुष का जीवन कितना उत्कृष्ट एवं कितना संयमित था। जिस प्रकार डॉ. खुशबू जांगलवा ने महायोगी श्री अरविंद के जीवनवृत को लिखने का प्रयत्न किया है, उसी प्रकार अन्य रचनाकारों को भी देश की महान विभूतियों को हमारे बच्चों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। इससे न केवल हम अपने देश के महापुरुषों को महिमा मंडित कर सकेंगे अपितु बच्चों को यह समझने का अवसर भी प्राप्त होगा कि विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले भी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के जीवन पर्यंत ऋणी रहे। आज हमारे जो बच्चे विदेश में रहकर अन्यत्र स्थान का महिमा मंडल करते हैं। जब वह अपनी संस्कृति से परिचित होते हैं तो अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं।

    यह बात मप्र साहित्य अकादमी भोपाल के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कही। वे डॉ. खुशबू जांगलवा की पुस्तक ‘क्रांति और आध्यत्मिक क्रांति के प्रणेता महायोगी श्री अरविंद’ के विमोचन के अवसर पर पुस्तक की विषय वस्तु पर प्रकाश डाल रहे थे। डॉ. जांगलवा की पुष्टक प्रथम कृति अनुदान के रूप में चयनित की गई है। इस मौके पर डॉ. दवे ने मालवी भाषा के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम अपनी क्षेत्रीय बोलियों से अपने विकास के नाम पर दूर होते जा रहे हैं। आवश्यकता है कि हम अपनी धरोहर को संजोकर रखें। जिस प्रकार महापुरुष हमारी धरोहर हैं उसी प्रकार हमारी क्षेत्रीय बोली व संस्कृति हमारी धरोहर है।

    मालवी में वैज्ञानिक शब्दों की भरमार- डॉ. कुलथिया

    विशिष्ट अतिथि डॉ. लीना कुलथिया ने महायोगी अरविंद के प्रारंभिक जीवनवृत पर प्रकाश डाला। उन्होंने मालवा के महाकवि कालिदास के जीवन दर्शन को प्रस्तुत किया। कलाविद् डॉ. ऋतम उपाध्याय ने महायोगी श्री अरविंद के जीवन योग एवं श्री मां की संस्कृति को देन पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मालवी संस्कृत भाषा के अत्यधिक निकट है। मालवी में वैज्ञानिक शब्दों की भी भरमार दिखाई पड़ती है।

    श्री अरविंद पर प्रकाशित पुस्तक श्रेष्ठ रचना- डॉ. चांदनीवाला

    अध्यक्षता कर रहे डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि मालवी शब्दों का उद्बोधन अपने आप में अद्भुत मिठास से भरा हुआ है। उन्होंने विमोचित पुस्तक के महत्व को प्रतिपादित किया, उसे एक श्रेष्ठ रचना की उपमा भी प्रदान की। कार्यक्रम महाराजा भोज कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित किया गया। आयोजक संस्था प्रमुख नरेंद्र सिंह पंवार थे। आभार प्रदर्शन सतीश नगरा ने किया। पुस्तक विमोचन के पश्चात डॉ. खुशबू जांगलवा ने सभी आगंतुक एवं संस्था के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर सभी ने डॉ. खुशबू जांगलवा को उनके इस लेखन कार्य के लिए हृदय से बधाइयां दी। 

    ये रहे उपस्थित

    कार्यक्रम में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के वरिष्ठ शरद जोशी, उमा तंवर, डॉ. शोभना तिवारी, रश्मि पंडित, वैदेही कोठारी, प्रकाश हेमावत, हरिशंकर भटनागर, डॉ. मोहन परमार, आशीष दशोत्तर, देवेंद्र वाघेला, प्रतिभा चांदनीवाला, डॉ. अभय पाठक, डॉ. स्वाति पाठक, फिल्मी गीतकार यशपाल तंवर, संजय ओझा, विनीता ओझा, राघवेद्र तंवर, सुभाषचंद्र जांगलवा, वरिष्ठ प्रबंधक एवं आध्यात्मिक चिंतक आनंद जांगलवा आदि प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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    Tue, 10 Oct 2023 23:28:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रो. अज़हर हाशमी को मिला अखिल भारतीय निर्मल वर्मा पुरस्कार&2021, मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने घर पहुंच कर किया सम्मानित https://acntimes.com/Pro-Azhar-Hashmi-received-All-India-Nirmal-Verma-Award https://acntimes.com/Pro-Azhar-Hashmi-received-All-India-Nirmal-Verma-Award -स्वास्थ्य संबंधी कारणों से भोपाल में हुए सम्मान समारोह में शामिल नहीं हो सके थे प्रो. हाशमी

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रत्नपुरी की धरा को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। मप्र साहित्य अकादमी द्वारा रतलाम के प्रो. अज़हर हाशमी को अखिल भारतीय निर्मल वर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। प्रो अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने स्वयं प्रो. हाशमी के इंदिरानगर स्थत निवास पहुंच कर शॉल-श्रीफल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। रतलाम के इतिहास में प्रो. हाशमी एकमात्र ऐसे रचनाधर्मी हैं जिन्हें अखिल भारतीय स्तर का 1 लाख रुपए का पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    मप्र शासन की मप्र संस्कृति परिषद के तहत संचालित मप्र साहित्य अकादमी द्वारा दिसंबर 2022 में साहित्य पुरस्कारों की घोषणा की गई थी। इसमें 2021 के लिए प्रो. अज़हर हाशमी का चयन उनकी कृति ‘संस्मरण का संदूक समीक्षा के सिक्के’ (संस्मरण) के लिए अखिल भारतीय निर्मल वर्मा पुरस्कार के लिए किया गया था। पुरस्कार वितरण समारोह 25 जुलाई 2023 को भोपाल में हुआ। मुख्य अतिथि अभिनेता, रंगकर्मी और साहित्यकार आशुतोष राणा, मप्र शासन की धर्म एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर सहित अन्य रहे। अस्वस्थता के कारण प्रो. हाशमी समारोह में शामिल नहीं हो सके थे। इसके चलते मप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. दवे शुक्रवार को रतलाम में प्रो. हाशमी के निवास पहुंचे और उन्हें पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर बीमा क्षेत्र के विरिष्ठ प्रबंधक एवं आध्यात्मिक चिंतक आनंद जांगलवा भी उपस्थित रहे।

    भूल नहीं पाऊंगा, ये जो सम्मान दिया है मुझको- प्रो. हाशमी

    अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में प्रो. हाशमी ने कहा कि सम्मान के लिए तो सिर्फ एक लौंग-इलायची भी काफी होती है। परंतु अकादमी के निदेशक डॉ. दवे द्वारा इस सम्मान का निर्णय अपने मन, आत्मा और ज्यूरी के माध्यम से पूरी निष्पक्षता के साथ किया गया। इनके इस कर्तव्य पालन के लिए मैं आभारी व्यक्त करता हूं। प्रो. हाशमी ने कहा कि शब्द के साधक तो बहुत होते हैं, मैं सिर्फ मामूली सा सिपाही हूं। इस सिपाही का साहित्य के सेनापति ने विकास दवे के रूप में सम्मान किया, इसके लिए भी मैं आभारी व्यक्त करता हूं। हाशमी ने कविता के माध्यम से सम्मान को अविष्मरणीय बताते हुए एक लाख रुपए के पुरस्कार एवं नेह-स्नेह के प्रतिदान रूपी प्रशस्ति-पत्र और शॉल-श्री के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि- ‘नेह का दान दिया है मुझको, स्नेह प्रतिदान दिया है मुझको, मैं इसे भूल नहीं पाऊंगा, ये जो सम्मान दिया है मुझको।‘

    प्रो. हाशमी जैसा कलमकार ही इस सम्मान को लेने का अधिकारी- डॉ. दवे

    साहित्य अकादमी का स्व. निर्मल वर्मा के नाम पर जो सम्मान मिलता है वह अत्यंत प्रतिष्ठा पूर्ण सम्मान है। प्रो. हाशमी जैसा ही कोई कलमकार इस सम्मान को लेने का अधिकारी है। उनकी कृति पर आधारित यह सम्मान है। साहित्य अकादमी के लिए यह दुर्भाग्य की बात रही कि एक अच्छे समारोह में जिसमें आशुतोष राणा, संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर सहित अन्य उपस्थित थे, उसमें स्वास्थ्य के कारण प्रो. हाशमी शामिल नहीं हो सके। हम चाहते थे कि वे उस समारोह में भोपाल आकर सम्मान ग्रहण करें। मुझे लगा कि अकादमी को स्वयं घर पहुंच कर हाशमी जी का सम्मान करना चाहिए, इसी निमित्त आज यहां आया। यह अकादमी, निदेशक और मेरे जीवन का सबसे सौभाग्यशाली क्षण है कि मैं प्रो. हाशमी के सम्मान को यहां तक ला पाया हूं। मैं निश्चित तौर पर एक पोस्टमैन की भूमिका में हूं, इस भूमिका को कितना निभा पाया पता नहीं। यह तय है कि मैं हाशमी जी की लेखनी को प्रणाम करने का यह अवसर चूकना नहीं चाहता था।

    ‘रामवाला हिंदुस्तान चाहिए’ कविता हुई लोकप्रिय, ‘बेटियां’ व ‘मां’ हुई सम्मानित

    बता दें कि, 13 जनवरी 1950 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के ग्राम पिड़ावा में जन्मे अज़हर हाशमी संत परंपरा के वाहक एवं भारतीय संस्कृति के अध्येता, ओजस्वी वक्ता, प्रखर लेखक, साहित्यकार एवं प्रवचनकार हैं। राष्ट्रीय स्तर की व्याख्यानमालाओं में व्याख्यान देने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के कवि भी हैं। हाशमी की कविताएं दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से प्रसारित होती रही हैं। 'राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए' कविता बहुत लोकप्रिय हुई। आपकी कविता 'बेटियां पावन दुआएं' के साथ म. प्र. शासन ने 5 अक्टूबर 2011 को ‘बेटी बचाओ अभियान’ की शुरुआत की थी। 'मां' कविता के लिए उत्तर प्रदेश के राज्यपाल तथा भारत के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू द्वारा 'विशिष्ट काव्य पुरस्कार' से सम्मानित हो चुके प्रो. हाशमी को 12 अगस्त 2011 को म.प्र. के राज्यपाल द्वारा भी सम्मानित किया गया था। भारत-श्री (1991) छत्तीसगढ़, अहिन्दी सेवी सम्मान (1996) म.प्र. एवं सुभाष सम्मान से सम्मानित। म.प्र. बोर्ड की कक्षा 10वीं की हिन्दी की पाठ्यपुस्तक (नवनीत) में सम्मिलित 'बेटियां पावन दुआएं' प्रदेश के हजारों विद्यार्थी हर साल पढ़ते हैं।

    (अखिल भारतीय निर्मल वर्मा पुरस्कार-2021 से पुरस्कृत प्रो. अज़हर हाशमी की कृति।)

    एकमात्र ऐसे व्यक्ति जिन पर जीवित रहते 3 पीएचडी हुईं

    प्रो. हाशमी की अब तक 8 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें 'अपना ही गणतंत्र है बंधु', 'सृजन के सह-यात्री', 'मैं भी खाऊँ, तू भी खा', 'संस्मरण का संदूक समीक्षा के सिक्के' और ‘मामला पानी का’ प्रमुख हैं। राजस्थान पत्रिका एवं पत्रिका समाचार पत्र के नियमित लेखक और 'नवभारत' अखबार के स्तम्भकार। 1980 में 4 सप्ताह की संयुक्त राज्य अमेरिका (यू.एस.ए.) की यात्रा हेतु रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 305 के द्वारा ग्रुप स्टडी एक्सचेंज के अन्तर्गत चयनित हुए थे। प्रो. हाशमी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनके जीवित रहते तीन पीएचडी हो चुकी हैं। प्रो. हाशमी के गीतों पर मंजु शुक्ला ने 2006 में वि. वि. उज्जैन से डॉ. हरिमोहन बुधौलिया के मार्गदर्शन में पीएचडी की। उनके व्यंग्य पर मंशाराम बघेल ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से पंजुला जोशी ने और हिंदी ग़ज़ल पर पूनम यादव ने बुंदेलखंड वि. वि. झांसी से डॉ. डी. पी. सिंह के मार्गदर्शन में पीएचडी की।

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    Fri, 06 Oct 2023 20:37:46 +0530 Niraj Kumar Shukla
    आधी आबादी पर केंद्रित रहा ‘सुनें सुनाएं’ का 13वां सोपान, 9 महिलाओं ने अपने प्रिय रचनाकार की रचना सुनाई https://acntimes.com/9-women-recited-composition-in-the-13th-episode-of-Sune-Sunaye https://acntimes.com/9-women-recited-composition-in-the-13th-episode-of-Sune-Sunaye एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हमारी सनातन संस्कृति में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। देश और दुनिया में आज उसी नारी शक्ति को उनके अधिकार देने पर बहस हो रही है।  ऐसे में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ हुए 'सुनें सुनाएं' के तेरहवें सोपान में इसी आधी आबादी ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया। किसी ने पिता और बेटी का संबंध बताया तो किसी ने नए कृष्ण के आगमन की आवश्यकता पर बल दिया। किसी ने कहा आसान नहीं होता नारी से प्रेम करना।

    सुनें सुनाएं का तेरहवां सोपान 1 अक्टूबर 2023 (रविवार) को जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (एनैक्सी प्रथम तल), रतलाम में संपन्न हुआ। पहली बार सुनें सुनाएं का यह सोपान सिर्फ महिलाओं पर केंद्रित रहा। आधी आबादी का प्रतीक नीता गुप्ता ने अटल बिहारी वाजपेयी की रचना ‘उमर की ऐसी तैसी...’, सुशीला भाटी कवि जुझार सिंह भाटी की रचना ‘मुझको बहुत भाती है तेरी बिंदिया...’ प्रस्तुत की। आशा श्रीवास्तव ने संजय सिंह की रचना ‘बाबूजी...’ सुनाते हुए पिता और बेटी के रिश्ते की खूबसूरती बताई। रीता दीक्षित ने कवि प्रदीप की रचना ‘चलो चलें मां...’, सीमा बोथरा ने रश्मि गुप्ता की रचना ‘नया कृष्ण आना होगा...’, अर्चना दलाल ने सविता पाटिल की रचना ‘आत्मविश्वास...’, आशारानी उपाध्याय ने गीतकार एवं शायर सिद्दीक रतलामी की रचना ‘गैरों को जाना पहचाना...’ का पाठ किया। योगिता राजपुरोहित ने अनुपमा भगत की रचना ‘आसान नहीं होता...’ सुनाई तो सुशीला सिंह ने रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘क्षमा शोभती उस भुजंग को...’ का पाठ किया।

    यूसुफ जावेदी का ऐसा मना जन्मदिन

    इस मौके पर कवि एवं रंगकर्मी एडवोकेट यूसुफ जावेदी का जन्मदिन भी सेलिब्रेट किया गया। उन्हें काव्यात्मक बधाई और शुभकामना दी गई। पूर्व प्राचार्य ओमप्रकाश मिश्र ने यूसुफ जावेदी की लिखी रचना और ख्यात शायद फैज अहमद फैज की रचना सुनाई। एडवोकेट कैलाश व्यास, विनोद झालानी एवं श्याम सुंदर भाटी ने भी प्रस्तुति दी।

    समय पर शुरू, समय पर विराम

    सुनें सुनाएं की खूबसूरती और सफलता की खास बात समय पालन है। यह प्रत्येक माह के पहले रविवार को आयोजित होता है। नियत समय सुबह 11 बजे शुरू होना और ठीक 12 बजे संपन्न होता है। यह सुनाने से ज्यादा सुनने वालों का प्रिय मंच है जहां रचनाधर्मी अपनी नहीं, बल्कि अपने प्रिय रचनाकारों की रचना सुनाते हैं। इसमें न भूमिका होती है और न ही अन्य प्रकार की औपचारिकताएं। यदि आप की भी ऐसे आयोजनों में रुचि है तो आप भी सुनें और सुनाएं।

    ये रहे उपस्थित

    रीता दीक्षित, कविता व्यास, सुरेश बरमेचा, संजय दलाल, अर्चना दलाल, सुशीला राठौड़, इंदु सिन्हा, रवि बोथरा, जुझार सिंह भाटी, ललित चौरड़िया, आई.एल. पुरोहित, संजय बालकृष्ण शर्मा, दुष्यंत कुमार व्यास, डॉ. प्रदीप कोठारी, विष्णु बैरागी, कीर्तिकुमार शर्मा, दीपक व्यास, नरेंद्र सिंह डोडिया, छवि नीलिमा सिंह, कमलेश शुक्ला, स्मिता शुक्ला, किरण जैन, महावीर वर्मा, आभा त्रिवेदी, राकेश पोरवाल, नीरज कुमार शुक्ला आदि उपस्थित रहे।

    13वें सोपान में किसने क्या सुनाया, जानने के लिए नीचे दिए गए वीडियो देखें, इसे लाइक, सब्सक्राइब और शेयर करें

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    Mon, 02 Oct 2023 01:36:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य विमर्श : 'सुनें सुनाएं' का तेरहवां सोपान 1 अक्टूबर को, इस बार ‘आधी आबादी’ पढ़ेगी अपनी प्रिय रचनाएं https://acntimes.com/Thirteenth-episode-of-Sunen-Sunane-on-1st-October https://acntimes.com/Thirteenth-episode-of-Sunen-Sunane-on-1st-October एसीएन टाइम्स @ रतलाम । देश और दुनिया में इस समय महिलाओं को उनके अधिकार देने पर बहस हो रही है।  ऐसे में रचनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए 'सुनें सुनाएं' ने तेरहवें सोपान को महिलाओं पर ही केन्द्रित किया है। इसमें आधी आबादी अपनी प्रिय रचनाओं का पाठ करेगी।

    'सुनें सुनाएं' का तेरहवां सोपान 1 अक्टूबर 2023, रविवार को जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (एनैक्सी प्रथम तल), रतलाम पर सुबह 11 बजे से होगा। आयोजन में नीता गुप्ता द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की रचना 'उमर की ऐसी तैसी', योगिता राजपुरोहित अनुपमा भगत की कविता 'आसान नहीं होता' का पाठ करेंगी। सुशीला भाटी द्वारा जुझारसिंह भाटी की रचना 'मुझको बहुत भाती हैं तेरी बिंदियां', आशा श्रीवास्तव द्वारा संजय सिंह की कविता 'बाबूजी' का पाठ, रीता दीक्षित द्वारा प्रदीप की रचना 'चलो चलें मां' का पाठ, सीमा बोथरा रश्मि गुप्ता की रचना 'नया कृष्णा आना होगा' का पाठ किया। रजनी व्यास द्वारा उत्कर्ष यथार्थ की रचना 'चोरियां जो कहीं दर्ज़ नहीं होतीं दरार अर्चना दलाल द्वारा सविता पाटिल की रचना 'आत्मविश्वास' का पाठ, आशारानी उपाध्याय द्वारा सिद्दीक़ रतलामी की रचना 'गैरों को जाना पहचाना मत कहना' का पाठ, सुशीला सिंह द्वारा रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना 'क्षमा शोभती उस भुजंग को' का पाठ किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम की अवधि एक घंटा सुबह 11 बजे से 12 बजे तक तय है। आयोजन के प्रारंभ में रचनाओं का पाठ होता है और शेष समय में रचनाओं पर सार्थक विमर्श। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के रचनात्मक अभिरुचि के साथियों से उपस्थिति का आग्रह किया है।

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    Thu, 28 Sep 2023 08:24:17 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्यकार अजहर हाशमी की पुस्तक 'मुक्तक शतक' का पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने किया विमोचन, मुक्तकों को बताया ‘एनर्जी टॉनिक’ https://acntimes.com/Dr-Kranti-Chaturvedi-released-litterateur-Azhar-Hashmis-book-Muktak-Shatak https://acntimes.com/Dr-Kranti-Chaturvedi-released-litterateur-Azhar-Hashmis-book-Muktak-Shatak एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रख्यात साहित्यकार और चिंतक प्रो. अजहर हाशमी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘मुक्तक शतक’ का पर्यावरण विशेषज्ञ और लेखक डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने वर्चुअल विमोचन किया। पुस्तक, संदर्भ प्रकाशन भोपाल ने प्रकाशित की है।

    विमोचन करते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि 'मुक्तक शतक' शीर्षक से ही पता चल जाता है हाशमी जी की इस पुस्तक में शतक अर्थात एक सौ मुक्तक हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. हाशमी का लेखन बहुआयामी है। वे हिन्दी साहित्य की जिस विधा में भी लिखते हैं, अधिकारपूर्वक लिखते हैं। हाशमी जी हिन्दी भाषा में शब्दों का जो संसार रचते हैं वह अद्वितीय है। यही कारण है कि उनके भाषा-वैशिष्ट्य पर शोध-कार्य चल रहा है। मुक्तक शतक की भाषा हाशमी जी के निबंधों और आलेखों की भाषा से बिल्कुल अलग है। चार पंक्तियों की छंद बध्द रचना जिसकी दूसरी और चौथी पंक्ति तुकांत होती है, वह मुक्तक कहलाती है। पुस्तक में विविध विषयों पर लिखे गए मुक्तक नि:स्संदेह प्रेरक हैं और संप्रेषणीय भी। मुक्तक शतक का पहला मुक्तक ही सार्थक संदेश देने में सफल है जैसे- ‘इरादा नेक रखकर कोशिशें करना / निराशा की डगर लम्बी नहीं होती / सुबह का सूर्य यह संदेश देता है। अँधेरे की उमर लम्बी नहीं होती।’

    युवा पीढ़ी और हर वर्ग को प्रेरित करने वाले मुक्तक

    डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि अवसाद ग्रस्त युवा पीढ़ी में जोश और उत्साह की फिर से स्थापना करने में हाशमी जी का यह मुक्तक सरल शब्दों में सीधा संदेश दे रहा है कि-  ‘अपने गुण को आप पहचानो युवक / गुण यानी अपनी ऊर्जा जानो युवक / फिर नया इतिहास लिख सकते हो तुम / अपने मन में कुछ नया ठानो युवक।’ डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि हाशमी का मुक्तक-शतक दरअसल बहुत सरल शब्दों में जीवन-दर्शन है। उनके मुक्तक हर पीढ़ी, हर वर्ग, हर परिस्थिति के लिए कोई-न-कोई प्रेरणीय बात कहते हैं। दर्शन की गूढ़ता को हाशमी का यह मुक्तक कितनी सरलता से समझा देता है- ‘तू भलाई के भवन में वास करना छोड़ मत / ईश्वर पर तू कभी विश्वास करना छोड़ मत / लक्ष्य शुभ है तो तुझे निश्चित मिलेगा लक्ष्य / शर्त बस इतनी-सी है, प्रयास करना छोड़ मत।’

    एनर्जी टॉनिक है ‘मुक्तक शतक’

    डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि हाशमी की पुस्तक मुक्तक शतक के ये मुक्तक वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में या संगोष्ठियों में भाग लेने वालों के साथ-साथ पत्रकारों और संपादकों के लिए भी उपयोगी हैं। उन्होंने पुस्तक के आवरण पृष्ठ को आकर्षक बताते हुए संदर्भ प्रकाशन की भी सराहना की। डॉ. चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि हाशमी की यह पुस्तक ‘मुक्तक शतक' हर पाठक को पसंद आएगी क्योंकि यह एनर्जी टॉनिक की तरह है।

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    Sat, 16 Sep 2023 21:22:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सुनें सुनाएं के माध्यम से रचनाशील समाज को गढ़ने का प्रयास हो रहा सार्थक, 1 वर्ष में 1000 से अधिक लोग जुड़े आयोजन, 100 से अधिकन ने सुनाई रचनाएं https://acntimes.com/Efforts-to-create-a-creative-society-through-sunen-sunayen-are-being-fruitful https://acntimes.com/Efforts-to-create-a-creative-society-through-sunen-sunayen-are-being-fruitful 'सुनें सुनाएं' के बारहवें सोपान पर बारह प्रिय रचनाएं सुनाईं

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'सुनें सुनाएं' आयोजन ने शहर की रचनात्मक गतिविधियों में वृद्धि की है। साथ ही ऐसे लोगों को जोड़ने का प्रयास किया है जो सृजन के प्रति अपना रुझान रखते हैं, लेकिन किसी मंच पर उपस्थित नहीं हो सके थे। पिछले 1 वर्ष के दौरान 1000 से अधिक लोग इस आयोजन से जुड़े और 100 से अधिक लोगों ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया। अपनी रचना नहीं पढ़कर अपने किसी प्रिय रचनाकार की रचना पढ़ने का यह अनूठा आयोजन शहर में सभी को भा रहा है।अब शहर का सृजनात्मक माहौल मन में एक ऐसी अलख जगाता है जो सदैव एक नई प्रेरणा देती है।

    उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के बारहवें सोपान में उभर कर सामने आए। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित कार्यक्रम में बारह सुधिजन ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं को प्रस्तुत कर इस अवसर को यादगार बनाया। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए बारह सुधिजन ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं से इसे परिपूर्ण किया। आयोजन में हरिशंकर भटनागर ने डॉ. कुंवर बैचेन की रचना 'बदरी बाबुल के अंगना जइयो', सान्त्वना शुक्ला ने डॉ. हरिवंशराय 'बच्चन' की कविता ‘जो बीत गई सो बात गई’ का पाठ किया। कमलेश बैरागी ने अज्ञात रचनाकार की मालवी कविता 'मुं थने वणई दूं रंगरूट' सस्वर सुनाई। नूतन मजावदिया ने साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की  कविता ‘प्रतीक्षा में है प्रिया तुम्हारी’, अनीता दासानी 'अदा' ने श्री कृष्ण बिहारी 'नूर' की ग़ज़ल ‘ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं’ और संजय कोटिया ने गुलज़ार की रचना 'किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी' का पाठ किया।

    सेवानिवृत्त प्राचार्य जी. के. शर्मा ने दुष्यंत कुमार की पुस्तक 'साये में धूप' की गजल और उनके शेर सुनाए। डॉ. प्रदीप कोठारी ने शबीना अदीब की रचना 'ख़मोश लब हैं, झुकी हैं पलकें', अशोक तिवारी द्वारा गोपाल दास 'नीरज' की रचना ‘जितना कम सामान रहेगा’ का पाठ,  दिनेश बारोठ 'दिनेश' द्वारा नक़्श लायलपुरी की रचना 'मेरी तलाश छोड़ दें, तू मुझको पा चुका' का पाठ,  प्रतीक दलाल द्वारा भवानी प्रसाद मिश्र की रचना 'सतपुड़ा के घने जंगल' का पाठ, राधेश्याम शर्मा द्वारा जैन संत चंद्रप्रभ जी का भाव गीत 'अंतस के आकाश में चुप बैठा वह कौन' का पाठ किया गया।

    इनकी रचनात्मक मौजूदगी रही

    आयोजन को रचनात्मक उपस्थिति से डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, एडवोकेट कैलाश व्यास, अशोक तांतेड़, एडवोकेट यूसुफ जावेदी, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप व्यास, जी. के. शर्मा, नरेंद्र सिंह डोडिया, ओमप्रकाश ओझा, यशपाल व्यास, राकेश वोरा, संजय जोशी, सांत्वना शुक्ला, राजेश कुमार द्विवेदी, नीता गुप्ता, सरिता दशोत्तर, संध्या पाठक, किशोर पाठक,  राधेश्याम शर्मा, आई. एल. पुरोहित, राकेश पोरवाल, दुष्यंत कुमार व्यास, ओमप्रकाश मिश्र, नीरज कुमार शुक्ला, पद्माकर पागे, अशोक तिवारी, दिनेश बारोठ, अलक्षेन्द्र व्यास, विभा राठौड़, रूपेश राठौड़, विनोद झालानी, संजय परसाई 'सरल', ललित चौरड़िया, भावेश ताटके, नरेन्द्र सिंह पंवार, आशा श्रीवास्तव, प्रकाश सेठिया, सुरेश चौधरी, रीता दीक्षित, कविता व्यास, प्रतिभा चांदनीवाला, मंजू सेठिया, रजनी व्यास, अनीता दासानी ‘अदा’, हर्षा कोटिया, मयूर व्यास, नूतन मजावदिया, सुशीला कोठारी, डॉ. नरेंद्र कुमार गुप्ता, इष्ट दशोत्तर, डॉ. गोविंद प्रसाद डबकरा, स्वतंत्र श्रोत्रिय, जी. एस. खींची, महावीर वर्मा, विष्णु बैरागी, आशीष दशोत्तर एवं सुधिजन ने सार्थक बनाया।

    सभी रचनाधर्मियों द्वारा दी गई प्रस्तुतियां देखने और सुनने के लिए नीचे दिए गए वीडियो के प्ले बटन पर क्लिक करें

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    Sun, 03 Sep 2023 23:40:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कालजयी रचनाकारों ने रचनात्मक लोकतंत्र को मज़बूत किया, जनवादी लेखक संघ ने गीतकार शैलेंद्र और व्यंग्यकार परसाई को याद किया https://acntimes.com/Janwadi-lekhak-sangh-remembers-lyricist-Shailendra-and-satirist-Harishankar-Parsai https://acntimes.com/Janwadi-lekhak-sangh-remembers-lyricist-Shailendra-and-satirist-Harishankar-Parsai एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जनतांत्रिक मूल्यों के पक्षधर एवं फिल्मी गीतकार शैलेंद्र ने अपने गीतों में लोकतांत्रिक पक्ष को स्थापित किया। उनके गीत आज भी उनके जीवन के दर्द और आम आदमी की पीड़ाओं को व्यक्त करते हैं। आज यदि शैलेन्द्र होते तो पूरे सौ बरस के होते। उन्हें सिर्फ़ तिरालीस साल जीने का मौका मिला लेकिन उनके गीत सदियों तक ज़िंदा रहेंगे।

    उक्त विचार शैलेंद्र जन्म शताब्दी वर्ष के तहत जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में महान गीतकार शैलेन्द्र को याद करते हुए व्यक्त किए गए। सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का भी इस अवसर पर स्मरण किया गया। वरिष्ठ गीतकार हरिशंकर भटनागर की अध्यक्षता और डॉ. गीता दुबे के मुख्य आतिथ्य में आयोजित काव्य गोष्ठी की शुरुआत शैलेंद्र के गीतों पर चर्चा के साथ हुई। काव्य गोष्ठी में कीर्ति शर्मा ने शैलेंद्र का सुप्रसिद्ध गीत 'तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यकीन कर' की सस्वर प्रस्तुति दी।

    इन्होंने दी प्रभावी प्रस्तुति

    रचनाकारों ने समकालीन संदर्भ में अपनी कविताएं प्रस्तुत की। बेबी इफ़रा और गुलफिशां की प्रस्तुति को उपस्थितजन ने सराहा। वरिष्ठ कवि प्रो. रतन चौहान, श्याम माहेश्वरी, हरिशंकर भटनागर, डॉ. गीता दुबे, युसूफ जावेदी, डॉ. एन. के. शाह, सिद्दीक़ रतलामी, मुस्तफा आरिफ़, मुकेश सोनी 'सार्थक',  रामचंद्र अंबर, सुभाष यादव, दिनेश उपाध्याय, कांतिलाल मेहता,  पद्माकर पागे, श्याम सुंदर भाटी, मणिलाल पोरवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, प्रकाश हेमावत, कीर्ति शर्मा, जवेरीलाल गोयल, अरुण जोशी, मांगीलाल नगावत ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वर्तमान हालातों का ज़िक्र किया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने व्यक्त किया‌। इस अवसर पर साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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    Sun, 27 Aug 2023 18:02:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रामचंद्र मीना पोरवाल स्मृति फोटोग्राफी स्पर्धा के परिणाम घोषित, देखें किस वर्ग में कौन बना विजेता https://acntimes.com/Results-of-Ramchandra-Meena-Porwal-memorial-photography-competition-declared https://acntimes.com/Results-of-Ramchandra-Meena-Porwal-memorial-photography-competition-declared एसीएन टाइम्स @ रतलाम । विश्व फोटोग्राफी दिवस के उपलक्ष्य में पर ऑल इंडिया फोटोग्राफर फाउंडेशन नई दिल्ली (रजिस्टर्ड) एवं रोटरी क्लब रतलाम प्राइम द्वारा फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता रामचंद्र-मीना पोरवाल स्मृति में आयोजित की गई।

    फोटोग्राफी प्रतियोगिता के परिणाम गत दिवस घोषित कर दिए गए। फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश पोरवाल, क्लब अध्यक्ष हितेश सुराणा एवं सचिन गौरव ऐरन ने बताया छह वर्गों में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

    प्राप्त प्रविष्टियों में से बेहतर का चयन निर्णायकों द्वारा कर दिया गया है। निर्णायकों में अधिवक्ता एवं रंगकर्मी कैलाश व्यास, आर्टिस्ट दीपाली मूंदड़ा, समाजसेवी अर्चना सुराणा व नीतिका ऐरन ने निभाई। सभी विजेताओं को विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।

    ये रहे प्रतियोगिता के परिणाम 

    स्कूली छात्र वर्ग

    प्रथम : दिति शर्मा

    द्वितीय : देशना घोचा

    तृतीय : धनीषा सुराणा

    पुरुष वर्ग

    प्रथम : निमिष दुबे

    द्वितीय : गौतम जैन

    तृतीय : अनमोल सुरोलिया

    प्रोफेशनल वर्ग

    प्रथम : हर्ष केलवा

    द्वितीय : रजत मंडलोई

    तृतीय : अक्षत मोदी

    ओपन वर्ग

    प्रथम : हेमंत भट्ट

    द्वितीय : गौरव शर्मा

    तृतीय : अतीक चौहान

    महाविद्यालय वर्ग

    प्रथम : आभा बोथरा

    द्वितीय : वेदांत द्विवेदी

    तृतीय : तन्वी जावेद

    महिला वर्ग

    प्रथम : रीना बलदवा

    द्वितीय : रंजन माथुर

    तृतीय : प्रियंका लुनिया

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    Fri, 18 Aug 2023 01:15:57 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कागज पर उतरी कलमकार की वेदना मजबूत आंदोलन की तरह समस्या का समाधान बनती है https://acntimes.com/Ratlam-unit-of-Akhil-Bhartiya-Sahitya-Parishad-organized-poetry-seminar https://acntimes.com/Ratlam-unit-of-Akhil-Bhartiya-Sahitya-Parishad-organized-poetry-seminar अखिल भारतीय साहित्य परिषद की रतलाम इकाई ने किया काव्यगोष्ठी का आयोजन

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रचनाकार देश के सभी स्वरूप घटनाक्रमों, जन-जन की पीड़ा को शब्दों में समाहित कर, सीमा का शस्त्रधारी प्रहरी बनकर, राष्ट्रीयता की भावना जन-जन तक पहुंचाता है। शब्दभेदी बाण और आजादी के दीवानों का दृढ़ संकल्प के बल पर भारत को आजादी मिली। कलमकार की वेदना जब कागज पर उतर कर आती है तो वह एक मजबूत आंदोलन बनकर किसी समस्या का समाधान बन जाती है।

    ऐसी भावना से प्रेरित होकर अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आजादी की वर्षगांठ के पावन अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। श्री रेस्टोरेंट में काव्य गोष्ठी साहित्यिक मिलन समारोह के रूप में हुई। जुझारसिंह भाटी ने सरस्वती वंदना पढ़कर कार्यक्रम का आगाज किया। अकरम शेरानी ने शायराना अंदाज में तिरंगे को सलामी देते हुए मोहब्बत का पैगाम दिया। सुरेश माथुर, दिनेश बारोट (सरवन), रामचंद्र गहलोत ‘अंबर’, जुझार सिंह भाटी ने तिरंगे के मान सम्मान और स्वाभिमान की गाथा को अपने शब्दों में बांधते हुए गीत पेश किए। संजय परसाई, रामचंद्र फुहार, डॉ. मोहन परमार, गीता दुबे, सुभाष यादव भी काव्यपाठ किया।

    योगिता राजपुरोहित ने पर्यावरण पर केंद्रित रचना में हवा में घूरते ज़हर एवं परिंदों के दर्द को बयां किया। सतीश जोशी ने अपनी प्रतिनिधि रचना ‘आमंत्रण’ सुनाई।  हरिशंकर भटनागर ने गीत सुनाया, वैदेही कोठारी, यशपाल सिंह तंवर, इंदु सिन्हा, प्रकाश हेमावत, मुकेश सोनी ने वर्तमान हालातों को लेकर विभिन्न पक्षों को अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्त किया। संचालन हेमावत ने किया। आभार बारोट सरवन ने माना।

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    Fri, 18 Aug 2023 00:36:17 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सुनें सुनाएं का 11वां सोपान 6 अगस्त को, फ्रेंकफर्ट से आए अभिषेक भी सुनाएंगे अपनी प्रिय रचना https://acntimes.com/11th-episode-of-Sune-Sanaye-on-6th-August https://acntimes.com/11th-episode-of-Sune-Sanaye-on-6th-August एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'सुनें सुनाएं' का ग्यारहवां सोपान 6 अगस्त, रविवार को जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (एनेक्सी प्रथम तल) पर होगा। प्रातः 11 बजे होने वाले इस आयोजन में फ्रैंकफर्ट जर्मनी से आए अभिषेक सहित दस रचनाप्रेमी अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ करेंगे। 

    'सुनें सुनाएं' में किसी साथी का विदेश से आकर रचना पाठ करने का यह पहला अवसर होगा। यह रतलाम शहर की रचनाशील प्रवृत्ति को सामने रखेगा। ग्यारहवें सोपान पर रूपेश राठौर द्वारा जगदीश सोलंकी की रचना 'यूं तो साथ देने को हजारों हाथ और है' का पाठ, अनीस ख़ान द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'क्या फ़र्क पड़ता है' का पाठ, कैलाश वशिष्ठ द्वारा काका हाथरसी की रचना 'मेरठ में देखा हमने धूम धूसर कव्वाल' का पाठ, डॉ. दीप व्यास द्वारा गोपाल दास 'नीरज' की रचना 'अब तो मज़हब कोई ऐसा चलाया जाए' का पाठ किया जाएगा।

    नीता गुप्ता द्वारा निहाल सिंह की कविता- मित्रता का पाठ, अभिषेक व्यास द्वारा गोपालदास 'नीरज' की रचना 'हर मौसम सुख का मौसम है' का पाठ, डॉ. नरेन्द्र कुमार गुप्ता द्वारा सोहनलाल द्विवेदी की रचना 'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती' का, ऋतम उपाध्याय द्वारा अरविन्द की कविता 'इनविटेशन' का दिनकर द्वारा किया गया अनुवाद 'आमन्त्रण' का पाठ, सुभाष जैन द्वारा डॉ. एस.के. मिश्र की कविता 'मित्रता' का पाठ, राजेश कुमार द्विवेदी द्वारा उदय प्रताप सिंह की कविता "फूल और कली" का पाठ किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम की अवधि एक घंटा तय है। प्रारंभ में 45 मिनट रचनाओं का पाठ और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श होता है। इस आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ना है, बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करता है, वह भी बग़ैर किसी भूमिका के। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के रचना प्रेमियों से आयोजन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sat, 05 Aug 2023 21:57:55 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम के डॉ. चांदनीवाला एवं दशोत्तर साहित्य अकादमी अलंकरण से अलंकृत, अभिनेता आशुतोष राणा एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने दिया सम्मान https://acntimes.com/Ratlams-Dr-Chandniwala-and-Dashottar-Sahitya-Akademi-Awarded https://acntimes.com/Ratlams-Dr-Chandniwala-and-Dashottar-Sahitya-Akademi-Awarded एसीएन टाइम्स @ भोपाल / रतलाम । साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा रतलाम शहर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला एवं युवा साहित्यकार आशीष दशोत्तर को साहित्य अलंकरण से अलंकृत किया गया है। भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित समारोह में अभिनेता एवं लेखक आशुतोष राणा, मध्य प्रदेश की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, साहित्य अकादमी निदेशक डॉ. विकास दवे, संचालक संस्कृति अदिति कुमार त्रिपाठी ने दोनों रचनाकारों को प्रशस्ति सम्मान एवं 51-51 हज़ार रुपए की सम्मान निधि प्रदान कर सम्मानित किया।

    वर्ष 2018 का व्यंग्य सम्मान दशोत्तर को

    युवा साहित्यकार दशोत्तर को वर्ष 2018 के शरद जोशी व्यंग्य अलंकरण से अलंकृत किया गया। दशोत्तर को यह सम्मान उनके व्यंग्य संग्रह 'मोरे अवगुण चित्त में धरो' के लिए प्रदान किया गया है।

    वर्ष 2020 का कविता सम्मान चांदनीवाला को

    वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चांदनीवाला को वर्ष 2020 के श्रीकृष्ण सरल कविता अलंकरण से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मान उनकी काव्य कृति 'विरासत के फूल' के लिए प्रदान किया गया है। समारोह में वर्ष 2018 से 2021 तक के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक अलंकरण से अलंकृत साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में देशभर के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्य का मौजूद थे।

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    Thu, 27 Jul 2023 09:31:36 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अपने रिश्ते, अपना शहर और अपने मित्र सदैव प्रेरणा देते हैं& पूर्व एडीजीपी वाते https://acntimes.com/Our-relations-our-city-and-our-friends-always-inspire-us-Former-ADGP-vate https://acntimes.com/Our-relations-our-city-and-our-friends-always-inspire-us-Former-ADGP-vate एसीएन टाइम्स @ रतलाम । व्यक्ति को जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं से जितनी ताक़त नहीं मिलती उतनी ताक़त उसे उसके बीता जीवन देता है। बीते जीवन में मिले मित्रों का स्नेह, अपने शहर के गली-चौराहे और अपने रिश्तों की महक सदैव प्रेरणा देती है । मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस भी सच्चे मित्र ही देते हैं। मांगीलाल यादव भी ऐसे ही मित्र रहे जिन्होंने बहुत ख़ामोशी के साथ अपना जीवन जिया। उन्होंने अपने महत्व को कभी रेखांकित नहीं किया, फिर भी सब के दिल में अपनी जगह बनाई। 

    उक्त विचार संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी मांगीलाल यादव के स्मरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम 'कुछ यादें-कुछ बातें' में मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व एडीजीपी, लोकप्रिय शायर एवं सहपाठी विजय वाते ने कही। यादव परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने रतलाम के अपने स्कूली जीवन, महाविद्यालय में बिताए दिनों तथा उन घटनाओं का ज़िक्र किया जिनके माध्यम से उन्हें जीने की ताक़त मिली। उन्होंने कहा कि यादव जी जैसे मित्र प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होना चाहिए। ऐसे मित्र ही कुछ करने की प्रेरणा और सही मार्गदर्शन भी देते हैं। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं, अपने लेखन के विषयों एवं नौकरी के दौरान पेश आई परिस्थितियों का संदर्भ देते हुए बताया कि एक मित्र द्वारा दी गई सलाह कितनी उपयोगी होती है। 

    संवाद शैली में आयोजित इस कार्यक्रम में विष्णु बैरागी एवं आशीष दशोत्तर के सवालों का जवाब देते हुए वाते ने कहा कि सही अर्थों में मित्र वही होता है जो कभी आपको मुसीबत में न डाले, बल्कि मुसीबत से निकाले। स्व. यादव ने भी सदैव अपने साथियों को मुश्किलों से निकाला। पढ़ने की आदत डाली। भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के साहित्य से परिचित करवाया और सामाजिक दायरों को मज़बूत करने के लिए प्रेरित किया। 

    उन्होंने पुलिस की नौकरी के दौरान पेश आई परिस्थितियों में यादव द्वारा कही गई बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे संकोची स्वभाव के थे। कभी-कभी ऐसी बात कह दिया करते थे जो मन में बस जाती थी। उनकी वही बातें आज भी हमारे साथ मौजूद हैं। 

    अगर ऐसा नहीं होता...

    उपस्थितन के आग्रह पर वाते ने अपनी कुछ ग़ज़लें भी सुनाई। उन्होंने कहा 'अगर ऐसा नहीं होता, अगर वैसा हुआ होता, तो मालिक ये बता, तेरा यहां क्या क़द रहा होता।

    53 वर्ष पुराना चित्र भेंट किया 

    शुरुआत में यादव के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान जसवंत यादव एवं अशोक यादव ने वाते का स्वागत किया। यादव के सहपाठी अनीस खान ने 53 वर्ष पुराना महाविद्यालय का चित्र यादव परिवार को भेंट किया। कार्यक्रम में यादव की धर्मपत्नी, परिजन सहित सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक एवं पारिवारिक मित्र मौजूद थे।

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    Mon, 17 Jul 2023 12:36:02 +0530 Niraj Kumar Shukla
    पूर्व एडीजीपी विजय वाते 16 जुलाई को रतलाम में, मांगीलाल यादव स्मृति व्याख्यान में उद्बोधन देंगे https://acntimes.com/Former-ADGP-Vijay-Wate-in-Ratlam-on-16th-July https://acntimes.com/Former-ADGP-Vijay-Wate-in-Ratlam-on-16th-July एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजीपी) एवं लोकप्रिय शाइर विजय वाते 16 जुलाई (रविवार) को रतलाम आएंगे। वाते प्रेरक व्यक्तित्व के धनी एवं अपने सहपाठी मित्र मांगीलाल यादव की स्मृति में आयोजित व्याख्यान समारोह को सम्बोधित करेंगे।

    'कुछ यादें - कुछ बातें' शीर्षक से आयोजित व्याख्यान समारोह 16 जुलाई को सुबह 11 बजे होटल अजंता पैलेस के प्रथम तल रतलाम पर होगा। कार्यक्रम में वाते रतलाम में अपने शिक्षा काल की यादों के साथ उस दौर की स्मृतियों को साझा करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि, रचनाशील व्यक्तित्व एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विपुल जानकारियां रखने वाले स्व. मांगीलाल यादव और वाते अभिन्न मित्र रहे हैं। दोनों की शिक्षा रतलाम में साथ में ही हुई है। उस दौर की छात्र राजनीति और समयानुसार आए मानवीय संबंधों में परिवर्तन पर वाते का व्याख्यान केंद्रित रहेगा।

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    Sat, 15 Jul 2023 02:12:00 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रंग&ए&महफिल का आयोजन 15 जुलाई को, मोहम्मद रफी और किशोर कुमार को देंगे स्वरांजलि https://acntimes.com/Rang-e-Mehfil-will-be-organized-on-July-15 https://acntimes.com/Rang-e-Mehfil-will-be-organized-on-July-15 सिसौदिया सुर संगम ग्रुप का की प्रस्तुति

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सिसौदिया सुर संगम ग्रुप द्वारा 15 जुलाई को स्टेशन रोड स्थित महाराष्ट्र समाज के हाल में संगीत निशा 'रंग-ए-महफ़िल' का आयोजन किया जाएगा। इसमें सुर-साधक पार्श्व गायक मोहम्मद रफी और किशोर कुमार को स्वरांजलि देंगे। निःशुल्क होने वाले आयोजन में केवल ग्रुप के सदस्य ही प्रस्तुति देंगे।

    ग्रुप से संचालक प्रमोद सिसौदिया ने बताया कि 31 जुलाई को लीजेंडरी सिंगर मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि और 4 अगस्त को हरफनमौला सिंगर किशोर कुमार का जन्म दिवस है। इसके मद्देनजर ग्रुप द्वारा 15 जुलाई को शहरवासियों के लिए संगीत निशा का आयोजन कर दोनों कलाकारों को स्वरांजलि दी जाएगी। कार्यक्रम के सूत्रधार विजेंद्रसिंह सिसौदिया ने बताया कि शाम 5 बजे सरस्वती वंदना के साथ प्रस्तुतियां शुरू होंगी। अतिथि उद्बोधन व उनका सम्मान प्रस्तुतियों के दौरान ही होगा।

    कार्यक्रम में प्रमोद सिसौदिया, विजेंद्रसिंह सिसौदिया, भुवनेश पंडित, जलज शर्मा, मनवीर सिसौदिया, नीता गुप्ता, विजय गुप्ता, पवन भटनागर,  गोपाल बोरीवली, अकील खान, पूजा भावसार, अल्फ़िया खान, विवेक शर्मा, दीपशिखा, वंदना जलगांवकर, रेणु शर्मा आदि किशोर, रफी और लता सहित अन्य कलाकारों के गाए नगमे पेश करेंगे।

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    Sat, 15 Jul 2023 01:00:29 +0530 Niraj Kumar Shukla
    क़िताब के पन्नों से : दिलों के दरवाज़े पर दस्तक देती आवाज़& आशीष दशोत्तर https://acntimes.com/From-the-pages-of-the-book-A-voice-knocking-at-the-door-of-hearts-Ashish-Dashottar https://acntimes.com/From-the-pages-of-the-book-A-voice-knocking-at-the-door-of-hearts-Ashish-Dashottar आशीष दशोत्तर 

    आज की ग़ज़ल वक़्त के साथ चलती ग़ज़ल है। उसमें रवानी है, हालात की अक्कासी है, नए-नए मुशाहिदे हैं। आम इंसान के जज़्बात हैं और साथ ही वह ख़ास रिश्ते हैं जिन्हें अक्सर ग़ज़लों का विषय नहीं बनाया जाता रहा, मगर अब ये सारे रिश्ते भी ग़ज़ल के हमक़दम हो रहे हैं।

    ग़ज़ल एक ऐसी सिम्फ़ है जो ‘ग़मे-जानां’ से ‘ग़मे-दौरां’ की बात करती है। वक़्त ने ग़ज़ल के तेवर में कई सारी तब्दीलियां की हैं। कई सारे ख़ास मकामों तक ग़ज़ल को पहुंचाया है। यही कारण है कि आज नए-नए प्रयोग ग़ज़ल में हो रहे हैं। युवा शाइर और ग़ज़ल के प्रति अपना ख़ास रुझान रखने वाले ग़ज़लगो भवेश दिलशाद ने भी ऐसी ही कोशिश की है, पिता पर केंद्रित ग़ज़लों को एक साथ शाया करने की। ‘उंगली, कंधा, बाज़ू, गोदी’ उन्वान से हाल ही में श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई दिल्ली से आई यह क़िताब ग़ज़ल के एक ऐसे विषय को सामने ला रही है जिसे अब तक अनछुआ समझा जाता रहा। मां विषयक ग़ज़लें जितनी बहुतायत में कही जाती रहीं, पिता विषयक ग़ज़लें उतनी ही कम। यही कारण है कि इस क़िताब को तैयार करने में भवेश दिलशाद को काफी मेहनत करनी पड़ी। इस क़ाविश को उन्होंने अपनी बात में स्पष्ट भी किया है। वे कहते हैं ‘इस किताब को तैयार करने में पिता केंद्रित तकरीबन 100 ग़ज़लों से आमना-सामना हुआ। इनमें से कुछ ग़ज़लें छांटकर क़िताब तैयार की है।‘

    यह किताब दिलों पर दस्तक देती हुई आवाज़ है। इस संकलन में पिता पर केंद्रित 61 ग़ज़लकारों की ग़ज़लें शाया की गई हैं। हर ग़ज़ल का अपना रंग है, अपना मिज़ाज है। हर शे'र की अपनी शैली है‌। पिता को जिस तरह महसूस किया जाता रहा, उसी तरह हर शाइर ने कहने की कोशिश की है। हर ग़ज़ल अपने आप में मुकम्मल है। इसके साथ ही क़िताब के आख़िर में 56 अशआर भी दिए गए हैं जो हमारे वक़्त के उन महत्वपूर्ण शाइरों के हैं, जिन्होंने पिता को अपने अल्फ़ाज़ में पिरोया है। ग़ज़लों के चयन के लिए संपादक भवेश दिलशाद का शुक्रिया अदा किया जाना चाहिए जिन्होंने एक विषय पर केंद्रित इतनी ख़ूबसूरत ग़ज़लों को एकत्रित कर, उन्हें चयनित करने और फिर क़िताब की शक्ल में लाने में काफी श्रम किया।

    एक यहूदी कहावत से क़िताब की शुरुआत की गई है- ‘जब बाप औलाद को कुछ देता है दोनों हंसते हैं, औलाद  बाप को कुछ दे तो दोनों रोते हैं।’ कमोबेश यही सिलसिला भीतर की ग़ज़लों में भी दिखाई देता है। हर ग़ज़ल का ज़िक्र न करते हुए अगर कुछ अशआर को देखा जाए तो इस किताब की ख़ासियत से आम पाठक वाबस्ता हो सकता है।

    रिश्तों को अपने कलाम में बहुत खू़बसूरती के साथ ढालते रहे शाइर आलोक श्रीवास्तव कहते हैं-

    भीतर से ख़ालिस जज़्बाती और ऊपर से ठेठ पिता,

    अलग, अनूठा अनबूझा-सा इक तेवर थे बाबूजी। 

    वरिष्ठ शायर डॉ. उर्मिलेश कहते हैं-

    ‘जब मैं बच्चा था तो मेरे मास्टर वे ख़ुद बने,

    अब बुढ़ापे में मेरे बच्चों के ट्यूटर हैं पिता।’ 

    भवेश दिलशाद भी कुछ इसी अंदाज़ की बात करते हुए कहते हैं-

    कंकड़ - कंकड़ डाल घड़े में प्यास बुझाती कविता थे,

    गाते नहीं थे ट्विंकल-ट्विंकल वाली पोयम पापा जी। 

    यह मेरी खुशकिस्मती है कि पिता पर केन्द्रित इस महत्वपूर्ण क़िताब में मेरे भी कुछ अशआर शामिल हुए-

    अपने घर का रुतबा, रौनक, शानो-शौक़त पापा थे,

    सब की चाहत, सब की हिम्मत, सब की आदत पापा थे। 

    पिता ऐसा विषय है जिस पर कविताएं तो बहुत कही गईं लेकिन ग़ज़ल में पिता को बहुत कम ढाला गया। इसके जो भी कारण रहे हों मगर इस चिंता को पुस्तक की भूमिका में भी रेखांकित किया गया है। ग़ज़ल के समर्थ शाइर देवेंद्र आर्य ने भूमिका में स्पष्ट करते हुए कहा भी है ‘ग़ज़ल का शिल्प शुरू से ही महबूब से बातचीत का शिल्प रहा है, जिसमें मोहब्बत, तड़प, बेवफाई और शिकायत का इज़हार किया जाता रहा। बाद के दिनों में और ख़ासतौर पर आठवें दशक में जब हिंदी ग़ज़ल सामने आई तो ग़ज़ल के कथ्य में विस्तार आया और घर, परिवार तथा अन्य रिश्तों पर भी शेर कहे जाने लगे। ग़ज़ल का फॉर्म ही ऐसा है जिसमें शामिल हर शे'र अपने कथ्य में पूर्ण और स्वतंत्र होता है। हालांकि विषय केंद्रित ग़ज़लें जिन्हें मुसलसल ग़ज़ल कहते हैं, भी कही जाती रहीं, पर उनकी रिवायत कम मिलती है और उन्हें वह सम्मान भी नहीं मिल पाता जो उसी विषय पर कहीं किसी नज्म को मिलता है।'

    इन सबके बावजूद इस क़िताब में जो ग़ज़लें और बिखरे-बिखरे से अशआर शामिल किए गए हैं, वे इस बात की ताक़ीद करते हैं कि पिता गजलों के लिए अचरज का विषय नहीं रहा। रवायती दौर की शाइरी में भी ग़ज़लों में पिता शामिल होते रहे। यही बात इस संग्रह में शामिल वरिष्ठ शाइरों के अशआर से महसूस की जा सकती है। 

    मेराज फैज़ाबादी कहते हैं-

    मुझे थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़,

    मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते। 

    विजय वाते कहते हैं-

    आश्वासनों के रंग हैं कितने मधुर,

    यह किसी ताज़े पिता से पूछिए। 

    वसीम बरेलवी साहब का यह शे'र भी आज के बदलते समय की बानगी पेश करता है- 

    घरों की तरबियत क्या आ गई टी.वी. के हाथों में,

    कोई बच्चा अब अपने बाप के ऊपर नहीं जाता। 

    कुछ ऐसी ही बात अशोक ‘अंजुम’ भी अपनी ग़ज़ल में कहते हैं-

    ‘क्यों बुढ़ापे में मुझे लगने लगा,

    ये अजनबी सा तेरा दर बेटा।’ 

    क़िताब का हर शे'र महत्वपूर्ण है। हर शे'र का ज़िक्र किया जाए यह ज़रूरी है, मगर ज़िक्र करने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि एक अलहदा विषय पर किए गए इस प्रयास को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाया जाए। 

    एक झोंका फिर हवा का छू गया किस प्यार से,

    इस हवा के एक झोंके को बिखरना चाहिए। 

    नए-नए ख़्याल ही आज की ज़रूरत हैं और तेज़ी से बदलते समाज में गुम होते हुए रिश्तों को बचाने के लिए ऐसी कोशिशों को दूर-दूर तक जाना चाहिए। 

    आशीष दशोत्तर

    12/2, कोमल नगर, बरबड़ रोड

    रतलाम - 457001

    मो. नं. - 9827084966

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    Wed, 05 Jul 2023 22:16:49 +0530 Niraj Kumar Shukla
    10वें सोपान पर पहुंचा ‘सुनें सुनाएं’, 10 रचनाकार आज सुनाएंगे अपनी प्रिय रचनाएं, आप आएं औरों को भी लाएं ताकि बढ़ता रहे आपसी संवाद का यह सिलसिला https://acntimes.com/sunen--sunayen-tenth-step-today https://acntimes.com/sunen--sunayen-tenth-step-today एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और आपसी संवाद की परंपरा को जीवंत करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए ‘सुनें सुनाएं’ का सिलसिला जारी है। यह अब 10वें सोपान पर पहुंच चुका है। दसवां सोपान 2 जुलाई (रविवार) को होगा। इस मौके पर 10 रचनाकार अपनी प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ करेंगे।

    दसवां सोपान 2 जुलाई को सुबह 11 बजे जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (एनैक्सी प्रथम तल), रतलाम पर आयोजित होगा। इसमें में शहर के रचनाधर्मी रचना पाठ करेंगे। आयोजन में सिद्दीक़ रतलामी द्वारा साहिर लुधियानवी की नज़्म 'वो सुबह कभी तो आएगी', श्रीमती विभा राठौर द्वारा मणिशंकर आचार्य की हम सभी यात्री हैं', सुभाष यादव द्वारा हुल्लड़ मुरादाबादी की रचना 'ज्योतिष का चमत्कार' , सुशीला भाटी द्वारा माया गोविंद की रचना 'चांद साबुन से मल-मलकर नहाऊंगी' प्रस्तुत की जाएगी।

    इनके अलावा ओमप्रकाश ओझा दुष्यंत कुमार की रचना 'कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं', दीपक राजपुरोहित लक्ष्मण पाठक की रचना ‘बूंद बूंद पानी है मोती’, डॉ. दीप व्यास गीतकार गोपाल दास 'नीरज' की रचना ‘अब तो मज़हब कोई ऐसा चलाया जाए’,  कीर्ति शर्मा प्राणवल्लभ गुप्त की 'चलो, फिर आ गई बलिदान की बेला', लगन शर्मा अज्ञात रचनाकार की रचना 'उल्टी यात्रा' तथा राकेश पोरवाल कुमार विश्वास की रचना 'है तुम्हें नमन' का पाठ करेंगे।

    क्या है खास

    इस बार ख़ास यह है कि दसवें सोपान पर दस नए साथी रचना पाठ करेंगे। अब तक रचना पाठ कर चुके सभी साथी इनका अभिनन्दन करने के लिए मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की अवधि एक घंटा प्रातः 11 से 12 तक तय है। इसमें 11 से 11.45 बजे तक रचनाओं का पाठ और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श होता है। आयोजन में कोई अपनी रचना नहीं पढ़ता है बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ बगैर किसी भूमिका के करता है। 'सुनें सुनाएं' ने शहर के रचनात्मक रुचि के साथियों से आग्रह किया है कि आयोजन में उपस्थित रहकर शहर को जीवन्त बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

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    Sun, 02 Jul 2023 07:51:24 +0530 Niraj Kumar Shukla
    वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयकुमार जलज को दिया जाएगा जनवादी लेखक संघ का पहला 'दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान',  संस्था की बैठक में हुआ निर्णय https://acntimes.com/janvadi-lekhak-sangh-will-present-Danish-Aligarhi-Memorial-Award-to-Dr.-Jayakumar-Jalaj https://acntimes.com/janvadi-lekhak-sangh-will-present-Danish-Aligarhi-Memorial-Award-to-Dr.-Jayakumar-Jalaj एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभर में रतलाम का नाम रोशन करने वाले मरहूम शायर दानिश अलीगढ़ी की स्मृति में जनवादी लेखक संघ, रतलाम द्वारा 'दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान'  की स्थापना की गई है। वर्ष 2022 का प्रथम स्मृति सम्मान वरिष्ठ कवि एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार जलज को प्रदान किया जाएगा।

    यह उक्त निर्णय जनवादी लेखक संघ रतलाम की सम्मान समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जलेसं अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने की। सम्मान निर्धारण समिति में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान, यूसुफ जावेदी एवं जनवादी लेखक संघ रतलाम के सचिव सिद्दीक़ रतलामी शामिल रहे।

    जलेसं कोषाध्यक्ष कीर्ति शर्मा ने बताया कि उस्ताद शायर दानिश अलीगढ़ी ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से पूरे देशभर में बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त किया था। रतलाम में उनकी स्मृतियां बनी रहे, इस उद्देश्य से जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रतिवर्ष उनकी याद में यह सम्मान प्रदान की शुरुआत की गई है। यह सम्मान प्रतिवर्ष जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग प्रदेश कार्यसमिति सह प्रभारी सिद्दीक़ रतलामी द्वारा संयोजित होगा। वर्ष 2022 के लिए वरिष्ठ कवि एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार 'जलज' को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

    किनारे से धार तक

    डॉ. जयकुमार 'जलज'  देश के उन मूर्धन्य साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्होंने छायावादी युगीन कवियों से लेकर आधुनिक कवियों तक के साथ रचनाधर्मिता की है। उन्होंने अपने समय को रचनाओं के माध्यम से परिभाषित किया है। 'किनारे से धार तक' पुस्तक के रचयिता डॉ. जयकुमार 'जलज' ने कविता, गीत एवं संस्मरण के साथ भाषा विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की है।

    56 से अधिक संस्करण हुए प्रकाशित

    भगवान महावीर का बुनियादी चिंतन उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है, जिसका देश की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाकर 56 से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। भारतीय नाट्य शास्त्र पर डॉ. जलज के महत्वपूर्ण कार्य को देश में बहुत आदर के साथ स्वीकारा जाता है। डॉ. जलज को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, इनमें कामता प्रसाद गुरु पुरस्कार, विश्वनाथ पुरस्कार, मध्य प्रदेश सरकार का भोज पुरस्कार, हिंदी साहित्य सम्मेलन का साहित्य सारस्वत पुरस्कार भी शामिल हैं।

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    Fri, 23 Jun 2023 19:00:02 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'हम लोग' का निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि पर आधारित 'मेरे कबीर' कार्यक्रम 18 जून को, आप आएं, औरों को भी लाएं https://acntimes.com/Mere-Kabir-program-of-Hum-Log-on-June-18 https://acntimes.com/Mere-Kabir-program-of-Hum-Log-on-June-18 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से नागरिकता बोध एवं चेतना विकसित करने का प्रकल्प 'हम लोग' निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि कबीर पर केंद्रित आयोजन कर रहा है। आयोजन 18 जून (रविवार) को शाम 5:30 बजे जीडी अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर होगा।

    हम लोगसंस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन एवं सचिव ओमप्रकाश ओझा ने बताया कि हम लोग के इस आयोजन में वर्तमान समय में कबीर की प्रासंगिकता और महत्व पर केंद्रित व्याख्यान होगा। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक तथा कबीर साहित्य के गहन अध्येता डॉ. प्रकाश उपाध्याय 'मेरे कबीर' विषय पर अपना उद्बोधन प्रदान करेंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ कर सलाहकार इंदरमल जैन करेंगे।

    आयोजन के संबंध में हम लोग की बैठक आयोजित की गई। इसमें विष्णु बैरागी, डॉ. अभय पाठक, वासुदेव गुरबानी, लगन शर्मा, आशीष दशोत्तर ने आयोजन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। यह आयोजन कबीर को आज के संदर्भ में समझने तथा कबीर की आज के समय में आवश्यकता पर प्रकाश डालेगा। 'हम लोग' ने शहर के नागरिकों से आग्रह किया है कि अधिक संख्या में उपस्थित रहकर कबीर के महत्व को रेखांकित करें।

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    Thu, 15 Jun 2023 20:54:44 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जनवादी लेखक संघ की पहल, प्रतिवर्ष दिया जाए 'दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान', कालजयी कथाकारों पर केंद्रित आयोजन भी होगा https://acntimes.com/Janwadi-lekhak-sangh-will-give-Danish-Aligarhi-Smriti-Samman-every-year https://acntimes.com/Janwadi-lekhak-sangh-will-give-Danish-Aligarhi-Smriti-Samman-every-year एसीएन टाइम्स @ रतलाम ।अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभर में रतलाम का नाम रोशन करने वाले मरहूम शायर दानिश अलीगढ़ी की स्मृति में जनवादी लेखक संघ द्वारा 'दानिश अलीगढ़ी स्मृति सम्मान' की स्थापना की गई है। यह सम्मान प्रति वर्ष उल्लेखनीय साहित्यिक अवदान वाले रचनाकारों को प्रदान किया जाएगा।

    यह निर्णय जनवादी लेखक संघ रतलाम की कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जलेसं अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने की‌। जलेसं के सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने बताया कि उस्ताद शायर दानिश अलीगढ़ी ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से पूरे देशभर में बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त किया था। रतलाम में उनकी स्मृतियां बनी रहें, इस उद्देश्य से जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रति वर्ष उनकी याद में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रति वर्ष जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग प्रदेश कार्यसमिति सह प्रभारी सिद्दीक़ रतलामी द्वारा संयोजित होगा। चयन समिति में दो वरिष्ठ साहित्यकार एवं जनवादी लेखक संघ रतलाम के पदेन अध्यक्ष एवं सचिव शामिल होंगे। वर्ष 2022 एवं 2023 के लिए सम्मानित व्यक्तित्व के नाम निर्धारण हेतु गठित समिति में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान एवं यूसुफ़ जावेदी के साथ वर्तमान अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी शामिल होंगे। सम्मान समारोह में दानिश अलीगढ़ी की रचनाओं एवं उनके कार्यों का स्मरण भी किया जाएगा।

    कहानी की प्रासंगिकता पर होगा विमर्श

    जनवादी लेखक संघ की बैठक में आगामी कार्यक्रमों का निर्धारण भी किया गया। जलेसं द्वारा कालजयी कथाकारों की कहानियों पर केंद्रित कार्यक्रम आगामी माह में आयोजित किया जाएगा। इसमें उन कथाकारों को याद करते हुए वर्तमान संदर्भों में उनकी कहानी की प्रासंगिकता पर विमर्श किया जाएगा। इसके साथ ही जलेसं द्वारा हिंदवी के प्रणेता अमीर खुसरो एवं अंचल के युवा एवं महिला रचनाकारों पर केंद्रित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। बैठक में जलेस द्वारा की जाने वाली गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत कर उस पर चर्चा की गई। इस दौरान केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं वरिष्ठ कवि प्रो. रतन चौहान, यूसुफ जावेदी, कीर्ति शर्मा, मांगीलाल नगावत, आशीष दशोत्तर सहित सामान्य सदस्य भी मौजूद थे।

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    Thu, 08 Jun 2023 09:37:44 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ‘सुनें सुनाएं’ : खुद से बात करो, मुस्कुराओ, निर्रथक बातों पे ठहाके लगाओ, पहले पेड़ काटो फिर रोपने की एक्टिंग करो https://acntimes.com/sune-sunayen-and-tell-the-ninth-step-completed https://acntimes.com/sune-sunayen-and-tell-the-ninth-step-completed एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'सुनें सुनाएं' आयोजन ने शहर के रचनात्मक वातावरण को गति प्रदान की है। यह मंतव्य ‘सुनें सुनाएं’ के नौवें सोपान में उपस्थित रचनाकारों द्वारा व्यक्त किया गया। रचनाशील और सृजनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए इस कार्यक्रम का नौवां सोपान रविवार को जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल पर हुआ।

    इस आयोजन में उपस्थितजन ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया। रचना पाठ के तहत मनकामेश्वर जोशी द्वारा स्व. पीरूलाल बादल की रचना 'अगम रा झूला पिछ्म जाय' का पाठ, यशपाल सिंह तंवर द्वारा स्वयं प्रकाश उपाध्याय की रचना 'दृष्टि से सृष्टि की ओर' का पाठ, आशा श्रीवास्तव द्वारा प्रो. अज़हर हाशमी की रचना 'मध्य प्रदेश बहुत ही सुंदर' का पाठ, संजय बाफना द्वारा नायाब मिड्ढा की रचना 'मुस्कुराओ' का पाठ, डॉ. श्वेता विंचुरकर द्वारा कवि प्रदीप की रचना 'कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो' का पाठ किया।

    इसके अलावा नीरज कुमार शुक्ला ने पर्यावरण दिवस के मद्देनजर व्यंग्य ‘आओ वृक्षारोपण की एक्टिंग करें’, महावीर वर्मा ने एक रोचक पत्र पढ़ा।

    रचनाओं का पाठ कर विभिन्न रचनाओं पर सार्थक विमर्श भी किया गया। आयोजन में रचनात्मक सोच के पथिक मौजूद रहे।

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    Mon, 05 Jun 2023 01:45:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : 'सुनें सुनाएं' का नौवां सोपान 4 जून को, अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ करेंगे रचनाधर्मी https://acntimes.com/Listen-and-tell-the-ninth-step-on-June-4 https://acntimes.com/Listen-and-tell-the-ninth-step-on-June-4 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रचनाशील और सृजनात्मक वातावरण बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए "सुनें-सुनाएं" कार्यक्रम का नौवां सोपान 4 जून रविवार को जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल (एनैक्सी प्रथम तल), रतलाम पर सुबह 11 बजे होगा। इस आयोजन में उपस्थित साथी अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ करेंगे।

    रचना पाठ के तहत मनकामेश्वर जोशी पीरुलाल बादल की रचना 'अगम रा झूला पिछ्म जाय' का पाठ, यशपाल सिंह तंवर स्वयंप्रकाश उपाध्याय की रचना 'दृष्टि से सृष्टि की ओर' का पाठ, आशा श्रीवास्तव प्रो. अज़हर हाशमी की रचना 'मध्य प्रदेश बहुत ही सुंदर' का पाठ करेंगे। इसी प्रकार संजय बाफना द्वारा नायाब मिड्ढा की रचना 'मुस्कुराओ' का पाठ, अनुभि राठी द्वारा द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता 'वीर तुम बढ़े चलो', डॉ. श्वेता विंचुरकर द्वारा कवि प्रदीप की रचना 'कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो' का पाठ किया जाएगा। इसके अलावा पूर्व में रचना पाठ कर चुके कुछ साथी भी अपनी प्रिय रचना सुनाएंगे। 

    उल्लेखनीय है कि निर्धारित समय पर प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम की अवधि एक घंटा तय है। इसमें 45 मिनट रचनाओं का पाठ होगा और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श होता है। इस आयोजन में कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ता है, बल्कि अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करता है। 'सुने सुनाएं' ने शहर के रचनाशील साथियों से उपस्थिति का आग्रह किया है। 

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    Sat, 03 Jun 2023 23:09:43 +0530 Niraj Kumar Shukla
    प्रसंगवश : बच्चों का मनोविज्ञान, बाल साहित्य और डॉ. विकास दवे का योगदान https://acntimes.com/Childrens-psychology-childrens-literature-and-contribution-of-Dr-Vikas-Dave https://acntimes.com/Childrens-psychology-childrens-literature-and-contribution-of-Dr-Vikas-Dave डॉ. विकास दवे का जन्मदिवस (30 मई) पर विशेष

    श्वेता नागर

        बाल मन उस अनंत आकाश की तरह है जिसकी सीमाएं नहीं बांधी जा सकती। कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और जिज्ञासा इस अनंत आकाश में निरंतर उड़ान भरती रहती हैं। आवश्यकता है इस उड़ान को सही दिशा देने की क्योंकि इस बाल मन में ही निर्माण होता है एक संवेदनशील, चरित्रवान और संस्कारी मानव का।

        नई शिक्षा नीति 2020 में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जोड़ते हुए उनमें रचनात्मकता, नैतिक और मानवीय मूल्यों को विकसित किया जाए। बच्चों के लिए इसी आनंदमूलक, मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कारों से युक्त शिक्षा की दिशा में निरंतर अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे। बाल साहित्य के क्षेत्र में 'देवपुत्र पत्रिका' उनके प्रयासों की प्रामाणिकता का प्रतीक है जिसके वे संपादक भी हैं। देव पुत्र पत्रिका विश्व की सर्वाधिक प्रसार संख्या वाली बाल पत्रिका है। बाल साहित्य एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ निरंतर शोध कार्यों की आवश्यकता होती है क्योंकि यह सीधा बच्चे के मनोविज्ञान से जुड़ता है। इस बात का श्रेय डॉ. विकास दवे को जाता है क्योंकि उनके अथक प्रयासों से ही सन् 2002 में बाल साहित्य शोध संस्थान की स्थापना इंदौर में की गयी और यह भारत का एकमात्र बाल साहित्य शोध संस्थान है।

        नि:संदेह डॉ. दवे ने बाल साहित्य के क्षितिज को नए आयाम दिये हैं। इसके पीछे उनके अथक प्रयासों की एक अनवरत शृंखला है जहाँ उन्होंने बाल साहित्य को केवल ज्ञान या पुस्तकों के पांडित्य तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि निरंतर बच्चों के बीच में रहकर और सतत् संवाद स्थापित कर प्रायोगिक और व्यावहारिक रुप से बच्चों के मनोविज्ञान को समझने का प्रयास किया है। इसका एक उदाहरण है कि बच्चों के लिए उनकी आयु और कक्षा के अनुसार किस तरह का साहित्य उन्हें उपलब्ध करवाया जाए, यह भी एक समस्या थी और इस समस्या के समाधान लिए डॉ. दवे ने अथक प्रयास करते हुए कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक के बच्चों के लिए संदर्भ और पूर्ण विवरणों के साथ पुस्तकों की सूची तैयार की। नि:संदेह डॉ. दवे के बाल साहित्य के क्षेत्र में किये गए कार्य केवल हवाई किले बनाना नहीं है बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का अध्ययन करके उन्हें व्यावहारिक रूप में परिणत किया है। इसका प्रमाण है कि देवपुत्र पत्रिका का संपादन करते हुए उन्होंने कार्यशालाओं के माध्यम से लगभग 10 लाख बच्चों से सीधा संवाद स्थापित किया ताकि बच्चों के मनोभावों को समझ सके और बच्चों तक अपनी बात पहुँचा सके।

        चूंकि डॉ. दवे बाल साहित्यकार के साथ ही विद्यालय में शिक्षण कार्य से भी लंबे समय तक जुड़े रहे हैं इसलिए बच्चों के अध्यापन कार्य में शिक्षक की भूमिका क्या और कैसी होनी चाहिए, इस बारे में उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि 'अध्यापक की भूमिका हवा की तरह होती है। हवा के बिना पुष्प विकसित नहीं हो सकता, हवा के बगैर पुष्प को रंग नहीं मिल सकता है और न ही गंध। जबकि हवा के पास न गंध होती है और न ही रंग। यानी अध्यापक में अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देने की अद्भूत क्षमता है।'

        बाल साहित्य में डॉ. दवे के सराहनीय कार्यों की एक लंबी सूची है। स्वयं वे बाल साहित्य में पीएच.डी. हैं। लर्न बाय फन की कक्षा 6, 7 और 8 की हिंदी पाठ्य पुस्तकों में उनकी रचनाएँ सम्मिलित हैं। 50 से अधिक शोध आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। उनके द्वारा 80 से अधिक शोधार्थियों को बाल साहित्य में शोध कार्य संपन्न कराया जा चुका है। म.प्र साहित्य अकादमी से प्रकाशित साक्षात्कार पत्रिका का संपादन करते हुए बाल साहित्य पर केंद्रित शोधपरक अंक प्रकाशित किया गया जो कि बाल साहित्य में शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

        डॉ. दवे म.प्र. शासन के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा समाहित करने हेतु गठित सलाहकार समिति और गीता दर्शन को सम्मिलित करने हेतु गठित समिति के सदस्य भी है। वैसे भी डॉ. दवे बाल साहित्य में राष्ट्रीय चेतना, लोकतांत्रिक चेतना, पर्यावरण चेतना और आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं। बच्चों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाने में बाल साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वयं डॉ. दवे के शब्दों में 'व्यष्टि से समष्टि की यात्रा करवाना ही बाल साहित्य का उद्देश्य है।'

        बाल साहित्य में किये गये अपने मौलिक और प्रशंसनीय कार्यों के लिए डॉ. दवे कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं। इनमें बाल साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान कन्हैयालाल नंदन पुरस्कार, बाल साहित्य प्रेरक सम्मान, बाल साहित्य जीवन गौरव सम्मान बाल साहित्य का राष्ट्रीय सम्मान गीता भाटिया आलोचना सृजन सम्मान आदि शामिल हैं। इसके साथ ही साहित्य में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए महाराष्ट्र साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान महाराष्ट्र भारती सम्मान भी उन्हें प्राप्त हो चुका है।

        अपनी इस साहित्य यात्रा में डॉ. विकास दवे यूँ ही निरंतर कीर्तिमान स्थापित करते रहें और अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कारों से परिपूर्ण पीढ़ी तैयार करते रहें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ उन्हें जन्मदिवस (30 मई) पर बधाई!

    श्वेता नागर

    60, शुभम श्री कॉलोनी, रतलाम, मध्य प्रदेश

    मोबाइल नंबर - 7869542660

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    Tue, 30 May 2023 21:06:05 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनाकार अपनी रचना से सकारात्मक संदेश देते हुए समाज क दिशा और दिशा सुधारे में भूमिका निभाता है& रामचंद्र फुहार https://acntimes.com/Akhil-Bhartiya-Sahitya-Parishad-organized-poetry-seminar https://acntimes.com/Akhil-Bhartiya-Sahitya-Parishad-organized-poetry-seminar एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्यिक गतिविधियां वर्तमान में बहुत ज्यादा हो रही हैं। यही वजह कि आज रतलाम में सबसे ज्यादा काव्य संग्रह का प्रकाशन भी अधिक हो रहा है। यह रचनाकार की सक्रियता और सजगता का परिणाम है। प्रत्येक रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से सकारात्मक संदेश देते हुए समाज की दशा और दिशा सुधारने के लिए भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  रचनाकार को जो दिखता है वही वह लिखता है।

    उक्त उद्बोधन वरिष्ठ साहित्यकार रामचंद्र फुहार ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की काव्य गोष्ठी में दिया। आयोजन शिवगढ़ के देवेंद्र वाघेला के बिबड़ोद स्थित निवास पर हुआ। मुकेश सोनी, अकरम खां शेरानी, दिनेश उपाध्याय ने अपनी ग़ज़लें पेश कीं। सुभाष यादव ने मूछों को केंद्रीय भाव में रखकर अपनी रचना पढ़ी। कैलाश वशिष्ट ने दोहे सुनाकर काव्य को नई ऊंचाइयां प्रदान की।

    श्यामसुंदर भाटी, कैलाश वाघेला, तृप्ति सिंह सिकरारी, नरेंद्र सिंह पंवार ने काव्य के विभिन्न पहलुओं को छूते हुए अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति का संदेश और प्रेम की बात को प्रबलता के साथ सदन में रखा। संयोजक वाघेला ने भी संबोधित किया। जुझार सिंह भाटी ने व्यंग्य कविता पाठ करने के बाद मां की महिमा रूपी रचना सुनाई, यशपाल सिंह तंवर ने अपना फिल्मी अंदाज में लिखा गीत सुनाया तो प्रकाश हेमावत ने राजनीतिक परिदृश्य पर हास्य व्यंग्य पढ़ा।

    रश्मि पंडित आजाद भारती, डॉ. खुशबू जांगलवा, सतीश जोशी, सुरेश माथुर, ज़वेरीलाल गोयल ने विभिन्न पहलुओं को केंद्रीय भाव में रखकर अपनी रचना सुनाई। शाजापुर से ओमप्रकाश परमार, इंदौर से जय वाघेला, शिवगढ़ से किरण वाघेला, शारदा परमार और स्पर्श आदि उपस्थित रहे। संचालन प्रकाश हेमावत ने किया। आभार प्रदर्शन देवेंद्र वाघेला ने किया।

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    Tue, 23 May 2023 18:23:34 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कथा रंग कहानी महोत्सव में आशीष दशोत्तर 'फणीश्वर नाथ रेणु कथा पुरस्कार' से सम्मानित, कहानी 'चे&पा और टिहिया' के लिए मिला सम्मान https://acntimes.com/Ashish-Dashottar-honored-with-Phanishwar-Nath-Renu-Katha-Award https://acntimes.com/Ashish-Dashottar-honored-with-Phanishwar-Nath-Renu-Katha-Award सदी के बदलाव का बयान है आज की कहानी : अब्दुल बिस्मिल्लाह

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'कथा रंग' कहानी महोत्सव एवं अलंकरण समारोह 'लिटरेरी फेस्टिवल' में शहर के युवा कथाकार आशीष दशोत्तर को फणीश्वर नाथ रेणु कथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। गाजियाबाद में आयोजित समारोह में दशोत्तर को उनकी कहानी 'चे-पा और टिहिया' के लिए सम्मानित करते हुए सम्मान पत्र, सम्मान निधि, शाल प्रदान कर अभिनंदन किया गया। 

    सम्मान समोह में सुप्रसिद्ध लेखक अब्दुल बिस्मिल्लाह ने कहा कि जब सदी बदलती है तो कईं बदलाव लाती है। आज की कहानी इसी बदलाव की साक्षी है। वरिष्ठ कथाकार मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि ऐसे समारोह नए रचनाकारों को साहस व आगे बढ़ने का हौंसला प्रदान करते हैं। सुप्रसिद्ध समीक्षक राहुल देव ने कहा कि जीवंत भाषा शुद्धता का आग्रह करती है।

    दशोत्तर की कहानी ‘एक चेहरे वाला आदमी’ का भी हुआ उल्लेख

    कहानी महोत्सव में 'कहानी का वर्तमान' विषय पर विमर्श में लेखक व आलोचक हरियश राय ने आशीष दशोत्तर की कहानी 'एक चेहरे वाला आदमी' का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कहानी का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। रचनाकार अपने कथ्य एवं शिल्प को परिदृश्य में हो रहे बदलाव के अनुरूप गढ़ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रियदर्शन, यतेंद्र यादव, अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि साहित्य की यात्रा तब पूर्ण व सार्थक होती है जब वह आम आदमी से जुड़ती है। प्रो. असलम जमशेदपुरी ने उर्दू कहानी के इतिहास एवं वर्तमान के अंतर का विश्लेषण किया। वरिष्ठ साहित्यकार अशोक मैत्रेय, डॉ. नवीन चंद्र लोनी ने भी विचार व्यक्त किए।

    ‘लेखक से मिलिए’ और ‘छोड़ो कल की बातें’ को सराहा

    सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार आलोक पौराणिक व अभिनेता मनु कौशल मंचित 'लेखक से मिलिए' प्रस्तुति बेहद रोचक रही। प्रसिद्ध रंगकर्मी जे. पी. सिंह की नाट्य प्रस्तुति 'छोड़ो कल की बातें' भी सराहनीय रही। इस अवसर पर सुभाष चंदर, जितेन ठाकुर, नवीन कुमार भास्कर, द्विजेंद्र कुमार, आलोक यात्री, जवाहर चौधरी, कविता शर्मा व शोभनाथ शुक्ल की पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।

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    Tue, 23 May 2023 01:22:04 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रतलाम के आशीष दशोत्तर 21 मई को 'कथा रंग कहानी पुरस्कार' से होंगे सम्मानित, गाजियाबाद में ‘चे&पा और टिहिया’ कहानी के लिए मिलेगा पुरस्कार https://acntimes.com/Ashish-Dashottar-will-be-honored-with-Katha-Rang-Kahani-Award-on-May-21 https://acntimes.com/Ashish-Dashottar-will-be-honored-with-Katha-Rang-Kahani-Award-on-May-21 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कथा रंग कहानी महोत्सव एवं अलंकरण समारोह में शहर के युवा कथाकार आशीष दशोत्तर को 'कथा रंग कहानी पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा। नई दिल्ली गाजियाबाद में होने वाले समारोह में दशोत्तर को यह पुरस्कार उनकी कहानी 'चे-पा और टिहिया' के लिए दिया जाएगा। दशोत्तर की यह कहानी बाज़ारवाद और मनुष्यता के सवाल पर केन्द्रित है तथा काफी चर्चित रही है। 

    वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष चंदर ने बताया कि इस लिटरेरी फेस्टिवल में कार्यक्रम पांच सत्रों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम सत्र में ‘कहानी का वर्तमान’ विषय पर विमर्श में वरिष्ठ लेखक अब्दुल बिस्मिल्लाह के अलावा वरिष्ठ लेखक प्रियदर्शन, आलोचक व लेखक हरियश राय के अलावा चर्चित रचनाकार रेनु हुसैन भाग ले रही हैं। दूसरा सत्र लेखक से मिलिए है। इसमें मशहूर व्यंग्यकार आलोक पुराणिक व अभिनेता मनु कौशल की रोचक प्रस्तुति होगी। इसके अलावा मशहूर रंगकर्मी जे. पी. सिंह की नाट्य प्रस्तुति ‘छोड़ो कल की बातें’ भी आयोजन का हिस्सा हैं।

    इनका भी होगा सम्मान

    लिटरेरी फेस्टिवल में शामिल होने वाले अन्य चर्चित साहित्यिकारों में वरिष्ठ कथाकार मैत्रेयी पुष्पा, राहुल देव, महेश दर्पण, सूर्यनाथ सिंह, आलोक पुराणिक, प्रियदर्शन, संजय सहाय, सुधीर मिश्रा, आलोक यात्री, महेश मीणा सहित महत्वपूर्ण कथाकार शिरकत करेंगे। कार्यक्रम संयोजक ललित जायसवाल एवं आयोजक आलोक यात्री और कथा रंग के अध्यक्ष शिवराज सिंह के अनुसार अलंकरण समारोह में “कथा रंग शिखर सम्मान” तथा 'सर्जना पुरस्कार’ पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण के साथ ही ‘कथा रंग सारथी सम्मान’ भी प्रदान किया जाएगा।

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    Sat, 20 May 2023 23:49:26 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कबीर में कोई द्वैत नहीं, कोई भेद नहीं, वे जैसे भीतर, वैसे ही बाहर& पद्मश्री टिपानिया https://acntimes.com/There-is-no-duality-no-difference-in-Kabir-Tipania https://acntimes.com/There-is-no-duality-no-difference-in-Kabir-Tipania संस्था 'हम लोग' ने किया प्रसिद्ध कबीर गायक का सम्मान 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कबीर में जीवन और दर्शन अद्भुत है। उनके यहां कोई द्वैत नहीं है। कोई भेद भी नहीं। कबीर जैसे भीतर हैं, वैसे ही बाहर। कबीर जिस संसार की बात करते हैं वह संसार हमारे भीतर है। कबीर हमारे मन की सभी वासनाओं से मुक्त कर हमें एक नई रोशनी देते हैं। भटकाव से दूर कर वे एक नया मार्ग दिखाते हैं।

    उक्त विचार प्रख्यात कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने 'हम लोग' द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में कबीर के जीवन दर्शन पर अपने व्याख्यान में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कबीर की साखियां आज भी जन-जन में लोकप्रिय हैं। ये साखियां कबीर के समय की साक्ष्य हैं, जिन्हें आज दोहों के नाम से जाना जाता है। कबीर ने पाखंडों का प्रहार किया और सभी बुराइयों का विरोध किया। कबीर के राम हर मनुष्य के भीतर मौजूद हैं, उन्हें किसी परिभाषा की आवश्यकता नहीं। वे बुराइयों का प्रतिकार करते रहे यही कारण है कि आज भी वह जन जन के भीतर सफर कर रहे हैं।

    टिपानिया ने इस अवसर पर अपने कुछ कबीर भजन प्रस्तुत कर उनके मर्म से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कबीर सिर्फ़ सुनने का विषय नहीं हैं, कबीर गुनने का विषय भी हैं। उन्हें जितना समझो वे और हमें गहराई में ले जाते हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपने जीवन में कबीर से जुड़ाव होने का विस्तृत वर्णन भी किया।

    रचनात्मक गतिविधियों में अग्रसर है हम लोग

    'हम लोग' के अध्यक्ष सुभाष जैन ने पद्मश्री टिपानिया का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हम लोग द्वारा रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से निरंतर आयोजन किए जाते रहे हैं। आने वाले समय में भी समाज को मार्गदर्शन देने वाले ऐसे ही नायकों से हम लोग परिचित करवाता रहेगा। इस अवसर पर टिपानिया का 'हम लोग' की ओर से अभिनंदन किया गया।

    ये उपस्थित रहे

    समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय, डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, विष्णु बैरागी, ओम प्रकाश मिश्र, पद्माकर पागे, महावीर वर्मा, संजय परसाई, प्रकाश सेठिया, वासु गुरबानी आशीष दशोत्तर, लगन शर्मा, राधाकृष्ण चांदनीवाला, राकेश शर्मा, अशोक जैन, जय कुमार, आकाश वर्मा सहित शहर के गणमान्यजन मौजूद थे।

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    Tue, 16 May 2023 00:18:31 +0530 Niraj Kumar Shukla
    रचनाशील व्यक्ति हमेशा समाज के लिए सोचता है, डॉ. जलज समाज के प्रत्येक व्यक्ति से संवाद करने में सफल रहे& चेतन्य काश्यप https://acntimes.com/A-creative-person-always-thinks-for-the-society-Chetanya-Kashyap https://acntimes.com/A-creative-person-always-thinks-for-the-society-Chetanya-Kashyap एसीएन टाइम्स @ रतलाम । डॉ. जलज ने अपनी रचनाओं खास तौर पर अपने संस्मरणों के माध्यम से युवाओं से ही नहीं, समाज के प्रत्येक व्यक्ति से संवाद करने की कोशिश की है। वे इसमें सफल भी हुए हैं। दरअसल, एक रचनाशील व्यक्ति हमेशा समाज के लिए सोचता है। अपने जीवन के अनुभवों से वह समाज को दिशा देता है।

    यह बात विधायक चेतन्य काश्यप ने कही। वे शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयकुमार जलज के सम्मान समारोह एवं उनके संस्मरणों की पुस्तक “मैं प्राचार्य बनाके विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अनुभव से व्यक्ति बड़ा होता है। विद्यार्थियों को प्रोत्साहन की आवश्कता होती है। ऐसे व्यक्तियों से विद्यार्थी प्रेरणा ग्रहण करते हैं। काश्यप ने डॉ. जलज द्वारा लिखित पुस्तक ''भगवान महावीर का बुनियादी चिंतन'' का जिक्र करते हुए कहा कि यह पुस्तक प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश और विदेश में भी न केवल जैन धर्म के अनुयायियों के बीच बल्कि सभी वर्गों के लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने कहा कि रतलाम के सम्यक विकास की जो परिकल्पना साकार हो रही है उसमें शिक्षा और साहित्य को भी नई पहचान मिलेगी। काश्यप ने कामना की कि डॉ. जलज का मार्गदर्शन और सान्निध्य आगे भी मिलता रहेगा।

    रतलाम नगर को पढ़ने-लिखने वाला दृष्टि संपन्न नेतृत्व मिलना सौभाग्य- डॉ. जलज

    पुस्तक के लेखक डॉ. जयकुमार जलज ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजनीति जब लड़खड़ाती है तो साहित्य उसे ताकत देता है। इसलिए यदि राजनीतिक नेतृत्व साहित्यिक दृष्टि से संपन्न हो तो राजनीति की दिशा भी बदलती है। जनप्रतिनिधि यदि अच्छे होते हैं तो वहां विकास भी अच्छा होता है। डॉ. जलज ने कहा कि हम इस मायने में सौभाग्यशाली हैं कि रतलाम नगर को पढ़ने और लिखने वाला दृष्टि संपन्न नेतृत्व मिला है। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बिनोवा भावे, महात्मा गांधी आदि नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन के जितने भी बड़े नेता थे वे किसी न किसी रूप में साहित्य अथवा पत्रकारिता से जुड़े थे।

    अपने अधिकार के लिए लड़ते, संघर्ष करते विद्यार्थी अच्छे लगते हैं

    "मैं प्राचार्य बना" पुस्तक में संग्रहित अपने संस्मरणों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रशासक के रूप में विद्यार्थियों, कर्मचारियों और शिक्षकों का न केवल मुझे सहयोग मिला बल्कि उनसे बहुत कुछ सीखने को भी मिला। स्थितियां कैसी भी रही हों मैंने सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास किया। डॉ. जलज ने कहा कि विद्यार्थी अपने अधिकार के लिए लड़ते हैं, संघर्ष करते हैं, तो अच्छा लगता है। इससे यह मालूम होता है कि वे अपने हक के लिए कितने जागरूक हैं।

    रतलाम नगर को दी नई साहित्यिक पहचान- करमचंदानी

    महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष विनोद करमचंदानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि डॉ. जलज के संस्मरण भावी प्राचार्यों के लिए अनुकरणीय तो होंगे, ही पथ प्रदर्शक भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. जलज ने न केवल अपने रचना कर्म से बल्कि अपने व्यवहार और कुशल प्रशासनिक शैली से महाविद्यालय के साथ-साथ रतलाम नगर को भी नई साहित्यिक पहचान दी है। इसलिए आज उनका सम्मान करते हुए इस संस्था का भी गौरव बढ़ रहा है।

    उत्तर प्रदेश में जन्मे, मप्र को बनाया कर्मभूमि- डॉ. मिश्रा

    स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वाय. के. मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर में जन्मे डॉ. जलज ने मध्य प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बनाया। अपनी शासकीय सेवा के उत्तरार्ध में उन्होंने लगभग 23 वर्षों तक रतलाम में अपनी सेवाएं दी हैं, जिसमें 13 वर्षों तक वे कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। कई प्रादेशिक और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके डॉ. जलज उम्र के इस पड़ाव पर भी रचनात्मक रूप से सक्रिय हैं, यह बड़ी बात है।   

    शाल एवं श्रीफल से किया सम्मान

    अतिथियों द्वारा शॉल एवं श्रीफल से डॉ. जलज का सम्मान किया गया। उनके द्वारा लिखित संस्मरणों का संग्रह "मैं प्राचार्य बना" का विमोचन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय, आशीष दशोत्तर, विष्णु बैरागी, सुभाष जैन, जनभागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सुरेका, महेंद्र नाहर, गुमानमल नाहर, पूर्व प्राचार्य डॉ. संजय वाते, डॉ. कमला शर्मा, कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. कटारे, डॉ. सुरेश कटारिया एवं बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। संचालन डॉ. सी. एल. शर्मा ने किया। आभार डॉ. अर्चना भट्ट ने माना।

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    Sun, 14 May 2023 08:39:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जनवादी लेखक संघ का 'कविता के नौ रंग' का आयोजन 14 मई को, समकालीन कविता के प्रयोगों पर होगा विमर्श https://acntimes.com/Kavita-Ke-Nau-Rang-organized-on-May-14 https://acntimes.com/Kavita-Ke-Nau-Rang-organized-on-May-14 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा 'कविता के नौ रंग' कार्यक्रम का आयोजन 14 मई को किया जाएगा। आयोजन समकालीन कविता में हो रहे प्रयोग और वर्तमान में रचनाकारों द्वारा लिखी जा रही कविताओं के परिप्रेक्ष्य में होगा।

    जलेसं के कोषाध्यक्ष कीर्ति कुमार शर्मा ने बताया आयोजन रविवार को प्रातः 11 बजे शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्कूल, कोठारी वास रतलाम पर होगा। इसमें कविता के अलग-अलग तेवर से परिचित होते हुए समकालीन संदर्भ में कविता की पड़ताल की जाएगी। इसमें नौ कवियों की कविताओं में समकालीन तेवर को सुना जा सकेगा। आयोजन में वरिष्ठ कवि यूसुफ जावेदी, डॉ. गीता दुबे, रणजीत सिंह राठौर, डॉ. शोभना तिवारी, सिद्दीक़ रतलामी, इन्दु सिन्हा, योगिता राजपुरोहित, लक्ष्मण पाठक एवं संजय परसाई 'सरल' रचना पाठ करेंगे। जलेसं के वरिष्ठ सदस्य प्रो. रतन चौहान, मांगीलाल नगावत, गीता राठौर ने साहित्य प्रेमियों से उक्त आयोजन में उपस्थित होने का आग्रह किया है।

     

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    Wed, 10 May 2023 23:29:56 +0530 Niraj Kumar Shukla
    आज की रचनात्मक सोच ही भविष्य को संवारेगी, 'सुने सुनाएं' के आठवें सोपान में बड़े रचनाधर्मियों के साथ 8 वर्षीय बालिकाओं ने भी किया रचना पाठ https://acntimes.com/sune-sunayens-eighth-step-completed https://acntimes.com/sune-sunayens-eighth-step-completed एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आज की रचनात्मक सोच ही आने वाले समय में शहर को संपन्न बनाएगी। रचनाओं की प्रस्तुति के साथ नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने और नई सोच को महत्व देने से ही किसी भी शहर की साहित्यिक, सांस्कृतिक समझ बढ़ती है। 'सुनें सुनाएं' के ज़रिए यह समझ निरंतर आगे बढ़ती नज़र आ रही है। 'सुनें सुनाएं' के आठवें सोपान पर प्रस्तुत रचनाओं में नवीनता, नई शैली, नए विचार और नए संदर्भ सामने आए जो आशा जगाते हैं। उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के आठवें आयोजन में उभर कर सामने आए।

    जीडी अंकलेसरिया रोटरी हॉल में आयोजित सुने सुनाएं कार्यक्रम में रचनाधर्मियों ने अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ किया और उन पर विमर्श भी किया। आयोजन में आठ वर्षीय इफ़रा अंसारी ने सिद्दीक़ रतलामी की रचना "ये दुनिया ख़ूबसूरत हो गई है" और गुलफिशां अंसारी ने 'कहने का ग़र सलीका चाहिए' का पाठ किया। रीता दीक्षित ने मैथिलीशरण गुप्त की रचना "नर हो न निराश करो मन को" का पाठ, अलक्षेन्द्र व्यास ने अंजुम रहबर की रचना "खा ले, पी ले मौज उड़ा, कल क्या हो किसको पता" का सस्वर पाठ किया। डॉ. गीता दुबे ने पं. सूर्यकांत निराला की कविता "वह तोड़ती पत्थर" सुनाई तो अरविंद मेहता ने डॉ. विष्णु सक्सेना की रचना “हाथ अभी सिंदूरी है“ का पाठ किया।

    सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी सुरेश बरमेचा ने मुनीर नियाज़ी की रचना 'हमेशा देर कर देता हूं मैं' का पाठ, ललित चौरड़िया ने कमलेश द्विवेदी की रचना 'अनायास ही इस जीवन में' और प्रियेश शर्मा ने बल्ली सिंह चीमा के जनगीत 'ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के' का पाठ किया।

     गौरवमयी उपलब्धि पर सम्मान किया

    शहर के नाम को रोशन कर पर्वतारोहण के क्षेत्र में गौरवमयी उपलब्धि दिलवाने वाले दंपत्ति अनुराग चौरसिया एवं सोनाली परमार का 'सुनें सुनाएं' परिवार की ओर से अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही विवाह वर्षगांठ पर डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला एवं प्रतिभा चांदनीवाला का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में आठ वर्ष की दो बेटियों इफरा एवं गुलफिशां ने अपनी प्रिय रचना की प्रस्तुति पहली बार की, इस पर उनका सम्मान गुस्ताद अंकलेसरिया ने किया। ठा. रविंद्रनाथ टैगोर का स्मृति दिवस होने पर उनसे जुड़े संस्मरण पर भी चर्चा हुई।

    ये रहे उपस्थित

    इस अवसर पर डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, गुस्ताद अंकलेसरिया, सुभाष जैन, डॉ. दीप व्यास, आई. एल. पुरोहित, श्याम सुंदर भाटी, अरविंद कुमार मेहता, सुरेश बरमेचा, कैलाश व्यास, सिद्दीक़ रतलामी, राजकुमार यादव, अलक्षेंद्र व्यास, नरेंद्र सिंह पंवार, हिमांगी व्यास, प्रतिभा चांदनीवाला, डॉ. गीता दुबे, कविता व्यास, रीता दीक्षित, आशा श्रीवास्तव, स्मिता शुक्ला, अशोक तांतेड़, विनोद झालानी, प्रियेश शर्मा, नीरज कुमार शुक्ला, अनुराग चौरसिया, सोनाली परमार, ललित चौरड़िया, संजय परसाई, विष्णु बैरागी, आशीष दशोत्तर सहित 'सुनें सुनाएं' के साथी मौजूद थे।

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    Mon, 08 May 2023 00:58:13 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें&सुनाएं' का आठवां सोपान 7 मई को, अपने प्रिय रचनाकार की रचना का पाठ करेंगे रचनाधर्मी, आप भी आएं, सुनें और सुनाएं https://acntimes.com/Listen-and-tell-the-eighth-step-on-7th-May https://acntimes.com/Listen-and-tell-the-eighth-step-on-7th-May एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण को बढ़ाने के लिए निरंतर जारी प्रयास 'सुनें-सुनाएं' का आठवां सोपान 7 मई (रविवार) को होगा। आयोजन सुबह 11 बजे जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हॉल, एनेक्सी प्रथम तल रतलाम पर होगा। इसमें अपने प्रिय रचनाकारों की महत्वपूर्ण रचनाओं का पाठ एवं उन पर विमर्श किया जाएगा।

    विगत सात माह से शहर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने तथा साहित्यिक-सांस्कृतिक रुझान रखने वाले लोगों को एक साथ बैठकर विमर्श करने का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए 'सुनें -सुनाएं' आयोजन के आठवें सोपान में महत्वपूर्ण रचनाओं का पाठ होगा। आयोजन में इफ़रा अंसारी और गुलफिशां अंसारी द्वारा सिद्दीक़ रतलामी की रचना "ये दुनिया ख़ूबसूरत हो गई है" का पाठ किया जाएगा। रीता दीक्षित द्वारा मैथिलीशरण गुप्त की रचना "नर हो न निराश करो मन को" का पाठ किया जाएगा।

    इसी तरह अलक्षेन्द्र व्यास अंजुम रहबर की रचना "खा ले, पी ले मौज उड़ा, कल क्या हो किसको पता" का पाठ, डॉ. गीता दुबे पं. सूर्यकांत निराला की कविता "वह तोड़ती पत्थर" का पाठ, अरविंद मेहता डॉ. विष्णु सक्सेना की कविता “हाथ अभी सिंदूरी है“ का पाठ, सुरेश बरमेचा मुनीर नियाज़ी की रचना 'हमेशा देर कर देता हूं मैं' का पाठ, ललित चौरड़िया कमलेश द्विवेदी की रचना 'अनायास ही इस जीवन में' का पाठ और प्रियेश शर्मा बल्ली सिंह चीमा की रचना 'ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के' का पाठ करेंगे।

    समय पालन जरूरी है

    उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम की अवधि एक घंटा  सुबह 11 से 12 तक निर्धारित है। इसमें 45 मिनट तक रचनाओं का पाठ होता है और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श। आयोजन में कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ते हुए अपने प्रिय रचनाकार की रचना भी बगैर किसी भूमिका के पढ़ता है। 'सुनें-सुनाएं' ने रचनात्मकता के पक्षधर सुधिजनों से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।

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    Sat, 06 May 2023 12:41:23 +0530 Niraj Kumar Shukla
    समीक्षा : दो मिसरों में सार्थक बात कहने का हुनर... आप भी जानिए, किस शख्सियत में है यह फन https://acntimes.com/book-review-by-ashish-dashottar https://acntimes.com/book-review-by-ashish-dashottar आशीष दशोत्तर 

    ग़ज़ल का आकाश अनन्त है। दो मिसरों में अपनी बात पूर्णता के साथ कहने की ख़ूबी के कारण ग़ज़ल बहुत लोकप्रिय विधा के रुप में प्रतिष्ठित हुई है। यह अरबी और फ़ारसी के बाद हिन्दवी और उर्दू के दयारों से होती हुई हिन्दी और इतर भाषाओं में भी पहुंची। यक़ीनन साहित्य की कोई सीमा नहीं होती। किसी भी विधा का कोई दायरा नहीं होता। हर विधा उस मुकाम तक पहुंचती है जहां तक उसे समझा जाता है, सराहा जाता है और सम्मान मिलता है।

     इस लिहाज से ग़ज़ल हिंदी में भी बहुत लोकप्रिय विधा के रुप में प्रतिष्ठित हो चुकी है। हिंदी ग़ज़ल को लेकर अक्सर कई सारी बातें कही जाती है। कुछ भ्रांतियां व्याप्त हैं जैसे कि उर्दू की बहरों और हिंदी के छंद विधान में साम्यता नहीं है। अक्सर तुलना की जाती है कि उर्दू के शब्द संयोजन से हिंदी के शब्दों को भी तोला जाता है । यह मसअला आज का नहीं है। बीते वक़्त में फ़िराक़ गोरखपुरी तक कह गए हैं- " कहां ये भांग के कुल्हड़, कहां सहबा के पैमाने।"  लेकिन इस बात से शायद ही किसी को ऐतराज़ हो कि हर भाषा का अपनी सौंदर्य होता है। हर भाषा की अपनी ख़ासियत होती है। हर भाषा की मिठास होती है और हर भाषा की एक कहन शैली। उस कहन शैली के अनुसार ही उस भाषा में किसी भी विधा को समझा, देखा और पढ़ा जाना चाहिए।

    हिंदी ग़ज़ल में कई प्रयोगधर्मी रचनाकार हुए, जिन्होंने हिंदी ग़ज़ल को ग़ज़ल के पैमानों पर प्रतिष्ठित करने का सफल प्रयास किया। वरिष्ठ रचनाकार और ग़ज़ल के छांदिक अनुशासन से वाबस्ता ग़ज़लकार  श्री राजेंद्र वर्मा ने ग़ज़ल को लेकर बहुत महत्वपूर्ण प्रयोग किए हैं। उनका सद्य: प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह 'गुलमोहर' इसकी बानगी पेश करता है। संग्रह की पहली ग़ज़ल के पहले शे'र में वे कहते हैं-

     अपना जीवन चार दिनों का, खिलते हैं मुरझाते हैं, 
     वे कागज़ के फूलों जैसे, हरदम ही मुस्काते हैं। 

    और ग़ज़ल संग्रह की अंतिम ग़ज़ल का आख़री शे'र  देखिए-

     ज़िन्दगी से ऊबकर में मौत के घर आ गया, 
     क्या पता था मौत के उस पार भी है ज़िन्दगी। 

    इन दो शेरों से ही ग़ज़ल के पूरे सफ़र को समझा जा सकता है । एक ओर जहां ग़ज़लकार स्वाभाविकता की बात करता है वहीं दूसरी ओर उस कृत्रिम रचनात्मकता की बात करता है जहां मुस्कुराहट तो लंबे समय तक है मगर जान नहीं है। किसी ग़ज़ल का शेर तभी प्राणवान होता है जब वह दिलों में पहुंचे और दिल की धड़कन बन जाए। जब कोई शे'र दिल की धड़कन बन जाता है तो वह ख़ुद भले ही ख़त्म हो जाए लेकिन अपनी ख़ुशबू कई जिस्मों में बिखेर जाता है। इसके विपरीत हरदम मुस्कुराने वाले कागज़ के फूल दिलों तक नहीं पहुंच पाते सिर्फ़ नज़र तक महदूद होते हैं। और अंतिम ग़ज़ल के आख़री शे'र पर भी ग़ौर किया जाए तो वही बात फिर से सामने आती है कि खुद को ख़त्म कर अपनी रचना को इतना महत्वपूर्ण बनाना और मौत के बाद भी एक नई ज़िंदगी की उम्मीद को पाना यही किसी सफल रचनाकार का ध्येय होता है। जैसा कहा भी गया है कि "दाना ख़ाक में मिलकर गुले गुलज़ार होता है" ठीक उसी तरह एक शे'र यदि दिलों में निरंतर सफ़र करता रहे तो वह ख़त्म होने के बाद भी नए-नए संदर्भों के साथ,  नए नए रूपों के साथ और नए नए आयामों के साथ सदैव एक नई ज़िंदगी के अक्स पेश करता है।

     मैं अकेला कहां हौसला साथ है, 
     हमसफर की तरह वह चला साथ है। 
     मुझसे दुःख- दर्द छोड़े नहीं छूटता, 
     युग- युगों से वो मेरे पला साथ है। 

    संग्रह 'गुलमोहर' में उनकी सवा सौ हिंदी ग़ज़लें शामिल हैं। इन ग़ज़लों में जीवन के विभिन्न रंग दिखाई पड़ते हैं। छोटी से छोटी बहर हो या बड़ी बहर, राजेंद्र जी ने ग़ज़ल के ज़रिए अपनी बात बखूबी कही है। वे वरिष्ठ ग़ज़लकार हैं।कई संग्रह उनके प्रकाशित भी हुए हैं और कई संकलनों का संपादन भी उन्होंने किया है।

    इस ग़ज़ल संग्रह की ख़ास बात यह है कि हर ग़ज़ल के बाद उन्होंने उस ग़ज़ल के रचने का दिनांक भी उल्लेखित किया है। ज़ाहिर सी बात है कि कई रचनाओं में कुछ प्रासंगिक संदर्भों का उल्लेख भी होता है। रचनाकाल यदि हर रचना के साथ उपलब्ध होता है तो संबंधित प्रसंग को समझने में आसानी होती है। एक और ख़ास बात यह है कि हर ग़ज़ल के बाद वर्मा जी ने उस ग़ज़ल की बहर और उसका हिंदी में छंद,  दोनों का उल्लेख किया है । इसलिए इस संकलन की ग़ज़लें हिंदी छंद और उर्दू बहर में समझ विकसित करने वालों के लिए और उन्हें समझने वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। मात्राओं को लेकर एवं छंद को लेकर उन्होंने अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की है। उन्होंने अपनी बात में स्वयं यह स्पष्ट किया है कि ' संग्रह की कुछ ग़ज़लें नज्मनुमा लग सकती हैं परंतु मैं इससे दोषपूर्ण नहीं मानता। बल्कि विषयवस्तु की परिवेशगत एकरूपता के लिए सकारात्मक मानता हूं। हिंदी ग़ज़ल की पहचान कथ्य को लेकर अधिक है, इसलिए उर्दू की तरह एक ही ग़ज़ल में कई रसों का आना भी मुझे उपयुक्त नहीं लगता। ऐसा विधान हिंदी काव्यशास्त्र की रस की परस्पर योजना के अनुकूल भी नहीं है।'

     मन गांधी-सा है तो है, 
     मुश्किल जीना है तो है। 
     मज़हब में विश्वास नहीं, 
     पर अपनापा है तो है। 
     मेरे भीतर ज़िंदा है 
     स्वप्न अधूरा है तो है। 

    यहां स्पष्ट है कि उर्दू ग़ज़ल जिस मूल बात पर जोर देती है वह है रदीफ़ और काफिया । शे'र की पूर्णता महत्वपूर्ण होती है। यदि शे'र की दोनों पंक्तियों में साम्यता नहीं है, दोनों पंक्तियों से कोई बात पूर्ण नहीं हो रही है या सिर्फ़ क़ाफ़िया पैमाई की गई है तो उसे शे'र नहीं माना जाता। ग़ज़ल का हर शे'र अपने आप में पूर्ण होता है, इसलिए ग़ज़ल में कई सारे दृश्यों को, घटनाओं को चित्रित किया जा सकता है। वर्मा जी ने इस धारणा के विपरीत हिंदी छंद शास्त्र के नियमों के अनुसार ग़ज़ल के हर शे'र की तारतम्यता अन्य शे'रों से जोड़ी है। इस दृष्टि से भी इस संग्रह की ग़ज़लें पढ़ने ही नहीं समझने और सीखने वाली हैं। 

     बोलूं जो भी सच बोलूं 
     वरना क्योंकर लब खोलूं? 
     थोड़ा सा आकाश मिले 
     मैं भी अपने पर तोलूं। 

    यद्यपि ग़ज़ल तो ग़ज़ल होती है, उसे भाषाओं के दायरे में नहीं बांधा जा सकता। ठीक वैसे ही जैसे किसी भी विधा को किसी भाषा में नहीं बांधा जा सकता। यह भी सुखद है कि आज ग़ज़ल न सिर्फ़ हिंदी में बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं में भी कही जा रही है। यह ग़ज़ल की लोकप्रियता और उसकी स्वीकार्यता है। हर भाषा में जाने के बाद किसी भी विधा में कुछ परिवर्तन आना स्वाभाविक है। जिस तरह कोई विधा किसी भी भाषा को बहुत कुछ प्रदान करती है उसी तरह कोई भी भाषा किसी विधा को भी अपनी ओर से बहुत कुछ देती है। ग़ज़ल ने भी विभिन्न भाषाओं से बहुत कुछ लिया और अपने स्वरूप में परिवर्तन किया। जहां तक हिंदी ग़ज़लों की बात है, हिंदी ग़ज़लों में भाव प्रधानता प्रमुख होती है। भाव अभिव्यक्ति पर अधिक ज़ोर दिया जाता है । राजेंद्र वर्मा जी की ग़ज़लों में इस बात को महसूस भी किया जा सकता है।

     मुझको तन्हा होना था, 
     मेरा रिश्ता सच्चा था। 
     जिस पर भी विश्वास किया, 
     वह उनका ही अपना था। 

    इन ग़ज़लों में ज़िंदगी का दर्द भी उभर कर आया है। कई सारी विसंगतियां जो हमारे जीवन में शामिल हैं उन्हें ग़ज़लकार ने शेरों के माध्यम से व्यक्त किया है। यह हर रचनाकार का कर्तव्य भी है कि वह उन सभी परिस्थितियों से वाबस्ता होकर उसे अपनी विधा में ढाल कर पेश करे, जिनसे असंख्यजन पीड़ित हैं, प्रभावित हैं। इस लिहाज से ये ग़ज़लें कई सारे विषयों को अपने आप में समेटती हैं।

     युग युगांतर हम भले वंचित रहे हैं 
     पर स्वयं में पल्लवित पुष्पित रहे हैं। 
     जो स्वयं की श्रेष्ठता करते प्रचारित 
     छल प्रपंचों से वही वंदित रहे हैं। 
     कोई माने या न माने सच यही है 
     सच के पुतले झूठ के आश्रित रहे हैं। 

    इस ग़ज़ल संग्रह में वर्मा जी ने एकरुकनी ग़ज़लें भी कही हैं। दिखने में सरल, यह बहुत कठिन बहर होती है । बहुत कम शब्दों में शेर पूर्ण करना होता है। संग्रह की भूमिका में वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री हरिराम समीप ने कहा भी है' इन ग़ज़लों में विभिन्न प्रकार के हिंदी और उर्दू के छंद प्रयुक्त हुए हैं जिनकी संख्या पचास से भी अधिक है। कुछ ऐसे छंद भी हैं जिनका नामकरण नहीं हुआ है ,पर उनकी संख्या दस के अंदर ही होगी। कुछ ग़ज़लें तो एक रुकनी है। एक ग़ज़ल में सभी लघु वर्णों का प्रयोग हुआ है, यह विरल है। किसी संग्रह में छंदों का ऐसा वैविध्य मुझे पहली बार ही देखने को मिला है।' निश्चित रूप से इस वैविध्य के कारण है यह ग़ज़लें और अधिक पठनीय हो गई है।

    आप भी 
    एक ही।
    आपसे 
    लौ लगी।
    क्या कहूं 
    चित्त की।
    हर तरफ 
    तीरगी।

    परिस्थितियां यकीनन बहुत विपरीत है कलमकार को अपनी कलम चलाने के पहले दस बार सोचना पड़ता है कहने के लिए उसके सामने आकाश खोला है मगर कई पिंजरे उसके ऊपर मंडरा रहे हैं। यदि रचनाकार इन सब बातों से अपने आप को अलग रखे तो उसका दायित्व पूरा नहीं होता। राजेंद्र वर्मा जी की ग़ज़लें भी अपने आप को इन परिस्थितियों से अलग नहीं रखती हैं और परिस्थितियों के साथ शामिल होकर उन बातों को मुखरता से उजागर करती है जो आज का यथार्थ है।

     दिन रात हो रहा है जनतंत्र का विरूपण, 
     सामंतवाद सेवी हर एक संस्था है। 
     राजा है नग्न लेकिन कहिए उसे सुसज्जित,

    -*-*-

     धूप खिली है माफ़ी की, 
     बन आई अपराधी की। 
     जज साहब देखो-समझो, 
     किसने क्या मनमानी की ? 
     प्रतिनायक ही अब नायक, 
     ऐसी तैसी गांधी की। 
     घर -घर झंडा फहराओ, 
     बात करो मत रोटी की। 

    ऐसे ही कई शे'र हैं जो सोचने पर विवश करते हैं और हालात की अक्कासी करते हैं‌ एक सफल रचनाकार वही होता है जो हालात पर नज़र रखे, आम आदमी की हालत को बयान करें और हालाते-हाज़रा को अपनी रचनाओं के विषय में शामिल करे। राजेंद्र वर्मा जी का यह ग़ज़ल संग्रह इस मायने में कई सारे बिंदुओं को छूता है। कई सारी आशाओं को जगाता है।

    12/2, कोमल नगर, 
     बरबड़ रोड, 
     रतलाम - 457001 
     मो.नं. - 982708496

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    Thu, 04 May 2023 13:07:09 +0530 Niraj Kumar Shukla
    त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय में व्याख्यान 4 को, रतलाम के डॉ. चांदनीवाला बताएंगे महाविद्यायों की प्रतीकात्मकता https://acntimes.com/Dr-Chandniwala-will-address-lecture-4-at-Triveni-Art-and-Archaeological-Museum https://acntimes.com/Dr-Chandniwala-will-address-lecture-4-at-Triveni-Art-and-Archaeological-Museum एसीएन टाइम्स @ रतलाम । त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय के स्थापना के सात वर्ष के उपलक्ष्य में 4 मई 2023 को व्याख्यानमाला का आयोजन होगा। इसमें प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला 10 महाविद्याओं की प्रतीकात्मकता पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

    व्याख्यान 4 मई को जयसिंहपुरा उज्जैन स्थित संग्रहालय सभागृह में होगा। डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला पूर्व में भी कई विषयों पर अनेक स्थानों पर अपना ओजस्वी व्याख्यान दे चुके हैं। डॉ. चांदनीवाला को शिक्षक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, डॉ. सुलोचना शर्मा, ओ. पी. मिश्रा, गोपाल जोशी, कृष्णचंद्र ठाकुर, दिलीप वर्मा, नरेंद्रसिंह राठौड़, राधेश्याम तोगड़े, रमेशचंद्र उपाध्याय, वीणा छाजेड़, भारती उपाध्याय, प्रतिभा चांदनीवाला, दशरथ जोशी, अनिल जोशी, मदनलाल मेहरा, मिथिलेश मिश्रा, कविता सक्सेना, रक्षा के. कुमार, नूतन मजावदिया, अंजुम खान, मनोहर प्रजापति, कमल सिंह राठौड़ आदि ने बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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    Wed, 03 May 2023 23:10:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्यंग्य के पंच&प्रपंच : विद्रूपताओं और विसंगतियों पर कम शब्दों में गंभीर बात और तीखे प्रहार करते हैं व्यंग्य& गोविन्द सेन https://acntimes.com/Satire-hits-hard-in-few-words-Govind-Sen https://acntimes.com/Satire-hits-hard-in-few-words-Govind-Sen जनवादी लेखक संघ का व्यंग्य विधा पर अनूठा आयोजन, रचनाकारं ने दागे अपने तीखे व्यंग्य बांण

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । व्यंग्य विधा कम शब्दों में गंभीर बात और तीखे वार करने वाली है। समकालीन रचनाकार अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विद्रूपताओं को सामने तो रख ही रहे हैं, साथ ही उन ताकतों पर भी प्रहार कर रहे हैं जिनकी वजह से विसंगतियां पैदा हो रही हैं। व्यंग्य की यही ताकत उसे और लोकप्रिय बना रही है।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा आयोजित "व्यंग्य के पंच-प्रपंच" कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद सेन ने व्यक्त किए। समकालीन संदर्भ को व्यंग्य विधा के माध्यम से किस तरह उभारा जा रहा है और वर्तमान विसंगतियों पर एक व्यंग्यकार किस तरह करारा प्रहार कर रहा है, इसी परिप्रेक्ष्य में जनवादी लेखक संघ रतलाम द्वारा अनूठा आयोजन किया गया। व्यंग्य विधा पर केन्द्रित आयोजन में चर्चित वरिष्ठ व्यंग्यकार गोविंद सेन (मनावर), जगदीश ज्वलंत (महिदपुर), डॉ. लोकेंद्र सिंह कोट, संजय जोशी 'सजग' एवं आशीष दशोत्तर ने अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ किया। गोविन्द सेन ने अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से राजनीतिक विसंगतियों और सामाजिक एकता पर हो रहे प्रहार को रेखांकित किया।

    जगदीश ज्वलंत ने अपनी व्यंग्य रचनाओं द्वारा शिक्षा प्रणाली के विरोधाभासी पक्ष को उजागर किया। उन्होंने 'ग़रीब बच्चे' व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों को कठघरे में खड़ा किया। डॉ. लोकेन्द्रसिंह कोट ने व्यंग्य रचना 'बैताल की वापसी' के माध्यम से बाजारवाद के मकड़जाल और विकास की दौड़ में पीछे छूटते मूल्य की चर्चा की। संजय जोशी 'सजग' ने अपनी रचना में क़र्ज़ से बेहाल इंसान और उसकी जीवनशैली की बारीकियों को उजागर किया। उन्होंने अपने व्यंग्य के माध्यम से लोन संस्कृति पर भी प्रहार किए।

    आशीष दशोत्तर ने अपनी व्यंग्य रचनाओं 'बड़ा आदमी, और 'सुखहर्ता-दु:खकर्ता' के माध्यम से समाज में व्याप्त विषमताओं और विसंगतियों पर प्रहार किया। प्रस्तुत सभी व्यंग रचनाओं में तीखे शब्द और उनके पीछे छिपे गहरे अर्थों का उपस्थितजन ने आनंद लिया।

    इन्होंने भी व्यक्त किए विचार

    इस अवसर पर प्रो. रतन चौहान ने कहा कि गद्य व्यंग्य लेखन की गंभीर परंपरा एवं व्यंग्य के समकालीन रचनाकारों ने इस आयोजन में अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से समृद्ध किया है। यूसुफ जावेदी ने कहा कि व्यंग्य को लेकर रतलाम में अपनी तरह का यह अनूठा आयोजन हुआ जिसमें गद्य व्यंग्य की परंपरा से जनमानस को जोड़ने का प्रयास किया गया। रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि व्यंग्यकार वर्तमान में निरंतर व्यंग्य लेखन से जुड़े होकर देश के प्रमुख व्यंग्य आयोजनों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे रतलाम के साहित्य प्रेमी भी रूबरू हुए। अश्विनी शर्मा ने मई दिवस समारोह के संदर्भ में जानकारी दी।

    रचनाकारों का किया सम्मान

    जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने रचनाकारों का पुष्पहार से सम्मान किया। आशीष दशोत्तर को साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा 'शरद जोशी व्यंग्य सम्मान' मिलने पर शाल, श्रीफल एवं अभिनंदन-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। 

    इनकी रही उपस्थिति

    कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि श्याम माहेश्वरी, शांतिलाल मालवीय, कीर्ति शर्मा, पद्माकर पागे, मांगीलाल नगावत, इन्दु सिन्हा, डॉ. शोभना तिवारी, गीता राठौर, लता बक्षी, जुझारसिंह भाटी, नरेन्द्रसिंह पंवार, राजीव पंडित, अब्दुल सलाम खोकर, श्याम सुंदर भाटी, प्रकाश हेमावत, लक्ष्मण पाठक, सुभाष यादव, मुकेश सोनी, अनिल गोयल, मनमोहन राजावत, सत्यनारायण सोढ़ा, एम. डी. बौरासी, डॉ. दिनेश तिवारी सहित व्यंग्य प्रेमी मौजूद थे। संचालन यूसुफ जावेदी ने किया तथा आभार सिद्दीक़ रतलामी ने व्यक्त किया।

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    Sun, 30 Apr 2023 20:29:47 +0530 Niraj Kumar Shukla
    "व्यंग्य के पंच&प्रपंच" का आयोजन 30 अप्रैल को, जनवादी लेखक संघ का व्यंग्य विधा पर अनूठा प्रयास https://acntimes.com/Vyangys-ke-Panch-Prapanch-organized-on-30th-April https://acntimes.com/Vyangys-ke-Panch-Prapanch-organized-on-30th-April एसीएन टाइम्स @ रतलाम । समकालीन संदर्भ को व्यंग्य विधा के माध्यम से किस तरह उभारा जा रहा है और वर्तमान विसंगतियों पर एक व्यंग्यकार किस तरह करारा प्रहार कर रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में जनवादी लेखक संघ रतलाम "व्यंग्य के पंच-प्रपंच" का अनूठा आयोजन कर रहा है। यह 30 अप्रैल (रविवार) को सुबह 11:00 बजे महारानी लक्ष्मीबाई कन्याशाला, कोठारी वास, रतलाम पर होगा। इसमें चर्चित व्यंग्यकार अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ करेंगे।

    जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने बताया कि गद्य व्यंग्य लेखन की गंभीर परंपरा एवं व्यंग्य के समकालीन रचनाकार इस आयोजन में व्यंग्य रचनाएं पढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में वरिष्ठ व्यंग्यकार गोविंद सेन (मनावर), जगदीश ज्वलंत (महिदपुर), डॉ. लोकेंद्र सिंह कोट, संजय जोशी 'सजग' एवं आशीष दशोत्तर अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ करेंगे।

    उन्होंने बताया कि व्यंग्य को लेकर रतलाम में अपनी तरह का यह अनूठा आयोजन होगा। उक्त सभी व्यंग्यकार वर्तमान में निरंतर व्यंग्य लेखन से जुड़े होकर देश के प्रमुख व्यंग्य आयोजनों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करते रहे हैं, जिससे रतलाम के साहित्य प्रेमी भी रूबरू होंगे। नगर के सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह करते हुए प्रो. रतन चौहान, कीर्ति शर्मा, यूसुफ जावेदी, मांगीलाल नगावत ने अपेक्षा की है कि व्यंग्य केन्द्रित इस आयोजन में उपस्थित रहकर अपनी सहभागिता करें। 

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    Sun, 23 Apr 2023 10:48:13 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कालिदास का शब्दसौंदर्य व्याख्यान सह संस्कृत काव्य माधुरी का आयोजन 25 अप्रैल को, वनस्थली विद्यापीठ की प्रो. अन्जना शर्मा होंगी मुख्य वक्ता https://acntimes.com/Kalidass-Shabdsoundarya-lecture-cum-Sanskrit-poetry-Madhuri-organized-on-25th-April https://acntimes.com/Kalidass-Shabdsoundarya-lecture-cum-Sanskrit-poetry-Madhuri-organized-on-25th-April एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग, कालिदास संस्कृत अकादमी और मप्र संस्कृति परिषद द्वारा शंकराचार्य जयंती 25 अप्रैल को व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। लोकप्रिय व्याख्यानमाला के अंतर्गत होने वाली व्याख्यान का शीर्षक कालिदास का शब्दसौंदर्य सह संस्कृत काव्यमाधुरी होगा। 

    कालिदास संस्कृत अकादमी के प्रभारी निदेशक डॉ. संतोष पंड्या ने बताया आयोजन दोपहर 3 बजे शासकीय स्नातकोत्र कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रतलाम में होगा। मुख्य वक्ता वनस्थली विद्यापीठ की प्रो. अन्जना शर्मा होंगी। अध्यक्षता वरिष्ठ संस्कृत विद्वान डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला करेंगे। विशिष्ट अतिथि शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रतालम के प्राचार्य प्रो. वाय. के. मिश्रा होंगे। इस अवसर पर आमंत्रित कलाकार संस्कृतक स्तोत्रों का सांगीतिक गायन करेंगे।

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    Wed, 19 Apr 2023 22:45:36 +0530 Niraj Kumar Shukla
    संस्मरण : कबाड़ी की दुकान चलाने की तमीज़ नहीं जिनको ! आशीष दशोत्तर https://acntimes.com/Remembrance-Those-who-do-not-have-the-manners-to-run-a-scrap-shop https://acntimes.com/Remembrance-Those-who-do-not-have-the-manners-to-run-a-scrap-shop आशीष दशोत्तर

    सुकरात जब यह कहता है "यह प्रजातंत्र भी कितनी हास्यास्पद की चीज़ है। कबाड़ी की दुकान चलाने की तमीज़ नहीं जिनको, उनके हाथों में बागडोर है। सरकार ही जब अस्त-व्यस्त और विवेकहीन हो..." तो वह उस दौर की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है, जिसमें जुल्मोंसितम की इंतेहा रही। नाटक 'सुकरात के घाव' इसी तरह के संवादों के ज़रिए आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। वरिष्ठ कवि एवं नाटककार रहे श्री चंद्रकांत देवताले द्वारा ब्रेख्त की कहानी के इस नाट्य रूपांतर की साहित्य जगत में काफी चर्चा रही। यह नाटक बहुत प्रभावी है और इसका हर संवाद एक नई परिभाषा गढ़ता है। नाटक का कथानक सार्वकालिक है यही इसकी सफलता का द्योतक है।" सत्य के ख़िलाफ़ झूठ गुस्ताखी करता है, ज़िन्दगी के ख़िलाफ़ मौत। शांति के ख़िलाफ़ युद्ध गुस्ताखी है। मेरे खिलाफ़ मौन।" सुकरात का यह संवाद इस नाटक को और प्रभावी बनाता है। 

    इस नाटक का मंचन रतलाम के रंगकर्मियों ने 70 के दशक में किया था। न सिर्फ़ रतलाम और मालवा के विभिन्न शहरों में उसका सफल मंचन हुआ बल्कि भोपाल के रवींद्र भवन में भी नाटक को सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के रूप में पुरस्कृत किया गया। वह रंगकर्म का एक विलक्षण दौर था जब मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के माध्यम से विभिन्न शहरों के कलाकारों को उभारने के लिए और उनके प्रतिभाओं को जनमानस के सामने प्रस्तुत करने के लिए रचनात्मक प्रयास किए जाते थे। ऐसा ही प्रयास मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा प्रदेश के रंगकर्मियों को निखारने के लिए उस दौर में करते हुए एनएसडी प्रशिक्षित नाट्य निर्देशकों को भेजा गया। निर्देशकों द्वारा युवाओं को प्रशिक्षित कर प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए गए नाटक को भोपाल के रवींद्र भवन में प्रस्तुत करना था। उस वक़्त रतलाम में सुप्रसिद्ध निर्देशक श्री धीरेंद्र कुमार प्रशिक्षण के लिए आए थे। रतलाम के रंगकर्मियों को प्रशिक्षण देने के साथ उन्होंने प्रशिक्षण अवधि में तैयार किए जाने वाले नाटकों की पड़ताल की। बादल सरकार के कुछ नाटक देखें मगर उनकी निगाह ब्रेख्त की कहानी 'सुकरात के घाव' पर पड़ी। उन्होंने श्री देवताले से आग्रह किया कि वे इस कहानी का नाट्य रूपांतर करें। देवताले जी ने जिस शिद्दत के साथ इसका नाटक रूपांतर किया उसने इस नाटक को कालजयी बना दिया। 

    यह नाटक वाणी प्रकाशन से पुस्तकाकार प्रकाशित हुआ है। इसके मुख्य पृष्ठ पर रतलाम में ही मंचित नाटक का दृश्य है, जिसमें सुकरात की भूमिका निभाने वाले सुप्रसिद्ध रंगकर्मी श्री कैलाश व्यास दिखाई दे रहे हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन की भी एक रोचक कथा है। सत्तर के दशक में नाट्य प्रस्तुति के उपरांत यह नाटक लगभग अछूता सा रहा। बहुत बाद जब देवताले जी एक कार्यक्रम में रतलाम आए तो उन्होंने श्री कैलाश व्यास से पूछा कि, सुकरात ! तुम्हारे पास वह नाटक है क्या?' कैलाश जी ने नाटक के कई संवाद वहीं खड़े-खड़े सुना दिए- 

    "सत्य जब गिरफ़्तार हो जाता है,

    सपनों में बेदखल हो जाती हैं तमाम चीज़ें।

    अपनी जगहों से फिर सपनों को जीतकर

    जब हम खड़े होते हैं

    सत्य के सामने फिर से,

    पहचान में नहीं आती है अपनी ही चीज़े।" 

    कैलाश जी ने कहा कि यह नाटक मुझे पूरा याद भी है और इसकी मूल स्क्रिप्ट भी मेरे पास रखी है।  देवताले जी ने कहा कि मुझे वह नाटक की स्क्रिप्ट उपलब्ध करवाओ। इसे पुस्तक के रूप में छपवाएंगे। कैलाश जी ने उस नाटक की छाया प्रति उसी समय ला कर देवताले साहब को सौंपी। कुछ महीने बीते। फिर उज्जैन में कैलाश जी देवताले सर से उनके निवास पर मिलने गए। कैलाश जी को देखते ही देवताले सर कहने लगे, सुकरात ! वह स्क्रिप्ट तो फिर से खो गई है। वापस से भिजवाना। कैलाश जी ने रतलाम आ कर उस नाटक की एक और छाया प्रति देवताले साहब को भेजी। कुछ दिनों बाद देवताले साहब ने कहा कि यह  छाया प्रति इतनी हल्की है कि अक्षर स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे हैं। तुम्हें सारे डायलॉग याद हैं इसलिए इन्हें तुम व्यवस्थित रूप से लिख कर दो। 

    कैलाश जी ने स्क्रिप्ट को अपनी लेखनी से व्यवस्थित किया और इस तरह वह स्क्रिप्ट देवताले जी तक पहुंची। तब कहीं जाकर इस स्क्रिप्ट को पुस्तक के आकार में प्रकाशित किया जा सका। इस नाटक से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रसंग यह भी है कि रंग निर्देशक श्री धीरेंद्र कुमार ने एक महीने तक रतलाम में नाट्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया। उस दौरान इस नाटक को तैयार करवाया गया। इस नाटक की प्रस्तुति रतलाम के ऑफिसर्स क्लब, रेलवे ऑफिसर्स क्लब जावरा में तो हुई ही, संस्कृति परिषद द्वारा भोपाल में आयोजित नाट्य समारोह में भी इसकी प्रस्तुति को सभी ने सराहा और इस नाटक को पुरस्कृत भी किया गया। 

    आशीष दशोत्तर

    12/2, कोमल नगर

    बरवड़ रोड, रतलाम – 457001 (म.प्र.)

    मो. 982708496

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    Mon, 17 Apr 2023 09:20:25 +0530 Niraj Kumar Shukla
    संस्कृति राष्ट्र के जन&समुदाय की आत्मा होती है, भाषा साहित्य और कलाएं उसके माध्यम हैं& प्रो. डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा https://acntimes.com/Dr-Mohan-Parmars-book-Chintan-Ke-Gawaksh-se-released https://acntimes.com/Dr-Mohan-Parmars-book-Chintan-Ke-Gawaksh-se-released एसीएन टाइम्स @ रतलाम । संस्कृति किसी भी राष्ट्र के जन समुदाय की आत्मा होती है। संस्कृति में यह भी उच्चतम चिंतन का मूर्त रूप है तो भाषा साहित्य और कलाएं उसके सशक्त माध्यम है। भारतीय चिंतन धारा में संस्कृति संकल्पना अत्यंत व्यापक है। हमारे यहां संस्कृति को पूर्णतया का पर्याय माना गया है। संस्कृति महज कल्चर नहीं है। इसकी अवधारणा कल्चर की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और युक्तिसंगत है। इसमें पंरपरा, भाषा, साहित्य, नाट्य, कला और शिल्प से लेकर विज्ञान, मूल्य और दर्शन तक सब अंतनिर्हित हो जाते हैं।

    उक्त बात प्रो. डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ( कुलानुशासक एवं अध्यक्ष हिन्दी विभाग विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन) ने साहित्यिक संस्था अनुभूति द्वारा आयोजित प्रो. डॉ. मोहन परमार की चौथी पुस्तक ''चिंतन के गवाक्ष से''  के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। प्रो. शर्मा ने कहा कि संस्कृति एक अखंड और सार्वभौमिक है किन्तु उसकी साधना के अलग-अलग मार्गो के रहते हुए वह अलग-अलग जानी समझी जाती है। इसी दृष्टि से भारतीय संस्कृति को संस्कृति की अनवरत यात्रा में भारतीय मार्ग के रूप में देखा जा सकता है। भारतीय संस्कृति अनेक शताब्दियों से विश्व संस्कृति के मूलाधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही है।

    प्रो. शर्मा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने सम्पूर्ण विश्व को केन्द्र में रखकर रामचरित मानस की रचना की है, जो संसार स्तर पर मान्य है। उन्होंने कहा कि मैं संस्था अनुभूति के कार्यक्रम में उपस्थित होने से अभिभूत हूं। पुस्तक ''चिंतन के गवाक्ष से''   में संकलित लेखों, निबंधों में कई ज्ञात-अज्ञात पक्षों की शोधपूर्वक नवीन स्थापना की गई है जो प्रशंसनीय है। शर्मा ने कई निबंधों की विशिष्टाओं को अपने उद्बोधन में उदाहरण सहित प्रस्तुत की। यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए साहित्यिक दृष्टि से विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

    साहित्य की दृष्टि से रोचक व पठनीय पुस्तक- डॉ. चांदनीवाला

    अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि चितंन के गवाक्ष से पुस्तक के 27 लेखों, निबंधों में धर्म, दर्शन, वेद साहित्य, संस्कृति के विभिन्न सौंपानों का दिग्दर्शन होता है। यह पुस्तक साहित्य की दृष्टि से रोचक व पठनीय है। आपने आशा व्यक्त की है कि साहित्य के पाठक इसे तनमन्यता के साथ आत्मसात करेंगे।

     नगर में साहित्यकारों का एक बड़ा संगठन बनाएं- झालानी

    विशिष्ट अतिथि समाजसेवी अनिल झालानी (चेयरमैन- सृजन कॉलेज) ने कहा कि पुस्तक के कुछ लेखों, निबंधो में हमें भारतीय समाज, साहित्य, आध्यात्म, धर्म,  ज्ञान, विज्ञान की सामाजिक चेतना का परिचय प्राप्त होता है जो महत्वपूर्ण है। उन्होंने साहित्यकारों को परामर्श दिया कि नगर में साहित्यकारों का एक बड़ा संगठन निर्मित किया जाए जिसके आयोजन में साहित्य के विभिन्न पक्षों पर सकारात्मक चिंतन किया जाना चाहिए।

    धर्म, संस्कृति व आध्यात्म से जोड़ने देने वाले लेख- परिहार

    विशेष अतिथि राधेश्याम परिहार जिलाध्यक्ष गुजराती सेन समाज एवं अनंत नारायण मंदिर सेवा समिति रतलाम ने कहा कि किताब के कुछ लेखों को मैंने देखा है जो हमें वर्तमान भागमभाग व यांत्रिक जीवन की आपाधापी में धर्म संस्कृति व आध्यात्म से जोडऩे की प्रेरणा देते हैं। विशेष अतिथि अनीता रजनीश परिहार  (अध्यक्ष- नगर परिषद, नामली) ने कहा कि हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने चिंतन एवं तप तपस्या करके कई बार भगवान को धरती पर आकर उन्हें जन कल्याण के लिए वरदान देने के लिए बाध्य किया। भारतीय संस्कृति हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। हमें उसके अनुरूप जीवन ढालने का प्रयास करना चाहिए। इसी से हमारा जीवन सार्थक होगा।

    नैतिकता की दिशा में चलने के लिए प्रेरित करते हैं वेद और धर्मग्रंथ

    वरिष्ठ चिंतन मनीषी शिवकांता भदौरिया ने प्रमुख समीक्षक वक्ता के रूप में किताब के लेखों, निबंधों पर विद्वतापूर्वक सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि सदैव से ही चिंतन की पावन धरा रही है। हमारे वेद, धर्म ग्रंथ हमें जीवन में उस नैतिकता की दिशा में चलने के लिए प्रेरित करते हैं। चिंतन के गवाक्ष से पुस्तक अपने आप में साहित्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होग।

    डॉ. परमार की पुस्तक हिन्दी साहित्य की अनुपम निधि- डॉ. तिवारी

    डॉ. शोभना तिवारी (निदेशक- डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति शोध संस्थान, रतलाम) ने संचालन करते हुए अपनी पुस्तक पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन परमार की पुस्तक चिंतन के गवाक्ष से हिन्दी साहित्य की अनुपम निधि है। पुस्तक के हर आलेख, निबंध में साहित्य के मूलभूत पक्षों को उद्घाटित किया है और सम्पूर्ण साहित्य के इतिहास पर दृष्टिपात करते हुए मानव मन के मनोवैज्ञानिक पक्षों को गंभीरता के साथ उकेरा गया है। डॉ. परमार इस पुस्तक के माध्यम से राम राज्य की संकल्पना को साकार रूप में देखते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार समीक्षक प्रणयेश जैन ने वर्तमान में साहित्य की दशा और दिशा की स्थिति पर बोलते हुए कहा कि हमें रचना पाठ के उपरांत चिंतन कर आत्मावलोकन करना चाहिए। किन्तु वर्तमान में इसके उलट स्थिति है। जो हम सबके लिए चिंतनीय है।

    27 लेखों-निबंधों का संकलन है चिंतन के गवाक्ष से...- डॉ. परमार

    चिंतन के गवाक्ष से पुस्तक के लेखक प्रो. डॉ. मोहन परमार ने कहा कि सौरमंडल में 27 नक्षत्र हैं जिनका अपना-अपना महत्व है। उसी प्रकार इस विमोचित किताब में  27 लेखों, निबंधों का संकलन है। इसके माध्यम से शाश्वत सनातन धर्म और साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों के विभिन्न पक्षों पर व्याख्या करने का प्रयास किया गया है। डॉ. परमार ने आशा व्यक्त की है कि साहित्य के सुधिजन पाठक इसे सहज स्वीकार करेंगे।

    प्रो. डॉ. शर्मा का हुआ अनुभूति साहित्य सम्मान

    प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। संस्था के संरक्षक रमन सिंह सोलंकी (सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट इंदौर) ने स्वागत उदबोधन दिया। इसके उपस्थित अतिथियों का परिचय डॉ. शोभन तिवारी, श्री पियुष जैन द्वारा दिया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा हिन्दी साहित्य भाषा के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने पर संस्था द्वारा ''अनुभूति साहित्य सम्मान''   से अलंकृत किया गया। सम्मान-पत्र का वाचन कवि गीतकार शांतिलाल गोयल (शांतनु) ने कियॉ। इस मौके पर उपस्थित साहित्य संस्थाओं के पदाधिकारियों द्वारा विशेष अतिथियों का शॉल भेंट कर सम्मान किया गया। पुस्तक मुद्रक मुकेश शर्मा, आवरण चित्र अक्षय संयोजन, पवन श्री कम्प्यूटर्स के श्री सतीश वर्मा का भी सम्मान किया गया।

    इन्होंने किया अतिथियों का स्वागत

    अतिथियों का स्वागत अब्दुल सलाम खोकर, रामचन्द्र गेहलोत (अम्बर), सतीश जोशी, डॉ. कैप्टन एन. के. शाह, डॉ. प्रदीप सिंह राव, डॉ. खुशालसिंह पुरोहित, डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया, आशीष दशोत्तर, मयूर व्यास, अखिलेश चंद्र शर्मा (स्नेही), प्रकाश हेमावत, जुझारसिंह भाटी, नरेन्द्र सिंह पंवार, बाबूलाल परमार (रावटी), रमेश मनोहरा (जावरा), दिनेश बारोठ (सरवन), श्रेणिक बाफना, प्रतिभा चांदनीवाला, ज्योत्सना निरंजनी, डॉ. दिनेश तिवारी, नीरज कुमार शुक्ला, श्यामसुंदर भाटी, जगदीश चौहान, गौरीशंकर खिंची, अशोक निगम, डॉ. सरोज खरे, निसर्ग दुबे, सुरेश माथुर, रामप्रताप सिंह राठौर, रोड़ीराम प्रजापति (सैलाना) आदि के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रतलाम जिले के साहित्यकार व प्रबुद्ध वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में आभार संरक्षक दिनेश जैन ने माना।

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    Wed, 12 Apr 2023 01:19:35 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्यंग्य : निराधार बुद्धिजीवी ! क्या आप भी बुद्धिजीवी हैं, यदि हैं तो आप भी इसका प्रमाण लेकर आइये https://acntimes.com/satire-baseless-intellectual https://acntimes.com/satire-baseless-intellectual आशीष दशोत्तर

    पैचवर्क करने वाले साहब की ड्यूटी जब से मकान आवंटन के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच में लगी है तब से हर दिन कोई न कोई पेंच फंसता ही है। आज उनके सामने बुद्धिजीवी कैटेगरी में एक आवेदन आया तो उनका माथा ठनका। उन्हें आश्चर्य हुआ कि आज के समय में कौन ऐसा मूर्ख है जो सिर्फ़ बुद्धि के सहारे जी रहा है। आवेदक को बुलवाया गया।

    अपनी सारी उम्मीदें एक पॉलीथिन में लिए बुद्धिजीवी साहब के सामने मौजूद था। 

    तुमने अपना आवेदन बिना किसी प्रमाण-पत्र के दिया है। हम कैसे मानें कि तुम किस श्रेणी में आते हो? आवेदन लगभग फेंकते हुए साहब बोले। 

    बुद्धिजीवी, साहब से इस व्यवहार की अपेक्षा नहीं कर रहा था। उसके निश्छल मन की सरल सरिता में अब तक शांत बैठा स्वाभिमान जाग कर हिलोरे मारने लगा। अपने आवेदन को पुनः विनम्र शैली में साहब की ओर खिसकाते हुए उसने कहा, आप ग़ौर से देखिए तो सही। आप ही ने विज्ञापन में बुद्धिजीवी वर्ग के लिए कुछ स्थान निर्धारित किए थे। उसी श्रेणी के लिए मैंने आवेदन किया है। 

    साहब तमतमा गए। बोले, हमने आवेदन आमंत्रित किए थे बुद्धिजीवियों से। तुम्हारे पास बुद्धिजीवी होने का क्या प्रमाण है? 

    बुद्धिजीवी ने पॉलीथिन में रखी अख़बारों की कुछ कतरनें पेश की। इनमें कुछ ख़बरों में उसके नाम के आगे बुद्धिजीवी लिखा हुआ था। 

    साहब कतरनों को देख जोर से हंसने लगे। कहने लगे, इन कतरनों से साबित नहीं होता कि तुम बुद्धिजीवी हो। अख़बार वाले तो कुछ भी लिख देते हैं। अब हमारे नाम के आगे रोज़ लिखते हैं कि भ्रष्ट अधिकारी, तो क्या हम भ्रष्ट हो गए? सिर्फ़ नाम के आगे बुद्धिजीवी लिखा होने से तुम बुद्धिजीवी थोड़ी हो जाते हो। बुद्धिजीवी होने के लिए बुद्धि का होना ज़रूरी है। इस उम्र तक अपना एक मकान नहीं बनवा सके, फिर ख़ाक़ बुद्धिजीवी हो! कोई पुख़्ता प्रमाण लाओ नहीं तो अपना आवेदन निरस्त समझो। न तो तुम्हारे वोटर आईडी में, न आधार कार्ड में, न बैंक पासबुक में और न ही नौकरी के किसी दस्तावेज़ में तुम्हें बुद्धिजीवी बताया गया है। या तो इनमें से किसी में संशोधन करवाओ या अपने क्षेत्र के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति से बुद्धिजीवी होने का प्रमाण-पत्र ले आओ। 

    बुद्धिजीवी के लिए अपनी बुद्धिजीविता को साबित करने की चुनौती थी। उसने साहब से उलझते हुए कहा, बुद्धिजीवी होना पड़ता है, इसका कोई प्रमाण-पत्र नहीं दिया जा सकता। रात-रात भर जाग कर सोचना पड़ता है। दिनभर लिखने में खपाना पड़ता है। चिंतन करना होता है तब कहीं जाकर बुद्धिजीवी का दर्जा प्राप्त होता है। 

    साहब दोनों हाथ जोड़कर बोले, वही तो मैं भी कह रहा हूं श्रीमान् कि इस दर्जे का कोई प्रमाण हो तो ले आइए। और मेरी मानिए तो आपके क्षेत्र में कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति हो तो उनका लिखा हुआ प्रमाण पत्र ले आओ, मैं एडजस्ट करा दूंगा। 

    साहब के 'एडजस्ट' पर ज़ोर देने का अर्थ बुद्धिजीवी समझ रहा था, मगर उसके लिए यह बहुत मुश्किल काम था। अब तक अपने क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित तो वह स्वयं को ही मानता रहा। इसके अतिरिक्त दूसरे प्रतिष्ठित की तरफ़ कभी देखने की ज़रूरत ही नहीं समझी। वह अपने क्षेत्र से जब भी गुज़रता तो इधर-उधर कभी नहीं देखता, क्योंकि उसे यह मुगालता रहता कि सब उसी को देख रहे हैं। इसी मुगालते में अब तक किराए के मकान में गुज़ारा हो गया। अब जबकि अपना घर ख़रीदने की ज़रूरत आन पड़ी है तो यह दुर्दशा हो रही है। 

    जिनके सामने से रोज़ निकलते हुए वह देखता भी नहीं था उसके सामने प्रमाण पत्र के लिए गिड़गिड़ाना पड़े, यह तो बुद्धिजीवी के पतन की पराकाष्ठा थी। फिर भी अपने दिल पर पत्थर रखकर बुद्धिजीवी ने अपने क्षेत्र के दूसरे प्रतिष्ठित व्यक्ति से प्रमाण पत्र ले ही लिया। 

    वह फिर साहब के सामने खड़ा था। साहब बोले, यह तो ठीक है मगर पहले हमें इसका परीक्षण करना पड़ेगा। 

    बुद्धिजीवी अब गुस्से में आ गया। बोला, इसका क्या परीक्षण कीजिएगा? क्या हम झूठ कह रहे हैं ! 

    साहब समझाते हुए कहने लगे, आप झूठ नहीं कह रहे हैं। यह प्रमाण-पत्र सत्य है या नहीं इसकी जांच करना होगी। क्योंकि बुद्धिजीवी होने का प्रमाण-पत्र वही देख सकता है जो स्वयं बुद्धिजीवी हो और आज के समय में बुद्धि के सहारे जीने वाला कौन है, उसका पता तो करना ही पड़ेगा न! 

    अब तक स्वयं पर मन ही मन मुदित होने वाले आत्ममुग्ध बुद्धिजीवी को पहली बार अपनी बुद्धिजीविता पर क्रोध आ रहा था।

    आशीष दशोत्तर 

    कोमल नगर, रतलाम

    9827084966

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    Tue, 11 Apr 2023 23:24:51 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अनुभूति संस्था के अध्यक्ष एवं साहित्यकार डॉ. मोहन परमार की चौथी किताब ''चिंतन के गवाक्ष से...''  का विमोचन आज https://acntimes.com/Writer-Dr-Mohan-Parmars-fourth-book-chintan-ke-gawaksh-se-released-today https://acntimes.com/Writer-Dr-Mohan-Parmars-fourth-book-chintan-ke-gawaksh-se-released-today एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले की अग्रणी साहित्यिक संस्था ''अनुभूति''  के अध्यक्ष एवं साहित्यकार प्रो. डॉ. मोहन परमार की किताब ''चिंतन के गवाक्ष से...''  का विमोचन 9 अप्रैल, 2023 को सुबह 11 बजे होगा। ''चिंतन के गवाक्ष से...''  डॉ. परमार की यह चौथी किताब है।

    संरक्षक दिनेश जैन, रमणसिंह सोलंकी एवं सचिव मुकेश सोनी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि किताब विमोचन समारोह डालूमोदी बाजार स्थित 7वें हेवरी बेकरी के ऊपर अतिथि थाल पर होगा। मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा होंगे। अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला करेंगे। विशेष अतिथि समाजसेवा एवं सृजन कॉलेज के चेयरमैन अनिल झालानी तथा गुजराती सेन समाज श्री अनंत नारायण मंदिर सेवा समिति के जिला अध्यक्ष राधेश्याम परिहार होंगे। इस मौके पर संस्था द्वारा प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा को अनुभूति साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

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    Sun, 09 Apr 2023 09:42:13 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'कविता में स्त्री स्वर' का आयोजन 9 अप्रैल को, रचनात्मकता में महिलाओं की भूमिका व भागीदारी पर जनवादी लेखक संघ करेंगे आयोजन https://acntimes.com/Female-voice-in-poetry-event-on-9th-April https://acntimes.com/Female-voice-in-poetry-event-on-9th-April एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रचनात्मकता में महिलाओं की भूमिका और उनकी सक्रिय भागीदारी को दृष्टिगत रखते हुए जनवादी लेखक संघ रतलाम आगामी 9 अप्रैल को 'कविता में स्त्री स्वर' कार्यक्रम का आयोजन करेगा।

    जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर एवं सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने बताया कि 'कविता में स्त्री स्वर' आयोजन में महिला रचनाकारों द्वारा अपनी कविता का पाठ किया जाएगा। यह कार्यक्रम 9 अप्रैल को प्रातः 11 बजे महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय, कोठारी वास, रतलाम पर होगा। उन्होंने बताया कि रतलाम शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में निरंतर सृजन कर रहीं महिला रचनाकार इस आयोजन में उपस्थित होकर अपनी कविताएं प्रस्तुत करेंगी।

    कार्यक्रम पूरी तरह महिलाओं पर केंद्रित होगा और महिला रचनाकार इसमें वर्तमान समय में लिखी जा रही रचनाओं की प्रासंगिकता और काव्य लेखन में स्त्री की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखेंगीं। उन्होंने महिला रचनाकारों से आग्रह किया है कि वे इस आयोजन में उपस्थित रहकर अपनी कविताओं के माध्यम से कविता में स्त्री की भूमिका को रेखांकित करें।

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    Wed, 05 Apr 2023 15:17:06 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ‘सुनें&सुनाएं’ का सातवां सोपान 2 अप्रैल को, आप भी सुनें और सुनाएं लेकिन अपनी नहीं, अपने पसंदीदा रचनाकार की रचना https://acntimes.com/The-seventh-step-of-Sunen-Sunayen-on-2nd-April-you-also-listen-and-narrate https://acntimes.com/The-seventh-step-of-Sunen-Sunayen-on-2nd-April-you-also-listen-and-narrate रचनाधर्मी अपने पसंदीदा रचनाकार की रचनाओं का करेंगे पाठ 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर के रचनात्मक वातावरण को बनाने तथा साहित्यिक, सांस्कृतिक धरातल को मज़बूत करने के उद्देश्य से शृंखला ‘सुनें-सुनाएं’ आयोजन की शुरुआत को छह माह पूर्ण हो चुके हैं। ‘सुनें-सुनाएं’ का सातवां सोपान 2 अप्रैल रविवार को सुबह 11 बजे जीडी अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर होगा।

    इस आयोजन में शहर के रचनाधर्मी अपनी पसंद के रचनाकारों की रचनाएं पढ़ेंगे। इनमें प्रकाश हेमावत द्वारा राजेंद्र श्रोत्रिय की रचना ‘हक़ परिंदों का’  का पाठ, दिनेश कटारिया द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘हार में न जीत में’ का पाठ,  श्याम सुन्दर भाटी द्वारा सुरेन्द्र शर्मा की कविता ‘ठिगणा की पुकार’ का पाठ, प्रतिभा चांदनीवाला द्वारा निर्मला पुतुल की कविता ‘उतनी दूर मत ब्याहना बाबा!’ का पाठ, डॉ. प्रकाश उपाध्याय द्वारा डॉ. केदारनाथ सिंह की गीत रचना ‘आँचल में तुम्हारे’ का पाठ,  डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला द्वारा महाकवि कालिदास की रचना का पाठ, स्मिता-नीरज शुक्ला द्वारा काका हाथरसी की कविता ‘सवाल हमारे - जवाब चमेली के’ का पाठ किया जाएगा। 

    उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम की अवधि एक घंटा (सुबह 11 से 12 तक) तय है। इसमें 45 मिनट रचनाओं का पाठ और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श होता है। निर्धारित समय पर प्रारंभ और समाप्त होने वाले इस आयोजन में कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ना है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना भी बगैर किसी भूमिका के पढ़ना है।

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    Sat, 01 Apr 2023 21:46:03 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य सृजन : अज़हर हाशमी का ग़ज़ल&संग्रह 'मामला पानी का' हिन्दी साहित्य को सौगात है& डॉ. क्रांति चतुर्वेदी https://acntimes.com/Ghazal-collection-mamala-paani-ka-of-pr-Azhar-Hashmi-published https://acntimes.com/Ghazal-collection-mamala-paani-ka-of-pr-Azhar-Hashmi-published एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रसिद्ध लेखक और पर्यावरण- विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने साहित्यकार प्रो. अज़हर हाशमी के हाल ही में प्रकाशित हिन्दी ग़ज़ल संग्रह 'मामला पानी का’ वर्चुअल विमोचन किया। डॉ. चतुर्वेदी ने इस ग़ज़ल संग्रह की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि- प्रो. हाशमी का ग़ज़ल-संग्रह 'मामला पानी का हिन्दी साहित्य को अमूल्य सौगात है। 

    वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि हाशमी हिन्दी साहित्य की कई विधाओं पर अधिकार पूर्वक लिखते हैं। संस्मरण से लेकर व्यंग्य तक, निबंध से लेकर मुक्तक तक, अतुकांत कविता से लेकर गीत और ग़ज़ल तक हाशमी की विलक्षण प्रतिमा से पाठको का साक्षात्कार होता है। खास बात यह है कि कई विधाओं में लिखने के बावजूद हाशमी मूलत: गीतकार और ग़ज़लकार पहले हैं तथा अन्य विधाओं के रचनाकार बाद में।

    स्नेह के संदूक जैसी मां...

    प्रो. अज़हर हाशमी का हिन्दी ग़ज़ल-संग्रह मामला पानी का उन सभी पहलुओं को रेखांकित करता है,  जिन्हें हम पारिवारिक-सामाजिक साहित्यिक और सांस्कृतिक सरोकार कहते हैं। हाशमी का यह ग़ज़ल संग्रह शब्दों के ताने-बाने पर बुना हुआ सरोकारों का परिधान है। ग़ज़ल तो एक गुलदस्ते यानी पुष्पगुच्छ की तरह होती है जिसका हर शेर स्वतंत्र चिंतन का प्रतीक होता है। हाशमी की ग़ज़लों में भी यह बात है किंतु उन्होंने किसी एक विषय को लेकर भी शेर कहे है। इसकी पहली ग़ज़ल ही उसका प्रमाण है। इस ग़ज़ल का हर शेर माँ की महिमा बतलाता है। हाशमी ने अपनी ग़ज़लों में नए बिम्बों और प्रतीकों का बड़ा प्रभावी प्रयोग किया है। जैसे: स्नेह के संदूक जैसी माँ / जनवरी की धूप जैसी माँ।"

    94 ग़ज़लों का संग्रह मामला पानी का

    संदर्भ प्रकाशन, भोपाल द्वारा प्रकाशित मामला पानी का गजल संग्रह में 94 ग़ज़लें हैं। हर ग़ज़ल कोई-न-कोई संदेश देती है। कुछ शेर या काव्य-पंक्तियाँ तो ऐसी हैं कि बेहद सरल भाषा में संदेश दे जाती हैं। जैसे:- जो शख्स तेरे दुख में तेरे साथ खड़ा था / कद उसका फ़रिश्ते से कहीं ज्यादा बड़ा था। ग़ज़ल संग्रह के कुछ शीर्षक पाठकों को पढ़ने के लिए आकर्षित करते हैं। जैसे इतवार के अखबार जैसी माँ, न्याय है पिता', 'सूरज @ मकर संक्रांति',  'आग की बारिश', 'रिश्तों' से गायब गर्माहट की कस्तूरी', ईद मुबारक',  'वन घायल हैं’, ‘डरी सी नदियाँ’, 'दिल की धड़कन सही तो सही ज़िन्दगी’, 'कार' से भी ज्यादा संस्कार ज़रूरी’, 'चल पड़ा मौसम पहनकर कोहरे की वरदी।’

    भूमिका यह कि- कोई भूमिका नहीं

    सबसे उल्लेखनीय तो यह है कि प्राय: हर पुस्तक में किसी-न-किसी द्वारा लिखित भूमिका होती है, परंतु हाशमी ने ‘मामला पानी का’ में नवाचार करते हुए कहा है;  भूमिका यह कि… कोई भूमिका नहीं। प्रो. हाशमी का यह हिन्दी ग़ज़ल संग्रह पाठकों को तो पसंद आएगा ही, नवोदित ग़ज़लकारों के लिए भी पाठशाला की तरह होगा।

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    Mon, 13 Mar 2023 17:02:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    जनवादी लेखक संघ शृंखलाबद्ध साहित्यिक आयोजन करेगा, हिंदी एवं उर्दू साहित्य पर केंद्रित व रंगकर्म से जुड़े कार्यक्रम होंगे https://acntimes.com/janvadi-lekhak-sangh-will-organize-a-series-of-literary-events https://acntimes.com/janvadi-lekhak-sangh-will-organize-a-series-of-literary-events एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जनतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में जनवादी लेखक संघ आगामी माह में महत्वपूर्ण शृंखलाबद्ध साहित्यिक आयोजन करेगा। इन आयोजनों में हिंदी एवं उर्दू साहित्य पर केंद्रित आयोजन एवं रंगकर्म से जुड़े कार्यक्रम शामिल होंगे।

    उक्त निर्णय जनवादी लेखक संघ जिला कार्यसमिति की बैठक में लिया गया। बैठक में जलेसं राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य एवं वरिष्ठ रचनाकार प्रो. रतन चौहान ने इस अवसर पर कहा कि समाज के सभी वर्गों के बीच रचनात्मक गतिविधियों की पहुंच बढ़ाना बहुत आवश्यक है। हिंदी-उर्दू की रचनात्मक गतिविधियों के साथ ही रंगकर्म की गतिविधियों को भी जलेसं के माध्यम से बढ़ाया जाए।

    जलेसं उर्दू विंग के प्रदेश संयोजक सिद्दीक़ रतलामी ने कहा कि इस माह उर्दू भाषा के कवियों एवं शायरों को लेकर एक महत्वपूर्ण आयोजन जलेसं द्वारा किया जाएगा। इसमें हमारे समय की रचनाओं पर सार्थक विमर्श कर साहित्यिक वातावरण निर्माण किया जाएगा।

    रंगकर्मी युसूफ़ जावेदी ने आगामी माह में रंगकर्म को लेकर किए जाने वाले महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी दी। रणजीत सिंह राठौर, आशीष दशोत्तर, कीर्ति शर्मा ने आगामी चार महीनों के दौरान जलेसं द्वारा की जाने वाली गतिविधियों के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।

    नई कार्यकारिणी गठित

    बैठक में जनवादी लेखक संघ रतलाम इकाई की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर, उपाध्यक्ष यूसुफ जावेदी, सचिव सिद्धीक़ रतलामी एवं कोषाध्यक्ष कीर्ति शर्मा को नियुक्त किया गया। कार्यकारिणी सदस्यों में वरिष्ठ कवि श्याम माहेश्वरी, रतन चौहान, प्रणयेश जैन, आशीष दशोत्तर, मांगीलाल नगावत, गीता राठौर, अश्विनी शर्मा को शामिल किया गया। बैठक के अंत में जलेसं के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समीक्षक रमेश शर्मा, रचनाधर्मी महेश दशोत्तर एवं डॉ. दिनेश जोशी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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    Thu, 09 Mar 2023 23:36:38 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सुनें&सुनाएं में अगली बार आप भी आएं, आज के सृजन से ही रचनात्मक कल का निर्माण होगा https://acntimes.com/Listen-and-tell-todays-creation-will-create-a-creative-tomorrow https://acntimes.com/Listen-and-tell-todays-creation-will-create-a-creative-tomorrow 'सुनें-सुनाएं' में पढ़ी गई रचनाओं ने बेहतरी की उम्मीद जगाई 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आज की जाने वाली सृजनात्मक कोशिशों से ही बेहतर रचनात्मक कल का निर्माण होगा। साहित्यिक, सांस्कृतिक अभिरुचियों और उपलब्धियों से ही शहर की पहचान कायम रहेगी। यहां रचनात्मकता की कमी नहीं है, मगर एक साथ लोगों के मिलने बैठने और एक-दूसरे को रचनात्मकता से जोड़ने की जरूरत है। 'सुनें - सुनाएं' के माध्यम से यह ज़रूरत पूरी होती दिखाई दे रही है। यह सिलसिला शहर के लिए सुखद है। उक्त विचार 'सुनें - सुनाएं' के छठे सोपान के अवसर पर उभर कर सामने आए।

    शहर में रचनात्मक वातावरण को बढ़ाने और लोगों में रचनात्मकता के प्रति लगाव पैदा करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए आयोजन 'सुनें - सुनाएं'  का छठा सोपान जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित किया गया। इस आयोजन में अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं का पाठ कर शहर के सुधी श्रोताओं ने पढ़ने - लिखने, सुनने - सुनाने की परंपरा को साकार किया।

    आयोजन में नरेन्द्र सिंह डोडिया ने धूमिल की कविता 'रोटी और संसद' का पाठ किया। डॉ. कारूलाल कला-मोहन जमड़ा ने डॉ. चंद्रपाल सिंह सिकरवार की रचना 'अभी तो बहुत काम करने हैं मुझको'  का पाठ किया। संजय परसाई 'सरल' ने गोपाल दास 'नीरज' की कविता 'है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए'  का सस्वर पाठ किया। रामप्रताप सिंह राठौर ने दिनकर सोनवलकर की कविता 'परिवार सरिता' का पाठ किया। रश्मि पंडित ने डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की कविता 'पिता'  का पाठ किया। नीरज कुमार शुक्ला ने रमेश मिश्र 'आनंद'  की रचना 'फागुन के अंदाज़ निराले' का तथा परवीन शाकिर की रचना का पाठ किया।

    आई. एल. पुरोहित ने जयशंकर प्रसाद की कामायनी के अश्रु सर्ग का पाठ किया। वहीं कैलाश व्यास और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के काव्य में रूमानियत की पंक्तियों को उद्धृत किया। डॉ. डबकरा ने एक मुक्तक तो विनोद चौधरी ने प्राण गुप्त की पंक्तियों को पढ़ा। विनोद झालानी ने गोपाल दास नीरज के गीत की प्रस्तुति दी‌। आशीष दशोत्तर ने मदन वर्मा का गीत प्रस्तुत किया।

    चित्रकार महावीर वर्मा का अभिनंदन किया 

    मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में अपने चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित कर लौटे शहर के सुप्रसिद्ध चित्रकार महावीर वर्मा का सुनें - सुनाएं की ओर से अभिनंदन किया गया। पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय ने वर्मा को शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। जावरा से आए रचनाकार डॉ. कारूलाल जमड़ा ने स्वप्रेरणा से सुनें - सुनाएं का पोस्टर तैयार कर आयोजन में प्रस्तुत किया, जिसका विमोचन संगोष्ठी में रचना पढ़ने वाले प्रस्तुत करने वाले प्रस्तोताओं द्वारा किया गया।

    ये रहे मौजूद

    इस अवसर पर डॉ. अभय पाठक, अनिल झालानी, श्रेणिक बाफना, कारूलाल जमड़ा, नीरज कुमार शुक्ला, स्मिता शुक्ला, राधेश्याम शर्मा, यशपाल तंवर, संजय परसाई 'सरल', अलक्षेंद्र व्यास, रामप्रताप सिंह राठौर, धनवेती गोथरवाल, डॉ. सतीश गोथरवाल, कैलाश व्यास, विनोद झालानी, नरेंद्र सिंह डोडिया, त्रिभुवनेश भारद्वाज, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, रश्मि पंडित, उमेश कुमार शर्मा, दिनेश कटारिया, आई. एल. पुरोहित, पद्माकर पागे, कमल किशोर उपाध्याय, कविता व्यास सहित 'सुनें - सुनाएं' के शुभेच्छु मौजूद थे।

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    Mon, 06 Mar 2023 01:00:43 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें&सुनाएं' का छठा सोपान 5 मार्च को, ‘रोटी और संसद’ से ‘फागुन के अंदाज निराले’ की बहेगी बयार https://acntimes.com/सुनें-सुनाएं-का-छठा-सोपान-5-मार्च-को https://acntimes.com/सुनें-सुनाएं-का-छठा-सोपान-5-मार्च-को एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में रचनात्मक वातावरण को बढ़ाने और लोगों में रचनात्मकता के प्रति लगाव पैदा करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए आयोजन 'सुनें सुनाएं'  का छठा सोपान 5 मार्च (रविवार) को होगा। जी.डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल (एनैक्सी प्रथम तल), रतलाम पर प्रातः 11 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में 'रोटी और संसद' से 'फागुन के अंदाज़ निराले' की बयार महसूस की जा सकेगी।

    निर्धारित समय पर प्रारंभ होने वाले और तय समय सीमा में पूर्ण होने वाले इस आयोजन के छठे सोपान में शहर के रचनाप्रेमियों द्वारा अपने पसंद के रचनाकारों की रचनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में नरेन्द्र सिंह डोडिया द्वारा धूमिल की कविता 'रोटी और संसद' का पाठ, डॉ. कारूलाल कला-मोहन जमड़ा द्वारा डॉ. चंद्रपाल सिंह सिकरवार की रचना 'अभी तो बहुत काम करने हैं मुझको'  का पाठ, संजय परसाई 'सरल' द्वारा गोपाल दास 'नीरज' की कविता 'है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए' का पाठ मनकामेश्वर जोशी द्वारा पीरूलाल 'बादल' की कविता 'अगम का झूला पछम जाए'  का पाठ,  रामप्रताप सिंह राठौर द्वारा दिनकर सोनवलकर की कविता 'परिवार सरिता' का पाठ,  रश्मि पंडित द्वारा डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला की कविता 'पिता'  का पाठ, नीरज कुमार शुक्ला द्वारा रमेश मिश्र 'आनंद'  की रचना 'फागुन के अंदाज़ निराले' का पाठ किया जाएगा।

    आयोजन की बड़ी विशेषता समयबद्धता, क्योंकि समय अमूल्य है

    उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम की अवधि एक घंटा तय है। इसमें 45 मिनट रचनाओं का पाठ और 15 मिनट रचनाओं पर सार्थक विमर्श होता है। आयोजन में कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ता है। अपने प्रिय रचनाकार की रचना भी बगैर किसी भूमिका के प्रस्तुत की जाती है। 'सुनें-सुनाएं' के सभी साथियों ने नगर के सुधिजनों से इस आयोजन में उपस्थित होने का आग्रह किया है।

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    Sat, 04 Mar 2023 14:22:46 +0530 Niraj Kumar Shukla
    सपने ज़िंदा रहें, नई ज़मीन, नया आकाश सभी को मिले की संकल्प को सार्थक साबित करता ‘सुनें&सुनाएं’, ... क्योंकि ‘दिया जलाना, जलाकर रखना कमाल है’ https://acntimes.com/Fourth-step-of-sunen-sunayen-completed https://acntimes.com/Fourth-step-of-sunen-sunayen-completed ‘सुनें-सुनाएं’ के चौथे रचनात्मक आयोजन में रतलाम प्रेस क्लब भी बना सहभागी

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सबसे ख़तरनाक होता है सपनों का मर जाना। हमारे सपने ज़िंदा रहें। रचनात्मकता को नई ज़मीन मिले । नए आसमान में नए पंखों के साथ शहर का साहित्यिक वातावरण विचरण करे। इसी भावना के साथ 'सुनें-सुनाएं' का चौथा रचनात्मक आयोजन रतलाम प्रेस क्लब के सहयोग से प्रेस क्लब भवन में आयोजित किया गया।

    आयोजन में उपस्थित सुधिजनों ने अपनी पसंद के रचनाकारों की रचनाओं का पाठ कर शहर की समृद्ध साहित्यिक एवं रचनात्मक परंपरा को आगे बढ़ाने की आशा व्यक्त की। रचना पाठ आयोजन के दौरान जुझार सिंह भाटी ने स्व. सुरेश प्रवासी के गीत की प्रस्तुति देकर कर समाज में वृद्धजनों की स्थिति बयां की। उमेश कुमार शर्मा ने अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की रचना का पाठ किया। श्याम सुंदर भाटी ने हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा की कविता हुबहू अंदाज़ में पेश की। नरेंद्र सिंह पंवार ने डॉ. जयकुमार जलज की कविता 'किसे पता है किस बादल में कितनी क्षमता...' का सस्वर पाठ किया।

    महावीर वर्मा ने अवतार सिंह ‘पाश’ की कविता 'सबसे ख़तरनाक होता है सपनों का मर जाना...' का पाठ कर रचनात्मक वातावरण की आवश्यकता की भावना का संचार किया। कैलाश व्यास ने गोपालदास नीरज की रचनाओं के पाठ के साथ उनसे जुड़े संस्मरण भी प्रस्तुत किए। विष्णु बैरागी ने नरेंद्र दुबे की व्यंग्य रचना 'फूफा जी पर निबंध' का पाठ किया। विनोद झालानी ने रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता प्रस्तुत की। आशीष दशोत्तर ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी 'तोता' का पाठ किया।

    सुधिजन बोले- हर आयोजन में नए लोग अपने प्रिय रचनाकार की रचना पढ़े रहे, यह सुखद है

    आयोजन में अपनी पसंद के रचनाकारों की रचनाओं का पाठ करने का उद्देश्य यही रहा कि इस आयोजन के माध्यम से शहर के सुधि श्रोता एक साथ बैठें और शहर के रचनात्मक वातावरण को आगे बढ़ाएं। रचना विमर्श में डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, ओमप्रकाश मिश्रा, दुष्यंत व्यास, पद्माकर पागे, सविता तिवारी, विनोद संघवी, राजेंद्र चतुर्वेदी, प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश पुरी गोस्वामी, नीरज शुक्ला, हेमंत भट्ट, हरीश दर्शन शर्मा, सिकंदर, हेमंत बाफना, सतीश गोथरवाल, नरेंद्र सिंह डोडिया, महेंद्र सिंह डोडिया, नरेंद्र सिंह राठौर, प्रकाश मिश्रा, आरपीएस राठौर, प्रतिभा चांदनीवाला, सुशीला कोठारी ने शिरकत की। सभी ने कहा कि सुनें-सुनाएं के हर आयोजन में नए लोग उपस्थित होकर अपने प्रिय कवि की रचनाएं पढ़ रहे हैं, यह सुखद है। शहर की रचनात्मकता को इससे नया जीवन मिलेगा और पठन-पाठन में जुटे लोग अपनी अभिव्यक्ति इस आयोजन के माध्यम से कर सकेंगे। आयोजन में सुधिजन उपस्थित थे।

    रतलाम प्रेस क्लब ने डॉ. चांदनीवाला एवं दशोत्तर का सम्मान किया

    रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश पुरी गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत भट्ट, नीरज शुक्ला, हरीश दर्शन शर्मा एवं उपस्थित सदस्यों ने साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा हाल ही में सम्मानित साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला एवं आशीष दशोत्तर का प्रेस क्लब की ओर से सम्मान किया।

    उन्होंने कहा कि रतलाम के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां के साहित्यकारों को प्रदेश और देश स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। इस दौरान उपस्थित सुधिजनों ने दोनों साहित्यकारों को अपनी शुभकामनाएं प्रदान की।

    सुनें-सुनाएं का महत्वपूर्ण पहलू

    सुनें-सुनाएं चार सोपान चढ़ चुका है और अगले सोपान की ओर बढ़ चला है। अगले माह पांचवां सोपान होगा। अब तक के सभी हर सोपान में नए लोग जुड़ रहे हैं जो इस आयोजन का उद्देश्य है। आयोजन का सबसे प्रबल पहलू है समय पालन जो अब इसकी सफलता की गारंटी बनता प्रतीत हो रहा है। ना शुरू होने में एक सेकंड इधर से उधर और ना ही समापन में समय पालन की प्रतिबद्धता बाधित होती है। सच है, ‘हवा की ज़द में दिया जलाना और जलाकर रखना कमाल है...।’

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    Sun, 08 Jan 2023 22:34:14 +0530 Niraj Kumar Shukla
    'सुनें&सुनाएं' का चौथा सोपान 8 जनवरी को, तो आइए और शहर में पढ़ने, मिलने, बैठने, सुनने और सुनाने की परंपरा को सार्थक बनाएं https://acntimes.com/The-fourth-step-of-sune-sunayen-on-January-8 https://acntimes.com/The-fourth-step-of-sune-sunayen-on-January-8 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हमारे दौर की संवादहीनता और रचनाशीलता के प्रति कम होती प्रवृत्ति को नया आयाम देने के उद्देश्य से शहर में रचनात्मक आयोजन "सुनें-सुनाएं" की शुरुआत की गई है। एक रचनात्मक वातावरण एवं लोगों के बीच स्वस्थ संवाद की परंपरा को कायम करने के उद्देश्य से प्रारंभ इस रचनात्मक आयोजन का चौथा सोपान 8 जनवरी रविवार को सुबह 11 बजे रतलाम प्रेस क्लब (प्रथम तल), पावर हाऊस रोड़ (रिलायंस पेट्रोल पंप के सामने), रतलाम पर होगा।

    आयोजन में कोई भी व्यक्ति अपनी रचना नहीं पढ़ेगा। अपने प्रिय रचनाकार की कोई रचना ही पढ़ेगा। कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू हो कर तय समय पर समाप्त होगा। कार्यक्रम की अवधि एक घंटा (सुबह 11.00 से दोपहर 12.00 बजे) तय है। इसमें 45 मिनट (सुबह 11.00 से 11.45 ) में रचनाओं का पाठ होगा। बाकी 15 मिनट उन पर सार्थक विमर्श होगा। सनद रहे कि, आयोजन में कोई भी अपनी रचना नहीं पढ़ते हुए अपने प्रिय रचनाकार की रचना वह भी बगैर किसी भूमिका के पढ़ता है।

    ये करेंगे रचना पाठ लेकिन अपनी नहीं, अपने प्रिय रचनाकार की

    चौथे सोपान में जुझार सिंह भाटी द्वारा सुरेश प्रवासी की कविता का पाठ किया जाएगा। उमेश कुमार शर्मा डॉ. अयोध्या सिंह उपाध्याय "हरिऔध" की कविता "फूल और काँटा" का पाठ करेंगे।

    श्याम सुन्दर भाटी व्यंग्य कवि सुरेन्द्र शर्मा की कविता का पाठ करेंगे। महावीर वर्मा जनकवि पाश की कविता का पाठ करेंगे। नरेन्द्र सिंह पंवार द्वारा कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयकुमार 'जलज' की कविता 'किसे पता है किस बादल में' का पाठ किया जाएगा। समय शेष रहने पर रविन्द्रनाथ टैगोर की कहानी 'तोता' का पाठ भी होगा।

    'सुनें-सुनाएं' ने शहर के सभी सुधिजनों से आग्रह किया है कि आयोजन में अपनी उपस्थिति के माध्यम से शहर में पढ़ने, मिलने, बैठने, सुनने और सुनाने की इस परंपरा को सार्थक बनाएं।

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    Sat, 07 Jan 2023 23:58:26 +0530 Niraj Kumar Shukla
    "छोटी&सी बाती रोशनी की" पुस्तक की कविताएँ सकारात्मक संदेश देती हैं : डॉ. क्रांति चतुर्वेदी https://acntimes.com/Virtual-release-of-Professor-Azhar-Hashmis-book-Chhoti-Si-Baati-Roshni-Ki https://acntimes.com/Virtual-release-of-Professor-Azhar-Hashmis-book-Chhoti-Si-Baati-Roshni-Ki एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रसिद्ध कवि और चिंतक प्रो. अजहर हाशमी की कविताओं की पुस्तक "छोटी-सी बाती रोशनी की"  का वर्चुअल विमोचन लेखक और पर्यावरण-विशेषज्ञ क्रांति चतुर्वेदी ने किया। विमोचन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुवे डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि कविताओं की इस पुस्तक का शीर्षक जितना आकर्षक व प्रभावकारी है, कविताएँ भी उतनी ही वजनदार और मर्मस्पर्शी हैं। "छोटी-सी बाती रोशनी की",  दरअसल सकारात्मकता का संदेश देती है। कितना ही घना अंधकार हो किंतु रोशनी से वह हमेशा हारता है।

    डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार हाशमी ने "छोटी-सी बाती रोशनी की" पुस्तक में निहित कविताओं में प्रकृति से लेकर देश तक, परिवार से लेकर पर्यावरण तक, संस्कार से लेकर संस्कृति तक, श्रमिक से लेकर किसान तक, फल,सब्जी और दूध बेचने वाले से लेकर हम्माल तक, माता-पिता और मासूम बच्चे से लेकर गुरु तक, पृथ्वी से लेकर धर्म तक, नर्मदा से लेकर क्षमा तक, कचरा बीनने वाले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक,  संकल्प से लेकर पुरुषार्थ तक, कई विषयों को संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इस पुस्तक में संवेदना और संवेदनशीलता पर भी कविता है।

    पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने जैसी हैं कविताएं

    हाशमी मूलतः तो गीतकार हैं किंतु उन्होंने हिन्दी साहित्य की कई विधाओं में लिखा है। अतुकांत कविताओं से लबरेज "छोटी-सी बाती रोशनी की"  में चिंतन की प्रधानता तो है ही संप्रेषणीयता भी है। कुछ कविताएँ तो ऐसी लगती हैं जैसे नए प्रतिमानों के साथ नई  परिभाषाएँ । "छोटी-सी बाती रोशनी की' कविताएँ पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने जैसी हैं। हर परिवार तथा लाइब्रेरी में इस पुस्तक को होना चाहिए।

    चिंतक एवं कवि प्रेम भारती ने लिखी भूमिका

    उल्लेखनीय है कि संदर्भ प्रकाशन, भोपाल द्वारा प्रकाशित 104 पृष्ठ की इस पुस्तक में 74 कविताएँ हैं। इसकी भूमिका प्रसिद्ध साहित्यवार चिंतक और कवि प्रेम भारती (भोपाल) ने लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है कि " खुसरो, रहीम रसखान, कबीर के समान प्रो. हाशमी ने "छोटी-सी बाती रोशनी" की को प्रज्ज्वलित कर जिस अधिष्ठान को आधार बनाया है उससे यह कृति आज के परिवेश में एक नव चिंतन को रेखांकित करती है।

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    Sat, 17 Dec 2022 01:13:56 +0530 Niraj Kumar Shukla
    2021 के साहित्य पुरस्कार घोषित : रतलाम के कवि एवं समालोचक प्रो. अज़हर हाशमी सहित  13 साहित्यकार अखिल भारतीय व 15 राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित https://acntimes.com/2021-literary-awards-announced https://acntimes.com/2021-literary-awards-announced साहित्य अकादमी मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे ने की पुरस्कारों की घोषणा

    एसीएन टाइम्स @ भोपाल । साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा अखिल भारतीय 13 एवं प्रादेशिक स्तर के 15 पुरस्कारों को घोषणा की गई है। ये पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए साहित्यकारों की कृतियों के लिए घोषित किए गए हैं।

    पुरस्कारों की घोषणा मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् के निदेशक डॉ. विकास दवे ने की। उन्होंने बताया कि कैलेण्डर वर्ष 2021 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। अखिल भारतीय प्रति पुरस्कार रुपए 1,00,000/- (एक लाख) एवं प्रादेशिक प्रति पुरस्कार रुपए 51,000/- (इक्यावन हजार) के साथ शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति-पत्र के साथ रचनाकारों को अलंकृत किया जाता है।

    डॉ. दवे का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, संचालक अदिति कुमार त्रिपाठी के सहयोग के बगैर बीते 5 वर्ष के सम्मान देना स्वप्न ही होता। डॉ. दवे ने सभी साहित्यकारों को बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। बता दें कि अकादमी द्वारा हाल ही के दिनों में पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत की गई थी। अब सिर्फ 2021 के साहित्यिक पुरस्कार घोषित होने शेष थे जो गुरुवार को घोषित कर दिए गए।

    2021 के लिए अखिल भारतीय पुरस्कार

    1. अखिल भारतीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी (निबंध) प्रो. प्रकाश मणि त्रिपाठी, अनूपपुर की कृति ‘मन मानस में राम’
    2. अखिल भारतीय गजानन माधव मुक्तिबोध (कहानी) डॉ. प्रभा पंत, हल्द्वानी की कृति ‘मेरी प्रतिनिधि कहानियाँ’
    3. अखिल भारतीय राजा वीरसिंह देव (उपन्यास) बलवीर सिंह ‘करुण’, अलवर की कृति ‘डीग का जौहर’
    4. अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) डॉ. सत्य प्रकाश पाल, वाराणसी की कृति ‘भाषा, साहित्य और संस्कृति’
    5. अखिल भारतीय पं. भवानी प्रसाद मिश्र (गीत एवं हिन्दी गजल) डॉ. रामवल्लभ आचार्य, भोपाल की कृति ‘मैं तुम्हारी बाँसुरी हूँ’
    6. अखिल भारतीय अटल बिहारी वाजपेयी (कविता) डॉ. आनंद कुमार सिंह, भोपाल की कृति ‘अथर्वा’,
    7. अखिल भारतीय कुवेरनाथ राय (ललित निबंध) रजनीश कुमार शुक्ल, वर्धा की कृति ‘भारतीय ज्ञानपरंपरा और विचारक’
      8. अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर (आत्मकथा-जीवनी) दिनेश पाठक, ग्वालियर की कृति ‘पं. रविशंकर नव्यता के नायक’
    8. अखिल भारतीय निर्मल वर्मा (संस्मरण) प्रो. अजहर हाशमी, रतलाम की कृति ‘संस्मरण का संदूक समीक्षा के सिक्के’
    9. अखिल भारतीय महादेवी वर्मा (रेखाचित्रा) डॉ. भेरूलाल गर्ग, भीलवाड़ा की कृति ‘यादों की धूप-छाँह’
    10. अखिल भारतीय प्रो. विष्णुकांत शास्त्राी (यात्रा-वृत्तांत) ज्योति जैन, इंदौर की कृति ‘यात्राओं का इंद्रधनुष’
    11. अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (अनुवाद) डॉ. क्रांति कनाटे, बड़ोदरा की कृति ‘गुजराती काव्य सम्पदा’
    12. अखिल भारतीय नारद मुनि (फेसबुक / ब्लॉग / नेट) लोकेन्द्र सिंह राजपूत, भोपाल का पेज ‘फेसबुक / ब्लॉग / नेट’ को दिया गया है।

    प्रादेशिक पुरस्कार

    1. प्रादेशिक वृन्दावन लाल वर्मा (उपन्यास) डॉ. ममता चन्द्रशेखर, जबलपुर की कृति ‘स्वदेश’।
    2. प्रादेशिक सुभद्रा कुमारी चैहान (कहानी) पुरुषोत्तम गौतम, शिवपुरी की कृति ‘काशीफल एवं अन्य कहानियाँ’
    3. प्रादेशिक श्रीकृष्ण सरल (कविता) यशवंत चैहान, धार की कृति ‘अनंत की ओर’
    4. प्रादेशिक आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (आलोचना) गोविंद गुंजन-खण्डवा की कृति ‘आलोचना का हृदय पक्ष एवं रस दृष्टि’
    5. प्रादेशिक हरिकृष्ण पे्रमी (नाटक) प्रियंका शक्ति ठाकुर, भोपाल की कृति ‘शौर्या’
    6. प्रादेशिक राजेन्द्र अनुरागी (डायरी) दिनेश प्रभात-भोपाल की कृति ‘आये हैं तो काटेंगे...’
    7. प्रादेशिक पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) राजेन्द्र गट्टानी, भोपाल की कृति ‘युग का गरल पिया करते हैं’
    8. प्रादेशिक ईसुरी (लोकभाषा विषयक) प्रमोद भार्गव, शिवपुरी की कृति ‘सहरिया आदिवासी’
    9. प्रादेशिक हरिकृष्ण देवसरे (बाल साहित्य) डॉ. अर्जुन दास खत्राी, भोपाल की कृति ‘मैं छोटा सा प्यारा बच्चा’
    10. प्रादेशिक नरेश मेहता (संवाद, पटकथा लेखन) राधारानी चैहान ‘मानवी’, भोपाल का पटकथा लेखन ‘एकता का सूत्रा : हिन्दी’
    11. प्रादेशिक जैनेन्द्र कुमार ‘जैन’ (लघुकथा) डॉ. अखिलेश बार्चे, खरगोन की कृति ‘जो देखा अपने आसपास’
    12. प्रादेशिक सेठ गोविन्द दास (एकांकी) श्रीपाद जोशी, उज्जैन की कृति ‘महाप्रयाण’
    13. प्रादेशिक शरद जोशी (व्यंग्य) डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा, उज्जैन की कृति ‘श्री गूगलाय नमः’
    14. प्रादेशिक वीरेन्द्र मिश्र (गीत) कुँअर उदयसिंह ‘अनुज’-खरगोन की कृति ‘मन का हरसिंगार’
    15. प्रादेशिक दुष्यंत कुमार (ग़ज़ल) सतीश राठी, इंदौर की कृति ‘कोहरे में गाँव’ को दिया गया है।
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    Thu, 01 Dec 2022 16:11:39 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्य अकादमी द्वारा 2018 के पुरस्कार घोषित, आशीष दशोत्तर को व्यंग्य का प्रादेशिक शरद जोशी पुरस्कार https://acntimes.com/Sahitya-Akademi-MP-selected-Ashish-Dashottar-for-regional-Sharad-Joshi-award-for-satire https://acntimes.com/Sahitya-Akademi-MP-selected-Ashish-Dashottar-for-regional-Sharad-Joshi-award-for-satire एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा वर्ष 2018 के अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक कृति पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपए सम्मान निधि मिलेगी।

    साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दवे ने बताया व्यंग्य के प्रादेशिक शरद जोशी पुरस्कार के लिए रतलाम के आशीष दशोत्तर की कृति "मोरे अवगुन चित में धरो" का चयन किया गया है। प्रादेशिक पुरस्कारों की सम्मान निधि ₹ 50 हजार है।

    बता दें कि, साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2018 के राष्ट्रीय स्तर के 13 एवं प्रदेश स्तर के 15 कृतियों को पुरस्कृत किया गया है। आशीष दशोत्तर का व्यंग्य संग्रह "मोरे अवगुन चित में धरो" काफी चर्चित रहा है और इससे पूर्व भी कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पुरस्कार वितरण समारोह आगामी दिनों में आयोजित किया जाएगा।

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    Fri, 25 Nov 2022 01:10:31 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं को सुनाने का सुख अप्रतिम,  'सुनें&सुनाएं' के दूसरे सोपान में हुआ प्रखर रचना संवाद https://acntimes.com/Intense-composition-dialogue-in-the-second-phase-of-sunen-sunayen https://acntimes.com/Intense-composition-dialogue-in-the-second-phase-of-sunen-sunayen एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अपने प्रिय रचनाकारों की रचनाओं को पढ़ना और उन्हें सभी के साथ साझा करना का सुख अलग ही है। इससे पढ़ने की प्रवृत्ति भी बढ़ती है और समविचारी लोगों के एक साथ बैठने और बातचीत करने के अवसर भी मिलते हैं। उक्त मंतव्य रचनात्मक संवाद के आयोजन 'सुनें-सुनाएं' के दूसरे सोपान में व्यक्त किया गए।

    संवादहीनता और रचनाशीलता के प्रति कम होती प्रवृत्ति को नया आयाम देने के उद्देश्य से शहर में शुरू किए गए रचनात्मक आयोजन "सुनें-सुनाएं" का दूसरा आयोजन जीडी अंकलेसरिया रोटरी हाल ट्रस्ट के सहयोग से रोटरी क्लब एनैक्सी में किया गया। आयोजन में सुधि नागरिकों ने शहर में रचनात्मक वातावरण को तैयार करने और लोगों के बीच स्वस्थ संवाद की परंपरा को कायम करने के उद्देश्य से प्रारंभ इस रचनात्मक पहल की सराहना की। आयोजन में रचनाकारों की रचनाओं को न सिर्फ पढ़ा गया बल्कि उन पर सार्थक विमर्श भी हुआ।

    इन्होंने किया रचना पाठ

    रचना पाठ के क्रम में आई. एल. पुरोहित ने बालकवि बैरागी की रचना का पाठ किया। विनोद झालानी ने गोपालदास नीरज की सुप्रसिद्ध कविता 'अब युद्ध नहीं होगा' का पाठ किया। अरविंद पुरोहित ने मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'पंच परमेश्वर' को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। विनोद संघवी ने शोक सभा के संस्मरण से संबंधित रचना पढ़कर वातावरण को आनंदित कर दिया। युवा पत्रकार अदिति मिश्रा ने कैफ़ी आज़मी की नज़्म 'औरत' का भाव-अभिव्यक्ति के साथ पाठ किया। योगिता राजपुरोहित ने मैथिलीशरण गुप्त की कविता पढ़ी। अशोक तांतेड़, त्रिभुवनेश भारद्वाज, विवेक सोनी ने भी रचना पाठ कर रचनात्मक विमर्श को आगे बढ़ाया।

    विमर्श में ये रहे शामिल

    संवाद में डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, त्रिभुवनेश भारद्वाज, गुस्ताद अंकलेसरिया, शोभना तिवारी, इन्दु सिन्हा, सुशीला कोठारी, वरुण पोरवाल, कविता व्यास, संघमित्रा सोनी, अनिल झालानी, मुकेश पुरी गोस्वामी,राधेश्याम शर्मा, डॉ. दिनेश तिवारी, कमल किशोर उपाध्याय, अमृत जैन, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर ने रचना विमर्श में सहभागिता की।

    एक सराहनीय पहल

    आयोजन में उपस्थित सुधिजनों ने कहा कि साहित्यिक, सांस्कृतिक और कला क्षेत्र से जुड़ी चर्चा के कारण शहर में नई पीढ़ी के बीच रचनात्मकता का वातावरण बनाया जा सकता है। इसी की चिंता करते हुए शहर के रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े बंधुओं द्वारा 'सुनें- सुनाएं' पहल सराहनीय है। मासिक रूप से होने वाले इस आयोजन में कोई भी व्यक्ति अपनी रचनाओं का पाठ नहीं करेगा सिर्फ़ अपनी पसंद के किसी रचनाकार की रचना का ही पाठ करेगा। यह आवश्यक नहीं कि उपस्थित हर व्यक्ति हर आयोजन में किसी रचनाकार की रचना को प्रस्तुत करें ही। सिर्फ श्रोता के रूप में भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

    आग्रह, दुराग्रह और पूर्वाग्रह से परे आयोजन

    यह पूरी तरह अनौपचारिक एवं रचनात्मक आयोजन होगा। इसमें किसी भी तरह का आग्रह, दुराग्रह, पूर्वाग्रह भी नहीं होगा। ऐसे आयोजन में उपस्थिति से हमारे शहर का रचनात्मक वातावरण अधिक सारगर्भित हो सकेगा। रचनात्मक संवाद बढ़ाने की इस पहल का सभी ने स्वागत किया। बैठक में अगले आयोजन में पढ़ी जाने वाली रचनाओं पर भी चर्चा की गई।

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    Sun, 06 Nov 2022 19:40:30 +0530 Niraj Kumar Shukla
    21वीं सदी की तीन पीढ़ियों के कहानी संग्रह ‘कथा प्रस्थान’ में ‘आशीष दशोत्तर’ की ‘एक चेहरे वाला आदमी’ को मिला स्थान https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-story-ek-chehare-wala-adami-got-a-place-in-Katha-Prasthan https://acntimes.com/Ashish-Dashottars-story-ek-chehare-wala-adami-got-a-place-in-Katha-Prasthan एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आधुनिक हिंदी कहानी के सफर को क़रीब सवा सौ साल होने आए हैं। इस बीच कहानी ने कई मोड़ लिए। कई आंदोलनों से गुज़री। इसमें कई बदलाव आए। इसकी बदलती प्रवृत्तियों को केंद्र में रखकर मूल्यांकन भी हुए। 21वीं सदी में सक्रिय तीन पीढ़ियों के कथाकारों की कहानियों को लेकर ‘कथा प्रस्थान’  का प्रकाशन किया गया है। इसमें शहर के युवा रचनाकार एवं कथाकार आशीष दशोत्तर भी शामिल हैं।

    21वीं सदी की कहानियों को केंद्र में रखकर रचे गए इस ग्रंथ में तीन पीढ़ियों के कथाकारों को शामिल किया गया है। आशीष की कहानी ‘एक चेहरे वाला आदमी’  इसमें सम्मिलित की गई है। ‘कथा प्रस्थान’ के संपादक सुप्रसिद्ध कहानीकार सूर्यनाथ सिंह हैं। पुस्तक के ब्लर्व में इस संग्रह की आवश्यकता पर रोशनी डालते हुए कहा गया है कि 21वीं सदी के कथाकार का दायरा व्यापक है। उसने जीवन के बहुत बारीक और अनछुए पक्षों को देखना शुरू किया है। कहानी की पारंपरिक शैली से बाहर निकलकर तमाम विधाओं से गलबहियां करते हुए उसने अपना एक नवीन कथा स्वरूप निर्धारित किया है। कथा की छूट गई शैलियों को आत्मसात किया है। इसी को केंद्र में रखकर इन तीन पीढ़ियों ने मिलकर 21वीं सदी की कहानी का जो रंग और रसायन तैयार किया है वह एक नया क्षितिज रचता है। यहीं से एक नई संभावनाओं का द्वार भी खुलता है।

    मानवीय मूल्यों और मनुष्य की संवेदना झकझोरने वाली कहानी

    दशोत्तर की कहानी मानवीय मूल्यों और मनुष्य की संवेदना को झकझोरने वाली है। इसको समकालीन कहानियों में नवीन दृष्टिकोण से लिखी गई कहानी कह सकते हैं। कथा प्रस्थान में देश के चालीस महत्वपूर्ण कथाकारों को शामिल किया गया है। पांच सौ पृष्ठों में रचे ग्रंथ में तीन पीढ़ियों के कथाकार अपनी कहानियों के माध्यम से जीवन के दृष्टिकोण को प्रस्तुत कर रहे हैं।

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    Sun, 16 Oct 2022 10:29:02 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ग़ज़ल का प्रभाव और परंपरा बहुत समृद्ध& सिद्दीक़ रतलामी https://acntimes.com/The-influence-and-tradition-of-Ghazal-is-very-rich--Siddiq-Ratlami https://acntimes.com/The-influence-and-tradition-of-Ghazal-is-very-rich--Siddiq-Ratlami जनवादी लेखक संघ द्वारा ग़ज़ल की परंपरा पर विचार गोष्ठी आयोजित

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । ग़ज़ल एक साहित्यिक विधा है। इसकी तारीख़ लगभग सोलह सौ वर्ष पुरानी है। छठी सदी में ग़ज़ल का जन्म अरब देश में हुआ। भारत में ग़ज़ल की बाक़ायदा शुरुआत 13वीं सदी में हो चुकी थी। यहां अमीर खुसरो से पहले ग़ज़ल का कोई बड़ा शाइर हमारे पढ़ने में नहीं आया। अमीर खुसरो मूल रूप से फ़ारसी में शायरी करते थे, लेकिन उन्हें खड़ी बोली हिंदी का आदि कवि कहा जाता है। खड़ी बोली हिंदी की उनकी रचनाएं बहुत मशहूर भी हुईं। अमीर खुसरो ने ग़ज़ल में फ़ारसी और खड़ी बोली हिंदी का सफल प्रयोग भी किया। उन्होंने अपने लेखन में पहेलियां, मुकरियां, दो सुखने भी कहे जो आज तक पसंद किए जाते हैं।

    उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा 'ग़ज़ल की परंपरा' विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता वरिष्ठ शायर सिद्दीक़ रतलामी ने व्यक्त किए। उन्होंने अरबी, फ़ारसी और हिंदुस्तानी ग़ज़ल के साथ ही दुनिया की विभिन्न भाषाओं में कहीं जा रही ग़ज़ल की परंपरा और उनकी पृष्ठभूमि पर विस्तार से अपनी बात कही।

    ग़ज़ल की परंपरा में प्रगतिशील विचारधारा सदैव मुखरित हुई- प्रो. चौहान

    वरिष्ठ कवि प्रो. रतन चौहान कहा कि ग़ज़ल की परंपरा में प्रगतिशील विचारधारा सदैव मुखरित होती रही है। ग़ज़लकारों ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से वक़्त और हालात का ज़िक्र किया, साथ ही समाज में व्याप्त विषमताओं पर भी अपनी बात कही। उन्होंने प्रमुख शायरों द्वारा कहे गए शेरों को भी उद्धृत किया। वरिष्ठ शायर फ़ैज़ रतलामी ने कहा कि ग़ज़ल की परंपरा बहुत समृद्ध है। भारत में जिस तरह से ग़ज़ल कही जा रही है उसे देखते हुए आने वाले वक़्त में काफ़ी संभावनाएं नज़र आती हैं।

    ग़ज़ल परंपरा पर चर्चा होना आज की आवश्यकता- खोकर

    अध्यक्षता करते हुए शायर अब्दुल सलाम खोकर में कहा कि ग़ज़ल का अपना मिज़ाज और रंग है। इसमें दो पंक्तियों में अपनी बात कहना बहुत कठिन काम है। यह सुखद है कि देश की विभिन्न भाषाओं में अब ग़ज़लें कहीं जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग़ज़ल की परंपरा पर चर्चा होना आज की आवश्यकता भी है। संचालन करते हुए यूसुफ जावेदी ने उर्दू और हिंदी ग़ज़ल की स्थिति और उसके प्रभाव पर प्रकाश डाला। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा एवं सचिव रणजीत सिंह राठौर ने अतिथियों का शब्दों से स्वागत किया। विचार गोष्ठी में बड़ी संख्या में ग़ज़ल प्रेमी उपस्थित थे। आभार कवि यशपाल सिंह ‘यश ने माना।

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    Tue, 11 Oct 2022 08:57:13 +0530 Niraj Kumar Shukla
    स्वस्थ संवाद की सराहनीय पहल 'सुनें&सुनाएं' : मिले, बैठे और शरद जोशी के व्यंग्य और कवि सुमन की रचनाओं पर किया सार्थक विमर्श https://acntimes.com/Commendable-initiative-of-healthy-dialogue-sunen-sunayen https://acntimes.com/Commendable-initiative-of-healthy-dialogue-sunen-sunayen एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हमारे दौर की संवादहीनता और रचनाशीलता के प्रति कम होती प्रवृत्ति को नया आयाम देने के उद्देश्य से शहर में रचनात्मक आयोजन "सुनें-सुनाएं" की शुरुआत हुई। शहर में रचनात्मक वातावरण तैयार करने और लोगों के बीच स्वस्थ संवाद की परंपरा कायम करने के उद्देश्य से हुई इस रचनात्मक पहल के पहले सोपान पर महत्वपूर्ण रचनाकारों की रचनाओं को न सिर्फ पढ़ा गया बल्कि उन पर सार्थक विमर्श भी हुआ।

    रंगकर्मी कैलाश व्यास ने डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविता 'जो समेट रहे हो वह सपना है, जो लुटा रहे हो वह अपना है' का पाठ कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

    इसके उपरांत विष्णु बैरागी ने व्यंग्यकार शरद जोशी के व्यंग्य 'मेरी हवाई यात्रा' और 'अध्यक्ष महोदय' का पाठ किया। दोनों रचनाओं पर उपस्थितजनों ने संवाद किया एवं शरद जोशी से जुड़े रतलाम के प्रसंगों को प्रस्तुत कर आपसी संवाद की परंपरा कायम की।

    संवाद में डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, त्रिभुवनेश भारद्वाज, सुभाष जैन, गुस्ताद अंकलेसरिया, शोभना तिवारी, विनोद झालानी, डॉ. संजय वाते, आई. एल. पुरोहित, सुशीला कोठारी, सविता तिवारी, रश्मि पंडित, मयूर व्यास, अनिल झालानी, ओमप्रकाश मिश्र, नीरज शुक्ला, नरेंद्र जोशी, सुरेंद्र छाजेड़, जयंतीलाल चौधरी, राधेश्याम शर्मा, महावीर वर्मा, आशीष दशोत्तर आदि ने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

    संवाद स्थल की कमी पर हुआ विमर्श

    उपस्थित सुधिजनों ने कहा कि रतलाम शहर में अभी कोई ऐसा संवाद स्थल नहीं है जहां बैठकर रचनात्मक विमर्श किया जा सके। साहित्यिक, सांस्कृतिक और कला क्षेत्र से जुड़ी चर्चा की जा सके। इसी कारण शहर में नई पीढ़ी के बीच रचनात्मकता का अभाव परिलक्षित हो रहा है। इसी की चिंता करते हुए शहर के रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े बंधुओं द्वारा 'सुनें- सुनाएं' पहल सराहनीय है।

    हर माह होगा आयोजन, अपनी रचना नहीं सुना सकेंगे

    आयोजन में बताया गया कि यह कार्यक्रम होगा, जो मासिक रूप से आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में कोई भी व्यक्ति अपनी रचनाओं का पाठ नहीं करेगा, सिर्फ़ अपनी पसंद के किसी रचनाकार की रचना का ही पाठ करेगा। बैठक में अगले आयोजन में पढ़ी जाने वाली रचनाओं पर भी चर्चा की गई।

    श्रोता के रूप में शामिल होना भी महत्वपूर्ण

    आयोजन बहुत अधिक लंबी अवधि का नहीं हो, इसलिए आयोजन में पढ़ी जाने वाली रचना का निर्धारण पूर्व से ही किया जाएगा। आयोजन से किसी का भी अधिक वक़्त ज़ाया नहीं होगा, बल्कि हमें कुछ मिलेगा ही। यह आवश्यक नहीं कि उपस्थित हर व्यक्ति हर आयोजन में किसी रचनाकार की रचना को प्रस्तुत करे ही। सिर्फ श्रोता के रूप में भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

    आग्रह, दुराग्रह और पूर्वाग्रह से परे रचनात्मक संवाद

    यह पूरी तरह अनौपचारिक एवं रचनात्मक आयोजन होगा। इसमें किसी भी तरह का आग्रह, दुराग्रह, पूर्वाग्रह भी नहीं होगा। ऐसे आयोजन में उपस्थिति से हमारे शहर का रचनात्मक वातावरण अधिक सारगर्भित हो सकेगा। रचनात्मक संवाद बढ़ाने की इस पहल का सभी ने स्वागत किया।

    आयोजन का प्रभावी पक्ष समय पालन जिसे सभी ने बखूबी साधा

    कोई भी आयोजन समय पर शुरू हो जाए और समय पर ही संपन्न भी हो जाए, ऐसा प्रायः कम ही देखने को मिलता है। इस मायने में “सुनें सुनाएं कार्यक्रम ने मिसाल पेश की। आयोजन की पहली शर्त ही समय पालन थी जिसे सूत्रधार और रचनापाठ करने वालों ने ही नहीं, श्रोताओं ने भी बखूबी साधा। यहां सभी श्रोता थे और सभी वक्ता, कोई मुख्य अतिथि नहीं और कोई अध्यक्ष भी नहीं। ऐसे में अन्य किसी औपचारिकता की तो गुंजाइश बचती ही नहीं। जिन रचनाकारों से हम परिचित हैं और जिनके बारे में कई बार सुना, पढ़ा और समझा लेकिन उन्हीं के बारे में जब सुनने और सुनाने का मौका मिला तो यह आभास हुआ कि अब भी बहुत कुछ है जो सभी को पता नहीं। आयोजन के उद्देश्य की सार्थकता भी यही है। अगले माह हम फिर सुनें-सुनाएं

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    Mon, 10 Oct 2022 00:03:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    निबंध&लेखन का पथ प्रशस्त्र करती है प्रो. अजहर हाशमी की पुस्तक "...तो बसंत लौट आएगा" https://acntimes.com/Pro-Azhar-Hashmis-essay-collection-released https://acntimes.com/Pro-Azhar-Hashmis-essay-collection-released पुस्तक का विमोचन करते हुए लेखक व पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने कहा

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । निबंध हिंदी साहित्य वह विधा है जिसे विशिष्ट श्रेणी में रखा जाता है। किसी विषय पर आलेख लिखना सरल है किंतु निबंध लेखन करना कठिन। प्रो. हाशमी ने "...तो बसंत लौट आएगा" जैसी पुस्तक की रचना करके निबंध-लेखन की मार्गदर्शिका प्रस्तुत कर दी है। प्रो. हाशमी का यह निबंध-संग्रहचेना और चितंन के नए द्वार खोलता है।

    यह बात लेखक व पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने कही। वे प्रसिद्ध साहित्यकार और चितंक प्रो. अजहर हाशमी द्वारा "... तो बसंत लौट आएगा" शीर्षक से लिखी पुस्तक का वर्चुअल विमोचन करने के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि- प्रो. हाशमी का यह निबंध-संग्रह पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि यह नवीन शिक्षा निति (2020) के मानक पर खरा उतरता है। यह पुस्तक ("...तो बसंत लौट आएएगा" ) हर लायब्रेरी में होनी चाहिए।

    112 पृष्ठ का है निबंध संग्रह

    उल्लेखनीय है कि संदर्भ प्रकाशन भोपाल द्वारा 112 पृष्ठ की इस पुस्तक में 41 निबंध हैं- जैसे नववर्ष : संतुलन की साधना-लय की आराधना, उगता सूरज, ...तो बसंत लौट आएगा, इन सात रंगों से खेलें होली, नवरात्र नकारात्मकता पर विजय का पर्व, मैनेजमेंट गुरु गणेशजी, शिव यानी कल्याण, शस्त्र और शास्त्र के समन्वयक का नाम है परशुराम, धर्म का अर्थ स्वरूप और औचित्य, श्रीराम केवट और संविधान, सूफीवाद-ख्वाजा और भारतीय संस्कृति, मानवता के मसीहा महावीर स्वामी, गुरु नानकजी ने दिया संगत और लंगर का संदेश, महानायक बिरसा मुंडा, सौहार्द के संरक्षक महाराणा प्रताप, डॉ. भीमराव आंबेडकर का आर्थिक चिंतन, विज्ञान की वीणा पर स्वावलंबन का संगीत थे कलाम, नारी : सहनशक्ति से समर्थ शक्ति तक, ज्योति बा फुले, गायब है गौरैया आदि।

    प्रो. हाशमी के लेखन में राष्ट्र, शिक्षा और भारतीय संस्कृति का पक्ष गौरवान्वित करने का सामर्थ्य

    उक्त निबंध संग्रह की भूमिका प्रसिद्ध विचारक, कवि व लेखक डॉ. प्रेम भारती ने लिखी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि प्रो. हाशमी के लेखन में राष्ट्र, शिक्षा और भारतीय संस्कृति के पक्ष को गौरवान्वित करने का सामर्थ्य है। सारांश यह है कि प्रो. अजहर हाशमी का गीतकार जितना वजनदार है, उनका गध का लेखन उतना ही दमदार है।

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    Fri, 30 Sep 2022 22:15:37 +0530 Niraj Kumar Shukla
    आवेग पत्रिका के संपादक रहे रचनाकार प्रसन्न ओझा का निधन, वनमाली सृजन केन्द्र ने अर्पित किए श्रद्धासुमन https://acntimes.com/editor-of-aveg-magazine-and-Creator-Prasanna-Ojha-died https://acntimes.com/editor-of-aveg-magazine-and-Creator-Prasanna-Ojha-died एसीएन टाइम्स @ रतलाम । हमारे समय के महत्वपूर्ण रचनाकार और 'आवेग' पत्रिका के संपादक रहे प्रसन्न ओझा का आज अवसान हो गया। वे एक ऐसे रचनाकार रहे जिन्होंने 'आवेग' के माध्यम से कई रचनाकारों को राष्ट्रीय फ़लक़ पर स्थापित किया। वनमाली सृजन केन्द्र रतलाम ने ओझा के निधन पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

    वनमाली सृजन केन्द्र के अध्यक्ष आशीष दशोत्तर ने बताया कि प्रसन्न ओझा ने स्वयं को कभी भी एक्सपोज नहीं किया। राजकमल चौधरी पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य करने वाले वे देश के संभवतः एकमात्र रचनाकार रहे। बार-बार आग्रह के बाद भी प्रसन्न जी ने अपने उस कार्य को पुस्तक आकार प्रदान करने से परहेज किया। ख़ामोश रहते हुए वे हमारे बीच से विदा हो गए। रतलाम से प्रकाशित 'आवेग' के ज़रिए उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण अंक भी निकाले। वनमाली सृजन केन्द्र की संयोजक डॉ. शोभना तिवारी ने भी उनकी स्मृति को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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    Fri, 30 Sep 2022 20:23:54 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मुंशी प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष : क़लम से आम आदमी की आवाज़ को बुलंद किया  https://acntimes.com/Special-on-Munshi-Premchand-Jayanti-July-31-Raised-the-voice-of-common-man-with-a-pen https://acntimes.com/Special-on-Munshi-Premchand-Jayanti-July-31-Raised-the-voice-of-common-man-with-a-pen आशीष दशोत्तर 

    हिंदी साहित्य में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) का स्थान अद्वितीय है ।उन्होंने अपनी क़लम से आम आदमी की आवाज़ को बुलंद किया और अपनी कहानियों और उपन्यास के जरिए सामाजिक विसंगतियों का विशद वर्णन किया।

    इनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार करें तो हम पाते हैं कि मुंशी जी ने  संयम, सादगी, सहनशीलता, परहित और परमार्थ का जो संसार रचा उसमें उनके समकालीन ही नही बल्कि आज तक समस्त प्रशंसक एवं अनुयायी उनके मुरीद बने हुए हैं।

    मुंशी प्रेमचंद ने अपनी क़लम से समाज के उन लोगों की आवाज़ को बुलन्द किया जो सदियों से शोषित और दमित थे। जिनके जीवन में कभी कोई प्रकाश नहीं आने दिया गया था और जो समाज रीति-रिवाजों और कुसंस्कारों के जाल में उलझा हुआ था उसकी पीड़ा को उभारते हुए उसे संबल प्रदान किया। अपने विपुल लेखन में मुंशी प्रेमचंद ने साधारण जीवन का ताना-बाना बुना। जिस संसार में वे रचे-बसे थे उसी को उन्होंने अपने रचना संसार में स्थान दिया। यह किसी भी रचनाकार की ईमानदारी है कि वह जैसा जिये वैसा ही कहे और संसार को वैसा करने के लिए प्रेरित करे।

    मुंशी प्रेमचंद की लेखनी आज भी सभी को अपने दिल के क़रीब  लगती है तो इसीलिए कि उन्होंने अपने दिल से निकली पीड़ा को शब्दों में आकार दिया। वे सहज,सरल,मिलनसार और सह्दय इंसान तो थे ही उनकी अपनी इच्छाएं भी सीमित थीं। मुंशी प्रेमचंद कालजयी रचनाकार इसीलिए कहे जाते हैं क्योंकि उन्होंने अपने काल को रचनाओं में ढाल कर स्वयं को समय से परे कर लिया था।

    उन्होंने कहा था, ‘‘यह ज़माना साम्प्रदायिक अभ्युदय का नहीं है। यह आर्थिक युग है और आज वही नीति सफल होगी जिसमें अंधविश्वास, धर्म के नाम पर किया गया पाखंड, नीतियों के नाम पर जनता को दुहने की प्रथा मिटायी जा सके।‘‘ आज जब हम जाति के नाम पर समाज को फिर से बंटता हुआ देखते हैं तो हमें प्रेमचंद के उस लेख की याद आती है जो उन्होंने ‘जातिभेद मिटाने की एक योजना‘ शीर्षक से लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा ‘‘क्या हम पहले कायस्थ या ब्राह्मण या वैश्य हैं, पीछे आदमी?

    किसी से मिलते ही एक पहला सवाल यही करते हैं कि आप कौन साहब हैं? ग्रामीण में भी यही प्रश्न पूछा जाता है, कौन ठाकुर? और हम कितने गर्व से अपने को शर्मा, वर्मा, तिवारी, चतुर्वेदी लिखते हैं कि क्या पूछना। यह इसके सिवाय क्या है कि भेदभाव हमारे रक्त में सन गया है और हममें जो पक्के राष्ट्रवादी हैं वे भी अपनी साम्प्रदायिकता का बिगुल बजाकर फूले नहीं समाते। वरना इसकी जरूरत ही क्या है कि हम अपने को चतुर्वेदी या त्रिवेदी कहें? खासकर उस दशा में कि हमने वेद की सूरत नहीं देखी और इसमें भी संदेह है कि हमारे पूर्वजों ने भी कभी इसके दर्शन किए थे।‘‘

    प्रेमचंद को याद करते हुए हम यह सीखें कि अगर अपनी प्रस्तुति में स्वाभाविकता होती है तो वह कालजयी होती है। अगर सफलता का नशा हमारे सिर नहीं चढ़े और हम अपनी ज़मीन को नहीं भूलें तो प्रसिद्धि का आसमान सदैव हमारे लिए उपलब्ध रहता है। यदि हम सहज,सरल और मिलनसार रहें तो सभी के प्रिय बन सकते हैं।

    आम आदमी के दुःख और उनकी तकलीफ जब तक हमसे एकाकार नहीं होते तब तक हमारी कला में जीवन्तता नहीं आ पाती। इसलिए कोशिश करें कि हमारे दर्द उनके ही दर्द हों जो उपेक्षित और वंचित हैं। प्रेमचंद जी को नमन।

    आशीष दशोत्तर

    12/2, कोमल नगर, रतलाम

    मोबाइल - 98270 84966

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    Sun, 31 Jul 2022 12:52:33 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ग़ज़ल गोष्ठी : 'परवाज़ कर रहा है मगर चीखता हुआ...'  https://acntimes.com/Ghazal-seminar-Parwaz-kar-raha-hai-magar-cheekhata-hua https://acntimes.com/Ghazal-seminar-Parwaz-kar-raha-hai-magar-cheekhata-hua बज़्मे अदब एवं गुलदस्ता साहित्य मंच के आयोजन में शायरों ने पेश किए बेहतरीन कलाम 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम। बज़्मे अदब एवं गुलदस्ता साहित्य मंच द्वारा ग़ज़ल गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मशहूर शायर साहिर अफ़गानी के मिसरे 'परवाज़ कर रहा है मगर चीखता हुआ'  पर तरही ग़ज़ल गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता जावरा से आए शायर शबाब गुलशनाबादी ने की।

    ग़ज़ल गोष्ठी में अब्दुल सलाम खोकर ने अपनी ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा- "महंगाई का ये दौर और आम आदमी, जीने को जी रहा है मगर रेंगता हुआ।" सिद्दीक़ रतलामी ने अपनी ग़ज़ल में कहा- "ख़ामोशियां भी शेर की पढ़ते रहा करो, ख़ामोश हर सदा में है मानी छुपा हुआ।"

    आशीष दशोत्तर ने अपनी ग़ज़ल में कहा, " नफ़रत मिटा मिटा के उसे हार जाएगी, दिल में जो अपने प्रेम का पुल है बना हुआ।" खंडवा से आए शायर अब्दुल गनी ने अपनी ग़ज़ल में कहा, "जज़्बात कर रहे हैं उजाले की आरज़ू, आंखों में सो रहा है अंधेरा थका हुआ।" जहूर शाहिद खंडवा ने भी बेहतरीन कलाम पढ़ा। फज़ल हयात, लक्ष्मण पाठक, आरिफ अली, मुकेश सोनी, फैज़ रतलामी, शबाब गुलशनाबादी, शब्बीर राही, मकसूद ख़ान, ग़ुलाम मोइनुद्दीन, अमीरुद्दीन अमीर, नानालाल प्रजापति हसनपालिया ने अपनी ग़ज़लें प्रस्तुत की। गोष्ठी का संचालन सिद्दीक रतलामी ने किया। आभार अब्दुल सलाम खोकर ने व्यक्त किया।

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    Tue, 26 Jul 2022 22:52:15 +0530 Niraj Kumar Shukla
    वर्ष 2022 के साहित्यिक सम्मान घोषित : रतलाम के डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला और आशीष दशोत्तर को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान  https://acntimes.com/Literary-Award-for-the-year-2022-declared-Dr-Murlidhar-Chandniwala-and-Ashish-Dashottar-of-Ratlam-will-get-state-level-honor https://acntimes.com/Literary-Award-for-the-year-2022-declared-Dr-Murlidhar-Chandniwala-and-Ashish-Dashottar-of-Ratlam-will-get-state-level-honor एसीएन टाइम्स @ भोपाल / रतलाम । मध्य प्रदेश लेखक संघ की बैठक में वर्ष 2022 के साहित्यिक सम्मानों की घोषणा की गई। इसमें 25 साहित्यकारों और एक संस्था का चयन किया गया है। इनमें रतलाम के साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला एवं आशीष दशोत्तर भी शामिल हैं। इन्हें क्रमशः ल्लभदास शाह अनुवाद सम्मान और दिलजीतसिंह रील व्यंग्य सम्मान दिया जाएगा।

    मध्यप्रदेश लेखक संघ की वार्षिक साधारण सभा का आयोजन हिन्दी भवन भोपाल में सम्पन्न हुआ। इसमें डाॅ. प्रीति प्रवीण खरे द्वारा प्रस्तुत गत साधारण सभा की कार्यवाही तथा सुनील चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2021 - 22 के अंकेक्षित वित्तीय पत्रकों एवं वर्ष 2022 - 23 के बजट प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। तत्पश्चात् प्रन्ताध्यक्ष डाॅ. राम वल्लभ आचार्य ने संघ के वर्ष 2022 के  साहित्यिक सम्मानों की घोषणा की। आचार्य ने बताया कि चयन समिति द्वारा अनुशंसित 25 साहित्यकारों को संघ के वार्षिक सम्मान समारोह में विभिन्न सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

    प्रारंभ में मंचासीन पदाधिकारी प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. राम वल्लभ आचार्य, प्रादेशिक उपाध्यक्ष श्री प्रभुदयाल मिश्र एवं ऋषि श्रंगारी, प्रादेशिक कोषाध्यक्ष सुनील चतुर्वेदी तथा प्रादेशिक संयुक्त मंत्री डाॅ. प्रीति प्रवीण खरे ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित चयनित साहित्यकारों तथा हाल ही में हिन्दी लेखिका संघ की अध्यक्ष निर्वाचित संघ की कार्यकारिणी सदस्य कुमकुम गुप्ता को पुष्पगुच्छ भेंट कर सत्कार किया गया। अंत में गत वर्ष दिवंगत साहित्यकारों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।     

    इन साहित्यकारों का हुआ चयन

    1. पं. बटुक चतुर्वेदी अक्षर आदित्य सम्मान - श्री मनोज श्रीवास्तव, भोपाल
    2. सारस्वत सम्मान - डाॅ. बूला कार, इन्दौर
    3. डाॅ. सरोजिनी कुलश्रेष्ठ कहानी सम्मान - डॉ. उर्मिला शिरीष, भोपाल
    4. डाॅ. पुष्पा चौरसिया श्रेष्ठ गीतकार सम्मान - आचार्य भगवत दुबे, जबलपुर
    5. प्रमोद शिरढोणकर विरहमन स्मृति राष्ट्र प्रेरणा सम्मान - देवेन्द्र  जोशी, उज्जैन
    6. वल्लभदास शाह अनुवाद सम्मान - डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला, रतलाम
    7. सुधा सावित्री तिवारी श्रेष्ठ बुन्देली साहित्यकार सम्मान - गुणसागर सत्यार्थी, कुंडेश्वर
    8. हरिशंकर तिवारी यात्रा वृतान्त सम्मान - ओमप्रकाश शर्मा, भोपाल‌
    9.  दिलजीतसिंह रील व्यंग्य सम्मान - आशीष दशोत्तर, रतलाम 
    10. संतोष तिवारी समीक्षा सम्मान - डाॅ. लखन लाल खरे, शिवपुरी
    11. पं. बृजवल्लभ आचार्य संस्कृतज्ञ सम्मान - डाॅ. केदारनाथ शुक्ल, उज्जैन
    12. हरिओम शरण चौबे गीतकार - गोविन्द अनुज, शिवपुरी
    13. मेहमूद जकी ग़ज़ल सम्मान - सरदार प्रताप सिंह सोढ़ी, इन्दौर
    14. अमित रमेश शर्मा हास्य व्यंग्य मंचीय कवि सम्मान - हरिविट्ठल दुबे 'धूमकेतु'    
    15. पुष्कर जोशी सम्मान - डाॅ. संध्या शुक्ल मृदुल, मंडला
    16. देवकीनंदन माहेश्वरी सम्मान - नीलम कुलश्रेष्ठ, गुना एवं ऊषा सक्सेना, भोपाल
    17. कमला चौबे लेखिका सम्मसन - डाॅ. उर्मि शर्मा, उज्जैन
    18. कस्तूरी देवी चतुर्वेदी लोकभाषा सम्मान - पं. मथुरा प्रसाद जोशी, सुहागपुर
    19. हरीश निगम मालवी भाषा सम्मान - माया मालवेन्द्र बदेका, उज्जैन
    20. मालती बसंत बाल साहित्यकार सम्मान - अनिल अग्रवाल, भोपाल  
    21. रामपूजन मलिक नवोदित गीतकार सम्मान - रूपाली सक्सेना एवं अभिषेक जैन, भोपाल को (संयुक्त)
    22. अरविन्द चतुर्वेदी साहित्य सेवी सम्मान - डाॅ. मीना साकल्ले खंडवा
    23. उत्कृष्ट इकाई सम्मान - उज्जैन इकाई
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    Sun, 17 Jul 2022 22:34:42 +0530 Niraj Kumar Shukla
    क्रांतिकारियों के जीवन चरित्र से परिचय कराने वाले मांगीलाल जी का यूँ चले जाना अर्थात वैचारिक समरसता के दीपक का बुझ जाना https://acntimes.com/The-lamp-of-ideological-harmony-has-been-extinguished https://acntimes.com/The-lamp-of-ideological-harmony-has-been-extinguished राष्ट्रीय विचारक डॉ. रत्नदीप निगम से जानें साहित्य जगत को हुई क्षति के बारे में

    आज की सुबह रतलाम के लिए स्तब्ध करने वाली एक अत्यंत दुखद सूचना लेकर आई। नवसंचार माध्यम से जैसे ही श्री मांगीलाल जी यादव के निधन का समाचार प्रसारित हुआ, रतलाम का साहित्य जगत शोकमग्न हो गया। श्री मांगीलाल जी यादव रतलाम के ऐसे अदृश्य योद्धा थे जिन्होंने अपना जीवन क्रांतिकारियों के समर्थन एवं उनकी स्मृतियों को जीवित रखने में बिता दिया। रतलाम ही नहीं अपितु आसपास के अंचल में भी जाकर उन्होंने तत्कालीन समय के आजाद हिंद फौज के सिपाहियों को एवम क्रांतिकारियों को ढूंढ-ढूंढ कर उनसे मिलना एवम् उनका विभिन्न मंचों पर सम्मानित करना उनके जीवन का ध्येय था।

    प्रसिद्ध क्रांतिकारी भगत सिंह की प्रतिमा रतलाम में स्थापित करने का उनका जुनून था। लगभग 30 वर्षों के सतत संघर्ष के बाद पूर्व पार्षद संदीप यादव के सहयोग से तत्कालीन महापौर परिषद द्वारा भगतसिंह की प्रतिमा की स्थापना करवाकर ही चैन लिया। रतलाम में व्याख्यानमालाओं के प्रारंभ करने के लिए उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप स्वर्गीय सरदार हरदयाल सिंह जी ने उनकी प्रेरणा से 1995 में रतलाम में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला प्रारंभ हुई।

    स्वर्गीय भंवर लाल जी भाटी की स्मृति में व्याख्यानमाला प्रारंभ करने और देश के प्रसिद्ध विद्वानों को उसमें व्याख्यान करवाने में भी श्री यादव जी ने सक्रिय भूमिका अदा की। रतलाम में साहित्यिक गोष्ठियों के नियमित आयोजन के लिए भी कवियों, लेखकों को लगातार प्रेरित करते रहने वाले यादव जी कुशल अध्येता एवं सफल आयोजक रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे अपने वैचारिक प्रतिद्वंद्वीयों में भी सभी के अत्यंत प्रिय थे। रतलाम में किसी भी विषय की गोष्ठियों का आयोजन करना और सभी मे अपने वैचारिक प्रतिद्वंद्वियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की कला में पारंगत थे।

    विचारधारा के आधार पर छुआछूत और घृणा के इस युग में कोई कल्पना कर सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय का सभाकक्ष हो और वीर सावरकर के विषय पर व्याख्यान हो और व्याख्यान देने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सरदार हरदयाल सिंह हों, उपस्थित श्रोता गण घोर कम्युनिस्ट, कांग्रेसी और संघ के स्वयंसेवक हों। यह साम्यता केवल मांगीलाल यादव ही स्थापित कर सकते थे और उन्होंने कर दिखाया। वे युवाओं को क्रांतिकारियों का साहित्य एकत्रित कर पढ़ने के लिए देते थे और क्रांतिकारियों के विषय पर उनको लिखने के लिए प्रेरित करते थे।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय स्वयंसेवक रहे मांगीलाल जी कम्युनिस्ट संगठनों के कार्यक्रमो, कांग्रेसी मंचो पर आदरपूर्वक बुलाये ही नहीं जाते थे अपितु उन आयोजनों में व्यवस्थापक की भूमिका भी निभाते थे। रतलाम ने आज विचारधाराओं की नदियों के मध्य का सेतु खो दिया। शहीद भगतसिंह की जयंती हो या पुण्यतिथि, वर्ष में दो कार्यक्रम उनकी ओर से आयोजित किया जाना तय था। क्रांतिकारियों के जीवन चरित्र से सभी को परिचय कराने वाले मांगीलाल जी का यूँ चले जाना अर्थात वैचारिक समरसता का दीपक बुझ जाना। भविष्य में होने वाली किसी भी व्याख्यानमालाओं, साहित्यिक गोष्ठियों एवम बौद्धिक कार्यक्रमों में मांगीलाल जी सदैव स्मरण किये जायेंगे।

    डॉ. रत्नदीप निगम

    (राष्ट्रवादी विचारक)

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    वैचारिक समरसता के पर्याय और क्रांतिकारियों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाने वाले मांगीलाल यादव जी को एसीएन टाइम्स परिवार की ओर से शत्-शत् नमन। 

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    Sun, 17 Jul 2022 10:45:01 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्यंग्य : 'मात्र कृपा' और 'गृह शांति'... इन शब्दों के सही या गलत होने के चक्कर में मत पड़िए, सिर्फ पढ़िए और आनंद लीजिए https://acntimes.com/vyangy-maatr-krapa-aur-grih-shaanti https://acntimes.com/vyangy-maatr-krapa-aur-grih-shaanti  आशीष दशोत्तर

    जीवन भर की जोड़-तोड़, जुगाड़ और जोर आजमाइश का नतीजा एक आलीशान भवन के रूप में इस तरह तब्दील होगा, उन्होंने कभी सोचा नहीं था। दोनों हाथों से समेटने में उनका कोई सानी नहीं रहा। कभी-कभी तो उन्हें ईश्वर पर क्रोध आया कि ये हाथ दो ही क्यों दिए हैं। चार-पांच और होते तो कितना बटोरा जा सकता था। हाथ खाली न होने पर देने वाले जेब में ठूंस-ठूंस कर दे गए। उस समय उन्हें बहुत बुरा लगा कि कोई दे रहा है और लेने के लिए हाथ खाली नहीं।

    दफ़्तर में बैठकर, रास्ते में ऐंठ कर और हर किसी को सेट कर, उन्होंने हर किसी से भरपूर बटोरा। किसी को भी नहीं छोड़ा। न किसी रिश्ते का लिहाज किया, न किसी नाते के कारण ना-नुकुर किया। लेने में किसी स्टेटस को मेंटेन करने के चक्कर में वे कभी नहीं पड़े। जहां से जितना, जैसा भी मिल पाया वह लिया। कभी प्रेम से, कभी पुचकार कर, कभी दुत्कार कर, कभी डरा कर तो कभी समझा कर। हर तरह से लिया ही लिया।

    उनका कहना रहा, एक जीवन में अगर आदमी इतना भी न कर सके तो उसका जीवन ही बेकार है। आदमी आया किस लिए है ? सोरने और बटोरने के लिए। उसे ऊपर वाले ने दोनों हाथ दिए किस लिए हैं? बेवकूफ़ हैं वे लोग जो इन दोनों हाथों का उपयोग बोझा ढोने में करते हैं। अरे, नरम हाथों से कुछ नरम नोट लीजिए। वे दोनों हाथों का इस्तेमाल किसी नेक काम में करते रहे। कभी दाएं हाथ से बायीं हथेली को खुजाते  रहे तो कभी बाएं हाथ से दाएं हाथ की हथेली को। उनकी हथेली की खुजली कभी कम नहीं हुई और न ही कभी आवक।

    इतनी मेहनत, मशक्कत के बाद आखिर उनका यह महलनुमा ग़रीबखाना खड़ा हो ही गया। मकान का नाम उन्होंने रखा 'मात्र कृपा'। पड़ोस में रहने वाले बुद्धिजीवी को आमंत्रण देने गए तो आदतन बुद्धिजीवी ने आमंत्रण-पत्र में ग़लतियों की तरफ़ इशारा किया। इसे 'मात्र कृपा' नहीं, 'मातृ कृपा' लिखना था। वे हंसते हुए कहने लगे, यह 'मातृ' कृपा से नहीं, 'मात्र', कृपा से ही बना है, इसलिए इसका नाम सोच-समझ कर रखा है।  और हां, आप 'गृह शांति' में आना मत भूलिएगा। बुद्धिजीवी फिर बोला, आपने 'गृह शांति' लिखा है, 'ग्रह शांति' लिखना था।

    वे  फिर हंसते हुए बोले, हम जैसों के तो नौ ग्रह वैसे ही बलवान होते हैं, उनकी शांति के लिए क्या पाठ करना। हमें तो इस 'गृह' की शांति कायम रखने के लिए पाठ करना है। वे हंस रहे थे, बुद्धिजीवी उनके ज्ञान पर अचंभित और अपने ज्ञान पर क्षुब्ध था।

    आशीष दशोत्तर

    -12/2, कोमल नगर
    बरबड़ रोड
    रतलाम - 457001
    मो. नं. - 9827084966

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    Thu, 09 Jun 2022 03:15:23 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्यिक संस्था अनुभूति द्वारा प्रकाशित अभा काव्यानुभूति काव्य संकलन का विमोचन 7 मई को होगा https://acntimes.com/Abha-Kavyanubhuti-Poetry-Anthology-published-by-the-literary-organization-Anubhuti-will-be-released-on-May-7 https://acntimes.com/Abha-Kavyanubhuti-Poetry-Anthology-published-by-the-literary-organization-Anubhuti-will-be-released-on-May-7 एसीएन टाइम्स @ रतलाम । काव्यानुभूति काव्य संकलन का विमोचन 7 मई (शनिवार) को मेडिकल कॉलेज के सामने होटल जलसारा में होगा। रतलाम नगर के अग्रणी साहित्यिक संस्था अनुभूति द्वारा अखिल भारतीय काव्य संकलन के विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि भाशाविद् वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयकुमार जलज होंगे। अध्यक्षता डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला (शिक्षाविद् एवं साहित्यकार) करेंगे। संस्था संरक्षक दिनेश जैन, रमणसिंह सोलंकी, संस्थापक प्रेणश जैन, अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार, उपाध्यक्ष हरिशंकर भटनागर, अब्दुल सलाम खोकर, सतीश जोशी, सचिव रामचन्द्र गेहलोत अम्बर, सहसचिव सुरेश माथुर ने साहित्यकारों से विमोचन समारोह में उपस्थित करने की अपील की है।।


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    Thu, 05 May 2022 22:28:12 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्यंग्य :  रोशनी और मेंटेनेंस : आशीष दशोत्तर  https://acntimes.com/Satire-Roshni-and-Maintenance-Ashish-Dashottar https://acntimes.com/Satire-Roshni-and-Maintenance-Ashish-Dashottar आशीष दशोत्तर 
    बिजली गुल होते ही रोशनी देवी की निद्रा टूटी। वे उठ खड़ी हुईं। इधर-उधर हाथ घुमाकर टॉर्च ढूंढने की कोशिश करने लगी। सोच रही थी, क्या वक़्त आ गया है। अब रोशनी को भी अंधेरे में टॉर्च ढूंढनी पड़ रही है। मगर यह व्यवस्था की चरम अवस्था थी, जिसमें ऐसा होना कुछ ग़लत नहीं था।
    कुछ कोशिशों के बाद टॉर्च उनके हाथ में आ ही गई। बार-बार गुल होती बत्ती के कारण टॉर्च का स्थान बदलता रहा, इसलिए देर से मिली टॉर्च ने भी रोशनी देवी को कुछ ढांढस बंधाया। टॉर्च जलाते ही उन्होंने अपना मोबाइल उठाया। गुस्से में बिजली विभाग का नंबर डायल किया। परम्परानुसार बिजली विभाग का टेलीफोन कुछ देर व्यस्तता बताता रहा। पंद्रह मिनट की कोशिशों के बाद फोन की घंटी बजने लगी। रोशनी देवी तिलमिलाई हुई थी। उधर से कर्मचारी द्वारा फोन उठाते ही वे शुरू हो गई।' उजाला टाउनशिप में कभी से बिजली गई हुई है। आखिर कब तक आएगी?
    कर्मचारी बोला, तेज़ हवाओं के चलने से फाल्ट हुआ है। उसे सुधारा जाना है।
    रोशनी देवी को गुस्सा आया। कहने लगी,  मेंटेनेंस के नाम पर पिछले दो माह से कितनी ही बार दिन-दिन भर के लिए बिजली आपूर्ति रोकी जा चुकी है। फिर यह फाल्ट कैसा?
    कर्मचारी बोला, इतना तो मैं नहीं जानता। मेरे पास जो जानकारी थी वह मैंने दे दी। रोशनी देवी को और गुस्सा आया। उन्होंने कहा, आखिर कौन हमें बताएगा कि ऐसा बार-बार क्यों होता है?
    कर्मचारी ने अपने से बड़े अधिकारी के नंबर दे दिए। कहने लगा, आप इनसे ही संपर्क करें। 
    रोशनी देवी ने अधिकारी को फोन लगाया। अधिकारी ने फोन उठाया। रोशनी देवी के सवाल पर कहने लगा, मैडम, हम आपकी समस्या समझते हैं, मगर तेज हवाएं चलने से आपके एरिए में बड़ा फाल्ट हुआ है। उसे सुधारने के बाद ही लाइट चालू हो सकेगी।
    रोशनी देवी ने पूछा, कब तक सुधारा जा सकेगा।  अधिकारी बोला, यह फाल्ट पर निर्भर करता है। वह कितना बड़ा है ,उसके हिसाब से उसे सुधारा जा सकेगा। कई फाल्ट तत्काल सुधर जाते हैं। कई फाल्ट 2 दिन में भी नहीं सुधरते और कई फाल्ट तो महीनों तक नहीं सुधर पाते। 
     
    रोशनी देवी को चिढ़ आने लगी। 'यह कैसा जवाब हुआ भला। अधिकारी ने कहा, मेरे पास जितनी जानकारी थी, मैंने आपको दे दी। फाल्ट की गहराई से जुड़ी जानकारी लेने के लिए आपको हमारे बड़े अधिकारी से बात करना होगा। यह कहते हुए उसने अपने से बड़े अधिकारी का नंबर रोशनी देवी को दे दिया।
     
    रोशनी देवी ने उन्हें फोन लगाया। इस बार रोशनी देवी ने कुछ शांत लहजे में बात की। दो लोगों से चर्चा के बाद व्यक्ति का गुस्सा वैसे ही ठंडा पड़ जाया करता है। इसलिए रोशनी देवी भी अब थोड़ा सहज हो चुकी थीं। उन्होंने बड़े अधिकारी से पूछा, उजाला टाउनशिप में बिजली कभी से गई हुई है। आखिर आप मेंटेनेंस करते किसलिए हैं?
     
    बड़ा अधिकारी शांत स्वर में बोला, मैडम, मेंटेनेंस कई तरह के होते हैं। जिस तरह के मेंटेनेंस आपके एरिया में किए गए यह फाल्ट उस तरह का नहीं है, इसलिए बिजली गुल हो गई। 
     
    रोशनी देवी ने कहा, पिछले दो माह से मेंटेनेंस के नाम पर कई बार हमारे घर की बिजली गुल हो चुकी है। फिर ये बिजली क्यों गई?
     
    अधिकारी ने समझाया, देखिए मैडम। पहली बार मेंटेनेंस किया गया था उसमें बिजली के तारों पर आने वाली पेड़ों की डालियों को हटाया गया। दूसरी बार मेंटेनेंस में बिजली खंभों की स्थिति देखी गई। तीसरी बार के मेंटेनेंस में ट्रांसफार्मर को सुधारा गया। चौथी बार के मेंटेनेंस में ढीले हो चुके बिजली तारों को कसा गया। पांचवें तरह के मेंटेनेंस में हल्की हवा चलने पर कोई फाल्ट न हो इस संबंध में काम किया गया।
     
     रोशनी देवी का पारा फिर गरम हो रहा था। इधर से बोलीं, तो फिर यह फाल्ट क्यों हो गया?
     
    बड़ा अधिकारी बोला, यही तो मैं समझा रहा हूं। हमने हल्की हवा चलने पर होने वाले फाल्ट से बचने के प्रबंध किए थे, मगर यह तो तेज हवा थी। तेज हवा के लिए मेंटेनेंस तो अभी तक किया ही नहीं गया है। 
     
    रोशनी देवी तमतमा रही थीं।  कहने लगीं, मतलब जब-जब भी तेज हवा चलेगी बिजली इसी तरह जाती रहेगी?
    बड़ा अधिकारी बोला, नहीं...नहीं। आप ऐसा न समझें। अभी हमें कई मेंटेनेंस करना हैं। तेज हवाओं के चलने पर फाल्ट से बचने का मेंटेनेंस। हल्की बारिश होने पर किया जाने वाला मेंटेनेंस। तेज बारिश होने पर किया जाने वाला मेंटेनेंस। रोशनी देवी बोलीं, इसके बाद बिजली नहीं जाएगी, इस बात की तो गारंटी होगी न? 
     
    बड़ा अधिकारी बोला- यह तो वक्त और परिस्थिति पर निर्भर करता है। सारे मेंटेनेंस के बाद भी कुछ ऐसी परिस्थिति निर्मित हो जाएं और बिजली चली जाए तो आप अन्यथा न लें। हम और हमारा विभाग आपकी सेवा के लिए सदैव तत्पर है। 
     
    बड़े अधिकारी का जवाब सुनते ही रोशनी देवी ने हाथ की टॉर्च को अपने सर पर दे मारा। जोर का झटका लगते ही टॉर्च भी बंद हो चुकी थी। रोशनी देवी अंधेरे में ही अपनी टॉर्च के मेंटेनेंस में जुट गईं।
     
    12/2, कोमल नगर, रतलाम
     
    मो.9827084966
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    Mon, 18 Apr 2022 23:13:32 +0530 Niraj Kumar Shukla
    कवि और कविता : सिर्फ़ स्थगित होते हैं युद्ध, ख़त्म नहीं होते कभी  https://acntimes.com/Poet-and-Poetry-Wars-are-only-postponed-they-never-end https://acntimes.com/Poet-and-Poetry-Wars-are-only-postponed-they-never-end आशीष दशोत्तर
    कविता अपने वक्त की पहचान कराती है। जब शब्दों के सामने बहुत से संकट खड़े हों, जब छद्म आवरण के जरिए सत्य को ढंकने की कोशिश की जा रही हो, जब हक़ीक़त को हाशिए पर धकेला जा रहा हो, तब कविता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कविता सिर्फ शाब्दिक जुगाली नहीं बल्कि उस अनुभूति से उपजी हक़ीक़त है जिसे हम भोगा हुआ यथार्थ कहते हैं। कविता के कई आयाम हो सकते हैं। कई रूप हो सकते हैं, मगर उसकी पक्षधरता सदैव मनुष्य के साथ ही होना चाहिए। मनुष्य से अलग और मनुष्यता से विमुख कविता सार्थक नहीं होती। कविता वही हर वक्त में दोहराई जाती है जो इंसानियत से वाबस्ता रहे।
     
    अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता, स्पष्ट दृष्टि और सकारात्मक रुख़ के ज़रिए काव्य जगत में अलग पहचान बनाने वाली कवियत्री प्रभा मुजूमदार की कविताएं भी हालात की अक्कासी करती हैं। वक़्त से सवाल करती है और हर उस पीड़ा को उभारने की चाह रखती है, जिससे आम इंसान त्रस्त है।
     
     दुःख अक्सर आता है दबे पाँव
    और निहत्था पाकर कर देता है वार।
    ठीक उस वक़्त जब खुशी से कुलाँचे
     
    भर रहे होते हैं हम
     
    तभी गर्दन दबोचकर पटक देता है ज़मीन पर।
     
    थिरक रहे होते हैं प्यारी सी धुन पर
     
    तभी सीने में भर देता है पीड़ा की लहरें। 
     
    प्रभा जी 1973 से लेकर 1977 तक रतलाम में रहीं। रतलाम में बिताए ये वर्ष दिखने में कम अवश्य रहे मगर महत्वपूर्ण रहे। वे कहती हैं,'मेरे लिए ये वर्ष बहुत महत्वपूर्ण एवं उपलब्धियों से भरे रहे। यहीं से गणित में एम.एस-सी. किया और विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम रहीं। कॉलेज की साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों में बहुत भागीदारी रहीं। उस वक्त देवताले सर, पाठक सर आदि के साथ चर्चाओं में बहुत सीखा भी। एक अरसे बाद रतलाम से सम्बद्ध किसी साहित्यिक गतिविधि के बारे में बात करते हुए बहुत खुशी हो रही है।'  प्रभा जी साहित्यिक गतिविधियों में काफी सक्रियता से लगी रहीं। कविता के प्रति लगाव और समझ इस वातावरण से ही मिल सका। यह उनकी कविता से स्पष्ट भी होता है।
     
     अंतिम नहीं होती कोई हार, कोई भी जीत 
     
    निर्विवाद नहीं होती।
     
    सिर्फ़ स्थगित होते हैं युद्ध ख़त्म नहीं होते कभी।
     
    एक युद्ध का परिणाम अक्सर निर्धारित करता है
     
    आगामी जंग का आरंभ समय, सीमा,दिशा....... 
     
    जीत के जश्न बढाते हैं 
     
    प्रतिशोध में लिए गए संकल्पों के तेज। 
     
    इतिहास दोहरता है अपने को 
     
    नए नामों और चेहरों के साथ।
     
    देखो समूचा ब्रह्मांड ही एक युद्धस्थल बन गया है 
     
    इस कौरव पांडवों के खेल में 
     
    और मूक प्यादे बने हम अभिशप्त हैं 
     
    एक खेमे को चुनने के लिए। 
     
    षडयंत्रों और झूठ,
     
    अधर्म और अन्याय की बुनियाद पर 
     
    खुदगर्ज़ी और अहंकार के लिए लड़े जा रहे 
     
    एक और धर्मयुद्ध को जारी रखने के लिए।  
     
    प्रभा जी की कविताएं वक्त से आंख मिलाती कविताएं हैं। वे सच को सच कहने का साहस रखती हैं। ये कविताएं सत्य को स्वीकारने और झूठ पर उंगली उठाने से गुरेज नहीं करतीं। उनकी कविताएं कविता की दिशा को स्पष्ट रूप से तय करती है। एक रचनाकार को अपनी रचना का रुख  कैसे तय करें, यह प्रभा जी की कविताओं से सीखा जा सकता है। वे निरंतर प्रतिरोध की कविताएं लिखकर भी अपनी कविता की ताक़त को कम नहीं होने देती हैं। उनकी कविता बेहतर से और बेहतरी की तरफ़ जाती है और इशारों ही इशारों में कई सारे सवालों को खड़ा करती है। 
     
    उसने मुहिम छेड़ रखी है
     
    सारी लंबी रेखाओं को मिटाने की। 
     
    कुछ बड़ी रेखाओं को बताया 
     
    इतिहासकारों की साजिश। 
     
    कुछ रेखाओं के रंग देश विरोधी बताएं, 
     
    कुछ लंबी रेखाओं की  स्याही मेँ पाए तत्वों को,
     
    साज़िशों से भरपूर बताया 
     
    तो कुछ रेखाओं को खड़ा कर दिया 
     
    आमने - सामने दुश्मनों की तरह। 
     
    गोलियां भी चलवा दीं कुछ रेखाओं पर 
     
    या भस्म हो जाने का श्राप दे दिया 
     
    अपने संत साध्वियों के द्वारा।    
     
    मगर न जाने किस मिट्टी से 
     
    खींची गईं थी रेखाएँ,
     
    समय के शिलालेख सी...
     
    गालियों, गोलियों, श्रापों के 
     
    किसी भी प्रभाव से अविचलित,
     
    पूरी दुनिया के पटल पर जगमगाती रहीं। 
     
    यहाँ तक कि समानान्तर ही रहीं 
     
    एक-दूसरे को जबरन काटने 
     
    खड़ी की गई रेखाएँ या पूरक हो कर 
     
    बन गई और भी लंबी गहरी।  
     
    यहां प्रभा मुजूमदार जी की चिंता लाज़मी है । रचनाकार दरअसल इसी लकीर से चिंतित रहता है । यह लकीर जो हर कहीं खींच दी जाती है । दिलों से लेकर सरहदों तक।  घर से लेकर बाज़ार तक। रस्मों से लेकर रवायत तक और न जाने कहां-कहां ये रेखाएं मनुष्य को मनुष्य से अलग करती हैं। प्रभा जी की चिंता भी इसी रेखा को लेकर है। वक़्त का हर दौर इस तरह की लकीरों के साथ उपस्थित होता रहा। मनुष्यता को बचाने के लिए रचनाकार सदैव अपनी रचना के ज़रिए यही कोशिश करता है कि इन लकीरों की उम्र अधिक न हो। प्रभा जी की कविता भी ऐसी ही कोशिशों से गुज़रती नज़र आती है। 
     
    तानाशाह के लिए
     
    ज़रूरी बस इतना ही है कि खडे कर दिये जाएं,
     
    वे तमाम लोग एक-दूसरे के विरोध में,
     
    जिन्हें असल में होना चाहिए एक-दूसरे के साथ,
     
    हमदर्द और मददगार।
     
    कल्पित शत्रुओं के नाम से
     
    डराये गए,छले , भरमाए हुए लोग,
     
    बहुत उपयुक्त होते हैं
     
    बारूद की तरह इस्तेमाल होने के लिए।
     
    उसके प्रचारतंत्र को,
     
    झूठे किस्सों की बम्पर पैदावार चाहिए।
     
    आपस में ही ले लेंगे वे एक दूसरे की जान,
     
    और महसूस कर लेंगे
     
    पुण्य हासिल होने का सुकून।
     
    निर्मम हत्याओं को कह देंगे शौर्य और इंसाफ़।
     
    इतिहास की किन्हीं ग़लत-सही घटनाओं का
     
    हिसाब चुकता कर देंगे, बस उनकी पीठ पर
     
    अभयदान का तुम्हारा हाथ चाहिए। 
     
    कवि की बेचैनी क्या होती है? यह सवाल बहुत आसान है मगर इसका जवाब कई सारे संदर्भों को जोड़ता है। कवि की बेचैनी सिर्फ़ उसकी नहीं होती बल्कि वह उन तमाम परिस्थितियां को लेकर बेचैन होता है जो उसके आसपास होती है। उसका अपना परिवेश, उसका समाज, उसका अपना क्षेत्र। जिस परिधि में वह निवास करता है उस परिधि की विवशता और व्यवस्था। उसका अपना प्रदेश, उसका अपना देश। सभी दूर की बेचैनी उसकी अपनी बेचैनी होती है। एक रचनाकार ही उसे शिद्दत से महसूस करता है। उसके लिए इतना अधिक परेशान हो जाता है कि वह बेचैनियों से ख़ुद को वाबस्ता कर लेता है। इसीलिए उसे हर दर्द में अपना दर्द ही नज़र आता है। हर किसी की विवशता में अपनी विवशता नज़र आती है। किसी पर होते सितम में खुद पर सितम महसूस होता है। यानी वह अकेला होकर भी सभी के साथ होता है और सभी के बीच होकर भी अकेला। प्रभा जी की बेचैनी भी उनकी अकेले की न होकर बहुत व्यापक महसूस होती है।
     
    यह अपराधियों का स्वर्ण युग है। 
     
    हत्यारे को अभयदान मिल चुका है
     
    सत्ता के शीर्ष से।
     
    घोषित किया जा चुका है उसे
     
    दल और कुल का जगमग दीप।  
     
    व्यवस्था समूची शक्ति और सामर्थ्य के साथ,
     
    उसके साथ खड़ी है ,
     
    षडयंत्रों की रंगीन छतरी को लेकर ।   
     
    झंडों, नारों जुलूसों के उन्मत्त गर्जन में 
     
    घोंट दी गई है क्षत विक्षत देह की 
     
    सिसकियाँ, चीत्कार....
     
    मूक की जा चुकी, समूहिक चेतना, आत्मा की 
     
    चुनौती देती कुछ दबी हुई आवाज़ें।
     
    जेल की यातनाएँ,
     
    तेज रफ्तार गाडियाँ, गुंडों की दहशत,
     
    एक साथ मिटा देती हैं 
     
    पीड़ित और प्रताड़ितों की
     
    कई- कई पीढ़ियाँ। 
     
    यूं भी ग़लत का विरोध, जुल्म का प्रतिरोध, 
     
    घोषित अपराध है इन दिनों।  
     
    परिस्थितियां विकट है तब क्या मनुष्य को हार मान लेनी चाहिए ?प्रभा मुजुमदार जी की कविता इस बात से इनकार करती हैं। उनकी रचना कहती है की परिस्थितियां कैसी भी हो लेकिन उन्हें एक दिन बदलना है। आज भले ही घना अंधियारा है मगर हर अंधकार के बाद एक रोशनी बिखरती है। प्रभा जी की कविता भी उसी रोशनी की उम्मीद जगाती है। 
     
    अंतिम नहीं होती कोई पराजय
     
    अँधेरे, घुटन और अपमान के
     
    अवसाद भरे कोनो में
     
    कहीं न कहीं छिपी ही होती है
     
    सम्भावना की हल्की सी किरण
     
    दिये कि लौ सा टिमटिमाता कुछ उजाला। 
     
    कवि का अपनी जड़ों की ओर लौटना स्वभाविक है। यह उसके भीतर का जुड़ाव ही है जो उसे बार-बार अपनी जड़ों की ओर ले कर आता है। समय के साथ कई सारे पल ,स्मृतियां और दृश्य हमसे छूटते जाते हैं। ये सारे दृश्य एक रचनाकार के भीतर सदैव मौजूद रहते हैं और बार-बार उसे अपने क़रीब आने के लिए विवश करते हैं। रचना प्रक्रिया से गुज़रने की छटपटाहट उन दृश्यों के क़रीब जाने की कोशिश ही है। जब तक रचनाकार उन दृश्यों की ओर नहीं लौटता उसे चैन नहीं मिलता। प्रभा जी भी अपनी जड़ों का ज़िक्र करती है बल्कि वह अपनी जड़ों को बचाने का जतन भी करती हैं। 
     
    जड़ें जानती हैं अपने को ज़िन्दा रखना,
     
    अन्धेरे और गुमनामी के बरसों, सदियों, युगों...
     
    मिट्टी की अनगिनत पर्तों के भीतर
     
    वे पड़ी रहती हैं अविचल, निस्पन्द, निर्वासित-सी।
     
    झेलती हैं धरती के कम्पन
     
    आसमान का फटना महसूस करती हैं
     
    अपने ठीक ऊपर।
     
    धंसती हैं वे पाताल की अथाह गहराइयों में
     
    उस शाख के लिये,
     
    जो आसमान को छू लेना चाहती है।
     
    सूरज को देखे बग़ैर महसूसती है उसकी आँच।
     
    डालियों पर झूलती फूल-पत्तियों की इठलाहट से।
     
    तितलियों के संगीत से झूमती है मन ही मन।
     
    जड़ें जानती हैं वक़्त और हालात की
     
    थोड़ी भी चूक से कितने ही बीज नष्ट हो चुके हैं 
     
    वृक्ष बनने की राह में।
     
    फिर भी उसे अभिमान नहीं अपेक्षा,
     
    महात्वाकांक्षा नहीं।
     
    विशालकाय वृक्ष से कृतज्ञता की दरकार नहीं
     
    इसीलिये ज़िन्दा हैं जड़ें
     
    मृतप्राय समझी जाने के बावज़ूद।   
     
    एक रचनाकार सदैव नवसृजन का पक्षधर होता है। वह किसी भी स्थिति में हर उस आमद का स्वागत करता है जो कई सारी संभावनाओं को जन्म देने में सक्षम होता है। प्रभा जी के भीतर का रचनाकार भी उस नवीन संभावना के प्रति बहुत आशान्वित है। उनकी कविताएं नएपन का स्वागत कर उसे सहजने की इच्छा रखती हैं। 
     
    बहुत सुखदायी होता है
     
    ठूंठ पड़े वृक्षों पर नई कोंपलों को फूटते देखना,
     
    हरी-भरी ताज़ा पत्तियों से
     
    सज-संवर कर उनका इठलाना।
     
    बारिश से पायी अमृत की थोड़ी-सी बून्दों से,
     
    एक अतीत जैसे उठ खड़ा हुआ वर्तमान में
     
    और झाँक रहा है भविष्य के रोशनदानों से बाहर,
     
    आशा और आस्था से परिपूर्ण हो गया है मन।
     
    सुदूर आकाश के छोर पर एक इन्द्रधनुष
     
    झिलमिला रहा है जीवन के सारे रंगों को समेटे।   
     
    प्रभा जी का जन्म 10 अप्रैल, 1957 को इन्दौर में हुआ। एम.एससी. पीएच.डी. (गणित) करने के बाद वे तेल एवम प्राकृतिक गैस आयोग में भूवैज्ञानिक के तौर पर 35 वर्ष कार्यकाल के बाद उप महाप्रबंधक (तेलाशय) के पद से मई 2017 में सेवानिवृत हो चुकी हैं। उनके 4 कविता संग्रह ‘अपने अपने आकाश’ (2003), ‘तलाशती हूँ जमीन’ (2010), ‘अपने हस्तिनापुरों में’ (2014) “सिर्फ स्थगित होते हैं युद्ध” (2019) प्रकाशित हुए हैं। 
     
    प्रभा जी को कविता के लिए गुजरात साहित्य परिषद, सृजनगाथा द्वारा डॉ श्रीकांत वर्मा पुरस्कार,शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा कविता पुरस्कार, सृजनगाथा (छत्तीसगढ़) द्वारा सिंधु रथ पुरस्कार ,शब्द निष्ठा अजमेर द्वारा व्यंग्य के लिए पुरस्कार, हिन्दी लेखिका संघ म. प्र. द्वारा रजत जयंती समारोह में काव्य संग्रह हेतु पुरस्कार, 
     
    अविराम साहित्यिकी द्वारा समकालीन लघुकथा प्रतियोगिता पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले हैं।
     
    प्रभा जी की रचनाओं में स्त्री स्वर को प्रमुखता मिली है। वे स्वयं एक स्त्री होने के कारण उस भोगे हुए यथार्थ को सामने लाने से पीछे नहीं हटती। वे स्त्री की उस परवशता को भी कविता के ज़रिए सामने लाती है जो अमूमन कई सारे पर्दों के पीछे छुपी रह जाया करती है। 
     
    बाज़ार को चाहिए
     
    नख से शिख तक औरत की देह,
     
    जिसकी नुमाइश कर वह बेच सके
     
    साबुन और क्रीम,शैंपू और लिपस्टिक।
     
    बाज़ार को चाहिए
     
    करवाचौथ करती हुई औरतों के जमघट
     
    जिनसे बिक सकें पूजा का सामान
     
    बिंदी, चूड़ियाँ और चुनरी।
     
    बाजा़र को चाहिए
     
    अभावों से ग्रस्त, फतवों से त्रस्त
     
    सताई हुई औरतों के आँसू
     
    जिनकी संजीवनी से चल निकले
     
    अनाम / अनजान चैनल्स, बंद पड़े अख़बार
     
    छुटभैयों की परिचर्चाएं। 
     
    इन परिस्थितियों के लिए वे जिम्मेदारों पर उंगली उठाने से भी नहीं चूकती । स्त्री शक्ति और उसके महत्व की बात करने वाले ज़िम्मेदार जब स्त्री को अधिकार देने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं। प्रभा जी ज़िम्मेदारों कै इस दोगलेपन पर भी सवाल उठाती है। 
     
    इन दिनों द्रौपदी के प्रश्नों पर
     
    निरुत्तर नहीं रहती राजसभा
     
    कोरस मिलाकर किया जाता है
     
    उसकी हंसी का उपहास।
     
    फिकरे कसे जाते हैं
     
    उसके चाल चलन, चेहरे पहनावे और आवाज़ पर,
     
    दुर्योधनों की खुशामद करने की
     
    अनवरत प्रतियोगिता के दौरान
     
    उतरते हैं कितने ही नक़ाब भाषा और संस्कारों के। 
     
    इन विषमताओं के बाद भी प्रभा जी अपनी रचना प्रक्रिया से पीछे हटने की बात नहीं करती। वे दुनिया की आधी आबादी को यह विश्वास दिलाती हैं कि परिस्थितियां इतनी बदतर नहीं है। इन परिस्थितियों में ही हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना है। अपनी बात को मज़बूती से रखना है और अपने महत्व को रेखांकित करना है। प्रभा मुजुमदार ये कविताएं इसी विश्वास को जगाने का प्रयास करती हैं। 
     
    लिखूँगी तो ज़रूर मैं
     
    खुशी की खिलखिलाहट में
     
    व्यथा ओर छटपटाहट में
     
    अभिलाषाओं की मरीचिका स्वप्नों की ख़ुमारी
     
    और हकीक़तों की कडुवाहटों में भी। 
     
    प्रभा जी का यह विश्वास ही उनकी रचनात्मकता को नई ऊर्जा से परिपूर्ण करता है। वे निरंतर सृजनशील हैं, यह साहित्य जगत के लिए सुखद है।

    अशीष दशोत्तर
    12/2,कोमल नगर,
    बरबड़ रोड, रतलाम- 457001
    मोबा. 98270 84966
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    Wed, 13 Apr 2022 12:06:47 +0530 Niraj Kumar Shukla
    साहित्यकार एवं कवि प्रो. अज़हर हाशमी प्रमोद शिरढोणकर विरहमन स्मृति राष्ट्र प्रेरणा सम्मान से अलंकृत, मप्र लेखक संघ ने किया सम्मान https://acntimes.com/Writer-and-poet-Prof-Azhar-Hashmi-embellished-with-Pramod-Shirdhonkar-Virhaman-Smriti-Rashtra-Prerna-Samman https://acntimes.com/Writer-and-poet-Prof-Azhar-Hashmi-embellished-with-Pramod-Shirdhonkar-Virhaman-Smriti-Rashtra-Prerna-Samman राष्ट्र भक्ति एवं राष्ट्रचेतना जागृत करने वाले प्रेरणाप्रद साहित्य का सृजन करने के लिए संघ ने किया सम्मानित 

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा प्रसिद्ध साहित्यकार और चिंतक प्रो. अज़हर हाशमी को प्रदेश के इंजीनियर प्रमोद शिरढोणकर विरहमन स्मृति राष्ट्र प्रेरणा सम्मान से नवाजा गया है। प्रो. हाशमी ने यह सम्मान रतलाम को समर्पित किया है। 

    मध्यप्रदेश लेखक संघ ने स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव वर्ष के तहत 28वां साहित्यकार सम्मान समारोह भोपाल में किया गया। इसमें प्रदेश के कई साहित्यकारों, कवि और लेखकों को सम्मानित किया गया। संघ ने साहित्यकार प्रो. अज़हर हाशमी को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया गया था। प्रो. हाशमी अस्वस्थता के कारण सम्मान समारोह में शामिल नहीं हो सके। अतः समारोह में उनका सम्मान कहानीकार प्रो. हरिमोहन बुधौलिया ने प्राप्त किया। प्रो. बुधौलिया ने सम्मान-पत्र व मोमेंटो व्यंगकार हरीशकुमार सिंह और रचनाकार आशीष दशोत्तर के माध्यम से प्रो. हाशमी को उनके निवास पर भिजवाकर सम्मानित किया।

    इन्होंने जताया हर्ष, बधाई भी दी

    संघ द्वारा राष्ट्र भक्ति एवं राष्ट्रचेतना जागृत करने वाले प्रेरणाप्रद साहित्य का सृजन कर ख्याति अर्जित करने वाले साहित्यकार प्रो. हाशमी को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक अवदान के लिए राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रो. हाशमी ने उक्त सम्मान रतलाम को समर्पित किया है। प्रो. हाशमी को सम्मानित किए जाने पर लेखिका डॉ. प्रवीणा दवेसर,  डॉ. अनिला कंवर, सुरेखा नगर, लेखिका श्वेता नागर, अंजना श्रीवास्तव, नंदिनी सक्सेना, एडवोकेट मनमोहन दवेसर, माधव सक्सेना,  ओमप्रकाश नगर, महाविद्यालय विद्यार्थी परिवार के संयोजक सतीश त्रिपाठी आदि ने हर्ष व्यक्त किया और प्रो. हाशमी को बधाई दी।

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    Mon, 04 Apr 2022 18:57:03 +0530 Niraj Kumar Shukla
    ‘रहें ना रहें हम...’ और ‘महका करेंगे…’ जैसे गीतों से भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर को दी स्वरांजलि https://acntimes.com/Bharat-Ratna-Swar-Kokila-to-Lata-Mangeshkar-with-songs-like-Rahe-Na-Rahe-Hum-Aur-Mehka-Karenge https://acntimes.com/Bharat-Ratna-Swar-Kokila-to-Lata-Mangeshkar-with-songs-like-Rahe-Na-Rahe-Hum-Aur-Mehka-Karenge स्वर सरिता म्यूज़िकल ग्रुप और 75 स्वराज अमृत महोत्सव समिति ने गीत-संगीत का अऩूठा आयोजन

    एसीएन टाइम्स @ रतलाम । भारतरत्न व स्वर कोकिला स्व. लता मंगेशकर की याद में रविवार शाम राजपूत बोर्डिंग में संगीत निशा का आयोजन हुआ। स्वर सरिता म्यूज़िकल ग्रुप 75 स्वराज अमृत महोत्सव समिति के आयोजन में कलाकारों ने स्व. लता के ‘रहें ना रहें हम...’ और ‘महका करेंगे…’ जैसे गीतों से सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    संगीत संध्या की शुरुआत अमृत महोत्सव के संयोजक महेंद्र गादिया, विप्पी छाबड़ा, सामाजिक संस्था हमलोग के अध्यक्ष सुभाष जैन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की रागिनी यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस मौके पर संयोजक गादिया ने कहा स्वराज अमृत महोत्सव समिति द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य शहर की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है। अधिकतर मौकों पर हम देश या विदेशी कलाकारों को बुलाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे शहर में भी प्रतिभाएं मौजूद हैं। रागिनी यादव ने कहा कि हम क्रांतिकारियों के बलिदान को भूलने लगे हैं। आम लोगों के बीच यह बात पहुंचाने का काम स्वराज अमृत महोत्सव समिति द्वारा किया जा रहा है।

    इन गीतों से आबाद हुई शाम

    इसके बाद सिंगल व ड्यूएड गीतों की प्रस्तुतियां हुईं। अल्फिया खान ने ‘मां सरस्वती शारदे…’ पर नृत्य की प्रस्तुति पर हाल दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। विजय पाठक ( इंदौर) ने परदेसियों से अखियां मिलना, अल्फिया खान ने ‘रहें ना रहें हम...’, ‘रिदम ने सुन साहिबा सुन...’, जलज शर्मा ने ‘यारा सिली सिली…’ व भुवनेश पंडित ने ‘चंदा ओ चंदा…’ गीत की प्रस्तुति दी। इसके अलावा कलाकारों ने एक से बढ़कर एक ड्यूएड गीत प्रस्तुत किए।

    तिलक लगाकर भेंट किए रुद्राक्ष

    अंत में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार युवा भारत जिला रतलाम मध्यप्रदेश पश्चिम संगठन के प्रभारी विशाल कुमार वर्मा,  विमलेश वर्मा, जिला यज्ञ प्रभारी ज्योतिषाचार्य पं. संजय शिवशंकर दवे, युवा भारत महामंत्री नित्येंद्र आचार्य द्वारा मां भारती का स्मरण लिए अतिथियों व समस्त श्रोताओं को तिलक कर मंत्रोच्चार कर रुद्राक्ष महाप्रसादी भेंट की। संचालनकर्ता आशीष दशोत्तर ने लता के संगीत सफर को लेकर अहम् ऐतिहासिक जानकारियां दीं। आभार ग्रुप के पंडित ने माना।

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    Mon, 28 Mar 2022 21:47:41 +0530 Niraj Kumar Shukla
    शहीद दिवस 23 मार्च पर विशेष : मां भारती के सपूत शहीद भगत सिंह से ये सबक लें युवा https://acntimes.com/Martyrs-Day-special-on-23-March-Youth-should-take-this-lesson-from-Shaheed-Bhagat-Singh https://acntimes.com/Martyrs-Day-special-on-23-March-Youth-should-take-this-lesson-from-Shaheed-Bhagat-Singh आशीष दशोत्तर

    शहीदे आजम भगत सिंह युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत आज भी बने हैं। ऐसे में युवाओं को उनके जीवन से पांच सबक लेकर अपने जीवन में उतारना चाहिए।

    जोश : आजादी के प्रति भगत सिंह में इतना जोश था कि उन्होंने इसके लिए अपने मौत तक की परवाह नशहीदे आजम भगत सिंह ने अपनी फांसी के एक दिन पहले 22 मार्च 1931 को अपने साथियों के नाम लिखे पत्र में कहा था  "मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है। इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में इस से ऊंचा में हरगिज़ नहीं हो सकता। आज मेरी कमज़ोरियां जनता के सामने नहीं है अगर मैं फांसी से बच गया तो वे ज़ाहिर हो जाएंगी और क्रांति का प्रतीक चिन्ह मध्यम पड़ जाएगा या संभवतः मिट ही जाए, लेकिन दिलेराना ढंग से हंसते-हंसते मेरे फांसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तान की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरज़ू करेंगी और देश की स्वाधीनता के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद है या तमाम शैतानी ताकतों के बूते की बात नहीं रहेगी।" 

    जुनून : भगत सिंह जान चुके थे कि उनकी मौत अंग्रेजों के लिए बहुत बड़ी मुश्किल साबित होगी और मौत से वे इतने अधिक लोकप्रिय हो जाएंगे जितना ज़िंदा रहते नहीं हो सकेंगे। इसीलिए भगत सिंह ने फांसी को हंसते-हंसते कुबूल किया। हज़रत मोहानी द्वारा दिए गए 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के नारे को भगत सिंह ने अपनी ताक़त बनाया था।

    चेहरा : आज युवा बात बात पर सेल्फी लेता है मगर युवाओं को यह जानकर आश्चर्य होगा कि भगत सिंह के जीवन में सिर्फ चार चित्र खींचे गए जो उपलब्ध हैं। एक चित्र स्कूल और दूसरा कॉलेज का है जिनमें वे सफेद पगड़ी धारण किए हुए हैं। तीसरे चित्र में वे एक खाट पर बैठे हैं और यह चित्र उस वक्त का है जब उनसे एक पुलिस अधिकारी बयान ले रहा था। चौथा क्षेत्र हेट लगा हुआ है जो युवाओं की सर्वाधिक पसंद और क्रांति का प्रतीक बना।

    भगत सिंह की ये चार तस्वीरें ही उपलब्ध हैं

    सोच : भगतसिंह धर्म को लेकर बहुत अधिक सतर्क एवं सजग थे। सामान्यतः उनके बारे में यह सोचा जाता है कि वे घोर नास्तिक थे। मग़र यह सच होते हुए भी सच नहीं है। सच इसलिए कि स्वयं भगतसिंह ने खुद को नास्तिक घोषित किया और असत्य इसलिए कि वे धर्म के उस रूप में नफ़रत करते थे जो मनुष्य को अकर्मण्य बनाता है। भगतसिंह धर्म के मामले में जैसे थे वैसे ही दिखना भी चाहते थे। उन्होंने धर्म को न सिर्फ नकारा बल्कि ईश्वर के अस्तित्व से भी इंकार किया। उनका यह विरोध खुद को श्रेष्ठ या अलग साबित करने के लिए नहीं था। उन्हें जब यह अहसास हुआ कि उनके साथी उनके इस नास्तिक स्वरूप के बारे में कुछ अलग विचार रखते हैं तो उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे न तो गर्वित हैं और न ही आत्ममुग्ध। वे स्वयं को नास्तिक बताते हैं तो इसलिए कि वे यह महसूस करते हैं कि इसमें ही जीवन का सार है। 

    छवि

    ताक़त :  भगतसिंह तेईस वर्ष की आयु के ऐसे युवक थे जिनमें हर मुद्दे को लेकर एक तरह का आक्रोश सहज था। ऐसा आक्रोश इस आयु वर्ग के युवाओं में कई विषयों पर होता है। मग़र इस तरह के आक्रोश के प्रति वे कितना न्याय कर पाते हैं ? यह उस दौर के युवाओं में भी था। जब युवा अपनी परिस्थितियों अपने परिवेश, अपनी परम्पराओं और पारम्परिक मूल्यों से विद्रोह करता है, तो यह विद्रोह क्षणिक नहीं होता। उसे पता होता है कि इस विद्रोह का खामियाजा उसे भुगतना ही होगा। भगतसिंह अध्ययन के जरिये स्वयं को इतना परिपक्व बना चुके थे कि उनमें हर कुतर्क का जवाब देने की ताक़त थी। 

    आशीष दशोत्तर

     (लेखक भगतसिंह की पत्रकारिता पर पुस्तक ‘समर में शब्द‘ के लेखक हैं।) 

    12/2, कोमल नगर, रतलाम
    मो. 9827084966

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    Wed, 23 Mar 2022 08:19:28 +0530 Niraj Kumar Shukla
    व्यंग्य : ये इश्क नहीं आसां... https://acntimes.com/Satire-Yeh-Ishq-Nahi-Aasan https://acntimes.com/Satire-Yeh-Ishq-Nahi-Aasan आशीष दशोत्तर 

    आग के दरिया में उतरने वाले कम नहीं। यह जानते हुए भी कि यहां झुलसने के अलावा कुछ नहीं मिलता, वे उतरते हैं,विचरते हैं, उछलते-कूदते हैं और तप तपाकर ही चैन लेते हैं। चैन भी कहां लेते, अपने फफोले सबको दिखाते फिरते हैं। 

    जो बेचारा इसमें नहीं उतरता उसे भी चैन नहीं लेने देते। टोकते हैं, टोंचते हैं, नुक्ताचीनी कर नोंचते हैं और ठोक-बजाकर बातों ही बातों में ठोकते भी हैं। बार-बार कहते हैं 'तुम तो बेकार हो।' एक दरिया में न उतरने से आदमी कैसे 'यूजलैस' हो जाता है, यह इन बेचारों को मिलती मानसिक प्रताड़ना को देखकर समझा जा सकता है। 

    एक ख़ास किस्म 'उतर कर भी न उतरे अभागों' की होती है। ये दरिया में उतरने के बाद दरिया पार कुछ देख ही नहीं पाते। ये दरिया से डूब कर जाते नहीं, दरिया में डूबते जाते हैं। ऐसे अभागे' न इधर के रहते हैं न उधर के।' ये कहीं भी देखे जा सकते हैं। उम्र के नाज़ुक मोड़ पर प्यारचंद से 'प्यारे' बनीं कई हस्तियों को आज तक होटलों में कप-प्लेट धोते हुए देखा जा सकता है।

    ढाई आखर पढ़कर पण्डित होने वाली बात का इन पर इतना गहरा असर पड़ता है कि बस्ते को तत्काल बाय-बाय कर दिया करते हैं। फिर पलट कर नहीं देखते, बस 'उसके' पलटने का इंतज़ार करते रहते हैं। 'वो' नहीं पलटती, इधर क़िस्मत पलट जाती है।

    कैम्पस में होते तो कैम्पस सिलेक्शन होता। ये तो कैम्पस के बाहर ही मशगूल रहते हैं। चोंट लगती है तो ओपन स्पेस यूनिवर्सिटी के समीप अहाते में 'मस्ती की पाठशाला' में स्वत: प्रवेशित हो जाते हैं। ढाई आखर की डिग्री के भरोसे ये बगैर प्लेसमेंट के सीधे रेस्टोरेंट आ पहुंचते हैं। पैकेज थामने के लिए बने हाथ पोहे की खाली प्लेट पर घिसकर अपनी हस्तरेखाओं को पढ़ने की कोशिश करते। पहले विद्रोही रूप धर, अपने गुस्से का इज़हार करते। 'ग़मे-जानां' से 'ग़मे-दौरां' को परिचित करवाने की कोशिश करते। कहीं से कुछ आसार नहीं दिखने पर' मेरी महुआ' गुनगुनाते हुए दुःखी मन से सच स्वीकार किया करते हैं।  कभी 'उसको' सबसे ख़ास बताते-बताते अब फ़ानी दुनिया को ही बकवास बताने लगते हैं। धूजते हाथ और हिलती गर्दन के दौर से गुज़रते हुए भी 'उसे' नहीं भूल पाते। 

    येन-केन-प्रकारेण जिनके मुक़द्दर में 'अक्खर' आ जाए तो क्या हुआ? गले पड़ी आफत को निभाते हुए वक़्त गुज़ारना पड़ता है। एक बार 'पेंच' लड़ जाए यह तो ठीक है मगर 'पेंच' गले ही पड़ जाए तो क्या फायदा? न कहीं दांव लगाने के रहे और न पेंच लड़ाने के। इस 'वन टाइम सेटलमेंट' के चक्कर में 'बैटर हाफ' तो सैटल हो जाए मगर लाइफ नहीं।

    एक बार भभककर जलने वाली चिमनियों को उम्रभर टिमटिमाना पड़ता है।  ये आग होती ही ऐसी है। लगाए न लगे। लग जाए तो बुझाए न बुझे। आदमी बुझ जाए मगर ये मशाल रिले रेस की मानिंद एक हाथ से दूसरे हाथ में पहुंचती रहती है। 

    'वेल इन टाइम' वाले लोग 'वैलेंटाइन' के चक्कर में पड़कर 'बेलन तान दे' वाली स्थिति में पहुंच जाते हैं। एक 'फूल' देने के बाद 'फूल के कुप्पा' होने वाले ऐसे जीव जीवन भर 'फुलिश' के सम्बोधन से मुक्त नहीं हो पाते। एक फूल का खामियाजा उम्रभर जूड़े में लगाने वाले गजरे ख़रीदते हुए चुकाना पड़ता है। इस गुलशन की महक तो मादक है मगर राह आसान नहीं। 

    12/2, कोमल नगर
    बरबड़ रोड, रतलाम - 457001
    मो. नं. 9827084966

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    Tue, 01 Mar 2022 11:10:20 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मप्र साहित्य अकादमी देगी 124 सम्मान, 88.72 लाख के पुरस्कार भी बांटेगी, प्रथम पांडुलिप के लिए अनुदान भी मिलेगा, आप भी हो सकते हैं इसके हकदार https://acntimes.com/MP-Sahitya-Akademi-will-give-124-honors-and-will-also-distribute-prizes-worth-Rs-88-lakh-72-thousand-you-may-also-be-entitled-to-it https://acntimes.com/MP-Sahitya-Akademi-will-give-124-honors-and-will-also-distribute-prizes-worth-Rs-88-lakh-72-thousand-you-may-also-be-entitled-to-it एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मप्र शासन द्वारा संचालित साहित्य अकादमी द्वारा प्रदेश के लेखकों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। अकादमी 124 सम्मान और 88 लाख 72 रुपए के पुरस्कार प्रदान करेगी। ये पुरस्कार बीते चार साल के लिए प्रदान किए जाएंगे। अकादमी द्वारा मप्र के लेखकों की प्रथम पांडुलिपि के प्रशासन के लिए अनुदान भी प्रदान किया जाएगा

    अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष लेखकों की कृतियों को पुरस्कृत और सम्मानित किया जाता है। चार वर्षों (2018 से 2021 तक) से यह पुरस्कार और सम्मान लंबित है। अकादमी ने इन सभी वर्षों के लिए अखिल भारतीय और प्रादेशिक पुरस्कार प्रदान करने के लिए लेखकों से उनकी कृतियां आमंत्रित की गई हैं।

    साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे के अनुसार चार वर्ष के लिए कुल 124 सम्मान प्रदान किए जाएंगे। 52 पुरस्कार 1-1 लाख रुपए व 60 पुरस्कार 51-51 हजार रुपए के विभिन् कृतियों को दिए जाएंगे। इसके अलावा 5-51 हजार रुपए के 12 पुरस्कार विभिन्न बोलियों में प्रकाशित पुस्तकों को प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार सभी कृतियों को सम्मान स्वरूप कुल 88 लाख 72 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे।

    निदेशक डॉ. दवे ने बताया पुरस्कार के लिए लेखक चार वर्षों में किसी भी विधा में प्रकाशित अपनी पुत्कर की तीन-तीन प्रतियां प्रविष्टि के साथ प्रस्तुत करना होगी। डॉ. दवे ने बताया कि मालवी, निमाड़ी, बुंदेली, बघेली, भीली और गोंडी बोलियों के लिए भी सम्मान दिया जाना है। इसके लिए वर्ष 2020 और 2021 में प्रकाशित कृतियों की भी प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं।

    प्रथम पांडुलिपि के लिए अनुदान भी मिलेगा

    साहित्य अकादमी द्वारा मप्र के लेखकों की प्रथम कृति के प्रकाशन के लिए अनुदान भी प्रदान किया जाता है। इस वर्ष भी यह अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए भी समिति द्वारा प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। प्रविष्टि के लिए अपनी प्रथम पांडुलिपि अकादमी को भेजना होगी। श्रेष्ठ पांडुलिपि का चयन होने पर अकादमी द्वारा अऩुदान के रूप में प्रत्येक पांडुलिपि के लिए 20 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे।

    इस पते पर भेजें प्रविष्टि

    सभी प्रकार के सम्मान व पुरस्कार के लिए लेखक अपनी प्रविष्टि साहित्य अकादमी, संस्कृति भवन, बाणगंगा चौराहा भोपाल-462003 (मध्यप्रदेश) के पते पर भेज सकते हैं। प्रविष्ट भेजने के लिए पुस्तक की तीन-तीन प्रतियों के साथ पृथक से एक पत्र भी भेजना होगा। इसमें सम्मान का नाम और वर्ष (जिस वर्ष के सम्मान के लिए आवेदन कर रहे हैं) भी लिखना होगा।

    अखिल भारतीय सम्मान के लिए पूरे देशभर से और प्रादेशिक सम्मान के लिए सर्फ मध्यप्रदेश से प्रविष्टियां स्वीकार की जाएंगी। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए विज्ञप्ति में दिए गए फोन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। पुस्तकें व प्रविष्टि डाक अथवा कोरियर किसी भी माध्यम से भेज सकते हैं। प्रविष्टि भेजने की आखिरी तारीख 25 मार्च है।

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    Fri, 25 Feb 2022 02:31:11 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मप्र राज्य रूपंकर कला पुरस्कार एवं प्रदर्शनी में रतलाम की सुरभि जैन का चयन, एकमात्र कलाकार हैं उज्जैन सभाग से https://acntimes.com/Ratlams-Surbhi-Jain-selected-in-MP-State-Roopankar-Art-Award-and-Exhibition https://acntimes.com/Ratlams-Surbhi-Jain-selected-in-MP-State-Roopankar-Art-Award-and-Exhibition एसीएन टाइम्स @ रतलाम l मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार एवं प्रदर्शनी में रतलाम की सुरभि विवेक कोचर (जैन) का चयन हुआ है। सुरभि ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरा था। इसका प्रदर्शन खजुराहों में आयोजित प्रदर्शनी में किया गया। समाजसेवी महेंद्र गादिया ने बताया सुरभि उज्जैन संभाग की एकमात्र कलाकार हैं जिन्हें यह उपलब्धि मिली है। इस उपलब्धि पर सुरभि को पूरे जैन समाज और रतलाम के कलाप्रेमियों ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

     

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    Mon, 21 Feb 2022 19:32:23 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : राष्ट्रवाणी के साथ राष्ट्रीयता का विकास कर रही हैं हिंदी सेवी संस्थाएं और पत्र&पत्रिकाएं& प्रो. शैलेंद्र शर्मा https://acntimes.com/Hindi-service-organizations-and-magazines-are-developing-nationality-with-national-voice-Prof-Shailendra-Sharma https://acntimes.com/Hindi-service-organizations-and-magazines-are-developing-nationality-with-national-voice-Prof-Shailendra-Sharma राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना संस्था द्वारा आयोजित संगोष्ठी में हुआ स्वैच्छिक हिंदी सेवी संस्थाओं और पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका पर मंथन

    एसीएन टाइम्स @ उज्जैन । अगर हिंदी को विश्वव्यापी बनाना है तो हिंदी को कम्प्यूटर एवं संचार प्रौद्योगिकी से जोड़ कर कार्य करना होगा। इससे रोजगार सृजन के अवसर प्रदान किए जा सकेंगे। स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं और पत्र-पत्रिकाओं ने राष्ट्रीय चेतना के प्रसार और स्वाधीनता आंदोलन में योगदान देने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत हिंदीतर भाषियों को हिंदी के साथ जोड़ने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रवाणी के प्रचार प्रसार के साथ देश के सांस्कृतिक एकीकरण में अपना अविस्मरणीय योगदान दिया। हिंदी भाषा शिक्षण, अनुसंधान, पत्रकारिता, दृश्य श्रव्य माध्यम लेखन, अनुवाद आदि क्षेत्रों में उन्होंने अनेक युवाओं को तैयार किया। इन संस्थाओं और पत्र-पत्रिकाओं को इक्कीसवीं सदी की जरूरतों के अनुरूप व्यापक प्रयास करने होंगे।

    यह बात विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कही। वे भारत की स्वैच्छिक हिंदी सेवी संस्थाओं और पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका : उपलब्धि और सम्भावनाएँ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। आयोजन राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में किया गया था।

    मुख्य अतिथि शरद चन्द्र शुक्ल (ओस्लो-नार्वे) रहे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता वही है जो, नई जानकारी लेकर आए। क्षेत्र में कार्य करने वाले लोग स्वयं सूचना एकत्रित करें। परोसी गई सूचनाओं पर विश्वास ना करें। हिन्दी को विश्व भाषा बनाने के लिए हम भी संयुक्त राष्ट्र संघ के रेडियो को सुनें।

    हिंदी प्रचार-प्रसार के लिए दो प्रकार की संस्थाएं कर रहीं काम

    अध्यक्ष राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शहावुद्दीन नियाज़ मोहम्मद शेख (पुणे-महाराष्ट्र) ने की। उन्होंने कहा दो प्रकार की संस्थाएं हिंदी प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रही हैं। कुछ संस्थाओं को सरकारी अनुदान मिलता है। कुछ अपने बलबूते पर कार्य कर रही हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी में संशोधन आलेख छपते हैं।

    1972 में इंदौर से प्रकाशित हुई थी वीणा पत्रिका

    हिंदी परिवार के अध्यक्ष हरेराम वाजपेयी (इंदौर) ने कहा कि हिंदी में आकाशवाणी के माध्यम से सीखा कि समयबद्धता,  शुद्ध उच्चारण और आरोह अवरोह के साथ किस प्रकार अपनी बात कही जानी चाहिए। मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर के इतिहास के संबंध में चर्चा करते हुए वाजपेयी ने वहां से 1927 से प्रकाशित पत्रिका वीणा के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

    नागरी संगम विश्व की नागरी लिपि में प्रकाशित होने वाली विश्व की एकमात्र पत्रिका 

    नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने कहा कि हिन्दी के लिए रेडियो के माध्यम से कई लोगों ने कार्य  किया। आकाशवाणी के मथुरा एवं अन्य केंद्रों के लिए प्रकाशन एवं मुद्रण का कार्य किया। साहित्य भारती, संस्कृति भारती, चित्र भारती, युवा भारती आदि कई पत्रिकाओं के प्रकाशन का दायित्व मुझे मिला। इन पत्रिकाओं में तमिलनाडु, केरल, गुवाहाटी प्रदेशों से लेख मंगवाए जाते थे। आज भी नागरी संगम पत्रिका विश्व की एकमात्र पत्रिका है जो नागरी लिपि के लिए प्रकाशित होती है और अंतरराष्ट्रीय सौरभ पत्रिका में कनाडा, अमेरिका आदि से लेख मंगाकर प्रकाशित किए जाते हैं।

    भारतीय राष्ट्रीय महिला दिवस पर डाला प्रकाश

    कार्यकारी अध्यक्ष सुवर्णा जाधव (पुणे-महाराष्ट्र) ने कहा कि पत्र-पत्रिकाओं ने समय के साथ-साथ चलते हुए ईमेल और व्हाट्सएप पर भी समाचार भेजना शुरू किया है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय महिला दिवस की चर्चा करते हुए कहा कि यह सरोजिनी नायडू के जन्म दिवस पर मनाया जाता है। 

    राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनुसूया अग्रवाल (छत्तीसगढ़) ने कहा कि भारतेंदु जी ने कहा था- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल। देश  की कई पत्रिकाएं विश्व स्तर की पत्रिकाओं  को टक्कर दे रही हैं।

    डॉ. शेख शहनाज ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा का उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय संस्थाओं द्वारा साहित्य के सभी अंगों की को उन्नत किया जा रहा है। उन्होंने हिंदी सेवा की दृष्टि से गांधी जी को याद किया और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा द्वारा राष्ट्रभाषा के प्रचार प्रसार में योगदान को रेखांकित किया।

    साहित्य एवं साहित्यकार को मंच देने में महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं पत्र-पत्रिकाएं

    छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक बिलासपुर ने कहा कि अनेक संस्थाएं भाषा के प्रचार-प्रसार में सहयोगी हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, धार्मिक सभी क्षेत्रों में उन्नति के लिए कई संस्थाएं भारतेंदु जी के समय स्थापित हुईं। उन्होंने स्त्री एवं वंचित वर्ग के उत्थान आदि के लिए भी कार्य किए। साहित्य और साहित्यकार को मंच देने में पत्र-पत्रिकाएं महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। माधवराव सप्रे ने पत्रिका के माध्यम से खंडन मंडन समीक्षात्मक पद्धति की शुरुआत की थी।

    डॉ. अरुणा शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भाषा विभाग के अधीन संस्थाएं कई पुरस्कार प्रदान करती हैं। विभिन्न योजनाओं के लिए अनुदान प्रदान किया जाता है। 

    डॉ. बरबीन बाला का किया सारस्वत सम्मान

    साहित्यकार डॉ. परबीन बाला (पटियाला-पंजाब) को उनके जन्मदिवस पर सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व संगोष्ठी की शुरुआत महिला इकाई की मुख्य महासचिव डॉ. रश्मि चौबे (गाजियाबाद) ने सरस्वती वंदना से की। स्वागत भाषण संस्था महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी के दिया। उन्होंने राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई दी। प्रस्तावना डॉ. रोहिणी डाबरे ने दी। संचालन डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक रायपुर ने किया। आभार व्यक्त डॉ. परबीन बाला ने व्यक्त किया।

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    Wed, 16 Feb 2022 02:17:27 +0530 Niraj Kumar Shukla
    महाराष्ट्र समाज भवन में बही सुर&सरिता : स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को रतलाम के सुर साधकों ने उन्हीं के गाए गीतों का गुलदस्ता तैयार कर दी स्वरांजलि https://acntimes.com/Ratlams-music-seekers-pay-tribute-to-vocal-queen-Lata-Mangeshkar https://acntimes.com/Ratlams-music-seekers-pay-tribute-to-vocal-queen-Lata-Mangeshkar एसीएन टाइम्स @ रतलाम । 'ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी...', 'अजीब दासतां है ये...',  'वो जब याद आए बहुत याद आए...', 'रहें ना रहें हम..., 'लो आ गई उनकी याद...', 'तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है ओ माँ...', 'तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है...', 'दिल तो है दिल दिल का एतबार क्या चीज है...' एवं 'तेरे बिना जिया जाए ना...।' ये वो गीत हैं जिन्हें सदी की महान स्वर साधिका लता मंगेशकर ने स्वर दिया। यही गीत आज उनके प्रति आदर और श्रद्धांजलि व्यक्त करने का जरिया बन गए हैं।

    लता जी द्वारा गए गए 50 हजार से अधिक गानों में से इन चुनिंदा गीतों का गुलदस्ता तैयार कर दिवंगत लता मंगेशकर को रतलाम के स्वर साधकों ने स्वरांजलि दी। आयोजन महाराष्ट्र समाज द्वारा स्टेशन रोड स्थित समाज के भवन में किया गया था जहां सुर-सरिता के प्रवाह का श्रीगणेश अग्रपूज्य देवाधिदेव श्री गणेश की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद एक-एक कर विजया संत, डॉ. पूर्णिमा सूभेदार, संगीता जैन, पूजा पटवा, अरुणा सोनी, निर्वि पितलिया, आकांक्षा मूले, किरण छाबड़ा, पीयूष नेने, यामिनी सोनी, रिदम मिश्रा, साई शिखा नायडू आदि ने हिन्दी और मराठी गीतों की प्रस्तुति देकर सरस्वती उपासक लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। 

    इन्होंने दी श्रद्धांजलि

    आयोजन के दौरान साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. मुरलीधर चाँदनीवाला ने संबोधित करते हुए लता जी के व्यक्तित्व और कृतीत्तव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा स्वरों का साम्राज्य और आधिपत्य हमेशा बना रहेगा। महाराष्ट्र समाज ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. संजय वाते, पूर्व महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, डॉ. पूर्णिमा सूभेदार, वरिष्ठ पत्रकार श्रेणिक बाफना, रंगकर्मी कैलाश व्यास, आशीष दशोत्तर, फोटो जर्नलिस्ट लगन शर्मा, डॉ. श्वेता विन्चुरकर, डॉ. स्नेहा पंडित, नरेन्द्र त्रिवेदी, समाजसेवी विशाल कुमार वर्मा, महाराष्ट्र समाज उपाध्यक्ष राजेन्द्र वाघ, वीरेन्द्र वाफगांवकर, अनुराग लोखंडे, श्यामकांत भोरकर, शारदा महिला मण्डल की कविता कुलकर्णी आदि ने भी संबोधित और श्रद्धांजलि अर्पित की। संयोजन भूषण बर्वे एवं विरेन्द्र कुलकर्णी ने किया। संचालन मिलिन्द करंदीकर ने किया।

    ये रहे मौजूद

    वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी, डॉ. उदय यार्दे, समाज सेवी संदीप व्यास, संजय लोणकर, महेश लोखंडे, प्रकाश लोखंडे, सुहास चितले, श्याम विन्चुरकर, सुनील सराफ, संध्या सराफ, स्मिता बर्वे, भाग्यश्री बर्वे, सीमा वाफगांवकर, मृदुला करंदीकर, उत्तरा जोशी, प्रियंका झारे, तृप्ति संत, निशा नेने, मीना मूले, श्रुति तबकडे, रूपाली तबकडे, नीता लेले, नीला मेहंदले, जयश्री कुलकर्णी, वैशाली बोरगांंवकर, सुनीता नारले, नीलिमा नारले, प्रसाद नारले, संदीप नारले, सतीश भावे, भूषण बर्वे, वीरेन्द्र कुलकर्णी, संतोष कोलंबेकर, नयन सूभेदार, पराग रामपुरकर, चंद्रकांत वायगांवकर, सौरभ संत, विवेक राणे, नितिन बोरगांवकर, प्रमोद लखोटे, प्रकाश पावड़े, नितिन मूले, मयूर व्यास, विजय सिसौदिया, विजय गुप्ता, किशोर जोशी आदि।

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    Mon, 14 Feb 2022 21:05:23 +0530 Niraj Kumar Shukla
    नॉर्वे से डिजिटल पटल पर हुआ विदेशों में हिंदी पत्रकारिता की यात्रा पर विमर्श, प्रो. शर्मा ने शुक्ल को बताया विदेशों में गाँधी की हिंदी पत्रकारिता की परंपरा का संवाहक https://acntimes.com/Discussion-on-the-journey-of-Hindi-journalism-abroad-took-place-on-the-digital-platform-from-Norway https://acntimes.com/Discussion-on-the-journey-of-Hindi-journalism-abroad-took-place-on-the-digital-platform-from-Norway एसीएन टाइम्स @ ओस्लो (नार्वे) । विदेशों में हिंदी पत्रकारिता पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन डिजिटल पटल पर हुआ। आयोजन ओस्लो (नार्वे) से भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम और स्पाइल-दर्पण पत्रिका ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय के कला संकायाध्यक्ष एवं समालोचक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने थे। अध्यक्षता अध्यक्षता की डॉ. वीरसिंह मार्तण्ड (कोलकाता) ने की।

    संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. शर्मा ने ओस्लो (नार्वे) निवासी सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ को विदेशों में महात्मा गाँधी की हिंदी पत्रकारिता के संवाहक बताया। उन्होंने कहा कि बेशक सुरेशचन्द्र शुक्ल के सामने वे चुनौतियाँ नहीं थीं, जो महात्मा गाँधी के सामने थीं, लेकिन स्कैंडिनेवियाई देशों की अपनी चुनौतियाँ तो थीं। स्कैंडिनेवियाई संस्कृति, सभ्यता और उनकी जीवन शैली के साथ जुड़ते हुए उसके साथ संवाद कायम करना चुनौतीपूर्ण था।

    प्रो. शर्मा के अऩुसार भारत के बाहर हिंदी पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने का दुर्गम पथ सुरेशचन्द्र शुक्ल के समक्ष था। उन्होंने सूचना और ज्ञान के साथ सांस्कृतिक समन्वय की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। शुक्ल ने नार्वे से परिचय, स्पाइल-दर्पण और वैश्विका पत्रिकाओं का सम्पादन किया और  नई पीढ़ी को हिन्दी पढ़ाई। 

    डॉ. हरिसिंह पाल (नई दिल्ली), प्रो. विष्णु सरवदे (हैदराबाद), डॉ. वीर सिंह मार्तण्ड (कोलकाता) ने विदेशों में हिन्दी की पत्रकारिता में सुरेशचन्द्र शुक्ल को महत्वपूर्ण बताते हुए विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता का भविष्य उज्ज्वल बताया।

    अन्तरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भाग लेने वालों में भारत से डॉ. हरनेक सिंह गिल, ममता कुमारी, प्रमिला और अशोक कौशिक (दिल्ली), डॉ. रश्मि चौबे (गाजियाबाद), सुवर्णा जाधव (पुणे), डॉ. करुणा पाण्डेय और अनुराग अतुल (लखनऊ), डॉ. ऋषि कुमार मणि त्रिपाठी (खलीलाबाद), डॉ. सुधीर कुमार शर्मा (भिलाई) थे। वहीं विदेशों से डॉ. रामबाबू गौतम (अमेरिका), नीरजा शुक्ला (कनाडा), सुरेश पाण्डेय 9स्वीडन), गुरु शर्मा और सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नार्वे) थे।

    आयोजन में भारतीय दूतावास ओस्लो से इन्दरजीत, भारत से केन्द्रीय हिन्दी संस्थान (आगरा) के डॉ. दिग्विजय सिंह तथा केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय दिल्ली के उप निदेशक डॉ. दीपक पाण्डेय ने शुभकामनाएँ दीं। संचालन सुवर्णा जाधव (पुणे) ने किया।

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    Sat, 29 Jan 2022 20:08:05 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मध्यप्रदेश की छह बोलियों के लिए 2018 एवं 2019 के साहित्यिक कृति पुरस्कारों की घोषणा, पुरस्कार में प्रत्येक को मिलेेंगे 5&51 हजार रुपए https://acntimes.com/Announcement-of-literary-works-awards-for-2018-and-2019-for-six-dialects-of-Madhya-Pradesh https://acntimes.com/Announcement-of-literary-works-awards-for-2018-and-2019-for-six-dialects-of-Madhya-Pradesh एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग भोपाल द्वारा संचालित साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् ने वर्ष 2018 एवं 2019 के लिए  मध्यप्रदेश की छः बोलियों के साहित्यिक कृति पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। साहित्य अकादमी के निदेश डॉ. विकास दवे ने बताया पुरस्कार के रूप में प्रत्येक कृति को रुपये 51-51 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे।

     वर्ष 2018 के लिए चयनित कृति

    (1)- ‘मालवी’ बोली : संत पीपा स्मृति पुरस्कार हेमलता शर्मा (भोली बेन)- इंदौर, कृति : ‘मालवी डबल्यो’

    (2)- ‘निमाड़ी’ बोली : संत सिंगाजी स्मृति पुरस्कार प्रमोद त्रिवेदी ‘पुष्प’ - राजपुर (जिला-बड़वानी), कृति: ‘तमकऽ कइ करनुज’

    (3)- ‘बघेली’ बोली : विश्वनाथ सिंह जूदेव स्मृति पुरस्कार अनूप अशेष - सतना, कृति : ‘बानी आदिम’

    (4)- ‘बुंदेली’ बोली : छत्रासाल स्मृति पुरस्कार दीनदयाल तिवारी - टीकमगढ़, कृति : ‘बेताल की चैकड़िया’।

    वर्ष 2019 के लिए चयनित कृति

    (1)- ‘मालवी’ बोली : संत पीपा स्मृति पुरस्कार सतीश दवे - उज्जैन, कृति : ‘बात को बतंगड़’

    (2)- ‘निमाड़ी’ बोली : संत सिंगाजी स्मृति पुरस्कार जगदीश जोशीला - गोगांवा (जिला - खरगोन), कृति : ‘निमाड़ी धंधोरया’

    (3)- ‘बघेली’ बोली : विश्वनाथ सिंह जूदेव स्मृति पुरस्कार डाॅ. अंजनि सिंह ‘सौरभ’- सीधी, कृति : ‘ठठरा माँ साँसि’

    (4)- ‘बुंदेली’ बोली : छत्रासाल स्मृति पुरस्कार डाॅ. राज गोस्वामी - दतिया, कृति : ‘मौं ढाँकें करिया में’

    नोट : दोनों ही वर्षों के लिए ‘भीली’ एवं ‘गोंडी’ बोली के पुरस्कार हेतु कोई भी कृति प्रविष्टि के रूप में प्राप्त नहीं हुई।

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    Tue, 25 Jan 2022 13:24:16 +0530 Niraj Kumar Shukla
    क्या आप किताब लिखाना चाहते हैं, तो लिख डालिए लेकिन शुरुआत करने से पहले यह खबर पढ़ लीजिए, इसमें कुछ खास है आपके लिए https://acntimes.com/Sahitya-Akademis-special-scheme-for-youth-who-want-to-write-a-book https://acntimes.com/Sahitya-Akademis-special-scheme-for-youth-who-want-to-write-a-book एसीएन टाइम्स @ इंदौर / भोपाल । देश-प्रदेश में स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है इसके तहत विभिन्न आयोजन हो रहे हैं। इसी के चलते मप्र साहित्य अकादमी ने युवा लेखकों को अवसर देने का निर्णय लिया है। इसके तहत युवाओं को पुस्तक लेखन और छात्रवृत्ति प्राप्त हो सकेगी।

    साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि- स्वामी विवेकानंद जयंती अर्थात 'अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस' पर एक लंबे समय से अपेक्षित शुभ समाचार मिला है। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के संदर्भ में साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश युवा रचनाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना को मूर्तरूप दे रहा है। हम 75 युवा रचनाकारा को पुस्तक लिखने केलिए चयन किया जाएगा।

    डॉ. दवे के अनुसार योजना को मुख्यमंत्रीजी शिवराज सिंह चौहान और संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने स्वीकृति दे दी है। और आज युवा दिवस पर ही इस योजना की घोषणा करते हुए मैं अपने जीवन की धन्यता अनुभव कर रहा हूं।

    चयनित युवा लेखकों को मिलेगी 50 हजार रुपए छात्रवृत्ति

    डॉ. दवे ने संपूर्ण मध्यप्रदेश के युवाओं से आव्हान किया है कि- वे दिए गए पत्र के नियमों को पढ़ कर समझ लें। इसके बाद साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के पते पर अपनी पुस्तक की पूर्व योजना (सिनॉप्सिस 5000 शब्दों में बनाकर प्रस्तुत करें। यदि आप चयनित होते हैं तो प्रत्येक युवा लेखक को 50,000 (पचास हजार रु.) छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। यह 75 युवाओं में कुल 37 लाख 50 हजार रुपए वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा पुस्तक का प्रकाशन भी साहित्य अकादमी करेगी। डॉ. दवे ने शिवशेखर शुक्ला (प्रमुख सचिव संस्कृति) और अदिति कुमार त्रिपाठी (संचालक संस्कृति संचालनालय) के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।

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    Fri, 14 Jan 2022 00:38:10 +0530 Niraj Kumar Shukla
    अटल बिहारी वाजपेयी थे राजनीति में संत व्यक्तित्व, केवल उच्चारण में हीं नहीं आचरण में भी भारतीय संस्कृति के रक्षक और पोषक थे वे https://acntimes.com/Atal-Bihari-Vajpayee-was-a-saint-personality-in-politics https://acntimes.com/Atal-Bihari-Vajpayee-was-a-saint-personality-in-politics श्वेता नागर

    संत यानी आचरण में शुचिता, संत यानी निर्लिप्त भाव, संत यानी हृदय में संवेदनशीलता, संत यानी विचारों में ओजस्विता, संत यानी स्थितप्रज्ञ और संत यानी पारदर्शी जीवन। संत के इन्हीं गुणों से परिपूर्ण महान व्यक्तित्व थे हमारे पूर्व प्रधानमंत्री (स्व. ) श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी, जिनका आज (25 दिसंबर) जन्मदिन है। भारतीय राजनीति को अटलजी ने अपनी नैतिकता की दिव्य आभा से आलोकित किया। केवल उच्चारण में हीं नहीं आचरण में भी वे भारतीय संस्कृति के रक्षक और पोषक रहे। उन्होंने युवा पीढ़ी को स्पष्ट संदेश दिया कि समाज सेवा राजनीति का मूल लक्ष्य है लेकिन यह तभी संभव है जब साधन और साध्य पवित्र हो। 

    यह भी एक कटु सत्य है कि राजनीति में पवित्र विचारों के प्रवाह को धन, बल, लालसा और अनुचित प्रभाव की चट्टान रोकने का भरपूर प्रयास करती है। वहीं अटलजी का व्यक्तित्व कल-कल बहती उस पवित्र गंगा नदी की तरह था जिसने अपने आत्मबल और वैचारिक ऊर्जा के प्रवाह से धन, बल, लालसा और अनुचित प्रभाव की चट्टान को खण्ड-खण्ड कर दिया। 

    व्यवहारिक तौर पर राजनीति और नैतिकता को एक- दूसरे का विरोधी ही कहा जायेगा लेकिन अटल जी ने अपने सिद्धांतों और संस्कारों से राजनीति और नैतिकता को एक-दूसरे का पूरक बना दिया। इसलिए केवल अटलजी के समर्थक ही नहीं उनके विरोधी भी उनके व्यक्तित्व की इस विराटता के आगे नत मस्तक थे। 
    अटल जी के संसद में दिए उनके पहले भाषण ने ही नेहरू जी को इतना प्रभावित कर दिया था कि उन्होंने अटलजी को भारत का भावी प्रधानमन्त्री तक बतला दिया था।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री गुलामनबी आज़ाद भी अटलजी के विचारों, भाषा शैली और उनकी साफ़गोई के लिए उनके मुरीद हैं संसद में उन्होंने अटल जी के लिए मिर्ज़ा ग़ालिब का शेर कहा था कि-

     'कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रक़ीब
      गालियाँ खा के बे-मज़ा न हुआ।'

    (इसका अर्थ है कि आपके होंठ इतने मीठे हैं कि आप गालियाँ भी दें तो बुरा नहीं लगता)

    वहीं अटलजी भी संसद में भले ही अपनी धारदार तर्क और भाषण शैली से विरोधियों को परास्त कर देते हों लेकिन वे केवल  नीति संगत विरोध के पक्ष में थे न कि वैयक्तिक स्तर पर दोषरोपण के। स्वच्छ राजनीति के लिए यह सर्वोपरि है।

    इससे जुड़ा एक प्रसंग भी है बात 1977 की है जब श्रीमती इंदिरा गांधी की निरंकुश सरकार को बुरी तरह हरा कर जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई उस सरकार में अटलजी विदेशमंत्री बने थे और चूंकि इमरजेंसी को लेकर आम से लेकर खास तक में रोष था। इसी रोष के कारण विदेश मंत्रालय में जो पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की तस्वीर हमेशा दिखाई देती थी उसे हटा लिया गया। जब अटलजी ने देखा तो उन्होंने कड़क लहजे में मंत्रालय के अधिकारियों से कहा कि 'वो तस्वीर जहाँ भी है... उसको फौरन ले आइये और यहाँ लगाइये... नहीं मिलती तो नेहरूजी की कोई दूसरी तस्वीर लगाइये... मगर लगाइये जरूर।'

    इस प्रसंग से हमारे आज के नेताओं को यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि विरोध विचारों का होना चाहिए न कि व्यक्ति का ।ऐसा ही एक और प्रसंग है जब  अटलजी ने अपने  कार्यकर्ताओं  को कांग्रेस पर प्रहार करने के बजाय श्रीमती सोनिया गांधी पर प्रहार करने पर टोका। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, 'हमें  कांग्रेस को धराशायी करना है, उसके कार्यक्रमों और नीतियों पर प्रहार कीजिए। किसी पर व्यक्तिगत प्रहार करना हमारी राजनीतिक भाषा का अंग नहीं होना चाहिए।

    कवि हृदय अटल जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से अपने हृदय के भावों को राजनीतिक विचारों के बंधनों में न बांधकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। 

    हिंदू और हिंदुत्व पर अनेक ग्रंथ लिखे जा चुके हैं लेकिन अटलजी की हिन्दू  और हिन्दुत्व पर लिखी उनकी  कविता उन सभी ग्रंथों  का सार कहा जा सकता है। अटलजी की रचना 'मेरी इक्यावन कविताएं ' में  उनकी कविता की पंक्तियाँ हैं-

    'होकर स्वतंत्र मैंने कब चाहा है कर लूं जग को गुलाम?
    मैंने तो सदा सिखाया करना अपने मन को ग़ुलाम।
    गोपाल-राम के नामों पर कब मैंने अत्याचार किए?
    कब दुनिया को हिन्दू करने घर-घर में नरसंहार किए?
    कब बतलाए काबुल में जा कर कितनी मस्जिद तोड़ी?
    भू-भाग नहीं, शत-शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय।
    हिन्दू तन-मन हिन्दू-जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय।'

    सकारात्मकता अटलजी के जीवन का अभिन्न पहलू रहा। वे प्रसिद्ध कवि डॉ. शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविता की इन पंक्तियों को हमेशा सुनाते थे जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का पथ-प्रशस्त करती है। पंक्तियाँ हैं-

    क्या हार में क्या जीत में
    किंचित नहीं भयभीत मैं
    संघर्ष पथ पर जो मिले
    यह भी सही वह भी सही
    वरदान माँगूँगा नहीं।'

    महान व्यक्तित्व अटलजी को उनके जन्मदिवस पर कोटि-कोटि नमन।

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    Sat, 25 Dec 2021 11:47:19 +0530 Niraj Kumar Shukla
    54 दिन में 5.52 लाख बार देखा गया रतलाम के गीतकार यशपाल का लिखा गीत 'मौला मेरे मौला...', कोरोना काल में सुर और साज की अनूठी संगत https://acntimes.com/Ratlam-lyricist-Yashpals-song-Maula-Mere-Moula-was-viewed-5-lakh-52-thousand-times-in-54-days https://acntimes.com/Ratlam-lyricist-Yashpals-song-Maula-Mere-Moula-was-viewed-5-lakh-52-thousand-times-in-54-days सोनाली पटेल द्वारा संगीतबद्ध और पार्श्व गायक ज़ावेद अली और सोनाली चंद्रात्रे पटेल द्वारा स्वरबद्ध गीत को 15 अक्टूबर 2021 को अपेक्षा फिल्म्स एंड म्यूजिक द्वारा ऑनलाइन रिलीज किया गया था

    नीरज कुमार शुक्ला

    कोरोना की दूसरी लहर जब दुनिया में तबाही मचाने पर आमादा थी तब देश की हृदय स्थली मध्य प्रदेश के रतलाम में इबादत और उम्मीद का एक गीत सृजित हो रहा था। कोरोना काल में सुर और साज की इस ऑनलाइन अनूठी संगत ने महज 54 दिन में ही उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस सृजन को यू-ट्यूब पर अब तक 5 लाख 52 हजार बार देखा और सुना जा चुका है। हजारों लोगों ने इसे पसंद किया है और डाउनलोड और साझा भी किया है।

    जब सुर और संगीत दोनों की ही साधना एकाग्रता के साथ हो तो उसका परिणाम सुखद और कर्णप्रिय ही होता है। ऐसी ही एक रचना इन दिनों लाखों संगीत प्रेमियों की पसंद बनी हुई है। रतलाम के युवा गीतकार यशपाल तंवर द्वारा लिखित गीत 'मौला मेरे मौला...' को अपेक्षा फिल्म एवं म्यूजिक ने अपने यू-ट्यूब चेनल पर 15 अक्टूबर 2021 को रिलीज किया था तब से लेकर अब तक इस गीत को 5.52 लाख व्यूव्स मिल चुके हैं। 4 मिनट 45 सेकंड के इस गीत को बॉलीवुड के पार्श्व गायक ज़ावेद अली और सोनाली चंद्रात्रे पटेल ने सुरों से सजाया है। सोनाली पटेल ने इसे संगीतबद्ध भी किया है। संगीत संयोजन उदय सालवी का है।

    एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं और बाहर पहनने वाले कपड़े की फ़ोटो हो सकती है

    यह गीत रिकॉर्ड हुआ प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के अंधेरी मुंबई स्थित 'कैलासा' स्टूडियो में। 

    कोरोना काल में ऐसे हुई गीत और संगीत की जुगलबंदी

    गीतकार यशपाल ने एसीएन टाइम्स को बताया, कि- कोरोना काल में सबकुछ ठप सा हो गया था। परिवार को मेरी और मुझे परिवार की चिंता सता रही थी। इसलिए मुंबई के बजाय गृह नगर रतलाम में ही रहना उचित लगा। जैसे-जैसे समय बीत रहा था वैसे-वैसे काम-काज प्रभावित होने की चिंता सताने लगी। यह सच भी है कि 'अर्थ' बिना सब व्यर्थ है। ज्यादातर लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से वर्क-टू-होम कर रहे थे किंतु मैं जिस प्रोफेशन से जुड़ा हूं उसमें गीत-संगीत और सुर व साज का साथ-साथ होना जरूरी है। पहले तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन फिर यह सोच कर कि ईश्वर जो करेगा अच्छा ही करेगा, शब्दों की माला गूंथने का काम जारी रखा। शब्द जुड़ते गए और गीत बनता गया।

    ... और सृजित हो गया 'मौला मेरे मौला...'

    एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं, लोग बैठ रहे हैं और अंदर की फ़ोटो हो सकती है

    तंवर बताते हैं कि जिस वक्त शब्द गढ़ रहे थे उसी वक्त पुणे निवासी संगीतकार सोनाली पटेल नई धुन तैयार कर रहीं थीं। दूरभाष पर हमारी चर्चा हुई और फिर शुरू हो गया ऑनलाइन गीत-संगीत की जुगलबंदी का अनूठा प्रयास। मेरे लिए इस तरह का यह पहला अनुभव था इसलिए उत्साह के साथ सफलता को लेकर संदेह भी था। सोनाली जी जैसी कुशल मार्गदर्शक ने मेरा काम आसान कर दिया। वे धुन बनातीं और ऑनलाइन मुझे भेजतीं और उसके अनुरूप मैं शब्दों को गढ़ता। उन शब्दों को वे पुनः लयबद्ध करतीं और कमी होने पर और बेहतर करने के लिए प्रेरित करतीं।

    एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं और अंदर की फ़ोटो हो सकती है

    इस तरह गीत 'मौला मेरे मौला...' सृजित हो गया जिसे खुद सोनाली चंद्रात्रे पटेल और पार्श्व गायक ज़ावेद अली ने आवाज दी। हमारे प्रयास को सार्थक बनाने में बड़ा योगदान निर्माता अजय जसवाल (अपेक्षा फिल्म्स एंड म्यूजिक) का रहा। गीत को वीडियो एलबम का रूप उन्हीं ने दिया।

    इस भरोसे के लिए इन सभी का शुक्रिया

    बकौल यशपाल- एक गीत लिखने से लेकर संगीत, गायन और शूटिंग तक के सफर में जो मेहनत और लगन लगती है, उसे कलाकार से बेहतर कोई और नहीं जान सकता। अपने लिखे गीत 'मौला मेरे मौला...' की शूटिंग के वक्त सेट पर लिए गए दृश्य हम कलाकारों का काम के प्रति प्यार और विश्वास प्रदर्शित करते हैं। संगीतकार सोनाली पटेल जी, निर्माता अजय जसवाल सर (अपेक्षा फिल्म्स एंड म्यूजिक) ने जो भरोसा मुझ पर दिखाया, उसके लिए तहेदिल से शुक्रिया...।

    12वीं कक्षा से लिख रहे गीत और कविताएं, 400 से ज्यादा रचनाएं लिख चुके हैं

    प्रतिभा परिचय का मोहताज नहीं होती फिर यहां इतना तो बताना जरूरी है कि आखिर यशपाल सिंह तंवर हैं कौन और इनकी अब तक की उपलब्धि क्या है। 7 अक्टूबर 1980 को जन्मे और मूलतः मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के छोटे से गांव कालूखेड़ा के रहने वाले यशपाल को कविताएं लिखने का शौक स्कूल के समय से है। जब वे रतलाम के आरो ऑश्रम में कक्षा छठी में पढ़ते थे तभी इनका रुझान इस विधा की ओर हो गया।
    तत्कालीन राजीव गांधी शिक्षा मिशन ने बच्चों के लिए मोटिवेशनल ऑडियो कैसेट 'बालरंग' रिलीज की तो उसमें गीत और कविता यशपाल की भी थीं। तब से लेकर अब तक तकरीबन 400 कविताएं और गीत लिख चुके हैं जिनमें से कई गीतों को म्यूजिक एलबम और फिल्मों में जगह भी मिली है।

    अगला प्रोजेक्ट राजस्थानी फिल्म का गीत जिसे सरोज खान ने किया कोरियोग्राफ

    खड़े रहना और वह टेक्स्ट जिसमें 'ONE TOUCH DheamCity ONE TOUCH FILMS Presents Written & Directed WitNSHNNA by- HIMANSHU SINGH PANWAR

    यशपाल का एक और गीत 'उडता चल...' भी रिलीज हो चुका है। मूलतः रतलाम निवासी संगीतकार आदित्य गौड़ द्वारा संगीतबद्ध किया यह गीत 'ड्रीम सिटी' फिल्म में लिया गया है।
    एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं, लोग बैठ रहे हैं और अंदर की फ़ोटो हो सकती है
    वह टेक्स्ट जिसमें 'N ٨٨۸ THREE BROTHERS FILMS T Inspired by Real Story TIGER OF RAJASTHAN (Hindi Film) PRODUCER HITESH KUMAR, JASMIN KUMAR DIRECTOR FEROZE IRANI (GANG OF RAJASTHAN)' लिखा है की फ़ोटो हो सकती है
    इसके अलावा 'टाइगर ऑफ राजस्थान' फिल्म में एक गीत पूर्णिमा श्रेष्ठ की आवाज में और एक पार्श्व गायक मो. अजीज की बेटी सना अजीज ने गाया है। इनमें से एक गीत (घूमर) को प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान ने कोरियोग्राफ किया जो संभवत: उनका अंतिम गीत रहा। 

    अनूप जलोटा, श्वेता शेट्टी और शान भी दे चुके हैं गीतों को आवाज

    यशपाल के लिखे गीत प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा, पार्श्व गायक शान, श्वेता शेट्टी, राम शंकर, जावेद अली, सोनाली पटेल, पूर्णिमा श्रेष्ठ, तुलसी कुमार, सना अजीज़ (मो. अजीज की बेटी), सतीश देहरा (रामायण धारावाहिक में चौपाइयों को अपनी आवाज दे चुके हैं) और राकेश तिवारी गा चुके हैं। श्वेता शेट्टी द्वारा स्वरबद्ध गीत 'ओ ढोला रे...' और 'बनी बावरिया...' यूनिर्सल म्यूजिक के म्यूजिक एलबम में शामिल हैं। भजन 'हर दिल के राजा राम जी...' को अनूप जलोटा और तुलसी कुमार ने गाया। इसके कुछ अंतरे यशपाल ने लिखे थे।
    एक या अधिक लोग और लोग बैठ रहे हैं की फ़ोटो हो सकती है
    एक गीत और रिलीज होना है जिसे पार्श्व गायक शान ने आवाज दी है। भजन और गीतों के एल्बम टी-सीरीज, टिप्स, यूनिवर्सल जैसी म्यूजिक कंपनियों द्वारा जारी किए जा चुके हैं।

    एक नजर इधर भी

    • के. सी. कॉलेज, मुंबई (बॉम्बे कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म) से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया।
    • 'ढोल की थाप' पुस्तक का प्रकाशन हो चुका है जिसमें यशपाल के संवाद और गीत शामिल हैं। इसमें मूल कथानककार कारूलाल जमड़ा हैं।
    • फ़ोटो का कोई वर्णन उपलब्ध नहीं है.
    • स्क्रीन राइटर एसोसिएशन, मुंबई के सदस्य हैं।
    • आई. पी. आर. एस (इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसायटी), मुंबई के सदस्य हैं। 
    • मध्यप्रदेश गौरव सम्मान से सम्मानित।एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं और wrist watch की फ़ोटो हो सकती है
    • डॉ. शंकरदयाल काश्यप रोटरी साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित।
    • विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है।

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    संपर्क

    यशपाल तंवर

    मोबाइल - +91 93406 54556

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    Tue, 07 Dec 2021 15:20:42 +0530 Niraj Kumar Shukla
    मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी प्रकाशित कराएगी मालवी शब्दकोश, भोली बेन ने निदेशक डॉ. दवे को सौंपी 5000 शब्दों वाली पांडुलिपि https://acntimes.com/Madhya-Pradesh-Sahitya-Akademi-to-publish-Malwi-dictionary https://acntimes.com/Madhya-Pradesh-Sahitya-Akademi-to-publish-Malwi-dictionary अकादमी के निदेशक डॉक्टर दवे ने गमक श्रृंखला के दौरान की थी शब्दकोश प्रकाशित करने की घोषणा

    एसीएन टाइम्स @ इंदौर । मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य अकादमी मालवी शब्दकोश का प्रकाशन कराएगी। इस शब्दकोश में करीब 5000 शब्द और उनके अर्थ होंगे। इसकी पांडुलिपि भोली बेन द्वारा अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे को सौंपी गई।

    3 दिवसीय इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल। इंदौर के गांधी हाल परिसर में हुआ। इसमें साहित्यिक सम्मान समारोह ‌भी हुआ। अध्यक्षता मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने की। इस दौरान मालवी बोली‌ के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रयासरत "अपणो मालवो" की संस्थापक भोली बेन ने करीब 5000 मालवी शब्द और अर्थ वाले शब्दकोश की 300 पृष्ठ की पांडुलिपि सौंपी।

    इस शब्दकोश को मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी से प्रकाशित करने की घोषणा डॉ. दवे ने "गमक श्रृंखला" के दौरान की थी। डॉ. दवे ने पांडुलिपि की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसका आकार देखकर ही लग‌ रहा है कि कितना ‌कठिन और श्रमसाध्य कार्य कर भोली बेन ने संपादित किया है। अकादमी भी मालवी और निमाड़ी के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सतत प्रयासरत है। इसी परिप्रेक्ष्य में इस मालवी शब्दकोश का प्रकाशन किया जा रहा है। यह निश्चय ही सम्पूर्ण मालवी प्रेमियों के लिए एक उपहार होगा।

    हेलो हिंदुस्तान ने किया था आयोजन

    आयोजन "हेलो हिन्दुस्तान के संपादक प्रवीण शर्मा" द्वारा ‌आयोजित किया गया था। इस महत्वपूर्ण क्षण के साक्षी सत्यनारायण सत्तन, आनंद ‌मोहन माथुर, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, शरद पगारे, अरविंद ओझा, हरेराम वाजपेई जैसे वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ ही इंदौर ‌की‌ समस्त साहित्यिक संस्थाओं ‌के प्रमुख ‌भी‌ बने।

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    Fri, 03 Dec 2021 09:03:48 +0530 Niraj Kumar Shukla
    राष्ट्रीय तुलसी सम्मान और राष्ट्रीय देवी अहिल्या बाई सम्मान की घोषणा, 19 नवंबर को सम्मानित होंगी विभूतियां https://acntimes.com/National-Tulsi-Samman-and-National-Goddess-Ahilya-Bai-Samman-announced https://acntimes.com/National-Tulsi-Samman-and-National-Goddess-Ahilya-Bai-Samman-announced एसीएन टाइम्स @ भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय तुलसी और देवी अहिल्या सम्मानों की घोषणा कर दी है। ये पुरस्कार कला और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय 6 विभूतियों को प्रदान किया जाएगा। इनमें डॉ. भारती बंधु, शांतिबाई मरावी, कैलाशचंद्र शर्मा, मालिनी अवस्थी, विक्रम यादव, तिलकराम पेंद्राम शामिल हैं।

    राष्ट्रीय तुलसी सम्मान से सम्मानित होने वाले कलाकारों में वर्ष 2017 के लिए जयपुर के सुप्रतिष्ठित चित्रकार कैलाशचन्दा शर्मा एवं वर्ष 2018 के लिए राजनांद गाँव के सुप्रतिष्ठित बाँस-बाँसुरी वादक विक्रम यादव शामिल हैं। इसी प्रकार वर्ष 2019 का सम्मान रायपुर के ख्यात कबीर गायक डॉ. भारती बंधु को तथा वर्ष 2020 का यह प्रतिष्ठित जनजातीय कलाकार तिलकराम पेंद्राम को प्रदान किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान से सम्मानित होने वाले कलाकारों में वर्ष 2019 का यह प्रतिष्ठित सम्मान मण्डला की जनजातीय कलाकार शांति बाई मरावी को तथा वर्ष 2020 का लखनऊ की अवधी, भोजपुरी एवं बुन्देलखण्डी शैली की लोकगायिका मालिनी अवस्थी‍ को प्रदान किया जा रहा है।

    19 नवंबर को निमाड़ उत्सव के दौरान दिया जाएगा सम्मान

    राष्ट्रीय तुलसी एवं देवी अहिल्या सम्मान से सम्मानित होने वाले कलाकारों का अलंकरण महेश्वर में 19 नवम्बर से आरंभ होने वाले 'निमाड़ उत्सव' के शुभारंभ अवसर किया जाएगा। संस्कृति विभाग की मंत्री उषा बाबू ठाकुर पुरस्कार व सम्मान से नवाजेंगी।

    जानें, कब हुई पुरस्कार या सम्मान की स्थापना और क्या मिलता है कलाकारों को

    राष्ट्रीय तुलसी सम्मान : संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष जनजातीय, लोक एवं पारम्पारिक कलाओं में उत्कृष्टता और श्रेष्ठ उपलब्धि को सम्मातनित करने के लिए वार्षिक राष्ट्रीय तुलसी सम्मान की स्थापना 1983 में की गई थी। यह केवल पुरुष कलाकार को ही प्रदान किया जाता है। राष्ट्रीय तुलसी सम्मान तीन वर्ष में दो बार प्रदर्शनकारी कलाओं और एक बार रूपंकर कलाओं के लिए दिया जाता है।

    राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान : विभाग द्वारा जनजातीय, लोक एवं पारम्परिक कलाओं के क्षेत्र में महिला कलाकार को सम्मानित किया जाता है। इसके लिए राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान दिया जाता है। इसकी स्थापना संस्कृति विभाग ने 1996 में की थी।

    सम्मान निधि के रूप में मिलते हैं दो लाख रुपए 

    राष्ट्रीय तुलसी एवं देवी अहिल्या सम्मान के अंतर्गत सम्मानित होने वाले कलाकारों को सम्मान स्वरूप 2 लाख की सम्मान राशि, सम्मान पट्टिका एवं शॉल-श्रीफल प्रदान किया जाता है।

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    Wed, 17 Nov 2021 09:35:08 +0530 Niraj Kumar Shukla