व्यंग्य :  रोशनी और मेंटेनेंस : आशीष दशोत्तर 

व्यंग्य । साहित्य सृजन । हिंदी न्यूज । आशीष दशोत्तर । डब्ल्यूडब्ल्यू.एसीएनटाइम्स.कॉम। बिजली कटौती । बिजली मेंटेनेंस ।

व्यंग्य :  रोशनी और मेंटेनेंस : आशीष दशोत्तर 
व्यंग्यकार आशीष दशोत्तर।
आशीष दशोत्तर 
बिजली गुल होते ही रोशनी देवी की निद्रा टूटी। वे उठ खड़ी हुईं। इधर-उधर हाथ घुमाकर टॉर्च ढूंढने की कोशिश करने लगी। सोच रही थी, क्या वक़्त आ गया है। अब रोशनी को भी अंधेरे में टॉर्च ढूंढनी पड़ रही है। मगर यह व्यवस्था की चरम अवस्था थी, जिसमें ऐसा होना कुछ ग़लत नहीं था।
कुछ कोशिशों के बाद टॉर्च उनके हाथ में आ ही गई। बार-बार गुल होती बत्ती के कारण टॉर्च का स्थान बदलता रहा, इसलिए देर से मिली टॉर्च ने भी रोशनी देवी को कुछ ढांढस बंधाया। टॉर्च जलाते ही उन्होंने अपना मोबाइल उठाया। गुस्से में बिजली विभाग का नंबर डायल किया। परम्परानुसार बिजली विभाग का टेलीफोन कुछ देर व्यस्तता बताता रहा। पंद्रह मिनट की कोशिशों के बाद फोन की घंटी बजने लगी। रोशनी देवी तिलमिलाई हुई थी। उधर से कर्मचारी द्वारा फोन उठाते ही वे शुरू हो गई।' उजाला टाउनशिप में कभी से बिजली गई हुई है। आखिर कब तक आएगी?
कर्मचारी बोला, तेज़ हवाओं के चलने से फाल्ट हुआ है। उसे सुधारा जाना है।
रोशनी देवी को गुस्सा आया। कहने लगी,  मेंटेनेंस के नाम पर पिछले दो माह से कितनी ही बार दिन-दिन भर के लिए बिजली आपूर्ति रोकी जा चुकी है। फिर यह फाल्ट कैसा?
कर्मचारी बोला, इतना तो मैं नहीं जानता। मेरे पास जो जानकारी थी वह मैंने दे दी। रोशनी देवी को और गुस्सा आया। उन्होंने कहा, आखिर कौन हमें बताएगा कि ऐसा बार-बार क्यों होता है?
कर्मचारी ने अपने से बड़े अधिकारी के नंबर दे दिए। कहने लगा, आप इनसे ही संपर्क करें। 
रोशनी देवी ने अधिकारी को फोन लगाया। अधिकारी ने फोन उठाया। रोशनी देवी के सवाल पर कहने लगा, मैडम, हम आपकी समस्या समझते हैं, मगर तेज हवाएं चलने से आपके एरिए में बड़ा फाल्ट हुआ है। उसे सुधारने के बाद ही लाइट चालू हो सकेगी।
रोशनी देवी ने पूछा, कब तक सुधारा जा सकेगा।  अधिकारी बोला, यह फाल्ट पर निर्भर करता है। वह कितना बड़ा है ,उसके हिसाब से उसे सुधारा जा सकेगा। कई फाल्ट तत्काल सुधर जाते हैं। कई फाल्ट 2 दिन में भी नहीं सुधरते और कई फाल्ट तो महीनों तक नहीं सुधर पाते। 
 
रोशनी देवी को चिढ़ आने लगी। 'यह कैसा जवाब हुआ भला। अधिकारी ने कहा, मेरे पास जितनी जानकारी थी, मैंने आपको दे दी। फाल्ट की गहराई से जुड़ी जानकारी लेने के लिए आपको हमारे बड़े अधिकारी से बात करना होगा। यह कहते हुए उसने अपने से बड़े अधिकारी का नंबर रोशनी देवी को दे दिया।
 
रोशनी देवी ने उन्हें फोन लगाया। इस बार रोशनी देवी ने कुछ शांत लहजे में बात की। दो लोगों से चर्चा के बाद व्यक्ति का गुस्सा वैसे ही ठंडा पड़ जाया करता है। इसलिए रोशनी देवी भी अब थोड़ा सहज हो चुकी थीं। उन्होंने बड़े अधिकारी से पूछा, उजाला टाउनशिप में बिजली कभी से गई हुई है। आखिर आप मेंटेनेंस करते किसलिए हैं?
 
बड़ा अधिकारी शांत स्वर में बोला, मैडम, मेंटेनेंस कई तरह के होते हैं। जिस तरह के मेंटेनेंस आपके एरिया में किए गए यह फाल्ट उस तरह का नहीं है, इसलिए बिजली गुल हो गई। 
 
रोशनी देवी ने कहा, पिछले दो माह से मेंटेनेंस के नाम पर कई बार हमारे घर की बिजली गुल हो चुकी है। फिर ये बिजली क्यों गई?
 
अधिकारी ने समझाया, देखिए मैडम। पहली बार मेंटेनेंस किया गया था उसमें बिजली के तारों पर आने वाली पेड़ों की डालियों को हटाया गया। दूसरी बार मेंटेनेंस में बिजली खंभों की स्थिति देखी गई। तीसरी बार के मेंटेनेंस में ट्रांसफार्मर को सुधारा गया। चौथी बार के मेंटेनेंस में ढीले हो चुके बिजली तारों को कसा गया। पांचवें तरह के मेंटेनेंस में हल्की हवा चलने पर कोई फाल्ट न हो इस संबंध में काम किया गया।
 
 रोशनी देवी का पारा फिर गरम हो रहा था। इधर से बोलीं, तो फिर यह फाल्ट क्यों हो गया?
 
बड़ा अधिकारी बोला, यही तो मैं समझा रहा हूं। हमने हल्की हवा चलने पर होने वाले फाल्ट से बचने के प्रबंध किए थे, मगर यह तो तेज हवा थी। तेज हवा के लिए मेंटेनेंस तो अभी तक किया ही नहीं गया है। 
 
रोशनी देवी तमतमा रही थीं।  कहने लगीं, मतलब जब-जब भी तेज हवा चलेगी बिजली इसी तरह जाती रहेगी?
बड़ा अधिकारी बोला, नहीं...नहीं। आप ऐसा न समझें। अभी हमें कई मेंटेनेंस करना हैं। तेज हवाओं के चलने पर फाल्ट से बचने का मेंटेनेंस। हल्की बारिश होने पर किया जाने वाला मेंटेनेंस। तेज बारिश होने पर किया जाने वाला मेंटेनेंस। रोशनी देवी बोलीं, इसके बाद बिजली नहीं जाएगी, इस बात की तो गारंटी होगी न? 
 
बड़ा अधिकारी बोला- यह तो वक्त और परिस्थिति पर निर्भर करता है। सारे मेंटेनेंस के बाद भी कुछ ऐसी परिस्थिति निर्मित हो जाएं और बिजली चली जाए तो आप अन्यथा न लें। हम और हमारा विभाग आपकी सेवा के लिए सदैव तत्पर है। 
 
बड़े अधिकारी का जवाब सुनते ही रोशनी देवी ने हाथ की टॉर्च को अपने सर पर दे मारा। जोर का झटका लगते ही टॉर्च भी बंद हो चुकी थी। रोशनी देवी अंधेरे में ही अपनी टॉर्च के मेंटेनेंस में जुट गईं।
 
12/2, कोमल नगर, रतलाम
 
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