AI पर सरकारी पहरा ! AI से कंटेंट बनाने वाले पहले जान लें IT नियमों में हुए ये बदलाव, वरना जान पड़ सकता है जेल

AI से कंटेंट बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले यूजर हो जाएं सावधान। ऐसा करना आपको मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए पहले यह खबर जरूर पढ़ लें।

AI पर सरकारी पहरा ! AI से कंटेंट बनाने वाले पहले जान लें IT नियमों में हुए ये बदलाव, वरना जान पड़ सकता है जेल
एआई पर नकेल कसने के लिए सरकार ने किया आईटी नियमों में बदलाव।

एसीएन टाइम्स @ डेस्क । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट (AI) के उपयोग के साथ ही इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ा है। इस पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट के नियमों और प्रावधानों में व्यापक बदलाव किया है। 20 फरवरी 2026 से प्रभावशील भी हो गया है। इसलिए, यदि आप AI का उपयोग कर कॉन्टेंट क्रिएट कर रहे हैं तो सावधानी बरतें और सरकारी गाइडलाइन का पालन करें अन्यथा जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

केंद्र सरकार द्वारा एआई से तैयार डिजिटल कंटेंट के उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दे हैं। इसके लिए सरकार ने गत 10 फरवरी 2026 को ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया था जो प्रभावशील भी हो गया है। इसके अनुसार अगर कोई यूजर AI की मदद से फोटो, वीडियो अथवा ऑडियो तैयार करता है तो उसे उस पर यह लेवल अनिवार्य रूप से लगाना होगा कि- यह AI जनरेटेड है। अब यदि सोशल मीडिया पर किसी प्रकार का आपत्तिजनक अथवा गैर-कानूनी कंटेंट पोस्ट किया जाता है और उसकी शिकायत होती है तो उसे तत्काल हटाना पड़ेगा। ऐसा कंटेंट हटाने के लिए सिर्फ 3 घंटे की समय सीमा नियत की गई है। पहले ऐसा कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे तक की मोहलत मिलती थी।

सिंथेटिक समाग्री के लिए भी है नियम

भारत सरकार के केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना-प्रौद्योगिकी कानून-2000 की धारा 87 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम-2021 में बदलाव किया है। इसमें न सिर्फ AI से तैयार कंटेंट बल्कि सिंथेटिक यानी संपादित किए गए ओरिजनल कंटेंट को लेकर परिभाषित भी किया गया है। इसके अनुसार 'सिंथेटिक रूप से उत्पन्न जानकारी' (Synthetic Generated Information) को  SGI नाम दिया गया है। इसमें ऐसी ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल होगी जो एल्गोरिदम अथवा Ai के माध्यम से बनाई गई हो या फिर बदली गई हो जो वास्तविक व्यक्तियों या घटनाओं की तरह ही दिखती हो। इसका आशय डीपफेक एडिटेड अथवा डिजिटली एडिटेड तस्वीरें या वीडियो से है।

अब यह करना होगा यूजर्स को

  • अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स से अनिवार्य रूप से इस बात का घोषणा (सत्यापन) लेना होगी कि उनके द्वारा अपलोड की गई सामग्री AI से तैयार की गई है या नहीं।
  • यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय खुद ही इसकी घोषणा करनी होगी कि वह AI से तैयार किया गया है या नहीं।
  • अब कंटेंट की प्रकृति को लेकर सच बोलने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर यूजर्स की होगी। इसकी जांच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तकनीकी उपकरणों के माध्यम से कर सकेंगे।
  • अब यूजर्स ऐसे लेबल अथवा स्थायी मेटाडाटा (provenance markers) को हटा, दबा या उनसे छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे जो AI की पहचान के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाए जाते हैं।
  • सभी प्लेटफॉर्म को अब यूजर को नियमों का उल्लंघन करने या AI का गलत इस्तेमाल करने पर सजा भुगतने की चेतावनी भी देनी पड़ेगी। ऐसी चेतावनी तीन माह में कम से कम एक बार देना जरूरी हो गया है।
  • सभी प्लेटफॉर्म्स को बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), गैर-सहमति वाली अंतरंग तस्वीरें (NCII), और धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले डीपफेक को रोकने के लिए ऑटोमैटिक एआई फिल्टर भी लगाना होंगे।

ये कार्रवाई है संभावित

  • सरकार या अदालत के आदेश के बाद प्लेटफॉर्म को अवैध AI सिंथेटिक सामग्री महज 3 घंटे के अंदर हटाना होगी। वहीं न्यूडिटी या यौन सामग्री हटाने के लिए मात्र 2 घंटे का समय नियत है।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर यूजर का अकाउंट निलंबित हो सकता है।
  • उल्लंघनकर्ता के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बाल संरक्षण (पॉक्सो) और चुनाव कानूनों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है।
  • अगर कोई व्यक्ति AI के माध्यम से कोई अवैध कार्य अथवा अपराध करता है तो संबंधित प्लेटफॉर्म को पीड़ितों या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे यूजर की पहचान भी बतानी होगी।
  • अगर कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन करने अथवा समय पर सामग्री हटाने में असफल रहता है तो उसे अब 'सेफ हार्बर' नियम (धारा 79) के तहत कोई राहत नहीं मिलेगी यानि अब उसे ही नियमों के उल्लंघन और अपराध के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।