होली - 2026 : भद्रा और चंद्र ग्रहण में उलझा होलिका दहन और मैत्री भाव का पर्व ! मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष पं. विष्णु राजोरिया से जाने शुभ मुहूर्त
अगर आप भी भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन और धुलेंडी मनाने को लेकर दुविधा में हैं तो यह खबर पढ़ें।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । इस बार के होली परिव पर भद्रा के साथ ही खग्रास चंद्र ग्रहण की छाया भी पड़ रही है। ऐसे में होलिका दहन और धुलेंडी मनाने को लेकर दुविधा बढ़ती जा रही है। यदि आप भी दुविधा में हैं तो परेशान न हों, क्योंकि धर्माधिकारी, ज्योतिषी एवं मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष पं. विष्णु राजोरिया ने इस समस्या का समाधान कर दिया है।
पं. राजोरिया के अनुसार होली का पर्व हमारे सनातन धर्म का बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। यह समाज को एकत्र करने वाला, एक सूत्र में बांधने वाला और मैत्री भाव प्रकट करने वाला पर्व है। इस बार भद्रा के कारण 2 मार्च 2026 को पूरी रात होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा। होलिका दहन भद्रा बीतने के बाद 3 मार्च को प्रातः 5.00 से 6.33 बजे के मध्यम किया जाने का श्रेष्ठ मुहूर्त है।
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पूरे भारवर्ष में रहेगा ग्रहण के सूतक का प्रभाव
पं. राजोरिया ने बताया कि पूर्णिमा 3 मार्च को रात 4.24 बजे तक रहेगी। इसी दौरान भारत वर्ष के पूर्वोत्तर प्रांत के कुछ हिस्सों में और पूर्वोत्तर के अन्य देशों में म्यांमार, रंगून, आस्ट्रेलिया व एशिया के अन्य देशों में खग्रास चंद्रग्रहण दर्शित होगा क्योंकि उस समय वहां चंद्रोदय हो चुका होगा। वहीं हमारे यहां चंद्रोदय रात्रि में 6.44 बजे होगा जिससे किंचित ग्रहण दिखाई देगा। इसके बावजूद ग्रहण और उसके सूतक का प्रभाव पूरे दिन पूरे भारतवर्ष में रहेगा। 3 मार्च को ग्रहण के सूतक में जो भी हमारी मान्यताएं हैं, उनका पालन करें।
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उदयाकालीन प्रतिपदा 4 मार्च को
पं. राजोरिया ने सभी सभी सनातन धर्मावलंबियों से पुनः आग्रह किया है कि होलिका दहन बिल्कुल शुद्ध मुहूर्त प्रातः 5.00 से 6.30 बजे के बीच कर लें। धुलेंडी का पर्व 4 मार्च को ही मनाएं। उदयकालीन प्रतिप्रदा भी 4 मार्च को ही मिलेगी।






