गूंजे ‘अल्फ़ाज़’ ! साहित्यकार अज़हर हाशमी को विचारों और कविताओं से दी श्रद्धांजलि, उनके रचनात्मक अवदान, मानवीय मूल्यों व कार्यों का स्मरण भी किया
‘राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए’ और ‘बेटियां पावन दुआएं हैं’ जैसे ख्यात गीत और कविता के रचयिता प्रो. अज़हर हाशमी के जन्म दिवस पर रतलाम में हुआ साहित्यिक सभा का आयोजन। जानिए, किसने क्या कहा...
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षक एवं सूफी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले प्रो. अज़हर हाशमी का जन्मदिवस उनके निवास स्थान पर गरिमामय साहित्यिक सभा ‘अल्फाज़’ आयोजित कर मनाया। इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ साहित्यकारों, रंगकर्मियों, लेखकों एवं उनके शिष्यों ने एकत्र होकर प्रो. हाशमी के रचनात्मक अवदान, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक समन्वय के कार्यों का स्मरण किया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रतन चौहान ने कहा कि प्रो. अज.हर हाशमी ने संस्कृतियों के मध्य सेतु निर्मित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। वे केवल भाषा के विद्वान नहीं थे, बल्कि भाषा को गढ़ने वाले सृजनशील व्यक्तित्व थे। सूफी परंपरा के संत-स्वभाव के कारण उनकी रचनाओं में प्रेम, करुणा, समरसता और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। अपने आचरण और व्यवहार से उन्होंने सदैव समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान की।
जो भी मिला, प्रो. हाशमी का होकर रह गया
साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि रतलाम आने वाला प्रत्येक प्रतिष्ठित साहित्यिक अथवा सांस्कृतिक व्यक्तित्व प्रो. हाशमी से मिले बिना नहीं जाता था। उनसे संवाद के पश्चात जो आत्मिक शांति और सुकून की अनुभूति होती थी, वह विरल थी। उन्होंने अपने शिष्यों को केवल साहित्य ही नहीं सिखाया, बल्कि जीवन जीने की कला, मानवीय मूल्यों की समझ और सत्य के मार्ग पर चलते हुए लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा भी दी।
सूफी चेतना और मानवीय दृष्टि रेखांकित की
युवा साहित्यकार आशीष दाशोत्तर ने हाशमी की सूफी चेतना और मानवीय दृष्टि को रेखांकित करता हुआ भावपूर्ण काव्य-पाठ प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने सराहना के साथ सुना। प्रसिद्ध रंगकर्मी कैलाश व्यास ने उनके साथ बिताए स्मरणीय क्षणों को साझा किया। उन्होंने बताया कि हाशमी सर का सान्निध्य सदैव प्रेरक और ऊर्जादायी रहता था।
हाशमी के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक
समाजसेवी अदिति दवेसर ने अज़हर हाशमी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन में प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख किया। श्वेता नगर ने प्रो. हाशमी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनकी सरलता, विनम्रता और गहन विद्वत्ता को रेखांकित किया। डॉ. अनिला कंवर ने कहा कि गुरु प्रोफेसर अजहर हाशमी ने सदैव सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह जैसे मूलभूत जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हैं।
साहित्य लेखन होगा ऑनलाइन
कथाकार इंदु सिन्हा ने अपने संस्मरणों के माध्यम से हाशमी सर के स्नेहिल स्वभाव, दूरदृष्टि और साहित्यिक प्रेरणा का स्मरण किया। पत्रकार तुषार कोठारी ने हाशमी की समस्त साहित्य लेखन को वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन करने की बात कही। रणजीत सिंह राठौर एवं हरीश पुरोहित ने भी विचार व्यक्त करते हुए प्रो. हाशमी के व्यक्तित्व को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कविताओं को दिए सुर
गायिका संगीता जैन ने गुरु वंदना प्रस्तुत करते हुए अज़हर हाशमी की कविता की संगीतमय में प्रस्तुति दी। संचालन विद्यार्थी परिवार के सतीश त्रिपाठी (एडवोकेट) ने किया। अंत में डॉ. प्रवीणा दवेसर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर भारत गुप्ता, अंजना सक्सेना सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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