सृजन भारत के संयोजक अनिल झालानी ने डेढ़ साल पूर्व जताई थी जोशीमठ में भूस्खलन की आशंका, पीएम व केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर समाधान भी बताए थे

सृजन भारत अभियान के संयोजक रतलाम निवासी अनिल झालानी की दूरदृष्टि ने डेढ़ साल पहले ही जोशीमठ के अस्तित्व पर मंडराने वाले खतरे के बादलों को भांप लिया था और पीएम सहित कई केंद्रीय मंत्री व विभागों को समस्या और सुझाव बताए थे।

सृजन भारत के संयोजक अनिल झालानी ने डेढ़ साल पूर्व जताई थी जोशीमठ में भूस्खलन की आशंका, पीएम व केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर समाधान भी बताए थे
अनिल झालानी एवं जोशीमठ में सड़क व पहाड़ पर आई दरारें।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम उत्तराखण्ड के जोशीमठ में जमीन धंसने और सड़कों व मकानों में दरारें आने तथा इनके लगातार चौड़ी होने की खबरें पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसकी वजह क्षेत्र में बनाई जा रही टनल और सड़क सहित अन्य निर्माणों के लिए की गई अंधाधुंध खुदाई बताई जा रही है। इसके चलते जोशीमठ के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। इस खतरे और दुर्घटना को ‘सृजन भारत के संयोजक अनिल झालानी ने डेढ़ वर्ष पहले ही भांप लिया था। यही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री सहित देश के तमाम केन्द्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर आगाह करते हुए समाधान भी सुझाए थे।

सृजन भारत के संयोजक अनिल झालानी द्वारा ‘स्वान्तः सुखाय अभियान चलाया जा रहा है। इसकी आठवीं कड़ी में उन्होंने डेढ़ वर्ष पूर्व जताए गए अंदेशे और लिखे पत्रों के बारे में बताया है। झालानी के अनुसार जब उत्तराखण्ड के चार धामों को आल वेदर फोरलेन रोड से जोड़ने और इस हिमालयीन क्षेत्र में रेल लाइन डालने की योजना प्रारंभ हुई थी, उसी समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व सम्बन्धित विभागों के मंत्रियों को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने चेताया था कि ऐसे निर्माण कार्यों से हिमालयीन व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।

इन समस्याओं की ओर आकर्षित किया था ध्यान

झालानी ने अपने पत्र में लिखा था कि हिमालय के पर्वत कच्ची मिट्टी के और तीव्र ढलान वाले हैं। इन पर्वतों को थोड़ा सा भी काटने पर वर्षाकाल में भूस्खलन जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। हिमालयीन क्षेत्र में फोरलेन रोड और रेललाइन के लिए पहाड़ों को काटने से इन क्षेत्रों में भूस्खलन, पेड़ों का गिरना, मिट्टी का बहकर रोड पर आना जैसी अनेक समस्याएं लगातार आती रहेंगी। सड़कों के घुमावदार होने के कारण यात्रियों को चक्कर आने की समस्या भी होती है। झालानी ने पत्र में केन्द्र सरकार को फोरलेन और रेल लाइन प्रोजेक्ट के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं की चेतावनी देने के साथ ही उनके समाधान भी सुझाए थे। झालानी ने प्रधानमंत्री सहित अन्य मंत्रियों को इस दिशा में नए शोध व प्रयोग कर सड़क व रेल मार्ग बनाने का सुझाव दिया था।

समस्याओं के ये हल सुझाए थे झालानी ने

  • पर्वतीय क्षेत्र में एक ही सतह पर फोरलेन बनाने की बजाय टू-लेन की दो अलग-अलग लेन समानान्तर बनाई जाएं। दोनों लेन एक-दूसरे से काफी दूर पर अथवा ऊपर-नीचे अलग-अलग स्तर पर बनाई जा सकती हैं। ऐसा करने से पहाड़ों को अधिक काटना नहीं पड़ेगा और पहाड़ों का सन्तुलन भी बना रहेगा।
  • पर्वतीय क्षेत्र में मेट्रो की तर्ज पर मिनी मोनो रेल सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। यह मिनी मोनो रेल जहां यात्री वाहनों की आवश्यकता और उसकी मांग की पूर्ति करने में सक्षम होगी, वहीं इसके विस्तार से पर्यटन उद्योग को भी नया आधार मिलेगा। खूबसूरत पर्वतीय वादियों में मिनी मोनो रेल से धीमे-धीमे गुजरने से पर्यटकों को अद्भुत आनन्द प्राप्त होगा। इस प्रकार के रेल रूट बनाने से पहाड़ों का कटाव भी कम होगा। कटाव कम होने और ज्यादा घुमाव नहीं होने से यात्रा संक्षिप्त और कम जोखिम वाली होगी। इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी न्यूनतम रहेगी।

इन मंत्रियों को दिए थे सुझाव

झालानी ने उपयोगी सुझावों वाला पत्र प्रधानमंत्री मोदी के अलावा केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल, राजमार्ग व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, तत्कालीन वन व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल को भी प्रेषित किया था।

पत्र का जबाव देने तक सीमित रही केंद्र सरकार की गंभीरता

झालानी ने उक्त पत्र 29 जून, 2021 को प्रेषित किया था। केंद्र सरकार के जिम्मेदारों द्वारा पत्र पढ़ा भी गया और उसे गंभीरता से लेने के साथ ही झालानी को 10 अगस्त 2021 को उसका जवाब भी दिया गया। इतना ही नहीं सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ तकनीकी सहायक कुलदीप सिंह ने झालानी के पत्र को मूलत: सभी सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित कर उन्हें इस सम्बन्ध में कार्रवाई करने के लिए निर्देशित भी किया। पत्र राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य अभियन्ता, सीमा सड़क संगठन के शिवालिक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियन्ता, एनएचआईडीसीएल के कार्यपालन निदेशक और ऋषिकेश कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना के मुख्य परियोजना प्रबन्धक को भेजा गया था। इसकी प्रति झालानी को भी भेजी गई।

अफसोस ! अमल में नहीं दिखाई तत्परता

सरकार ने जितनी गंभीरता झालानी का पत्र पढ़ने और उसे संबंधित विभागों व अधिकारियों को अग्रेषित करने में दिखाई थी, उतनी उसमें दिए सुझावों को अमलीजामा पहनाने या उसके अनुरूप आचरण करने में नहीं दिखाई। अगर समय रहते सरकार ने ऐसा किया होता तो जोशीमठ में आज जो हो रहा है, वह नहीं हुआ होता।

झालानी द्वारा लिखा गया पत्र

झालानी के पत्र को लेकर सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय का पत्र