रतलाम में इसलिए भड़के हिंदू संगठन, क्योंकि- इन इलाकों की मांस की अवैध दुकानें सबको दिखती हैं, सिर्फ जिम्मेदारों को नजर नहीं आती
रतलाम में नगर निगम सहित अन्य जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते शहर ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी मांस व मांसाहार की अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं। रतलाम की ये दुकानें तो अपराधों को बढ़ाने में भी सहायक हो रही हैं।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में बूचड़खानों की संख्या लगातार बढ़ी रहीं और नगर निगम के जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। रविवार को गोवंश की हत्या के बाद हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के दौरान इन अवैध बूचड़खानों को बंद करने की मांग फिर उठी। हालांकि नगर निगम का अमला, प्रशासन और पुलिस के साथ सैंपलिंग और लाइसेंस जांचने निकल तो पड़ा है लेकिन कार्रवाई कितनी गंभीरता से होगी यह आने वाले समय में ही तय होगा।
मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गोकशी सहित विभिन्न अपराधों को लेकर लगातार प्रशासन और पुलिस पर दबाव बना रहे हैं। बावजूद गोकशी सहित अन्य अपराध फलफूल रहे हैं। लोगों का आरोप है कि यह जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों के प्रश्रय के बिना संभव नहीं है। इस प्रश्रय के चलते ही शहर में मांस की अवैध दुकानों की बाढ़ आ गई है। पहले शहर के कुछ ही इलाकों में मांस की दुकानें संचालित थीं लेकिन अब किसी भी गली-मोहल्ले अथवा शराब की दुकान के आसपास देखी जा सकती हैं।
शहर के इन इलाकों में खुलेआम बिक रहा नॉनवेज
रोटरी हाल के आगे भारतीय स्टेट बैंक के सामने स्थित होटल हो या फिर दीनदयालनगर के प्रवेश द्वारा के पास वीर सावरकर मार्केट के सामने तथा नाहरपुरा वाली सड़क से शाम के समय गुजरना तो काफी दुष्कर हो गया है। पोलोग्राउंड के पास लोकेंद्र भवन के सामने, पुराने जावरा फाटक के दूसरे छोर पर तो मुख्यमार्ग से लेकर डीजलशेड रोड तक नॉनवेज की दुकानें सजी हुई हैं। डोसीगांव, बिरियाखेड़ी, डोंगरानगर में भी अवैध दुकानों की भरमार है। ज्यादातर इलाकों में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण कर अवैध रूप से मांसाहार बेचा जा रहा है। अधिकतर दुकानों पर मांस और मांसाहार को खुले में प्रदर्शित किया जा रहा जिससे इन इलाकों से गुजरना नॉनवेज का सेवन नहीं करने वालों के लिए दुश्वार हो रहा है।
विधायक ही नहीं, मुख्यमंत्री तक जा रहीं शिकायतें
रतलाम शहर को नॉनवेज की मंडी बनने की आशंका से ग्रस्त लोगों द्वारा मामले में विधायक और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक से शिकायतें की गई हैं। बताया जा रहा है कि लोगों ने अपनी शिकायतों में साफ तौर पर नगर निगम के अधिकारियों पर ऐसे लोगों को प्रश्रय देने का आरोप लगाया है।