वृद्धा को अपशब्द कहने पर कर दी थी हत्या, पिता और चार पुत्रों को आजीवन कारावास, 5 हजार रुपए अर्थदंड भी किया

द्वितीय सत्र न्यायधीश अरुण कुमार खरादी ने हत्या के मामले में 5 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

वृद्धा को अपशब्द कहने पर कर दी थी हत्या, पिता और चार पुत्रों को आजीवन कारावास, 5 हजार रुपए अर्थदंड भी किया
फैसला।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । वृद्धा को अपशब्द कहने वाले व्यक्ति की हत्या करने के मामले में द्वितीय सत्र न्यायधीश अरुण कुमार खरादी ने पिता और चार पुत्रों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। 82 दिन में सुनवाई पूरी कर न्यायालय ने अभियुक्त पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी किया है। 

अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने बताया कि घटना रावटी थाना अंतर्गत ग्राम चेनपुरा की है। 28 अक्तूबर, 2019 को दोपहर 2:00 बजे मृतक काना भूरिया पिता बाबूलाल भूरिया (40) अपने घर के बाहर अपने भाई प्रभु, सीताराम, सत्यनारायण व मांगू के साथ बातचीत कर रहा था। तभी वहां से बुजुर्ग नानी बाई निकलीं। उन्हें देख प्रभु ने कहा कि मां साब (डोकरी) कहां जा रही हो। इस बात पर नानी बाई की प्रभु से कहा-सुनी हो गई। आवाज सुनकर उनका बेटा भेरू पिता दल्ला (55) व पोते संतोष (32), दिनेश (26), नारायण (23) तथा कृष्णा उर्फ किशन (18) निवासी चैनपुरा हाथ में लकड़ी लेकर पहुंचे और कान्हा प्रभु सीताराम सत्यनारायण व मांगू के साथ मारपीट करने लगे। काना का सिर फटने से वह अचेत होकर वहीं गिर पड़ा। इसके बाद बचाव करने गांव के लोग आ गए थे। काना को रावटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस थाना रावटी ने की विवेचना

फरियादी मोहन पिता मांगू ने पुलिस थाना रावटी में आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मृतक की पत्नी पूना बाई, पुत्र समरथ सहित अन्य के कथन लिए। मामले में फरियादी मोहन सहित सीताराम व मांगू पक्ष द्रोही घोषित किए गए। जबकि मृतक की पत्नी पुत्र व अन्य स्वतंत्र साक्ष की गवाही तथा चिकित्सक व अनुसंधान अधिकारी की गवाही के आधार पर अभियुक्तों का दोष सिद्ध पाया गया।

82 कार्य दिवस में हुआ फैसला

प्रकरण 12 फरवरी, 2020 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इस दौरान कोरोना काल की अवधि को छोड़कर कुल 82 न्यायालय कार्य दिवस में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 149 में दोष सिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी ने की।