"छोटी-सी बाती रोशनी की" पुस्तक की कविताएँ सकारात्मक संदेश देती हैं : डॉ. क्रांति चतुर्वेदी

साहित्यकार, कवि, चिंतक प्रोफेसर का काव्यसंग्रह छोटी सी बाती रोशनी की का वर्चुअल विमोचन पर्यावरण विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ संपादक डॉ. क्रांति चतुर्वेदी ने किया।

Dec 17, 2022 - 01:13
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"छोटी-सी बाती रोशनी की" पुस्तक की कविताएँ सकारात्मक संदेश देती हैं : डॉ. क्रांति चतुर्वेदी
पुस्तक का विमोचन करते पर्यावरण-विशेषज्ञ डॉ. क्रांति चतुर्वेदी। समीप हैं प्रो. हाशमी

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । प्रसिद्ध कवि और चिंतक प्रो. अजहर हाशमी की कविताओं की पुस्तक "छोटी-सी बाती रोशनी की"  का वर्चुअल विमोचन लेखक और पर्यावरण-विशेषज्ञ क्रांति चतुर्वेदी ने किया। विमोचन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुवे डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि कविताओं की इस पुस्तक का शीर्षक जितना आकर्षक व प्रभावकारी है, कविताएँ भी उतनी ही वजनदार और मर्मस्पर्शी हैं। "छोटी-सी बाती रोशनी की",  दरअसल सकारात्मकता का संदेश देती है। कितना ही घना अंधकार हो किंतु रोशनी से वह हमेशा हारता है।

डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार हाशमी ने "छोटी-सी बाती रोशनी की" पुस्तक में निहित कविताओं में प्रकृति से लेकर देश तक, परिवार से लेकर पर्यावरण तक, संस्कार से लेकर संस्कृति तक, श्रमिक से लेकर किसान तक, फल,सब्जी और दूध बेचने वाले से लेकर हम्माल तक, माता-पिता और मासूम बच्चे से लेकर गुरु तक, पृथ्वी से लेकर धर्म तक, नर्मदा से लेकर क्षमा तक, कचरा बीनने वाले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक,  संकल्प से लेकर पुरुषार्थ तक, कई विषयों को संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इस पुस्तक में संवेदना और संवेदनशीलता पर भी कविता है।

पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने जैसी हैं कविताएं

हाशमी मूलतः तो गीतकार हैं किंतु उन्होंने हिन्दी साहित्य की कई विधाओं में लिखा है। अतुकांत कविताओं से लबरेज "छोटी-सी बाती रोशनी की"  में चिंतन की प्रधानता तो है ही संप्रेषणीयता भी है। कुछ कविताएँ तो ऐसी लगती हैं जैसे नए प्रतिमानों के साथ नई  परिभाषाएँ । "छोटी-सी बाती रोशनी की' कविताएँ पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने जैसी हैं। हर परिवार तथा लाइब्रेरी में इस पुस्तक को होना चाहिए।

चिंतक एवं कवि प्रेम भारती ने लिखी भूमिका

उल्लेखनीय है कि संदर्भ प्रकाशन, भोपाल द्वारा प्रकाशित 104 पृष्ठ की इस पुस्तक में 74 कविताएँ हैं। इसकी भूमिका प्रसिद्ध साहित्यवार चिंतक और कवि प्रेम भारती (भोपाल) ने लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है कि " खुसरो, रहीम रसखान, कबीर के समान प्रो. हाशमी ने "छोटी-सी बाती रोशनी" की को प्रज्ज्वलित कर जिस अधिष्ठान को आधार बनाया है उससे यह कृति आज के परिवेश में एक नव चिंतन को रेखांकित करती है।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।