रतलाम में अशोक पोरवाल हो सकते हैं भाजपा से महापौर उम्मीदवार, अन्य दावेदारों में प्रवीण सोनी का नाम दूसरे नंबर पर, कांग्रेस में असमंजस बरकरार

मप्र में महापौर प्रत्याशी के टिकट के लिए असमंजस बरकरार है। भाजपा की ओर से रतलाम से पूर्व नगर निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल का नाम तय होने की खबर है लेकिन अधिकृत घोषणा नहीं हुई है। इसी तरह कांग्रेस में भी मामला अधर में है। दोनों ही पार्टियों में आज शाम से लेकर कल रात तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

रतलाम में अशोक पोरवाल हो सकते हैं भाजपा से महापौर उम्मीदवार, अन्य दावेदारों में प्रवीण सोनी का नाम दूसरे नंबर पर, कांग्रेस में असमंजस बरकरार
रतलाम। भाजपा-कांग्रेस में महापौर प्रत्याशी के टिकट के लिए घमासान।

नीरज कुमार शुक्ला

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । महापौर पद के टिकट के लिए भाजपा और कांग्रेस में मचा घमासान अब भी जारी है। हालांकि भाजपा की पूर्व नगर निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल का नाम लगभग तय माना जा रहा है। यहां इस दौड़ में प्रवीण सोनी का नाम अब भी दूसरे नंबर पर बना हुआ है। चूंकि पार्टी ने अभी तक अधिकृत घोषणा नहीं की है इसलिए कभी भी कुछ भी होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर मामला अभी उलझा हुआ है और दावेदार हरसंभव प्रयास में जुटे हैं।

किसी भी चुनाव में ‘टिकट’ वितरण उस ‘जलेबी रेस’ की ही तरह है जिसमें प्रतियोगियों के हाथ पीछे बांध दिए जाते हैं। उन्हें लगातार ऊपर-नीचे होती रस्सी से बंधी जलेबी को उछल कर मुंह से पकड़ना होता है। रतलाम में भी यही देखा जा सकता है, खासकर भाजपा में। भाजपा में भी दावेदारों को जलेबी रेस की तरह आदृश्य रस्सी में महापौर पद का टिकट बांधकर उन्हें उछल-उछल कर पकड़ने के लिए कहा जा रहा है। इस बीच प्रदेश की राजधानी से खबर आई है कि रतलाम सहित प्रदेश के पांच स्थानों के लिए महापौर पद के लिए नाम तय हुए हैं। हालांकि अभी अधिकृत घोषणा नहीं हुई है। यह आज देर शाम तक अथवा कल दोपहर तक संभावित है।

पूर्व निगम अध्यक्ष सशक्त दावेदारों में पहले नंबर पर

भाजपा मे समय-समय पर उछले या उछाले गए नामों के कारण असमंजस बरकरार है। इनमें खुशबू और दोपहिया वाहन के सौदागर, खेती-किसानी करने वाले, होस्टल चलाने वाले, पानी के पार्क में अठखेलियां कराने वाले व अन्य नाम शामिल हैं। बावजूद हर समय जो नाम प्रबल दावेदारों में शुमार रहे उनमें पूर्व निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल और प्रवीण सोनी के नाम प्रमुख रहे। इनमें से पूर्व निगम अध्यक्ष पोरवाल का नाम शनिवार देर रात लगभग तय कर दिया गय है। यानी पोरवाल ने टिकट रूपी मंजिल तक पहुंचने के लिए एक अहम् सीढ़ी पार कर ली है और अब बदलाव की ज्यादा गुंजाइश नहीं नजर आ रही। बावजूद चर्चा है कि यदि कोई बड़ा दबाव समूह काम आया और बदलाव की नौबत आई तो सोनी का नाम अधिकृत होने की संभावना बनेगी।

इन दोनों ही नामों के अहम् होने के पीछे पार्टी सूत्र जो कारण बता रहे हैं उसके अनुसार पोरवाल पूर्व निगम अध्यक्ष होकर उन्हें वहां पूरा सिस्टम पता है और उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं का आशीर्वाद भी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब पोरवाल का टिकट रोकने की क्षमता पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी में है। अगर वे चाहें तो सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से संपर्क साधकर ऐसा कर सकते हैं। कोठारी पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मिल भी चुके हैं, वे किसके समर्थन में मिले यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता।

संभागीय समिति और शहर विधायक पर नजर

अभी भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक हुई है। उज्जैन संभाग की चयन समिति की बैठक होना शेष है। पता चला है कि मंत्री एवं संभागीय चयन समिति संयोजक जगदीश देवड़ा कल तक कटनी में थे। उनके लौटने पर संभागीय समिति की बैठक होगी जिसमें रतलाम सहित संभाग के अन्य दावेदारों के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। यह भी माना जा रहा है कि यह सारी कवायद वर्चुअल ही हो जाए। चूंकि संभागीय समिति में एकमात्र नाम रतलाम शहर विधायक चेतन्य काश्यप का है इसलिए उनकी सहमति भी अहम् है। उनकी सहमति-असहमति को लेकर कुछ दिनों से अलग-अलग नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी ओर से खुलकर किसी के नाम को समर्थन नहीं दिया है। अगर बीते समय की स्मृतियों को ताजा करें तो पूर्व निगम अध्यक्ष पोरवाल काश्यप के निकट ज्यादा नजर आए और हर काम में कंधे से कंधा मिलाकर के भी खड़े दिखाई दिए।

इसी तरह सोनी भी अपने व्यवहार के कारण काश्यप के मन में जगह बनाने में काफी हद तक सफल रहे हैं। उन्हें भी भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं का समर्थन और उत्तम स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त है। इधर, भाजपा से नई खबर यह है कि पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष रहे एक युवा नेता ने सीधे दिल्ली में डेरा डाल दिया है। वे संघ से जुड़े लोगों के माध्यम से प्रयास मे जुटे हैं। अब देखते हैं कि उन्हें सफलता मिलती है या नहीं...।

कांग्रेस में दिल्ली साधने का प्रयास

महापौर पद के प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस में दावेदारों की संख्या काफी सीमित हैं। यहां पैराशूट से किसी नाम के आने की संभावना अत्यंत क्षीण है। इसलिए यहां शुरुआत से ही सिर्फ चार नामों की ही चर्चा रही है। पिछले दिनों दावे किए जा रहे थे कि युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मयंक जाट और पूर्व पार्षद राजीव रावत में से ही किसी एक का नाम तय होगा। इसकी वजह इन दोनों ही नामों के लिए प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और विधायक व पूर्व मंत्री कांतिलाल भूरिया का समर्थन होना बताई जाती रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भूरियाद्वय (पिता-पुत्र) में टिकट को लेकर वैचारिक मतभेद होने से शुरुआती दौर में मामला अटका रहा। इसी दौरान अल्पसंख्यक नेताओं की लामबंदी ने समीकरण बिगाड़ दिए क्योंकि उनकी ओर से रतलाम से साफ-सुथरी छवि वाले पूर्व पार्षद फैयाज मंसूरी के लिए टिकट के लिए पैरवी की गई।

इस कारण प्रदेश की 16 में से 15 में कांग्रेस ने प्रत्याशी तय कर दिए, सिर्फ रतलाम ही अधर में है। इसका फायदा अन्य दावेदार उठा रहे हैं। पता चला है कि मंसूरी ने अब अपने तुरुप के इक्के को भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। यह तुरुप का इक्का सीधे दिल्ली हाईकमान से जुड़ा होकर उनके लिए संजीवनी बूटी लाने का काम कर सकता है। इसके लिए आज रात से कल दिनभर प्रयास होंगे। इधर, खबर मिल रही है कि विधायक व पूर्व मंत्री भूरिया ने अब पूर्व पार्षद रावत के बजाय अब पार्टी के जिलास्तर के पूर्व पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे दावेदार के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है।