टटावत परिवार ने 43 वर्षीय हितेश की पार्थिव देह का किया दान, समाजसेवी काकानी के प्रयासों से संभव हो सकी एक जटिल प्रक्रिया
रतलाम के 43 वर्षीय हितेश टटावत का देहदान संपन्न हुआ। उनकी पार्थिव देह मंदसौर के मेडिकल कॉलेज को समर्पित की गई। इसके सहित बीते करीब तीन माह में रतलाम से 6 देहदान हो सके हैं।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर के टटावत परिवार के 43 वर्षीय सदस्य हितेशकुमार पिता माणकलाल टटावत का लंबी बीमारी से मंगलवार को निधन हो गया था। परिवार ने चिकित्सा शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए दिवंगत हितेश की पार्थिव देह दान करने का पुनीत कार्य किया। रतलाम के मेडिकल कॉलेज में पार्थिव देह रखने की जगह नहीं होने से उत्पन्न हुई समस्या का समाधान काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव समाजसेवी गोविंद काकानी के अथक प्रयासों से दूर हो सकी।
हितेश का निधन होने पर बड़े भाई कपिल और बहन सोना ने पिता माणकलाल और माता कस्तूरी देवी को देहदान करने के लिए प्रेरित किया। कपिल और सोना ने माता-पिता को देहदान का महत्व बताया गया तो वे अपने जिगर के टुकड़े की पार्थिव देह को मेडिकल कॉलेज को देने के लिए सहमत हो गए। इसी दौरान टटावत परिवार ने समाजसेवी काकानी से संपर्क साधा और हितेश के निधन व उसकी देहदान की इच्छा जताई। जानकारी मिलते ही काकानी रतलाम मंडल रेल चिकित्सा अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने देहदान के लिए डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज में संपर्क साधा तो पता चला कि वहां अब पार्थिव देह रखने की जगह ही नहीं है।
सूझ-बूझ से किया समस्या का समाधान
रतलाम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में जगह नहीं होने की समस्या का समाधान काकानी ने अपनी सूझ-बूझ से किया। उन्होंने बिना समय गंवाए मंदसौर के सुंदरलाल पटवा शासकीय मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. शशि गांधी से संपर्क किया। डॉ. गांधी पूर्व में देहदान करवाने के लिए काकानी से निवेदन भी कर चुकी थीं। अतः जानकारी मिलते ही गांधी ने प्रदेश शासन, रतलाम कलेक्टर और जिला रोगी कल्याण समिति के सचिव काकानी के नाम समन्वय करने का पत्र भी जारी कर भेज दिया।
सूर्यास्त से पहले गार्ड ऑफ ऑनर भी हो गया
काकानी को दोपहर करीब 2.00 बजे हितेश के निधन और देहदान के संबंध में सूचना मिली थी। ऐसे में देहदान की प्रक्रिया संपन्न करवाना इतना आसान नहीं था। खासकर तब जब सूर्यास्त से पहले देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाना जरूरी हो। काकानी हर स्तर पर समन्वय स्थापित करने के प्रयास करते रहे। पहले कलेक्टर को सूचना, वहां से एसपी को और फिर गार्ड ऑफ ऑनर देने वाली टीम को सूचना पहुंची। इसमें काफी वक्त लगा। इस बीच काकानी ने टटावत परिवार से रेलवे अस्पताल में ही पार्थिव शरीर के स्नान और वस्त्र बदलने आदि की प्रक्रिया संपन्न करवाई। तब तक पुलिस विभाग का दल भी वहां पहुंच गया और सूर्यास्त से ठीक 15 मिनट पहले गार्ड ऑफ ऑनर देने की प्रक्रिया भी पूरी हो गई।
इन्होंने अर्पित किए श्रद्धासुमन

सूर्यास्त के पहले गार्डन ऑफ़ ऑनर देने के लिए हुए प्रयासों में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, रेलवे अस्पताल प्रबंधन, पत्रकार एवं समाजसेवियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। देहदान की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद रेलवे अस्पताल की ओर से डॉ. नरेश, पैरामेडिकल स्टाफ, जिला प्रशासन की ओर से रोगी कल्याण समिति सदस्य काकानी, पत्रकार, दिवगंत के परिजन ने पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव देह को रतलाम जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाए गए शव वाहन से रात 8:00 बजे मंदसौर मेडिकल कॉलेज पहुंची।
रतलाम जिले से 3 माह में 6 देहदान
समाजसेवी गोविंद काकानी ने बताया कि बीते 3 माह में जिले से 5 देहदान हो चुके हैं। यह 6ठा देहदान है। रतलाम, मंदसौर और नीमच के शासकीय मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के प्रैक्टिकल अनुभव के लिए मानव शरीरों की आवश्यकता होती है। ऐसे में देहदान को लेकर मध्य प्रदेश शासन ने गार्ड ऑफ ऑनर देने की जो पहल की है उससे लोगों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
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