विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष : धरती की पीर हरें अब हम ! - अज़हर हाशमी

विश्व पृथ्वी दिवस पर प्रोफेसर अजहर हाशमी का यह गीत पढ़ें, पढ़ाई और धरती को बचाएं।

Apr 22, 2025 - 16:22
Apr 22, 2025 - 16:30
 0
विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष : धरती की पीर हरें अब हम ! - अज़हर हाशमी
विश्व पृथ्वी दिवस 2025

धरती की पीर हरें अब हम !

खुदगर्जी की ख़ातिर हमने,

धरती को तोड़ मरोड़ दिया।

मिट्टी रौंदी जंगल काटे,

नदियों का नीर निचोड़ दिया।

सुधरें-सुधरें-सुधरें अब हम !

धरती की पीर हरें अब हम !

'धरती माँ-धरती-माँ' कहकर,

पहले तो रिश्ते को जोड़ा।

फिर घाव दिये नित धरती को,

धरती के मस्तक को फोड़ा।

धरती के घाव भरें अब हम !

धरती की पीर हरें अब हम !

आँखों में आँसू लिए हुए

हमको ही देख रही धरती।

सहमी-सहमी कातर नजरें,

हम पर ही फेंक रही धरती।

समझें ! नहीं देर करें, अब हम !

धरती की पीर हरें अब हम !

(कवि प्रो. अज़हर हाशमी के गीत संग्रह 'कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना' से साभार।)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।