पूरा परिवार ही धोखेबाज़ ! डेढ़ करोड़ की धोखाधड़ी में रेलवे ठेकेदार संजय जैन के माता-पिता और तत्कालीन उप पंजीयक भी शामिल, पुलिस ने बनाया आरोपी, यहां जानें- पूरा मामला
रतलाम के रेलवे ठेकेदार संजय जैन द्वारा की गई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने उसके माता-पिता के साथ ही तत्कालीन उप पंजीयक को भी आरोपी बनाया है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । फर्जी दस्तावेज बनाकर 1.68 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने वाले रेलवे के ठेकेदार संजय जैन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्टेशन रोड थाना पुलिस ने संजय के माता-पिता और तत्कालीन उप पंजीयक का नाम भी एफआईआर में शामिल किया है। आरोप है कि इन तीनों ने भी धोखाधड़ी में जैन का सहयोग किया था।
जानकारी के अनुसार रतलाम शहर के नीमचकौ निवासी समाजसेवी सुभाष जैन ने रेलवे के ठेकेदार स्वस्तिक इंटरप्राइजेस के पूर्व भागीदार एवं साझेदार संजय जैन निवासी जैन कॉलोनी के विरुद्ध स्टेशन रोड थाने पर एक एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें आरोपी संजय पर 1.68 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच में पुलिस ने संजय के पिता मणिलाल जैन, माता मनोरमा जैन और तत्कालीन उप पंजीयक प्रदीप निगम को भी जिम्मेदार पाया है। आरोपी मणिलाल और मनोरमा भी उक्त फर्म में साझेदार हैं। आरोप है कि इन दोनों ने निगम के साथ मिलीभगत कर सुभाष जैन की सहमति लिए बिना ही एक मकान को भारमुक्त करवा लिया था। इसके लिए कोर्ट में प्रस्तुत फर्जी दस्तावेजों में इनके भी हस्ताक्षर पाए गए हैं। नतीजतन इन तीनों को भी मामले में सह आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। पुलिस तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार संजय जैन द्वारा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में झूठे एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वस्तिक इंटरप्राइजेस नामक फर्म के नाम से एक फर्जी एकाउंट खुलवा लिया गया था। अन्य साझेदारों को इसकी जानकारी भी नहीं दी गई थी। इस तरह धोखाधड़ी करने का पता च ने पर ही सुभाष जैन ने संजय जैन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद संजय भूमिगत हो गया था। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था जिससे संजय जैन और सुभाष जैन के बीच समझौता हो गया था। समझौते में तय हुआ था कि जैसे-जैसे रुपए आते जाएंगे, संजय जैन द्वारा दिए गए चेक वापस होते जाएंगे।
लोन के लिए बैंक में गिरवी रख दिया मकान
संजय जैन द्वारा अपनी माता मनोरमा के स्वामित्व का जैन कॉलोनी में स्थित एक मकान बेचने का अनुबंध 25 अक्टूबर 2012 को सुभाष जैन से किया था। जब हाईकोर्ट इंदौर में समझौता पेश हुआ तो उसमें यह भी शर्त शामिल थी कि यदि चेक बाउंस होते हैं तो संजय द्वारा 30 सितंबर 2013 को मकान की रजिस्ट्री सुभाष जैन के नाम करवा दी जाएगी। इसके बावजूद जून 2013 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र से मां मनोरमा ने अपनी फर्म स्वस्तिक के नाम पर 60 लाख और श्री इंटरप्राइजेस के नाम पर 50 लाख रुपए का लोन लेने के लिए उक्त मकान गिरवी रख दिया। आरोप है कि संजय जैन ने तत्कालीन उपपंजीयक निगम के साथ मिलीभगत कर उक्त मकान भारमुक्त भी करवा लिया और इसके लिए सुभाष जैन की सहमति भी नहीं ली गई। बता दें कि, मणिलाल जैन वर्ष 2010 में सुभाष जैन से 50 फीसदी हिस्सा लेने के बाद कारोबार से सेवानिवृत्ति भी ले ली थी और तब समाचार पत्रों में इसके बड़े-बड़े विज्ञापन तक प्रकाशित हुए थे। वर्तमान में मणिलाल जैन की उम्र तकरीबन 80 साल है।
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