संस्कार ! सैकड़ों नन्हे हाथों ने किया माता-पिता का पूजन, मिला 'आयुष्मान भव' का आशीर्वाद, मुख्य आयोजन महाशिवरात्रि को मांगल्यय मंदिर में
रतलाम में बच्चों द्वारा माता-पिता के पूजन के कार्यक्रमों का आयोजन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में भी हो रहा। मुख्य आयोजन महाशिवरात्रि को मांगल्य मंदिर में होगा।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । माता-पिता पूजन भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वर्तमान समय में सामाजिक संतुलन, पारिवारिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता का सम्मान ही वास्तव में मानवता का सम्मान है। इसी पुनीत भाव को लेकर युवा सेवा संघ द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित माता पिता पूजन में बड़ी संख्या में हर उम्र और वर्ग के नागरिक एवं जनप्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। जिला स्तरीय माता-पिता पूजन दिवस उत्सव मांगल्य मन्दिर में महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को मनाया जाएगा।

संघ अध्यक्ष रूपेश साल्वी ने बताया कि प्रतिवर्ष 14 फरवरी को माता पिता पूजन दिवस मनाया जाता है। इसके चलते शहर की शैक्षणिक संस्थाओं अर्पित कॉन्वेंट स्कूल नयागांव एवं पैराडाइज कॉन्वेंट स्कूल बापू आसाराम नगर में कार्य्रकम आयोजित किए गए। आयोजनों में विधार्थियों ने अपने माता पिता का विधि विधान के साथ पूजन किया। अन्य समुदाय के अभिभावकों का भी उनके बच्चों ने वैदिक संस्कृति के अनुसार पूजन किया। शहर एवं ग्रामीण अंचल की शैक्षणिक संस्थाओं में भी अनूठे आयोजन हो रहे हैं। इनमें श्री अम्बे माता मन्दिर शास्त्री नगर उधान में समिति द्वारा आयोजित माता पिता पूजन में वार्ड पार्षद शामिल हुईं। डोंगरा नगर स्थित मन्दिर में पार्षद शामिल हुए। बिल्केश्वर महादेव मन्दिर राजबाग, रिद्धि सिद्धि एवेन्यू एवं तिरुपति अगर में भी कार्यक्रम हुए।
सम्मान और आज्ञापालन
शास्त्रीनगर में हुए आयोजन में पार्षद ने कहा कि माता-पिता का आदर करना, उनकी बात ध्यान से सुनना और यथासंभव उनके सुझावों का पालन करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है। विनम्र व्यवहार और मधुर वाणी से किया गया सम्मान उनके मन को सबसे अधिक संतोष देता है। इसी प्रकार डोंगरानगर में हुए आयोजन में वहां के पार्षद ने कहा कि ईमानदारी, परिश्रम, करुणा और अनुशासन जैसे संस्कार जो माता-पिता ने दिए हैं, उन्हें जीवन में अपनाकर पुत्र न केवल उनका मान बढ़ाता है, बल्कि उनके त्याग को सार्थक भी करता है। ऐसे कार्य करना जिनसे माता-पिता का नाम सम्मान के साथ लिया जाए—यह भी उनके त्याग का ऋण चुकाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
भाव विव्हल कर देने वाला प्रसंग

इन सभी स्थानों पर छोटे बच्चों से लेकर बड़ों ने अपने-अपने माता पिता का पूजन कर आशीर्वाद लिया। यहां उस समय बड़ा ही भाव विव्हल कर देने वाला दृश्य उपस्थित हो गया जब संतानें माता पिता को चंदन लगाकर, फूल अर्पित कर, आरती उतार रहीं थी। तब यह केवल एक कर्मकांड नहीं रहा, बल्कि जीवन भर के ऋण को स्वीकार करने का क्षण बन गया। माँ के त्याग, पिता के परिश्रम और उनके अनगिनत जागरण की स्मृतियाँ उस क्षण सजीव हो उठीं। वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और ऐसा लग रहा था जैसे प्रेम का अमृत बह रहा हो। पूजन और परिक्रमा के बाद माता-पिता संतान को जैसे ही गले लगाया तो वह आलिंगन केवल स्नेह नहीं, बल्कि आशीर्वाद, सुरक्षा और अनंत विश्वास का प्रतीक बन गया। उस क्षण शब्द छोटे पड़ गए, भावनाएं ही संवाद बन गईं। आत्मीयता और वात्सल्य से परिपूर्ण इस प्रसंग ने समाज को यह सन्देश दिया कि माता पिता के चरणों में झुकना वास्तव में अपने संस्कारों और मानवता को प्रणाम करना है।
मुख्य उत्सव 15 फरवरी को
मांगल्य मन्दिर के महावीर भाई ने बताया कि जिला स्तरीय माता-पिता पूजन दिवस उत्सव मांगल्य मन्दिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 फरवरी को मनाया जाएगा। कार्यकम में ही पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन एवं जागरण भी रखा गया है।
📌 हमें गूगल न्यूज़ पर भी फॉलो करें |
