सरकारी जमीन पर अवैध दरगाह ! राजस्व रिकॉर्ड में जो जमीन 1956 से अब तक शासकीय है, उस पर कैसे खड़ा हो गया ढांचा ? जानिए- कैसे हुआ इतना बड़ा खुलासा
रतलाम शहर के बंजली गांव में सरकारी जमीन पर दरगाह का अवैध निर्माण का मामला सामने आया है। RTI में हुए इसके खुलासे के बाद कलेक्टर से अतिक्रमण हटाने और आयोजनों पर रोक की मांग की गई है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत निकाली गई जानकारी ने बंजली गांव में सड़क किनारे स्थित एक दरगाह/मजार की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में एक व्यक्ति ने पूरे दस्तावेजों के साथ कलेक्टर से इस अवैध निर्माण को हटाने और यहां होने वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है।
मामला रतलाम तहसील के बंजली ग्राम में रतलाम-सैलाना मार्ग पर इंडियन पेट्रोल पंप के पास स्थित हजरत मस्ताना शाह बाबा दरगाह/मजार का है। इसे स्थानीय रूप से एरोड्रम इंदौर वाले बाबा और एरोड्रम रतलाम वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है। इसे लेकर धामनोद निवासी नरेन्द्र शर्मा (बंटी) ने 04 मई 2026 को कलेक्टर रतलाम को एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि दरगाह/मजार का अवैध निर्माण शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 44, रकबा 0.2000 हेक्टेयर पर अवैध रूप से किया गया है। इस पर लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।
शिकायतकर्ता नरेंद्र शर्मा के अनुसार मामले की नींव सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी पर टिकी है। दरअसल, शर्मा ने 19 दिसंबर 2025 को एक विस्तृत आवेदन देकर दरगाह के निर्माण, उसकी वैध अनुमति, संचालन, भूमि के व्यपवर्तन और 1956-57 से लेकर 2025-26 तक के राजस्व रिकॉर्ड सहित कई बिंदुओं पर जानकारी चाही थी। इस आवेदन के जवाब में ग्राम पंचायत बंजली और तहसीलदार रतलाम से जो जानकारी सामने आई, उसने विवाद को और गहरा कर दिया।
RTI में ये मिली जानकारी
बंजली ग्राम पंचायत ने 20 जनवरी 2026 को मामले में जानकारी दी। इसमें बताया गया कि संबंधित दरगाह/मजार ग्राम आबादी भूमि में दर्ज नहीं है और पंचायत के रिकॉर्ड में इसका कोई उल्लेख भी नहीं है। यानी स्थानीय स्तर पर दरगाह/मजार के निर्माण का कोई आधिकारिक अस्तित्व दर्ज नहीं है। इसी मामले में 22 जनवरी 2026 को तहसीलदार एवं लोकसूचना अधिकारी रतलाम द्वारा जारी पत्र (क्रमांक 14/सूसेः/2025) के माध्यम से जानकारी दी गई। इसके अनुसार वर्ष 1956-57 के खसरा रिकॉर्ड में सर्वे क्रमांक 44 की भूमि शासकीय मद नाकाबिज बरडी (चरनोई) के रूप में दर्ज थी और वर्तमान वर्ष 2025-26 के खसरे में भी यह भूमि शासकीय ही दर्ज है। तहसीलदार के जवाब में यह बात स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि दरगाह इसी शासकीय भूमि पर स्थित है।
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झाड़-फूंक और टोने-टोटके भी हो रहे
शिकायतकर्ता नरेंद्र शर्मा ने आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेजों की प्रतिलिपि के साथ कलेक्टर को दिए गए आवेदन में बताया है कि कुछ वर्षों से शासकीय जमीन पर बनी अवैध दरगाह/मजार पर उर्स जैसे विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं यहां लोगों को चमत्कारी प्रभाव के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है। यहां विशेष रूप से गुरुवार के दिन झाड़-फूंक और टोने-टोटके जैसी गतिविधियां भी की जाती हैं, जिससे आमजन प्रभावित हो रहे हैं।
अतिक्रमण हटे, आयोजनों पर रोक लगे
शर्मा ने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर शासकीय भूमि से अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। दरगाह/मजार को पूर्ण रूप से हटाया जाए और भविष्य में यहां किसी भी प्रकार के उर्स, कव्वाली या अन्य कार्यक्रमों की अनुमति भी नहीं दी जाए। उन्होंने अवैध निर्माण करने के लिए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग भी की है।
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अब तक कैसे सोते रहे जिम्मेदार
गौरतलब है कि, आरटीआई के तहत जो जानकारी दी गई है वह शासकीय रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी विभाग द्वारा ही उपलब्ध करवाई गई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या अब तक राजस्व विभाग के जिम्मेदार सो रहे थे या किसी दबाव अथवा निजी हित के चलते जानबूझ कर आंखें मूंद रखी थी ताकि अवैध निर्माण होता रहे। चूंकि अब मामला कलेक्टर तक पहुंच चुका है तो माना जा रहा है कि यदि जांच में अवैध निर्माण साबित होता है तो कानूनी प्रक्रिया हो सकती है।
आयोजन की नहीं मिली स्वीकृति !
बताया जा रहा है दरगाह पर उर्स सहित अन्य आयोजनों की तैयारी भी चल रही है हालांकि अभी तक इसके लिए प्रशासन से किसी भी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई है। शहर एसडीएम आर्ची हरित ने बताया कि अभी तक उनके पास कोई आवेदन / पत्र आदि नहीं मिला है। मामले में कार्रवाई के बारे में चर्चा करने के लिए कलेक्टर मिशा सिंह को कॉल किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी है।
ग्राम पंचायत का जवाब
- संबंधित भूमि ग्राम आबादी क्षेत्र में दर्ज नहीं है।
- पंचायत के रिकॉर्ड में दरगाह/मजार का कोई उल्लेख नहीं।
- किसी प्रकार का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं।
तहसीलदार का जवाब
- वर्ष 1956-57 में सर्वे क्रमांक 44 की भूमि शासकीय मद नाकाबिज बरडी (चरनोई) दर्ज थी।
- वर्तमान 2025-26 खसरा में भी यह भूमि शासकीय दर्ज है।
- दरगाह शासकीय भूमि पर ही स्थित है।
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