आखिर- गैप कहां है? अपनी ही सरकार में बेबस BJP विधायक 'मथुरा बा' का फूटा दर्द; 'PWD मंत्री से सड़क मांगों तो फाइल कचरे में चली जाती है!'

रतलाम में मंच से जब BJP के बुजुर्ग विधायक मथुरालाल डामर बोले, तो शब्द नहीं- सिस्टम की हकीकत बाहर आ गई। 'मैं विधायक हूं, फिर भी सड़क नहीं बनवा पा रहा…' आखिर क्यों? पढ़िए वो पूरा वाकया, जिसने सरकार के दावों पर खड़े कर दिए असहज सवाल…

May 3, 2026 - 11:39
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आखिर- गैप कहां है? अपनी ही सरकार में बेबस BJP विधायक 'मथुरा बा' का फूटा दर्द; 'PWD मंत्री से सड़क मांगों तो फाइल कचरे में चली जाती है!'
रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर (मथुरा बा) ने बयां की अपनी पीड़ा।

नीरज कुमार शुक्ला

यह सिर्फ एक बयान नहीं था… यह उस खामोशी का टूटना था, जो अक्सर सत्ताधारी गलियारों में दबा दी जाती है। रतलाम में एक मंच, सामने अपनी ही पार्टी के मंत्री, और डायस के पीछे खड़े भाजपा विधायक मथुरालाल डामर... जब उन्होंने बोलना शुरू किया, तो शब्दों में सियासत नहीं, सीधे-सीधे एक जनप्रतिनिधि का दर्द था।

दिन शनिवार, रतलाम शहर के लिए बहुत ही खास दिन... क्योंकि विकास की इबारत लिखने के लिए बने रतलाम विकास प्राधिकरण (RDA)’ को उसके नए संचालक मिलने जा रहे थे...

मंच सजा हुआ था। औपचारिक कार्यक्रम चल रहा था- RDA के नए संचालक मंडल का पदभार ग्रहण।
सब कुछ तय स्क्रिप्ट के मुताबिक ही चल रहा था… जब तक कि ‘मथुरा बा’ ने माइक नहीं संभाला। मथुरा बाकोई और नहीं- रतलाम ग्रामीण विधानसभा से भाजपा के विधायक मथुरालाल डामर, जमीनी किसान और उम्रदराज जनप्रतिनिधि...

उन्होंने कोई आरोप नहीं लगाया, कोई नारेबाजी भी नहीं की… बस एक अनुभव साझा किया, जो एक जनप्रतिनिधि का दर्द है, वे बोले-
भोपाल जाते हैं, PWD के मंत्री राकेश सिंह से मिलते हैं, सड़क की मांग रखते हैं… और जवाब मिलता है- “देखते हैं…”

यह “देखते हैं” यहीं खत्म नहीं होता।
इसके बाद शुरू होता है कागजों का सफर- फाइलें, नक्शे, कनेक्टिविटी के तर्क… और अंत में वही कागज, जिनके बारे में डामर ने जोर देकर कहा-
आखिरकार ये फाइलें कचरे में चली जाती हैं… दर्द होता है।”

उनका यह वाक्य एक लाइन नहीं था, बल्कि उस सिस्टम का सार था, जहां प्रक्रिया है… पर परिणाम नहीं, परिणाम है भी तो बहुत दूर...।

मंच पर ही सवाल, मंच पर ही उम्मीद

मथुरा बा ने मंच पर ही मौजूद आयोजन के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चेतन्य काश्यप की ओर देखा और कहा-
गांव में सड़क बनेगी, तभी शहर चलेगा।
यह तर्क नहीं, जमीनी सच्चाई थी।

फिर एक हल्का सा तंज भी कसा जिसमें एक उम्मीद भी झलकती है- जिलाध्यक्ष (प्रदीप उपाध्याय) कहते हैं कि मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) उनके घनिष्ठ मित्र हैं…
तो क्या यह नजदीकी सड़कों की मंजूरी तक नहीं पहुंचती?

मंच पर बैठे नेता और सामने उपस्थित जन-समुदाय मथुरा बा की इस बेबाकी से अवाक् भी हो गए और मुस्करा भी दिए …
लेकिन यह मुस्कान उनके सवालों का जवाब नहीं थी।

यह सिर्फ एक विधायक की कहानी नहीं, बल्कि ऐसी तल्ख टिप्पणियां प्रायः उठती ही रहती हैं...

मथुरालाल डामर कोई नए चेहरे नहीं हैं।
अनुभव, सादगी और जमीन से जुड़े नेता हैं- इसलिए ही तो लोग उन्हें ‘मथुरा बा’ कहते हैं।

ऐसे नेता का सार्वजनिक मंच से यह कहना कि-
मंत्री “देखते हैं” कहकर टाल देते हैं…
फाइलें आगे नहीं बढ़तीं…
तो यह व्यक्तिगत शिकायत नहीं रह जाती, यह सिस्टम पर सवाल बन जाती है।

सरकार बनाम ज़मीन, आखिर- गैप कहां है?

एक तरफ सरकारी दावे- सड़क, विकास, कनेक्टिविटी के।
... तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल का विधायक, जो खुद कह रहा है कि उसकी बात आगे नहीं बढ़ रही।

ऐसे में बड़ा और सीधा सवाल है-
अगर विधायक की फाइल अटक सकती है, तो आम आदमी की कितनी चलती होगी?

...और अब आखिरी बात

रतलाम का यह दृश्य एक संकेत है-
कि सत्ता में होने का मतलब हमेशा समाधान नहीं होता।
कभी-कभी, सबसे ज्यादा आवाज उसी को उठानी पड़ती है… जो सिस्टम के भीतर होते हुए भी उससे जूझ रहा हो।

मथुरा बा’ ने जो कहा, वह शायद भाषण का हिस्सा था-
जिसे कोई उनकी
नादानी कह सकता है, बढ़ती उम्र का तकाज़ा या अनुशासनहीनता भी ठहरा सकता है, सरकार विरोधियों के लिए यह एक पुड़िया है जिसे वे सरकार को कोसने के लिए कभी भी जुमले की तरह जनता के बीच उछाल सकते हैं...

कोई कुछ भी कहे, लेकिन एक बात तो तय है कि-

मथुरा बा का यह दर्द असर कुछ ज्यादा ही गहरा छोड़ गया।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।