एक्सक्लूसिव : रतलाम SP की अपील- MTFE कंपनी की ठगी के शिकार पुलिस के पास आएं, अगर आपने भी बनाया है किसी को सदस्य तब भी डरें नहीं, आप आरोपी नहीं बनेंगे

MTFE कंपनी की ठगी का शिकार लोगों को रुपया वापस दिलाने के लिए रतलाम पुलिस प्रयास कर रही है। एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने ठगे गए लोगों से सामने आने की अपील की है।

Sep 27, 2023 - 00:53
Sep 29, 2024 - 15:24
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एक्सक्लूसिव : रतलाम SP की अपील- MTFE कंपनी की ठगी के शिकार पुलिस के पास आएं, अगर आपने भी बनाया है किसी को सदस्य तब भी डरें नहीं, आप आरोपी नहीं बनेंगे
राहुल कुमार लोढ़ा, एसपी- रतलाम।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । MTFE कंपनी की ठगी का शिकार हुए लोगों को उनसे ठगा गया रुपया वापस दिलवाने के लिए रतलाम पुलिस विशेष प्रयास कर रही है। रतलाम एसपी राहुल कुमार लोढ़ा का प्रयास है कि वे ऐसे ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कर पाएं। इसलिए उन्होंने अपील जारी की है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी निवेश करने के बाद किसी अन्य को भी इससे जोड़ा है तो उन्हें आरोपी नहीं बनाया जाएगा।

इंटरनेट का जाल दुनिया भर में फैला हुआ। हम और आप इसके जितने हिस्से को जानते और समझते हैं वह 10-15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। 85 से 90 फीसदी हिस्सा डार्कवेब के रूप में है। यह डार्कवेब अपराधियों के मंसूबों को साकार करने में भी सहायक हो रहा है। MTFE कंपनी द्वारा की जा रही ठगी इसी डार्कवेब के माध्यम से संचालित है। इसके जाल को भेदने में अभी तक रतलाम पुलिस ने ही सफलता हासिल की है और MTFE के माध्यम से ठगे गए 39 लाख रुपए के करीब स्पेन तक पहुंच बनाकर फ्रीज करवा सकी है। पुलिस का प्रयास है कि इसकी ठगी का शिकार हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कर सके। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

पुलिस नहीं बनाएगी ऐसे लोगों को आरोपी

इस पूरे मामले में एसपी लोढ़ा खुद रुचि ले रहे हैं और पड़ताल के सिस्टम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक अपील की है। एसपी लोढ़ा के अनुसार बीते कुछ कुछ दिनों में कुछ ऐसे लोगों का पता चला है जो इस हाईटेक ठगी का शिकार हुए हैं लेकिन वे पुलिस के सामने आने से हिचक रहे हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने स्वयं निवेश करने के बाद MTFE से जुड़े मल्टीलेवल मार्केटिंग (MLM) के माध्यम से अन्य लोगों को भी जोड़ा और निवेश कराया है। ऐसे लोगों को डर है कि पुलिस उन्हें भी आरोपी बना सकती है। एसपी ने उनकी इस आशंका का समाधान करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे लोगों को आरोपी नहीं बनाया जाएगा।

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क्यूआर कोड उपलब्ध करवाकर करें मदद

एसपी राहुल कुमार के अनुसार जिसने भी इस फर्जी कंपनी में निवेश किया है वे अगले दो-तीन दिन में आगे आकर पुलिस को इस बड़ी धोखाधड़ी को उजागर करने के प्रयास में पुलिस की मदद करें। उनका पूरा प्रयास रहेगा कि लोगों को उनके खून-पसीने की कमाई का पैसा वापस मिल सके। ऐसा तभी संभव है जब ठगी का शिकार MTFE कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड व उसमें अंकित एड्रेस उपलब्ध करवाएंगे। इसी क्यूआर कोड और एड्रेस से पुलिस यह पता कर पाएगी कि किसका कितना रुपया कहां फंसाया गया है। इसके लिए पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए फॉर्मेट के अनुसार क्यूआर कोड और एड्रेस नजदीकी थाने में जमा करा सकते हैं। एसपी ने रतलाम जिले के बाहर के लोगों से भी यही अपील की है।

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रतलाम से ही 100 करोड़ रुपए ठगी का अनुमान

माना जा रहा है कि MTFE कंपनी द्वारा अकेले रतलाम से ही तकरीबन 100 करोड़ रुपए की निवेश हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 40 करोड़ के निवेश से संबंधित जानकारी तो रतलाम पुलिस द्वारा जुटा ली गई है। इसका सही आंकड़ा तभी पता चलेगा जब ठगी का शिकार हुए ज्यादा से ज्यादा लोग सामने आएंगे। चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली ठगी का है जिस पर किसी भी देश की सरकार या कानून का कोई नियंत्रण नहीं है, इसलिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है।

पहले नीमच पुलिस ने हल्के में लिया, अब हाथ-पैर मार रही

इस पूरे प्रकरण में खास बात यह है कि सबसे पहली यह मामला नीमच पुलिस के पास ही पहुंचा था लेकिन उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके उलट रतलाम पुलिस ने शुरुआत से ही रुचि ली और इसकी तह तक जाने की ठानी। लगातार हुए प्रयास में सफलता मिली भी। रतलाम पुलिस की इस उपलब्धि का पता लगने के बाद नीमच पुलिस भी इसे लेकर गंभीर हो गई है और वहां भी केस दर्ज हुए हैं।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।