कबीर की खुशबू, इंसानियत की आवाज और कविता का सफर... अज़हर हाशमी को उज्जैन ने ऐसे किया याद
मध्यप्रदेश लेखक संघ की ओर से उज्जैन के चारधाम मंदिर में आयोजित काव्य गोष्ठी में स्वर्गीय अजहर हाशमी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में स्वामी शांतिस्वरूपानंद, प्रो. नागेश्वर राव सहित अनेक साहित्यकारों ने उनके साहित्यिक और मानवीय योगदान को याद किया।
मध्यप्रदेश लेखक संघ की काव्य गोष्ठी में उमड़ी साहित्यिक संवेदनाएं, वक्ताओं ने कहा— हाशमी को पढ़ना मानो मनुष्यता को पढ़ना है
एसीएन टाइम्स @ उज्जैन । कुछ लोग अपनी उम्र से नहीं, अपने शब्दों से लंबे समय तक जीवित रहते हैं। प्रख्यात गीतकार, शायर और साहित्यकार स्वर्गीय अजहर हाशमी ऐसे ही रचनाकार थे, जिनकी स्मृतियां मंगलवार को चारधाम मंदिर परिसर में आयोजित मध्यप्रदेश लेखक संघ की काव्य गोष्ठी में बार-बार जीवंत होती रहीं। श्रद्धांजलि सभा केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि साहित्य, संवेदना और इंसानियत को समर्पित एक ऐसा मंच बन गई, जहां वक्ताओं ने हाशमी के व्यक्तित्व और कृतित्व को अलग-अलग दृष्टिकोणों से याद किया।
कार्यक्रम में आशीर्वचन देते हुए पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी शांतिस्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि लेखक अपनी लेखनी के माध्यम से सत्य का उद्घाटन करता है। मनुष्य बाहर निकलते समय अपने चेहरे को संवारता है, लेकिन साहित्य उसके चरित्र को संवारने का कार्य करता है। साहित्य अंतर्मन का दर्पण है, जो व्यक्ति और समाज दोनों को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकार सदैव स्मरणीय रहते हैं, जो अपने शब्दों के माध्यम से मानवता को समृद्ध करते हैं।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के चेयरमैन प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि अजहर हाशमी का हिंदी भाषा पर अद्भुत अधिकार था। उनकी भाषा में सरलता थी, लेकिन विचारों में गहराई। उन्हें सुनना किसी संत की वाणी सुनने जैसा अनुभव देता था। उन्होंने कहा कि हाशमी की रचनाएं केवल साहित्य नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों का सघन दस्तावेज हैं।
कविता और इंसानियत को समर्पित था हाशमी का जीवन- डॉ. चौरसिया
विशिष्ट अतिथि डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि हाशमी ने अपना पूरा जीवन कविता और इंसानियत को समर्पित कर दिया। उनके साहित्य में मनुष्य के प्रति प्रेम, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक सौहार्द की स्पष्ट झलक मिलती है।
सही अर्थों में कबीर परंपरा के साधक थे हाशमी- प्रो. बुधौलिया
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. हरिमोहन बुधौलिया ने कहा कि सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत को यदि किसी ने अपने जीवन में पूरी निष्ठा से जिया तो उनमें अजहर हाशमी का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाशमी सही अर्थों में कबीर की परंपरा के साधक थे, जिन्होंने शब्दों को समाज जोड़ने का माध्यम बनाया।
संस्मरण और गीत ने किया भावुक
रतलाम से पहुंचीं विशेष अतिथि डॉ. श्वेता नागर ने अजहर हाशमी से जुड़े कई आत्मीय संस्मरण साझा किए। वहीं भारत भारती की प्रदेश संयोजक डॉ. प्रवीणा दवेसर ने हाशमी का चर्चित गीत प्रस्तुत कर पूरे सभागार को भावुक कर दिया। इस दौरान डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, डॉ. उर्मि शर्मा, जगदीश कौशल, हरिहर शर्मा और राम भवालकर ने भी हाशमी के साहित्यिक योगदान पर अपने विचार रखे।
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रचनाकारों ने दी काव्यात्मक प्रस्तुति
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. राजेश रावल ‘सुशील’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद कविता का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसने आयोजन को साहित्यिक उत्सव में बदल दिया। दिलीप जैन, अखिलेश चौरे, अक्षय कुमार चवरे, विनोद काबरा, आशीष श्रीवास्तव, आर.पी. तिवारी, प्रफुल्ल शुक्ल, रामदास मेंडेकर, श्रीकृष्ण गुप्ता, सूरज नागर, आर.सी. शर्मा, डॉ. पांखुरी वक्त और रुद्राक्ष दवेसर सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।
संस्कृति संवाद का हुआ लोकार्पण
आयोजन के दौरान एक और महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब डॉ. राजेश रावल के संपादन में प्रकाशित मालवी पत्रिका ‘संस्कृति संवाद’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। साहित्यकारों ने इसे मालवी भाषा और लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। अतिथियों का स्वागत शैलेश लेले एवं अनिल कुरेल ने किया। कार्यक्रम में नीलेश शर्मा, प्रशांत सोहले, प्रकाश बांगर सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. पांखुरी वक्त ने किया तथा अंत में डॉ. हरीशकुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया।
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