जमीन की जादूगरी ! 12.50 लाख वसूल लिए, कब्जा दिया न ही रजिस्ट्री कराई, कॉलोनी भी रचना हाउसिंग को बेच दी, सम्यक लैंडमार्क के संचालकों पर FIR दर्ज

रतलाम में 14 साल पुराने भूखंड विवाद ने आपराधिक मामला ले लिया है। सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन डायरेक्टर शशांक न्याती और संदीप बड़जात्या पर 12.50 लाख रुपए लेने के बावजूद रजिस्ट्री और कब्जा नहीं देने का आरोप है। जांच में कॉलोनी के रचना हाउसिंग को हस्तांतरण का मामला भी सामने आया है, जिसके बाद स्टेशन रोड थाना पुलिस ने IPC 406 के तहत FIR दर्ज की है।

जमीन की जादूगरी ! 12.50 लाख वसूल लिए, कब्जा दिया न ही रजिस्ट्री कराई, कॉलोनी भी रचना हाउसिंग को बेच दी, सम्यक लैंडमार्क के संचालकों पर FIR दर्ज
रतलाम में जमीन की जादूगरी पर एक और केस दर्ज।

जांच में प्रथम दृष्टया अमानत में खयानत का मामला मिलने पर पुलिस ने दर्ज किया अपराध

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रियल एस्टेट कारोबार में निवेशकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला शहर में सामने आया है। करीब 14 साल पुराने प्लॉट आवंटन प्रकरण में स्टेशन रोड थाना पुलिस ने सम्यक लैंडमार्क (यूनिट ऑफ सम्यक रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड) के तत्कालीन डायरेक्टर शशांक न्याती और संदीप बड़जात्या के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपियों ने लाखों रुपए लेने के बावजूद न तो आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई और न ही कब्जा दिया। उन्होंने पूरी कॉलोनी ही रचना हाउसिंग सोसायी को बेच दी।

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जानकारी के अनुसार स्टेशन रोड थाने पर इंदिरा नगर निवासी डॉ. सत्येंद्र पिता नंदलाल तिवारी द्वारा एक शिकायत प्रस्तुत की गई थी। इसमें अनावेदक फर्म रचना हाउसिंग के सहयोगी अनिल पिता कृष्णकुमार झालानी निवासी 101-देवप्रस्थ अपार्टमेंट रतलाम, प्रवीण पिता मोहनलाल सेलवाड़िया निवासी वालचंद तेरेस ताड़देव मुंबई तथा सम्यक लैण्डमार्क के सहमतिदाता 51-न्यू रोड फूट फैशन के पास रतलाम एवं 120-ट्रेड सेन्टर साउथ तुकोगंज इंदौर द्वारा प्रार्थी के साथ धोखाधड़ी कर का आरोप लगाया था। मामले की जांच उप निरीक्षक जितेंद्र सिंह कनेश ने की जिनके प्रतिवेदन के आधार पर सम्यक लैंडमार्क (यूनिट ऑफ सम्यक रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड) के तत्कालीन डायरेक्टर शशांक न्याती और संदीप बड़जात्या के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

यहां सिलसिलेवार जानें पूरा मामला

जिस मामले में यह प्रकरण दर्ज हुआ है उसकी शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। मामला यूं है कि शिकायतकर्ता डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने भक्तन की बावड़ी, महू-नीमच रोड स्थित सम्यक लैंडमार्क कॉलोनी में दो भूखंड खरीदे थे। भूखंड क्रमांक-256 उनके पिता नंदलाल के नाम तथा भूखंड क्रमांक-231 स्वयं के लिए क्रय किए थे। उन्होंने कॉलोनाइजर सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन डायरेक्टर शशांक न्याती और संदीप बड़जात्या को अलॉटमेंट के समय दोनों भूखंड के लिए पृथक-पृथक 12 लाख 50 हजार रुपए नकद भुगतान किया था। इसके एवज में कॉलोनाइजरों द्वारा उन्हें अलॉटमेंट लेटर दिया गया था।

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इसके बावजूद जब काफी समय तक भूखंडों की न तो रजिस्ट्री हुई और न ही कब्जा मिला। इससे प्रार्थी ने दोनों कॉलोनाइजरों से संपर्क साधा तो उन्होंने पूरी कॉलोनी रचना हाउसिंग को विक्रय कर देने की जानकारी दी, जहां अब प्लेटिनम वैली नाम से कॉलोनी विकसित हो चुकी है।

सिर्फ एक भूखंड की हुई रजिस्ट्री

(सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन संचालकों की मानें तो शिकायकर्ता डॉ. सत्येंद्र तिवारी के पिता का भूखंड यहां था, जो अब कहीं खो गया है, आपमें से किसी को मिले तो मो. नं. 9826809338 पर जरूर बताएं ताकि डॉ. तिवारी और पुलिस की तलाश पूरी हो सके।)

डॉ. तिवारी के अनुसार सम्यक लैंडमार्क के संचालकों से मिले जवाब के बाद उन्होंने रचना हाउसिंग फर्म के भागीदार से उक्त भूखंडों के संबंध में जानकारी ली तो उन्होंने उनका भूखंड क्रमांक 256 (1500 वर्गफीट) लैंडमार्क कॉलोनी (अब प्लेटिनम वैली) में होने की पुष्टि की जिसका आधिपत्य भी तिवारी के पास है। रचना हाउसिंग के भागीदार ने 28 सितंबर 2020 को उसकी रजिस्ट्री भी करवा दी लेकिन डॉ. तिवारी के पिता के नाम के भूखंड क्रमांक 231 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की।

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डॉ. तिवारी ने पुनः सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन डायरेक्टरों न्याती और बड़जात्या से संपर्क साधा तो उन्होंने साफ कह दिया कि उक्त कॉलोनी का समस्त भू-भाग रचना हाउसिंग के स्वामित्व में है, इसलिए हम रजिस्ट्री नहीं करा सकते। तिवारी ने इसे उनके साथ अमानत में खयानत कर धोखाधड़ी करना बताया।

नहीं दे सके विक्रय व हस्तांतरण के दस्तावेज

शिकायत की जांच के दौरान पुलिस द्वारा सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन संचालकों और रचना हाउसिंग के भागीदार से कॉलोनी विक्रय, हस्तांतरण को लेकर संपादित अनुबंध व अन्य अभिलेख तलब किए गए जो उन्होंने प्रस्तुत नहीं किए। डॉ. तिवारी द्वारा शिकायत के साथ भूखंड क्रमांक 231 के लिए किए गए भुगतान की सम्यक लैंडमार्क फर्म द्वारा प्रस्तुत रसीदें और अलॉटमेंट लेटर भी सही पाए गए। यह भी पाया गया कि राशि लेने के बाद भी कॉलोनाइजरों द्वारा प्रार्थी को न तो रजिस्ट्री करवाई गई और न ही भूखंड का कब्जा ही दिया गया।

रचना हाउसिंग की भूमिका भी सवालों के घेरे में

मामले में रचना हाउसिंग फर्म का नाम भी सामने आया है। एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार आवेदक डॉ. सत्येंद्र तिवारी को सम्यक लैंडमार्क कॉलोनी के पूर्व संचालकों ने ही पूरी कॉलोनी रचना हाउसिंग को हस्तांतरित करने की जानकारी दी थी, लेकिन उन्होंने प्रार्थी की इसकी पूर्व में कोई सूचना / जानकारी नहीं दी। आवेदन में रचना हाउसिंग के अनिल कुमार झालानी और प्रवीण सेलवाड़िया (अब इस दूनिया में नहीं) के नामों का भी उल्लेख है। इससे झालानी व अन्य भागीदारों की भूमिका सवालों के घेरे में है। बता दें कि, अभी झालानी या अन्य किसी व्यक्ति का नाम एफआईआर में नहीं आया है।

प्रतिवेदन में साफ उल्लेख है कि कॉलोनी से संबंधित कोई ऐसा दस्तावेज या अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे शिकायतकर्ता के आवंटित भूखंडों के अधिकारों का संरक्षण या समाधान साबित हो सके। जांच में यह तथ्य जरूर सामने आया कि शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गई राशि सम्यक लैंडमार्क के तत्कालीन डायरेक्टरों को प्राप्त हुई थी, जबकि बाद में कॉलोनी का नियंत्रण बदल गया।

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