रतलाम में गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश, मंत्री चेतन्य काश्यप सहित समाजजनों ने की अगवानी
रतलाम में गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। लोकेन्द्र टॉकिज से निकले जुलूस के बाद मोहन टॉकिज में धर्मसभा आयोजित की गई।
एसीेन टाइम्स @ रतलाम । दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी म.सा. की पाट परंपरा के पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य, गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा का शुक्रवार को रतलाम में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर में निकले विशाल जुलूस और धर्मसभा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा।
रतलाम में शुक्रवार को गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा के मंगल प्रवेश को लेकर धार्मिक उत्साह का वातावरण रहा। मंगल प्रवेश का भव्य जुलूस लोकेन्द्र टॉकिज से प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ मोहन टॉकिज पहुंचा। यहां धर्मसभा आयोजित की गई।
मंगल प्रवेश के दौरान पूज्य गुरुदेव की अगवानी श्री संघ संरक्षक एवं कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप, महापौर प्रहलाद पटेल, आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, श्री संघ अध्यक्ष सुशील छाजेड़, विभिन्न श्री संघों के अध्यक्षों तथा बड़ी संख्या में समाजजन ने की। मोहन टॉकिज में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने मंगलाचरण वाचन कर श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किए।
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“संघ एकता ही संगठन की शक्ति”
अपने आशीर्वचन में गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि संघ की एकता में ही संगठन की वास्तविक शक्ति निहित है। उन्होंने कहा कि धर्म आराधना से ही मानव जीवन सार्थक होता है तथा गुरु का आशीर्वाद और प्रेरणा सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
धर्म गुरु जीवन का पथ प्रदर्शक- चेतन्य काश्यप
मुख्य अतिथि एवं श्री संघ संरक्षक कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि समाज संतों की कृपा से ही फलीभूत होता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म गुरु का होना सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और वही सही पथ प्रदर्शक होते हैं।
धर्मसभा से पूर्व निकले भव्य वरघोड़े में बग्गी पर दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी एवं पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी के चित्र आकर्षण का केंद्र रहे। महिला परिषद की सदस्याएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं, जबकि बहु परिषद द्वारा अष्ट मंगल मस्तक पर धारण कर शोभायात्रा में सहभागिता की गई। जानकारी श्री संघ के राजकमल द्वारा दी गई।
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