भोजशाला फैसले से मुस्लिम पक्ष असंतुष्ट, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी, प्रशासन ने दोनों समुदायों से की शांति बनाए रखने की अपील
धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की।
- हाईकोर्ट के निर्णय के बाद राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं तेज, धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
- एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और धार्मिक दावों पर आधारित फैसले के बाद दोनों पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रिया
एसीएन टाइम्स @ धार / इंदौर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा धार स्थित भोजशाला को मंदिर मानने और हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार देने के फैसले के बाद मामले में राजनीतिक, धार्मिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर असहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। हिंदू पक्ष और कई भाजपा नेताओं ने इसे “सनातन और सांस्कृतिक विरासत की जीत” बताया है।
हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिए अपने महत्वपूर्ण फैसले में सिर्फ भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर ही नहीं माना बल्कि 2003 के ASI के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसमें मुस्लिमों को वहां नमाज़ की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने ASI को यह भी निर्देशित किया है कि वह उस परिसर का संरक्षण जारी रखे। हाई कोर्ट के फैसले को लेकर जहां हिंदू समुदाय ने सनातन और सत्य की जीत बताया है वहीं मुस्लिम पक्ष इससे असंतुष्ट है। ऐसे में किसी प्रकार के टकराव की स्थिति नहीं बने इसके लिए प्रशासन पूरी तरह एहतियात बरत रहा है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। धार और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है तथा सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।
मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर जताई असहमति
धार शहर के काजी वकार सादिक सहित मुस्लिम पक्षकारों ने हाईकोर्ट के फैसले पर असहमति व्यक्त की है। उनका कहना है कि वे निर्णय का विस्तृत अध्ययन करने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि अदालत के आदेश की कानूनी समीक्षा की जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा।
ओवैसी ने कहा कि, “हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुलझाएगा और इस आदेश को रद्द करेगा। बाबरी मस्जिद मामले के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।”
हिंदू पक्ष के वकीलों की प्रतिक्रिया
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा, कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे सरकार को प्रत्यावेदन दें, जिस पर सरकार वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में विचार कर सकती है।
हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने कहा कि अदालत में 24 दिनों तक नियमित सुनवाई चली, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा, अदालत ने एएसआई की रिपोर्ट, ऐतिहासिक गजेटियर, हिंदू पक्ष द्वारा प्रस्तुत पुरातात्विक साक्ष्य और इमारत की संरचना से जुड़े तथ्यों पर विचार करते हुए फैसला सुनाया है। गुप्ता ने आगे कहा कि हिंदू पक्ष ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा था कि इमारत की संरचना मंदिर की विशेषताओं को दर्शाती है और इसके समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए थे।
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता की प्रतिक्रिया
मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता अशहर वारसी ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उसका विस्तृत अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा, अदालत ने जिस स्थल को पहले मस्जिद माना जाता था, उसे अब मंदिर घोषित किया है। हमें दूसरी जगह भूमि दिए जाने की बात कही गई है। हम पूरे फैसले का अध्ययन करेंगे और यदि हमारे पक्षों पर संतोषजनक तरीके से विचार नहीं किया गया होगा तो हम निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने मुख्य रूप से एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय दिया है, लेकिन मुस्लिम पक्ष इस रिपोर्ट को भी चुनौती देगा।
अशहर वारसी ने कहा है कि, हमारा कहना है कि सर्वेक्षण का तरीका सही नहीं था और हमारे तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। हमारा दावा अब भी कायम है कि यह संपत्ति लगभग 700 वर्षों से मुस्लिम समुदाय की रही है।
आस्था के तेज से आलोकित अवसर- विजयवर्गीय
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा, “सत्य सनातन धर्म की जय। हृदय आज गर्व, गौरव और आत्मिक आनंद से परिपूर्ण है। माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के उपरांत धार स्थित भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है। यह क्षण इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित होने वाला अमूल्य, अविस्मरणीय और आस्था के तेज से आलोकित अवसर है। यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा और सभ्यता के स्वाभिमान का सम्मान है। जय माँ वाग्देवी।”
भारतीय संस्कृति की जीत- मंत्री सिंह
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने फैसले को भारतीय संस्कृति, सत्य और सनातन की जीत बताया। उन्होंने कहा, “यतो धर्मस्ततो जयः। धार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर भोजशाला को माँ वाग्देवी मंदिर मानते हुए माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय भारतीय संस्कृति, सत्य और सनातन की जीत है। यह निर्णय करोड़ों सनातनियों की भावनाओं का सम्मान है।”
प्रशासन ने दोनों पक्षों से की शांति बनाए रखने की अपील
भोजशाला मामले में फैसला आने के बाद इंदौर (ग्रामीण) के DIG मनोज कुमार सिंह और कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने संयुक्त रूप से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफवाहों तथा भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखी जा रही है।
DIG मनोज कुमार सिंह ने कहा है कि- हमने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि जनता हाई कोर्ट के आदेश का पालन करेगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करेगी। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने दोनों समुदायों के वरिष्ठ लोगों से संवाद स्थापित कर शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
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भोजशाला विवाद : 1935 से 2026 तक का पूरा घटनाक्रम
1935 : तत्कालीन धार रियासत ने प्रशासनिक व्यवस्था लागू की, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ की अनुमति दी गई। वर्तमान सुनवाई में इस व्यवस्था की वैधता पर भी बहस हुई।
1995 : विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज़ की अनुमति देने की व्यवस्था लागू की।
1997 : तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में कुछ समय के लिए आम लोगों की एंट्री और मंगलवार की पूजा पर रोक लगाई गई। बाद में वसंत पंचमी पर पूजा और शुक्रवार को नमाज़ की अनुमति दी गई।
1998 : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर में आम लोगों के प्रवेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।
2003 : मंगलवार को पूजा की अनुमति दोबारा शुरू हुई। एएसआई व्यवस्था के तहत हिंदू समुदाय को मंगलवार और वसंत पंचमी पर पूजा तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज़ की अनुमति दी जाने लगी। परिसर पर्यटकों के लिए भी खोला गया।
2013 : वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने पर धार में तनाव की स्थिति बनी और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी।
2016 : वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने पर फिर तनावपूर्ण स्थिति बनी और सुरक्षा बढ़ाई गई।
2022 : हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का निर्धारण और हिंदू समुदाय को व्यापक पूजा अधिकार देने की मांग की।
2024 : हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया।
2026 : सुप्रीम कोर्ट ने वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा की अनुमति दी। इसके बाद अप्रैल और मई 2026 में हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। 12 मई को फैसला सुरक्षित रखा गया और 15 मई को हाईकोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए फैसला सुनाया।
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