हिंदुओं की बड़ी जीत : धार स्थित भोजशाला वाग्देवी का मंदिर ही है, भोजशाला में हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई- हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे मंदिर माना। कोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग स्वीकार करते हुए पूजा-अर्चना के अधिकार को मान्यता दी।
धार में सुरक्षा कड़ी, धारा 163 लागू; सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की निगरानी
एसीएन टाइम्स @ धार / इंदौर । मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार (15 मई 2026) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला को वाग्देवी मंदिर करार देते हुए कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य से यह स्थापित होता है कि विवादित क्षेत्र “भोजशाला” के रूप में परमार वंश के राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में जाना जाता था।
हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए पूजा-अर्चना के अधिकार को मान्यता दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों, एएसआई की रिपोर्ट और संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के तहत धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए निष्कर्ष निकाला गया है। भोजशाला विवाद को लेकर वर्ष 2022 में “हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस” की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का निर्धारण करने और हिंदू समाज को इसका पूर्ण अधिकार दिए जाने की मांग की गई थी। इसके बाद मामले में विस्तृत सुनवाई हुई। 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई प्रारंभ हुई, जो 12 मई तक चली। हाईकोर्ट ने 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार 15 मई को सुनाया गया।
ASI ने किया था 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे किया और 15 जुलाई 2024 को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की।
करीब 2000 पन्नों से अधिक की रिपोर्ट में एएसआई ने कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किए। रिपोर्ट के अनुसार-
- भोजशाला परिसर में 106 खंभे और 82 प्लास्टर संरचनाएं मिलीं, जिन्हें पुराने मंदिरों का हिस्सा बताया गया और बाद में कमाल मौला मस्जिद में उपयोग किए जाने की बात कही गई।
- कई स्तंभों पर देवताओं की मूर्तियां, शेर, हाथी और अन्य आकृतियों को तोड़े या विकृत किए जाने के संकेत मिले।
- परिसर से 10वीं-11वीं शताब्दी के परमारकालीन शिलालेख और बाद के समय के सिक्के भी प्राप्त हुए।
- एएसआई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दर्ज किया गया कि यह स्थल मूल रूप से हिंदू मंदिर रहा होगा।
क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।
वर्षों से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा है। विशेष रूप से वसंत पंचमी के अवसर पर पूजा-अर्चना और नमाज को लेकर यहां कई बार तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। 23 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने वसंत पंचमी पर दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी।
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हिंदू पक्ष की प्रमुख मांगें
- संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया जाए।
- भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।
- परिसर में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर भोजशाला का प्रबंधन अपने हाथ में ले।
- मां सरस्वती की प्रतिमा की निरंतर पूजा-अर्चना सुनिश्चित की जाए।
- ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाकर भोजशाला में स्थापित की जाए।
मुस्लिम पक्ष को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मुस्लिम पक्ष को लेकर कहा कि वह मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि हेतु आवेदन कर सकता है। अदालत ने कहा कि एएसआई अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों, अयोध्या मामले में स्थापित न्यायिक मिसाल और पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति के आधार पर एएसआई द्वारा किए गए बहु-विषयक अध्ययनों के निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।
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फैसले से पहले धार में कड़ी सुरक्षा
संवेदनशीलता को देखते हुए फैसले से पहले धार जिले में धारा 163 लागू की गई। प्रशासन ने पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया है। किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन और जुलूस पर भी रोक लगाई गई।
पुलिस सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और टिप्पणियों की निगरानी कर रही है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की बोतलों में बिक्री पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। शुक्रवार होने के कारण फैसले के दिन भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज भी अदा की गई, जो भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
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