फोरलेन पर दरगाह के अवैध विस्तार और कव्वाली के आयोजन को लेकर हिंदू संगठनों में बढ़ा आक्रोश, PWD को चेताया, बोले- हादसा हुआ तो जिम्मेदार होगा प्रशासन
रतलाम के सेजावता बायपास फोरलेन पर सरकारी भूमि पर कथित अवैध दरगाह निर्माण और बिना अनुमति कव्वाली कार्यक्रम को लेकर हिंदू संगठनों ने PWD को ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप भी लगाया है।
सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे का आरोप, हिंदू संगठनों ने कहा- प्रशासन अब भी मामले को हल्के में ले रहा
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर के महू-नीमच फोरलेन रोड स्थित सेजावता बायपास पर सरकारी भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण और वहां प्रस्तावित बिना अनुमति के धार्मिक आयोजन को लेकर हिंदू संगठनों और हिंदू समाज में भारी आक्रोश है। बुधवार को विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय पहुंचे और कार्यपालन यंत्री को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
हिंदू संगठनों का आरोप है कि प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और मामले को लगातार हल्के में लिया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सेजावता बायपास स्थित सर्वे नंबर 104, जो मुख्य सड़क किनारे स्थित शासकीय भूमि है, वहां हजरत पहलवान बाबा शाह की दरगाह के नाम पर अवैध निर्माण किया गया है। हिंदू संगठनों ने दावा किया कि करीब दो वर्ष पूर्व प्रशासन द्वारा इस स्थान से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब दोबारा मनमाने तरीके से कब्जा कर निर्माण कार्य बढ़ा लिया गया है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीन पर फिर से निर्माण कार्य होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि पहले कार्रवाई होने के बावजूद यदि उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण खड़ा हो गया, तो यह सीधे-सीधे संबंधित विभागों की निष्क्रियता को उजागर करता है।
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बिना अनुमति बड़े आयोजन की तैयारी, यातायात और सुरक्षा पर खतरे की आशंका
हिंदू संगठनों ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि उक्त स्थल पर 13, 14 और 15 मई 2026 को कव्वाली जैसे बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इस आयोजन के लिए किसी भी सक्षम विभाग से अनुमति नहीं ली गई है। संगठन पदाधिकारियों ने अधिकारियों को चेताया कि फोरलेन और मुख्य सड़क किनारे इस प्रकार के अवैध आयोजन से भारी भीड़ जमा होगी, जिससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाएगी। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्यक्रम नहीं रोका, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यदि अवैध निर्माण नहीं हटाया गया और प्रस्तावित कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना, अव्यवस्था या जनहानि की पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग और प्रशासन की होगी।
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लगातार दूसरे दिन भी सौंपा गया ज्ञापन
उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर हिंदू संगठन लगातार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज करा रहे हैं। मंगलवार को भी विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, जहां एडीएम, एसडीएम और सीएसपी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बावजूद बुधवार तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आने पर संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई है। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन अब भी मामले को गंभीरता से नहीं लेता, तो आगे बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। पदाधिकारियों ने पूर्व कलेक्टर की सक्रियता का स्मरण करते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में जिस तरह से नियम-कानून का पालन हुआ, वह एक नजीर है लेकिन उनके जाने के बाद जिम्मेदारों ने आंखें मूद लीं जो दुर्भाग्य का विषय है।
बड़ा सवाल : अगर मामला कोर्ट में है तो फिर निर्माण और आयोजन क्यों ?
इधर, प्रशासनिक गलियारों में दबी जुबान में चर्चा है कि मामला कोर्ट में होने से कुछ भी करना उचित नहीं है। इस संबंध में हिंदू संगठनों का कहना है कि जिस भी स्थान को लेकर विवाद है और यदि वह कोर्ट में विचाराधीन है तो फिर उसका विस्तार और वहां आयोजन कैसे हो सकता है। यदि कोई मामला कोर्ट में है तो कोई भी निर्णय आने तक यथास्थिति ही बनी रहनी चाहिए, लेकिन मौके पर न सिर्फ अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है अपितु वहां आयोजन भी हो रहे हैं जो सरासर गलत है।
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