हादसा या हत्या ! पूर्व जनपद सदस्य कृष्णसिंह राठौर पर गिरा पेड़, सिर फटा, पसलियां टूट कर अंदर घुसीं, पेड़ों की अवैध कटाई और लापरवाही पर उठे सवाल
रतलाम के शिवगढ़ में पूर्व जनपद सदस्य एवं कृष्णा रिसॉर्ट संचालक ठाकुर कृष्णसिंह राठौर की पेड़ गिरने से मौत हो गई। हादसे के बाद पेड़ कटाई की अनुमति, सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले के शिवगढ़ में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे में सैलाना के पूर्व जनपद सदस्य एवं कृष्णा रिसॉर्ट के संचालक ठाकुर कृष्णसिंह राठौर (86) का निधन हो गया। पेड़ गिरने से उनका सिर फट गया और पसलियां भी टूटकर अंदर धंस गईं। घटना ने पेड़ कटाई की अनुमति, सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृष्णसिंह राठौर रोज की तरह सुबह अपने घर से बुलेट पर कृष्णा रिसॉर्ट की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे छिपकर काटा जा रहा बबूल का एक पेड़ गिरा और सीधे राठौर को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भयावह था कि उनके सिर में गंभीर चोट आई और पसलियां टूटकर अंदर धंस गईं। इससे उनकी जान चली गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
क्षेत्र में शोक की लहर
ठाकुर कृष्णसिंह राठौर क्षेत्र के सम्मानित व्यक्तित्वों में गिने जाते थे। वे पूर्व में शिक्षक भी रह चुके थे और सामाजिक व सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। जनपद सदस्य रहने के दौरान भी वे क्षेत्रीय विकास और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। दिवंगत राठौर के दो पुत्र सुखवीर सिंह (व्यवसायी) एवं महावीर सिंह (शिक्षक) हैं। राठार के निधन के बाद शिवगढ़ और सैलाना क्षेत्र में शोक का माहौल है।
कई सवालों के घेरे में पूरी घटना
इस हादसे के बाद परिजन और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उन्होंने पेड़ काटने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
- क्या संबंधित विभाग से इसकी अनुमति ली गई थी?
- पेड़ कटाई के दौरान सड़क पर सुरक्षा घेरा क्यों नहीं बनाया गया?
- यातायात को रोकने या डायवर्ट करने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
- आखिर इतना बड़ा पेड़ सीधे सड़क पर कैसे गिर गया?
- क्या यह पूरी कार्रवाई नियमों के खिलाफ की जा रही थी?
जांच की मांग तेज
घटना के बाद अब प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पेड़ कटाई अवैध थी या बिना सुरक्षा मानकों के की जा रही थी, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होना चाहिए।
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