सनातन के अपमान पर सख्त संदेश ! मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड ने कही बड़ी बात- सनातन विरोधी तमिलनाडु और बंगाल के जनादेश से लें सबक
मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड रतलाम ने बड़ा बयान जारी किया है। इसमें सनातन धर्म के अपमान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के जनादेश को सनातन का विरोध करने वालों को बड़ा सबक बताया है।
रतलाम से जारी बयान में तीखे तेवर, कहा—सनातन को ‘बीमारी’ बताने वालों को जनता ने दिया जवाब, अपमान अब बर्दाश्त नहीं
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सनातन धर्म वसुधैव कुटुम्बकम् की बात करता है। सनातन धर्म वह परंपरा है जिसने विश्व को सहिष्णुता सिखाई, विविधता में एकता का मार्ग दिखाया, जिसने मानवता को धर्म से ऊपर उठकर “धर्म का मर्म” समझाया। यह संकीर्ण विचार नहीं, जीवन की व्यापक दृष्टि है। ऐसे धर्म को कतिपय लोग मलेरिया, कोरोना जैसी बीमारी बताकर इसका अपमान करते हैं। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का जनादेश ऐसे लोगों के लिए बड़ा सबक है। जानता ने साफ कर दिया है कि अब हिंदुस्तान सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा।
इस आशय का बयान मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड के उज्जैन संभाग प्रभारी अनुराग लोखंडे, सह प्रभारी डॉ. राजेश शर्मा, जिला प्रभारी अजय तिवारी, जिला प्रचार प्रभारी नीरज कुमार शुक्ला, रतलाम नगर प्रभारी सुनील दुबे, नगर सचिव चेतन्य शर्मा, सुशील दुबे, सत्येंद्र जोशी, प्रभाकांत उपाध्याय सहित अन्य ने संयुक्त रूप से जारी किया है। बोर्ड पदाधिकारियों ने कहा है कि सनातन धर्म पर प्रहार कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर बार समय ने यह सिद्ध किया है कि सनातन न तो झुकता है, न टूटता है, न ही मिटता है। अपितु सनातन को झुकाने, तोड़ने का प्रयास करने वाले ही नहीं, ऐसा सोचने वाले अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाता है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव परिणाम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड के पादाधिकारियों के अनुसार सनातन धर्म के अनुनायी भारत में हो फिर विदेश में, वे अपना अपमान कभी नहीं भूलते। यह सभी को याद होगा कि कुछ समय पूर्व तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे और डीएमके (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि- ‘सनातन धर्म डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारी है, जिसे खत्म कर देना चाहिए।’ इसी तरह पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी सरकार ने भी सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दोनों ही राज्यों की सनातनियों ने महज कुछ ही दिनों में अपना फैसला सुनाकर दोनों को ही घर भेज दिया है। यह सनातन की जीत है।
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मप्र परशुराम कल्याण बोर्ड रतलाम ने कहा है कि हजारों वर्षों की संस्कृति, वेदों का ज्ञान, उपनिषदों का चिंतन, गीता का संदेश और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के विपरीत कोई भी किसी भी तरह का कृत्य करता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोई इसे अपमानित करने की कोशिश करता है, तो यह केवल एक धर्म पर टिप्पणी नहीं, भारत की आत्मा पर प्रहार माना जाएगा और उसका प्रतिकार पूरी ताकत से किया जाएगा। हम किसी के विरोध में नहीं, लेकिन अपनी परंपरा के सम्मान के पक्ष में खड़े हैं। सनातन था, सनातन है, और सनातन रहेगा, और जो इसे समझने का प्रयास करेगा वह जुड़ेगा किंतु जो इसे तोड़ने का प्रयास करेंगे, वह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की तरह समाज से दूर हो जाएगा। यही सनातन की शक्ति है, यही इसकी चेतना है।
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