फिक्की के प्रतिष्ठित ‘अराइज अवॉर्ड’ के तीसरे चरण तक पहुंचा रतलाम का सांदीपनि विद्यालय विनोबा, राष्ट्रपति पुरस्कार शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर ने रखा मॉडल
रतलाम के सांदीपनि विद्यालय विनोबा ने फिक्की समर्थित राष्ट्रीय ‘अराइज अवॉर्ड’ के तीसरे चरण में जगह बनाई। ‘टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट’ श्रेणी में राष्ट्रीय ग्रैंड जूरी के समक्ष ‘स्कूल टीचर प्रोफेशनल डेवलपमेंट मॉडल’ प्रस्तुत किया गया।
‘टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट’ श्रेणी में राष्ट्रीय ग्रैंड जूरी के समक्ष ‘स्कूल टीचर प्रोफेशनल डेवलपमेंट मॉडल’ का प्रस्तुतिकरण
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सांदीपनि विद्यालय विनोबा, रतलाम ने फिक्की (The Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry - FICCI) समर्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के ‘अराइज अवॉर्ड’ की चयन प्रक्रिया में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराते हुए तीसरे चरण में सफलतापूर्वक प्रस्तुतिकरण किया। ‘टीचर्स प्रोफेशनल डेवलपमेंट’ श्रेणी में विद्यालय ने अपने ‘स्कूल टीचर प्रोफेशनल डेवलपमेंट मॉडल’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया।
अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया के पहले चरण में विद्यालय ने प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद दूसरे चरण में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। तीसरा चरण पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय में आयोजित हुआ, जहां विद्यालय के मॉडल का राष्ट्रीय ग्रैंड जूरी के समक्ष प्रस्तुतिकरण किया गया। इस दौरान मॉडल से जुड़े कार्यों, उनकी निरंतरता, सीखने की प्रक्रिया तथा विद्यालय स्तर पर उनके प्रभाव को प्रमुखता से रखा गया। प्रस्तुतिकरण विद्यालय के उप प्राचार्य एवं ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ मॉडल के निर्माता तथा राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर ने किया।
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हजारों विद्यालयों की प्रतिस्पर्धा के बाद तीसरे चरण तक पहुंच
‘अराइज अवॉर्ड’ की चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर होती है। प्रथम चरण में देशभर से हजारों विद्यालय विभिन्न श्रेणियों में भाग लेते हैं। चयन के अगले चरणों के बाद प्रत्येक कैटेगरी में शॉर्टलिस्ट किए गए विद्यालय तीसरे चरण तक पहुंचते हैं। इस चरण में विद्यालयों द्वारा अपने कार्यों और मॉडलों का प्रस्तुतिकरण राष्ट्रीय ग्रैंड जूरी के समक्ष किया जाता है, जिसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र भी होता है।
शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास पर विद्यालय का विशेष जोर
सांदीपनि विद्यालय विनोबा शिक्षक व्यावसायिक विकास के लिए एक विशिष्ट दृष्टिकोण पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत देश-दुनिया के अग्रणी विद्यालयों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने और उनसे सीखने पर जोर दिया जा रहा है। विद्यालय के मॉडल का उद्देश्य शिक्षकों को नई पीढ़ी के साथ निरंतर विकसित होने के लिए तैयार करना तथा विद्यालय में सतत व्यावसायिक विकास का एक मजबूत तंत्र तैयार करना है।
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‘नई पीढ़ी के साथ शिक्षकों का विकास भी निरंतर होना चाहिए’
विद्यालय के उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर ने कहा, हमारा लक्ष्य ऐसा शैक्षिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें सतत व्यावसायिक विकास के माध्यम से टीम विनोबा के शिक्षकों के सीखने, प्रयोग करने और अपने अभ्यास को लगातार बेहतर बनाने के लिए एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र सतत रूप से जारी रहे।
उन्होंने बताया कि विद्यालय अब सभी शिक्षकों के लिए शिक्षण प्रक्रिया में एआई उपकरणों के एकीकरण की दिशा में अगले चरण पर काम कर रहा है। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए स्व-गति आधारित ऐसी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो उद्यमी सोच को बढ़ावा देगी। राठौर ने बताया कि विद्यालय की निरंतर विकास यात्रा में ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ के साथ ‘द जेन साह मॉडल’ और ‘ब्रूडिंग इफेक्ट’ जैसे नवाचारों को भी जोड़ा जा रहा है।
26 सितंबर को फिक्की मुख्यालय में अवॉर्ड सेरेमनी
इस उपलब्धि पर संस्था की प्राचार्य संध्या वोरा ने बताया कि अवॉर्ड के अंतिम चयन का परिणाम अभी प्रतीक्षित है। अवॉर्ड सेरेमनी 26 सितंबर को नई दिल्ली स्थित फिक्की मुख्यालय पर आयोजित होगी।
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