यही तो इंसानियत है ! पहले सफाईकर्मी की नन्हीं बेटी को देते हैं चाय-बिस्किट, फिर पैर छूकर आशीर्वाद लेने के बाद शुरू करते हैं दुकानदारी, देखें वीडियो...

बहादुरपुर में चाय दुकानदार अरविंद तिवारी सफाईकर्मी की बेटी को चाय-बिस्किट देकर पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। इसका वीडियो देखने के लिए खबर पढ़ें...

यही तो इंसानियत है ! पहले सफाईकर्मी की नन्हीं बेटी को देते हैं चाय-बिस्किट, फिर पैर छूकर आशीर्वाद लेने के बाद शुरू करते हैं दुकानदारी, देखें वीडियो...
चाय दुकान के संचालक अरविंद तिवारी सफाईकर्मी की नन्हीं बेटी को चाय-बिस्किट देते हुए (पहला चित्र), फिर पैर छूकर (दूसरा चित्र) और हाथ माथे पर लगाते हुए (तीसरा चित्र)।)

इंसानियत बड़ी-बड़ी बातों में नहीं, छोटे-छोटे व्यवहार में दिखाई देती है। बहादुरपुर की एक चाय की दुकान पर रोज सुबह होने वाला एक छोटा-सा व्यवहार इसका बेहद खूबसूरत उदाहरण है। सफाईकर्मी की नन्हीं बेटी को चाय-बिस्किट देने के बाद उसके पैर छूकर आशीर्वाद लेना और फिर दुकानदारी शुरू करना- अरविंद तिवारी का यह सहज व्यवहार न सिर्फ दिल छूता है, बल्कि समाज में बराबरी और सम्मान का संदेश भी देता है। फेसबुक यूज़र आदित्य त्रिवेदी अपनी फेसबुक वॉल पर सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में कैद हुए इस दृश्य को साझा करते लिखते हैं-

यह रिकॉर्डिंग एक सीसीटीवी कैमरे की है, जो कि बहादुरपुर में आकांक्षा मेडिकल स्टोर के बाहर लगा हुआ है।

आकांक्षा मेडिकल स्टोर से सटी हुई एक चाय की दुकान अरविंद तिवारी की है। कल दिनांक 23 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे मैं मॉर्निंग वॉक के बाद श्री तिवारी की दुकान पर चाय पीने के लिए ठहरा तो वह एक छोटी सी बच्ची के साथ एक अनूठा व्यवहार कर रहे थे। यह बच्ची एक सफाई कर्मी की बेटी थी, जो रोज सुबह अपनी माँ के साथ बाजार आ जाती है और स्नेहवश तिवारी जी की चाय की दुकान पर बिछी बेंच पर आ बैठती है। मैंने विस्मय भरी निगाहों से देखा कि बहुत ही मामूली आर्थिक स्थिति वाले अरविंद चाय के पहले घना में से पहली चाय और पतंजलि मिल्क बिस्किट का एक छोटा वाला पैकेट इस बच्ची के सामने रखते हैं और कन्या के पैर छूने के बाद आशीर्वाद लेकर अपनी दुकानदारी शुरू करते हैं।

मैं आश्चर्यचकित था, सहज भाव में अपने मोबाइल से इस लम्हे को कैमरे में कैद नहीं कर सका। किंतु मेरी नजर आकांक्षा मेडिकल स्टोर के बाहर लगे कैमरे पर गई, जिसका एंगल इस बेंच की ओर था। आज शाम मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर इस प्यारे से लम्हे को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया।

मेरे मन में अरविंद के प्रति एक आदर भाव जाग चुका है। तथाकथित रूप से अछूत समझे जाने वाले परिवार की एक बेटी के चरण स्पर्श कर अपनी आजीविका शुरू करने वाले अरविंद उन तमाम असामाजिक तत्वों के मुंह पर तमाचा मारते हैं जो आज भी मध्यकालीन भारत की अमानुषिक स्मृतियों को लेकर जब तब समाज को छिन्न भिन्न करने का कुत्सित प्रयास करते हैं।

सैल्यूट भाई अरविंद, तुम पर गर्व है हमें।

वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://www.facebook.com/reel/1674313703644094

(अरविंद त्रिवेदी की फेसबुक वॉल में उनकी रील से ज्यों-का-त्यों)