कुर्सी के लिए घमासान ! श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति के चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया पर नहीं बन रही सहमति, 46 साल पहली बार लगा ऐसा विराम, जरूरी प्रोजेक्ट अटके
श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति के 46 साल के इतिहास में पहली बार चुनाव स्थगित हुए। इस बात को काफी समय हो गया है लेकिन अब तक मतदान प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसकी वजह कुर्सी के लिए खींचतान बताई जा रही है।
तीन स्कूलों का संचालन करती है समिति, 46 साल पहली बार चुनाव प्रक्रिया पर लगा ऐसा विराम, जरूरी प्रोजेक्ट अटके
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर की शैक्षणिक संस्था श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति के 46 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कुर्सी के लिए इस कदर घमासान मचा कि चुनाव प्रक्रिया ही टल गई। मतदान की व्यवस्था को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के कारण टले चुनाव को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं हो सकी है।
रतलाम शहर में संख्या बल के लिहाज से सिख समाज काफी छोटा है, इसकी संख्या तकरीबन 4 हजार के आसपास बताई जाती है। परंतु, समाज की प्रतिष्ठा काफी व्यापक है, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में। श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति के अंतर्गत शहर में तीन स्कूल संचालित किए जाते हैं। इनमें बरबड़ रोड स्थित श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी, शास्त्री नगर स्थित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल तथा न्यू रोड स्थित गुरु तेग बहादुर स्कूल शामिल हैं।
इस समिति के गठन के बाद से अब तक तीन व्यक्ति अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें स्व. राजेंद्रसिंह डंग, स्व. हरदयालसिंह वाधवा और स्व. गुरनामसिंह डंग शामिल हैं। गुरनामसिंह तीसरे अध्यक्ष रहे जिनके निधन के बाद समिति को अब अपना चौथा अध्यक्ष चुनना है। ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव संस्था के प्रशासनिक और आगामी संचालन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई, मतदान के तरीके पर हो गई रार
त्रै-वार्षिक चुनाव के संचालन की जिम्मेदारी कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत चावला को बतौर चुनाव अधिकारी सौंपी गई थी। चुनाव की प्रक्रिया भी पिछले दिनों शुरू कर दी गई थी, लेकिन मतदान कराने के तरीके को लेकेर उपजे विवाद के चलते मामला अटक गया। खासतौर पर शहर से बाहर रहने वाले सदस्यों के मत लेने की व्यवस्था चुनाव के लिए सबसे बड़ी अड़चन बन गई।
चुनाव में ऐसे सदस्यों के मत किस माध्यम से लिए जाएं, इसे लेकर अलग-अलग सुझाव सामने आए। एक पक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मतदान कराने की बात कही, जबकि दूसरा पक्ष संबंधित सदस्यों से डाक के माध्यम से बैलेट पेपर भेजकर मतदान कराने पर जोर दे रहा है। दोनों ही विकल्पों को लेकर एकमत राय नहीं बन पाने के कारण चुनाव स्थगित करने पड़े थे। मतदान को लेकर सामने आए इस तकनीकी और प्रक्रियागत सवालों का समाधान अब तक नहीं हो सका।
खेल और होस्टल के प्रोजेक्ट अटके
पूर्व अध्यक्ष गुरनामसिंह के समय खेल, होस्टल से जुड़ा नया प्रोजेक्ट बना था जो उनके निधन के बाद से आगे नहीं पढ़ पाया है। यह स्थायी अध्यक्ष चुने जाने से पहले संभव नहीं लगता क्योंकि अकादमिक समिति में तालमेल बहुत जरूरी है और उसके लिए किसी ऐसे व्यक्ति का अध्यक्ष बनना जरूरी है जिसकी बात सर्वमान्य हो।
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हरदयालसिंह का रहा सबसे लंबा कार्यकाल
समिति के संस्थापक सदस्य राजेंद्रसिंह डंग का कार्यकाल महज एक वर्ष का रहा था। उसके बाद उनके विश्वासपात्र रहे उपाध्यक्ष हरदयालसिंह को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जो 23 साल तक काबिज रहे। शासन, प्रशासन में अच्छी पकड़, समाज में प्रभाव के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए और सफलताएं भी इनके कार्यकाल में हासिल हुईं।
हरदयालसिंह ने ही तत्कालीन उपाध्यक्ष गुरनामसिंह डंग को अध्यक्ष बनाया था जिन्होंने 14 साल (निधन होने तक) यह जिम्मेदारी संभाली। दोनों के ही कार्यकाल में कभी भी समिति के चुनाव में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी, निर्णय सर्वानुमति से ही हुए। 46 साल में यह पहला मौका है जब नौबत मतदान तक पहुंच गई। इसकी वजह महज 22 सदस्यीय समिति में भी अलग-अलग धड़े होने और उनमें कुर्सी के लिए मची खींचतान बताई जा रही है।
ये बताए जा रहे अध्यक्ष की दौड़ में
सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष पद की दौड़ में कार्यकारी अध्यक्ष हरजीत चावला, वर्तमान सचिव अजीत छाबड़ा, कोषाध्यक्ष देवेंद्र वाधवा, गगनजीतसिंह डंग सहित कुछ नाम हैं। हरजीत चावला उद्योगपति हैं जबकि अजीत छाबड़ा शिक्षा के क्षेत्र से हैं। वहीं देवेंद्र वाधवा पूर्व अध्यक्ष हरदयालसिंह के बेटे हैं। गगनजीत पूर्व अध्यक्ष गुरनामसिंह डंग के पुत्र हैं और वे युवाओं की पसंद बताए जा रहे हैं।
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