एक साल से टेबलों पर घूम रही थी कालिका माता मंदिर के रंगरोगन के भुगतान की फाइल, कलेक्टर कटेसरिया को पता चला तो एक दिन में हुआ निराकरण

रतलाम के श्री कालिका माता मंदिर के रंगरोगन का भुगतान 10 माह से लंबित था। दो कलेक्टर बदलने के बाद मामला कलेक्टर अजय कटेसरिया के संज्ञान में आया तो एक दिन में निराकरण कर भुगतान के निर्देश दिए गए।

एक साल से टेबलों पर घूम रही थी कालिका माता मंदिर के रंगरोगन के भुगतान की फाइल, कलेक्टर कटेसरिया को पता चला तो एक दिन में हुआ निराकरण
एक साल से अटकी श्री कालिकामाता मंदिर के रंगरोगन की फाइल कलेक्टर अजय कटेसरिया ने पल भर में की स्वीकृत।

दो कलेक्टर बदले, टीप पर टीप लगती रही लेकिन नहीं हो सका भुगतान

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम शहर के प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्र श्री कालिका माता मंदिर में कराए गए रंगरोगन का भुगतान लगभग एक साल से अटका हुआ था। जिस फाइल को दो कलेक्टरों के कार्यकाल में भी मंजूरी नहीं मिल सकी, उसके लंबित होने की जानकारी जैसे ही वर्तमान कलेक्टर अजय कटेसरिया को मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए मामले का निराकरण कर दिया। कलेक्टर ने एक दिवस के भीतर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए तहसीलदार रतलाम शहर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

श्री कालिका माता मंदिर में रंगरोगन की स्वीकृति तत्कालीन कलेक्टर राजेश बाथम के कार्यकाल में दी गई थी। इसके बाद उनका स्थानांतरण हुआ और जिले की कमान कलेक्टर मिशा सिंह ने संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान भी यह फाइल लंबित रही और बाद में उनका भी स्थानांतरण हो गया। इस पूरे दौरान रंगरोगन के भुगतान से संबंधित फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रही। उस पर टीप लगती रही, प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, लेकिन अंतिम स्वीकृति नहीं हो सकी।

करीब एक साल तक भुगतान के लिए फाइल के लंबित रहने का मामला कलेक्टर अजय कटेसरिया के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसे और आगे लंबित रखने के बजाय तत्काल कार्रवाई की। कलेक्टर के निर्देश पर मामले का निराकरण करते हुए भुगतान के लिए तहसीलदार रतलाम शहर को आदेशित किया गया है।

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लंबित फाइलों पर कटेसरिया का फोकस

इस मामले में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट हिदायत दी है कि अनावश्यक रूप से कोई भी फाइल लंबित नहीं रखी जाए। किसी प्रकरण में यदि कोई कमी या आपत्ति है तो उसे समयबद्ध तरीके से दूर कराते हुए फाइल का निराकरण किया जाए, ताकि केवल टेबलों के बीच फाइल घूमती न रहे।

उल्लेखनीय है कि रतलाम कलेक्टर का पदभार संभालने के बाद कटेसरिया ने प्रशासनिक कामकाज में e-Office व्यवस्था लागू करने को प्राथमिकता दी है। इसके जरिए फाइलों की आवाजाही और उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कालिका माता मंदिर के भुगतान की लंबित फाइल का तत्काल निराकरण इसी व्यवस्था और लंबित प्रकरणों पर प्रशासनिक निगरानी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आस्था का बड़ा केंद्र है कालिका माता मंदिर

श्री कालिका माता मंदिर रतलाम का प्राचीन धार्मिक स्थल है और शहर के प्रमुख आस्था केंद्रों में इसकी पहचान है। यहां वर्ष में दोनों नवरात्रि के दौरान गरबा सहित धार्मिक आयोजन होते हैं। शारदीय नवरात्रि में भव्य मेला भी लगता है। सामान्य दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यही कारण है कि मंदिर परिसर से जुड़े विकास और व्यवस्थाओं का सीधा संबंध बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं से है।

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महाकाल लोक की तर्ज पर प्रस्तावित है 'श्री कालिका माता लोक'

रतलाम के श्री कालिका माता मंदिर को महाकाल लोक की तर्ज पर 'श्री कालिका माता लोक' के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव भी है। ऐसे में मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर होने वाले कामों का समय पर पूरा होना महत्वपूर्ण हो जाता है। रंगरोगन जैसे कार्य का महज 1 लाख 20 हजार रुपए भुगतान ही यदि महीनों तक लंबित रहे तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली और फाइल निस्तारण की गति पर सवाल खड़े करता है।