समस्या एक थी, समाधान दो ! पहले बारिश में टपकती थीं स्कूल की छतें, अब पानी भी सहेजेंगी; CEO वैशाली जैन के प्रयास से रतलाम के 301 स्कूलों में बदली तस्वीर

रतलाम में वैशाली जैन के विशेष प्रयास से 301 प्राथमिक शालाओं में छत मरम्मत और रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का काम हुआ। बच्चों की सुविधा के साथ बारिश का पानी भी सहेजा जाएगा।

समस्या एक थी, समाधान दो ! पहले बारिश में टपकती थीं स्कूल की छतें, अब पानी भी सहेजेंगी; CEO वैशाली जैन के प्रयास से रतलाम के 301 स्कूलों में बदली तस्वीर
जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन की संवेदनशीलता और पहल पर रतलाम जिले के 301 विद्यालयों की छतें तो सुधरी ही, अब वहां वे पानी भी सहेज सकेंगी।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । किसी स्कूल की छत सिर्फ बच्चों को बारिश से बचाने के लिए नहीं होती, बल्कि वही छत बारिश के पानी को सहेजने का जरिया भी बन सकती है। रतलाम जिले में प्राथमिक शालाओं को लेकर किए गए एक महत्वपूर्ण प्रयास ने इसी सोच को जमीन पर उतारा है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) वैशाली जैन के विशेष प्रयासों से जिले के 301 प्राथमिक स्कूलों में छतों की मरम्मत के साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं तैयार की गई हैं।

इस पहल का असर दो स्तर पर दिखाई दे रहा है। पहले जहां बारिश के दिनों में जर्जर या टपकती छतों के कारण कक्षाओं में पानी आने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी होती थी, वहीं अब इन स्कूलों में सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सुधार हुआ है। दूसरी ओर, स्कूल की छत पर गिरने वाला बारिश का पानी अब सीधे बहकर बर्बाद होने के बजाय उसे संरक्षित करने की व्यवस्था की गई है। सबसे अधिक 91 प्राथमिक स्कूल सैलाना जनपद के हैं, जबकि आलोट की 76, जावरा के 53, पिपलौदा के 43 और बाजना के 38 शालाओं में कार्य कराया गया है।

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स्कूल भवनों की छतों की मरम्मत के साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को जोड़ना इस पहल को खास बनाता है। छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइप के जरिए हार्वेस्टिंग संरचना तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बारिश के पानी को सहेजकर उसे भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जा सकेगा। यानी जिस छत को पहले केवल बारिश से बचाव के लिए दुरुस्त किया जा रहा था, उसी छत को अब जल संरक्षण की व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।

वातावरण हुआ सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक

बारिश के दौरान छतों से पानी टपकने की समस्या का सीधा असर कक्षाओं और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता था। छत मरम्मत के बाद इस समस्या से राहत मिलने से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण तैयार हुआ है। यह बदलाव खास तौर पर उन स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां बारिश के मौसम में भवन की स्थिति बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा बनती थी।

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आज की सुविधा, कल के लिए जल संरक्षण

जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन के विशेष प्रयासों से जिले की प्राथमिक स्कूलों में कराया गया यह काम इस बात का उदाहरण है कि स्कूलों की बुनियादी जरूरतों को पर्यावरण और जल संरक्षण से जोड़कर एक साथ कई स्तरों पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल वर्तमान समस्या के समाधान तक सीमित नहीं है। छतों की मरम्मत से स्कूल भवनों को मजबूती मिली है और रूफ वाटर हार्वेस्टिंग से आने वाले वर्षों में भी बारिश के पानी को संरक्षित करने की व्यवस्था कायम रहेगी। बारिश का पानी नालियों में बहने के बजाय जमीन में उतरेगा, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा। इस तरह प्राथमिक स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि जल संरक्षण का उदाहरण बनने वाली परिसंपत्तियों के रूप में भी विकसित हो रही हैं।

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5 जनपदों में 301 स्कूलों तक पहुंचा काम

जनपद

प्राथमिक स्कूल

आलोट

76

बाजना

38

जावरा

53

पिपलौदा

43

सैलाना

91

कुल

301