रचनात्मक सक्रियता : सुनें सुनाएं ने तीसरे वर्ष में किया प्रवेश, सिहरन दौड़ी तो किसी की पलकें हुईं नम, 93 वर्षीय दिवे और 85 वर्षीय पोरवाल ने भी पढ़ी रचनाएं, देखें वीडियो...

रचनात्मक सक्रियता की निरंतरता बनाए रखने के लिए शुरू हुए सुनें सुनाएं ने तीसरे साल में प्रवेश कर लिया। इस मौके पर रचनाधर्मियों ने अपनी प्रिय रचनाएं सुनाईं।

Oct 7, 2024 - 10:50
 0
रचनात्मक सक्रियता : सुनें सुनाएं ने तीसरे वर्ष में किया प्रवेश, सिहरन दौड़ी तो किसी की पलकें हुईं नम, 93 वर्षीय दिवे और 85 वर्षीय पोरवाल ने भी पढ़ी रचनाएं, देखें वीडियो...
सुनें सुनाएं ने तीसरे साल में किया प्रवेश।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । साहित्य, संस्कृति और लोककलाओं के प्रति रतलाम शहर का रुझान प्रारंभ से ही रहा है। अलग-अलग विधाओं में प्रयास कर रहे सभी लोगों को रचनात्मकता से जोड़ना और अपने शहर की रचनात्मक सक्रियता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसमें शहर के सुधिजन का सहयोग मिल रहा है, यही 'सुनें सुनाएं' की ताक़त है और सफलता भी। उक्त विचार 'सुनें सुनाएं' के 25वें सोपान में उभर कर सामने आए। इस दौरान रचनाएं पढ़ी गईं तो किसी के जिस्म में सिहरन दौड़ गई तो किसी की पलकें नम हो गईं।

दो वर्षों तक निरंतर प्रतिमाह के प्रथम रविवार को आयोजित होने वाले इस रचनात्मक आयोजन ने शहर के सुधिजनों के स्नेह के कारण अपने 24 सोपान पूर्ण कर लिए हैं। जी. डी. अंकलेसरिया रोटरी हाल पर आयोजित तीसरे वर्ष के पहले आयोजन में दस रचनाप्रेमियों ने अपनी प्रिय रचना का पाठ किया। 85 वर्षीय मणिलाल पोरवाल ने वीरेन्द्र मिश्र की रचना 'लगा आवाज़ लगा' का पाठ कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

इसके बाद डॉ. विजया कुशवाह द्वारा डॉ. नीरज जैन की रचना 'फिर वही सर्द हवा आई है', दुष्यन्त कुमार व्यास द्वारा रामकुमार चतुर्वेदी "चंचल" की रचना 'मुझे सपने दिखाओ का पाठ किया गया। 93 वर्षीय श्रीराम दिवे ने स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी की रचना 'साथी घर जा कर मत कहना' का पाठ किया तो बृजेश कुमार गौड़ ने रामधारी सिंह दिनकर की रचना 'कृष्ण की चेतावनी' का। मीनाक्षी मलिक द्वारा आशीष दशोत्तर की रचना 'दुनिया से किनारा कर लिया मैंने', फोटो जर्नलिस्ट लगन शर्मा द्वारा अज्ञात रचनाकार की रचना 'ख़्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की' का पाठ और पंडित मुकेश आचार्य द्वारा कैलाश वशिष्ठ की रचना 'बेटी के सवाल पिता से' का पाठ किया गया।

इनकी उपस्थिति रही

आयोजन को अपनी उपस्थिति से प्रो. रतन चौहान, गुस्ताद अंकलेसरिया, डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित, यूसुफ़ जावेदी, ओमप्रकाश मिश्र, इंदु सिन्हा, कैलाश वशिष्ठ, जगदीश सोनी, महेंद्र पोरवाल, अशोक कुमार शर्मा, नरेंद्र त्रिवेदी, आई. एल. पुरोहित, प्रवीण कुमार कुशवाह, रीता दीक्षित, शरद माजू, अमित श्रीवास्तव, ज़मीर फारुकी, गजेंद्र सिंह चौहान, राकेश पोरवाल, नीरज कुमार शुक्ला, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, नरेंद्र सिंह डोडिया, बृजेश कुमार गौड़, विनोद झालानी, कीर्ति कुमार शर्मा, गोविंद काकानी, जीएस खींची, संजय परसाई 'सरल', सुनील व्यास, जसवीर शर्मा, कमलेश पाटीदार, विकास सेवाल, रजनी व्यास, नईम सुल्तान ख़ान, श्यामसुंदर भाटी, विष्णु बैरागी, आशीष दशोत्तर सहित सुधिजन मौजूद थे।

रचनाएं सुननें के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें। ये सभी प्रस्तुतियां विष्णु बैरागी के यू-ट्यूब चैनल 'बैरागी की बातें' पर उपलब्ध हैं। आप इस चैनल को लाइक करें, सब्सक्राइब करें और रचनात्मक सक्रियता बनाए रखने के लिए इसे औरों को साझा भी करें।

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।