महंगाई डायन सब खाय जात ! रतलाम में दूध महंगा, 16 मई से 62 रुपए लीटर मिलेगा, पेट्रोल-डीजल के बाद अब दूध ने बिगाड़ा घर का हिसाब
रतलाम में 16 मई 2026 से खुले दूध के दाम 60 से बढ़ाकर 62 रुपए प्रति लीटर कर दिए गए हैं। पेट्रोल-डीजल और गैस के बाद अब दूध ने भी आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।
सुबह की चाय से लेकर बच्चों के गिलास तक बढ़ेगा खर्च
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और आयोजनों का जायका फीका किया, उसके बाद पेट्रोल-डीजल और सीएनजी ने हिसाब-किताब गड़बड़ा दिया। अब रतलाम में दूध के दाम भी बढ़ गए हैं। यहां 16 मई से 62 रुपए लीटर खुला दूध मिलेगा। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के गिलास तक खर्च बढ़ने से लोग कह रहे हैं, कि- ‘महंगाई डायन सबकुछ खाय जात।’
महंगाई अब धीरे-धीरे रसोई की हर जरूरी चीज को निगलती जा रही है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों से पहले ही परेशान लोगों को अब दूध ने भी बड़ा झटका दे दिया है। रतलाम में अभी तक खुला दूध 60 रुपए मिल रहा था लेकिन अब ग्राहकों को 16 मई से 62 रुपए प्रति लीटर दाम चुकाने पड़ेंगे। यानी अब हर सुबह की चाय का स्वाद भी किरकिरा होगा और बच्चों का दूध भी। गरमी के सीजन में राहत देने वाली छांछ, दही और मिठाई तक सब कुछ थोड़ा और महंगा पड़ने वाला है। घरों का बजट, जो पहले ही लड़खड़ा रहा था, अब दूध की कीमत बढ़ने से और डगमगाएगा।
पैक्ड दूध के बाद खुला दूध भी पहुंचा महंगाई की कतार में
कुछ दिन पहले ही सांची, अमूल और मदर डेयरी ने अपने पैक्ड दूध के दाम प्रति लीटर 2 रुपए बढ़ाए थे। इसके बाद से ही रतलाम में खुले दूध बेचने वाले उत्पादकों और विक्रेताओं के बीच रेट बढ़ाने को लेकर चर्चा चल रही थी।
करीब 15 दिनों तक मंथन चला। प्रशासन ने भी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की बैठक बुलाई, लेकिन उस समय कोई फैसला नहीं हुआ। बाद में डेयरी कंपनियों के बढ़े रेट का असर स्थानीय बाजार पर भी दिखा और आखिरकार खुले दूध के दाम बढ़ाने पर सहमति बन गई।
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प्रशासन की मौजूदगी में तय हुए नए रेट
पशुपालन विभाग के उप संचालक नवीन शुक्ला के असार आम उपभोक्ताओं और दूध उत्पादकों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए बैठक आयोजित की गई थी। एसडीएम शहर आर्चीहरित, दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की मौजूदगी में आपसी सहमति से खुले दूध की कीमत 62 रुपए प्रति लीटर तय की गई।
दूध उत्पादकों का तर्क- पशु पालें या घाटा सहें?
दूध उत्पादकों का कहना है कि पशुपालन अब पहले जैसा सस्ता काम नहीं रह गया है। गर्मी के मौसम में हरा चारा लगभग गायब है, जबकि खली, कपास्या और अन्य पशु आहार के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उत्पादकों का कहना है कि बढ़ती लागत के बीच पुराने दामों पर दूध बेचना मुश्किल हो गया था।
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ये दे रहे तर्क
- पशु आहार महंगा हो चुका है
- खली और कपास्या के रेट बढ़ गए हैं
- गर्मी में हरा चारा नहीं मिल रहा
- डीजल-पेट्रोल महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ गया
- दूसरे शहरों में खुले दूध के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं
ज्यादा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जहां रोजाना 2 से 3 लीटर दूध की खपत होती है। महीनेभर में यह बढ़ोतरी सीधे जेब पर असर डालेगी। पहले से बढ़े हुए बिजली बिल, महंगे फल-सब्जियां, ईंधन और गैस के बीच अब दूध भी महंगाई की लिस्ट में शामिल हो गया है।
इतना पड़ेगा असर
दूध के दाम में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी भले छोटी दिखे, लेकिन महीनेभर का हिसाब जोड़ें तो असर साफ नजर आता है। यदि कोई परिवार रोज 1 लीटर दूध लेता है, तो उसे अब हर दिन 2 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे। यानी महीनेभर में करीब 60 रुपए ज्यादा खर्च होंगे। वहीं रोज 2 लीटर दूध लेने वाले परिवारों का मासिक खर्च सीधे 120 रुपए तक बढ़ जाएगा। जिन घरों में बच्चों, बुजुर्गों या चाय-दूध की खपत ज्यादा है, वहां यह बोझ और बढ़ सकता है।
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