नेत्रदान-देहदान जागरूकता कार्यशाला : देहदान से बच सकते हैं लाखों पेड़, मेडिकल शिक्षा को भी मिलेगा अमूल्य आधार- गोविंद काकानी

सोनकच्छ में गोविंद काकानी ने देहदान को मेडिकल शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने नेत्रदान की भ्रांतियां दूर कीं। विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने नेत्र प्रत्यारोपण योजना का आश्वासन दिया।

नेत्रदान-देहदान जागरूकता कार्यशाला : देहदान से बच सकते हैं लाखों पेड़, मेडिकल शिक्षा को भी मिलेगा अमूल्य आधार- गोविंद काकानी
सोनकक्ष में आयोजित नेत्रदान, देहदान जागरूकता कार्यशाला में रतलाम विकास प्राधिकरण अध्यक्ष गोविंद काकानी ने बताया देहदान का महत्व।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम / सोनकक्ष । मृत्यु के बाद शरीर को अग्नि के हवाले करने के बजाय यदि उसे चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित किया जाए तो इससे मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक ज्ञान मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। देहदान से बड़ी मात्रा में लकड़ी के उपयोग को कम कर पेड़ों को बचाने में मदद मिल सकती है।

यह विचार रतलाम विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी गोविंद काकानी ने सोनकच्छ में आयोजित नेत्रदान-देहदान जागरूकता कार्यशाला में व्यक्त किए। वैश्य महासम्मेलन एवं रोटरी क्लब सोनकच्छ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में काकानी ने देहदान की आवश्यकता, मेडिकल शिक्षा में इसके उपयोग और इससे जुड़े पर्यावरणीय पक्ष को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए मानव शरीर की वास्तविक संरचना का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है। देहदान के माध्यम से चिकित्सा विद्यार्थियों को शरीर के विभिन्न अंगों और उनकी संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है।

देहदान मानव सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी है’

गोविंद काकानी ने कहा कि पेड़ हमें जीवनदायी ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में दाह संस्कार में बड़ी मात्रा में लकड़ी के इस्तेमाल के विकल्प के रूप में देहदान को भी सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक ओर दान की गई देह मेडिकल शिक्षा के काम आती है, वहीं दूसरी ओर अंतिम संस्कार में लकड़ी की आवश्यकता कम होने से पेड़ों के संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में ऑक्सीजन की कमी ने पूरी मानवता को ऑक्सीजन के महत्व का एहसास कराया। इसलिए पर्यावरण और जीवनदायी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए समाज को अपने स्तर पर भी गंभीर प्रयास करने चाहिए।

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मेडिकल कॉलेज में देहदान के बाद क्या होता है?

काकानी ने देहदान के बाद शरीर के उपयोग और आगे की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्राप्त देह का उपयोग विद्यार्थियों के मानव शरीर की संरचना संबंधी अध्ययन में किया जाता है। अध्ययन पूरा होने के बाद हड्डियों को धोकर उनके सेट तैयार किए जाते हैं, जिन्हें आगे भी विद्यार्थियों के अध्ययन में उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि शेष अवशेषों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इंसीनरेटर में निस्तारित किया जाता है। देहदान के बाद परिवार को अस्थि विसर्जन के लिए नाखून एवं बाल दिए जाते हैं। इसके बाद देह को निर्धारित रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा जाता है।

नेत्रदान से अगले जन्म में अंधे होने की बात सिर्फ भ्रांति’

काकानी ने नेत्रदान से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों पर भी लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों में यह धारणा है कि नेत्रदान करने से अगले जन्म में व्यक्ति अंधा पैदा होगा। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देहदान करने से ऐसी कोई बात होती है तो फिर देहदान करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में बिना शरीर के पैदा होना चाहिए। उन्होंने लोगों को ऐसी भ्रांतियों से बाहर निकलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और नेत्रदान के लिए आगे आने का संदेश दिया।

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विधायक ने पूरे समय सुनी कार्यशाला, नेत्र प्रत्यारोपण योजना का भरोसा

मुख्य अतिथि विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने लगभग दो घंटे चले कार्यक्रम में पूरे समय उपस्थित रहकर वक्ताओं के विचार सुने। उन्होंने सोनकच्छ क्षेत्र में नेत्र प्रत्यारोपण के लिए योजना बनाने का आश्वासन दिया। देहदान जागरूकता अभियान में भी उन्होंने पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने देहदान करने वाले परिवारों को शासन की ओर से मिलने वाले गार्ड ऑफ ऑनर एवं प्रशस्ति पत्र दिलाने में सहयोग करने की बात कही।

डॉ. तेजस मेहता ने बताई नेत्रदान की प्रक्रिया

कार्यशाला में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस मेहता ने नेत्रदान से संबंधित चिकित्सकीय जानकारी दी। उन्होंने नेत्रदान की प्रक्रिया और उससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया। एमके इंटरनेशनल इंदौर की डायरेक्टर उमा झवर ने प्रोजेक्टर के माध्यम से कॉर्निया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया का उपयोग किस प्रकार जरूरतमंद लोगों के लिए किया जाता है। नगर पंचायत अध्यक्ष श्रुति बघेल ने अपने अनुभव और संस्मरण साझा करते हुए ऐसी कार्यशालाओं को समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए उपयोगी बताया।

इसलिए हुआ कार्यशाला का आयोजन

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजेश सोनकर, श्रुति बघेल, गोविंद काकानी, उमा झवर, डॉ. तेजस मेहता एवं सत्यनारायण लाठी ने दीप प्रज्वलित कर और माता रानी के चित्र पर माल्यार्पण कर की। स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम प्रभारी सत्यनारायण लाठी ने कहा कि नेत्रदान, अंगदान और देहदान के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे भविष्य में सोनकच्छ क्षेत्र इन सेवा प्रकल्पों में सराहनीय योगदान देगा।

कार्यशाला में ही लिया देहदान का संकल्प

समापन पर राजेंद्र कुमार पिता सूरजमल जाजू ने देहदान का फॉर्म भरकर विधायक डॉ. राजेश सोनकर के माध्यम से गोविंद काकानी को सौंपा। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान लिया गया यह संकल्प देहदान अभियान के उद्देश्य को प्रत्यक्ष रूप से मजबूत करने वाला रहा। विभिन्न समाजों, संगठनों एवं संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही। आयोजन में हुकुमचंद अग्रवाल, सुरेशचंद्र मुंदड़ा, रोटेरियन महेशचंद्र राठौर, दिनेश राठौर, संजय सेठी, जीवन सिंह गुर्जर सहित अन्य कार्यकर्ताओं की भूमिका रही।