रेल सुरक्षा को मिला नया आयाम ! रतलाम के 68 लोकोमोटिव में ‘कवच’, 400 मीटर ट्रायल ट्रैक पर सुरक्षा क्षमता का हुआ परीक्षण
रतलाम लोकोमोटिव केयर सेंटर में 68 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है। 400 मीटर विशेष ट्रायल ट्रैक पर लाल सिग्नल, गति प्रतिबंध और स्वचालित ब्रेकिंग जैसी सुरक्षा क्षमताओं का परीक्षण किया जा रहा है।
लोकोमोटिव केयर सेंटर में तैयार किया गया विशेष ट्रायल ट्रैक; लाल सिग्नल, गति प्रतिबंध और अन्य परिस्थितियों में स्वचालित ब्रेकिंग की जांच
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । भारतीय रेल द्वारा यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में कवच प्रणाली के कार्यान्वयन एवं परीक्षण से संबंधित कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मंडल के लोकोमोटिव केयर सेंटर में 68 लोकोमोटिव में कवच लगाया गया है। इसका 400 मीटर विशेष ट्रैक पर सुरक्षा क्षमता का सफल परीक्षण भी किया गया।
रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कवच प्रणाली ट्रेन की गति, स्थिति एवं सिग्नल की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखती है तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग की कार्रवाई कर ट्रेन को नियंत्रित करने में सहायता करती है। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है, जब लोको पायलट द्वारा निर्धारित समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं हो पाती है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के लोकोमोटिव केयर यूनिट रतलाम में लोकोमोटिव में कवच सिस्टम लगाने के साथ ही उसके टेस्टिंग एवं ट्रायल के लिए निर्धारित यूनिट का निर्माण किया गया है।
400 मीटर के विशेष ट्रायल ट्रैक पर कवच की सुरक्षा क्षमताओं की जांच
लोकोमोटिव केयर सेंटर रतलाम में वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (डीजल) मनोज छाबड़ा के मार्गदर्शन में कवच से सुसज्जित लोकोमोटिव की कार्यप्रणाली की जांच एवं प्रदर्शन के लिए लगभग 400 मीटर लंबा विशेष ट्रायल ट्रैक तैयार किया गया है। इस ट्रैक पर वास्तविक रेल परिचालन जैसी परिस्थितियां तैयार करने के लिए होम सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग गेट, स्थायी गति प्रतिबंध से संबंधित संकेतक तथा अन्य आवश्यक सिग्नलिंग व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं।
इस ट्रायल ट्रैक पर कवच से लैस लोकोमोटिव को विभिन्न सुरक्षा परिस्थितियों में चलाकर प्रणाली की कार्यप्रणाली की जांच की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि होम सिग्नल लाल है और लोको पायलट समय पर ट्रेन को रोक नहीं पाता है, तो कवच प्रणाली निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार स्वचालित ब्रेकिंग की कार्रवाई कर ट्रेन को रोकने में सहायता करती है। इसी प्रकार खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति उत्पन्न होने पर भी कवच प्रणाली ट्रेन को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
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इस तरह काम करता है सिस्टम
कवच प्रणाली GPS, लोकोमोटिव में लगे उपकरणों, सेंसर तथा रेडियो संचार के माध्यम से ट्रेन की स्थिति एवं गति तथा सिग्नल संबंधी जानकारी की निगरानी करती है। यह ओवरस्पीडिंग को नियंत्रित करने, निर्धारित गति प्रतिबंधों के पालन में सहायता करने तथा लोको पायलट को सिग्नल संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में भी सक्षम है। इस प्रकार 400 मीटर के विशेष ट्रायल ट्रैक RFID टैग, स्टेशन यूनिट भी लगाया गया है ताकि वास्तविक परिचालन जैसी परिस्थितियां तैयार कर कवच की विभिन्न सुरक्षा क्षमताओं का परीक्षण एवं प्रदर्शन किया जाता है।
68 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित
लोकोमोटिव केयर सेंटर रतलाम में लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना एवं परीक्षण का कार्य निरंतर जारी है। अब तक 68 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली का सफलतापूर्वक इंस्टॉलेशन किया जा चुका है। कुल 96 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित की जानी है। इस प्रकार लोकोमोटिव में कवच की स्थापना का कार्य चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।
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सभी रेलखंडों के लिए स्वीकृत है कार्य
रतलाम मंडल के लगभग सभी रेलखंडों के लिए कवच प्रणाली से संबंधित कार्य स्वीकृत हैं। विभिन्न रेलखंडों में कार्य की स्थिति अलग-अलग है। कुछ खंडों में कार्य पूर्ण हो चुका है, कुछ में कार्य प्रगति पर है तथा कुछ खंडों में टेंडर प्रक्रिया जारी है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल द्वारा यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेलखंडों पर कवच के विस्तार, लोकोमोटिव में इसकी स्थापना तथा परीक्षण संबंधी कार्यों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
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