कार्रवाई हुई - सवाल बाकी ! SP के निर्देश के बाद TI ने हटवाया मीसा बंदी के प्लॉट से कब्जा, पुलिस ने निजी जमीन मुक्त करा दी, प्रशासन सरकारी नहीं करा पा रहा !
रतलाम में पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के धरने के बाद एसपी अमित कुमार के निर्देश पर पुलिस ने मीसाबंदी के प्लॉट पर किया गया धरना हटा दिया है। इस कार्रवाई ने कई सवाल भी खड़े किए हैं, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...
- पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के धरने के कुछ घंटों बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मौके पर बना पंचनामा
- मीसाबंदी बसंत पुरोहित के प्लॉट से हटवाए गए वाहन, पुलिस की मौजूदगी में कब्जा दिलाने की कार्रवाई पूरी
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मीसाबंदी के प्लॉट पर कथित अवैध कब्जे को लेकर बुधवार को पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी द्वारा एसपी ऑफिस के बाहर दिए गए धरने का असर कुछ ही घंटों में दिखाई दे गया। एसपी अमित कुमार के सख्त निर्देशों के बाद थाना डीडी नगर प्रभारी अनुराग यादव ने राजस्व विभाग और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और विवादित प्लॉट पर खड़े वाहन हटवाकर शिकायतकर्ता को कब्जा दिलाने की कार्रवाई की।
बुधवार सुबह तक जिस मामले में कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे, उसी मामले में दोपहर बाद पुलिस का रवैया पूरी तरह बदला नजर आया। पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी द्वारा एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठने और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई।
एसपी अमित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी अनुराग यादव को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद थाना प्रभारी के साथ डीडी नगर पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी भी मौजूद रहे। पुलिस द्वारा आरोपी कमलेश टांक और राजेश टांक को कॉल किया गया। आरोपी ने मोबाइल पर ही मीसाबंदी बसंत पुरोहित के प्लॉट पर से अपने वाहन और कब्जा हटाने की सहमति दी। इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन ने प्लॉट मुक्त करवा कर मीसाबंदी पुरोहित के परिजन को कब्जा दिलाया गया।
पंचनामे में दर्ज हुई पूरी कार्रवाई
मौके पर पुलिस ने पंचनामा भी बनाया जिसमें पूरी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। पंचनामे में पंचों द्वारा लिखा गया है कि वे सैफी नगर के निवासी हैं और वे इस बात की तस्दीक करते हैं कि पुलिस टीम रतलाम के डीडी नगर क्षेत्र स्थित प्लॉट क्रमांक 237 और 238 पर पहुंची। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से बताया गया कि उक्त प्लॉटों पर लंबे समय से अवैध रूप से वाहन खड़े किए जा रहे थे।
ये भी पढ़ें
पंचनामे में यह भी उल्लेख किया गया
- मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया गया
- प्लॉट पर खड़े वाहन हटवाए गए
- शिकायतकर्ता पक्ष को कब्जा दिलाने की कार्रवाई की गई
- पूरी प्रक्रिया पंचों और पुलिस की मौजूदगी में कराई गई
राजनीतिक गलियारों में छिड़ी चर्चा
इस घटनाक्रम के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा और छिड़ गई है। पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी द्वारा मीसाबंदी के प्लॉट से कब्जा हटवाने के लिए उग्र होने से उनके समर्थकों में हर्ष है। उनका मानना है कि कोठारी ने अपने समर्थकों के हित के लिए किसी से भी भिड़ने का जो साहस है, वह उन्हें जननेता बनाना हैं। वहीं उनके विरोधी खेमे में चर्चा है कि कोठारी द्वारा उठाया गया कदम सिर्फ पार्टी और राजनीति में अपनी घटती साख को बचाने का एक तरीका है। वहीं एक तीसरा पक्ष भी है जिसका कहना है कि अपने बचपन के मित्र की जमीन से कब्जा हटवाने के लिए तो पूर्व गृह मंत्री कोठारी चले गए लेकिन आमजन की संपत्तियों पर यदि कोई कब्जा कर ले तो उसे छुड़वाने कौन आएगा ?
नगर निगम की निष्क्रियता भी समस्या की जड़
मीसाबंदी के प्लॉट पर कथित अवैध कब्जे को लेकर हुई शिकायत में लेटलतीफी से जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के साथ ही नगर निगम प्रशासन भी संदेह के घेरे में है। नगर निगम एक्ट के अनुसार कोई भी प्लॉट तीन साल से ज्यादा खाली नहीं रहना चाहिए। अगर वह खाली रहता है और निर्माण नहीं होता है तो उस पर ऐसे ही कब्जे होने की आशंका बनी रहती है। अगर नगर निगम ऐसे प्लॉट पर कार्रवाई करना शुरू करे तो इस तरह के कब्जे की समस्या से निजात मिल सकती है।
जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल अब भी बरकरार
अवैध कब्जे का मामला सिर्फ इकलौता नहीं, ऐसे अनेक मामले हैं जिन्हें मुक्त करवाने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां तक तो फिर भी गनीमत है, हद तो तब हो जाती है जब कोई सरकारी जमीन पर ही कब्जा कर लेता है और वह साबित होने के बाद भी प्रशासन उसे मुक्त नहीं करवा पाता है। ऐसे ही एक मामले में विगत 11 माह पूर्व रतलाम तहसील न्यायालय से एक सरकारी नाले पर एक निजी स्कूल द्वारा किया गया अतिक्रमण हटाने का आदेश हुआ था जो अब तक नहीं हटाया जा सका है। इस मामले में संबंधित क्षेत्र की पटवारी से लेकर जिले की मुखिया तक किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
ये भी पढ़ें









