यहां सब बेबस ! रतलाम में स्कूल-कॉलेज दौड़ा रहे खामियों और लापरवाहियों की बसें, ‘सृजन कॉलेज’ और ‘श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी’ पर RTO ने ठोका 37 हजार रुपए जुर्माना
रतलाम में परिवहन विभाग की अनदेखी के चलते स्कूल और कॉलेज प्रबंधन लापरवाहियों और खामियों से लदी बसें दौड़ा रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में यह बात सामने आई है। हालांकि, अभी भी 8 साल पूर्व की तरह व्यापक जांच नहीं हो रही है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिला परिवहन विभाग की निष्क्रियता के चलते लापरवाहियों और खामियों से लदी हुई बसें जिलेभर में दौड़ रही हैं। कलेक्टर मिशा सिंह के निर्देश पर जागे जिला परिवहन विभाग द्वारा चैकिंग की गई तो श्री गुरु तेग बहादुर एकेडमी और सृजन कॉलेज की बसों की खामियां उजागर भी हो गईं। किसी में एक्सटिंगविशर (अग्निशमन यंत्र) खराब मिला तो किसी में इमरजेंसी गेट ही नट-बोल्ट की मदद से स्थायी रूप से बंद मिले। विभाग द्वारा इन खामियों के लिए स्कूल और कॉलेज प्रबंधन से 37 हजार रुपए जुर्माना वसूला है।
8 साल पहले इंदौर के देहली पब्लिक स्कूल के चार बच्चों की जान एक बस में चला गई थी। इस बस में स्पीड गवर्नर लगा होने के बाद भी उसकी रफ्तार 70 किलोमीटर प्रतिघंटे से ज्यादा थी, जांच में बस में लगे स्पीड गवर्नर में छेड़छाड़ की जाना पाई गई थी। इस हादसे के बाद रतलाम में भी व्यापक स्तर पर तत्कालीन जिला परिवहन अधिकारी द्वारा 66 स्कूल / कॉलेज बसों की चैकिंग की गई थी। इसमें से 40 में बड़े स्तर की खामियां पाई गईं थीं। इसके बाद दो परिवहन अधिकारी बदल गए लेकिन व्यापक स्तर पर स्कूल बसों की जांच नहीं हुई। नतीजतन, स्कूल प्रबंधन नियम-कानून और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गैर-जिम्मेदार हो गए। इसकी बानगी शनिवार को देखने को मिली। परिवहन विभाग द्वारा जिला मुख्यालय पर स्थित सृजन कॉलेज और श्री गुरु तेग बहादुर स्कूलों की जांच की गई है जिसमें कई बसों में खामियां पाई गई हैं।
एकेडमी की बसों में ये मिली खामियां
जिला परिवहन अधिकारी जगदीश बिल्लौरे ने बताया कि कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मिशा सिंह के निर्देशानुसार 7 फरवरी को जिलें में स्थित स्कूलों में संचालित होने वाली बसों की चैकिंग की गई। श्री गुरु तेग बहादुर ऐकेडमी रतलाम की बसों के बोनट खुलवाकर स्पीड गवर्नर की जांच की गई। सभी में स्पीड गवर्नर लगे पाए गए। अग्नीशमन यंत्र भी चलवाय कर देखे गए। दो बसों में अग्नीशमन यंत्र नहीं मिले जिसके लिए समझौता शुल्क (जुर्माना) 6 हजार रुपए वसूल किया गया।

इमरजेंसी खिड़क-दरवाजे मिले पैक
एकेडमी के 5 वाहनों में आपातकालीन खिड़की व दरवाजे नट-बोल्ट से कसे पाए गए। इससे आपातकालीन स्थिति में उनका प्रयोग किया जाना संभव नहीं था। इस खामी के लिए 15 हजार रुपए जुर्माना किया गया। वाहनों में सी.सी.टी.वी कैमरों को मोबाइल फोन में चलवाया जाकर देखा गया। जिन 7 बसों में कमियां पाई गईं उन्हें तत्काल सुधरवाकर 5 दिवस में भौतिक सत्यापन के लिए परिवहन कार्यालय में पेश करने के आदेश आरटीओ ने स्कूल प्रबंधन को दिए।
सृजन कॉलेज पर किया 16 हजार का जुर्माना
परिहवन विभाग द्वारा सृजन कॉलेज की बसों की भी जांच की गई। यहां 1 बस में खामियां पाई गईं। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन पर 16 हजार रुपए का जुर्माना ठोका गया है। हालांकि, विभाग ने कॉलेज की बस की खामियों का खुलासा नहीं किया है। इससे विभाग की कार्रवाई में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नियम का उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
चैकिंग के दौरान समस्त स्कूल संचालकों को निर्देशित किया गया कि वह अपने स्कूल वाहनों का संचालन शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन जैसे वाहन का वैध बीमा, परमिट, फिटनेस, पी.यू.सी., चालक का वैध लायसेंस, अग्नीशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार पेटी, स्पीड गवर्नर, सी.सी.टी.वी. कैमरे, व्ही.एल.टी.डी., पैनिक बटन एवं आपातकालीन खिड़की व दरवाजे दुरस्त रख कर ही अपने स्कूल वाहन का संचालन करें। यदि कोई भी स्कूल वाहन नियमानुसार संचालित होना नहीं पाया जाता है तो उन स्कूली वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम 1988 में उल्लेखित प्रावधानों के तहत चालानी कार्यवाही की जाएगी।
8 साल पहले मिली थी यह स्थिति
श्री गुरु तेग बहादुर स्कूल : इस स्कूल की बस के 1 ड्राइवर की नजर कमजोर मिली थी। 2 बसों में स्पीड गवर्नर नहीं थे। 1 में स्टीयरिंग की ट्राय रॉड खराब थी। इमरजेंसी गेट के पास भी सीट लगी थी जिससे आपात स्थिति में उसका उपयोग संभव नहीं था। जीपीएस तो किसी भी बस में नहीं लगा था। 2 बसों में सस्पेंशन सही नहीं थे।
देहली पब्लिक स्कूल : इस स्कूल की बस में सीसीटीवी कैमरे तो लगे मिले थे लेकिन उनके कनेक्शन नहीं होने से बंद थे। ऐसे में सवाल उठा था कि या तो फिटनेस पाने के लिए आरटीओ को भ्रमित किया गया या फिर आरटीओ ने इसे अनदेखा कर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया। जांच में स्पीड गवर्नर भी बंद मिले थे और 6 बसों के फिटनेस निरस्त हुए थे।
मॉर्निंग स्टार स्कूल : तब यहां 11 बसें थीं जिनमें से 4 में स्पीड गवर्नर निष्क्रिय पाए गए थे। 1 की कमानी का सस्पेंशन लोड कम था। 1 के पहियों में हवा ज्यादा मिली थी, 1 के ब्रेक और 1 का माइलो मीटर खराब मिला था। 11 ड्राइवरों की नजर कमजोर पाई गई थी जिनमें से 1 की आंख में तो मोतियाबिंद था और उसकी दूसरी आंख से भी कम दिखता था। उस ड्राइवर को डॉक्टर ने बस नहीं चलाने की हिदायत दी। वहीं 1 ड्राइवर में कलर ब्लाइंडनेस की समस्या पाई गई थी।
बोधि इंटरनेशनल स्कूल : यहां की 2 बसों के फिटनेस पूर्व में ही खत्म होना पाए गए थे। इससे आरटीओ द्वारा बसों पर चालानी कार्रवाई की। स्कूल प्रबंधन से 15 हजार रुपए जुर्माना किया गया था।
रतलाम पब्लिक स्कूल : इस स्कूल की सभी 19 बसें खराब मिलीं थी। अधिकतर के फिटनेस पहले ही खत्म हो गए थे। सीसीटीवी कैमरे बंद मिले थे। जीपीएस, स्पीड गवर्नर, अग्निशमन यंत्र, बीमा भी नहीं पाया गया था। यहां तक कि कुछ बसों के परमिट भी नहीं थे। कुछ का रिकॉर्ड ही नहीं मिला था कि ये कहां की पासिंग हैं और इसके परमिट आदि की क्या स्थिति है। इसके चलते सभी 19 बसों को जब्त कर लिया गया था। तत्कालीन एसपी अमित सिंह ने मामले में औद्योगिक क्षेत्र थाने को एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देश भी दिए थे।
विशेष : उक्त जांच के दौरान कई स्कूलों की बसें महिला अटेंडर के बिना ही संचालित होते पाई गईं थी जबकि यह अनिवार्य है। फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं मिले थे, जिनमें थे वे खानापूर्ति तक ही सीमित थे जिनमें डेटॉल की एक शीशी, थोड़ा कॉटन और एक-दो बैंडेज पट्टियों के अलावा कुछ भी नहीं पाया गया था।
स्कूल बसों के लिए यह है जरूरी
- महिला सहायक होना अनिवार्य है।
- क्षमता से अधिक विद्यार्थी नहीं बैठाए जा सकते।
- सीटों के बीच पर्याप्त स्थान हो ताकि बैग रख सकें।
- स्कूल बसों में गेट अलार्म वाला लॉकिंग सिस्टम होना चाहिए ताकि जो गेट खुला रहने पर बजता रहे।
- बस चलाते समय ड्राइवर मोबाइल फोन पर बात नहीं कर सकते।
- वाहनों का नियमित रूप से मेंटेनेंस होना जरूरी है। जो खराब या जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है, वे पार्ट्स समय पर बदले जाने चाहिए।
- बस की सभी खिड़कियों पर हॉरिजेंटल लोहे की ग्रिल लगी होनी चाहिए।
हर बस में स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान का नाम, लैंडलाइन व मोबाइल फोन नंबर (जो बंद न हो) अवश्य लिखे हों। - बस पर आगे और पीछे ‘स्कूल बस’ लिखा होना चाहिए। संभव हो तो दोनों ही तरफ ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ भी लिखा हो।
- स्पीड गवर्नर लगा होना जरूरी है और 40 किमी घंटे से ज्यादा स्पीड से बस नहीं चलनी चाहिए।
- 15 साल से अधिक पुरानी बस नहीं चल सकती।
- जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) हर बस में लगा होना अनिवार्य है।
- बस में मेन और इमरजेंसी गेट अनिवार्य रूप से होने चाहिए।
- बस के पीछे वाले शीशे के पीछे किसी भी प्रकार की सीढ़ी या ग्रिल आदि नहीं लगी होनी चाहिए।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स अनिवार्य रूप से होना चाहिए और उसमें जीवन रक्षक दवाइयां भी हों
- फायर एक्सटिंगिवीशर (अग्निशमन यंत्र) लगा होना चाहिए। यह उपकरण आईएसआई मार्क का होना जरूरी है।
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