जीवन दर्शन ! सुख और शक्ति का संतुलन ही सच्चा नेतृत्व है– पद्मविभूषण नारायण मूर्ति

पद्म विभूषण नारायण मूर्ति ने बताया कैसे सुख, शक्ति और करुणा मिलकर सच्चे नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग बनाते हैं। यहां जानिए- उनका ESOP, पारदर्शिता और मूल्य-आधारित नेतृत्व का अनोखा दृष्टिकोण।

Jan 5, 2026 - 12:23
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जीवन दर्शन ! सुख और शक्ति का संतुलन ही सच्चा नेतृत्व है– पद्मविभूषण नारायण मूर्ति
पद्म विभूषण एन. आर. नारायण मूर्ति का जीवन दर्शन।

विश्व के पहले सुख शक्ति धाम में इंफोसिस के संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति का विचारोत्तेजक संबोधन

पस्थित विशेष अतिथि गण, सत्य और आंतरिक शांति के साधकों, और सगुण के मार्ग पर चलने वाले सहयात्रियों, और प्रिय वल्लभ जिसके प्रेम भरे आग्रह से मैं और आप सब आज इस ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित हुए हैं जो एक पवित्र स्थान से कहीं अधिक है। यह एक आध्यात्मिक प्रयोगशाला है। रतलाम की धरा पर स्थित सुख शक्ति धाम श्री वल्लभ भंसाली के चिंतन और दृष्टि का परिणाम भी है और उसकी प्रामाणिकता का प्रमाण भी! एक ऐसी दृष्टि जो बाहरी विजय के आधुनिक जुनून को चुनौती देती है और हमारा ध्यान हमारे भीतर की शक्तिशाली परिवर्तनकारी शक्ति की ओर मोड़ती है। सुख और शक्ति, शब्द ही हमारी गहरी मानवीय आकांक्षाओं का सार हैं। लेकिन, जैसा कि यह धाम हमें सिखाता है, ये कोई खरीदी जाने वाली वस्तुएँ नहीं हैं। ये ऐसे फल हैं जिन्हें हमें अपने दैनिक जीवन में विकसित करना होता है, चाहे हमने कोई भी पेशा चुना हो। आज हम यहाँ केवल खुशी मनाने के लिए ही नहीं, बल्कि यह जानने के लिए एकत्रित हुए हैं कि सुख और शक्ति के विचार किस प्रकार आपस में जुड़कर हमारे पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में बेहतरी लाने वाली एक सक्रिय जीवन-शक्ति का निर्माण कर सकते हैं।

सुख और शक्ति शब्दों का गहरा अर्थ है। सुख का अर्थ है खुशी जो हमारे अस्तित्व का एक अनिवार्य तत्व है। शक्ति सामंजस्यपूर्ण शक्ति का प्रतीक है परिवर्तन लाने और हमारे आसपास बेहतरी और खुशी के लिए बदलाव लाने की क्षमता। अपने पेशेवर सफर में मैंने पाया है कि सच्ची खुशी शक्ति के जिम्मेदार उपयोग से उत्पन्न होती है। ऐसी शक्ति कथनी और करनी में समानता, उदारता, करुणा, निष्पक्षता, सत्य-निष्ठा और समता पर आधारित होती है। मैं अपने पेशेवर जीवन से कुछ उदाहरण लेकर यह दर्शाऊंगा कि मैंने अपने और अपने आसपास के लोगों के लिए सुख (खुशी) की शक्ति (बल) का सृजन करने का प्रयास कैसे किया।

इंफोसिस की स्थापना से पहले, मुझे कई प्रतिभाशाली व्यक्तियों के साथ काम करने और उन्हें आगे बढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैंने उन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियर और प्रशिक्षु के रूप में भर्ती किया था। मैंने उनमें से कुछ में मूल्य-आधारित नेतृत्व की क्षमता देखी। मेरे अनुभव ने मुझे सिखाया था कि हम सभी के लिए सच्ची खुशी तभी पनपती है जब हम अपनी सफलता और खुशी दूसरों के साथ साझा करते हैं, विशेषकर उन लोगों के साथ जो अभी अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं। इसी कारण मैंने इंफोसिस की स्थापना में सहायता करने के लिए छह कनिष्ठ सहयोगियों को चुना।

मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी समाज से सम्मान प्राप्त करना था। इसलिए, इसके लिए प्रेरणा शक्ति भारत की सबसे सम्मानित कंपनी बनने का हमारा सपना था। एक सम्मानित कंपनी से जुड़ने से हमारे ग्राहकों, कर्मचारियों और निवेशकों - को बहुत गर्व और खुशी मिली। इस प्रयास से कंपनी को भी बहुत लाभ हुआ।

मेरी माँ ने मुझे सिखाया कि उदारता और साझा करना मेरे आस-पास और मेरे लिए खुशी लाने की एक शक्तिशाली शक्ति है। कॉर्पोरेट जगत में अपने छह कनिष्ठ सहकर्मियों को इतनी बड़ी इक्विटी देकर, जो पहले कभी नहीं हुआ था, मैं एक ऐसा वातावरण बनाने में सफल रहा जहाँ सफलता और खुशी व्यक्तिगत के बजाय सामूहिक बन गई। इस सामूहिक खुशी की भावना को हमारे देश में किसी निगम द्वारा शुरू की गई अब तक की सबसे बड़ी कर्मचारी शेयर स्वामित्व योजना (ESOP) होने के तथ्य ने और भी मजबूत किया। इससे चपरासी से लेकर कार्यकारी उपाध्यक्ष तक सभी कर्मचारियों को लाभ हुआ। इस पहल ने लगभग 50,000 कर्मचारियों के वित्तीय भविष्य को बदल दिया और अनगिनत करोड़पति बनाए। यह पहल इस विचार पर आधारित थी कि जब हम दूसरों को सशक्त बनाते हैं, तो हम उनकी खुशी को बढ़ाते हैं और बदले में, अपनी खुशी को भी बढ़ाते हैं।

मेरे और दूसरों के लिए खुशी और संतोष का एक और स्रोत है उनके साथ हर लेन-देव में निष्पक्षता बरतना। मैंने अपने हर निर्णय में निष्पक्षता के अपने विश्वास को अमल में लाने के लिए प्रसिद्ध कहावत, "हम ईश्वर पर भरोसा करते हैं। बाकी सभी लोग केवल आंकड़ों और तथ्य पर करते होंगे" का भी पालन किया। मैंने सबसे अधिक और सबसे कम वेतन पाते वाले कर्मचारियों के बीच 30:1 का वेतन अनुपात बनाए रखकर वेतन में निष्पक्षता और समानता को अपनाया। यह हर कर्मचारी के प्रति निष्पक्षता बनाए रखने की मेरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जब आपके आस-पास के लोग सम्मानित और मूल्यवान महसूस करते हैं, तो खुशी पनपती है। इस संदर्भ में, हम खुशी को एक न्यायपूर्ण कार्यस्थल का परिणाम समझ सकते हैं - एक ऐसा क्षेत्र जहां कॉर्पोरेट शक्ति और सहानुभूति के बीच संतुलन होता है।

कंपनी के संचालन में कॉर्पोरेट नेताओं द्वारा अपनाई जाने वाली पारदर्शिता और जवाबदेही, कंपनी के हितधारकों के विश्वास और संतुष्टि को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि सुशासन खुलेपन और विश्वास को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति है, जिसके परिणामस्वरूप हितधारकों की खुशी और संतुष्टि सुनिश्चित होती है। मेरा सिद्धांत हमेशा से रहा है, "जब संदेह हो, तो खुलासा करो। "हितधारकों के साथ अपनी चुनौतियों और गलतियों को खुलकर साझा करके, हमने ईमानदारी का माहौल बनाया। इस प्रक्रिया ने हमें सिखाया कि सच्ची शक्ति ईमानदारी और जवाबदेही में निहित है। इन मूल्यों को कायम रखकर, हमने अपने हितधारकों की खुशी और विश्वास अर्जित किया।

मैंने करुणापूर्ण पूंजीवाद का अभ्यास किया है ताकि हमारे समाज को यह दिखाया जा सके कि करुणापूर्ण पूंजीवाद भारत को गरीबी से मुक्त करने का एक मूल्यवान सिद्धांत है। यह दर्शन पूंजीवाद की गतिशीलता को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ता है। यह हमें अपनी शक्ति का उपयोग व्यापक भलाई के लिए करने और व्यक्तिगत लाभ के बजाय सामूहिक हित को प्राथमिकता देने के महत्व पर बल देता है। इंफोसिस फाउंडेशन की स्थापना हमारे समाज के गरीबों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और उनके जीवन में खुशियां लाने के लिए की गई थी। 

मेरे आस-पास खुशी लाने वाली एक और महत्वपूर्ण शक्ति और मेरे नेतृत्व दर्शन का एक अहम पहलू कर्मचारियों के बीच गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा करना था। मैं अपने सहकर्मियों की उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने और उनकी कमियों को निजी तौर पर दूर करने में दृढ़ विश्वास रखता हूँ। यह तरीका आत्मसम्मान को बढ़ावा देता है। इससे एक ऐसा माहौल बनता है जहाँ व्यक्ति उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने को प्रेरित महसूस करते हैं। खुशी केवल एक अंतिम लक्ष्य नहीं है। यह सम्मान और मान्यता पर आधारित संस्कृति का परिणाम है।

नेताओं के शब्दों और कार्यों में ईमानदारी, उनकी विश्वसनीयता और विश्वास बढ़ाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने से प्राप्त होती है। इस प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत करने से नेता और अनुयायी दोनों को प्रसन्नता प्राप्त होती है। मैंने मेरे कथित मूल्यों को जीवन में उतारने का भरसक प्रयास किया। आख़िर तो, विचारों की ईमानदारी कार्यों में प्रकट होती है। सादगीपूर्ण जीवन शैली ने मुझे जीवन में वास्तव में महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया और ऐस करने से मुझे कॉर्पोरेट जगत के निचले स्तर पर कार्यरत अपने सहकर्मियों को करीब लाने में सफलता मिली। विनम्रता का अभ्यास करते हुए, हमने सभी प्राणियों के परस्पर संबंध का सम्मान किया। हमने इस गहन सत्य को रेखांकित किया कि वास्तविक सुख एक-दूसरे के प्रति हमारे सच्चे सम्मान से उत्पन्न होता है।

पने जीवन के अनुभवों पीआर दृष्टि डालते हुए, मैं आप सभी को सुख शक्ति के सिद्धांतों को अपने जीवन और पेशे में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। आइए हम अपनी सफलताओं को साझा करें और अपने आस-पास के लोगों को सशक्त बनाएं। जब हम एक-दूसरे का उत्थान करते हैं, तो हम खुशी का एक शक्तिशाली जाल बुनते हैं जो हमारे आस-पास के दायरे से कहीं आगे तक फैलता है, अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित करता है और एक करुणामय समुदाय का निर्माण करता है।

अंत में, आइए हम सब मिलकर इस मार्ग पर चलते हुए सुख शक्ति धाम की शिक्षाओं को अपनाएं। अपने आस-पास सभी के लिए सुख प्राप्त करने की दिशा में कार्य करें। ऐसा करने से, हम एक ऐसी परिवर्तनकारी शक्ति का सृजन कर सकते हैं जो न केवल हमें, बल्कि हमारे आस-पास सभी को उत्थान का अवसर प्रदान करे। अपनी सामूहिक ऊर्जा को सही दिशा में लगाते हुए, आइए याद रखें कि सच्ची शक्ति करुणा में निहित है, और सुख करुणा से ही उत्पन्न होता है।

आज मुझे अपनी यात्रा आपके साथ साझा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद।

आइए, मिलकर सुख शक्ति पर आधारित एक उज्जवल भविष्य का निर्माण करें।

धन्यवाद...

- एन. आर. नारायण मूर्ति

(नारायण मूर्ति भारत के सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपतियों और विचारशील नेतृत्वकर्ताओं में से एक हैं। वे वैश्विक आईटी कंपनी इंफोसिस लिमिटेड के सह-संस्थापक हैं। पारदर्शिता, नैतिकता, करुणापूर्ण पूंजीवाद और मूल्य-आधारित नेतृत्व उनके जीवन दर्शन के मूल स्तंभ हैं। उन्हें पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हैं। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सच्ची सफलता केवल धन नहीं, बल्कि सम्मान, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व से आती है।)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।