अभिनंदन विलक्षण प्रतिभा का ! रतलाम DRM ने किया 'रेलवे मैन' अक्षद पंडित का सम्मान, 5000 ट्रेनों के नंबर और चलने का समय है कंठस्थ

भारत में चलने वाली 5000 ट्रेनों के नाम, चलने के समय आदि कंठस्थ कर चुके रतलाम के अक्षद पंडित का रतलाम रेल मंडल प्रबंधक अश्विनी कुमार ने अपने कक्ष में बुलाकर सम्मान किया।

Feb 10, 2025 - 21:38
Feb 10, 2025 - 21:38
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अभिनंदन विलक्षण प्रतिभा का ! रतलाम DRM ने किया 'रेलवे मैन' अक्षद पंडित का सम्मान, 5000 ट्रेनों के नंबर और चलने का समय है कंठस्थ
रेलवे मैन कहलाने वाले अक्षद पंडित का सम्मान करते रतलाम डीआरएम अश्विनी कुमार, संपीप हैं अक्षद के पिता पत्रकार भुवनेश एवं माता डॉ. स्नेहा पंडित।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रेलवे मैन के नाम से देश में अपनी पहचान बनाने वाले अक्षद पंडित को रतलाम रेल मंडल प्रबन्धक अश्विनी कुमार ने सम्मानित किया। डीआरएम ने अक्षद का अभिनंदन उन्हें अपने कक्ष में बुला कर किया और उनकी प्रतिभा की प्रशंसा भी की।

संगीत की प्रोफेसर डॉ. स्नेहा पंडित एवं पत्रकार भुवनेश पंडित के पुत्र अक्षद को भारतीय रेलवे में चल रही 4000 से 5000 ट्रेनों के नम्बर, उनका आने-जाने का समय व अन्य जानकारियां कण्ठस्थ हैं। यही वजह है कि कई लोग इन्हें रेलवे का इनसाइक्लोपीडिया भी कहते हैं। अक्षद की इस प्रतिभा की जानकारी मिली तो रतलाम रेल मंडल प्रबंधक अश्विनी कुमार उससे मिलने का मन बना लाया। 

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डीआरएम कुमार ने अक्षद से से मिलने की इच्छा जाहिर की और उन्हें व उनके माता-पिता को बुलावा भेज दिया। अक्षद अपनी माता स्नेहा और पिता भुवनेश के साथ मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पहुंचे जहां डीआरएम ने अक्षद का स्वागत व सम्मान किया। उन्होंने विलक्षण प्रतिभा के धनी अक्षद  के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

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Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।