श्रीकृष्ण मंदिर की जमीन हथियाने के मामले की जांच तेज, डिप्टी कलेक्टर ने किया का निरीक्षण, प्लॉट बेचने वाले नरेंद्र कटारिया को नोटिस जारी

रतलाम के प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर पर लगे ताले और मंदिर भूमि विवाद की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार शर्मा ने मौके का निरीक्षण किया। नरेंद्र कटारिया को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा गया है।

श्रीकृष्ण मंदिर की जमीन हथियाने के मामले की जांच तेज, डिप्टी कलेक्टर ने किया का निरीक्षण, प्लॉट बेचने वाले नरेंद्र कटारिया को नोटिस जारी
श्री कृष्ण मंदिर विवाद की जांच के लिए पहुंचे डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा एवं अन्य।

1993 के यथास्थिति आदेश के बावजूद भूमि पर प्लॉट काटने का है आरोप, मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जमीनों की बंदरबांट के लिए कुख्यात रतलाम शहर के रामदेवजी की घाटी स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर से जुड़े भूमि विवाद और मंदिर पर लगे ताले के मामले में प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं और मंदिर बचाओ संघर्ष समिति द्वारा की गई शिकायतों के बाद डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार शर्मा राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचकर मंदिर परिसर सहित विवादित भूमि का निरीक्षण किया। प्रशासन ने जमीन पर प्लॉट काटने वाले नरेंद्र कटारिया को नोटिस भी जारी किया है।

जांच दल में डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार शर्मा के अलावा शहर तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, पटवारी विजय श्रोत्रिय सहित राजस्व विभाग का अमला उपस्थित रहा। प्रशासनिक टीम ने मंदिर परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंदिर पर लगे ताले, भूमि की वर्तमान स्थिति तथा विवाद से जुड़े विभिन्न बिंदुओं का मौके पर परीक्षण किया। इस दौरान मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य संदीप सोनी, डॉ. दिलीप पंड्या, नीलेश सोनी, बसंत पंड्या, जुगल पंड्या सहित क्षेत्र के रहवासी भी उपस्थित रहे और उन्होंने अधिकारियों को विवाद से जुड़े दस्तावेजों एवं तथ्यों की जानकारी दी।

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नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर मांगा जवाब

निरीक्षण के बाद डिप्टी कलेक्टर शर्मा ने तहसीलदार ठाकुर को निर्देश दिए कि संबंधित पक्ष नरेंद्र कटारिया के निवास पर तत्काल नोटिस चस्पा किया जाए तथा सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा जाए। नोटिस में प्रशासन की ओर से तीन प्रमुख बातें स्पष्ट करने को कहा गया है।

  • मंदिर पर ताला किस प्रशासनिक अथवा न्यायिक आदेश के आधार पर लगाया गया?
  • मंदिर का संचालन और व्यवस्थाएं वर्तमान में किस आधार पर की जा रही हैं?
  • विवादित भूमि से संबंधित कार्रवाई किन दस्तावेजों के आधार पर की गई?

1993 के आदेश के बावजूद काट दिए प्लॉट

मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य संदीप सोनी ने प्रशासन के समक्ष गंभीर आरोप रखते हुए कहा कि श्रीकृष्ण मंदिर कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अधीन आता है। उनके अनुसार वर्ष 1993 में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर मंदिर एवं उससे संबंधित भूमि की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से दस्तावेजों में हेराफेरी कर मंदिर की भूमि पर चार प्लॉट काटकर बेच दिए गए।

समिति का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर मंदिर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने यह दी चेतावनी

निरीक्षण के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि यदि सात दिनों के भीतर मंदिर के ताले नहीं खोले गए और भूमि विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो बगलामुखी शक्तिपीठ खाचरोद के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानंदजी महाराज के सान्निध्य में क्षेत्र के श्रद्धालु स्वयं ताला तोड़कर मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना शुरू करेंगे। समिति का कहना है कि मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और लंबे समय तक बंद रखना धार्मिक भावनाओं के विपरीत है।

एक सप्ताह पूर्व सौंपा गया था ज्ञापन

उल्लेखनीय है कि 26 मई 2026 को स्वामी कृष्णानंदजी महाराज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सनातन धर्मावलंबी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा था कि प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर वर्षों से जन-आस्था और सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी।

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ज्ञापन में दावा किया गया था

  • वर्ष 1976 तक विवादित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर के नाम दर्ज थी।
  • बाद में कथित भू-माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से भूमि का क्रय-विक्रय कर दिया गया।
  • मंदिर से जुड़ी संपत्ति को निजी हितों के लिए उपयोग में लाया गया।

एक नजर में विवाद

  • रामदेवजी की घाटी स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर का मामला।
  • मंदिर पर ताला लगाए जाने को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी।
  • मंदिर से जुड़ी भूमि के कथित विक्रय और प्लॉट काटे जाने के आरोप।
  • 1993 में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश का हवाला।
  • 1976 तक भूमि मंदिर के नाम दर्ज होने का दावा।
  • डिप्टी कलेक्टर द्वारा मौके का निरीक्षण।
  • नरेंद्र कटारिया को सात दिन में जवाब देने का नोटिस।
  • मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन की चेतावनी दी।

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