बड़ी कार्रवाई ! मनरेगा के नाम पर 771 कार्यों में सरकारी धन की हुई बंदरबांट, जिला पंचायत CEO वैशाली जैन ने चलाया डंडा तो हो गई 36 लाख की वसूली
रतलाम जिले में मनरेगा के 771 मामलों में कार्रवाई के बाद 35.83 लाख रुपये की रिकवरी हुई। CEO वैशाली जैन के निर्देशन में हुई कार्रवाई में सबसे ज्यादा 13.76 लाख रुपये की वसूली रतलाम जनपद से हुई।
सबसे ज्यादा रतलाम जनपद में हुई अनियमितता जहां 211 मामलों में साढ़े 13 लाख रुपए की हुई थी बंदरबांट
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले में गांवों में रोजगार और विकास कार्यों से जुड़ी मनरेगा योजना में चौंकाने वाली अनियमितता सामने आई है। जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन की लगातार तकनीकी मॉनीटरिंग के चलते जिले की 6 जनपदों में 771 मामले सामने आए हैं जिनमें सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इनमें से लगभग एक तिहाई मामले तो सिर्फ रतलाम जनपद के ही हैं। सीईओ की सख्ती के चलते अनिमितताएं करने वालों से 35 लाख 83 हजार 542 रुपए की वसूली हुई है जिसे एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
महती योजना मनरेगा का नाम भले ही बदलकर वीबी-जी राम-जी हो गया लेकिन सिस्टम से जुड़े लोगों की सरकारी धन के दुरुपयोग की आदत अब भी नहीं बदली है। इसकी पुष्टि जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन द्वारा की गई निगरानी और सख्ती के चलते सामने आई अनियमितताओं के आंकड़े कर रहे हैं। सरकारी धन की बंदरबांट में माहिर लोगों ने ऐसे 771 काम करवा डाले जो या तो अंजाम तक नहीं पहुंचे या फिर उनका जनहित में कोई लाभ ही नहीं हुआ। ये मामले महज 11 माह के हैं जिनमें लाखों रुपए खर्च हुए। सीईओ द्वारा कसे गए शिकंजे का असर यह हुआ है कि अब तक तकरीबन 36 लाख रुपए की रिकवरी जिम्मेदारों से हो चुकी है। यह राशि व्यवस्था में शामिल रहे जिम्मेदारों द्वारा ही जमा कराई गई है।
सबसे ज्यादा अनिमितता रतलाम जनपद का
पूरे जिले में हुई रिकवरी में सबसे बड़ा आंकड़ा रतलाम जनपद पंचायत का है। यहां 211 मामलों में 13 लाख 51 हजार 673 रुपए की राशि वसूल हुई है। इसके अलावा अन्य मदों से भी 25 हजार 166 रुपए की वसूली हुई है। इस तरह अकेले इस जनपद में ही 13 लाख 76 हजार 839 रुपए वसूले गए। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छह जनपद पंचायतों में हुई कुल 35.83 लाख रुपए की रिकवरी में रतलाम जनपद की हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई है।
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जावरा और बाजना भी पीछे नहीं
जावरा जनपद पंचायत में 113 मामलों में 4 लाख 24 हजार 520 रुपए तथा अन्य मदों में 1 लाख 61 हजार 118 रुपए सहित कुल 5 लाख 85 हजार 638 रुपए की वसूली हुई। बाजना जनपद में 96 मामलों में 4 लाख 45 हजार 566 रुपए तथा अन्य मदों में 1 लाख 1 हजार 181 रुपए सहित कुल 5 लाख 46 हजार 747 रुपए वसूल किए गए। आलोट में 141 मामलों में 4 लाख 2 हजार 247 रुपए, पिपलौदा में 109 मामलों में 3 लाख 71 हजार 271 रुपए जबकि सैलाना में 101 मामलों से 3 लाख 800 रुपए की राशि वसूल की गई।
ऐसे हुआ खुलासा और हुई रिकवरी
अनियमितताओं का पता लगाने के लिए सीईओ वैशाली जैन द्वारा पहले लंबित कार्यों की सूची बनवाई गई। इसके बाद उसके एक्सपेंडिचर का ब्यौरा जुटाया गया। इन सभी का भौतिक सत्यापन के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने जैसे ही फाइलें खंगाली और धरातल पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन किया तो एक के बाद एक अनिमितताएं उजागर होती गई। गड़बड़ी पकड़ में आते ही सीईओ ने सभी जिम्मेदारों को आड़े हाथ लिया और दो टूक शब्दों में दुरुपयोग हुए सरकारी धन तत्काल जमा कराने का कह दिया।
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किसी को नहीं बख्शा जाएगा
जिला पंचायत CEO जैन का कहना है कि मनरेगा (अब वीबी-जी राम-जी) में सरकारी धन के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या निष्फल खर्च को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योजना में पारदर्शिता और शासकीय राशि का सही उपयोग शासन-प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसी अनियमितताएं सामने आने पर रिकवरी के साथ आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
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