जहरीली शराब के साथ 3 आरोपियों को पकड़ने का किया दावा, जांच में लापरवाही बरती, गवाह भी मुकरे, कोर्ट ने कर दिया बरी, SI और ASI की विभागीय जांच का दिया आदेश

जहरीली शराब मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। जांच में गंभीर विसंगतियों और लापरवाही पर दो पुलिस विवेचकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

जहरीली शराब के साथ 3 आरोपियों को पकड़ने का किया दावा, जांच में लापरवाही बरती, गवाह भी मुकरे, कोर्ट ने कर दिया बरी, SI और ASI की विभागीय जांच का दिया आदेश
रतलाम के न्यायालय ने जहरीली शराब से जुड़े एक प्रकरण में संदेह का लाभ देते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । माणक चौक थाने के वर्ष 2021 के बहुचर्चित जहरीली शराब मामले में रतलाम न्यायालय ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की विवेचना में सामने आई गंभीर विसंगतियों पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने जांच में घोर लापरवाही के लिए तत्कालीन विवेचक SI सचिन डावर और ASI मुरली मकवाना के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के लिए निर्णय की प्रति रतलाम जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) को भेजने के आदेश दिए हैं। 

यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) रवीना चौधरी की अदालत ने सुनाया। अभियोजन के अनुसार, 9 सितंबर 2021 को माणक चौक थाने में पदस्थ तत्कालीन कार्यवाहक एएसआई मुरली मकवाना को मुखबिर से सूचना मिली थी। पुलिस ने त्रिवेणी रोड स्थित श्मशान के पास से नवनीत चौहान को 5 लीटर अवैध एवं जहरीली हाथभट्टी कच्ची महुआ शराब के साथ पकड़े जाने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में नवनीत ने उक्त शराब पवन उर्फ पप्पू राठौर और सोहनलाल उर्फ दादू से खरीदकर बेचने की बात बताई थी। इसी आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 49-क के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया था।

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कोर्ट में मुकर गए स्वतंत्र गवाह

विचारण के दौरान अभियोजन की कहानी को सबसे बड़ा झटका स्वतंत्र पंच साक्षियों के पक्षद्रोही होने से लगा। घटना और मेमोरेंडम से जुड़े सभी स्वतंत्र पंच गवाह न्यायालय में अपने पूर्व कथनों से मुकर गए। उन्होंने पुलिस द्वारा मौके पर किसी तरह की जप्ती अथवा कार्रवाई किए जाने से ही इनकार कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता रोहित शर्मा ने इन विरोधाभासों को न्यायालय के समक्ष प्रमुखता से रखा। सुनवाई के दौरान जप्ती और सैंपलिंग से जुड़े दस्तावेजों तथा न्यायालय में पेश किए गए माल को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए।

जप्त सैंपल पर घटना से पहले की तारीख

मामले में पेश किए गए आर्टिकल-3 के सैंपल बोतल पर जप्ती की तारीख 2 अगस्त 2021 अंकित थी, जबकि पुलिस की केस कहानी के मुताबिक घटना 9 सितंबर 2021 की थी। यानी कथित घटना से करीब एक माह पहले की तारीख सैंपल बोतल पर दर्ज थी। निर्णय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण विसंगति के संबंध में दोनों विवेचक न्यायालय के समक्ष कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके।

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सील से लेकर रोजनामचा तक, जांच पर उठे सवाल

अदालत के समक्ष जप्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं में भी विसंगतियां सामने आईं। जप्ती पत्रक पर नमूना सील अंकित नहीं थी। वहीं न्यायालय में पेश किए गए माल पर लगी सील और संबंधित दस्तावेजों के बीच भी समुचित मिलान नहीं पाया गया। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों के मौके पर रवाना होने और कार्रवाई के बाद थाने लौटने से संबंधित रोजनामचा सान्हा का वैध रिकॉर्ड भी अभियोजन द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इन परिस्थितियों ने अभियोजन की पूरी कार्रवाई और विवेचना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अतः संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने आरोपी नवनीत चौहान, पवन उर्फ पप्पू राठौर और सोहनलाल उर्फ दादू को मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 49-क के आरोप से बरी कर दिया।

27 पृष्ठीय फैसले में कोर्ट ने बताई पुलिस की जवाबदेही

न्यायालय ने अपने 27 पृष्ठीय निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा। इसी आधार पर तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ गुजरात विरुद्ध किशनभाई’ मामले में दिए गए न्यायदृष्टांत का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने माना कि पुलिस अथवा विवेचना एजेंसियों की लापरवाही के कारण यदि निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से कारावास और आपराधिक विचारण की पीड़ा झेलनी पड़े, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय किया जाना आवश्यक है।

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दो विवेचकों पर कार्रवाई के लिए कलेक्टर और DIG को पत्र

न्यायालय ने मध्यप्रदेश नियम तथा आदेश (आपराधिक) के नियम 241 के तहत तत्कालीन विवेचक एएसआई मुरली मकवाना और एसआई सचिन डावर की विवेचना में पाई गई घोर लापरवाही का संज्ञान लिया। अदालत ने निर्णय की प्रति के साथ जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) रतलाम तथा पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) को पत्र भेजकर दोनों अधिकारियों के विरुद्ध विधि अनुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से जहां तीनों आरोपियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं आपराधिक मामलों की विवेचना में बरती जाने वाली लापरवाही और साक्ष्यों की शुचिता को लेकर पुलिस महकमे की जवाबदेही पर भी न्यायालय ने गंभीर संदेश दिया है।

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