पिता बना जल्लाद ! हिंदू युवक से बात करती थी बेटी; इसलिए कर दिए 6 टुकड़े, सिर तालाब में फेंका और हाथ-पैर व धड़ ट्रेन में

ट्रेन के स्लीपर कोच में टिन के बक्से और बैग में मिले किशोरी के शव के टुकड़ों का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार हिंदू युवक से बातचीत से नाराज पिता ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के 6 टुकड़े कर शव ठिकाने लगाया था।

पिता बना जल्लाद ! हिंदू युवक से बात करती थी बेटी; इसलिए कर दिए 6 टुकड़े, सिर तालाब में फेंका और हाथ-पैर व धड़ ट्रेन में
लखनऊ के गोमतीनगर में एक पिता द्वारा अपनी 15 वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है।

बुआ-फूफा संग रची खौफनाक साजिश; ट्रेन के S1 कोच में मिला धड़, जांच में खुली ऑनर किलिंग की कहानी

एसीएन टाइम्स @ लखनऊ । उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर उस समय सनसनी फैल गई, जब छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के S1 कोच में एक टिन का बक्सा मिला। बक्सा खोलते ही अंदर एक किशोरी का धड़ पड़ा था, जबकि पास रखे बैग में कटे हुए हाथ और पैर मिले। शव का सिर गायब था। यह देख स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और पुलिसकर्मियों के रोंगटे खड़े हो गए।

पहले आशंका किसी गैंगवार या सीरियल किलिंग की जताई जा रही थी, लेकिन कुछ ही घंटों में जांच ने ऐसा सच उजागर किया जिसने इंसानियत को झकझोर दिया। यह किसी गैंग का नहीं, बल्कि एक पिता द्वारा अपनी ही बेटी की बेरहमी से की गई हत्या का मामला निकला। पुलिस के अनुसार कुशीनगर जिले के शिवरही (सेवरही) गांव निवासी ई-रिक्शा चालक बिग्गन उर्फ विगान अंसारी ने ही अपनी 15 वर्षीय बेटी शब्बो की हत्या कर शव के छह टुकड़े कर दिए। सिर तालाब में फेंक दिया और बाकी शरीर ट्रेन में छोड़कर फरार हो गया।

पत्नी और बेटों को रिश्तेदारी भेजा, फिर बुलाए बहन-बहनोई

पुलिस के मुताबिक, हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरी तैयारी के साथ की गई। आरोपी बिग्गन अंसारी ने पहले अपनी पत्नी और बेटों को रिश्तेदारी में भेज दिया। बाद में उसने अपनी बहन नूरजहां और बहनोई मुजीबुल्ला उर्फ मजहरुल्लाह को घर बुला लिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर शब्बो की हत्या कर दी। हत्या के बाद घर में ही धारदार हथियार से शव के छह टुकड़े किए गए। सिर को अलग कर गांव के पास तालाब में फेंक दिया ताकि पहचान न हो सके।

ई-रिक्शा से स्टेशन तक पहुंचाई लाश

हत्या के बाद शब्बो का धड़ टिन के बड़े बक्से में रखा। कटे हाथ और पैर कपड़ों और प्लास्टिक में लपेटकर अलग बैग में रखे। रात के अंधेरे में तीनों आरोपी ई-रिक्शा से करीब चार किलोमीटर दूर तमकुही रोड रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां उन्होंने छपरा-गोमतीनगर एक्सप्रेस के S1 स्लीपर कोच में बक्सा और बैग रख दिया। इसके बाद वे उसी ट्रेन के एसी कोच की तरफ गए और वहां से उतरकर फरार हो गए ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद ट्रेन में शव लखनऊ पहुंचा।

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CCTV फुटेज ने खोल दिया राज

गोमतीनगर स्टेशन पर शव मिलने के बाद जीआरपी ने जांच शुरू की। सिर गायब होने के कारण शव की पहचान करना मुश्किल था। पुलिस ने ट्रेन के पूरे रूट के CCTV फुटेज खंगाले। तमकुही रोड स्टेशन पर तीन लोग भारी बक्सा और बैग लेकर ट्रेन में चढ़ते दिखाई दिए। बाद में वे दूसरे कोच से उतरते भी नजर आए।

तकनीकी जांच, मोबाइल लोकेशन और फुटेज के आधार पर पुलिस कुशीनगर पहुंची। पूछताछ में पहले बिग्गन अंसारी लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर टूट गया और पूरी वारदात कबूल कर ली। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर तालाब से शब्बो का सिर भी बरामद कर लिया। हत्या में इस्तेमाल धारदार हथियार भी जब्त हो गया है।

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दूसरे समुदाय’ के लड़के से बात करती थी बेटी

पुलिस के अनुसार, शब्बो मोबाइल फोन पर एक हिंदू युवक से बातचीत करती थी। यही बात उसके पिता को नागवार गुजरती थी। घर में इसको लेकर हमेशा विवाद होता था। दो बड़ी बेटियां पहले ही घर छोड़कर जा चुकी थीं। इससे पिता समाज के तानों और बदनामी के डर में जी रहा था। उसे डर था कि कहीं शब्बो भी अपनी दो बड़ी बहनों की तरह घर छोड़ कर न चली जाए। इससे उसके भीतर गुस्सा और कट्टर सोच को बल मिला। धीरे-धीरे उसने अपनी बेटी को ही ‘समस्या’ मान लिया और हत्या की साजिश रच डाली।

पुलिस इसे ऑनर किलिंग का मामला मान रही है। पड़ोसियों के मुताबिक, बिग्गन ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था और अक्सर तनाव में दिखाई देता था। हत्या के दौरान घर में क्या हुआ, इसकी भनक किसी को नहीं लगी।

POCSO, हत्या और सबूत मिटाने की धाराएं लगाई गईं

पुलिस ने मुख्य आरोपी बिग्गन अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी बहन नूरजहां और बहनोई मुजीबुल्ला की भूमिका की भी जांच जारी है। आरोपियों पर हत्या, सबूत मिटाने और POCSO एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

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घर की तीसरी बेटी, गरीबी और तनाव के बीच पल रही थी जिंदगी

15 वर्षीय शब्बो कुशीनगर के शिवरही गांव की रहने वाली थी। वह परिवार की तीसरी बेटी थी। पिता बिग्गन ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाता था। परिवार आर्थिक संकट में डूबा था। बड़े बेटे का कैंसर का इलाज चल रहा था, जिसके चलते पुश्तैनी जमीन बिक चुकी थी।