विश्व परिवार दिवस पर विशेष : माता-पिता दुआ के दरख़्त है... अज़हर हाशमी

विश्व परिवार दिवस पर कवि अज़हर हाशमी की यह हिन्दी ग़ज़ल परिवार और संतान के जीवन में माता-पिता का महत्व बताती है। पढ़िए, गुनगुनाइए और आगे भी बढ़ाइए।

May 15, 2025 - 20:43
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विश्व परिवार दिवस पर विशेष : माता-पिता दुआ के दरख़्त है... अज़हर हाशमी
विश्व परिवार दिवस पर विशेष।

माता-पिता दुआ के दरख़्त है

अज़हर हाशमी 

माँ का नरम मिज़ाज, पिता थोड़े सख़्त हैं,

बच्चों के लिए दोनों दुआ के दरख़्त हैं।

बचपन के नज़ारे को देखकर ये जानिए,
बच्चों के लिए माता-पिता पाँव-हस्त हैं।

सिर पे कभी पिता के, कभी माँ की गोद में,
बच्चों के लिए माता-पिता ताज-तख़्त हैं।

संतान को ख़ुश देखते हैं तो ये समझलो,
माता-पिता सुकून से हैं और मस्त हैं।

जिस घर में हैं संतान से माँ-बाप दुखी तो-
संतान के 'नक्षत्र' समझ लेना 'अस्त' हैं।


(रचना कवि 'अज़हर हाशमी' के हिन्दी ग़ज़ल संग्रह 'मामला पानी का' से साभार।)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।