अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) : ‘श्रमिक जगत की चेतना, श्रमिक जगत की आस...’ -अज़हर हाशमी

अंतरराष्ट्रीय मजदूर (श्रमिक) दिवस (1 मई) पर कवि, चिंतक, व्यंग्यकार, लेखक और पूर्व प्राध्यापक अज़हर हाशमी द्वारा अभी-अभी रचे गए दोहे सलाम है सृजन और निर्माण के मूल आधार श्रमिकों के लिए जो आपको जरूर पसंद आएंगे।

May 1, 2025 - 12:54
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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) :  ‘श्रमिक जगत की चेतना, श्रमिक जगत की आस...’ -अज़हर हाशमी
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) पर विशेष।

श्रमिक जगत की चेतना

1

मज़दूरों की वजह से, उद्योगों में प्राण।

वहां श्रमिक ही नींव है, जहां भी है निर्माण।।

2

कुटिया हो अथवा किला, श्रमिक मूल आधार।

श्रमिक बिना निर्माण का, होता नहीं विचार।।

3

राम सेतु निर्माण में, था जन का कल्याण।

श्रमिक बने वानर सभी, तभी हुआ निर्माण।।

4

हल-हथौड़ा और क़लम, तीनों श्रम के वस्त्र।

पहले दो तो अस्त्र हैं, और तीसरा शस्त्र।।

5

श्रमिक जगत की चेतना, श्रमिक जगत की आस।

जगत अगर है देह तो, श्रमिक देह की सांस।। 

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अज़हर हाशमी

(कवि, चिंतक, समालोचक, ज्योतिषी, लेखक)

Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।