एक और खुलासा ! मेहरा नर्सिंग होम और रतलाम हॉस्पिटल सहित तीन और संस्थान भाजपा पार्षद के निशाने पर, सभी आवासीय भूखंडों पर संचालित होने का आरोप

रतलाम में भाजपा पार्षद हितेश कामरेड ने शाह नर्सिंग होम के बाद रतलाम हॉस्पिटल, मेहरा नर्सिंग होम और महेश्वरी नर्सिंग होम के खिलाफ शिकायत की है। आवासीय भूखंडों पर संचालन, नामांतरण और नियम उल्लंघन की जांच तथा एफआईआर की मांग की गई है।

एक और खुलासा ! मेहरा नर्सिंग होम और रतलाम हॉस्पिटल सहित तीन और संस्थान भाजपा पार्षद के निशाने पर, सभी आवासीय भूखंडों पर संचालित होने का आरोप
भाजपा पार्षद हितेश कामरेड ने रतलाम के तीन और अस्पतालों के नियम विरुद्ध संचालन का मुद्दा उठाया।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर में आवासीय भूखंडों पर संचालित अस्पतालों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शाह नर्सिंग होम के बाद भाजपा पार्षद हितेश कामरेड ने अब मेहरा नर्सिंग होम, रतलाम हॉस्पिटल और महेश्वरी नर्सिंग होम को भी निशाने पर लिया है। पार्षद ने नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत देकर इन अस्पतालों के संचालन, नामांतरण और भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

पार्षद द्वारा सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नगर सुधार न्यास (अब नगर निगम) की आवासीय योजनाओं के भूखंडों पर वर्षों से अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूखंड मूल रूप से आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित किए गए थे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नियमों के विपरीत इन भूखंडों का नामांतरण और व्यावसायिक उपयोग किया गया, जिससे नगर निगम को राजस्व हानि भी हुई है।

इन अस्पतालों पर उठाए सवाल

आयुक्त को दिए गए आवेदन में पार्षद हितेश कामरेड ने मुख्य रूप से तीन अस्पतालों का उल्लेख किया है। शिकायत में कहा गया है कि इन संस्थानों का संचालन डेढ़ दशक से आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधि के रूप में किया जा रहा है।

  • रतलाम हॉस्पिटल : योजना क्रमांक 20, शास्त्रीनगर स्थित आवासीय भूखंड पर संचालित।
  • महेश्वरी नर्सिंग होम : योजना क्रमांक 44, काटजू नगर स्थित आवासीय भूखंड पर संचालित।
  • मेहरा नर्सिंग होम : योजना क्रमांक 44, काटजू नगर स्थित आवासीय भूखंड पर।

नामांतरण प्रक्रिया पर भी उठाया सवाल

पार्षद ने आवेदन में दावा किया है कि संबंधित भूखंडों का नामांतरण नियमों के विपरीत किया गया। उनका कहना है कि यदि किसी भूखंड का स्वरूप परिवर्तित किया जाता है तो सक्षम स्तर से अनुमति और स्वीकृति आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो अब तक संबंधित भूखंडधारियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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नगर निगम अधिकारियों की भूमिका पर संदेह

शिकायत में केवल अस्पताल संचालकों ही नहीं बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की गई है, जिन्होंने कथित रूप से नियमों के विपरीत नामांतरण अथवा अन्य प्रक्रियाओं को मंजूरी दी। पार्षद ने कहा है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

एफआईआर दर्ज करने की मांग

आवेदन में पार्षद हितेश कामरेड ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित प्रकरणों की जांच कर एफआईआर दर्ज कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की है। साथ ही भूखंडों को उनके मूल आवंटन उद्देश्य के अनुरूप उपयोग में लाने और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन पर आवंटन निरस्त करने की मांग की गई है।

शाह नर्सिंग होम के बाद बढ़ा मामला

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही भाजपा पार्षद हितेश कामरेड ने शाह नर्सिंग होम के संचालन को लेकर भी शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। अब लगातार तीन और अस्पतालों के नाम सामने आने के बाद शहर में अन्य निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की भूमि स्थिति एवं अनुमतियों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्षद की शिकायतों से निजी अस्पतालों के संचालकों में हड़कंप की स्थिति है। कई तो पार्षद की मंशा पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कोई भी कार्रवाई दुराग्रह से ग्रसित नहीं होकर समान लक्ष्य एवं उद्देश्य से होनी चाहिए।

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नगर निगम और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। यदि शिकायतों की जांच आगे बढ़ती है तो शहर के अन्य अस्पतालों और संस्थानों के भू-उपयोग एवं अनुमति संबंधी मामलों की भी पड़ताल हो सकती है।