फर्जी फर्म और कूटरचित कोटेशन देकर लिया बैंक से ₹17 लाख का लोन, जाकिर हुसैन को 5 से 7 वर्ष तक की सजा, 16 हजार अर्थदंड भी

रतलाम के एक न्यायालय ने धोखाधड़ी कर बैंक से ₹17 लाख का लोन लेने के मामले में जाकिर हुसैन नामक एक व्यक्ति को अलग-अलग धाराओं में 5 से 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास एवं ₹16 हजार अर्थदंड से दंडित किया।

फर्जी फर्म और कूटरचित कोटेशन देकर लिया बैंक से ₹17 लाख का लोन, जाकिर हुसैन को 5 से 7 वर्ष तक की सजा, 16 हजार अर्थदंड भी
रतलाम के एक न्यायालय ने जाकिर हुसैन नामक व्यक्ति को फर्जी डॉक्यूमेंट और कोटेशन के आधार पर लोन लेने के मामले में सजा सुनाई है।

नक्की ट्रेडर्स के नाम से अस्तित्वहीन फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दोना-पत्तल निर्माण इकाई के लिए लिया था कर्ज

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव के न्यायालय ने मध्यप्रदेश शासन विरुद्ध जाकिर हुसैन एवं अन्य प्रकरण में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त जाकिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120बी के अपराधों में 5 से 7 वर्ष तक की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर 16 हजार रुपए का अर्थदंड भी किया गया है। प्रकरण में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने प्रभावी पैरवी की।

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अभियोजन के अनुसार आरोपी जाकिर हुसैन पिता मोहम्मद हुसैन (55), निवासी 63 पी.एन.टी. कॉलोनी, रतलाम ने अपनी पुत्री एवं सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत दोना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के नाम पर बैंक से ऋण प्राप्त करने की योजना बनाई थी। आरोपियों ने जिला उद्योग केन्द्र, रतलाम के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। बैंक द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और निरीक्षण के बाद ₹25 लाख की मांग के स्थान पर ₹17 लाख का ऋण स्वीकृत किया गया। मशीनरी खरीदने के नाम पर “निक्की ट्रेडर्स, इंडस्ट्रियल एरिया, साँवेर रोड, इंदौर” के नाम से कोटेशन प्रस्तुत किया गया।

जांच के दौरान सामने आया कि जिस निक्की ट्रेडर्स के नाम से मशीनरी का कोटेशन प्रस्तुत किया गया था, उस नाम की फर्म बताए गए पते पर अस्तित्व में ही नहीं थी। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से प्राप्त शिकायत की जांच के दौरान औद्योगिक क्षेत्र, साँवेर रोड, इंदौर में फर्म का भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन में संबंधित पते पर निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म नहीं मिली। वहां दूसरी कंपनी का संचालन पाया गया और आसपास के क्षेत्र में भी उक्त नाम की कोई फर्म अस्तित्व में नहीं पाई गई। इस संबंध में सत्यापन पंचनामा तैयार किया गया।

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निक्की ट्रेडर्स के नाम से खोले खाते में पहुंची ₹17 लाख का लोन

जांच में यह भी सामने आया कि ऋण की राशि प्राप्त करने के लिए निक्की ट्रेडर्स के नाम से प्रस्तुत दस्तावेजों एवं कोटेशन का उपयोग किया गया तथा ऋण की राशि वास्तविक रूप से मशीनरी खरीदने के लिए उपयोग नहीं की गई। ₹17 लाख की ऋण राशि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, रेलवे कॉलोनी शाखा, रतलाम में निक्की ट्रेडर्स के नाम से खोले गए खाते में जमा कराई गई। उक्त खाता आरोपी जाकिर हुसैन द्वारा स्वयं को नक्की ट्रेडर्स का प्रोपराइटर दर्शाते हुए संचालित कराया गया था।

पुलिस ने जब्त किए कोटेशन, बैंक दस्तावेज और चेक

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी जाकिर हुसैन से निक्की ट्रेडर्स के नाम से तैयार कोटेशन, बैंक संबंधी दस्तावेज, चेक एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त दस्तावेजों में निक्की ट्रेडर्स के खाते से संबंधित चेक क्रमांक 22301 से 22305 तक कुल पांच चेक तथा कोटेशन के प्रारूप सहित अनेक दस्तावेज प्राप्त हुए। आरोपी के नमूना हस्ताक्षर भी जांच के लिए प्राप्त किए गए।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी जाकिर हुसैन ने श्रम विभाग में निक्की ट्रेडर्स नाम से फर्म का पंजीयन कराया था और उसका पता 63, पी.एन.टी. कॉलोनी, रतलाम दर्शाया गया था। न्यायालय ने इस तथ्य को भी ऋण प्राप्त करने की समग्र परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना।

ऋण संबंधी दस्तावेजों में जाकिर हुसैन और ऐहतेशाम बानो दोनों के नाम, फोटो एवं हस्ताक्षर पाए गए। न्यायालय ने बैंक दस्तावेजों एवं साक्ष्य के आधार पर स्पष्ट माना कि ₹17 लाख का ऋण केवल ऐहतेशाम बानो के नाम पर नहीं, बल्कि उसके साथ जाकिर हुसैन के नाम से भी स्वीकृत हुआ था।

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इंदौर में मौके पर नहीं मिली निक्की ट्रेडर्स

जांच अधिकारी ने 15 जनवरी 2021 को औद्योगिक क्षेत्र, साँवेर रोड, इंदौर पहुंचकर मौके का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान ई-71, सेक्टर-सी-6 नामक बताए गए पते का अस्तित्व नहीं मिला। उक्त स्थान पर अन्य कंपनी का संचालन पाया गया। पूरे क्षेत्र में भी निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म नहीं मिली। इस संबंध में सत्यापन पंचनामा तैयार किया गया।

इसी जांच के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा से प्राप्त ऋण संबंधी मूल दस्तावेज, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त खाता एवं बैंक दस्तावेज, निक्की ट्रेडर्स के नाम के दस्तावेज, ऋण आवेदन, स्थापना प्रमाण पत्र, कोटेशन, चेक तथा अन्य संबंधित अभिलेख जब्त किए गए। अभियोजन ने बैंक अधिकारियों, जांच अधिकारी तथा अन्य संबंधित गवाहों के माध्यम से इन दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष प्रमाणित कराया।

बैंक को धोखा देकर लोन लेने की अभियोजन कहानी प्रमाणित

न्यायालय ने संपूर्ण मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोपी जाकिर हुसैन ने अपनी फरार पुत्री सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर दौना पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के उद्देश्य से ऋण आवेदन प्रस्तुत किया, ₹17 लाख का ऋण स्वीकृत कराया, नक्की ट्रेडर्स के नाम से कूटरचित कोटेशन प्रस्तुत किया तथा ऋण राशि को मशीनरी खरीदने के वास्तविक उद्देश्य के विपरीत अन्य प्रयोजन में उपयोग किया।

न्यायालय ने यह भी माना कि नक्की ट्रेडर्स के नाम से प्रस्तुत कोटेशन के आधार पर बैंक को धोखा देकर ₹17 लाख की राशि प्राप्त की गई तथा राशि का उपयोग वास्तविक मशीनरी खरीदने के लिए नहीं किया गया। इन परिस्थितियों को न्यायालय ने धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120 बी भा.दं.सं. के आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने वाला पाया।

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न्यायालय ने बताया आपराधिक षड्यंत्र

द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने अपने निष्कर्ष में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने बैंक से ₹17 लाख की ऋण राशि प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी की, नक्की ट्रेडर्स के नाम से कूटरचित कोटेशन तैयार किया और उसका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग किया तथा फरार सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ आपराधिक षड्यंत्र किया।

परिणामस्वरूप जाकिर हुसैन को सभी आरोपों में दोषसिद्ध किया गया। न्यायालय ने आरोपी जाकिर हुसैन को धारा 420 भा.दं.सं. में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड, धारा 467 में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹5,000 अर्थदंड, धारा 468 में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड, धारा 471 में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹5,000 अर्थदंड तथा धारा 120 बी में 5 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड से दंडित किया है। सभी मूल कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस प्रकार आरोपी पर कुल ₹16,000 का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। 

दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियोजन ने स्थापित की पूरी शृंखला

प्रकरण में खासबात यह रही कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत बैंक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से ऋण स्वीकृति, बैंक खाता, नक्की ट्रेडर्स के दस्तावेज, मौके का सत्यापन, जब्ती कार्यवाही तथा आरोपी से संबंधित दस्तावेजों की श्रृंखला न्यायालय के समक्ष स्थापित की गई।

अभियोजन ने विशेष रूप से यह स्थापित किया कि आरोपी का अपराध केवल ऋण प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि ऋण प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करना, उनका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करना, काल्पनिक एवं अस्तित्वहीन फर्म के नाम का उपयोग करना तथा ऋण राशि को निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग करना अपराध की समग्र शृंखला का हिस्सा था। दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक अधिकारियों के कथन, जांच अधिकारी की साक्ष्य तथा घटनाक्रम से संबंधित परिस्थितियों की समग्र शृंखला के आधार पर अभियोजन आरोपी जाकिर हुसैन के विरुद्ध आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा।

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