नया घर – नया परिवार ! शिशुगृह में पल रहे ‘वेद’ को मिला ‘यशोदा’ और ‘नंदबाबा’ का प्यार, नए माता-पिता को सौंपने से पहले कलेक्टर ने किया दुलार
रतलाम में दत्तक ग्रहण के माध्यम से बालक वेद को नया परिवार मिला। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने बालक को दुलारकर दत्तक माता-पिता के सुपुर्द किया।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिस नन्हे बच्चे के लिए अब तक शिशु गृह ही घर और वहां के सेवादार ही उसका परिवार था, उसे सोमवार को अपना परिवार, अपना आंगन और जीवनभर का अपनापन मिल गया। नए माता-पिता को सौंपने से पहले जिले के मुखिया कलेक्टर अजय कटेसरिया ने बालक वेद (परिवर्तित नाम) को अपनी गोद में उठाकर दुलार किया। दोनों को देखकर लग ही नहीं रहा था कि वे एक-दूसरे से अनजान हैं।
कलेक्टर कार्यालय में हुआ यह पल औपचारिकता से कहीं अधिक भावुक था। दत्तक ग्रहण संबंधी आदेश जारी होने के बाद कुछ देर के लिए कार्यालय का माहौल भी बदल गया। फाइलों और सरकारी कामकाज के बीच एक नन्हे बच्चे की मुस्कान और उसके नए माता-पिता की खुशी सबसे खास नजर आई। यह सिर्फ एक बच्चे को परिवार सौंपने का अवसर नहीं था, बल्कि उसे जिंदगीभर के रिश्तों से जोड़ने का क्षण था। कलेक्टर कटेसरिया ने बालक को वात्सल्य से दुलारा और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देते हुए उसके नए नए माता-पिता को सौंप दिया जो ‘यशोदा’ और ‘नंदबाबा’ के रूप में उसके जीवन में आए हैं।
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शिशु गृह से परिवार की गोद तक
बालक वेद अब ऐसे परिवार का हिस्सा होगा, जहां उसके लिए प्यार होगा, सुरक्षा होगी और भविष्य के सपने होंगे। दत्तक माता-पिता ने उसे पूरे स्नेह और जिम्मेदारी के साथ पालने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि वे उसे बेहतर शिक्षा, अच्छे संस्कार और सुरक्षित वातावरण देने का हरसंभव प्रयास करेंगे।
दत्तक ग्रहण की यह प्रक्रिया बालक के जीवन में एक नई शुरुआत है। अब उसका बचपन शिशु गृह की सीमाओं से निकलकर एक परिवार की गर्माहट में बीतेगा। उसके लिए मां-पिता का रिश्ता होगा। घर होगा। अपनेपन की वह अनुभूति होगी, जिसकी जरूरत हर बच्चे को होती है।
कलेक्टर बोले- परिवार का प्यार हर बच्चे का अधिकार
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने कहा कि प्रत्येक बालक को परिवार का प्यार, संरक्षण और सुरक्षित वातावरण मिलना उसका अधिकार है। दत्तक ग्रहण को उन्होंने केवल कानूनी प्रक्रिया न मानते हुए इसे किसी बच्चे को परिवार और जीवनभर का स्नेह देने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के साथ बच्चों को सुरक्षित और प्रेमपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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