चुल्लू में तालाब का पानी लेकर पी गए कलेक्टर कटेसरिया, बोले- ‘स्वाद तो हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है’

शिवगढ़ वन क्षेत्र में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने चेकडैम का पानी चुल्लू में भरकर पिया और स्वाद को हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा बताया। 6 किलोमीटर पैदल चलकर 859 हेक्टेयर में विकसित हो रहे सघन वन और जल संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया।

चुल्लू में तालाब का पानी लेकर पी गए कलेक्टर कटेसरिया, बोले- ‘स्वाद तो हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है’
आज से पहले रतलाम के किसी भी कलेक्टर को तालाब से इस तरह पानी पीते नहीं देखा।

शिवगढ़ में 6 किलोमीटर पैदल घूमकर देखा सघन वन और जल संरक्षण का काम

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आमतौर पर सरकारी अफसरों के दौरों में बोतलबंद पानी को प्राथमिकता देते हुए देखा जाता है, लेकिन रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया का एक अलग ही अंदाज शिवगढ़ वन परिक्षेत्र के भ्रमण के दौरान देखने को मिला। जल संरक्षण के लिए बनाए गए चेकडैम में जमा स्वच्छ पानी देखकर कलेक्टर ने न तो बोतलबंद पानी मंगवाया और न ही पानी की गुणवत्ता पर औपचारिक टिप्पणी तक सीमित रहे। उन्होंने ठेठ आम आदमी की तरह चुल्लू में पानी भरा और खुद पीकर उसका स्वाद परखा। पानी पीने के बाद उन्होंने कहा- “इस पानी का स्वाद हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है।”

कलेक्टर के इस सहज अंदाज ने पूरे भ्रमण को खास बना दिया। उपलब्ध जानकारी के आधार पर रतलाम में संभवतः यह पहला अवसर माना जा सकता है, जब किसी कलेक्टर ने वन क्षेत्र में संरक्षित तालाब/चेकडैम के पानी को इस तरह सीधे चुल्लू में भरकर पीया हो। हालांकि, इसे आधिकारिक रूप से पहला उदाहरण कहने के लिए पूर्व के रिकॉर्ड की पुष्टि आवश्यक होगी।

कलेक्टर अजय कटेसरिया शुक्रवार को सैलाना प्रवास के दौरान शिवगढ़ वन परिक्षेत्र पहुंचे थे। यहां उन्होंने हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किए जा रहे सघन वन और जल संरक्षण कार्यों का करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर निरीक्षण किया। उन्होंने पौधरोपण, पौधों के रखरखाव, जल संरक्षण संरचनाओं तथा इन गतिविधियों से स्थानीय ग्रामीणों को मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी ली।

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चेकडैम का पानी पिया, जल संरक्षण की सराहना की

वन क्षेत्र में भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने विभिन्न चेकडैम एवं जल संरचनाओं का निरीक्षण किया। इनमें से एक चेकडैम में एकत्रित स्वच्छ पानी देखकर उन्होंने स्वयं पानी चखा। पानी पीने के बाद उन्होंने उसके स्वाद की तुलना हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर से की। उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्षा जल को संरक्षित कर उसका उपयोग करना पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। जल संरचनाओं की निरंतर देखरेख और उनके बेहतर उपयोग पर भी उन्होंने जोर दिया।

859 हेक्टेयर में विकसित हो रहा सघन वन

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में लगभग 859 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वन विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 2 लाख पौधों का रोपण और उनका रखरखाव किया गया है।

इसके साथ ही बीजारोपण के माध्यम से 3 लाख से अधिक पौधों की नर्सरी तैयार की गई है। नर्सरी के काम में स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा गया है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीय महिलाओं की सहभागिता है, जिससे उन्हें गांव में ही रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। परियोजना के अगले चरण में एक लाख नए पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है। आगामी वर्षों में कुल 5 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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56 चेकडैम, 45 करोड़ लीटर वर्षाजल संरक्षण का प्रयास

शिवगढ़ वन क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए विभिन्न जल संरचनाएं विकसित की गई हैं। परियोजना के अंतर्गत लगभग 56 चेकडैम बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से करीब 45 करोड़ लीटर वर्षाजल के संचयन का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अलावा लगभग 2 करोड़ लीटर क्षमता वाले तीन सरोवरों के माध्यम से भी पानी संग्रहित किया जा रहा है। इन जल संरचनाओं से उपलब्ध पानी का उपयोग करीब 75 रेन गन तथा लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से किया जा रहा है।

14 गांवों तक पहुंचेगा परियोजना का लाभ

परियोजना क्षेत्र के आसपास की 3 ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को इन गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण और वन विकास के साथ-साथ बिगड़े वनों के सुधार, वन सुरक्षा तथा स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

ग्राम वन समितियों के सहयोग से प्राकृतिक संपदा के विकास, जल प्रबंधन, पौधरोपण, वनों के सुधार और सुरक्षा से संबंधित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों से स्थानीय आबादी को पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर लाभ मिलने की संभावना है।

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अतिक्रमण की स्थिति भी देखी, सुरक्षा के निर्देश

भ्रमण के दौरान कलेक्टर कटेसरिया ने वन क्षेत्र में किए जा रहे अतिक्रमण की स्थिति को भी संज्ञान में लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से वन क्षेत्र की सुरक्षा एवं संरक्षण के संबंध में जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विकसित किए जा रहे वन क्षेत्र की सुरक्षा, पौधों का संरक्षण और जल संरचनाओं की लगातार देखरेख बेहद जरूरी है। इन प्रयासों को निरंतर जारी रखा जाए, ताकि आने वाले वर्षों में शिवगढ़ क्षेत्र हरित विकास और जल संरक्षण के बेहतर मॉडल के रूप में विकसित हो सके।

कलेक्टर ने लगाया चंपा का पौधा

भ्रमण के दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने वन क्षेत्र में चंपा का पौधा भी लगाया। उन्होंने पौधरोपण के साथ उसके संरक्षण और नियमित देखभाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसे संरक्षित कर वृक्ष के रूप में विकसित करना है।

स्थानीय समुदाय को साथ लेकर आगे बढ़ रही परियोजना

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के जिला समन्वयक नीलेश शुक्ला ने कलेक्टर को संस्था की गतिविधियों और शिवगढ़ परियोजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना में स्थानीय ग्राम वन समितियों और ग्रामीण समुदाय को साथ लेकर वन विकास, जल संरक्षण, पौधरोपण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

कलेक्टर कटेसरिया ने संस्था द्वारा किए जा रहे पौधरोपण, जल संरक्षण और स्थानीय सहभागिता के कार्यों का अवलोकन किया तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। भ्रमण के दौरान सैलाना एसडीएम कृष्णपाल सिंह बघेल, तहसीलदार सैलाना मनीष जैन सहित संबंधित अधिकारी एवं हार्टफुलनेस संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।