64 साल से सरकारी जमीन पर सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल का कब्जा ! सर्वे नंबर 318 को लेकर प्रशासन से जवाब मांग रहे रहवासी

रतलाम में सर्वे नंबर 318 की 2.190 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के संचालन को लेकर रहवासी समिति ने सवाल उठाए हैं। निर्माण अनुमति, टैक्स छूट, पार्किंग और फायर सेफ्टी की संयुक्त जांच की मांग की गई।

64 साल से सरकारी जमीन पर सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल का कब्जा ! सर्वे नंबर 318 को लेकर प्रशासन से जवाब मांग रहे रहवासी
रतलाम का सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल एक बार फिर आरोपों में घिर गया है।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । शहर की बेशकीमती जमीन से जुड़ा एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में है। गुलमोहर कॉलोनी क्षेत्र स्थित सर्वे नंबर 318 की 2.190 हेक्टेयर भूमि को लेकर रहवासी समिति ने जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। समिति का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि आज भी शासकीय दर्ज है, जबकि इसी जमीन पर अवैध रूप से वर्ष 1962 से सेंट जोसेफ कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल संचालित हो रहा है।

गुलमोहर कॉलोनी रहवासी कल्याण समिति के सचिव प्रमोद जैन ने पत्रकार वार्ता में दस्तावेजों का हवाला देते हुए स्कूल प्रबंधन के साथ ही जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार वार्ता में समिति अध्यक्ष भी मौजूद थे। पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस मामले में अब तक भूमि की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट और निष्पक्ष भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया है। समिति ने प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराने की मांग की है।

शपथ पत्र में स्कूल संचालन का उल्लेख

रहवासी समिति के अनुसार, संस्था की ओर से के. यू. मैरी द्वारा दिए गए शपथ-पत्र में सर्वे क्रमांक 318 की भूमि पर स्कूल भवन निर्मित होने तथा वर्ष 1962 से सेंट जोसेफ कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संचालन का उल्लेख है। स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त होने की बात भी इसमें है। रहवासी समिति का मुख्य सवाल यह है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित भूमि शासकीय दर्ज है, तो उस पर दशकों से संचालित संस्थान के भूमि अधिकार और निर्माण की वैधानिकता की स्थिति क्या है? समिति ने इस पूरे मामले की दस्तावेजी जांच की मांग की है।

निर्माण अनुमति पर भी उठे सवाल

समिति द्वारा टीएनसीपी और नगर निगम से जारी निर्माण संबंधी अनुमतियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उसका आरोप है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद निर्माण संबंधी अनुमतियां जारी की गईं। पुरानी इमारत को डिसमेंटल किए बिना और मौके का पर्याप्त भौतिक सत्यापन किए बिना नई निर्माण अनुमति दी गई। समिति ने स्कूल परिसर में कथित रूप से बिना नगर निगम की अनुमति बनाए गए पैवेलियन की भी जांच कराने की मांग की है।

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पार्किंग से लेकर बच्चों की सुरक्षा तक का मुद्दा

मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रहवासियों ने स्कूल के आसपास रोजाना बनने वाली यातायात समस्या को भी गंभीर मुद्दा बताया है। समिति के मुताबिक स्कूल परिसर में पर्याप्त जगह होने के बावजूद विद्यार्थियों को लाने-ले जाने वाले वाहनों को परिसर में प्रवेश नहीं मिलने से चार पहिया वाहन और ऑटो सड़क पर खड़े होते हैं। इससे पीक टाइम में यातायात प्रभावित होने के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

फायर सेफ्टी और सुविधाओं की जांच की मांग

समिति ने स्कूल में फायर एनओसी, आपदा सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकास, क्लासरूम क्षमता और पार्किंग व्यवस्था की भी जांच की मांग की है। उसका कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा मानकों का मौके पर परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्कूल को नगर निगम की ओर से कथित टैक्स छूट दिए जाने के आधार पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने पूछा कि शैक्षणिक संस्था को कर संबंधी छूट किस नियम और प्रावधान के तहत दी गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

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संयुक्त जांच समिति की मांग उठी

रहवासी समिति ने कलेक्टर की अध्यक्षता में राजस्व, नजूल, नगर निगम, टीएनसीपी, शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की है। समिति के अनुसार जांच में दो स्तरों पर सत्यापन होना चाहिए- पहला, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड, फाइल, नक्शे, नोटशीट और डिजिटल दस्तावेजों का परीक्षण तथा दूसरा, मौके पर भूमि की वास्तविक स्थिति, निर्माण और उपयोग का भौतिक सत्यापन। शिकायतकर्ताओं ने जांच पूरी होने तक संबंधित विभागों के मूल दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग भी की है, ताकि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे

रहवासी समिति ने कहा कि यदि जांच में शासकीय भूमि के उपयोग, निर्माण अनुमति अथवा अन्य नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। समिति ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए और क्षेत्र की यातायात समस्या का समाधान नहीं किया, तो रहवासी जनहित में आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

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